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  • मुख्यमंत्री पर आरोपों को बीजेपी ने बताया बेबुनियाद, हेमंत खंडेलवाल बोले- विकास से घबराकर कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार की राजनीति

    मुख्यमंत्री पर आरोपों को बीजेपी ने बताया बेबुनियाद, हेमंत खंडेलवाल बोले- विकास से घबराकर कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार की राजनीति

    मध्य प्रदेश:  की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेकर लगाए गए आरोपों पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रही है, लेकिन प्रदेश की जनता ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं जिससे जनता के बीच गलत संदेश पहुंचे। उनके अनुसार आरोपों में प्रस्तुत की गई जानकारी वास्तविक दस्तावेजों और रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती।

    खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की भूमि संबंधी जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में चुनावी नामांकन के दौरान जो संपत्ति विवरण प्रस्तुत किया गया था, उसमें और वर्तमान स्थिति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम दर्ज भूमि का क्षेत्रफल पहले जैसा ही है और उनकी पत्नी के नाम दर्ज कृषि भूमि में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। पार्टी का दावा है कि आरोपों के माध्यम से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने उन व्यावसायिक संस्थाओं और भूमि स्वामित्व से जुड़े आरोपों का भी खंडन किया जिनका उल्लेख राजनीतिक विवाद में किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों और संपत्तियों का नाम लेकर आरोप लगाए गए हैं, उनके संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड सार्वजनिक हैं और उनमें किसी प्रकार की अनियमितता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री संबंधित एक कंपनी के निदेशक पद से वर्षों पहले अलग हो चुके थे और उसके बाद की गतिविधियों से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

    मुख्यमंत्री के परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी भाजपा ने आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज भूमि और संपत्तियों के संबंध में जो दावे किए गए हैं, वे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। साथ ही जिन रिश्तेदारों का उल्लेख आरोपों में किया गया है, उनका स्वतंत्र अस्तित्व है और उनके कार्यों को मुख्यमंत्री या उनके परिवार से जोड़ना उचित नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित पक्ष स्वयं भी कानूनी और सार्वजनिक स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।

    भाजपा ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश सरकार विकास, निवेश, उद्योग, कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है, जिससे विपक्ष असहज महसूस कर रहा है। इसी कारण ध्यान भटकाने के लिए आरोपों की राजनीति की जा रही है।

    खंडेलवाल ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस का रवैया हमेशा नकारात्मक रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब-जब प्रदेश में पिछड़े वर्ग से आने वाले नेताओं ने नेतृत्व संभाला, तब-तब उन्हें राजनीतिक रूप से घेरने और कमजोर करने की कोशिश की गई। भाजपा का आरोप है कि वर्तमान मुख्यमंत्री के खिलाफ भी इसी मानसिकता के तहत अभियान चलाया जा रहा है।

    प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा जहां आरोपों को निराधार बता रही है, वहीं विपक्ष अपने दावों पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

  • संचिता उगले मौत मामले में नया मोड़, पिता ने लगाए गंभीर आरोप, मानसिक दबाव की बात आई सामने

    संचिता उगले मौत मामले में नया मोड़, पिता ने लगाए गंभीर आरोप, मानसिक दबाव की बात आई सामने

    नई दिल्ली । टीवी और मनोरंजन जगत से जुड़ी अभिनेत्री Sanchita Ugale की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 14 जून को उनके नालासोपारा स्थित आवास में मृत पाए जाने के बाद अब उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो  पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

    मृतका के पिता मछिंद्र उगले ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि उनकी बेटी लंबे समय से मानसिक तनाव में थी। उन्होंने कहा कि हालांकि संचिता ने कभी स्पष्ट रूप से अपनी परेशानी साझा नहीं की, लेकिन उनके व्यवहार में बदलाव लगातार देखा जा रहा था। कभी वह सामान्य और खुश नजर आती थीं, तो कभी अचानक उदास और चिंतित हो जाती थीं। परिवार को यह अंदाजा हो गया था कि वह किसी गंभीर दबाव में हैं।

