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  • Pakistan: ईशनिंदा के आरोप के बाद भड़की हिंसा… डर के मारे 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों ने छोड़ा गांव

    Pakistan: ईशनिंदा के आरोप के बाद भड़की हिंसा… डर के मारे 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों ने छोड़ा गांव


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) के पंजाब प्रांत (Punjab Province) में एक ईसाई व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगने के बाद मुस्लिम भीड़ ने उसके घर और दुकान में आग लगा दी. घटना के बाद हिंसा (Violence) की आशंका से 35 से ज्यादा ईसाई परिवारों (Christian families) को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस्लामाबाद में 16 अक्टूबर को एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना पंजाब के घड़ियाल कलां गांव की है, जहां 40 वर्षीय ईसाई व्यक्ति कामरान मसीह एक छोटी फार्मेसी चलाते हैं।

    रिपोर्ट के अनुसार, घटना से एक दिन पहले पुलिस ने कामरान मसीह को गिरफ्तार किया था. स्थानीय मुसलमानों ने उन पर व्हाट्सऐप ग्रुप में ईशनिंदा से जुड़ा वीडियो साझा करने का आरोप लगाया था. ‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल-मॉर्निंग स्टार न्यूज’ ने एक सूत्र के हवाले से बताया कि मसीह की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही उनके परिवार और गांव के अन्य ईसाई परिवार भीड़ के हमले के डर से घर छोड़कर भागने लगे. सूत्र के मुताबिक, कई मुसलमान मसीह की दुकान और घर के पास इकट्ठा हुए, विरोध प्रदर्शन किया और दोनों इमारतों में आग लगा दी।


    पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों पर उठे सवाल

    ‘क्रिश्चियन डेली इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मानवाधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों की आलोचना की है. उनका कहना है कि इन कानूनों का इस्तेमाल निजी विवादों और दूसरे झगड़ों में किया जा सकता है, जिसका सबसे बुरा असर धार्मिक अल्पसंख्यकों पर पड़ता है. 22 जुलाई को एक प्रमुख अल्पसंख्यक समूह ने पाकिस्तान पर इन कानूनों के दुरुपयोग को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया था. समूह ने झूठे आरोपों, आरोपियों के खिलाफ भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यकों को ऐसी घटनाओं के नतीजों से बचाने में नाकामी का मुद्दा उठाया।


    मानवाधिकार संगठन ने न्याय व्यवस्था पर उठाए सवाल

    ‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी’ (वीओपीएम) के अनुसार, पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक हैं. संगठन का कहना है कि इनका धार्मिक अल्पसंख्यकों पर गहरा असर पड़ता है और सरकारी संस्थाएं इनके दुरुपयोग को रोकने में लगातार विफल रही हैं. वीओपीएम ने कहा कि पाकिस्तान की न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक यह है कि वह निर्दोष लोगों को झूठे आरोपों से बचाने में सक्षम नहीं रही है. संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायपालिका और कानून लागू करने वाली एजेंसियां ईशनिंदा के आरोपों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में विफल रही हैं. उसके मुताबिक, झूठे आरोप लगाने वालों को जवाबदेह नहीं ठहराए जाने से ऐसा संदेश जाता है कि इस तरह की हरकतें बिना किसी परिणाम के जारी रह सकती हैं. इससे कानूनी व्यवस्था में जनता का भरोसा कमजोर होता है।


    रिमशा मसीह का मामला भी उठाया

    वीओपीएम ने डाउन सिंड्रोम से पीड़ित पाकिस्तानी ईसाई लड़की रिमशा मसीह के मामले का भी जिक्र किया. उस पर कुरान के अपमान का आरोप लगाया गया था, लेकिन बाद में सामने आए सबूतों से आरोप गढ़े जाने की बात सामने आई. रिमशा को बाद में रिहा कर दिया गया, लेकिन मानवाधिकार संगठन के मुताबिक, तब तक उसके परिवार को भारी दबाव का सामना करना पड़ा था. संगठन का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि अदालत में तथ्यों की जांच होने से पहले ही कोई व्यक्ति ईशनिंदा जैसे गंभीर आरोपों का शिकार बन सकता है।

    रिपोर्ट में मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोपों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच, झूठे आरोप लगाने वालों की जवाबदेही और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया है।

  • विराट कोहली ने प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने पर लगे 5 करोड़ रुपये के आरोपों को बताया निराधार

    विराट कोहली ने प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने पर लगे 5 करोड़ रुपये के आरोपों को बताया निराधार

