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  • अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया TMC दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ का आरोप, बोले- कार्यकर्ताओं को पीटा, फोन छीने

    अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर लगाया TMC दफ्तर में घुसकर तोड़फोड़ का आरोप, बोले- कार्यकर्ताओं को पीटा, फोन छीने


    कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित पार्टी कार्यालय में तड़के हमला और तोड़फोड़ किए जाने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि सुबह करीब 4:30 बजे हथियारों से लैस हमलावर कार्यालय में घुसे और वहां मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की। उन्होंने घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया पर साझा किया है।

    अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि कैमक स्ट्रीट पर सुबह हुई घटना कानून के शासन पर शर्मनाक हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के गुंडों ने हथियारों के साथ पार्टी कार्यालय पर धावा बोला। इस दौरान कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया, उनके फोन छीन लिए गए, फर्नीचर तोड़ा गया, परिसर में तोड़फोड़ की गई और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान पहुंचाया गया।

    कोलकाता पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
    अभिषेक बनर्जी ने घटना को लेकर कोलकाता पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और वकीलों की ओर से लगातार फोन कॉल और ईमेल किए जाने के बावजूद करीब दो घंटे तक पुलिस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। बनर्जी ने इसे बेहद चौंकाने वाला और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।

    उन्होंने सवाल किया कि अगर सुबह 4:30 बजे हथियारों से लैस लोग किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ कर सकते हैं और उस दौरान पुलिस मौजूद नहीं होती, तो पश्चिम बंगाल में कानून के शासन का क्या अर्थ रह जाता है।

    ‘हथियारबंद गुंडों का समूह कानून से ऊपर नहीं’
    टीएमसी नेता ने प्रशासन से मामले में तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल या हथियारबंद गुंडों का समूह कानून से ऊपर नहीं हो सकता। अभिषेक बनर्जी ने हमले में शामिल सभी लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए यह भी जांच कराने की बात कही कि हिंसा की साजिश किसने रची।

    उन्होंने कहा कि बार-बार सूचना दिए जाने के बावजूद पुलिस कार्रवाई करने में क्यों नाकाम रही, इसकी भी जांच होनी चाहिए। बनर्जी ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।

  • खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    खंडवा कलेक्ट्रेट में डॉग मास्क पहनकर प्रदर्शन करने वाले युवक को सता रहा अपनी जान का खतरा

    मध्य प्रदेश: के खंडवा जिले में नगर निगम द्वारा संचालित श्वान बधियाकरण कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अनोखा प्रदर्शन करने वाले एक युवक ने अब अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनसुनवाई के दौरान डॉग मास्क पहनकर पहुंचे इस युवक का वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था। प्रदर्शन के इस चर्चित तरीके के बाद अब पीड़ित युवक अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा होने की बात कह रहा है।

    पूरा मामला खंडवा नगर निगम में कथित तौर पर हुए लाखों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है। आरोप है कि श्वान बधियाकरण केंद्र के संचालन और आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए विपक्षी जनप्रतिनिधि उस युवक को कलेक्ट्रेट में अधिकारियों की टेबल तक ले गए थे। हालांकि इस मामले पर नगर निगम प्रशासन ने अपना स्पष्टीकरण जारी करते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है और ई-टेंडरिंग के जरिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होने का दावा किया है।

    प्रदर्शन के बाद से युवक इस कदर भयभीत है कि वह अपना चेहरा और पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहता। युवक का मानना है कि जिन लोगों के खिलाफ यह आवाज उठाई गई है, वे उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि उसे इस बात का भरोसा भी है कि इस अनोखे कदम के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले का संज्ञान लिया जाएगा, निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

