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  • MP में अगले 4 दिन बदलेगा मौसम, ग्वालियर-चंबल समेत 5 संभागों में बारिश के आसार

    MP में अगले 4 दिन बदलेगा मौसम, ग्वालियर-चंबल समेत 5 संभागों में बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में अक्टूबर के दौरान मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। दिन में धूप निकल रही है, रात में ठंडक बढ़ रही है और कुछ इलाकों में बारिश भी हो रही है। प्रदेश के उत्तरी हिस्से में पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। वहीं, मध्य प्रदेश से एक ट्रफ गुजर रही है। इन मौसमी सिस्टम के प्रभाव से अगले चार दिन ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार को ग्वालियर, श्योपुर, भिंड, मुरैना और शिवपुरी में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 17 अक्टूबर को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आगर-मालवा, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में बारिश होने का अनुमान है। इन इलाकों में 18 और 19 अक्टूबर को भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रह सकता है।

    इससे पहले गुरुवार को नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड और शिवपुरी में बादल छाए रहे। कई स्थानों पर हल्की बारिश और आंधी जैसी स्थिति भी बनी।

    अमरकंटक में 15.8 डिग्री पर पहुंचा पारा

    बारिश के बीच प्रदेश के कई शहरों में रात का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, 20 अक्टूबर के बाद रात में ठंड का असर और बढ़ सकता है।

    अनूपपुर जिले का अमरकंटक प्रदेश के ठंडे इलाकों में सबसे आगे रहा। यहां बीती रात न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा शाजापुर में 17.4 डिग्री, भोपाल में 17.6 डिग्री और इंदौर तथा बालाघाट जिले के मलाजखंड में 17.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ। रायसेन और छिंदवाड़ा में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा।

    3 अक्टूबर को लौट चुका मानसून, फिर भी हो रही बारिश

    मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो चुकी है। इसके बावजूद मौसमी सिस्टम सक्रिय रहने के कारण बारिश का सिलसिला जारी है। पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश का असर देखने को मिला। हालांकि, रविवार और सोमवार को कहीं आंधी-बारिश दर्ज नहीं की गई थी।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की परिस्थितियां देखने को मिली हैं। इस साल भी मौसम का यही रुख बना हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ धूप निकली, जबकि रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। कई जिलों में बारिश भी होती रही। इस बार प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 1.5 इंच कम बारिश

    जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच से 41.1 मिलीमीटर या करीब 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।

    हालांकि, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के आंकड़ों में अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी गिरा।

    पूर्वी क्षेत्र के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 25 जिलों में मानसूनी बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    दूसरी ओर, 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    फिलहाल प्रदेश में बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने का अनुमान है। अगले चार दिन उत्तरी और मध्य हिस्सों के कई जिलों में बारिश हो सकती है, जबकि महीने के तीसरे सप्ताह के बाद रात की ठंड बढ़ने के आसार हैं।

  • मध्‍य प्रदेश में अब तक सामान्य से 2.3 इंच कम हुई बारिश, 26 सितंबर तक तेज बारिश के आसार, आज भी अलर्ट

    मध्‍य प्रदेश में अब तक सामान्य से 2.3 इंच कम हुई बारिश, 26 सितंबर तक तेज बारिश के आसार, आज भी अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून अब तक सामान्य बारिश के आंकड़े से नीचे बना हुआ है। प्रदेश में 869.3 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य बारिश का 91.5% है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बने अवदाब के असर से अगले चार दिन बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं। 25 और 26 सितंबर को कुछ जिलों में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ अवदाब आगे बढ़ते हुए महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम का रूप ले रहा है। इसके और मजबूत होने की संभावना है। इसके प्रभाव से ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ नमी का परिवहन, वायुमंडलीय परिसंचरण और अन्य मौसमी परिस्थितियां मध्यप्रदेश में बारिश को प्रभावित करेंगी।

    छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में आज भारी बारिश

    IMD के अनुसार बुधवार को छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।

    33 जिलों में पहले ही बरस चुका पानी

    सोमवार और मंगलवार को प्रदेश के 33 जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई। इनमें भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, सीहोर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आलीराजपुर, शाजापुर, देवास, खंडवा, रीवा, सिंगरौली, सीधी, सतना, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, निवाड़ी, नर्मदापुरम और बैतूल शामिल हैं।

    सागर के देवरी में सबसे ज्यादा 2.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के 100 से ज्यादा शहरों और कस्बों में बारिश हुई।