    नई दिल्ली । वृंदावन स्थित केलीकुंज आश्रम से जुड़े घटनाक्रम के बीच क्रिकेटर विराट कोहली ने उनके बारे में लगाए गए एक गंभीर आरोप को खारिज किया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी महाराज ने दावा किया था कि विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये देकर प्रेमानंद महाराज के आश्रम में दर्शन के लिए बुलाया गया था। कोहली के प्रवक्ता ने बुधवार को बयान जारी कर इन दावों को पूरी तरह झूठा, बेबुनियाद और तथ्यों के लिहाज से गलत बताया।

    विराट कोहली के प्रवक्ता ने कहा कि कोहली प्रेमानंद महाराज के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा रखते हैं और इसी वजह से उनसे मिलने जाते हैं। बयान में फलाहारी महाराज की ओर से लगाए गए आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन किया गया। साथ ही मीडिया से अपील की गई कि ऐसे दावों को आगे बढ़ाने या प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की सावधानी से जांच की जाए और जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग की जाए।

    यह विवाद प्रेमानंद महाराज के शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोदी की मौत के बाद सामने आया, जिसके बाद वृंदावन का केलीकुंज आश्रम चर्चा में आ गया। इसी बीच फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज को पत्र लिखकर विराट कोहली से जुड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेमानंद महाराज की टीम से जुड़े एक साधु गुट ने विराट कोहली को पांच करोड़ रुपये देकर उनके दरबार में दर्शन के लिए बुलाया था। फलाहारी महाराज के मुताबिक, ऐसा इसलिए किया गया ताकि प्रेमानंद महाराज को सेलिब्रिटी के तौर पर स्थापित किया जा सके।

    फलाहारी महाराज ने अपने पत्र में आश्रम और उससे जुड़े लोगों को लेकर अन्य गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रेमानंद महाराज की टीम में साधु के भेष में कई भू-माफिया प्रवेश कर चुके हैं। उनके आरोप के मुताबिक, ऐसे लोग यमुना के डूब क्षेत्र की जमीनों की बिक्री में शामिल हैं। उन्होंने बच्चों की किडनी चोरी जैसे गंभीर अपराधों का भी दावा किया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं बताया गया है।

    फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज से गोवर्धन आने की अपील भी की थी। उन्होंने पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग रखी। पत्र में उन्होंने प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताते हुए कहा कि वह वहां सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने सरकार से प्रेमानंद महाराज को जेड प्लस सुरक्षा देने की मांग की।

    विराट कोहली के प्रवक्ता की ओर से जारी प्रतिक्रिया में पांच करोड़ रुपये लेकर आश्रम जाने के दावे को सीधे तौर पर अस्वीकार किया गया है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि कोहली और प्रेमानंद महाराज की मुलाकातों का कारण धार्मिक आस्था और श्रद्धा है। इस तरह फलाहारी महाराज के आरोपों और विराट कोहली के पक्ष की प्रतिक्रिया के बीच विवाद का केंद्र पांच करोड़ रुपये वाला दावा बना हुआ है।

  • ‘हां, मेरे पास ₹1400 करोड़ की संपत्ति, सब कानूनी’, कुमारस्वामी के आरोपों पर CM शिवकुमार का जवाब

    ‘हां, मेरे पास ₹1400 करोड़ की संपत्ति, सब कानूनी’, कुमारस्वामी के आरोपों पर CM शिवकुमार का जवाब


    नई दिल्ली। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अपनी करीब ₹1400 करोड़ की संपत्ति को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के आरोपों पर जवाब दिया है। शिवकुमार ने कहा कि उनके पास इतनी संपत्ति है, लेकिन उन्होंने इसे कानून के दायरे में रहते हुए हासिल किया है। 2023 के चुनावी हलफनामे में शिवकुमार और उनके आश्रितों ने कुल करीब ₹1,413.8 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी।

    दिल्ली में मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने कहा कि उनकी संपत्तियों से जुड़ी जानकारी इनकम टैक्स विभाग के पास है। उन्होंने कहा कि उनके बच्चों को भी कानून के तहत कारोबार करने और संपत्ति खरीदने का अधिकार है। शिवकुमार ने सवाल किया कि क्या एचडी कुमारस्वामी इनकम टैक्स अधिकारी हैं।

    कुमारस्वामी ने NICE प्रोजेक्ट को लेकर लगाए आरोप

    दरअसल, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर (BMIC), जिसे NICE प्रोजेक्ट भी कहा जाता है, को लेकर शिवकुमार पर आरोप लगाए हैं। कुमारस्वामी ने दावा किया कि प्रोजेक्ट के मूल स्वरूप में बाद में बदलाव किए गए और जमीन आवंटन तथा विकास योजना में कथित अनियमितताओं से निजी पक्षों को फायदा पहुंचा।