    परिवार के अनुसार, स्थिति को देखते हुए वे लगातार संचिता के साथ रहने की कोशिश करते थे ताकि वह अकेली न रहें। पिता ने बताया कि घर के सदस्य उनकी मानसिक स्थिति को लेकर सतर्क रहते थे और उन्हें सामान्य जीवन में बनाए रखने का प्रयास करते थे। हालांकि परिवार को कभी यह अंदेशा नहीं था कि स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है।

    पिता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी पर लंबे समय से किसी प्रकार का दबाव बनाया जा रहा था। उनके अनुसार, संचिता ने कुछ बातें परिवार से साझा की थीं, जिनसे यह संकेत मिलता था कि वह मानसिक रूप से परेशान थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर बार-बार कुछ मांगें की जा रही थीं, जिनमें आर्थिक दबाव की बातें भी शामिल थीं। परिवार का मानना है कि इन परिस्थितियों ने उनकी बेटी को गहरे तनाव में धकेल दिया।

    घटना 14 जून की शाम नालासोपारा स्थित घर में सामने आई, जब संचिता अपने कमरे में बंद थीं। दरवाजा अंदर से बंद था और बाद में परिवार द्वारा दरवाजा खोलने पर उन्हें गंभीर हालत में पाया गया। तुरंत अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे परिवार और उनके परिचितों में शोक का माहौल है।

    मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि किन परिस्थितियों में यह घटना हुई और क्या वास्तव में किसी तरह का दबाव या प्रताड़ना इस मामले से जुड़ा है। पुलिस सभी डिजिटल और व्यक्तिगत पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।

    परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि उन्हें अभी तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि सच सामने आए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

    यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ जुड़े आरोपों के कारण जांच का दायरा भी बढ़ गया है। पुलिस की आगे की कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

    ल्ली । टीवी और मनोरंजन जगत से जुड़ी अभिनेत्री Sanchita Ugale की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 14 जून को उनके नालासोपारा स्थित आवास में मृत पाए जाने के बाद अब उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

    मृतका के पिता मछिंद्र उगले ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि उनकी बेटी लंबे समय से मानसिक तनाव में थी। उन्होंने कहा कि हालांकि संचिता ने कभी स्पष्ट रूप से अपनी परेशानी साझा नहीं की, लेकिन उनके व्यवहार में बदलाव लगातार देखा जा रहा था। कभी वह सामान्य और खुश नजर आती थीं, तो कभी अचानक उदास और चिंतित हो जाती थीं। परिवार को यह अंदाजा हो गया था कि वह किसी गंभीर दबाव में हैं।

    परिवार के अनुसार, स्थिति को देखते हुए वे लगातार संचिता के साथ रहने की कोशिश करते थे ताकि वह अकेली न रहें। पिता ने बताया कि घर के सदस्य उनकी मानसिक स्थिति को लेकर सतर्क रहते थे और उन्हें सामान्य जीवन में बनाए रखने का प्रयास करते थे। हालांकि परिवार को कभी यह अंदेशा नहीं था कि स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है।

    पिता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी पर लंबे समय से किसी प्रकार का दबाव बनाया जा रहा था। उनके अनुसार, संचिता ने कुछ बातें परिवार से साझा की थीं, जिनसे यह संकेत मिलता था कि वह मानसिक रूप से परेशान थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर बार-बार कुछ मांगें की जा रही थीं, जिनमें आर्थिक दबाव की बातें भी शामिल थीं। परिवार का मानना है कि इन परिस्थितियों ने उनकी बेटी को गहरे तनाव में धकेल दिया।

    घटना 14 जून की शाम नालासोपारा स्थित घर में सामने आई, जब संचिता अपने कमरे में बंद थीं। दरवाजा अंदर से बंद था और बाद में परिवार द्वारा दरवाजा खोलने पर उन्हें गंभीर हालत में पाया गया। तुरंत अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे परिवार और उनके परिचितों में शोक का माहौल है।

    मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि किन परिस्थितियों में यह घटना हुई और क्या वास्तव में किसी तरह का दबाव या प्रताड़ना इस मामले से जुड़ा है। पुलिस सभी डिजिटल और व्यक्तिगत पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।

    परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि उन्हें अभी तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि सच सामने आए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

    • एक साल से बंद पड़े छात्रसंघ कक्ष का ताला खुलते ही सामने आया चौंकाने वाला सच, नकदी और रिवॉल्वर बरामद होने पर सियासत गरमाई