    इस अनूठे प्रदर्शन को लेकर स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। सत्ता पक्ष ने इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया करार दिया है, जबकि अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसे आधुनिक दौर यानी ‘जेन-जी’ शैली का विरोध प्रदर्शन बताते हुए इसका बचाव किया है। राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला पूरे देश में चर्चा और बहस का केंद्र बन गया है, जिसमें आवारा कुत्तों की समस्या और पशु अधिकारों को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार जिले में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। खंडवा के शासकीय अस्पताल के रेबीज नियंत्रण विभाग के मुताबिक बीते महीनों में सैकड़ों मामले दर्ज किए गए हैं, हालांकि सरकारी रेबीज नियंत्रण कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन के चलते पिछले कुछ वर्षों में किसी भी मरीज की जान जाने की खबर नहीं है और पीड़ितों को समय पर इलाज उपलब्ध कराया गया है।

    खंडवा में हुए इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नागरिकों की सुरक्षा के सवाल को एक बार फिर सामने ला खड़ा किया है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और प्रदर्शनकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • राखी सावंत संग बातचीत में सुनीता आहूजा ने खोले पारिवारिक राज, कोमल रानी स्वर्णकार के नाम पर मचा घमासान

    राखी सावंत संग बातचीत में सुनीता आहूजा ने खोले पारिवारिक राज, कोमल रानी स्वर्णकार के नाम पर मचा घमासान

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। हाल ही में सुनीता आहूजा और अभिनेत्री राखी सावंत के बीच हुई बातचीत के सार्वजनिक होने के बाद मनोरंजन जगत में हलचल तेज हो गई है। इस बातचीत के दौरान सुनीता ने दावा किया है कि यदि उन्होंने अपनी तलाक की अर्जी वापस नहीं ली होती तो गोविंदा अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार से शादी करने की योजना बना रहे थे।

    सुनीता आहूजा के इस सनसनीखेज दावे के सामने आने के बाद नवोदित अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार अचानक सुर्खियों में आ गई हैं। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाली कोमल रानी स्वर्णकार फिल्म इंडस्ट्री में नई कलाकार के तौर पर कदम रख रही हैं। गोविंदा ने कुछ समय पहले ही अपनी आने वाली फिल्म रूपा के लिए कोमल को मुख्य अभिनेत्री के रूप में मीडिया के सामने पेश किया था। इसके अलावा यह भी चर्चा है कि वह अभिनेता के निर्माण में बन रही एक अन्य फिल्म दुनियादारी में भी नजर आ सकती हैं।

    पारिवारिक विवाद की शुरुआत पहले भी देखने को मिली थी जब सुनीता आहूजा ने एक साक्षात्कार में कुछ तीखी टिप्पणियां की थीं। उस समय उन्होंने किसी का नाम लिए बिना नाराजगी जताई थी। हालांकि बाद में जब गोविंदा सार्वजनिक रूप से अपनी नई फिल्म की सह-कलाकार के साथ नजर आने लगे तो सोशल मीडिया पर इन बयानों को कोमल रानी से जोड़कर देखा जाने लगा। अब राखी सावंत के साथ हुई बातचीत में सीधे तौर पर नाम सामने आने से यह मामला अधिक गरमा गया है।

    सुनीता आहूजा का कहना है कि वह लंबे समय से पारिवारिक स्थिति को लेकर चुप थीं, लेकिन अपने अधिकारों और सम्मान की अनदेखी होने पर उन्होंने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के विचार तक बात पहुंच चुकी थी। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में बॉलीवुड के इस चर्चित परिवार के प्रशंसकों के बीच इस नए घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

    दूसरी ओर इस पूरे मामले और निजी जिंदगी से जुड़े आरोपों पर अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने मीडिया के समक्ष इस विषय पर चुप्पी साध रखी है। वहीं गोविंदा ने पूर्व में अपनी सह-कलाकार का बचाव करते हुए सुनीता के आरोपों का खंडन किया था और अपना पक्ष रखा था।

    गौरतलब है कि गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी को लगभग 39 वर्ष हो चुके हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। कुछ समय पूर्व कोर्ट परिसर के बाहर सुनीता आहूजा की मौजूदगी के बाद से दोनों के रिश्ते में दरार और कानूनी अलगाव की खबरें सामने आई थीं, हालांकि बाद में अर्जी वापस लेने की बात कही गई थी। फिलहाल इस नए खुलासे ने गोविंदा के निजी और व्यावसायिक जीवन से जुड़े विवाद को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