    कुमारस्वामी ने शिवकुमार की संपत्ति में हुई बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि शिवकुमार की घोषित संपत्ति करीब ₹4 करोड़ से बढ़कर 2023 में ₹1,413 करोड़ से ज्यादा हो गई। उन्होंने NICE प्रोजेक्ट से जुड़े जमीन सौदों में शिवकुमार और उनके परिवार को कथित लाभ मिलने का आरोप लगाया है। होसकरेहल्ली की जमीन और शोभा डेवलपर्स से जुड़े ज्वाइंट वेंचर का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    हालांकि, ये आरोप कुमारस्वामी की ओर से लगाए गए हैं। शिवकुमार ने इन्हें खारिज करते हुए अपनी संपत्ति को वैध बताया है।

    ‘क्या मैंने रिश्वत ली या किसी घोटाले में पकड़ा गया?’

    शिवकुमार ने कहा कि वह किसान और कारोबारी परिवार से आते हैं। उनके मुताबिक, कारोबार और संपत्ति रखना कानून के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी संपत्ति घोषित की है और उनके बच्चों को भी कारोबार करने तथा संपत्ति खरीदने का अधिकार है।

    ₹5 करोड़ के निवेश से जुड़े कुमारस्वामी के आरोप पर भी शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने न कोई रिश्वत ली है और न किसी घोटाले में पकड़े गए हैं। उनके मुताबिक, समय के साथ संपत्तियों की कीमत बढ़ना अपने आप में गलत नहीं है।

    शिवकुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री एस. बंगारप्पा के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने उस समय करीब ₹99 हजार में एक साइट खरीदी थी, जिसकी मौजूदा कीमत करीब ₹20 करोड़ है। उन्होंने कहा कि संपत्ति की बाजार कीमत बढ़ने को अपने आप में गलत नहीं माना जा सकता।

    शिवकुमार ने कहा कि वह हर साल अपनी संपत्ति घोषित करते हैं। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनकी संपत्तियों की जांच कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई दूसरी एजेंसी भी जांच करना चाहती है तो वह कर सकती है।

    ‘कुमारस्वामी विधानसभा में आकर बहस करें’

    कुमारस्वामी की बहस की चुनौती पर शिवकुमार ने कहा कि विधानसभा की सीढ़ियों पर बहस करने की जरूरत नहीं है। अगर कुमारस्वामी बहस करना चाहते हैं तो विधानसभा के अंदर आकर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि वह ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।

    फोन टैपिंग और ब्लैकमेल जैसे आरोपों को लेकर भी शिवकुमार ने कुमारस्वामी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले भी इस तरह की राजनीति का सामना करना पड़ा है और वह किसी धमकी से डरने वाले नहीं हैं।

    शिवकुमार ने बीजेपी और जेडीएस गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान का भी आरोप लगाया और कहा कि इसी वजह से कुमारस्वामी इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कुमारस्वामी के परिवार और पुराने प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। हालांकि, शिवकुमार ने कहा कि वह कुमारस्वामी की संपत्तियों पर अभी कोई आरोप नहीं लगाना चाहते और केवल मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे हैं।

    दिल्ली में शिक्षा नीति को लेकर बैठक

    शिवकुमार ने अपने दिल्ली दौरे की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों की शिक्षा नीति और परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने को लेकर बैठक हुई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल और कई राज्यों के मुख्यमंत्री एवं मंत्री शामिल हुए।

    उन्होंने कहा कि बैठक में परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक रोकने पर चर्चा हुई। शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक में KPSC जैसी परीक्षाओं में भी सुधार किए जाएंगे।

    ठेकेदारों के ₹38 हजार करोड़ के बकाये पर भी बोले

    ठेकेदारों की ओर से सरकार पर करीब ₹38 हजार करोड़ के बकाये का दावा किए जाने पर भी शिवकुमार ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने कई कामों को मंजूरी दी थी, जिसके चलते मौजूदा सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने माना कि वर्तमान वित्तीय स्थिति चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार इस स्थिति से निपटने और बकाये से जुड़े मामलों का समाधान निकालने के लिए जरूरी कदम उठाएगी।

  • रीति तिवारी की मां पर एक्स स्टेपफादर एकम बावा के गंभीर आरोप, बोले- रिश्ते के दौरान बहुत टॉर्चर हुआ

    रीति तिवारी की मां पर एक्स स्टेपफादर एकम बावा के गंभीर आरोप, बोले- रिश्ते के दौरान बहुत टॉर्चर हुआ