      एक साल से बंद पड़े छात्रसंघ कक्ष का ताला खुलते ही सामने आया चौंकाने वाला सच, नकदी और रिवॉल्वर बरामद होने पर सियासत गरमाई

      नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित प्रतिष्ठित सुरेंद्रनाथ कॉलेज इन दिनों एक सनसनीखेज मामले को लेकर चर्चा के केंद्र में है। कॉलेज परिसर के एक वर्ष से बंद पड़े छात्रसंघ कक्ष को खोले जाने के बाद वहां से बड़ी मात्रा में नकदी, एक रिवॉल्वर और अन्य सामग्री मिलने का दावा किया गया है। इस घटनाक्रम ने न केवल शैक्षणिक जगत को चौंकाया है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। मामले के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है और जांच की मांग तेज हो गई है।

      जानकारी के अनुसार कॉलेज प्रशासन ने राज्य सरकार के निर्देशों के बाद छात्रसंघ से संबंधित कक्षों और निधियों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी क्रम में लंबे समय से बंद पड़े छात्रसंघ कक्ष को खोला गया। बताया जा रहा है कि कमरे की सफाई और निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को वहां रखी अलमारियों और बक्सों में बड़ी मात्रा में नकदी मिली। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार बरामद रकम करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, लंबे समय तक बंद रहने के कारण नकदी का एक हिस्सा खराब अवस्था में पाया गया।

      मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। निरीक्षण के दौरान कमरे से एक रिवॉल्वर और कुछ अन्य वस्तुएं भी मिलने का दावा किया गया है। इन बरामदगी की खबर सामने आते ही कॉलेज परिसर और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई। शिक्षा संस्थान में इस तरह की सामग्री मिलने को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर भी इस पूरे मामले की जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

      घटना के बाद भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि बरामद नकदी की उत्पत्ति और उसके संभावित उपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय सहित केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने की मांग उठाई है। भाजपा का आरोप है कि यह मामला केवल कॉलेज प्रशासन तक सीमित नहीं हो सकता और इसकी गहन जांच आवश्यक है।

      दूसरी ओर, मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया लगातार बढ़ रही है। विपक्षी दल इस घटना को राज्य की शिक्षा व्यवस्था और संस्थागत पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख स्थान ले सकता है।

      कॉलेज प्रशासन का कहना है कि बरामद सामग्री की सूचना संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि नकदी और अन्य सामान वहां कब से रखा गया था तथा उसका वास्तविक स्रोत क्या है।

      विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल पूरे मामले पर सभी की निगाहें जांच एजेंसियों और प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं।

    • US: मैक्सिको के बड़े नेताओं-अधिकारियों पर ड्रग तस्करी के आरोप, गवर्नर समेत 10 पर केस दर्ज

      US: मैक्सिको के बड़े नेताओं-अधिकारियों पर ड्रग तस्करी के आरोप, गवर्नर समेत 10 पर केस दर्ज


      न्यूयॉर्क ।
      अमेरिका (America) में मैक्सिको (Mexico) के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों पर ड्रग तस्करी (Drug smuggling) के गंभीर आरोप लगे हैं। न्यूयॉर्क की एक अदालत में दाखिल आरोपपत्र में इन अधिकारियों पर अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेजने और हथियारों से जुड़े अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मैक्सिको के सीनालोआ राज्य (Sinaloa State.) के गवर्नर रुबेन रोचा मोया (Governor Ruben Rocha Moya) और नौ अन्य मौजूदा व पूर्व सरकारी अधिकारी इस मामले में आरोपी बनाए गए हैं। इन सभी पर ड्रग तस्करी और हथियारों से जुड़े अपराधों का केस दर्ज किया गया है। हालांकि अभी तक इनमें से किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

      ड्रग कार्टेल से गहरे संबंध का आरोप
      आरोपपत्र में कहा गया है कि ये अधिकारी कुख्यात सिनालोआ कार्टेल के साथ मिलकर काम कर रहे थे। यह कार्टेल लंबे समय से अमेरिका में फेंटेनिल, हेरोइन, कोकीन और मेथामफेटामाइन जैसी खतरनाक ड्रग्स की तस्करी करता रहा है। बताया गया है कि कुछ आरोपी इस कार्टेल की हिंसक गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं।

