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  • क्या सचमुच धरती पर आते हैं एलियन? जानिए क्यों अब तक नहीं हो पाया दूसरे ग्रहों के जीवों से संपर्क

    क्या सचमुच धरती पर आते हैं एलियन? जानिए क्यों अब तक नहीं हो पाया दूसरे ग्रहों के जीवों से संपर्क


    नई दिल्ली । क्या ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन मौजूद है? यह सवाल विज्ञान की दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक बना हुआ है। एलियन यानी पृथ्वी के बाहर रहने वाले संभावित जीवों को लेकर वर्षों से दावे और कहानियां सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो उनके अस्तित्व या पृथ्वी पर आने की पुष्टि कर सके।

    हाल के वर्षों में अमेरिका सहित कई देशों ने अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनोमेना (UAP) से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इसके बावजूद वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि अभी तक किसी भी घटना को एलियन गतिविधि से जोड़ने वाला पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोग यह मानते हैं कि ब्रह्मांड में कहीं न कहीं जीवन अवश्य मौजूद होगा।

    हमारी कल्पना से कहीं अधिक विशाल है ब्रह्मांड
    विशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मांड इतना विशाल है कि उसकी पूरी सीमा का अनुमान लगाना भी मुश्किल है। पृथ्वी के सबसे नजदीकी तारों में से एक Proxima Centauri लगभग 40 ट्रिलियन किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूरी तय करने में प्रकाश को भी करीब 4.3 वर्ष लग जाते हैं।

    आज तक मानव द्वारा विकसित अंतरिक्ष यान प्रकाश की गति के बेहद छोटे हिस्से तक ही पहुंच पाए हैं। मौजूदा तकनीक के अनुसार किसी अंतरिक्ष यान को प्रॉक्सिमा सेंटॉरी तक पहुंचने में हजारों वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में दूसरे ग्रहों तक यात्रा करना या वहां से किसी सभ्यता का पृथ्वी तक पहुंचना बेहद कठिन माना जाता है।

    अंतरिक्ष यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती है ऊर्जा
    वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरतारकीय यात्रा के लिए अकल्पनीय मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। यदि कोई यान प्रकाश की गति के करीब पहुंचना चाहता है, तो उसे ऊर्जा का ऐसा स्रोत चाहिए होगा जो वर्तमान विज्ञान की पहुंच से बहुत आगे है।

    इसके अलावा अंतरिक्ष पूरी तरह खाली नहीं है। वहां गैसों और सूक्ष्म कणों की मौजूदगी होती है। अत्यधिक गति से यात्रा करने पर इन कणों से टकराव भी विनाशकारी साबित हो सकता है। यही कारण है कि लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्राओं को लेकर अभी भी कई तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं।

    क्या एलियन पृथ्वी पर आना चाहेंगे?
    कुछ वैज्ञानिक यह भी सवाल उठाते हैं कि यदि कोई सभ्यता इतनी उन्नत है कि वह तारों के बीच यात्रा कर सकती है, तो उसे पृथ्वी पर आने की आवश्यकता क्यों होगी? संभव है कि ऐसी सभ्यता अपनी जरूरत की लगभग हर चीज अपने ग्रह या तकनीक की मदद से हासिल कर सकती हो। इसी वजह से कई वैज्ञानिक मानते हैं कि एलियन सभ्यताओं के होने की संभावना और उनके पृथ्वी तक पहुंचने की संभावना दो अलग-अलग बातें हैं।

    पृथ्वी का वातावरण हर जीव के लिए उपयुक्त नहीं
    पृथ्वी का जैवमंडल यहां मौजूद जीवन के लिए अनुकूल है, लेकिन जरूरी नहीं कि किसी दूसरे ग्रह के जीव भी इसी वातावरण में जीवित रह सकें। पृथ्वी पर जीवन के विकास में ऑक्सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन संभव है कि किसी अन्य ग्रह पर जीवन पूरी तरह अलग रासायनिक परिस्थितियों में विकसित हुआ हो। ऐसी स्थिति में यदि कोई बाहरी जीव पृथ्वी पर आए भी, तो उसे विशेष सुरक्षा उपकरणों या अलग वातावरण की आवश्यकता पड़ सकती है।

    अरबों ग्रहों में जीवन की तलाश जारी
    वैज्ञानिकों ने अब तक हजारों एक्सोप्लैनेट यानी सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों की खोज की है। केवल हमारी आकाशगंगा में ही अरबों तारे और उनसे जुड़े असंख्य ग्रह मौजूद होने का अनुमान है। ऐसे में यह मानना कठिन है कि पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही जीवन का एकमात्र केंद्र हो।