    26 सितंबर तक जारी रह सकता है दौर

    मौसम विशेषज्ञ नायक के अनुसार बंगाल की खाड़ी से बनने वाले सिस्टम जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे, उनके साथ आने वाली नमी और वायुमंडलीय परिसंचरण मध्य भारत में बारिश की गतिविधियों को प्रभावित करेंगे। इसी वजह से 26 सितंबर तक प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश होने के आसार हैं।

    23 और 24 सितंबर को भी कुछ जिलों में भारी बारिश हो सकती है, जबकि 25 और 26 सितंबर को कहीं-कहीं भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। बारिश का यह दौर प्रदेश के मौजूदा वर्षा घाटे को कम कर सकता है।

    सामान्य से 2.3 इंच कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 869.3 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश हुई है। इस अवधि तक सामान्य बारिश 927.5 मिमी यानी 36.5 इंच होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश सामान्य से 2.3 इंच पीछे है। ओवरऑल बारिश सामान्य से 6% कम है। पूर्वी हिस्से में 2% और पश्चिमी हिस्से में 10% बारिश कम हुई है।

    पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 2% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 22% तक कम बारिश हुई है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह में स्थिति में काफी सुधार हुआ है। मंगलवार को प्रदेश का कुल बारिश का अंतर माइनस 2% तक पहुंच गया था।

    पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में ज्यादा कमी

    पश्चिमी मध्यप्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है। स्रोत सूची में खंडवा का नाम दो बार दर्ज है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    प्रदेश के 23 जिलों में अब तक सामान्य से अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का असर बढ़ने के साथ प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। 26 सितंबर तक चलने वाले इस दौर से प्रदेश के कुल बारिश के आंकड़े में और सुधार होने की उम्मीद है।

  • नेपाल में अचानक बाढ़ की 3 थ्योरी, भारत तक पहुंच सकता है पानी, बिहार-UP में अलर्ट

    नेपाल में अचानक बाढ़ की 3 थ्योरी, भारत तक पहुंच सकता है पानी, बिहार-UP में अलर्ट


    नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन में भारी तबाही मचाई। कई पुल टूट गए और बिजली ढांचे को नुकसान पहुंचा। शुरुआती जांच में बाढ़ की वजह को लेकर तीन संभावनाएं सामने आई हैं—पहाड़ से मलबा गिरने से नदी का रास्ता रुकना, भूकंपीय गतिविधि और ग्लेशियल झील का फटना। हालांकि, अभी इनमें से किसी एक कारण की पुष्टि नहीं हुई है।

    बाढ़ का पानी तिब्बत सीमा के पास ल्हेंदे नदी के ऊपरी हिस्से से आने की बात कही जा रही है। बुधवार सुबह करीब 9 बजे पानी नेपाल के रसुवा जिले में पहुंचा और इसके बाद तेज बहाव नुवाकोट और धादिंग तक फैल गया। रसुवागढ़ी, न्यू त्रिशूली ब्रिज और मालेखु ब्रिज के आसपास बाढ़ से भारी नुकसान की जानकारी सामने आई है।

    नदी में मलबा गिरने से बनी झील जैसी स्थिति?
    पहली आशंका यह है कि पहाड़ से बर्फ, चट्टानें और मलबा खिसककर नदी में गिर गया। इससे नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए रुक गया और पीछे पानी जमा होता रहा। दबाव बढ़ने पर यह रुकावट टूट गई और जमा पानी तेज सैलाब के रूप में नीचे की ओर बह निकला।

    नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को रसुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर दूर बर्फ और चट्टानों के खिसकने के निशान मिले हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में भी नदी का फैलाव अचानक बढ़ता दिखाई दिया है। हालांकि, इन तस्वीरों से अभी यह साबित नहीं होता कि बाढ़ ग्लेशियर झील फटने से ही आई।

    भूकंप वाली थ्योरी कमजोर
    दूसरी आशंका भूकंप से जुड़ी थी। बाढ़ से कुछ समय पहले तिब्बत के इलाके में कंपन दर्ज किया गया था। शुरुआत में इसे भूकंप माना गया, लेकिन अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (USGS) के अपडेट के मुताबिक भूकंपीय गतिविधि लैंडस्लाइड की वजह से दर्ज हुई थी। इससे बाढ़ के पीछे भूकंप को मुख्य कारण मानने की संभावना कमजोर हुई है।

    क्या ग्लेशियल झील फटी?
    तीसरी संभावना GLOF यानी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की है। पहाड़ों पर बनी बर्फीली झील का पानी अचानक बाहर निकलने पर नीचे की ओर बेहद तेज बहाव बन सकता है।

