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  • शुभ समय की वापसी 14 अप्रैल से विवाह समेत मांगलिक कार्य शुरू, 17 मई से फिर लगेगा ब्रेक

    शुभ समय की वापसी 14 अप्रैल से विवाह समेत मांगलिक कार्य शुरू, 17 मई से फिर लगेगा ब्रेक


    उज्जैन । ज्योतिषीय गणना के अनुसार 14 अप्रैल से एक बार फिर मांगलिक कार्यों का शुभ समय शुरू होने जा रहा है क्योंकि इस दिन खरमास की समाप्ति हो जाएगी और सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे यह खगोलीय परिवर्तन प्रातः 9 बजकर 52 मिनट पर होगा जिसे मेष संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है

    जैसे ही सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे वैसे ही विवाह गृह प्रवेश यज्ञोपवीत और अन्य मांगलिक कार्यों पर लगी रोक समाप्त हो जाएगी इस अवधि को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि सूर्य को नवग्रहों का राजा कहा जाता है और मेष राशि में उनका प्रवेश उन्हें उच्च स्थिति में स्थापित करता है

    पंचांग के अनुसार सूर्य ने 14 मार्च की रात 11 बजकर 59 मिनट पर कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश किया था जिसके बाद लगभग एक माह तक खरमास के कारण सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य स्थगित रहे अब यह अवधि समाप्त होने जा रही है जिससे एक बार फिर विवाह और अन्य संस्कारिक आयोजन शुरू हो सकेंगे

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार 14 अप्रैल के बाद मांगलिक कार्यों की शुरुआत के साथ ही आने वाले व्रत और त्योहारों का भी विशेष महत्व रहेगा खासकर अक्षय तृतीया जो 20 अप्रैल को है इसे बिना मुहूर्त के भी विवाह और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है इस दिन बड़ी संख्या में शादियां और अन्य आयोजन होने की संभावना है

    पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार मेष संक्रांति के बाद का समय अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है क्योंकि इस दौरान सूर्य अपनी उच्च स्थिति में रहते हैं और सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं इससे विवाह संस्कार गृह प्रवेश और धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष शुभता मानी जाती है

    हालांकि यह शुभ अवधि लंबे समय तक नहीं रहेगी क्योंकि 17 मई के बाद फिर से कुछ ग्रह स्थितियों के कारण मांगलिक कार्यों पर अस्थायी विराम लग सकता है ऐसे में लोग इस अवधि का अधिकतम उपयोग विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए कर रहे हैं

    कुल मिलाकर 14 अप्रैल से शुरू हो रही यह अवधि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है और पूरे देश में शादी विवाह और मांगलिक आयोजनों की रौनक एक बार फिर लौटने की उम्मीद है

  • गजकेसरी योग का बड़ा असर अक्षय तृतीया पर मेष से धनु तक धन सफलता और समृद्धि के खुलेंगे द्वार

    गजकेसरी योग का बड़ा असर अक्षय तृतीया पर मेष से धनु तक धन सफलता और समृद्धि के खुलेंगे द्वार


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पावन पर्व अक्षय तृतीया इस वर्ष 19 अप्रैल को मनाया जाएगा और इस बार इसका महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन अत्यंत शुभ माने जाने वाला गजकेसरी योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को राजयोग के समान प्रभावशाली माना जाता है जो व्यक्ति के जीवन में धन समृद्धि और सफलता के नए द्वार खोल सकता है।

    ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा और गुरु एक दूसरे से केंद्र स्थान में होते हैं तब यह विशेष योग बनता है। इस बार यह संयोग अक्षय तृतीया के दिन बन रहा है जिसे बेहद शुभ संकेत माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्य और निवेश अक्षय फल देते हैं यानी उनका लाभ लंबे समय तक बना रहता है। यही कारण है कि इस दिन सोना खरीदने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है और इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    इस बार गजकेसरी योग का सबसे ज्यादा सकारात्मक प्रभाव मेष तुला और धनु राशि के जातकों पर देखने को मिल सकता है। मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है। लंबे समय से रुके हुए कामों में तेजी आ सकती है और नए कार्यों की शुरुआत के लिए यह बेहद अनुकूल समय है। व्यापार से जुड़े लोगों को अचानक धन लाभ हो सकता है और मेहनत का पूरा फल मिलने की संभावना है।

    तुला राशि के जातकों के लिए यह योग सुख सुविधाओं और मान सम्मान में वृद्धि का संकेत दे रहा है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और जो लोग बदलाव की सोच रहे हैं उनके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

    वहीं धनु राशि के जातकों पर इस योग का प्रभाव सबसे अधिक देखा जा सकता है क्योंकि गुरु इस राशि के स्वामी माने जाते हैं। इस दौरान बौद्धिक क्षमता में वृद्धि हो सकती है और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। आर्थिक दृष्टि से यह समय बेहद लाभकारी रहने की संभावना है और कर्ज से मुक्ति मिलने के संकेत भी मिल रहे हैं।

