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  • पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अमेजन का बड़ा दांव, भारत में 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से एआई और क्लाउड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अमेजन का बड़ा दांव, भारत में 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से एआई और क्लाउड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत वैश्विक निवेशकों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है और दुनिया की अग्रणी प्रौद्योगिकी एवं ई-कॉमर्स कंपनियां देश में अपनी मौजूदगी और निवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इसी क्रम में अमेजन ने भारत में 13 अरब डॉलर यानी लगभग 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा कर एक बड़ा संकेत दिया है। यह निवेश मुख्य रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर केंद्रित रहेगा।

    अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी के भारत दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद यह घोषणा सामने आई है। कंपनी का कहना है कि भारत आने वाले वर्षों में उसके सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजारों में शामिल रहेगा। नए निवेश के साथ देश में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने और व्यवसायों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

    कंपनी के ताजा निवेश प्रस्ताव के बाद भारत में अमेजन की कुल घोषित निवेश योजना 48 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2025 में 35 अरब डॉलर के बड़े निवेश की घोषणा की थी। दोनों घोषणाओं को मिलाकर देखा जाए तो केवल छह महीनों के भीतर अमेजन ने भारत में 48 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर उसके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

    अमेजन के अनुसार, वर्ष 2030 तक एआई और क्लाउड सेवाओं की मांग में तेज वृद्धि होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी भारत में डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क, डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित समाधानों के विस्तार पर विशेष फोकस करेगी। इससे न केवल बड़ी कंपनियों बल्कि स्टार्टअप, डेवलपर्स, छोटे व्यवसायों और सार्वजनिक संस्थानों को भी आधुनिक तकनीकी संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।

    कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बाजारों में से एक है। ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती मांग ने वैश्विक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। अमेजन लंबे समय से भारतीय बाजार में सक्रिय है और लाखों ग्राहकों, विक्रेताओं तथा उद्यमियों को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रही है।

    एंडी जेसी ने भारत में कंपनी की भूमिका को केवल व्यवसाय तक सीमित न बताते हुए रोजगार और उद्यमिता से भी जोड़ा। उनके अनुसार, अमेजन ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार अवसरों के सृजन में योगदान दिया है। कंपनी का दावा है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे निर्यात को भी बढ़ावा मिला है।

    कंपनी ने छोटे और मध्यम कारोबारियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी कई योजनाएं तैयार की हैं। एआई आधारित समाधान, डिजिटल टूल्स और क्लाउड सेवाओं के माध्यम से लाखों छोटे व्यवसायों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी तकनीकी पहुंच बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक छात्रों और संस्थानों को डिजिटल संसाधनों का लाभ मिल सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेजन की यह निवेश योजना भारत के डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई गति दे सकती है। एआई, क्लाउड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाला निवेश न केवल तकनीकी क्षेत्र को मजबूत करेगा बल्कि रोजगार, नवाचार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा। भारत में वैश्विक कंपनियों की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि देश भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

  • तेल-गैस के बाद इंटरनेट पर भी संकट? ईरान के कदम से वैश्विक कनेक्टिविटी पर खतरा, भारत भी प्रभावित हो सकता है

    तेल-गैस के बाद इंटरनेट पर भी संकट? ईरान के कदम से वैश्विक कनेक्टिविटी पर खतरा, भारत भी प्रभावित हो सकता है


    तेहरान।
     मध्य पूर्व में जारी तनाव अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क पर भी खतरा मंडराने लगा है। ईरान द्वारा हॉर्मुज में ऊर्जा आपूर्ति बाधित करने के बाद अब समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो दुनिया के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं ठप हो सकती हैं, जिसका असर India सहित कई देशों की बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं पर पड़ेगा।

    दो अहम समुद्री रास्ते खतरे में
    रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक कनेक्टिविटी के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गहॉर्मुज  और बाब-अल-मंदेब मार्ग इस समय जोखिम में हैं। इन दोनों इलाकों के समुद्र तल में फाइबर ऑप्टिक केबलों का विशाल नेटवर्क फैला हुआ है, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ता है।

    बताया जा रहा है कि हॉर्मुज क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और संभावित सुरंगों के कारण शिपिंग और बीमा कंपनियां पहले ही सतर्क हो गई हैं। वहीं लाल सागर क्षेत्र में Houthis के हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

    इंटरनेट की रीढ़ हैं ये केबल
    समुद्र के नीचे बिछी ये फाइबर केबलें हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और दुनिया के अधिकांश डेटा ट्रांसफर का आधार हैं। वीडियो कॉल, ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाएं—सब कुछ इन्हीं पर निर्भर करता है।

    हॉर्मुज के संकरे हिस्सों में समुद्र की गहराई लगभग 200 फीट तक ही है, जिससे इन केबलों को निशाना बनाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।

    करीब 20 केबलों पर मंडरा रहा खतरा
    लाल सागर और हॉर्मुज क्षेत्र में करीब 20 प्रमुख केबल मौजूद हैं, जिनमें 17 लाल सागर से होकर गुजरती हैं। हॉर्मुज मार्ग में AAE-1, Falcon, Gulf Bridge International और Tata TGN-Gulf जैसी महत्वपूर्ण लाइनें शामिल हैं। ये केबल सीधे तौर पर भारत के अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक को सपोर्ट करती हैं।

    डिजिटल दुनिया पर बड़ा असर संभव
    Amazon, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों के मिडिल ईस्ट में स्थापित डाटा सेंटर भी इन्हीं केबलों से जुड़े हैं। ऐसे में अगर कनेक्टिविटी प्रभावित होती है, तो क्लाउड सेवाएं, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापक असर पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर, यह संकट दिखाता है कि आधुनिक दुनिया की डिजिटल लाइफलाइन कितनी नाजुक है—जहां एक क्षेत्रीय संघर्ष भी वैश्विक इंटरनेट और अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है।