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  • रामायण में सीता का किरदार मिलने पर साई पल्लवी ने की खास प्रार्थना, बोलीं- मां सीता मेरे जरिए निभाइए यह भूमिका

    रामायण में सीता का किरदार मिलने पर साई पल्लवी ने की खास प्रार्थना, बोलीं- मां सीता मेरे जरिए निभाइए यह भूमिका

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री साई पल्लवी जल्द ही फिल्म रामायण में माता सीता की भूमिका निभाती नजर आएंगी। इस किरदार को लेकर उन्होंने अपने विचार साझा किए हैं। साई पल्लवी के मुताबिक, जब उन्हें माता सीता का किरदार निभाने का अवसर मिला, तो उन्होंने इसे सामान्य फिल्मी भूमिका की तरह लेने के बजाय प्रार्थना और समर्पण के भाव से स्वीकार करने का फैसला किया। उनके लिए यह भूमिका केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव भी है।

    साई पल्लवी ने हाल ही में अमिताभ बच्चन के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति 18 में हिस्सा लिया। शो के एक विशेष प्रोमो में अमिताभ बच्चन ने उनसे पूछा कि जब उन्हें पता चला कि वह फिल्म रामायण में माता सीता की भूमिका निभाने वाली हैं, तो उनके मन में सबसे पहले क्या विचार आया था। इस सवाल के जवाब में अभिनेत्री ने अपने अनुभव के बारे में बताया।

    उन्होंने कहा कि आमतौर पर किसी भी किरदार को निभाने से पहले वह इस बारे में सोचती हैं कि उस भूमिका में अपनी ओर से क्या नया कर सकती हैं। कलाकार के तौर पर वह किरदार को समझने और उसे अपने तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश करती हैं। हालांकि, माता सीता की भूमिका मिलने के बाद उनका नजरिया बदल गया। इस बार उन्होंने अपने दिमाग से अधिक सोचने के बजाय खुद को उस भूमिका के प्रति समर्पित करने पर ध्यान दिया।

    साई पल्लवी ने बताया कि वह इस किरदार को लेकर बहुत अधिक विचार नहीं करना चाहती थीं। उन्होंने अपने मन को शांत रखते हुए प्रार्थना की। अभिनेत्री के अनुसार, उन्होंने माता सीता से कहा कि वह उनके माध्यम से इस किरदार को निभाएं। उन्होंने अपनी प्रार्थना में खुद को पूरी तरह इस अनुभव के लिए समर्पित करने की भावना व्यक्त की। उनके इस बयान से पता चलता है कि वह इस भूमिका को कितनी गंभीरता और श्रद्धा के साथ देख रही हैं।

    रामायण में अहम भूमिका निभाएंगी साई पल्लवी

    निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म रामायण में भारतीय महाकाव्य की कहानी को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाएगा। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म की स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता है।

    फिल्म की कहानी भगवान राम के जीवन, माता सीता से उनके विवाह और इसके बाद शुरू होने वाले 14 वर्ष के वनवास के घटनाक्रम पर आधारित होगी। वनवास के दौरान माता सीता और लक्ष्मण भी भगवान राम के साथ जाते हैं। आगे चलकर रावण का प्रवेश कहानी में महत्वपूर्ण मोड़ लाता है। पहले भाग में माता सीता के अपहरण तक की घटनाओं को दिखाए जाने की उम्मीद है, जबकि दूसरे भाग में इसके बाद की कहानी और संघर्ष को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    फिल्म को दो भागों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है। पहले भाग की निर्धारित रिलीज तारीख 5 नवंबर 2026 बताई गई है। फिल्म में पौराणिक पात्रों को निभाने वाले कलाकारों की तैयारी और उनके किरदारों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।

    केबीसी के विशेष एपिसोड में भी नजर आएंगी अभिनेत्री

    साई पल्लवी फिल्म रामायण के सह-कलाकार रणबीर कपूर और रवि दुबे के साथ कौन बनेगा करोड़पति 18 के विशेष दिवाली एपिसोड में भी दिखाई देंगी। इन एपिसोड का प्रसारण 29 और 30 अक्टूबर को रात 9 बजे निर्धारित है। अमिताभ बच्चन के साथ कलाकारों की मौजूदगी से जुड़े प्रोमो में फिल्म और उसके किरदारों को लेकर बातचीत की झलक देखने को मिलेगी।

    साई पल्लवी की प्रार्थना ने माता सीता की भूमिका के प्रति उनके दृष्टिकोण को सामने रखा है। अभिनेत्री ने इस किरदार को निभाने के लिए अपनी व्यक्तिगत सोच से अधिक समर्पण और श्रद्धा को महत्व देने की बात कही है।

  • अमिताभ बच्चन की 7 खास आदतें, हर रविवार नंगे पैर फैंस से मिलने से लेकर दो घड़ियां पहनने तक, जानिए बिग बी की जिंदगी के दिलचस्प किस्से

    अमिताभ बच्चन की 7 खास आदतें, हर रविवार नंगे पैर फैंस से मिलने से लेकर दो घड़ियां पहनने तक, जानिए बिग बी की जिंदगी के दिलचस्प किस्से