    रीति तिवारी की निजी जिंदगी और पारिवारिक रिश्तों को लेकर चल रही चर्चा के बीच उनके एक्स स्टेपफादर और सिंगर एकम बावा ने कई गंभीर दावे किए हैं। एकम ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए रीति तिवारी और उनकी मां रानी तिवारी पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि रानी और रीति के साथ रहने के दौरान उन्हें काफी परेशानी और कथित तौर पर टॉर्चर का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि वह आने वाले दिनों में इस रिश्ते से जुड़े कई और घटनाक्रम सामने रखेंगे।

    एकम बावा ने अपने एक नए वीडियो में रानी तिवारी के साथ हुई कथित बहस का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रात करीब 9 से 10 बजे के बीच किसी बात को लेकर उनकी और रानी की नोकझोंक हो गई थी। एकम के मुताबिक, इसी दौरान रीति उनके कमरे में आईं और अलमारी में रखे उनके कपड़ों को हैंगर से उतारकर जमीन पर फेंक दिया। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद रीति ने उनसे वहां से निकल जाने के लिए कहा।

    सिंगर ने आगे दावा किया कि उस दौरान रीति और उनकी मां रानी ने उनसे कहा कि वह जो करना चाहते हैं, कर सकते हैं। एकम के अनुसार, उन्होंने दोनों से यह समझने की कोशिश की कि आखिर उनसे इस परिस्थिति में क्या उम्मीद की जा रही है। उनका आरोप है कि रानी और रीति के साथ रहने के दौरान उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    एकम बावा ने यह भी कहा कि वह अब इन घटनाओं को एक-एक करके सामने रखेंगे। उनके मुताबिक, जब तक रीति तिवारी बिग बॉस 20 के घर में रहेंगी, तब तक वह रोज उनके और परिवार के बीच हुए कथित घटनाक्रम से जुड़ी कोई नई बात साझा करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर रीति तिवारी और रानी तिवारी की ओर से कोई जवाब इस जानकारी में सामने नहीं आया है।

    एकम ने इससे पहले भी रानी तिवारी के साथ अपने रिश्ते को लेकर कई बातें साझा की थीं। उनके दावे के मुताबिक, वह वर्ष 2020 से 2025 तक रानी तिवारी और रीति के साथ एक ही फ्लैट में रहे। उन्होंने बताया कि रीति को उनकी मां और उनके रिश्ते के बारे में जानकारी थी।

    अपने पिछले दावों में एकम ने कहा था कि वर्ष 2020 से 2022 तक वह और रानी तिवारी लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। इसके बाद 18 फरवरी 2022 को दोनों ने शादी कर ली। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में रानी और रीति के साथ अपनी तस्वीरें भी साझा की थीं।

    अब एकम के ताजा वीडियो के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उनके आरोपों में पुराने रिश्ते के दौरान हुए कथित विवादों और उनके अनुभवों का जिक्र है। फिलहाल सामने आई जानकारी में एकम बावा के दावों का पक्ष मौजूद है, जबकि रीति तिवारी और रानी तिवारी की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं है। ऐसे में मामले से जुड़े दावों की पुष्टि संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

  • ईरान-UAE में बढ़ा तनाव: मिसाइल हमले के आरोप पर तेहरान का पलटवार, बोला- ‘जंग भड़काने की कोशिश’

    ईरान-UAE में बढ़ा तनाव: मिसाइल हमले के आरोप पर तेहरान का पलटवार, बोला- ‘जंग भड़काने की कोशिश’


    नई दिल्ली। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। UAE ने ईरान पर दो बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाया है। हालांकि, तेहरान ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘बेबुनियाद’ बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि बिना ठोस सबूत के ऐसे आरोप लगाने से बचना चाहिए।

    UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान की ओर से दो मिसाइलें दागी गईं, लेकिन दोनों समुद्र में गिर गईं। इनमें से एक UAE के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में और दूसरी उसके बाहर गिरी। घटना में किसी के घायल होने या नुकसान की सूचना नहीं है।

    समुद्री यातायात को निशाना बनाने का दावा
    UAE के रक्षा मंत्रालय ने अपने आकलन के आधार पर दावा किया कि मिसाइलों को समुद्री यातायात को निशाना बनाने के लिए दागा गया था। मंत्रालय ने लोगों से अफवाहों और गलत सूचनाओं से बचने तथा घटना से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की।

    मिसाइल घटना के बीच UAE ने ईरान के साथ सभी व्यापारिक, वाणिज्यिक और वित्तीय लेनदेन को अगले आदेश तक रोकने का फैसला किया है। UAE विदेश मंत्रालय की संचार निदेशक अफरा अल हमेली ने इसकी पुष्टि की।