      ‘एल चापो’ के बेटों से जुड़ा नेटवर्क
      जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी उस गुट से जुड़े थे, जिसे कुख्यात ड्रग माफिया जोकिन ‘एल चापो’ गुजमैन के बेटे चलाते हैं। ‘एल चापो’ पहले ही अमेरिका की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है।

      अमेरिका का बड़ा बयान
      अमेरिका के अटॉर्नी जे क्लेटन ने सीनालोआ कार्टेल को ‘बेहद खतरनाक आपराधिक संगठन’ बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्टेल दशकों से अमेरिका में ड्रग्स फैलाता रहा है और भ्रष्ट नेताओं व अधिकारियों की मदद के बिना यह संभव नहीं होता। इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनमें से कुछ मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम की पार्टी ‘मोरेना’ से जुड़े बताए जा रहे हैं। हालांकि अन्य कई आरोपी किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं।

      मैक्सिको की सरकार ने आरोपों को नकारा
      मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने इन आरोपों को लेकर कहा कि उनकी सरकार को अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका में किसी मैक्सिकन नागरिक के खिलाफ जांच होती है, तो उसके सबूत मैक्सिको की अटॉर्नी जनरल ऑफिस के साथ साझा किए जाने चाहिए।

      भ्रष्टाचार के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई
      इस मामले से पहले अमेरिका के मैक्सिको में राजदूत रॉन जॉनसन ने संकेत दिया था कि अमेरिका मैक्सिको के उन अधिकारियों के खिलाफ अभियान चलाएगा, जिनके संबंध संगठित अपराध से हैं।

    • जांच खत्म करे अमेरिका…. भारत ने अतिरिक्त उत्पादन के आरोपों को किया खारिज

      जांच खत्म करे अमेरिका…. भारत ने अतिरिक्त उत्पादन के आरोपों को किया खारिज


      नई दिल्ली।
      भारत (India) ने अमेरिका (America) के व्यापार प्रतिनिधित (यूएसटीआर-USTR) की ओर से लगाए गए आरोपों को सख्ती के साथ खारिज किया। उन्होंने भारत समेत कई देशों पर अतिरिक्त उत्पादन (Excess Production) और औद्योगिक असंतुलन (Industrial Imbalance) का आरोप लगाया था। भारत ने कहा कि जांच शुरू करने वाले नोटिस में इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस कारण नहीं दिया गया है।

      भारत ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि वह यह निष्कर्ष निकाले कि भारत ने कोई नकारात्मक काम नहीं किया है और उसके खिलाफ जो जांच चल रही है, उसे समाप्त कर दे। यह बात भारत सरकार ने अपने जवाब में यूएसटीआर को बताई।

      11 मार्च को अमेरिका ने अपने व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ जांच शुरू करने की घोषणा की। इनमें भारत, चीन, जापान और यूरोपीय संघ शामिल हैं। इस जांच का उद्देश्य उन ‘अनुचित विदेशी नीतियों या तरीकों’ को देखना और उन पर कार्रवाई करना है, जिनसे अमेरिकी विनिर्माण उद्योग को नुकसान होता है।

      अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने जांच शुरू करने की घोषणा की। यह जांच 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301(बी) के तहत की गई है। इस जांच में अलग-अलग देशों की ‘नीतियों, कार्यों और तरीकों’ की जांच की जाएगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि क्या उन देशों में उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता है और विनिर्माण क्षेत्र में असंतुलन है।


      जांच के दायर में कौन-कौन देश?

      इस जांच के दायरे में आने वाली अर्थव्यवस्थाएं हैं- बांग्लादेश, कंबोडिया, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, इंडोनेशिया, जापान, कोरिया, मलयेशिया, मेक्सिको, नॉर्वे, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम।


      अमेरिकी जांच पर भारत ने क्या कहा?

