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  • अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, 39.45 करोड़ की संपत्ति कुर्क

    अल फलाह यूनिवर्सिटी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, 39.45 करोड़ की संपत्ति कुर्क


    नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में बड़ी कार्रवाई करते हुए अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी से जुड़ी 39.45 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। कार्रवाई में दिल्ली स्थित आवास, फरीदाबाद की जमीन और बैंक खातों को शामिल किया गया है।

    ईडी का आधिकारिक बयान

    ईडी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई छात्रों से कथित धोखाधड़ी और धनशोधन के मामले में की गई है।

    एजेंसी के अनुसार संपत्तियां धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत अटैच की गई हैं, ताकि इनके लेन-देन पर रोक लगाई जा सके।

    किन संपत्तियों पर लगी रोक

    कुर्क की गई संपत्तियों में शामिल हैं:

    जामिया नगर, ओखला (दिल्ली) स्थित रिहायशी मकान
    फरीदाबाद के गांव धौज में यूनिवर्सिटी कैंपस से लगी कृषि भूमि
    जवाद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के बैंक खाते
    डीमैट होल्डिंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट
    कुल अटैचमेंट 183.54 करोड़ तक पहुंचा

    ईडी के मुताबिक इस मामले में अब तक कुल 183.54 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। एजेंसी ने कहा कि जांच जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।

  • ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर

    ED का दावा… अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने बिना वैरिफिकेशन के नियुक्त किए थे दिल्ली धमाके से जुड़े तीनों डॉक्टर


    नई दिल्ली।
    फरीदाबाद (Faridabad) के अल फलाह विश्वविद्यालय (Al Falah University) ने अन्य विशेषज्ञों के साथ तीन डॉक्टरों की नियुक्ति (Appointment Three Doctors) बिना किसी पुलिस जांच या वेरिफिकेशन के की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) (Enforcement Directorate – ED) की जांच में यह बात सामने आई है कि इन 3 डॉक्टरों में से दो को एनआईए ने गिरफ्तार किया है जबकी तीसरा डॉक्टर उमर उन नबी नवंबर 2025 में दिल्ली के लालकिला के पास हुए धमाके में कथित तौर पर आत्मघाती हमलावर के रूप में शामिल था।


    इन्हें बनाया मुख्य आरोपी

    विश्वविद्यालय के मालिक के खिलाफ चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान ED ने कई वरिष्ठ अधिकारियों और शिक्षकों के बयानों को अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में शामिल किया है। इस मामले में अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और सभी संस्थानों को चलाने वाले अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को मुख्य आरोपी बनाया गया है। इन दोनों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।


    जमीन और इमारत जब्त

    ईडी ने लगभग 260 पन्नों की चार्जशीट में सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट पर छात्रों की फीस से अवैध तरीके से पैसा इकट्ठा करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन पर अपने संस्थानों की मान्यता और कागजों के बारे में गलत जानकारी देने के आरोप में केस चलाने की मांग की गई है। ईडी ने बताया कि उसने फरीदाबाद के धौज इलाके में स्थित विश्वविद्यालय की जमीन और इमारत को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है जिसकी कीमत लगभग 140 करोड़ रुपये है।


    नियमित शिक्षक दिखाकर ली एनएमसी से मंजूरी

    अदालत ने अभी तक ईडी की चार्जशीट का संज्ञान नहीं लिया है। अधिकारियों ने चार्जशीट के आधार पर जानकारी दी है कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर केवल कागजों पर तैनात थे। उन्हें 22 दिन पंच या हफ्ते में दो दिन अटेंडेंस जैसी शर्तों पर नियमित शिक्षक दिखाकर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से जरूरी मंजूरी ली गई थी ताकि मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य सुविधा देखभाल इकाई बिना किसी बाधा के चलती रहे।


    बिना पुलिस सत्यापन आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति

    ईडी ने यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार का बयान दर्ज किया है। रजिस्ट्रार ने बयान में कहा है कि मेडिकल कॉलेज के आरोपी डॉक्टरों को बिना किसी पुलिस सत्यापन के नियुक्त किया गया था। वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति और प्राचार्य ने कहा है कि जो डॉक्टर आतंक से जुड़े मामलों में शामिल बताए जा रहे हैं वे उनके कार्यकाल में नियुक्त किए गए। इनमें अक्टूबर 2021 से डॉ. मुजम्मिल गनई, अक्टूबर 2021 से डॉ. शाहीन सईद और मई 2024 से डॉ. उमर नबी शामिल हैं।


    जवाद अहमद सिद्दीकी ने नियुक्ति को दी मंजूरी

    कुलपति और प्राचार्य ने एजेंसी को बताया कि नियुक्तियों की सिफारिश विश्वविद्यालय के मानव संसाधन प्रमुख ने की थी। इन्हें चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने मंजूरी दी थी। धमाके की साजिश के आरोपी डॉक्टरों की नियुक्ति के समय पुलिस वेरिफिकेशन नहीं किया गया। चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी ने अपने बयान में कहा है कि उनका किसी आतंकवादी संगठन से कोई संबंध नहीं है।


    कई डॉक्टर अस्थायी नियुक्त

    ईडी के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में कर्मचारियों की नियुक्ति पर सिद्धिकी का कंट्रोल था। कुछ को फेक एक्सपीरियंस लेटर भी दिए गए। सिद्धिकी ने जून 2025 में मेडिकल कॉलेज की अंतिम एनएमसी जांच के दौरान भी धोखा देना जारी रखा। ईडी ने निष्कर्ष निकाला कि कई डॉक्टर केवल नियामक निरीक्षण की जरूरत के लिए अस्थायी तौर पर नियुक्त किए गए थे। डॉक्टरों के रोजगार की शर्तें भी कई तरह से फर्जी थीं।


    फेक मरीज किए भर्ती

    आरोपपत्र में संलग्न कुछ दस्तावेज और वीडियो चैट से पता चलता है कि एनएमसी निरीक्षण से लगभग 3 हफ्ते पहले अस्पताल में मरीज, स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं थे। रिकॉर्ड से पता चला कि निरीक्षण से पहले फेक मरीज भर्ती किए गए। सिद्धिकी ने धनशोधन मामले में प्रमुख भूमिका निभायी। इस मामले में कथित अपराध से प्राप्त राशि के 493.24 करोड़ रुपये होने का पता चला है जो छात्रों से वार्षिक ट्यूशन और परीक्षा शुल्क के रूप में वसूल की गई।