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  • दूध के अलावा रागी, तिल और टोफू समेत ये 5 कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं

    दूध के अलावा रागी, तिल और टोफू समेत ये 5 कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ हड्डियों को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं

    नई दिल्ली ।बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों की सेहत का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। कैल्शियम शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण मिनरल है, जो हड्डियों और दांतों की संरचना को मजबूत बनाए रखने के साथ मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाता है। आमतौर पर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए दूध और डेयरी उत्पादों को प्रमुख स्रोत माना जाता है, लेकिन कई ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं जिन्हें डाइट में शामिल किया जा सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति दूध कम पीता है या कैल्शियम के लिए दूसरे विकल्प तलाश रहा है, तो पौधों से मिलने वाले कई खाद्य पदार्थ उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, केवल कैल्शियम का सेवन ही पर्याप्त नहीं माना जाता। शरीर में कैल्शियम के बेहतर इस्तेमाल के लिए विटामिन डी, पर्याप्त प्रोटीन, संतुलित खानपान और नियमित शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण हैं।

    रागी कैल्शियम से भरपूर अनाजों में शामिल है। इसमें कैल्शियम के साथ प्रोटीन और फाइबर भी पाया जाता है। इसे रोटी, दलिया या रागी डोसा के रूप में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। रागी के 100 ग्राम आटे में लगभग 344 मिलीग्राम कैल्शियम हो सकता है। इसकी मात्रा भोजन की तैयारी और इस्तेमाल किए गए उत्पाद के अनुसार अलग हो सकती है।

    तिल भी कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। सफेद और काले दोनों तरह के तिल भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल तिल की चटनी, सब्जी या सलाद में किया जा सकता है। तिल से लड्डू भी बनाए जाते हैं, लेकिन इन्हें सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। तिल में कैल्शियम की मात्रा अच्छी होती है, फिर भी रोजाना सेवन की मात्रा सामान्यतः कम रहती है, इसलिए इसे पूरी डाइट का एक हिस्सा माना जाना चाहिए।

    टोफू उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है जो दूध से बने खाद्य पदार्थों के अलावा कैल्शियम का स्रोत तलाशते हैं। कैल्शियम-सेट टोफू में प्रोटीन के साथ कैल्शियम भी मिलता है। हालांकि, सभी टोफू उत्पादों में कैल्शियम की मात्रा समान नहीं होती। इसलिए टोफू खरीदते समय उसके पैकेट पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी देखना जरूरी है।

    हरी पत्तेदार सब्जियों में भी कैल्शियम पाया जाता है। सहजन के पत्ते, चौलाई और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियों को दाल, सब्जी या साग के रूप में भोजन में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, पालक में मौजूद ऑक्सलेट कैल्शियम के अवशोषण को प्रभावित कर सकता है। इसलिए केवल पालक पर कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए निर्भर रहना उचित नहीं है।

    बादाम भी कैल्शियम देने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। इनमें मैग्नीशियम, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स भी पाए जाते हैं। थोड़ी मात्रा में बादाम को नाश्ते या स्नैक के रूप में लिया जा सकता है। हालांकि, बादाम में कैल्शियम की मात्रा तिल या कैल्शियम-सेट टोफू से अलग होती है, इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाना चाहिए।

    उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की मजबूती बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों के साथ मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाता है। इसलिए डाइट में कैल्शियम वाले अलग-अलग खाद्य पदार्थों को शामिल करना उपयोगी हो सकता है। इसके साथ पर्याप्त विटामिन डी, प्रोटीन और वजन सहने वाली नियमित शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

  • बादाम का जादू: रोज़ खाने से ब्लड शुगर नियंत्रित और मानसिक क्षमता बढ़े..

    बादाम का जादू: रोज़ खाने से ब्लड शुगर नियंत्रित और मानसिक क्षमता बढ़े..

    नई दिल्ली। हाल ही में हुई एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि रोज़ाना थोड़ी मात्रा में बादाम खाने से प्रीडायबिटीज से प्रभावित लोगों के लिए कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। इस अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों ने अपनी डाइट में रोज़ाना लगभग एक मुट्ठी बादाम शामिल किया, उनके ब्लड शुगर लेवल में सुधार हुआ और उनकी मानसिक कार्यक्षमता में भी noticeable बढ़ोतरी देखी गई।

    दुनियाभर में 60 करोड़ से अधिक लोग प्रीडायबिटीज की स्थिति में हैं। इस अवस्था में ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन डायबिटीज तक नहीं पहुंचता। लंबे समय तक इस स्थिति में रहने से न केवल डायबिटीज का खतरा बढ़ता है, बल्कि दिमाग की कार्यक्षमता भी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। इसी चिंता के समाधान के लिए नई दिल्ली में 40 से 60 साल के 60 एशियाई भारतीय वयस्कों पर 24 हफ्तों तक एक अध्ययन किया गया।

    शोध में प्रतिभागियों को दो ग्रुप्स में बांटा गया। पहले ग्रुप को सामान्य संतुलित आहार दिया गया, जबकि दूसरे ग्रुप की डाइट में कुल कैलोरी का 20 प्रतिशत हिस्सा बादाम के रूप में शामिल किया गया। यह मात्रा करीब 32 से 42 ग्राम यानी एक मुट्ठी बादाम रोज़ाना थी। छह महीने के दौरान नियमित जांच के बाद नतीजे बेहद सकारात्मक रहे।

    रोज़ बादाम खाने वाले समूह में दिमाग की कार्यक्षमता में सुधार देखा गया। निर्णय लेने की क्षमता बेहतर हुई और जानकारी को समझने की गति में तेज़ी आई। इसके अलावा ब्लड शुगर लेवल में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ। फास्टिंग शुगर और भोजन के बाद का शुगर लेवल कम हुआ और HbA1c स्तर में भी कमी आई।

    मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर भी असर दिखा। प्रतिभागियों का वजन, बॉडी फैट और BMI कम हुआ, साथ ही कोलेस्ट्रॉल और LDL लेवल घटे। शरीर की सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के संकेतक भी बेहतर हुए।

    वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत और आस-पास के एशियाई देशों में मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा अधिक होता है। इस शोध से यह सिद्ध हुआ कि रोज़ाना मुट्ठी भर बादाम खाने से न केवल प्रीडायबिटीज नियंत्रित रहती है, बल्कि दिल और दिमाग भी स्वस्थ रहते हैं। इस सरल और प्राकृतिक उपाय को अपनी डाइट में शामिल करना बेहद लाभकारी साबित हो सकता है।