    नई दिल्ली: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन 11 अक्टूबर को अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। शानदार अभिनय और दमदार आवाज के लिए पहचाने जाने वाले अमिताभ ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए हैं। पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता की निजी जिंदगी से जुड़ी कुछ आदतें भी उन्हें चर्चा में रखती हैं। प्रशंसकों से मिलने का उनका खास अंदाज, लगातार ब्लॉग लिखना और काम के प्रति अनुशासन उनकी दिनचर्या के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। उनके जन्मदिन के मौके पर ऐसी ही कुछ आदतों और जीवन के अनुभवों पर नजर डालना दिलचस्प है, जिनमें प्रशंसकों के प्रति उनका जुड़ाव और मुश्किल समय में वापसी की कहानी भी शामिल है।

    अमिताभ बच्चन की सबसे चर्चित परंपराओं में से एक मुंबई स्थित उनके बंगले जलसा के बाहर प्रशंसकों से मुलाकात करना है। हर रविवार उनके चाहने वाले उनसे मिलने की उम्मीद में बंगले के बाहर इकट्ठा होते हैं। अमिताभ लंबे समय से इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं और कई बार प्रशंसकों से मिलने के लिए नंगे पैर बाहर आते हैं। उनके इस अंदाज को प्रशंसकों के प्रति स्नेह और सम्मान से जोड़कर देखा जाता है। इसके अलावा, अमिताभ सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं। उन्होंने अप्रैल 2008 में अपना ब्लॉग शुरू किया था, जिसके माध्यम से वह अपने विचार, अनुभव और जीवन से जुड़ी बातें साझा करते हैं। व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद ब्लॉग लेखन उनके लिए प्रशंसकों से जुड़े रहने का एक माध्यम बना हुआ है। किसी के काम की सराहना करने के लिए हाथ से पत्र लिखना और गुलदस्ता भेजना भी उनकी खास आदतों में शामिल बताया जाता है।

    अमिताभ बच्चन से जुड़ी एक अन्य दिलचस्प बात यह है कि वह दोनों हाथों से लिख सकते हैं। इस क्षमता को अंग्रेजी में एम्बिडेक्सट्रस कहा जाता है। इसके अलावा, उन्हें कई बार एक साथ दो घड़ियां पहने हुए भी देखा गया है। हालांकि, वह ऐसा किस वजह से करते हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं है। उनकी दिनचर्या और फिटनेस को लेकर भी चर्चा होती रहती है। व्यस्त कार्यक्रम के बीच काम के लिए समय निकालना और अलग-अलग परियोजनाओं में सक्रिय रहना उनके कार्य अनुशासन को दर्शाता है। फिल्मों के साथ टेलीविजन कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में भी वह लगातार नजर आते रहे हैं। लंबे करियर के बाद भी विभिन्न माध्यमों पर उनकी सक्रियता बनी हुई है। उनके काम करने के तरीके और समय की पाबंदी को लेकर भी अक्सर बातें होती हैं।

    अमिताभ बच्चन के जीवन में कठिन दौर भी आया। 1990 के दशक में उनकी कंपनी अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एबीसीएल को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा था। इस मुश्किल समय के बाद उन्होंने फिल्मों में वापसी की और ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के माध्यम से टेलीविजन पर भी नई पहचान बनाई। उनका करियर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है, लेकिन उन्होंने काम जारी रखा और मनोरंजन जगत में अपनी सक्रियता बनाए रखी। उनके जीवन की यह यात्रा उनके पेशेवर संघर्ष का अहम हिस्सा है। प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता के साथ-साथ उनकी काम के प्रति प्रतिबद्धता भी चर्चा में रहती है।

    जन्मदिन के मौके पर अमिताभ बच्चन की इन आदतों और अनुभवों की चर्चा उनके व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती है। जलसा के बाहर प्रशंसकों से मुलाकात की परंपरा उनके प्रशंसकों के साथ लंबे समय से चले आ रहे जुड़ाव को दिखाती है, जबकि ब्लॉग लेखन उन्हें अपने विचार सीधे साझा करने का अवसर देता है। दोनों हाथों से लिखने की क्षमता, एक साथ दो घड़ियां पहनने का अंदाज और हाथ से पत्र लिखकर दूसरों की सराहना करना उनकी जिंदगी से जुड़ी खास बातें हैं। वहीं, आर्थिक मुश्किलों के बाद फिल्मों और टेलीविजन में वापसी उनके लंबे पेशेवर सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

  • 84 साल की उम्र में अमिताभ बच्चन ने बताई अधूरी ख्वाहिश, बोले- संगीत सीखने की इच्छा आज भी पूरी नहीं हो पाई

    84 साल की उम्र में अमिताभ बच्चन ने बताई अधूरी ख्वाहिश, बोले- संगीत सीखने की इच्छा आज भी पूरी नहीं हो पाई

