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  • ‘गदर’ के पहले ही दिन घबरा गई थीं अमीषा पटेल, अमरीश पुरी के साथ पहला सीन बना यादगार; दिग्गज अभिनेता की सादगी ने जीता दिल

    ‘गदर’ के पहले ही दिन घबरा गई थीं अमीषा पटेल, अमरीश पुरी के साथ पहला सीन बना यादगार; दिग्गज अभिनेता की सादगी ने जीता दिल


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘गदर’ को 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अभिनेत्री अमीषा पटेल ने फिल्म से जुड़ी कई यादगार बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दौर में जब उन्हें दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के साथ काम करने का अवसर मिला, तब वह बेहद घबराई हुई थीं। हालांकि शूटिंग के दौरान अमरीश पुरी के व्यवहार और सहयोगी स्वभाव ने उनकी सारी झिझक दूर कर दी थी।

    अमीषा पटेल ने कहा कि दर्शकों के बीच अमरीश पुरी की पहचान एक सशक्त और प्रभावशाली अभिनेता के रूप में थी। फिल्मों में उनके निभाए गए नकारात्मक किरदारों ने उन्हें एक अलग पहचान दी थी, लेकिन वास्तविक जीवन में उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग था। वह बेहद सरल, सहज और मजाकिया स्वभाव के इंसान थे। उनके साथ काम करने का अनुभव आज भी उनकी सबसे खास यादों में शामिल है।

    अभिनेत्री ने बताया कि ‘गदर’ उनके करियर की शुरुआती फिल्मों में से एक थी। उस समय वह इंडस्ट्री में नई थीं और बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव भी सीमित था। ऐसे में फिल्म के पहले दिन ही उनका महत्वपूर्ण दृश्य अमरीश पुरी के साथ रखा गया था। यह एक भावनात्मक दृश्य था, जिसे फिल्म की कहानी में अहम स्थान प्राप्त था। इतने बड़े कलाकार के साथ पहला ही सीन होने के कारण वह अंदर से काफी घबराई हुई थीं।

    उन्होंने कहा कि कैमरे के सामने आने से पहले उनके मन में कई तरह के सवाल और आशंकाएं थीं। उन्हें डर था कि कहीं वह दृश्य ठीक तरह से न कर पाएं या किसी तरह की गलती न हो जाए। लेकिन जैसे ही शूटिंग शुरू हुई, अमरीश पुरी ने अपने व्यवहार से माहौल को सहज बना दिया। उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह एक नई कलाकार हैं और उनके सामने इंडस्ट्री के सबसे अनुभवी अभिनेताओं में से एक मौजूद हैं।

    अमीषा ने बताया कि अमरीश पुरी सेट पर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा के साथ मौजूद रहते थे। वह कलाकारों और तकनीकी टीम के साथ घुलमिलकर रहते थे तथा माहौल को हल्का बनाए रखते थे। उनकी यही विशेषता उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी। एक बड़े अभिनेता होने के बावजूद उनके व्यवहार में किसी प्रकार का अहंकार नहीं था। यही कारण था कि उनके साथ काम करना किसी सीखने की प्रक्रिया से कम नहीं था।

    अभिनेत्री ने यह भी याद किया कि उस समय उनकी पहली फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई थी और दर्शक उन्हें पहचानते भी नहीं थे। बावजूद इसके अमरीश पुरी ने उन्हें पूरा सम्मान दिया और हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया। उनके सहयोग से वह अपने किरदार को बेहतर ढंग से निभाने में सफल रहीं। अमीषा के अनुसार, किसी नए कलाकार के लिए ऐसा समर्थन बेहद महत्वपूर्ण होता है।

    ‘गदर’ भारतीय सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में सनी देओल, अमीषा पटेल और अमरीश पुरी की भूमिकाओं को दर्शकों ने खूब सराहा था। विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की थी और इसके संवाद व किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।

    फिल्म की सफलता के वर्षों बाद भी कलाकारों द्वारा साझा की गई ऐसी यादें दर्शकों को उस दौर से जोड़ती हैं। अमीषा पटेल के ताजा बयान ने एक बार फिर यह दिखाया है कि बड़े कलाकारों की असली पहचान केवल उनके अभिनय से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और सहयोगी स्वभाव से भी बनती है। अमरीश पुरी की यही विशेषताएं उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल करती हैं।