  • 82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR

    82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR


    कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ सीएसपी नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विभागीय जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला हत्या के एक आरोपी के परिवार की बेशकीमती जमीन के कथित दबाव में कराए गए सौदे से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने FIR की पुष्टि की है।

    82.86 लाख की जमीन 18.20 लाख में रजिस्ट्री का आरोप

    शिकायत और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की कीमत 82 लाख 86 हजार रुपए थी। आरोप है कि इसकी रजिस्ट्री महज 18 लाख 20 हजार रुपए में कराई गई। दस्तावेजों में 15 लाख रुपए चेक और 3.20 लाख रुपए नकद भुगतान का उल्लेख है।

    मामला कुठला थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या के केस से जुड़ा है। इस मामले में आकाश लोधी को मुख्य आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी के बाद डिफॉल्ट जमानत पर बाहर आए आकाश ने जमीन के सौदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

    DSP पर परिवार पर दबाव बनाने का आरोप

    आकाश लोधी का आरोप है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद DSP नेहा पच्चीसिया ने उसके परिवार पर जमीन बेचने के लिए दबाव बनाया। उसने दावा किया कि उसके पिता रमेश लोधी को दो दिन तक DSP के घर पर बैठाकर रखा गया। इसके बाद सरकारी वाहन से ग्राम कन्हवारा स्थित करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।

    आकाश के मुताबिक, जमीन की गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख रुपए थी, जबकि सौदा 1 करोड़ 7 लाख रुपए में तय किया गया था। आरोप है कि रजिस्ट्री के समय सिर्फ 15 लाख रुपए का चेक दिया गया और बाकी 92 लाख रुपए सात दिन में देने की बात कही गई।

    रकम नहीं मिली तो CM हेल्पलाइन में शिकायत

    आरोप के मुताबिक, बाकी रकम नहीं मिलने पर रमेश लोधी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की। उन्होंने जमीन के नामांतरण पर भी आपत्ति जताई। इसके बाद रमेश लोधी और उनके दामाद को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने का भी आरोप लगाया गया।

    शिकायत के बाद जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और IPS अधिकारी अनु बेनीवाल को जांच सौंपी गई। जांच में जमीन के सौदे, रजिस्ट्री और रकम के लेनदेन से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की गई।

    बैंक खाते में ट्रांसफर हुए 15 लाख रुपए

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपए क्षितिज राज के खाते से ट्रांसफर किए गए थे। शिकायत में क्षितिज राज को नेहा पच्चीसिया का कथित पार्टनर और संबंधी बताया गया है।

    जांच में कथित तौर पर यह भी देखा गया कि आपराधिक मामले की जांच के दौरान रमेश लोधी पर जमीन कम कीमत में बेचने का दबाव बनाया गया या नहीं।

    पहले भी विवादों में रही हैं नेहा पच्चीसिया

    DSP नेहा पच्चीसिया इससे पहले भी शिकायतों और विवादों को लेकर चर्चा में रही हैं। एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की कथित अवैध वसूली की शिकायत के बाद कटनी एसपी ने उनके ड्राइवर केशव सिंह को सस्पेंड किया था। साथ ही DSP से तीन थानों का प्रभार भी वापस लिया गया था।

    इसके अलावा हत्या के एक मामले में समय पर चालान पेश नहीं होने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिलने का मामला भी विभागीय जांच के दायरे में आया था। इसी मामले में आरोपी ने नेहा पच्चीसिया के खिलाफ न्यायालय में परिवाद पेश कर जमीन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे।

    अब पुलिस जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर

    लगातार सामने आई शिकायतों के बाद जबलपुर रेंज के आईजी के निर्देश पर मामलों की जांच कराई गई। विभागीय जांच और शिकायतों के आधार पर अब कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

    फिलहाल पुलिस जमीन के सौदे, कथित दबाव और बैंक खातों के जरिए हुए लेनदेन की जांच कर रही है। FIR में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

  • टीवी इंडस्ट्री में नए विवाद की एंट्री, सान्वी तलवार के आरोपों पर करण कुंद्रा की चुप्पी बरकरार

