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  • Lenskart विवाद: हिजाब की इजाजत और बिंदी पर रोक की खबर से बवाल, पीयूष बंसल ने दी सफाई

    Lenskart विवाद: हिजाब की इजाजत और बिंदी पर रोक की खबर से बवाल, पीयूष बंसल ने दी सफाई

    नई दिल्ली। आईवियर कंपनी Lenskart इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़े विवाद में घिर गई है। कंपनी की कथित “स्टाफ यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग गाइड” सामने आने के बाद आरोप लगे कि कर्मचारियों को हिजाब या पगड़ी पहनने की अनुमति है, लेकिन बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई गई है।

    इस खबर के सामने आते ही लोगों में नाराजगी फैल गई और कंपनी पर भेदभाव के आरोप लगने लगे।

    क्या है पूरा विवाद?

    सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज में दावा किया गया कि Lenskart स्टोर कर्मचारियों को काले रंग का हिजाब और पगड़ी पहनने की छूट देता है, लेकिन “धार्मिक टीका/तिलक और बिंदी/स्टिकर” की अनुमति नहीं है।
    इसी कथित नियम को लेकर यूजर्स ने सवाल उठाए और इसे धार्मिक असमानता से जोड़कर देखा।

    पीयूष बंसल की सफाई

    विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वायरल दस्तावेज कंपनी की मौजूदा नीति का हिस्सा नहीं है और यह एक पुराना ड्राफ्ट है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कंपनी किसी भी तरह के धार्मिक प्रतीकों पर रोक नहीं लगाती और कर्मचारियों को बिंदी, तिलक समेत सभी प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है।
    साथ ही, उन्होंने इस पूरे मामले से पैदा हुए भ्रम के लिए माफी भी मांगी।

    सफाई पर भी उठे सवाल

    हालांकि, बंसल की सफाई के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि वायरल दस्तावेज हाल ही (फरवरी 2026) का है, इसलिए इसे “पुराना” बताना सही नहीं है।

    कुछ लोगों ने कंपनी से मौजूदा नीति सार्वजनिक करने की मांग की, जबकि अन्य ने यह सवाल उठाया कि अगर यह पुरानी पॉलिसी भी थी, तो उस समय ऐसे नियम क्यों बनाए गए थे।

    सोशल मीडिया पर बढ़ा दबाव

    यह मामला अब कंपनी की ब्रांड छवि से जुड़ गया है। यूजर्स लगातार पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं और स्पष्ट नीति सामने लाने की बात कह रहे हैं।

    फिलहाल कंपनी ने अपनी स्थिति साफ कर दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर जारी बहस से यह साफ है कि मामला अभी पूरी तरह थमा नहीं है।

  • लंबी कानूनी जंग खत्म, 61 मामलों का निपटारा कर दंपती को अलग होने की अनुमति

    लंबी कानूनी जंग खत्म, 61 मामलों का निपटारा कर दंपती को अलग होने की अनुमति


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक आदेश में 1994 से चल रहे वैवाहिक विवाद को समाप्त करते हुए दंपती को तलाक की मंजूरी दे दी। कोर्ट ने देशभर की विभिन्न अदालतों में लंबित 61 मुकदमों को एक साथ खत्म कर दिया।

    जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने अनुच्छेद 142 के विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी के विवाह को समाप्त करने का आदेश दिया। मामला अवमानना याचिका के रूप में शीर्ष अदालत पहुंचा था, लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत ने इसे स्थायी समाधान तक पहुंचाने का फैसला किया।

    आपसी सहमति से हुआ निपटारा

    सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित किया। इसके बाद आपसी सहमति से तलाक की प्रक्रिया तय की गई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि एलिमनी पर सहमति बन चुकी है और पति पत्नी को एकमुश्त 1 करोड़ रुपये देगा। इसके साथ ही लोनावला स्थित संपत्ति में पत्नी को हिस्सा देने पर भी सहमति बनी।

    अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के खाते में संपत्ति हिस्सेदारी के रूप में 90 लाख रुपये जमा किए जाएं। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद समाप्त माने जाएंगे।

    61 केस एक साथ खत्म

    शीर्ष अदालत ने विभिन्न अदालतों—ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट—में चल रहे कुल 61 मामलों को रद्द कर दिया। इनमें घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और अन्य आपराधिक व दीवानी मुकदमे शामिल थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इसी विवाद से जुड़े किसी भी नए मामले की सुनवाई नहीं होगी।

    अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल

    अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए विशेष आदेश देने का अधिकार है। इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए अदालत ने कहा कि इस लंबे विवाद का स्थायी समाधान जरूरी है और अब किसी भी तरह की कानूनी बाधा नहीं रहनी चाहिए।

    दोनों पक्षों ने लिखित रूप में अदालत के फैसले को स्वीकार किया और आगे कोई मुकदमा न लड़ने पर सहमति जताई। अदालत ने इस मामले में पहले से जारी विभिन्न न्यायिक आदेशों को भी निरस्त कर दिया, जिससे 32 साल पुराना विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया।