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  • पाकिस्तान को अल कायदा की सीधी धमकी, अफगानिस्तान मुद्दे पर आर्मी चीफ आसिम मुनीर निशाने पर

    पाकिस्तान को अल कायदा की सीधी धमकी, अफगानिस्तान मुद्दे पर आर्मी चीफ आसिम मुनीर निशाने पर


    नई दिल्ली ।
    आतंकवाद को लेकर लंबे समय से आलोचना झेल रहे पाकिस्तान के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। दुनिया के कुख्यात आतंकी संगठन अल कायदा ने पाकिस्तान की नेतृत्व व्यवस्था पर सीधा हमला बोलते हुए खुली चेतावनी दी है। संगठन ने खास तौर पर अफगानिस्तान के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के रुख की कड़ी आलोचना की है और तालिबान के समर्थन का ऐलान किया है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अल कायदा की केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जारी यह संदेश शाहदा न्यूज एजेंसी के माध्यम से उसके मीडिया विंग ‘अस-सहब’ द्वारा गुप्त प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब इस्लामाबाद और काबुल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

    अपने बयान में संगठन ने पाकिस्तान की सिविल-मिलिट्री व्यवस्था को निशाना बनाते हुए आरोप लगाया कि वह अफगानिस्तान के हितों के खिलाफ काम कर रही है और पश्चिमी देशों के साथ गठजोड़ कर रही है। साथ ही, अल कायदा ने पाकिस्तान को चेतावनी दी कि वह अफगानिस्तान से दूरी बनाए रखे, वरना परिणाम गंभीर होंगे।

    आतंकी संगठन ने पाकिस्तानी जनता और सेना को भी भड़काने की कोशिश की। उसने लोगों से सरकार के आदेशों का पालन न करने और अपने एजेंडे के समर्थन की अपील की। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संदेशों के जरिए संगठन पाकिस्तान में अस्थिरता पैदा करना चाहता है और जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर लगातार अफगान तालिबान को चेतावनी देते रहे हैं। वहीं, तालिबान और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है।

    दरअसल, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर कई बार हवाई हमले किए हैं, जबकि तालिबान ने जवाबी कार्रवाई में डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी सेना के ठिकानों को निशाना बनाया है। अफगानिस्तान डूरंड लाइन को मान्यता नहीं देता, जबकि पाकिस्तान वहां बाड़बंदी कर घुसपैठ रोकने की कोशिश कर रहा है।

  • अल-कायदा और हमास जैसे आतंकी संगठनों की सूची में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स …

    अल-कायदा और हमास जैसे आतंकी संगठनों की सूची में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स …


    वाशिंगटन। यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर क्रूर दमन के दौरान 6,373 लोगों की हत्या करने वाले ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को यूरोपीय संघ आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध करने जा रहा है. इस कदम के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के सर्वसम्मत समर्थन की आवश्यकता होगी और उम्मीद है कि इससे ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट, दाएश और हमास जैसे आतंकी समूहों के साथ जोड़ा जाएगा.

    कल्लास ने गुरुवार को पत्रकारों से कहा, “यदि आप आतंकवादी के रूप में कार्य करते हैं, तो आपके साथ आतंकवादी जैसा व्यवहार भी किया जाना चाहिए.”

    एस्टोनिया की पूर्व प्रधानमंत्री रह चुकीं कल्लास ने कहा कि इससे एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि यदि आप लोगों का दमन कर रहे हैं, तो इसकी कीमत चुकानी होगी और इसके लिए आपको दंडित किया जाएगा.

    फ्रांस पहले विरोध में था, अब किया समर्थन

    पहले फ्रांस ने रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध करने पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि उसे आशंका थी कि इससे ईरान में हिरासत में लिए गए फ्रांसीसी नागरिकों के साथ-साथ राजनयिक मिशनों को भी खतरा हो सकता है. हालांकि, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के कार्यालय ने बुधवार को संकेत दिया कि पेरिस इस निर्णय का समर्थन करता है.

    फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने गुरुवार को ब्रुसेल्स में विदेश मामलों की परिषद के समक्ष कहा कि फ्रांस ईरान पर और प्रतिबंध लगाने और उसे सूचीबद्ध करने का समर्थन करता है, “क्योंकि किए गए अपराधों के लिए किसी को भी छूट नहीं दी जा सकती.” उन्होंने कहा, “ईरान में, ईरानी जनता के शांतिपूर्ण विद्रोह के दमन को अनदेखा नहीं किया जा सकता.”

    इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर, या ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स, ईरान की सेना की सबसे शक्तिशाली शाखा और उसकी राजनीतिक और आर्थिक संरचना का एक प्रमुख स्तंभ है. 1979 में अयातुल्ला खुमैनी द्वारा इस्लामी क्रांति की रक्षा के लिए स्थापित, यह नियमित सेना से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और केवल सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेह है.