    नई दिल्ली ।अमिताभ बच्चन ने अपनी जिंदगी से जुड़ी एक ऐसी अधूरी इच्छा के बारे में बताया है, जिसे लेकर उन्हें आज भी अफसोस है। अभिनय और अपनी दमदार आवाज के लिए पहचान रखने वाले अभिनेता ने बताया कि उन्हें संगीत सीखने की काफी इच्छा थी, लेकिन वह इसे कभी सीख नहीं पाए। उन्होंने यह बात क्विज रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति-18’ के आगामी एपिसोड के दौरान बातचीत में साझा की।

    शो में अमिताभ बच्चन की बातचीत कंटेस्टेंट कृतज्ञा नैयर के साथ हुई। कृतज्ञा ने अभिनेता से एक लोकप्रिय गेम ‘दिस और दैट’ खेलने का अनुरोध किया। उन्होंने अमिताभ बच्चन को बताया कि वह कंटेंट बनाती हैं और इस गेम के जरिए एक रील बनाना चाहती हैं, ताकि उनके फॉलोअर्स भी बढ़ सकें।

    इसी बातचीत के दौरान कृतज्ञा ने अमिताभ बच्चन से एक दिलचस्प सवाल पूछा। उन्होंने जानना चाहा कि क्या अभिनेता अपने अतीत के किसी एक दिन को दोबारा जीना पसंद करेंगे या फिर ऐसा कोई दिन जीना चाहेंगे, जो उन्होंने अब तक नहीं जिया है, लेकिन हमेशा से उसे जीने की इच्छा रही है।

    इस सवाल के जवाब में अमिताभ बच्चन ने कहा कि उनकी जिंदगी में इतनी घटनाएं हुई हैं कि यह तय करना आसान नहीं है कि वह किस दिन को दोबारा जीना चाहेंगे। इसके साथ ही उन्होंने उस दूसरी संभावना पर बात की, जिसमें ऐसा कोई दिन जीने की इच्छा शामिल है, जिसे उन्होंने अभी तक अनुभव नहीं किया।

    इसी दौरान अमिताभ बच्चन ने अपनी संगीत से जुड़ी इच्छा का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह संगीत सीखना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अभिनेता ने कहा कि जब वह संगीतकारों और गीतकारों को सुनते हैं तो उनके मन में यह सवाल आता है कि कोई इतना अच्छा कैसे गा सकता है। उन्होंने माना कि उन्होंने खुद कभी संगीत नहीं सीखा।

    अमिताभ बच्चन ने यह भी बताया कि उनके घर में संगीत सीखने के लिए जरूरी वाद्य यंत्र मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने संगीत सीखने के लिए घर में कई यंत्र जुटाकर रखे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद वह इस कला को सीख नहीं सके।

    अभिनेता ने अपने अंदाज में कहा कि इन वाद्य यंत्रों के ऊपर फूलों की माला चढ़ाकर वह इस उम्मीद में रहते हैं कि एक दिन वह संगीत सीखना शुरू करेंगे। हालांकि, वह दिन अब तक नहीं आया और संगीत सीखने की उनकी इच्छा अधूरी रह गई।

    अमिताभ बच्चन ने अपनी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि अब वह 84 साल के हो गए हैं और अभी तक उन्हें संगीत नहीं आया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस बात का उन्हें बहुत दुख है। उनकी यह बात उनकी उस पुरानी इच्छा को सामने लाती है, जिसे वह चाहने के बावजूद पूरा नहीं कर सके।

    इस बातचीत में अमिताभ बच्चन ने यह भी दिखाया कि जिंदगी में कई उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद कुछ व्यक्तिगत इच्छाएं ऐसी रह सकती हैं, जिन्हें पूरा करने का अवसर नहीं मिल पाता। संगीत सीखना और वाद्य यंत्र बजाना उनके लिए ऐसी ही एक अधूरी ख्वाहिश है।

  • भारी बारिश के बीच भी हर रविवार निभाई परंपरा, अमिताभ बच्चन ने फैंस से मुलाकात कर कहा- आपका स्नेह मुझे हर बार भावुक कर देता है

    भारी बारिश के बीच भी हर रविवार निभाई परंपरा, अमिताभ बच्चन ने फैंस से मुलाकात कर कहा- आपका स्नेह मुझे हर बार भावुक कर देता है


    नई दिल्ली ।
    मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच भी महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने प्रशंसकों से मिलने की वर्षों पुरानी परंपरा को कायम रखा। हर रविवार की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में फैंस उनके आवास ‘जलसा’ के बाहर पहुंचे, जहां बिग बी ने उनका अभिवादन स्वीकार किया। खराब मौसम के बावजूद प्रशंसकों का उत्साह और समर्पण देखकर अभिनेता भावुक नजर आए। उन्होंने अपने आधिकारिक ब्लॉग के माध्यम से सभी का आभार व्यक्त करते हुए लोगों से बारिश के दौरान सावधानी बरतने की अपील भी की।

    अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि मौसम चाहे धूप का हो, ठंड का हो या फिर तेज बारिश का, उनके प्रशंसक हर सप्ताह उसी उत्साह और प्रेम के साथ उनसे मिलने आते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्नेह और अपनापन उन्हें हर बार भावुक कर देता है। उन्होंने बताया कि वह हाथ जोड़कर, हाथ हिलाकर और ऑटोग्राफ देकर अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रयास करते हैं, लेकिन उनके प्रेम का मूल्य शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है।

    मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश को लेकर भी अभिनेता ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बारिश जहां जलस्रोतों और झीलों के लिए लाभदायक है, वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित हो रही है। जलभराव, यातायात में बाधा और सामान्य जनजीवन पर पड़ रहे असर को देखते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति जल्द सामान्य होगी और लोगों को राहत मिलेगी।

    अमिताभ बच्चन ने अपने संदेश में सभी नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौसम की गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए लोग केवल अत्यंत आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें। उन्होंने सभी से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। अभिनेता ने कहा कि केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि जहां भी भारी बारिश का असर है, वहां रहने वाले सभी लोग सावधानी बरतें क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें अमिताभ बच्चन के बंगले ‘जलसा’ के बाहर जमा बारिश का पानी परिसर के भीतर तक पहुंचता दिखाई दिया। लगातार बारिश और जल निकासी की समस्या के कारण आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। इस वीडियो के सामने आने के बाद शहर में बारिश से उत्पन्न चुनौतियों पर भी व्यापक चर्चा हुई।

    इसके बावजूद अभिनेता ने अपने प्रशंसकों से मिलने की परंपरा को नहीं तोड़ा। बड़ी संख्या में पहुंचे फैंस ने बारिश की परवाह किए बिना अपने पसंदीदा अभिनेता की एक झलक पाने का इंतजार किया। अमिताभ बच्चन ने भी उन्हें निराश नहीं किया और घर के बाहर आकर हाथ हिलाकर सभी का अभिवादन किया। यह दृश्य एक बार फिर उनके और उनके प्रशंसकों के बीच वर्षों से बने गहरे भावनात्मक रिश्ते का प्रतीक बन गया।

    अमिताभ बच्चन लंबे समय से हर रविवार अपने आवास के बाहर फैंस से मुलाकात करते रहे हैं। देश और विदेश से आने वाले प्रशंसकों के लिए यह मुलाकात किसी विशेष अवसर से कम नहीं होती। खराब मौसम जैसी परिस्थितियां भी इस परंपरा और प्रशंसकों के उत्साह को प्रभावित नहीं कर सकीं। अभिनेता का यह व्यवहार उनके प्रशंसकों के प्रति सम्मान और आत्मीयता को दर्शाता है।

    फिल्मी मोर्चे पर भी अमिताभ बच्चन आने वाले समय में एक बड़े प्रोजेक्ट के साथ दर्शकों के बीच नजर आएंगे। वह फिल्म ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल ‘कल्कि 2’ में एक बार फिर अश्वत्थामा के अपने चर्चित किरदार को निभाते दिखाई देंगे। इस फिल्म में उनके साथ प्रभास और कमल हासन सहित कई प्रमुख कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है।

  • अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना

    अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे प्रतिष्ठित और स्क्रीन पर तहलका मचाने वाली जोड़ियों का जिक्र होता है, तो अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। सत्तर और अस्सी के दशक में इन दोनों दिग्गज कलाकारों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कारी तालमेल दिखाया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और दर्शकों के बीच यह माना जाने लगा था कि जिस फिल्म में ये दोनों साथ हैं, उसका सुपरहिट होना तय है। इस ब्लॉकबस्टर जोड़ी की लोकप्रियता का आलम यह था कि इनकी एक कल्ट क्लासिक फिल्म रिलीज के बाद लगातार पांच सालों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी थी, जो अपने आप में एक अटूट कीर्तिमान है। इन दोनों महानायकों ने मुख्य भूमिकाओं से लेकर खास कैमियो रोल्स तक, कुल ९ फिल्मों में एक साथ स्क्रीन शेयर कर सिल्वर स्क्रीन पर अपनी दोस्ती और अभिनय का लोहा मनवाया।

    इस बेमिसाल जोड़ी के करियर और हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल १९७५ में आई फिल्म ‘शोले’ एक मील का पत्थर साबित हुई। निर्देशक रमेश सिप्पी की इस एक्शन-ड्रामा फिल्म में जय और वीरू के किरदारों में अमिताभ और धर्मेंद्र ने जिगरी दोस्ती की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की, जो आज आधी सदी बीत जाने के बाद भी मुहावरा बनी हुई है। यह फिल्म न केवल उस दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, बल्कि मुंबई के मिनर्वा थिएटर में लगातार पांच सालों तक चलकर इसने इतिहास रच दिया। इसी साल इस सुपरहिट जोड़ी की एक और क्लासिक फिल्म ‘चुपके चुपके’ रिलीज हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी यह बेहतरीन कॉमेडी फिल्म बंगाली सिनेमा की रीमेक थी। फिल्म में दोनों की कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी और एसडी बर्मन के संगीत से सजे इसके गाने आज भी चाव से सुने जाते हैं।

