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  • अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना

    अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे प्रतिष्ठित और स्क्रीन पर तहलका मचाने वाली जोड़ियों का जिक्र होता है, तो अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। सत्तर और अस्सी के दशक में इन दोनों दिग्गज कलाकारों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कारी तालमेल दिखाया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और दर्शकों के बीच यह माना जाने लगा था कि जिस फिल्म में ये दोनों साथ हैं, उसका सुपरहिट होना तय है। इस ब्लॉकबस्टर जोड़ी की लोकप्रियता का आलम यह था कि इनकी एक कल्ट क्लासिक फिल्म रिलीज के बाद लगातार पांच सालों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी थी, जो अपने आप में एक अटूट कीर्तिमान है। इन दोनों महानायकों ने मुख्य भूमिकाओं से लेकर खास कैमियो रोल्स तक, कुल ९ फिल्मों में एक साथ स्क्रीन शेयर कर सिल्वर स्क्रीन पर अपनी दोस्ती और अभिनय का लोहा मनवाया।

    इस बेमिसाल जोड़ी के करियर और हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल १९७५ में आई फिल्म ‘शोले’ एक मील का पत्थर साबित हुई। निर्देशक रमेश सिप्पी की इस एक्शन-ड्रामा फिल्म में जय और वीरू के किरदारों में अमिताभ और धर्मेंद्र ने जिगरी दोस्ती की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की, जो आज आधी सदी बीत जाने के बाद भी मुहावरा बनी हुई है। यह फिल्म न केवल उस दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, बल्कि मुंबई के मिनर्वा थिएटर में लगातार पांच सालों तक चलकर इसने इतिहास रच दिया। इसी साल इस सुपरहिट जोड़ी की एक और क्लासिक फिल्म ‘चुपके चुपके’ रिलीज हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी यह बेहतरीन कॉमेडी फिल्म बंगाली सिनेमा की रीमेक थी। फिल्म में दोनों की कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी और एसडी बर्मन के संगीत से सजे इसके गाने आज भी चाव से सुने जाते हैं।

    एक्शन और कॉमेडी के बाद इस जोड़ी ने साल १९८० में आई फिल्म ‘राम बलराम’ के जरिए थ्रिलर जॉनर में अपनी धाक जमाई। विजय आनंद द्वारा निर्देशित इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में दोनों ने ऐसे दो भाइयों का किरदार निभाया था, जिनका पालन-पोषण धोखे से उनके माता-पिता के हत्यारे चाचा ने किया था। इसके अलावा यह जोड़ी ऋषिकेश मुखर्जी की ही एक और कल्ट फिल्म ‘गुड्डी’ में भी एक साथ नजर आई थी। हालांकि इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेत्री जया बच्चन की थी, लेकिन धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री की असलियत दिखाते हुए इसमें बेहद प्रभावी कैमियो रोल किए थे, जिसने फिल्म की कहानी को एक नया आयाम दिया था।

    सिल्वर स्क्रीन पर नए प्रयोग करने के मामले में भी यह जोड़ी पीछे नहीं रही। साल १९७७ में रिलीज हुई फिल्म ‘चरणदास’ एकमात्र ऐसी अनूठी फिल्म है, जिसमें अमिताभ और धर्मेंद्र दोनों ने कव्वाली गायकों के रूप में एक विशेष और बेहद दिलचस्प भूमिका निभाई थी। आशा भोसले और मुकेश की आवाज में सजे इस फिल्म के कव्वाली गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इसके बाद निर्देशक दुलल गुहा की फिल्म ‘दोस्त’ में भी अमिताभ बच्चन ने ‘आनंद’ नाम के किरदार में एक बेहद प्रभावशाली कैमियो किया था, जहां मुख्य भूमिका में धर्मेंद्र मौजूद थे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजी इस फिल्म में दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा था।

    इन दोनों सितारों की जुगलबंदी का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिसमें एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘जादूगर’ शामिल है। इस रहस्यमयी कहानी में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने क्रमशः वीरेंद्र और फ्रैंक जेम्स की भूमिकाएं निभाकर दर्शकों को चौंका दिया था, जिसकी पृष्ठभूमि एक सुनसान हवेली से जुड़ी थी। इसके बाद फिल्म ‘दिल्लगी’ में भी दोनों का जादू देखने को मिला, जहां अमिताभ बच्चन का रोल भले ही छोटा था, लेकिन एक गंभीर और सीधे-सादे प्रोफेसर की भूमिका निभा रहे धर्मेंद्र के साथ उनकी ऑनस्क्रीन मौजूदगी ने फिल्म की रौनक बढ़ा दी थी। इसके अतिरिक्त इस लिस्ट में एक अन्य फिल्म ‘हम कौन हैं’ का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जिसमें इस महान जोड़ी ने अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

  • ‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

    ‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

    नई दिल्ली । भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और रचनात्मकता का प्रतिबिंब भी होती है। यही संदेश वरिष्ठ अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने हालिया ब्लॉग के माध्यम से साझा किया है। उन्होंने आम लोगों की बोलचाल में दिखाई देने वाली भाषाई सृजनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि लोग अक्सर विदेशी शब्दों को अपनी सुविधा, समझ और स्थानीय प्रभाव के अनुरूप नया रूप दे देते हैं, जिससे वे शब्द और भी आत्मीय तथा रोचक बन जाते हैं।

    अमिताभ बच्चन ने अपने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए ब्लॉग की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लॉग लिखने में हुई देरी का कारण आलस्य नहीं, बल्कि कार्य व्यस्तता थी। उन्होंने कहा कि दिनभर के कार्यों के बाद अपने प्रशंसकों से संवाद करना उनके लिए एक विशेष अनुभव होता है और यही उनके दैनिक कार्यों की पूर्णता का एहसास भी कराता है।

    अपने विचारों को समझाने के लिए उन्होंने अपने आवास ‘जलसा’ से जुड़ा एक रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके यहां काम करने वाले एक माली को अंग्रेजी शब्दों का उच्चारण करने में कठिनाई होती थी। विशेष रूप से एक शब्द को वह सही ढंग से नहीं बोल पाता था, इसलिए उसने उसे अपनी सुविधा के अनुसार बदलकर नया रूप दे दिया। अभिनेता के अनुसार, यह नया उच्चारण इतना सहज और आत्मीय लगा कि कई बार वह मूल शब्द की तुलना में अधिक प्रभावशाली प्रतीत हुआ।

    उन्होंने एक अन्य उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ लोग ‘रेडिएटर’ शब्द को अपने तरीके से ‘रेडी वॉटर’ कहने लगे। इसके पीछे उनका अपना तर्क भी था कि जिस उपकरण में पानी भरा जाता है, उसके लिए ऐसा नाम अधिक उपयुक्त लगता है। अमिताभ बच्चन ने कहा कि यद्यपि यह तकनीकी रूप से सही शब्द नहीं है, लेकिन यह लोगों की सोचने और भाषा को अपने अनुरूप ढालने की क्षमता को दर्शाता है।

    अभिनेता का मानना है कि भाषा का वास्तविक सौंदर्य उसकी लचीलापन और स्वीकार्यता में निहित होता है। समाज के विभिन्न वर्ग, क्षेत्र और भाषाई पृष्ठभूमि वाले लोग जब किसी शब्द को अपनाते हैं, तो उसमें अपनी संस्कृति और अनुभवों का रंग भी जोड़ देते हैं। यही प्रक्रिया भाषा को स्थिर नहीं रहने देती, बल्कि उसे समय के साथ विकसित और समृद्ध बनाती है।

    उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए किसी विदेशी भाषा या उसके जटिल शब्दों का शुद्ध उच्चारण करना आसान नहीं होता। ऐसे में लोग अपनी समझ और सुविधा के अनुसार नए शब्द गढ़ लेते हैं। यह केवल उच्चारण की त्रुटि नहीं, बल्कि भाषा के प्रति मानवीय अनुकूलन क्षमता का उदाहरण है। इसी वजह से ऐसे शब्द लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों और दैनिक जीवन का हिस्सा बने रहते हैं।

    अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि भाषा की यही सहजता उसे आम लोगों से जोड़ती है। जब कोई शब्द स्थानीय संदर्भों और बोलचाल में ढल जाता है तो वह केवल शब्द नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक अनुभव का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से मिलने वाला उनका स्नेह और समर्थन उनके जीवन को निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है।

    भाषा और समाज के संबंध पर व्यक्त किए गए उनके विचार यह संकेत देते हैं कि रचनात्मकता केवल साहित्य या कला तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य बातचीत और दैनिक जीवन में भी उतनी ही प्रभावशाली रूप से दिखाई देती है। यही विशेषता भाषा को जीवंत, प्रासंगिक और समय के साथ विकसित होने योग्य बनाती है।

