Tag: AkshayaTritiya

  • उज्जैन में प्रसव दिवस बना प्रेरणा का उत्सव, गुरुजी ने नवजातों को दिया आशीर्वाद

    उज्जैन में प्रसव दिवस बना प्रेरणा का उत्सव, गुरुजी ने नवजातों को दिया आशीर्वाद


    उज्जैन । उज्जैन में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर इस वर्ष एक विशेष और भावनात्मक आयोजन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया जहां चरक अस्पताल में प्रसव दिवस के रूप में एक अनोखी पहल की गई। यह आयोजन कृष्णा मिश्रा जिन्हें लोग श्रद्धा से गुरुजी कहते हैं उनके नेतृत्व में लगातार छठे वर्ष आयोजित किया गया जिसमें नवजात शिशुओं और माताओं के सम्मान को केंद्र में रखा गया।

    कार्यक्रम के दौरान अस्पताल में जन्मे नवजात शिशुओं का पारंपरिक और भावनात्मक तरीके से स्वागत किया गया। कृष्णा मिश्रा ने नवजातों के चरण स्पर्श कर उन्हें आशीर्वाद दिया और उनके परिजनों से मुलाकात कर खुशी साझा की। पूरे माहौल में एक आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली जहां हर नवजात को जीवन के नए सफर के लिए शुभकामनाएं दी गईं।

    इस अवसर पर प्रसव के बाद अस्पताल में भर्ती माताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्हें बेबी किट वितरित किए गए जिनमें नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल से जुड़ी सामग्री शामिल थी। साथ ही माताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें पोषण के लिए ड्राई फ्रूट लड्डू भी प्रदान किए गए जिससे उनके स्वास्थ्य लाभ में सहायता मिल सके।

    यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था बल्कि इसमें सेवा और समाजसेवा की गहरी भावना झलकती रही। कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात जीवन के महत्व को समाज में सम्मान दिलाना और मातृत्व को विशेष पहचान देना था। आयोजन में उपस्थित सभी लोगों ने इस पहल की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

    कार्यक्रम में चरक अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ कल्पना पवार और उनकी टीम ने गुरुजी का स्वागत किया और आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। अस्पताल के स्टाफ ने भी पूरी तत्परता से कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कृष्णा मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि नवजात शिशु केवल परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी होते हैं और उनका सम्मान करना समाज की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से परंपरा और सेवा भावना को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे जिनमें भारती मंडलोई तृप्ति बजाज राकेश बजाज राजेश पंडित पिंकू यादव और नितेश पटेल सहित अन्य लोग शामिल थे। सभी ने इस पहल को समाज के लिए उपयोगी और प्रेरक बताया।

    अक्षय तृतीया के इस अवसर पर आयोजित प्रसव दिवस ने न केवल नवजीवन का स्वागत किया बल्कि सेवा और मानवता की भावना को भी एक नई दिशा दी जिससे यह आयोजन उज्जैन में चर्चा का विषय बन गया।

  • अक्षय तृतीया 2026 पर बन रहा अक्षय योग इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

    अक्षय तृतीया 2026 पर बन रहा अक्षय योग इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

    नई दिल्ली । हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला अक्षय तृतीया इस बार विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है। वर्ष 2026 में इस दिन ‘अक्षय योग’ का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशियों में रहेंगे, जिससे इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यह स्थिति धन, करियर, शिक्षा और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम देने वाली मानी जाती है।

    ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस शुभ योग का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।

    सबसे पहले मेष राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में उन्नति का संकेत दे रहा है। नौकरी में कार्यों की सराहना होगी और सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। हालांकि, थोड़ी आर्थिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन जीवनसाथी के सहयोग से स्थिति संतुलित रहेगी। इस दौरान स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी होगा।

    तुला राशि के जातकों के लिए यह समय राहत और खुशियों से भरा रहने वाला है। लंबे समय से चली आ रही परेशानियों में कमी आएगी और परिवार में सुख-शांति का माहौल बनेगा। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है और यात्रा या घूमने का अवसर भी मिल सकता है।

    धनु राशि के लिए यह समय भाग्यवृद्धि का संकेत दे रहा है। कम मेहनत में अच्छे परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं। छात्रों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी, जबकि जीवनसाथी का सहयोग आत्मविश्वास बढ़ाएगा। आर्थिक स्थिति में सुधार और नए कार्यों की शुरुआत के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।

    ज्योतिषियों के अनुसार इस अक्षय योग का असर मुख्य रूप से करियर, धन, शिक्षा और पारिवारिक जीवन पर देखने को मिलेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ रिश्तों में मधुरता और मानसिक शांति भी बढ़ने की संभावना है। कुल मिलाकर यह समय कई लोगों के लिए नई संभावनाओं और सकारात्मक बदलावों की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।