    ईरान ने जताई ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ की आशंका
    मिसाइल खतरे के बाद UAE के गृह मंत्रालय ने लोगों के मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजा। बाद में स्थिति को सुरक्षित बताते हुए लोगों से सामान्य गतिविधियां शुरू करने को कहा गया।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने UAE के आरोपों को खारिज करते हुए ‘फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन’ की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि बिना ठोस सबूत ईरान को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

    होर्मुज स्ट्रेट पर भी बढ़ी चिंता
    यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खाड़ी क्षेत्र का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।

    मिसाइल विवाद के बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। UAE ने जहां ईरान के साथ आर्थिक लेनदेन रोक दिया है, वहीं तेहरान ने पूरे घटनाक्रम को लेकर UAE के दावे पर सवाल खड़े किए हैं।

  • निजी विवाद के बीच श्वेता तिवारी की सोशल मीडिया एंट्री, ‘किस पर भरोसा किया जाए’ लिखा संदेश

    निजी विवाद के बीच श्वेता तिवारी की सोशल मीडिया एंट्री, ‘किस पर भरोसा किया जाए’ लिखा संदेश

    नई दिल्ली । टेलीविजन अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने अपने पूर्व पति राजा चौधरी की ओर से लगाए गए हालिया आरोपों के बाद पहली बार सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा की है। हालांकि, श्वेता ने अपने पोस्ट में राजा चौधरी के किसी भी आरोप का सीधे तौर पर जवाब नहीं दिया है, लेकिन उनके लिखे कैप्शन को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है। श्वेता ने अपनी आगामी रियलिटी शो ‘ट्रेटर्स 2’ से जुड़ी एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, “इस बार असली कसौटी यह जानना है कि किस पर भरोसा किया जाए।”

    राजा चौधरी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपनी बेटी पलक तिवारी और पूर्व पत्नी श्वेता तिवारी को लेकर कई दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि उनकी बेटी पलक उन्हें पिता के रूप में स्वीकार नहीं करती हैं और उन्होंने उन्हें सोशल मीडिया पर भी ब्लॉक कर दिया है। इसके अलावा राजा ने श्वेता द्वारा लगाए गए पुराने घरेलू हिंसा के आरोपों से भी इनकार किया था।

    राजा चौधरी ने श्वेता तिवारी पर कई व्यक्तिगत आरोप भी लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि श्वेता के टेलीविजन शो के दौरान उनके को-स्टार के साथ संबंध थे। हालांकि, श्वेता ने इन नए आरोपों पर अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अभिनेत्री ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट को केवल अपने नए प्रोजेक्ट से जोड़कर साझा किया है।

    राजा चौधरी और श्वेता तिवारी की शादी वर्ष 1998 में हुई थी। दोनों का रिश्ता करीब नौ साल बाद वर्ष 2007 में खत्म हो गया था। अलगाव के बाद श्वेता ने कई बार अपने रिश्ते से जुड़े अनुभवों के बारे में बात की थी। उन्होंने अलग होने के पीछे घरेलू समस्याओं और राजा की कुछ आदतों को वजह बताया था। वहीं राजा चौधरी ने अब इन आरोपों को खारिज किया है और अपनी ओर से अलग पक्ष रखा है।

    राजा ने अपनी बेटी पलक तिवारी से जुड़े पुराने विवाद पर भी बात की। उन्होंने दावा किया कि तलाक के समझौते के दौरान उन्होंने कुछ संपत्ति से जुड़े फैसले लिए थे और उस समय की परिस्थितियां अलग थीं। उनका कहना था कि उन्होंने अपनी परेशानियों और परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया था। हालांकि, इस मामले में श्वेता की ओर से कोई नया बयान सामने नहीं आया है।

    वहीं दूसरी ओर श्वेता तिवारी इन दिनों अपने आगामी रियलिटी शो ‘ट्रेटर्स 2’ को लेकर चर्चा में हैं। इस शो के जरिए वह एक बार फिर रियलिटी टेलीविजन में नजर आने वाली हैं। शो में कई अन्य चर्चित चेहरे भी शामिल हैं और इसके फॉर्मेट को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है।

    श्वेता की नई पोस्ट के बाद उनके प्रशंसक उनके समर्थन में प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हालांकि अभिनेत्री ने अपने संदेश में पारिवारिक विवाद या राजा चौधरी के बयानों का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके कैप्शन को मौजूदा परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    फिलहाल श्वेता तिवारी अपने नए प्रोजेक्ट पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जबकि राजा चौधरी के बयानों के बाद दोनों के बीच पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आने वाले समय में इस मामले पर किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