  • क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई

    क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में कलाकारों के आपसी संबंध और सेट पर हुए विवाद कई बार बड़े फैसलों की वजह बन जाते हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्सा हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना और मशहूर अभिनेत्री जया बच्चन (तब जया भादुड़ी) से जुड़ा है। साल 1972 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की क्लासिक फिल्म ‘बावर्ची’ में एक साथ काम करने के बाद इस जोड़ी ने हमेशा के लिए एक-दूसरे के साथ काम करने से तौबा कर ली थी। इसके पीछे की मुख्य वजह कोई व्यावसायिक मतभेद नहीं, बल्कि महानायक अमिताभ बच्चन से जुड़ा एक वाक्या था।

    उस दौर में राजेश खन्ना भारतीय फिल्म उद्योग के शीर्ष शिखर पर थे और उनकी लगातार हिट फिल्मों के कारण उनका एकछत्र राज था। दूसरी ओर, अमिताभ बच्चन उस समय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे। ‘आनंद’ जैसी सफल फिल्म में साथ काम करने के बावजूद राजेश खन्ना तत्कालीन परिस्थितियों में अमिताभ बच्चन को केवल एक संघर्षरत अभिनेता के रूप में ही देखते थे और उनके प्रति उनका रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहता था।

    ‘बावर्ची’ की शूटिंग के दिनों में जया बच्चन और अमिताभ बच्चन एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। अमिताभ बच्चन अक्सर जया बच्चन से मिलने के लिए फिल्म के सेट पर आया करते थे। दोनों को इस तरह साथ देखना उस समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना को रास नहीं आता था। वह अक्सर सेट पर जया बच्चन को टोकते थे और उनसे पूछते थे कि वह इस संघर्षरत अभिनेता के साथ अपना समय क्यों बर्बाद कर रही हैं।

    राजेश खन्ना के जीवन पर आधारित संस्मरणों और वरिष्ठ पत्रकार अली पीटर जॉन के हवाले से सामने आए विवरणों के अनुसार, राजेश खन्ना अक्सर जया से कहते थे कि उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ घूमना-फिरना बंद कर देना चाहिए। उनके शब्द इतने कड़े थे कि उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इस आदमी के साथ रहने से उनका करियर भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। राजेश खन्ना का यह रवैया जया बच्चन को लगातार परेशान कर रहा था।

    विवाद तब और बढ़ गया जब एक दिन अमिताभ बच्चन हमेशा की तरह जया बच्चन से मिलने सेट पर पहुंचे। उस दौरान राजेश खन्ना ने वहां मौजूद अमिताभ बच्चन को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और उनके प्रति बेहद उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया। अपने होने वाले जीवनसाथी का ऐसा अपमान देखकर जया बच्चन का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने उसी वक्त बेहद आक्रामक अंदाज में राजेश खन्ना को जवाब देते हुए कहा था कि एक दिन वक्त बदलेगा और तब देखा जाएगा कि कौन किस मुकाम पर खड़ा है।

    इस घटना से आहत और नाराज जया बच्चन ने तत्काल यह कड़ा फैसला लिया कि वह अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगी। उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद साफ कर दिया था कि वह भविष्य में कभी भी राजेश खन्ना के साथ स्क्रीन साझा नहीं करेंगी। उन्होंने कड़े शब्दों में टिप्पणी की थी कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ काम करना पसंद नहीं करेंगी जो खुद को बहुत ऊपर समझता हो।

    प्रशासनिक और व्यावसायिक दृष्टि से ‘बावर्ची’ साल 1972 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने राजेश खन्ना को उनकी पारंपरिक रोमांटिक और गंभीर छवि से निकालकर एक बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग वाले अभिनेता के रूप में स्थापित किया था। आज भी इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 8.1 है, लेकिन इस बड़ी सफलता के बावजूद जया बच्चन ने अपने फैसले को कायम रखा और कूटनीतिक रूप से इस सुपरस्टार के साथ दोबारा कभी कोई फिल्म साइन नहीं की।

  • जब दोस्ती निभाने के लिए अमिताभ बच्चन उतर गए भोजपुरी सिनेमा में तीन फिल्मों से जीता दिल

    जब दोस्ती निभाने के लिए अमिताभ बच्चन उतर गए भोजपुरी सिनेमा में तीन फिल्मों से जीता दिल


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने लंबे करियर में हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कई अलग-अलग प्रयोग किए हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई थी खास बात यह है कि यह फैसला उन्होंने किसी बड़े प्रोड्यूसर या स्क्रिप्ट के कारण नहीं बल्कि अपने करीबी रिश्ते और दोस्ती के चलते लिया था