  • 'गदर' के 25 वर्ष पूरे होने पर अमीषा पटेल का बड़ा खुलासा, सनी देओल संग उम्र के फासले के कारण फिल्म न करने की मिली थी सलाह

    'गदर' के 25 वर्ष पूरे होने पर अमीषा पटेल का बड़ा खुलासा, सनी देओल संग उम्र के फासले के कारण फिल्म न करने की मिली थी सलाह

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित और सफल फिल्मों में शुमार ‘गदर: एक प्रेम कथा’ की रिलीज को हाल ही में 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर फिल्म की मुख्य अभिनेत्री अमीषा पटेल ने अपने शुरुआती करियर और फिल्म की कास्टिंग से जुड़े कई अनसुने व चौंकाने वाले पहलुओं को साझा किया है। एक साक्षात्कार के दौरान अपने बेबाक अंदाज के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री ने बताया कि जब उन्होंने इस प्रोजेक्ट को साइन किया था, तब फिल्म उद्योग और उनके आसपास के कई लोगों ने उन्हें इस फिल्म का हिस्सा न बनने की सख्त सलाह दी थी। विरोध की सबसे बड़ी वजह उनके और अभिनेता सनी देओल के बीच उम्र का एक लंबा फासला था, जिसे उस दौर के सिनेमाई पैमानों पर जोखिम भरा माना जा रहा था।

    फिल्म के निर्माण के समय की परिस्थितियों को याद करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि उस वक्त उनकी उम्र महज 26 वर्ष थी, जबकि स्थापित सुपरस्टार सनी देओल 43 वर्ष के थे। इस बड़े आयु अंतर को लेकर केवल बाहरी लोग ही नहीं, बल्कि खुद वे भी शुरुआत में थोड़ी आशंकित थीं। एक नवागंतुक कलाकार के तौर पर उनके मन में यह स्वाभाविक सवाल था कि क्या दर्शकों को पर्दे पर यह जोड़ी स्वीकार्य होगी या नहीं। हालांकि, फिल्म की पटकथा और उसके गहरे विषय ने बाद में इस उम्र के फासले को पूरी तरह से पर्दे पर न्यायसंगत साबित किया, जिसने बाद में बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।

    सिनेमाई संरचना पर बात करते हुए अभिनेत्री ने कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग को उम्र के अंतर वाले किरदारों के रोमांस को पर्दे पर दिखाना जारी रखना चाहिए, बशर्ते कहानी में उसकी कोई ठोस और तार्किक वजह मौजूद हो। आजकल दर्शकों द्वारा कुछ फिल्मों को नापसंद किए जाने का एक मुख्य कारण यह भी है कि कहानियों में बिना किसी मजबूत संदर्भ के ऐसी कास्टिंग थोप दी जाती है। ‘गदर’ के मामले में यह अंतर कागजी तौर पर भले ही अजीब लग रहा था, लेकिन जब फिल्म परदे पर उतरी तो किरदारों के सामाजिक और पारिवारिक परिवेश ने इस अंतर को एक खूबसूरत मोड़ दे दिया।

    कहानी के दृष्टिकोण से यह फासला बेहद सटीक बैठता था क्योंकि फिल्म एक ऐसे सीधे-साधे और कम पढ़े-लिखे स्थानीय युवक तारा सिंह की कहानी थी, जिसे एक कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने वाली संभ्रांत परिवार की युवती सकीना से प्रेम हो जाता है। तारा सिंह के लिए सकीना एक ऐसी राजकुमारी की तरह थी, जिसे पाना सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद कठिन था। दोनों किरदारों के बीच धर्म, शिक्षा और जीवनशैली का एक बड़ा अंतर था, जिसे इस आयु वर्ग के अंतर ने और अधिक गहराई प्रदान की। यही कारण था कि दर्शकों ने दोनों के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को बहुत शिद्दत से महसूस किया।

    मध्य प्रदेश। इस ऐतिहासिक प्रेम कहानी की सबसे बड़ी खूबसूरती यही थी कि दोनों किरदारों ने एक-दूसरे के परिवेश को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया था। जहां सकीना ने भारतीय संस्कृति और तारा सिंह के परिवार को ससम्मान अपनाया, वहीं तारा सिंह भी अपने परिवार की खुशी के लिए सीमा पार जाने को सहर्ष तैयार हो गया। वह केवल उसी परिस्थिति में उग्र रूप धारण करता है जब उसकी व्यक्तिगत और राष्ट्रीय पहचान पर प्रहार किया जाता है। अभिनेत्री के इन ताजा बयानों ने एक बार फिर 25 वर्ष पुरानी यादों को ताजा कर दिया है और यह साबित किया है कि एक मजबूत पटकथा किसी भी रूढ़िवादी सिनेमाई मानदंड को बदलने की पूरी क्षमता रखती है।