    एक्शन और कॉमेडी के बाद इस जोड़ी ने साल १९८० में आई फिल्म ‘राम बलराम’ के जरिए थ्रिलर जॉनर में अपनी धाक जमाई। विजय आनंद द्वारा निर्देशित इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में दोनों ने ऐसे दो भाइयों का किरदार निभाया था, जिनका पालन-पोषण धोखे से उनके माता-पिता के हत्यारे चाचा ने किया था। इसके अलावा यह जोड़ी ऋषिकेश मुखर्जी की ही एक और कल्ट फिल्म ‘गुड्डी’ में भी एक साथ नजर आई थी। हालांकि इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेत्री जया बच्चन की थी, लेकिन धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री की असलियत दिखाते हुए इसमें बेहद प्रभावी कैमियो रोल किए थे, जिसने फिल्म की कहानी को एक नया आयाम दिया था।

    सिल्वर स्क्रीन पर नए प्रयोग करने के मामले में भी यह जोड़ी पीछे नहीं रही। साल १९७७ में रिलीज हुई फिल्म ‘चरणदास’ एकमात्र ऐसी अनूठी फिल्म है, जिसमें अमिताभ और धर्मेंद्र दोनों ने कव्वाली गायकों के रूप में एक विशेष और बेहद दिलचस्प भूमिका निभाई थी। आशा भोसले और मुकेश की आवाज में सजे इस फिल्म के कव्वाली गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इसके बाद निर्देशक दुलल गुहा की फिल्म ‘दोस्त’ में भी अमिताभ बच्चन ने ‘आनंद’ नाम के किरदार में एक बेहद प्रभावशाली कैमियो किया था, जहां मुख्य भूमिका में धर्मेंद्र मौजूद थे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजी इस फिल्म में दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा था।

    इन दोनों सितारों की जुगलबंदी का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिसमें एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘जादूगर’ शामिल है। इस रहस्यमयी कहानी में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने क्रमशः वीरेंद्र और फ्रैंक जेम्स की भूमिकाएं निभाकर दर्शकों को चौंका दिया था, जिसकी पृष्ठभूमि एक सुनसान हवेली से जुड़ी थी। इसके बाद फिल्म ‘दिल्लगी’ में भी दोनों का जादू देखने को मिला, जहां अमिताभ बच्चन का रोल भले ही छोटा था, लेकिन एक गंभीर और सीधे-सादे प्रोफेसर की भूमिका निभा रहे धर्मेंद्र के साथ उनकी ऑनस्क्रीन मौजूदगी ने फिल्म की रौनक बढ़ा दी थी। इसके अतिरिक्त इस लिस्ट में एक अन्य फिल्म ‘हम कौन हैं’ का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जिसमें इस महान जोड़ी ने अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

  • ‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

    ‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

    नई दिल्ली । भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और रचनात्मकता का प्रतिबिंब भी होती है। यही संदेश वरिष्ठ अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने हालिया ब्लॉग के माध्यम से साझा किया है। उन्होंने आम लोगों की बोलचाल में दिखाई देने वाली भाषाई सृजनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि लोग अक्सर विदेशी शब्दों को अपनी सुविधा, समझ और स्थानीय प्रभाव के अनुरूप नया रूप दे देते हैं, जिससे वे शब्द और भी आत्मीय तथा रोचक बन जाते हैं।

    अमिताभ बच्चन ने अपने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए ब्लॉग की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लॉग लिखने में हुई देरी का कारण आलस्य नहीं, बल्कि कार्य व्यस्तता थी। उन्होंने कहा कि दिनभर के कार्यों के बाद अपने प्रशंसकों से संवाद करना उनके लिए एक विशेष अनुभव होता है और यही उनके दैनिक कार्यों की पूर्णता का एहसास भी कराता है।

    अपने विचारों को समझाने के लिए उन्होंने अपने आवास ‘जलसा’ से जुड़ा एक रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके यहां काम करने वाले एक माली को अंग्रेजी शब्दों का उच्चारण करने में कठिनाई होती थी। विशेष रूप से एक शब्द को वह सही ढंग से नहीं बोल पाता था, इसलिए उसने उसे अपनी सुविधा के अनुसार बदलकर नया रूप दे दिया। अभिनेता के अनुसार, यह नया उच्चारण इतना सहज और आत्मीय लगा कि कई बार वह मूल शब्द की तुलना में अधिक प्रभावशाली प्रतीत हुआ।

    उन्होंने एक अन्य उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ लोग ‘रेडिएटर’ शब्द को अपने तरीके से ‘रेडी वॉटर’ कहने लगे। इसके पीछे उनका अपना तर्क भी था कि जिस उपकरण में पानी भरा जाता है, उसके लिए ऐसा नाम अधिक उपयुक्त लगता है। अमिताभ बच्चन ने कहा कि यद्यपि यह तकनीकी रूप से सही शब्द नहीं है, लेकिन यह लोगों की सोचने और भाषा को अपने अनुरूप ढालने की क्षमता को दर्शाता है।