    नेपाल के मौसम विभाग के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी मिन कुमार आर्याल के अनुसार, भोटेकोशी में आई बाढ़ केवल बारिश की वजह से नहीं हुई। रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश नहीं हुई थी। ऐसे में ग्लेशियल झील के फटने की आशंका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल बाढ़ की असली वजह स्पष्ट नहीं है और तीनों संभावनाओं की जांच जारी है।

    भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
    नेपाल से निकलने वाली नदियों के जरिए बाढ़ का पानी भारत तक पहुंच सकता है। त्रिशूली नदी देवघाट में काली गंडकी से मिलकर नारायणी बनती है। भारत में वाल्मीकिनगर के पास यही नदी गंडक कहलाती है। इसलिए गंडक के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। केंद्रीय जल आयोग ने बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक किनारे बसे इलाकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बिहार के 6 जिलों में निगरानी
    बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली पर नजर रखी जा रही है। पश्चिम चंपारण नेपाल से आने वाले पानी के रास्ते में पड़ने वाला पहला बड़ा भारतीय जिला है। बेतिया, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर में NDRF की टीमें तैनात की गई हैं, जबकि SDRF भी संवेदनशील क्षेत्रों में मौजूद है।

    यूपी के महराजगंज-कुशीनगर भी अलर्ट
    गंडक में पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर जिलों को भी सतर्क किया गया है। गंडक आगे हाजीपुर और सोनपुर के पास गंगा में मिलती है। हालांकि, मैदानी इलाकों में पहुंचने के बाद नदी फैलती है, जिससे पानी की रफ्तार कम होने की संभावना रहती है। वहीं कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा का रास्ता अलग है। नेपाल से आई इस बाढ़ का सीधा पानी इन नदियों में नहीं जाने की बात कही जा रही है।

    फिलहाल भारत में सबसे ज्यादा निगरानी नारायणी से वाल्मीकिनगर और फिर गंडक के रास्ते उत्तर बिहार तक के इलाकों में है। नेपाल में बाढ़ की वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन पानी के भारत पहुंचने का रास्ता तय है नेपाल से नारायणी, नारायणी से गंडक और फिर गंगा।

  • हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा

    हिमाचल के 5 जिलों में ओलावृष्टि और आंधी-बारिश का अलर्ट, अटल टनल के पास बढ़ा हिमस्खलन का खतरा


    शिमला।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में मौसम ने अचानक करवट ले ली है. एक तरफ अटल टनल (Atal Tunnel) के पास हिमस्खलन (एवलांच) (Avalanche) का खतरा बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर राज्य के कई जिलों में ओलावृष्टि और तेज आंधी-बारिश (Hailstorm and Heavy storm – Rain) को लेकर ओरेन्ज अलर्ट जारी किया गया है. लाहौल-स्पीति प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए अटल टनल के नॉर्थ पोर्टल के आसपास पर्यटकों और आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।

    प्रशासन के मुताबिक, टनल के पास बाईं ओर की पहाड़ियां, आसपास का इलाका, चंद्रा ब्रिज और उससे जुड़ा क्षेत्र हिमस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हो गया है. हाल के दिनों में यहां पर्यटकों की भीड़ और अनधिकृत गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे जान-माल का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है।

    जिला प्रशासन ने साफ आदेश दिया है कि इन संवेदनशील इलाकों में पर्यटकों की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी. साथ ही ठेले-फेरी, अस्थायी दुकानें, फोटो प्वाइंट और किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधियों पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि आपात स्थिति में राहत और ट्रैफिक प्रबंधन में कोई बाधा न आए।

    इधर शिमला समेत आसपास के इलाकों में शुक्रवार को ओलावृष्टि, बारिश और तेज हवाओं ने मौसम को बिगाड़ दिया. मौसम विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ओरेन्ज अलर्ट जारी किया है, जहां 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की संभावना है।

    इसके अलावा ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और सिरमौर जिलों के लिए 3 और 4 अप्रैल को येलो अलर्ट जारी किया गया है. वहीं 5 और 6 अप्रैल को भी कई जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है. 7 अप्रैल को राज्य के ज्यादातर मैदानी जिलों में भी ऐसा ही मौसम बना रह सकता है.

    मौसम विभाग के अनुसार 3 से 6 अप्रैल के बीच मनाली, कुफरी, नारकंडा, सोलंग वैली और सिस्सू जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है. इसके पीछे सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर बताया गया है. मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि 7 से 9 अप्रैल के बीच एक और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य में व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी देखने को मिल सकती है, जिससे ठंड और बढ़ेगी और जनजीवन प्रभावित हो सकता है.