  • अक्षय तृतीया पर बन रहा दुर्लभ योग सोना खरीदने का सबसे शुभ समय और पूजा तरीका

    अक्षय तृतीया पर बन रहा दुर्लभ योग सोना खरीदने का सबसे शुभ समय और पूजा तरीका


    नई दिल्ली । अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन को “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है, यानी किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और पूजा का फल अक्षय होता है, यानी उसका कभी क्षय नहीं होता। इस वर्ष अक्षय तृतीया 2026 का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर रवि योग, त्रिपुष्कर योग, सौभाग्य योग और आयुष्मान योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शुक्र ग्रह के अपनी स्वराशि में होने से मालव्य महापुरुष राजयोग और गजकेसरी योग का निर्माण भी हो रहा है, जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

    पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:48 बजे शुरू होगी और 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे समाप्त होगी। इस अवधि को अत्यंत शुभ माना गया है और इस दौरान किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

    इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और इसका संबंध सतयुग एवं त्रेतायुग की शुरुआत से भी जोड़ा जाता है। महाभारत काल में श्रीकृष्ण द्वारा पांडवों को दिया गया अक्षय पात्र भी इसी दिन की महिमा से जुड़ा माना जाता है।

    पूजा विधि के अनुसार घर में चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले कलश स्थापना कर उनका आह्वान करें। गंगाजल से स्नान कराकर चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। पीले वस्त्र, फल, मिठाई और विशेष रूप से खीर या सत्तू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद मंत्र जप और आरती करें।

    सोना खरीदने के लिए इस दिन कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। 19 अप्रैल को सुबह 10:49 से 20 अप्रैल की सुबह 05:51 तक सोना खरीदना शुभ माना गया है। इसके अलावा 20 अप्रैल को दोपहर 02:26 से 03:52 तक अमृत मुहूर्त और 02:30 से 03:22 तक विजय मुहूर्त भी बेहद शुभ माना गया है। इस समय किया गया निवेश और खरीदारी विशेष फलदायी मानी जाती है।

  • चारधाम दर्शन 2026: अक्षय तृतीया पर मोक्ष और पुण्य की यात्रा

    चारधाम दर्शन 2026: अक्षय तृतीया पर मोक्ष और पुण्य की यात्रा


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा का विशेष महत्व है और इसे श्रद्धालु जीवन में एक बार अवश्य करने का संकल्प लेते हैं। मान्यता है कि चारों धामों  यमुनोत्री गंगोत्री केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन करने से जीवन के समस्त पाप धुल जाते हैं और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस साल चारधाम यात्रा 19 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही है और इसे लेकर श्रद्धालुओं में अत्यधिक उत्साह और आस्था देखी जा रही है।

    वैदिक पंचांग के अनुसार चारधाम यात्रा के कपाट अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर खुलते हैं। इस साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे प्रारंभ होकर 20 अप्रैल को सुबह 07:27 बजे समाप्त होगी। यही समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त माना गया है। अक्षय तृतीया के दिन यात्रा आरंभ करने से यह माना जाता है कि किए गए दान तप और तीर्थ यात्रा का पुण्य कभी समाप्त नहीं होता।

    चारों धामों का आध्यात्मिक महत्व भी अत्यंत गहरा है। यमुनोत्री धाम यमुना नदी के पावन उद्गम स्थल पर स्थित है जहां स्नान करने से साधक को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। गंगोत्री धाम मां गंगा को समर्पित है और यहां के दर्शन मात्र से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं। केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह भक्तों को महादेव की असीम कृपा शांति और मानसिक संतुलन प्रदान करता है। बद्रीनाथ धाम जगत के पालनहार भगवान विष्णु का निवासस्थल माना गया है और यहां की यात्रा से पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति पाने का अवसर मिलता है।

    इस साल का संयोग विशेष रूप से लाभकारी है क्योंकि अक्षय तृतीया को ‘स्वयंसिद्ध मुहूर्त’ माना गया है। ग्रहों के शुभ संयोग इस समय को अत्यंत फलदायी बना रहे हैं। इसलिए श्रद्धालु इस समय यात्रा पर निकलकर अधिक पुण्य आशीर्वाद और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यात्रा के दौरान भक्तों द्वारा किया गया दान स्नान और पूजा अर्घ्य जीवन में सुख समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है।

    संक्षेप में चारधाम यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह आध्यात्मिक शांति मानसिक संतुलन और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग भी खोलती है। 19 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाली यह पावन यात्रा अक्षय तृतीया के शुभ मुहूर्त में होने के कारण विशेष पुण्यदायी है। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर जीवन में एक बार अवश्य लेना चाहिए ताकि चारों धामों के दर्शन और धार्मिक कर्मों से उन्हें मोक्ष स्वास्थ्य सुख और समृद्धि प्राप्त हो।