  • ओपी राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप, दलितों के उत्पीड़न और आपराधिक मामलों को लेकर अखिलेश यादव को दी नसीहत

    ओपी राजभर ने सपा पर लगाए गंभीर आरोप, दलितों के उत्पीड़न और आपराधिक मामलों को लेकर अखिलेश यादव को दी नसीहत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दलितों, पिछड़ों और गरीबों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर समाजवादी पार्टी को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। राजभर के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।

    ओपी राजभर ने सार्वजनिक रूप से अखिलेश यादव से सवाल करते हुए कहा कि क्या उनकी पार्टी के लोगों को गरीबों, पिछड़ों और दलितों को परेशान करने में आनंद आता है। उनका दावा था कि प्रदेश में जब भी हत्या, मारपीट, जमीन विवाद, चोरी या अन्य आपराधिक घटनाओं की जांच होती है तो कई मामलों में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों के नाम सामने आने की बात कही जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों के खिलाफ पार्टी स्तर पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे गलत संदेश जाता है।

    राजभर ने आजमगढ़ जिले का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी के एक सांसद पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित सांसद और उनके परिजनों पर जमीन कब्जाने तथा स्थानीय लोगों को धमकाने जैसे आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो पार्टी नेतृत्व को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कथित तौर पर गरीब और दलित परिवारों की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई है।

    अपने बयान में राजभर ने एक दलित महिला की जमीन से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला की भूमि पर कब्जा करने के लिए दबाव बनाया गया और कथित रूप से धमकी तथा दुर्व्यवहार की घटनाएं हुईं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि विवादित जमीन के चारों ओर बिजली का करंट प्रवाहित करने वाले तार लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष की ओर से भी इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    राजभर ने समाजवादी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विपक्ष को भविष्य में प्रभावी भूमिका निभानी है तो उसे अपने संगठन के भीतर अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि यदि पार्टी ऐसे विवादों पर समय रहते नियंत्रण नहीं करती है तो उसे राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में एक मजबूत और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

    उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के बीच इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल को और गर्माने वाले माने जा रहे हैं। एक ओर सत्ता पक्ष विपक्ष पर कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं विपक्ष भी सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर लगातार हमलावर है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन आरोपों और उनके जवाब को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना बनी हुई है। फिलहाल ओपी राजभर के बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है, जबकि आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • बंगाल की राजनीति में बढ़ा सियासी तापमान, ममता बनर्जी ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप; पार्टी छोड़ने वालों को दी खुली चेतावनी

    बंगाल की राजनीति में बढ़ा सियासी तापमान, ममता बनर्जी ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप; पार्टी छोड़ने वालों को दी खुली चेतावनी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर तीखे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के कारण चर्चा में है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर उनकी पार्टी के नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दबाव और कार्रवाई के बावजूद वह पीछे हटने वाली नहीं हैं। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं और संगठन के भीतर असंतोष पैदा करने वालों को भी स्पष्ट संदेश दिया कि उन्हें अपना रुख सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए।

    ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि यदि कोई उनकी आवाज दबाना चाहता है तो उसे इससे भी आगे बढ़ना होगा। उनका कहना था कि उन्हें डराकर या दबाव बनाकर चुप नहीं कराया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न तरीकों से परेशान किया जा रहा है और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के तहत कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं है।

    टीएमसी प्रमुख ने दावा किया कि पार्टी के कई नेताओं को लगातार जांच और अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से निशाना बनाया गया है। उन्होंने कुछ वरिष्ठ नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक कारणों से उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में मौजूद कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मानवीय गरिमा के अनुरूप व्यवहार नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।

    ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में पार्टी के भीतर अनुशासन और निष्ठा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में विश्वास सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है और जनता जिस भरोसे के साथ प्रतिनिधियों को चुनती है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि यदि कोई नेता पार्टी की विचारधारा से सहमत नहीं है या किसी अन्य दल में जाना चाहता है तो उसे खुलकर निर्णय लेना चाहिए। उनके अनुसार संगठन के भीतर रहकर किसी दूसरे दल के हित में काम करना कार्यकर्ताओं और समर्थकों के विश्वास के साथ न्याय नहीं होगा।

    राज्य की राजनीति में हाल के समय में कई नेताओं के दल बदलने के बाद यह बयान और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुछ पूर्व सांसदों के दूसरे राजनीतिक दल में शामिल होने के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। आगामी राज्यसभा उपचुनावों को देखते हुए सभी प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। ऐसे माहौल में नेताओं के बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर रहे हैं।

    विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा उपचुनाव और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनजर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तीखी हो सकती है। एक ओर दल अपने संगठन को मजबूत बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं तो दूसरी ओर विपक्ष नए राजनीतिक समीकरण बनाने में सक्रिय है। ऐसे समय में ममता बनर्जी का यह बयान उनके समर्थकों को एकजुट रखने और संगठनात्मक संदेश देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति का केंद्र राज्यसभा उपचुनाव, दल-बदल की घटनाएं और प्रमुख दलों की रणनीति रहने की संभावना है। राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि मतदाताओं की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बदलते राजनीतिक समीकरणों का असर राज्य की आगामी राजनीतिक दिशा पर किस प्रकार पड़ता है।

  • मुख्यमंत्री पर आरोपों को बीजेपी ने बताया बेबुनियाद, हेमंत खंडेलवाल बोले- विकास से घबराकर कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार की राजनीति

    मुख्यमंत्री पर आरोपों को बीजेपी ने बताया बेबुनियाद, हेमंत खंडेलवाल बोले- विकास से घबराकर कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार की राजनीति

    मध्य प्रदेश:  की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेकर लगाए गए आरोपों पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रही है, लेकिन प्रदेश की जनता ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं जिससे जनता के बीच गलत संदेश पहुंचे। उनके अनुसार आरोपों में प्रस्तुत की गई जानकारी वास्तविक दस्तावेजों और रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती।

    खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की भूमि संबंधी जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में चुनावी नामांकन के दौरान जो संपत्ति विवरण प्रस्तुत किया गया था, उसमें और वर्तमान स्थिति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम दर्ज भूमि का क्षेत्रफल पहले जैसा ही है और उनकी पत्नी के नाम दर्ज कृषि भूमि में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। पार्टी का दावा है कि आरोपों के माध्यम से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने उन व्यावसायिक संस्थाओं और भूमि स्वामित्व से जुड़े आरोपों का भी खंडन किया जिनका उल्लेख राजनीतिक विवाद में किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों और संपत्तियों का नाम लेकर आरोप लगाए गए हैं, उनके संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड सार्वजनिक हैं और उनमें किसी प्रकार की अनियमितता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री संबंधित एक कंपनी के निदेशक पद से वर्षों पहले अलग हो चुके थे और उसके बाद की गतिविधियों से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

    मुख्यमंत्री के परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी भाजपा ने आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज भूमि और संपत्तियों के संबंध में जो दावे किए गए हैं, वे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। साथ ही जिन रिश्तेदारों का उल्लेख आरोपों में किया गया है, उनका स्वतंत्र अस्तित्व है और उनके कार्यों को मुख्यमंत्री या उनके परिवार से जोड़ना उचित नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित पक्ष स्वयं भी कानूनी और सार्वजनिक स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।

    भाजपा ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश सरकार विकास, निवेश, उद्योग, कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है, जिससे विपक्ष असहज महसूस कर रहा है। इसी कारण ध्यान भटकाने के लिए आरोपों की राजनीति की जा रही है।

    खंडेलवाल ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस का रवैया हमेशा नकारात्मक रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब-जब प्रदेश में पिछड़े वर्ग से आने वाले नेताओं ने नेतृत्व संभाला, तब-तब उन्हें राजनीतिक रूप से घेरने और कमजोर करने की कोशिश की गई। भाजपा का आरोप है कि वर्तमान मुख्यमंत्री के खिलाफ भी इसी मानसिकता के तहत अभियान चलाया जा रहा है।

    प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा जहां आरोपों को निराधार बता रही है, वहीं विपक्ष अपने दावों पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

  • संचिता उगले मौत मामले में नया मोड़, पिता ने लगाए गंभीर आरोप, मानसिक दबाव की बात आई सामने

    संचिता उगले मौत मामले में नया मोड़, पिता ने लगाए गंभीर आरोप, मानसिक दबाव की बात आई सामने

    नई दिल्ली । टीवी और मनोरंजन जगत से जुड़ी अभिनेत्री Sanchita Ugale की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 14 जून को उनके नालासोपारा स्थित आवास में मृत पाए जाने के बाद अब उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो  पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

    मृतका के पिता मछिंद्र उगले ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि उनकी बेटी लंबे समय से मानसिक तनाव में थी। उन्होंने कहा कि हालांकि संचिता ने कभी स्पष्ट रूप से अपनी परेशानी साझा नहीं की, लेकिन उनके व्यवहार में बदलाव लगातार देखा जा रहा था। कभी वह सामान्य और खुश नजर आती थीं, तो कभी अचानक उदास और चिंतित हो जाती थीं। परिवार को यह अंदाजा हो गया था कि वह किसी गंभीर दबाव में हैं।