    अभिनेता का मानना है कि भाषा का वास्तविक सौंदर्य उसकी लचीलापन और स्वीकार्यता में निहित होता है। समाज के विभिन्न वर्ग, क्षेत्र और भाषाई पृष्ठभूमि वाले लोग जब किसी शब्द को अपनाते हैं, तो उसमें अपनी संस्कृति और अनुभवों का रंग भी जोड़ देते हैं। यही प्रक्रिया भाषा को स्थिर नहीं रहने देती, बल्कि उसे समय के साथ विकसित और समृद्ध बनाती है।

    उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए किसी विदेशी भाषा या उसके जटिल शब्दों का शुद्ध उच्चारण करना आसान नहीं होता। ऐसे में लोग अपनी समझ और सुविधा के अनुसार नए शब्द गढ़ लेते हैं। यह केवल उच्चारण की त्रुटि नहीं, बल्कि भाषा के प्रति मानवीय अनुकूलन क्षमता का उदाहरण है। इसी वजह से ऐसे शब्द लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों और दैनिक जीवन का हिस्सा बने रहते हैं।

    अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि भाषा की यही सहजता उसे आम लोगों से जोड़ती है। जब कोई शब्द स्थानीय संदर्भों और बोलचाल में ढल जाता है तो वह केवल शब्द नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक अनुभव का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से मिलने वाला उनका स्नेह और समर्थन उनके जीवन को निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।

    भाषा और समाज के संबंध पर व्यक्त किए गए उनके विचार यह संकेत देते हैं कि रचनात्मकता केवल साहित्य या कला तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य बातचीत और दैनिक जीवन में भी उतनी ही प्रभावशाली रूप से दिखाई देती है। यही विशेषता भाषा को जीवंत, प्रासंगिक और समय के साथ विकसित होने योग्य बनाती है।

  • क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई

    क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में कलाकारों के आपसी संबंध और सेट पर हुए विवाद कई बार बड़े फैसलों की वजह बन जाते हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्सा हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना और मशहूर अभिनेत्री जया बच्चन (तब जया भादुड़ी) से जुड़ा है। साल 1972 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की क्लासिक फिल्म ‘बावर्ची’ में एक साथ काम करने के बाद इस जोड़ी ने हमेशा के लिए एक-दूसरे के साथ काम करने से तौबा कर ली थी। इसके पीछे की मुख्य वजह कोई व्यावसायिक मतभेद नहीं, बल्कि महानायक अमिताभ बच्चन से जुड़ा एक वाक्या था।

    उस दौर में राजेश खन्ना भारतीय फिल्म उद्योग के शीर्ष शिखर पर थे और उनकी लगातार हिट फिल्मों के कारण उनका एकछत्र राज था। दूसरी ओर, अमिताभ बच्चन उस समय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे। ‘आनंद’ जैसी सफल फिल्म में साथ काम करने के बावजूद राजेश खन्ना तत्कालीन परिस्थितियों में अमिताभ बच्चन को केवल एक संघर्षरत अभिनेता के रूप में ही देखते थे और उनके प्रति उनका रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहता था।

    ‘बावर्ची’ की शूटिंग के दिनों में जया बच्चन और अमिताभ बच्चन एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। अमिताभ बच्चन अक्सर जया बच्चन से मिलने के लिए फिल्म के सेट पर आया करते थे। दोनों को इस तरह साथ देखना उस समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना को रास नहीं आता था। वह अक्सर सेट पर जया बच्चन को टोकते थे और उनसे पूछते थे कि वह इस संघर्षरत अभिनेता के साथ अपना समय क्यों बर्बाद कर रही हैं।

    राजेश खन्ना के जीवन पर आधारित संस्मरणों और वरिष्ठ पत्रकार अली पीटर जॉन के हवाले से सामने आए विवरणों के अनुसार, राजेश खन्ना अक्सर जया से कहते थे कि उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ घूमना-फिरना बंद कर देना चाहिए। उनके शब्द इतने कड़े थे कि उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इस आदमी के साथ रहने से उनका करियर भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। राजेश खन्ना का यह रवैया जया बच्चन को लगातार परेशान कर रहा था।

    विवाद तब और बढ़ गया जब एक दिन अमिताभ बच्चन हमेशा की तरह जया बच्चन से मिलने सेट पर पहुंचे। उस दौरान राजेश खन्ना ने वहां मौजूद अमिताभ बच्चन को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और उनके प्रति बेहद उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया। अपने होने वाले जीवनसाथी का ऐसा अपमान देखकर जया बच्चन का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने उसी वक्त बेहद आक्रामक अंदाज में राजेश खन्ना को जवाब देते हुए कहा था कि एक दिन वक्त बदलेगा और तब देखा जाएगा कि कौन किस मुकाम पर खड़ा है।

    इस घटना से आहत और नाराज जया बच्चन ने तत्काल यह कड़ा फैसला लिया कि वह अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगी। उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद साफ कर दिया था कि वह भविष्य में कभी भी राजेश खन्ना के साथ स्क्रीन साझा नहीं करेंगी। उन्होंने कड़े शब्दों में टिप्पणी की थी कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ काम करना पसंद नहीं करेंगी जो खुद को बहुत ऊपर समझता हो।