      अमेरिका के जांच नोटिस के जवाब में भारत सरकार ने कहा कि वह इस नोटिस में लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह और सख्ती से खारिज करती है। भारत ने कहा कि यह जांच नोटिस सिर्फ बड़े आर्थिक आंकड़ों पर आधारित है। इसमें भारत सरकार की किसी खास नीति या काम का नाम नहीं बताया गया है, जिसे गलत या भेदभावपूर्ण कहा जा सके या जो अमेरिका के व्यापार को नुकसान पहुंचाता हो, जैसा कि कानून की धारा 301(b) में जरूरी है।

      भारत ने कहा है कि नोटिस में इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस कारण या शुरुआती सबूत नहीं दिए गए हैं। यह दावा कि भारत के बड़े उद्योगों में ‘जरूरत से ज्यादा उत्पादन क्षमता’ है और इससे अमेरिका के साथ व्यापार में अधिक लाभ (ट्रेड सरप्लस) होता है, उसके समर्थन में कोई प्रमाण नहीं दिया गया है।

      भारत ने कहा कि यह जांच 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 और 302 के नियमों के अनुसार सही तरीके से शुरू नहीं की गई है। इसलिए भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से अनुरोध किया है कि वह भारत के पक्ष में फैसला दे, जांच को खत्म करे और इसे तुरंत बंद कर दे।

      भारत ने आगे कहा है कि चूंकि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू हो चुकी है, इसलिए किसी भी व्यापारिक चिंता को इसी बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि ऐसे मुद्दों का समाधान एकतरफा कदमों से नहीं, बल्कि आपसी बातचीत के ढांचे के भीतर होना चाहिए।

    • रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूसी तेल खरीदने के आरोपों को बताया पूरी तरह झूठ, दी सफाई

      रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूसी तेल खरीदने के आरोपों को बताया पूरी तरह झूठ, दी सफाई


      नई दिल्ली।
      रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries- RIL) ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें दावा किया गया था कि रूसी तेल (Russian oil) से लदे तीन जहाज उसकी जामनगर रिफाइनरी (Jamnagar Refinery) की ओर जा रहे हैं। RIL ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस रिपोर्ट को “पूरी तरह से झूठा” बताते हुए कहा कि पिछले लगभग तीन हफ्तों में उसकी रिफाइनरी को रूसी तेल का कोई कार्गो नहीं मिला है और न ही जनवरी में कोई रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी होने वाली है।


      पत्रकारिता पर नाराजगी

      कंपनी ने आगे कहा, “हमें गहरा दुख है कि जो लोग निष्पक्ष पत्रकारिता के अग्रणी होने का दावा करते हैं, उन्होंने RIL के इस खंडन की अनदेखी की कि वह जनवरी में डिलीवरी के लिए कोई रूसी तेल नहीं खरीद रही है। उन्होंने हमारी छवि को धूमिल करने वाली एक गलत रिपोर्ट प्रकाशित की।”


      क्या आरोप लगाया गया था?

      2 जनवरी को, ब्लूमबर्ग ने खबर दी कि कम से कम तीन टैंकर, जिनमें 2.2 मिलियन बैरल यूरल्स (रूसी कच्चा तेल) भरा हुआ था, आरआईएल के जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे थे और संभवतः इसी महीने (जनवरी) में पहुंचने वाले थे।

      इसने एनालिटिक्स फर्म ‘कपलर’ के डेटा का हवाला दिया, जो कप्तानों द्वारा भेजे गए अपने वर्तमान स्थान और आगामी डिस्चार्ज बंदरगाहों के विवरण वाले लाइव सिग्नल के आधार पर जहाजों की आवाजाही पर नज़र रखती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अंतिम गंतव्य बदल सकते हैं ,क्योंकि जहाज भारत के पास पहुंचते हैं।

      कंपनी के प्रवक्ता ने क्या कहा
      एक रिलायंस प्रवक्ता ने यह स्पष्ट किया कि कार्गो कंपनी द्वारा खरीदे गए थे और यह भी कहा कि जनवरी में डिलीवरी के लिए रूसी कच्चे तेल की कोई प्रतिबद्ध शिपमेंट नहीं है। शुरुआत में अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाने के बाद दूर हटने के बाद, रिलायंस ने नवंबर में घोषणा की कि वह अपनी रिफाइनरी के निर्यात-केंद्रित हिस्से में रूसी कच्चे तेल का उपयोग बंद कर देगा। तब से इसने घरेलू उपयोग के लिए गैर-प्रतिबंधित रूसी उत्पादकों से तेल की आपूर्ति शुरू कर दी है। रोसनेफ्ट पहले इस रिफाइनरी का रूसी तेल का सबसे बड़ा स्रोत था, जो प्रति दिन 5,00,000 बैरल आपूर्ति के एक दीर्घकालिक समझौते पर आधारित था।


