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  • नेपाल में अचानक बाढ़ की 3 थ्योरी, भारत तक पहुंच सकता है पानी, बिहार-UP में अलर्ट

    नेपाल में अचानक बाढ़ की 3 थ्योरी, भारत तक पहुंच सकता है पानी, बिहार-UP में अलर्ट


    नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन में भारी तबाही मचाई। कई पुल टूट गए और बिजली ढांचे को नुकसान पहुंचा। शुरुआती जांच में बाढ़ की वजह को लेकर तीन संभावनाएं सामने आई हैं—पहाड़ से मलबा गिरने से नदी का रास्ता रुकना, भूकंपीय गतिविधि और ग्लेशियल झील का फटना। हालांकि, अभी इनमें से किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है।

    बाढ़ का पानी तिब्बत सीमा के पास ल्हेंदे नदी के ऊपरी हिस्से से आने की बात कही जा रही है। बुधवार सुबह करीब 9 बजे पानी नेपाल के रसुवा जिले में पहुंचा और इसके बाद तेज बहाव नुवाकोट और धादिंग तक फैल गया। रसुवागढ़ी, न्यू त्रिशूली ब्रिज और मालेखु ब्रिज के आसपास बाढ़ से भारी नुकसान की जानकारी सामने आई है।

    नदी में मलबा गिरने से बनी झील जैसी स्थिति?
    पहली आशंका यह है कि पहाड़ से बर्फ, चट्टानें और मलबा खिसककर नदी में गिर गया। इससे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए रुक गया और पीछे पानी जमा होता रहा। दबाव बढ़ने पर यह रुकावट टूट गई और जमा पानी तेज सैलाब के रूप में नीचे की ओर बह निकला।

    नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर दूर बर्फ और चट्टानों के खिसकने के निशान मिले हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में भी नदी का फैलाव अचानक बढ़ता दिखाई दिया है। हालांकि, इन तस्वीरों से अभी यह साबित नहीं होता कि बाढ़ ग्लेशियर झील फटने से ही आई।

    भूकंप वाली थ्योरी कमजोर
    दूसरी आशंका भूकंप से जुड़ी थी। बाढ़ से कुछ समय पहले तिब्बत के इलाके में कंपन दर्ज किया गया था। शुरुआत में इसे भूकंप माना गया, लेकिन अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के अपडेट के मुताबिक भूकंपीय गतिविधि लैंडस्लाइड की वजह से दर्ज हुई थी। इससे बाढ़ के पीछे भूकंप को मुख्य कारण मानने की संभावना कमजोर हुई है।

    क्या ग्लेशियल झील फटी?
    तीसरी संभावना GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की है। पहाड़ों पर बनी बर्फीली झील का पानी अचानक बाहर निकलने पर नीचे की ओर बेहद तेज बहाव बन सकता है।

    नेपाल के मौसम विभाग के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी मिन कुमार आर्याल के अनुसार, भोटेकोशी में आई बाढ़ केवल बारिश की वजह से नहीं हुई। रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश नहीं हुई थी। ऐसे में ग्लेशियल झील के फटने की आशंका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल बाढ़ की असली वजह स्पष्ट नहीं है और तीनों संभावनाओं की जांच जारी है।

    भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
    नेपाल से निकलने वाली नदियों के जरिए बाढ़ का पानी भारत तक पहुंच सकता है। त्रिशूली नदी देवघाट में काली गंडकी से मिलकर नारायणी बनती है। भारत में वाल्मीकिनगर के पास यही नदी गंडक कहलाती है। इसलिए गंडक के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। केंद्रीय जल आयोग ने बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक किनारे बसे इलाकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बिहार के 6 जिलों में निगरानी
    बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली पर नजर रखी जा रही है। पश्चिम चंपारण नेपाल से आने वाले पानी के रास्ते में पड़ने वाला पहला बड़ा भारतीय जिला है। बेतिया, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में NDRF की टीमें तैनात की गई हैं, जबकि SDRF भी संवेदनशील क्षेत्रों में मौजूद है।

    यूपी के महराजगंज-कुशीनगर भी अलर्ट
    गंडक में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर जिलों को भी सतर्क किया गया है। गंडक आगे हाजीपुर और सोनपुर के पास गंगा में मिलती है। हालांकि, मैदानी इलाकों में पहुंचने के बाद नदी फैलती है, जिससे पानी की रफ्तार कम होने की संभावना रहती है। वहीं कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा का रास्ता अलग है। नेपाल से आई इस बाढ़ का सीधा पानी इन नदियों में नहीं जाने की बात कही जा रही है।

    फिलहाल भारत में सबसे ज्यादा निगरानी नारायणी से वाल्मीकिनगर और फिर गंडक के रास्ते उत्तर बिहार तक के इलाकों में है। नेपाल में बाढ़ की वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन पानी के भारत पहुंचने का रास्ता तय है नेपाल से नारायणी, नारायणी से गंडक और फिर गंगा।

  • हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा

    हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा


    शिमला।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में मौसम ने अचानक करवट ले ली है. एक तरफ अटल टनल (Atal Tunnel) के पास हिमस्खलन (एवलांच) (Avalanche) का खतरा बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर राज्य के कई जिलों में ओलावृष्टि और तेज आंधी-बारिश (Hailstorm and Heavy storm – Rain) को लेकर ओरेन्ज अलर्ट जारी किया गया है. लाहौल-स्पीति प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के आसपास पर्यटकों और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।

    प्रशासन के मुताबिक, टनल के पास बाईं ओर की पहाड़ियां, आसपास का इलाका, चंद्रा ब्रिज और उससे जुड़ा क्षेत्र हिमस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो गया है. हाल के दिनों में यहां पर्यटकों की भीड़ और अनधिकृत गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे जान-माल का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है।

    जिला प्रशासन ने साफ आदेश दिया है कि इन संवेदनशील इलाकों में पर्यटकों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. साथ ही ठेले-फेरी, अस्थायी दुकानें, फोटो प्वाइंट और किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि आपात स्थिति में राहत और ट्रैफिक प्रबंधन में कोई बाधा न आए।

    इधर शिमला समेत आसपास के इलाकों में शुक्रवार को ओलावृष्टि, बारिश और तेज हवाओं ने मौसम को बिगाड़ दिया. मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ओरेन्ज अलर्ट जारी किया है, जहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की संभावना है।

    इसके अलावा ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और सिरमौर जिलों के लिए 3 और 4 अप्रैल को येलो अलर्ट जारी किया गया है. वहीं 5 और 6 अप्रैल को भी कई जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है. 7 अप्रैल को राज्य के ज्यादातर मैदानी जिलों में भी ऐसा ही मौसम बना रह सकता है.

    मौसम विभाग के अनुसार 3 से 6 अप्रैल के बीच मनाली, कुफरी, नारकंडा, सोलंग वैली और सिस्सू जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इसके पीछे सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर बताया गया है. मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि 7 से 9 अप्रैल के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य में व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है, जिससे ठंड और बढ़ेगी और जनजीवन प्रभावित हो सकता है.