  • सलमान खान की तेरे नाम ठुकराना अमीषा पटेल को पड़ा भारी सालों बाद छलका अफसोस

    सलमान खान की तेरे नाम ठुकराना अमीषा पटेल को पड़ा भारी सालों बाद छलका अफसोस


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की चर्चित फिल्म तेरे नाम आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाए हुए है और सलमान खान के करियर की यह एक अहम फिल्म मानी जाती है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म के लिए पहली पसंद अमीषा पटेल थीं। अब सालों बाद खुद अमीषा पटेल ने इस बात का खुलासा किया है और साथ ही यह भी बताया है कि उन्होंने इस फिल्म को क्यों ठुकरा दिया था।

    अमीषा पटेल ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में बताया कि जब सलमान खान ने उन्हें तेरे नाम का ऑफर दिया था तब फिल्म अपने शुरुआती दौर में थी। उस समय फिल्म का पूरा ढांचा तैयार नहीं था बल्कि केवल कुछ गाने और एक बेसिक कहानी का आइडिया ही मौजूद था। सलमान खान इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित थे और उन्होंने अमीषा को गाने भी सुनाए थे जो उन्हें काफी पसंद आए थे। इसके बावजूद फिल्म को लेकर कई तरह की अनिश्चितताएं बनी हुई थीं।

    अमीषा के मुताबिक उस समय न तो फिल्म का शेड्यूल तय था और न ही यह स्पष्ट था कि इसका निर्देशन कौन करेगा। प्रोजेक्ट लंबे समय तक अटका रहा और अलग अलग निर्देशकों के नाम सामने आते रहे। ऐसे में एक कलाकार के तौर पर उनके लिए यह तय करना मुश्किल हो गया कि वह इस अनिश्चित फिल्म के लिए अपनी बाकी फिल्मों को छोड़ दें।

    उन्होंने बताया कि उस दौरान वह पहले ही कई अन्य फिल्मों के लिए अपनी तारीखें दे चुकी थीं और अपने काम को लेकर पूरी तरह कमिटेड थीं। तेरे नाम का काम कभी शुरू होने की उम्मीद जगाता तो कभी टल जाता जिससे स्थिति और ज्यादा उलझती चली गई। इसी वजह से उन्हें इस फिल्म को छोड़ने का फैसला लेना पड़ा।

    अमीषा पटेल ने यह भी स्वीकार किया कि जब आखिरकार फिल्म पूरी तरह तैयार हुई और सतीश कौशिक ने निर्देशन की जिम्मेदारी संभाली तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उस समय तक वह अपने अन्य प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हो चुकी थीं और उनके पास इस फिल्म के लिए समय नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि अगर उस समय फिल्म के साथ एक फिक्स डायरेक्टर और तय शेड्यूल होता तो वह कभी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देतीं।

    इस फैसले को लेकर आज भी अमीषा को अफसोस है क्योंकि तेरे नाम बाद में एक कल्ट फिल्म साबित हुई। फिल्म में सलमान खान का राधे मोहन किरदार और उनका खास हेयरस्टाइल युवाओं के बीच जबरदस्त ट्रेंड बन गया था। इसके साथ ही फिल्म का संगीत भी सुपरहिट रहा जिसने इसे और ज्यादा लोकप्रिय बना दिया।

    अमीषा के इस रोल को ठुकराने के बाद यह मौका भूमिका चावला को मिला जिन्होंने इसी फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखा और पहली ही फिल्म से दर्शकों के बीच अपनी पहचान बना ली। तेरे नाम ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की बल्कि इसे हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में भी शामिल कर दिया गया।

    आज जब अमीषा पटेल इस फैसले को याद करती हैं तो उन्हें लगता है कि यह उनके करियर का एक बड़ा मिस्ड अवसर था। यह कहानी एक बार फिर यह साबित करती है कि फिल्म इंडस्ट्री में सही समय पर लिया गया फैसला किस तरह किसी कलाकार की दिशा और पहचान को बदल सकता है।