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  • 4 दिन रजस्वला रहेंगी मां कामाख्या, बंद रहेंगे मंदिर के कपाट; अंबुबाची मेले में उमड़ेगी आस्था

    4 दिन रजस्वला रहेंगी मां कामाख्या, बंद रहेंगे मंदिर के कपाट; अंबुबाची मेले में उमड़ेगी आस्था


    नई दिल्ली । असम के Kamakhya Temple में 22 जून से विश्व प्रसिद्ध अंबुबाची महापर्व का शुभारंभ होने जा रहा है। 51 शक्तिपीठों में शामिल इस मंदिर को देवी शक्ति की आराधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नीलाचल पर्वत पर स्थित इस शक्तिपीठ में देवी सती का योनि भाग गिरा था, जिसके कारण यह स्थान विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।

    अंबुबाची पर्व के दौरान मान्यता है कि मां कामाख्या रजस्वला होती हैं। इसी वजह से मंदिर के कपाट तीन से चार दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस अवधि में नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन भी स्थगित रहते हैं। श्रद्धालु इसे देवी की विश्राम अवधि मानते हैं, जिसके बाद मंदिर पुनः खुलने पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

    जब लाल हो जाता है सफेद वस्त्र
    कामाख्या मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां देवी की कोई प्रतिमा नहीं है। मंदिर के गर्भगृह में प्राकृतिक योनि-आकार की शिला की पूजा होती है, जिससे निरंतर जलधारा बहती रहती है। अंबुबाची पर्व शुरू होने से पहले पुजारी इस शिला के समीप सफेद वस्त्र रखते हैं। मान्यता के अनुसार, जब मंदिर के कपाट पुनः खोले जाते हैं तो यह वस्त्र लाल रंग का दिखाई देता है। इस पवित्र वस्त्र के छोटे-छोटे टुकड़ों को श्रद्धालुओं में प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है। भक्त इसे देवी की कृपा और शुभता का प्रतीक मानते हैं।

    ब्रह्मपुत्र नदी और रहस्य का आकर्षण
    अंबुबाची मेले के दौरान यह भी मान्यता है कि पास बहने वाली Brahmaputra River का जल लालिमा लिए दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे देवी की दिव्य लीला मानते हैं। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार जल में खनिज तत्वों और अन्य प्राकृतिक कारणों से ऐसा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

    दुनिया का सबसे बड़ा तांत्रिक मेला
    अंबुबाची मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि तांत्रिक साधना का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है। देशभर से साधु, संत, अघोरी और तांत्रिक यहां पहुंचकर विशेष साधनाएं करते हैं। यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे बड़ा तांत्रिक मेला भी कहा जाता है।

    हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर मां कामाख्या के दर्शन और आशीर्वाद के लिए गुवाहाटी पहुंचते हैं। मंदिर के कपाट खुलने के बाद विशेष पूजा-अर्चना होती है और फिर भक्तों के लिए दर्शन प्रारंभ किए जाते हैं।

  • जून 2026 का धार्मिक कैलेंडर तैयार परमा एकादशी से संत कबीर जयंती तक पूरे महीने रहेंगे पर्व और पूजा के खास संयोग

    जून 2026 का धार्मिक कैलेंडर तैयार परमा एकादशी से संत कबीर जयंती तक पूरे महीने रहेंगे पर्व और पूजा के खास संयोग


    नई दिल्ली । जून 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास और पुण्यदायी माना जा रहा है। इस महीने एक साथ कई बड़े व्रत त्योहार और धार्मिक आयोजन होने जा रहे हैं जिनका इंतजार श्रद्धालु पूरे साल करते हैं। ज्येष्ठ मास और अधिक मास के विशेष संयोग के कारण इस बार परमा एकादशी सोमवती अमावस्या निर्जला एकादशी वट पूर्णिमा और संत कबीर जयंती जैसे पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाए जाएंगे। वहीं असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में लगने वाला अंबुबाची मेला भी लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।

    जून महीने की शुरुआत ही धार्मिक अनुष्ठानों के माहौल के साथ होगी। 11 जून को परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। अधिक मास में आने वाली इस एकादशी को अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

    इसके बाद 15 जून को सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण दान और स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है। इसी दिन पुरुषोत्तम मास का समापन भी होगा।

    17 जून को रंभा तृतीया व्रत रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत करती हैं जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की इच्छा लेकर पूजा करती हैं।

    20 जून को मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर की पूजा का विशेष पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है कि मां विंध्यवासिनी अपने भक्तों को भय और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं। इस दिन देवी की पूजा अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

    22 जून को दुर्गाष्टमी और धूमावती जयंती का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन से 26 जून तक असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में अंबुबाची मेले का आयोजन होगा। यह मेला शक्ति साधना और देवी उपासना का सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है जहां देश विदेश से साधु संत और श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    25 जून को साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में शामिल निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास करने से सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए यह व्रत विशेष माना गया है।

    महीने के अंत में 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत और संत कबीर दास जयंती मनाई जाएगी। वट पूर्णिमा पर सुहागन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना करेंगी। वहीं संत कबीर जयंती पर देशभर में भजन सत्संग और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पूरे जून महीने में मंदिरों में विशेष पूजा पाठ भजन कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की धूम देखने को मिलेगी। श्रद्धालुओं के लिए यह महीना भक्ति साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है।