    टीवी इंडस्ट्री में नए विवाद की एंट्री, सान्वी तलवार के आरोपों पर करण कुंद्रा की चुप्पी बरकरार

    नई दिल्ली । टेलीविजन अभिनेत्री सान्वी तलवार ने अपने पूर्व सह-कलाकार करण कुंद्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए मनोरंजन जगत में नई चर्चा छेड़ दी है। एक हालिया इंटरव्यू में सान्वी ने दावा किया कि वर्ष 2015 में एक टीवी धारावाहिक की शूटिंग के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक दृश्य की तैयारी के दौरान बिना उनकी सहमति के उन्हें किस किया गया, जिसके बाद सेट पर विवाद की स्थिति बन गई।

    सान्वी तलवार के अनुसार, जिस दृश्य की शूटिंग होनी थी, उसके लिए निर्देशक ने अभी शूट शुरू करने का संकेत भी नहीं दिया था। उनका दावा है कि इसी दौरान करण कुंद्रा ने बिना अनुमति उन्हें किस किया। अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें थप्पड़ मार दिया। इसके बाद कुछ समय पश्चात कथित रूप से करण कुंद्रा ने भी उन्हें थप्पड़ मारा। सान्वी का कहना है कि इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    अभिनेत्री ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय सेट पर मौजूद अधिकांश लोगों ने उनका खुलकर समर्थन नहीं किया। उनके अनुसार, विवाद के दौरान उन्हें अपशब्द भी कहे गए और वे गिर पड़ीं। सान्वी ने कहा कि बाद में निर्माता एकता कपूर ने उनसे बातचीत की, उनका पक्ष सुना और स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास किया। उन्होंने दावा किया कि एकता कपूर ने करण कुंद्रा की ओर से उनसे माफी भी मांगी थी, जिससे काम का माहौल कुछ हद तक सहज हो सका।

    सान्वी ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि उस समय उन्हें लगा था कि करण कुंद्रा का व्यवहार सामान्य पेशेवर सीमाओं से अलग है। इसी वजह से उन्होंने एक साझा परिचित के माध्यम से उस समय करण की कथित गर्लफ्रेंड रहीं अनुषा दांडेकर को अपनी चिंता से अवगत कराया। अभिनेत्री का आरोप है कि इसके बाद उनके लिए सेट का माहौल और अधिक असहज हो गया तथा उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

    यह विवाद उस टीवी धारावाहिक से जुड़ा बताया जा रहा है जिसमें करण कुंद्रा और सान्वी तलवार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। उस समय यह शो दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा था। हालांकि अभिनेत्री द्वारा लगाए गए आरोप कई वर्ष बाद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं, जिससे एक बार फिर पुराने घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

    फिलहाल करण कुंद्रा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक या सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले पर उनका पक्ष आना बाकी है। किसी भी विवाद में सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकलना उचित माना जाता है। मनोरंजन जगत में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी हैं और अब सभी की नजर करण कुंद्रा की संभावित प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

  • शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    शहीद दिवस रैली से ठीक पहले कामरहाटी के कद्दावर विधायक ने छोड़ी पार्टी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगा कर दी खुली चुनौती

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस में आगामी 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से ठीक पहले एक बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा सपरिवार समन जारी किए जाने के बाद कामरहाटी विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ और कद्दावर विधायक मदन मित्रा ने मंगलवार रात को ही पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व से दूरी बना ली और सुबह होते ही ममता बनर्जी के आधिकारिक कालीघाट गुट को औपचारिक रूप से अलविदा कह दिया। तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद मदन मित्रा ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कई सनसनीखेज और गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे राज्य का सियासी पारा पूरी तरह से गरमा गया है।