    ज्योतिष शास्त्र के प्राचीन ग्रंथ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में गजकेसरी योग का विस्तार से वर्णन किया गया है जिसमें बताया गया है कि यह योग व्यक्ति को हाथी जैसी शक्ति और सिंह जैसा साहस प्रदान करता है। वहीं फल दीपिका में भी उल्लेख मिलता है कि इस योग में किए गए कार्य लंबे समय तक शुभ फल देते हैं।

    कुल मिलाकर इस वर्ष की अक्षय तृतीया केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत खास मानी जा रही है। ऐसे में इस शुभ अवसर पर सही निर्णय और सकारात्मक प्रयास जीवन में नई दिशा दे सकते हैं और आने वाले समय को समृद्ध बना सकते हैं।

  • अक्षय तृतीया से पहले सख्ती: बाल विवाह रोकने सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते तैनात

    अक्षय तृतीया से पहले सख्ती: बाल विवाह रोकने सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते तैनात


    भोपाल । भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग ने अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले संभावित बाल विवाहों को रोकने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है सचिव श्रीमती जी वी रश्मि ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश के हर जिले में कंट्रोल रूम और उड़न दस्तों का गठन किया जाए ताकि किसी भी बाल विवाह की सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके

    राज्य में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत लगातार प्रयास किए जा रहे हैं जिससे बाल विवाह की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त किया जा सके राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में इस दिशा में सुधार हुआ है लेकिन कुछ जिलों में अभी भी यह समस्या बनी हुई है

    इस वर्ष अक्षय तृतीया 20 अप्रैल 2026 को है और इस दिन बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित होते हैं ऐसे आयोजनों में बाल विवाह होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं

    निर्देशों के अनुसार स्कूल और कॉलेजों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जाएगा वहीं पंचायत और वार्ड स्तर पर जनप्रतिनिधियों द्वारा शपथ ली जाएगी कि उनके क्षेत्र में बाल विवाह नहीं होने दिया जाएगा

    गांवों में स्व सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा बैठकें आयोजित कर परिवारों को जागरूक किया जाएगा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आशा कार्यकर्ता और पंचायत सचिव मिलकर 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार करेंगे और ऐसे परिवारों पर विशेष नजर रखी जाएगी जहां बाल विवाह की आशंका है

    बाल विवाह रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 112 का व्यापक प्रचार किया जाएगा ताकि लोग किसी भी संदिग्ध विवाह की जानकारी तुरंत प्रशासन को दे सकें इसके अलावा बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध रहेगी

    प्रत्येक गांव और वार्ड में सूचना दल बनाए जाएंगे जिनमें शिक्षक एएनएम आशा कार्यकर्ता आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे ये दल स्थानीय स्तर पर निगरानी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे

    सचिव ने मीडिया सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से भी जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए हैं ताकि समाज में सही उम्र में विवाह के महत्व को समझाया जा सके और कम उम्र में विवाह के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को सचेत किया जा सके

    यह अभियान न केवल कानून के पालन को सुनिश्चित करेगा बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा जिससे बालिकाओं के स्वास्थ्य शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित किया जा सकेगा

  • अक्षय तृतीया 2026 पर ये छोटा सा वास्तु ट्रिक दिला सकता है अपार धन और समृद्धि

    अक्षय तृतीया 2026 पर ये छोटा सा वास्तु ट्रिक दिला सकता है अपार धन और समृद्धि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए हर शुभ कार्य का फल अक्षय होता है यानी वह कभी समाप्त नहीं होता। यही कारण है कि इस दिन दान, पूजा और निवेश को विशेष महत्व दिया जाता है। वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल रविवार को मनाई जाएगी और यह दिन धन, समृद्धि और खुशहाली को आकर्षित करने का एक विशेष अवसर माना जा रहा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। हालांकि आमतौर पर लोग इस दिन सोना या चांदी खरीदते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के कुछ छोटे-छोटे उपाय भी उतने ही प्रभावशाली माने जाते हैं।

    पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक बताया गया है। इस समय विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं सोना या चांदी खरीदने के लिए 19 अप्रैल सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल सुबह 5:51 बजे तक का समय अत्यंत शुभ रहेगा।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन सोना खरीदा जाए तो उसे घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। ऐसा करने से धन में वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा घर की उत्तर दिशा को साफ और व्यवस्थित रखना भी बेहद जरूरी माना गया है, क्योंकि यह दिशा धन के देवता कुबेर से जुड़ी होती है। इस दिशा में तिजोरी या अलमारी रखना आर्थिक स्थिरता लाने में सहायक माना जाता है।

    मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन कुछ सरल उपाय भी किए जा सकते हैं। तिजोरी या अलमारी पर हल्दी या रोली से स्वास्तिक चिन्ह बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह उपाय घर में धन के आगमन के द्वार खोलता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।

    इसके अलावा इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में कभी कमी नहीं आती। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि केवल धन अर्जित करना ही नहीं बल्कि उसे सही दिशा में उपयोग करना भी उतना ही जरूरी है।

    अक्षय तृतीया का यह पावन अवसर हर व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का मौका देता है। यदि इस दिन सही विधि से पूजा और छोटे-छोटे वास्तु उपाय किए जाएं तो जीवन में स्थायी सुख और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।