    फिर भी आज तक किसी एलियन सभ्यता या पृथ्वी पर उनके आगमन का प्रमाण नहीं मिला है। विज्ञान लगातार नए ग्रहों और संभावित जीवन की तलाश में जुटा है, लेकिन फिलहाल एलियन का अस्तित्व एक रोमांचक संभावना है, सिद्ध तथ्य नहीं।

  • एलियन, UAP और UFO से जुड़े सारे दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगा US, ट्रंप ने दिए निर्देश

    एलियन, UAP और UFO से जुड़े सारे दस्तावेजों को सार्वजनिक करेगा US, ट्रंप ने दिए निर्देश


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि एलियन (Alien.), अनजान हवाई घटनाओ (UAP) और अनजान उड़ने वाले ऑब्जेक्ट्स (Unidentified Flying Objects- UFO) से जुड़ी घटनाओं और दस्तावेजों की पहचान करें और उन्हें जारी करें। उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल हैंडल पर कहा, लोगों की रुचि को देखते हुए मैं युद्ध सचिवऔर अन्य एजेंसियों व वभागों को निर्देश देता हूं कि वे एलियन्स, न्य ग्रहों पर जीवन, यूएपी और यूएफओ से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया शुरू करें।

    ट्रंप ने कहा कि लोगों के इंटरेस्ट और इसकी अहमियत को देखते हुए जो फाइल्स जारी की जाएंगी उसने सभी जानकारियों को शामिल करने की कोशिश होगी। बता दें कि हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक पॉडकास्ट के दौरान एलियन्स की बातें की थीं। उन्होंने कहा था, एलियन वास्तव में हैं लेकिन मैंने अपनी आखों से उन्हें नहीं देखा है। यह बात भी सच है कि एरिया 51 में कोई एलियन नहीं है।


    ओबामा पर गुप्त जानकारी लीक करने का आरोप

    डोनाल्ड ट्रंप ने ओबामा पर आरोप लगाया कि ओबामा ने गुप्त जानकारियां लीक की हैं। ट्रंप ने कहा कि ओबामा ने बड़ी गलती कर दी है। मुझे भी नहीं पता कि एलियन हैं या नहीं लेकिन ओबामा ने जो सीक्रेट इन्फॉर्मेंशन लीक की है, उसकी कोई जरूरत नहीं थी।


    एलियन्स को लेकर क्या बोले थे बराक ओबामा

    ओबामा ने एलियन्स को लेकर सवाल किए जाने पर हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि यह ब्रह्मांड बहुत बड़ा है। ऐसे में धरती से बाहर के जीवन के बारे में नकारा तो नहीं जा सकता। उन्होंने कहा था,मेरे कार्यकाल के दौरान एलियन्स को लेकर कोई प्रमाण नहीं मिला था। एरिया 51 से जुड़े मामलों को लेकर उन्होंने कहा था कि वहां कोई एलियन या गुप्त जीव नहीं है। लोग मानते हैं कि एरिया 51 में एलियन के शव हैं लेकिन यह पूरी तरह से गलत धारणा है।

    ओबामा के बयान के बाद ही ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह बात लीक नहीं करनी चाहिए थे। उन्होंने कहा, ओबामा ने जो कुछ भी बताया है वह बेहद संवेदनशील जानकारी थी। हालांकि ट्रंप ने स्पष्ट तौर पर यह नहीं बताया कि आखिर उन्होंने कौन सी सीक्रेट जानकारी लीक कर दी है। ट्रंप से जब एलियन्स को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने खुद भी कहा कि उन्हें एलिन्स के अस्तित्व के बारे में कोई जानकारी नहीं है।


    क्या है एरिया 51?

    अमेरिका के नेवादा में एक बेहद गोपनीय अमेरिकी वायुसेना का अड्डा है जिसे एरिया 51 के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि यहां एलिनय के शवों और क्रैश हुए यूएफओ को रखा जाता है। 2013 में सीआईए ने इससे जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करते हुए बताया था कि शीत युद्ध के दौरान इस ठिकाने का इस्तेमाल जासूसी विमानों के परीक्षण के लिए किया जाता था। 2022 में भी अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने दावा किया था कि एलियन्स के धरती पर आने से संबंधित कोई सबूत नहीं मिला है। ऐसी अगर कोई भी वस्तु मिली है तो जांच के बाद ये सामान्य उपकरण या फिर तकनीकी भ्रम ही पाई गई हैं।