    एक प्रमुख बांग्ला समाचार चैनल को दिए गए अपने विस्तृत साक्षात्कार में पूर्व तृणमूल नेता ने पार्टी के भीतर व्याप्त सांगठनिक ढांचे और नेतृत्व की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने बेहद आक्रामक लहजे में खुले मंच से यह दावा किया कि वह इस तथ्य को पूरी तरह साबित कर सकते हैं कि वर्तमान सत्ता पक्ष की टीम में शामिल प्रत्येक दस में से आठ लोग भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। उन्होंने स्वयं को पूरी तरह से पाक-साफ बताते हुए नेतृत्व को खुली चुनौती दी कि यदि कोई भी व्यक्ति उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमाणित कर देता है, तो वह राजनीति छोड़ने के साथ-साथ अत्यंत कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने विपक्ष के खेमे में जाने और वहां मौजूद अन्य नेताओं के संदर्भ में पूछे गए सवालों पर स्पष्ट किया कि परिस्थितिजन्य राजनीति के तहत बड़े सांगठनिक बदलाव अब अवश्यंभावी हो चुके हैं।

    अभिषेक बनर्जी के पार्टी में तेजी से बढ़ते प्रभाव और उनके काम करने के तौर-तरीकों को मुख्य निशाना बनाते हुए मदन मित्रा ने भूतकाल की राजनीतिक घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अभिषेक बनर्जी ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था, तब उनके सामने संगठन में पार्थ चटर्जी, मुकुल रॉय और सुब्रत बख्शी जैसे अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ चेहरे मौजूद थे। आरोप के अनुसार, इन वरिष्ठ चेहरों को आगे रखकर पृष्ठभूमि से पूरी तरह से समानांतर सत्ता चलाने का प्रयास किया गया। मित्रा ने वर्तमान सांगठनिक गतिविधियों को बेहद नकारात्मक बताते हुए आरोप लगाया कि समकालीन राजनीति में इतनी जटिल और रणनीतिक प्रवृत्तियां किसी अन्य नेता में नहीं हैं और उनके सामने विरोधी राजनीतिक दल जैसे माकपा और भाजपा के नेता भी काफी पीछे नजर आते हैं।

    राजनीतिक हलकों में इस प्रकार के तीखे बयानों के बाद संभावित सुरक्षा खतरों और पार्टी की ओर से होने वाली किसी भी जवाबी कार्रवाई के डर के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का मदन मित्रा ने बेहद बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब उनके मन से किसी भी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है और वह मानसिक रूप से पूरी तरह शांत हैं। उन्होंने आगे पलटवार करते हुए कहा कि उनके ऊपर किसी भी प्रकार का दबाव बनाने या संगठनात्मक हमला करने का साहस विरोधियों में नहीं है। अभिषेक बनर्जी के क्षेत्रीय जनाधार पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि उनके स्थानीय क्षेत्र के नागरिक भी उनके साथ खड़े नहीं हैं, जिसके संबंध में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक आंकड़ों का हवाला दिया गया है, जिसका आज तक संगठन की ओर से कोई आधिकारिक खंडन जारी नहीं किया जा सका है।

  • ऑस्ट्रेलिया में ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम पर विवाद गहराया, आयोजकों ने कांग्रेस के आरोप खारिज किए, बयान वापस लेने की उठाई मांग

    ऑस्ट्रेलिया में ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम पर विवाद गहराया, आयोजकों ने कांग्रेस के आरोप खारिज किए, बयान वापस लेने की उठाई मांग

    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कार्यक्रम में शामिल लोगों को पैसे देकर बुलाए जाने के कांग्रेस के आरोपों पर आयोजकों ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले भारतीय मूल के लोगों को किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया गया था। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय की स्वैच्छिक भागीदारी का परिणाम था और इसे लेकर लगाए गए आरोप समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले हैं।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि 9 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों को पैसे देकर और चार्टर्ड विमानों के माध्यम से लाया गया था। इसके बाद कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इसी तरह के आरोप दोहराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक प्रोत्साहन देकर कार्यक्रम में शामिल कराया गया।

    इन आरोपों के बाद कार्यक्रम के आयोजकों ने विस्तृत प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों ने अपनी इच्छा से उपस्थिति दर्ज कराई थी। आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन के लिए किसी भी व्यक्ति को भुगतान नहीं किया गया और न ही भीड़ जुटाने के लिए किसी प्रकार की वित्तीय व्यवस्था की गई। उनका कहना है कि भारतीय समुदाय ने स्वयं इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।

    आयोजकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और संबंधित बयान वापस लेने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इस तरह के आरोप केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के हजारों लोगों की गरिमा और योगदान पर भी सवाल खड़े करते हैं। आयोजकों का दावा है कि कार्यक्रम का खर्च न तो भारतीय जनता पार्टी ने उठाया, न भारत सरकार ने और न ही ऑस्ट्रेलिया सरकार ने।

    बताया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 और 10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर थे। इसी दौरान मेलबर्न में आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में लगभग 30 हजार लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई थी, जिसे भारतीय समुदाय के बड़े आयोजनों में से एक माना गया।

    दूसरी ओर, कांग्रेस अपने आरोपों पर कायम है और सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो तथा अन्य दावों का हवाला देते हुए कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रही है। हालांकि आयोजकों ने इन दावों को तथ्यों से परे बताते हुए स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसे आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बिना ठोस साक्ष्यों के लगाए गए आरोपों से समुदाय की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। एक ओर कांग्रेस कार्यक्रम की पारदर्शिता पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी ओर आयोजक आरोपों को असत्य बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं। ऐसे में अब इस विवाद को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • पीएम मोदी से ‘गुप्त मुलाकात’ के दावे पर सियासी घमासान, संजय राउत के बयान से मचा बवाल, अभिजीत दीपके ने किया खंडन

    पीएम मोदी से ‘गुप्त मुलाकात’ के दावे पर सियासी घमासान, संजय राउत के बयान से मचा बवाल, अभिजीत दीपके ने किया खंडन

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद उस समय खड़ा हो गया जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया। राउत ने कहा कि उन्हें कुछ ऐसी जानकारियां और तस्वीरें प्राप्त हुई हैं, जिनमें अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अभिजीत दीपके के बीच कथित मुलाकात होने की बात कही जा रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

    संजय राउत ने अपने बयान में कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें ऐसी तस्वीरें भेजी हैं, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे अमेरिका में हुई एक बैठक से जुड़ी हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्वयं कोई सीधा आरोप नहीं लगा रहे हैं और केवल उनके पास पहुंची सूचनाओं का उल्लेख कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय में वह और जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं तथा तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

    राउत का यह बयान ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेतृत्व को लेकर महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में चर्चा बढ़ी हुई है। हाल के दिनों में इस संगठन की गतिविधियों और अभियानों ने सोशल मीडिया सहित राजनीतिक मंचों पर भी ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में कथित मुलाकात को लेकर दिया गया बयान तुरंत राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

    विवाद बढ़ने के बाद अभिजीत दीपके ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने संजय राउत के दावे को आश्चर्यजनक बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी मुलाकात की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह एक साधारण छात्र हैं और प्रधानमंत्री के सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल स्तर को देखते हुए ऐसी मुलाकात की कल्पना भी करना कठिन है। उन्होंने यह भी संभावना जताई कि यदि कोई तस्वीर सामने आई है तो वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तकनीक से तैयार की गई हो सकती है।

    दीपके ने कहा कि उनका संगठन स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और उसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी गतिविधियां किसी दल विशेष के समर्थन या विरोध पर आधारित नहीं हैं। उनका कहना था कि यदि कोई राजनीतिक दल उनके विचारों का समर्थन करना चाहता है तो यह उसका निर्णय हो सकता है, लेकिन संगठन किसी राजनीतिक पार्टी के साथ औपचारिक रूप से नहीं जुड़ेगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के कारण अपुष्ट दावे और तस्वीरें तेजी से चर्चा का विषय बन जाती हैं। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता। यही कारण है कि इस विवाद में भी दोनों पक्षों के बयानों के बाद अब ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि कथित तस्वीरों और दावों की सत्यता क्या है।

    फिलहाल इस मामले में कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। हालांकि संजय राउत के बयान और अभिजीत दीपके के खंडन के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है। आने वाले दिनों में यदि इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी सामने आती है तो विवाद की दिशा और प्रभाव दोनों स्पष्ट हो सकेंगे।