    दरअसल भोजपुरी फिल्मों में काम करने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत थे दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और जब दीपक सावंत ने भोजपुरी फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा तो अमिताभ बच्चन ने बिना ज्यादा सोचे इसे स्वीकार कर लिया यह एक ऐसा उदाहरण है जहां प्रोफेशनल दुनिया में भी रिश्तों की अहमियत साफ नजर आती है

    अमिताभ बच्चन ने कुल तीन भोजपुरी फिल्मों में काम किया जिनमें गंगा गंगोत्री और गंगा देवी शामिल हैं इन फिल्मों में उन्होंने अपनी एक्टिंग क्षमता का वही लेवल शो जिसके लिए वह जाने जाते हैं दर्शकों ने भी उन्हें भोजपुरी अंदाज में काफी पसंद किया

    फिल्म गंगा में उनके साथ मनोज तिवारी और रवि किशन जैसे लोकप्रिय सितारे नजर आए इस फिल्म ने दर्शकों के बीच अच्छी पहचान बनाई और भोजपुरी सिनेमा में बिग बी की एंट्री को खास बना दिया

    इसके बाद आई फिल्म गंगोत्री जिसमें हेमा मालिनी और भूमिका चावला भी अहम किरदार में थीं, यह फिल्म भी दर्शकों को पसंद आई और इसने अमिताभ बच्चन की बहुमुखी प्रतिभा को फिर साबित किया।

    तीसरी फिल्म गंगा देवी और भी खास रही क्योंकि इसमें उनके साथ उनकी पत्नी जया बच्चन भी नजर आईं फिल्म की कहानी सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित थी जिसमें एक महिला के संघर्ष और उसके सफर को दिखाया गया था इस फिल्म में गुलशन ग्रोवर और दिनेश लाल यादव जैसे कलाकार भी शामिल थे।

    इन तीन फिल्मों के जरिए अमिताभ बच्चन ने यह साबित किया कि भाषा और इंडस्ट्री कोई भी हो अगर कलाकार सच्चे मन से काम करे तो दर्शकों का प्यार मिलना तय है हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इन फिल्मों के बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा से दूरी बना ली और फिर कभी इस इंडस्ट्री में काम नहीं किया।

    आज जब भोजपुरी सिनेमा तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है तब अमिताभ बच्चन का यह छोटा लेकिन प्रभावशाली सफर और भी खास बन जाता है यह कहानी सिर्फ फिल्मों की नहीं बल्कि दोस्ती निभाती है और एक कलाकार की बहुमुखी प्रतिभा की मिसाल भी हैभारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने लंबे करियर में हिंदी फिल्मों के साथ-साथ कई अलग-अलग प्रयोग किए हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई थी खास बात यह है कि यह फैसला उन्होंने किसी बड़े प्रोड्यूसर या स्क्रिप्ट के कारण नहीं बल्कि अपने करीबी रिश्ते और दोस्ती के चलते लिया था

    दरअसल भोजपुरी फिल्मों में काम करने के पीछे सबसे बड़ा कारण उनके मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत थे दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी और जब दीपक सावंत ने भोजपुरी फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव रखा तो अमिताभ बच्चन ने बिना ज्यादा सोचे इसे स्वीकार कर लिया यह एक ऐसा उदाहरण है जहां प्रोफेशनल दुनिया में भी रिश्तों की अहमियत साफ नजर आती है

    अमिताभ बच्चन ने कुल तीन भोजपुरी फिल्मों में काम किया जिनमें गंगा गंगोत्री और गंगा देवी शामिल हैं इन फिल्मों में उन्होंने अपनी एक्टिंग क्षमता का वही लेवल शो जिसके लिए वह जाने जाते हैं दर्शकों ने भी उन्हें भोजपुरी अंदाज में काफी पसंद किया

    फिल्म गंगा में उनके साथ मनोज तिवारी और रवि किशन जैसे लोकप्रिय सितारे नजर आए इस फिल्म ने दर्शकों के बीच अच्छी पहचान बनाई और भोजपुरी सिनेमा में बिग बी की एंट्री को खास बना दिया

    इसके बाद आई फिल्म गंगोत्री जिसमें हेमा मालिनी और भूमिका चावला भी अहम किरदार में थीं, यह फिल्म भी दर्शकों को पसंद आई और इसने अमिताभ बच्चन की बहुमुखी प्रतिभा को फिर साबित किया।