    प्रशासनिक और व्यावसायिक दृष्टि से ‘बावर्ची’ साल 1972 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने राजेश खन्ना को उनकी पारंपरिक रोमांटिक और गंभीर छवि से निकालकर एक बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग वाले अभिनेता के रूप में स्थापित किया था। आज भी इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 8.1 है, लेकिन इस बड़ी सफलता के बावजूद जया बच्चन ने अपने फैसले को कायम रखा और कूटनीतिक रूप से इस सुपरस्टार के साथ दोबारा कभी कोई फिल्म साइन नहीं की।

  • जब दोस्ती निभाने के लिए अमिताभ बच्चन उतर गए भोजपुरी सिनेमा में तीन फिल्मों से जीता दिल

    जब दोस्ती निभाने के लिए अमिताभ बच्चन उतर गए भोजपुरी सिनेमा में तीन फिल्मों से जीता दिल


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने लंबे करियर में हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कई अलग-अलग प्रयोग किए हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई थी खास बात यह है कि यह फैसला उन्होंने किसी बड़े प्रोड्यूसर या स्क्रिप्ट के कारण नहीं बल्कि अपने करीबी रिश्ते और दोस्ती के चलते लिया था

    दरअसल भोजपुरी फिल्मों में काम करने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत थे दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और जब दीपक सावंत ने भोजपुरी फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा तो अमिताभ बच्चन ने बिना ज्यादा सोचे इसे स्वीकार कर लिया यह एक ऐसा उदाहरण है जहां प्रोफेशनल दुनिया में भी रिश्तों की अहमियत साफ नजर आती है

    अमिताभ बच्चन ने कुल तीन भोजपुरी फिल्मों में काम किया जिनमें गंगा गंगोत्री और गंगा देवी शामिल हैं इन फिल्मों में उन्होंने अपनी एक्टिंग क्षमता का वही लेवल शो जिसके लिए वह जाने जाते हैं दर्शकों ने भी उन्हें भोजपुरी अंदाज में काफी पसंद किया

    फिल्म गंगा में उनके साथ मनोज तिवारी और रवि किशन जैसे लोकप्रिय सितारे नजर आए इस फिल्म ने दर्शकों के बीच अच्छी पहचान बनाई और भोजपुरी सिनेमा में बिग बी की एंट्री को खास बना दिया

    इसके बाद आई फिल्म गंगोत्री जिसमें हेमा मालिनी और भूमिका चावला भी अहम किरदार में थीं, यह फिल्म भी दर्शकों को पसंद आई और इसने अमिताभ बच्चन की बहुमुखी प्रतिभा को फिर साबित किया।

    तीसरी फिल्म गंगा देवी और भी खास रही क्योंकि इसमें उनके साथ उनकी पत्नी जया बच्चन भी नजर आईं फिल्म की कहानी सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित थी जिसमें एक महिला के संघर्ष और उसके सफर को दिखाया गया था इस फिल्म में गुलशन ग्रोवर और दिनेश लाल यादव जैसे कलाकार भी शामिल थे।

    इन तीन फिल्मों के जरिए अमिताभ बच्चन ने यह साबित किया कि भाषा और इंडस्ट्री कोई भी हो अगर कलाकार सच्चे मन से काम करे तो दर्शकों का प्यार मिलना तय है हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इन फिल्मों के बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा से दूरी बना ली और फिर कभी इस इंडस्ट्री में काम नहीं किया।

    आज जब भोजपुरी सिनेमा तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है तब अमिताभ बच्चन का यह छोटा लेकिन प्रभावशाली सफर और भी खास बन जाता है यह कहानी सिर्फ फिल्मों की नहीं बल्कि दोस्ती निभाती है और एक कलाकार की बहुमुखी प्रतिभा की मिसाल भी हैभारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने लंबे करियर में हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कई अलग-अलग प्रयोग किए हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई थी खास बात यह है कि यह फैसला उन्होंने किसी बड़े प्रोड्यूसर या स्क्रिप्ट के कारण नहीं बल्कि अपने करीबी रिश्ते और दोस्ती के चलते लिया था

    दरअसल भोजपुरी फिल्मों में काम करने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत थे दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और जब दीपक सावंत ने भोजपुरी फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा तो अमिताभ बच्चन ने बिना ज्यादा सोचे इसे स्वीकार कर लिया यह एक ऐसा उदाहरण है जहां प्रोफेशनल दुनिया में भी रिश्तों की अहमियत साफ नजर आती है

    अमिताभ बच्चन ने कुल तीन भोजपुरी फिल्मों में काम किया जिनमें गंगा गंगोत्री और गंगा देवी शामिल हैं इन फिल्मों में उन्होंने अपनी एक्टिंग क्षमता का वही लेवल शो जिसके लिए वह जाने जाते हैं दर्शकों ने भी उन्हें भोजपुरी अंदाज में काफी पसंद किया