      रुसी तेल पर ट्रंप की नजर तिरछी

      हाल के वर्षों में ओपेक उत्पादक से तेल के लिए एक प्रमुख गंतव्य रहे भारत को, रूस के साथ अपने व्यापार के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के प्रमुख सदस्यों की कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ा है। ऐसी आलोचना, जिसका जवाब सार्वजनिक रूप से अवज्ञा से मिला है। इस अनिश्चितता के कारण देश की रिफाइनरियों ने अपनी खरीद कम कर दी है, और पिछले महीने आयात तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया।


      दुनिया की शीर्ष खरीदार थी रिलायंस

      अरबपति मुकेश अंबानी के नियंत्रण वाली रिलायंस, कपलर के आंकड़ों के अनुसार, 2024 से 2025 के अधिकांश समय तक रूसी कच्चे तेल का दुनिया की शीर्ष खरीदार थी। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी परिसर को रूसी तेल की डिलीवरी पिछले साल जनवरी से नवंबर की अवधि में प्लांट के आयात का 40% से अधिक थी।

      कपलर के डेटा के अनुसार, इन कार्गो पर व्यापारिक कंपनियों अलगफ मरीन डीएमसीसी, रेडवुड ग्लोबल सप्लाई एफजेड एलएलसी, रसएक्सपोर्ट और एथोस एनर्जी द्वारा आपूर्ति किए जाने का निशान लगा है। अलगफ मरीन और रेडवुड ग्लोबल पर यूके द्वारा प्रतिबंध लगाया गया है, और पूर्व लुकोइल की ट्रेडिंग इकाई लिटास्को की मध्य पूर्वी शाखा की उत्तराधिकारी कंपनी है।

      रिलायंस एकमात्र भारतीय रिफाइनर नहीं है, जो रूसी कच्चा तेल ले रहा है, राज्य स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन भी गैर-प्रतिबंधित विक्रेताओं से कार्गो उठा रहे हैं। उन्हें भारी छूट, कम रिफाइनिंग मार्जिन और वाशिंगटन के साथ व्यापार वार्ता की स्थिति में अनिश्चितता ने आकर्षित किया है।

    • ‘मराठी मुंबई’ बचाने की चुनौती, किरीट सोमैया ने शिवसेना और विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप

      ‘मराठी मुंबई’ बचाने की चुनौती, किरीट सोमैया ने शिवसेना और विपक्ष पर लगाए गंभीर आरोप


      मुंबई। मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों से पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता किरीट सोमैया ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट), कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM पर ‘मराठी मुंबई’ को ‘मुस्लिम मुंबई’ बनाने की साजिश का आरोप लगाया। सोमैया ने दावा किया कि 1947 में मुंबई की मुस्लिम आबादी 8.8% थी, जो 2011 तक बढ़कर 20.58% हो गई और वर्तमान में लगभग 25% तक पहुँच चुकी है। उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि 2050 तक मुस्लिम आबादी 30% और हिंदू आबादी 50% हो जाएगी।

      किरीट सोमैया ने शिवसेना और उद्धव ठाकरे गुट पर कोविड काल के दौरान कफन और बॉडी बैग घोटाले का भी आरोप लगाया।

      उन्होंने बताया कि पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने 1,500 रुपए में उपलब्ध बॉडी बैग की जगह 6,719 रुपए प्रति बैग की दर से ठेका कंपनी को दिया, जिससे 2,000 करोड़ रुपए का कथित घोटाला हुआ। सोमैया ने कहा कि किशोरी पेडनेकर इस मामले में जमानत पर हैं, बावजूद इसके उद्धव ठाकरे ने उन्हें चुनावी टिकट दिया।

      उन्होंने जोर देकर कहा, हम मुंबई को मुस्लिम नहीं होने देंगे। सोमैया ने जनसंख्या आंकड़ों, मेयर पद और चुनावी साजिशों को लेकर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।