    परिवार के अनुसार, स्थिति को देखते हुए वे लगातार संचिता के साथ रहने की कोशिश करते थे ताकि वह अकेली न रहें। पिता ने बताया कि घर के सदस्य उनकी मानसिक स्थिति को लेकर सतर्क रहते थे और उन्हें सामान्य जीवन में बनाए रखने का प्रयास करते थे। हालांकि परिवार को कभी यह अंदेशा नहीं था कि स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है।

    पिता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी पर लंबे समय से किसी प्रकार का दबाव बनाया जा रहा था। उनके अनुसार, संचिता ने कुछ बातें परिवार से साझा की थीं, जिनसे यह संकेत मिलता था कि वह मानसिक रूप से परेशान थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर बार-बार कुछ मांगें की जा रही थीं, जिनमें आर्थिक दबाव की बातें भी शामिल थीं। परिवार का मानना है कि इन परिस्थितियों ने उनकी बेटी को गहरे तनाव में धकेल दिया।

    घटना 14 जून की शाम नालासोपारा स्थित घर में सामने आई, जब संचिता अपने कमरे में बंद थीं। दरवाजा अंदर से बंद था और बाद में परिवार द्वारा दरवाजा खोलने पर उन्हें गंभीर हालत में पाया गया। तुरंत अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे परिवार और उनके परिचितों में शोक का माहौल है।

    मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि किन परिस्थितियों में यह घटना हुई और क्या वास्तव में किसी तरह का दबाव या प्रताड़ना इस मामले से जुड़ा है। पुलिस सभी डिजिटल और व्यक्तिगत पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।

    परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि उन्हें अभी तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि सच सामने आए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

    यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ जुड़े आरोपों के कारण जांच का दायरा भी बढ़ गया है। पुलिस की आगे की कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

    ल्ली । टीवी और मनोरंजन जगत से जुड़ी अभिनेत्री Sanchita Ugale की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। 14 जून को उनके नालासोपारा स्थित आवास में मृत पाए जाने के बाद अब उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

    मृतका के पिता मछिंद्र उगले ने मीडिया से बातचीत में दावा किया है कि उनकी बेटी लंबे समय से मानसिक तनाव में थी। उन्होंने कहा कि हालांकि संचिता ने कभी स्पष्ट रूप से अपनी परेशानी साझा नहीं की, लेकिन उनके व्यवहार में बदलाव लगातार देखा जा रहा था। कभी वह सामान्य और खुश नजर आती थीं, तो कभी अचानक उदास और चिंतित हो जाती थीं। परिवार को यह अंदाजा हो गया था कि वह किसी गंभीर दबाव में हैं।

    परिवार के अनुसार, स्थिति को देखते हुए वे लगातार संचिता के साथ रहने की कोशिश करते थे ताकि वह अकेली न रहें। पिता ने बताया कि घर के सदस्य उनकी मानसिक स्थिति को लेकर सतर्क रहते थे और उन्हें सामान्य जीवन में बनाए रखने का प्रयास करते थे। हालांकि परिवार को कभी यह अंदेशा नहीं था कि स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है।

    पिता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बेटी पर लंबे समय से किसी प्रकार का दबाव बनाया जा रहा था। उनके अनुसार, संचिता ने कुछ बातें परिवार से साझा की थीं, जिनसे यह संकेत मिलता था कि वह मानसिक रूप से परेशान थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर बार-बार कुछ मांगें की जा रही थीं, जिनमें आर्थिक दबाव की बातें भी शामिल थीं। परिवार का मानना है कि इन परिस्थितियों ने उनकी बेटी को गहरे तनाव में धकेल दिया।

    घटना 14 जून की शाम नालासोपारा स्थित घर में सामने आई, जब संचिता अपने कमरे में बंद थीं। दरवाजा अंदर से बंद था और बाद में परिवार द्वारा दरवाजा खोलने पर उन्हें गंभीर हालत में पाया गया। तुरंत अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे परिवार और उनके परिचितों में शोक का माहौल है।

    मामले में पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि किन परिस्थितियों में यह घटना हुई और क्या वास्तव में किसी तरह का दबाव या प्रताड़ना इस मामले से जुड़ा है। पुलिस सभी डिजिटल और व्यक्तिगत पहलुओं की भी जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।

    परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है और कहा है कि उन्हें अभी तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि वे सिर्फ इतना चाहते हैं कि सच सामने आए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।