    तीसरी फिल्म गंगा देवी और भी खास रही क्योंकि इसमें उनके साथ उनकी पत्नी जया बच्चन भी नजर आईं फिल्म की कहानी सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित थी जिसमें एक महिला के संघर्ष और उसके सफर को दिखाया गया था इस फिल्म में गुलशन ग्रोवर और दिनेश लाल यादव जैसे कलाकार भी शामिल थे।

    इन तीन फिल्मों के जरिए अमिताभ बच्चन ने यह साबित किया कि भाषा और इंडस्ट्री कोई भी हो अगर कलाकार सच्चे मन से काम करे तो दर्शकों का प्यार मिलना तय है हालांकि दिलचस्प बात यह है कि इन फिल्मों के बाद उन्होंने भोजपुरी सिनेमा से दूरी बना ली और फिर कभी इस इंडस्ट्री में काम नहीं किया।

    आज जब भोजपुरी सिनेमा तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है तब अमिताभ बच्चन का यह छोटा लेकिन प्रभावशाली सफर और भी खास बन जाता है यह कहानी सिर्फ फिल्मों की नहीं बल्कि दोस्ती निभाती है और एक कलाकार की बहुमुखी प्रतिभा की मिसाल भी है

  • KBC पर कार्तिक आर्यन ने अमिताभ बच्चन से पूछा निजी सवाल बिग बी बोले पागल हो क्या

    KBC पर कार्तिक आर्यन ने अमिताभ बच्चन से पूछा निजी सवाल बिग बी बोले पागल हो क्या


    नई दिल्ली । कौन बनेगा करोड़पति KBC के हालिया एपिसोड में कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे ने एक ऐसा सवाल पूछा जिसे सुनकर अमिताभ बच्चन भी हंसी नहीं रोक पाए। इस एपिसोड में कार्तिक ने बिग बी से उनकी निजी जिंदगी से जुड़े कुछ मजेदार सवाल पूछ डाले जिसने शो का माहौल बिल्कुल बदल दिया।

    कार्तिक ने पूछे निजी सवाल

    कौन बनेगा करोड़पति के नए एपिसोड में कार्तिक और अनन्या अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए आए थे। इस दौरान कार्तिक ने अमिताभ को कोरियन दिल हार्ट बनाना सिखाया और फिर उनके निजी जीवन से जुड़ा एक सवाल पूछ लिया जो सभी के लिए हंसी का कारण बन गया।
    कार्तिक ने अमिताभ से पूछा क्या आपने कभी जया बच्चन से छुपकर कुछ खाया है इस पर अमिताभ मुस्कुराते हुए थोड़ा चिढ़े। लेकिन कार्तिक ने रुकते हुए और एक सवाल पूछा “सर आपके फोन का पासवर्ड क्या जया बच्चन को पता है इस सवाल पर ऑडियंस और कार्तिक भी हंसी रोक नहीं पाए। अमिताभ अपनी हंसी दबाते हुए जवाब देते हैं “पागल हो क्या हम बता देंगे उनको” उनका जवाब इतना मजेदार था कि सभी हंस पड़े।

    अनन्या का सवाल भी था दिलचस्प

    इसके बाद अनन्या पांडे भी शो में शामिल हो गईं और उन्होंने अमिताभ से पूछा कि आजकल के जनरेशन के कुछ नए शब्दों के बारे में उनकी राय क्या है। अमिताभ जो पुराने जमाने के शब्दों के लिए जाने जाते हैं इन नए शब्दों को सुनकर थोड़ा चौंक गए और दर्शकों को उनके इस रिएक्शन पर भी खूब हंसी आई।

    कार्तिक और अनन्या का हंसी-मज़ाक

    कार्तिक और अनन्या के साथ शो का माहौल एकदम हल्का-फुल्का हो गया था। दर्शकों को हर पल हंसी और मस्ती में डूबते देखा गया। यह एपिसोड न केवल मनोरंजक था बल्कि अमिताभ और उनके मेहमानों के बीच की गर्मजोशी और हंसी ने इसे और भी खास बना दिया कौन बनेगा करोड़पति का यह एपिसोड इस साल के सबसे मजेदार एपिसोड्स में से एक बन गया। कार्तिक आर्यन और अनन्या पांडे के साथ बातचीत ने शो को और भी ज्यादा दिलचस्प और मनोरंजक बना दिया। अमिताभ बच्चन का हल्का-फुल्का अंदाज और उनकी रिएक्शन ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक महान अभिनेता ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन एंटरटेनर भी हैं।