    फिल्म गंगा में उनके साथ मनोज तिवारी और रवि किशन जैसे लोकप्रिय सितारे नजर आए इस फिल्म ने दर्शकों के बीच अच्छी पहचान बनाई और भोजपुरी सिनेमा में बिग बी की एंट्री को खास बना दिया

    इसके बाद आई फिल्म गंगोत्री जिसमें हेमा मालिनी और भूमिका चावला भी अहम किरदार में थीं, यह फिल्म भी दर्शकों को पसंद आई और इसने अमिताभ बच्चन की बहुमुखी प्रतिभा को फिर साबित किया।

    तीसरी फिल्म गंगा देवी और भी खास रही क्योंकि इसमें उनके साथ उनकी पत्नी जया बच्चन भी नजर आईं फिल्म की कहानी सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित थी जिसमें एक महिला के संघर्ष और उसके सफर को दिखाया गया था इस फिल्म में गुलशन ग्रोवर और दिनेश लाल यादव जैसे कलाकार भी शामिल थे।

    इन तीन फिल्मों के जरिए अमिताभ बच्चन ने यह साबित किया कि भाषा और इंडस्ट्री कोई भी हो अगर कलाकार सच्चे मन से काम करे तो दर्शकों का प्यार मिलना तय है हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इन फिल्मों के बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा से दूरी बना ली और फिर कभी इस इंडस्ट्री में काम नहीं किया।

    आज जब भोजपुरी सिनेमा तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है तब अमिताभ बच्चन का यह छोटा लेकिन प्रभावशाली सफर और भी खास बन जाता है यह कहानी सिर्फ फिल्मों की नहीं बल्कि दोस्ती निभाती है और एक कलाकार की बहुमुखी प्रतिभा की मिसाल भी है

  • KBC पर कार्तिक आर्यन ने अमिताभ बच्चन से पूछा निजी सवाल बिग बी बोले पागल हो क्या

    KBC पर कार्तिक आर्यन ने अमिताभ बच्चन से पूछा निजी सवाल बिग बी बोले पागल हो क्या


    नई दिल्ली । कौन बनेगा करोड़पति KBC के हालिया एपिसोड में कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे ने एक ऐसा सवाल पूछा जिसे सुनकर अमिताभ बच्चन भी हंसी नहीं रोक पाए। इस एपिसोड में कार्तिक ने बिग बी से उनकी निजी जिंदगी से जुड़े कुछ मजेदार सवाल पूछ डाले जिसने शो का माहौल बिल्कुल बदल दिया।

    कार्तिक ने पूछे निजी सवाल

    कौन बनेगा करोड़पति के नए एपिसोड में कार्तिक और अनन्या अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए आए थे। इस दौरान कार्तिक ने अमिताभ को कोरियन दिल हार्ट बनाना सिखाया और फिर उनके निजी जीवन से जुड़ा एक सवाल पूछ लिया जो सभी के लिए हंसी का कारण बन गया।
    कार्तिक ने अमिताभ से पूछा क्या आपने कभी जया बच्चन से छुपकर कुछ खाया है इस पर अमिताभ मुस्कुराते हुए थोड़ा चिढ़े। लेकिन कार्तिक ने रुकते हुए और एक सवाल पूछा “सर आपके फोन का पासवर्ड क्या जया बच्चन को पता है इस सवाल पर ऑडियंस और कार्तिक भी हंसी रोक नहीं पाए। अमिताभ अपनी हंसी दबाते हुए जवाब देते हैं “पागल हो क्या हम बता देंगे उनको” उनका जवाब इतना मजेदार था कि सभी हंस पड़े।

    अनन्या का सवाल भी था दिलचस्प

    इसके बाद अनन्या पांडे भी शो में शामिल हो गईं और उन्होंने अमिताभ से पूछा कि आजकल के जनरेशन के कुछ नए शब्दों के बारे में उनकी राय क्या है। अमिताभ जो पुराने जमाने के शब्दों के लिए जाने जाते हैं इन नए शब्दों को सुनकर थोड़ा चौंक गए और दर्शकों को उनके इस रिएक्शन पर भी खूब हंसी आई।

    कार्तिक और अनन्या का हंसी-मज़ाक

    कार्तिक और अनन्या के साथ शो का माहौल एकदम हल्का-फुल्का हो गया था। दर्शकों को हर पल हंसी और मस्ती में डूबते देखा गया। यह एपिसोड न केवल मनोरंजक था बल्कि अमिताभ और उनके मेहमानों के बीच की गर्मजोशी और हंसी ने इसे और भी खास बना दिया कौन बनेगा करोड़पति का यह एपिसोड इस साल के सबसे मजेदार एपिसोड्स में से एक बन गया। कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे के साथ बातचीत ने शो को और भी ज्यादा दिलचस्प और मनोरंजक बना दिया। अमिताभ बच्चन का हल्का-फुल्का अंदाज और उनकी रिएक्शन ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक महान अभिनेता ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन एंटरटेनर भी हैं।