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  • अमित शाह का ऐलान, 2027 में तीसरी बार भाजपा सरकार बनते ही यूपी में लागू होगी UCC..

    अमित शाह का ऐलान, 2027 में तीसरी बार भाजपा सरकार बनते ही यूपी में लागू होगी UCC..

    नई दिल्ली ।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियों का एजेंडा स्पष्ट कर दिया है। लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि राज्य में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव को लक्ष्य बनाकर संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रिय रहने का आह्वान किया। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद रहे।

    डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस बैठक में अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार मजबूत स्थिति में है और उसे कोई ताकत सत्ता से हटा नहीं सकती। उन्होंने पार्टी की स्थिति को अंगद के पैर से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अर्जुन की तरह लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और 2027 के चुनाव की तैयारियों में जुटने को कहा।

    शाह ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता को लेकर पार्टी की आगामी योजना भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि 2027 में जनता के समर्थन से भाजपा की तीसरी बार सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में UCC लागू की जाएगी। इस घोषणा के साथ उन्होंने इसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के प्रमुख मुद्दों में शामिल कर दिया। हालांकि, बैठक में इसके लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया, समयसीमा और प्रस्तावित प्रावधानों का विवरण सामने नहीं आया।

    अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में हुई गोलीबारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दिन निहत्थे रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं। शाह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले दल अब किस आधार पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं।

    उन्होंने राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी, जबकि दूसरी ओर भाजपा ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम को देश की जनता याद रखेगी। इस मुद्दे के जरिए उन्होंने विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक अंतर को सामने रखने की कोशिश की।

    बैठक में वोट चोरी के आरोपों को लेकर भी अमित शाह ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष के आरोपों की तुलना मैच हारने के बाद अंपायर पर सवाल उठाने से की। शाह ने कहा कि यदि विपक्ष को मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल है, तो वह संसद में चर्चा करे।

    गृहमंत्री ने इस मुद्दे पर सरकार की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा कराने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के सवालों का बिंदुवार जवाब देने के लिए तैयार है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

    अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य में कठोर और पारदर्शी शासन के कारण माफिया गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई हुई है और उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त हुआ है। उन्होंने योगी सरकार के कामकाज को भाजपा की राजनीतिक उपलब्धियों से जोड़ते हुए उसकी सराहना की।

    गृहमंत्री ने वर्ष 2014 से पहले उत्तर प्रदेश में भाजपा की कमजोर संगठनात्मक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने संगठन को मजबूत किया और जनता का विश्वास हासिल किया। इसी आधार पर भाजपा ने राज्य में बड़ी चुनावी सफलता प्राप्त की। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पूर्ण बहुमत हासिल करेगी। बैठक के जरिए उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनावी लक्ष्य स्पष्ट करते हुए संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने का संदेश दिया।

  • अमित शाह के 62वें जन्मदिन पर अक्षय कुमार ने दी बधाई, बोले- आपने हमेशा देश को सबसे पहले रखा

    अमित शाह के 62वें जन्मदिन पर अक्षय कुमार ने दी बधाई, बोले- आपने हमेशा देश को सबसे पहले रखा

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। गुरुवार, 22 अक्टूबर को अमित शाह के 62 वर्ष पूरे होने के अवसर पर अभिनेता ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा कर उनकी सराहना की। अक्षय कुमार ने अपने संदेश में कहा कि अमित शाह ने हमेशा देश को सबसे पहले रखा है। इसके साथ ही उन्होंने महादेव से गृह मंत्री पर अपना आशीर्वाद बनाए रखने और उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की।

    अक्षय कुमार ने अपने संदेश में लिखा, “जन्मदिन की अनेक शुभकामनाएं अमित शाह जी। आपने हमेशा देश को सबसे आगे रखा है। महादेव का आशीर्वाद आप पर बना रहे… आपका स्वास्थ्य हमेशा अच्छा रहे और संकल्प हमेशा सच्चा रहे। जय महाकाल।” अभिनेता की इस पोस्ट में उन्होंने अमित शाह के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके स्वस्थ जीवन और संकल्पों की सफलता की कामना की।

    अमित शाह के जन्मदिन पर सोशल मीडिया पर उन्हें शुभकामनाएं देने का सिलसिला जारी रहा। अक्षय कुमार का संदेश भी इसी क्रम में सामने आया। अभिनेता ने अपने संदेश में देश को प्राथमिकता देने के लिए गृह मंत्री की प्रशंसा की और धार्मिक आस्था से जुड़े शब्दों के जरिए उनके लिए मंगलकामना व्यक्त की।

    अक्षय कुमार हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 1991 में फिल्म ‘सौगंध’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, वर्ष 1992 में रिलीज हुई फिल्म ‘खिलाड़ी’ से उन्हें खास पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने एक्शन फिल्मों में अपनी अलग जगह बनाई और ‘खिलाड़ी कुमार’ के नाम से लोकप्रिय हुए।

    अपने लंबे फिल्मी सफर में अक्षय कुमार ने केवल एक्शन ही नहीं, बल्कि कॉमेडी, रोमांस, सामाजिक विषयों और देशभक्ति से जुड़ी फिल्मों में भी काम किया है। ‘हेरा फेरी’, ‘गरम मसाला’, ‘भूल भुलैया’, ‘नमस्ते लंदन’, ‘सिंह इज किंग’ और ‘हाउसफुल’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। इन फिल्मों ने उन्हें अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेता के रूप में पहचान दिलाई।

    अक्षय कुमार ने गंभीर विषयों पर बनी फिल्मों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। ‘बेबी’, ‘एयरलिफ्ट’, ‘रुस्तम’, ‘केसरी’ और ‘मिशन मंगल’ उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं। वहीं, ‘पैडमैन’ और ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने सामाजिक मुद्दों को मनोरंजन के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

    अभिनय के क्षेत्र में योगदान के लिए अक्षय कुमार को वर्ष 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, फिल्म ‘रुस्तम’ में उनके अभिनय के लिए वर्ष 2017 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। विभिन्न शैलियों की फिल्मों में काम करने के कारण उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है।

    अमित शाह को जन्मदिन पर दी गई अक्षय कुमार की शुभकामनाएं उनके सार्वजनिक संदेश के रूप में सामने आईं। अभिनेता ने अपने पोस्ट में गृह मंत्री के प्रति सम्मान जताने के साथ उनके अच्छे स्वास्थ्य और दृढ़ संकल्प की कामना की। उनका संदेश जन्मदिन के अवसर पर अमित शाह को बधाई देने वाली सोशल मीडिया पोस्टों में शामिल रहा।

  • अमित शाह की कुल संपत्ति कितनी है, शेयरों में कितना निवेश और कितनी जमीन-जायदाद, जानिए हलफनामे के आंकड़े

    अमित शाह की कुल संपत्ति कितनी है, शेयरों में कितना निवेश और कितनी जमीन-जायदाद, जानिए हलफनामे के आंकड़े

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर 2026 को अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमित शाह के वेतन, सरकारी सुविधाओं, निवेश और जमीन-जायदाद को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में गांधीनगर सीट से नामांकन दाखिल करते समय उन्होंने अपनी संपत्ति और देनदारियों का विवरण चुनावी हलफनामे में दिया था। इसके अनुसार, अमित शाह और उनकी पत्नी सोनल शाह की संयुक्त घोषित संपत्ति लगभग 65.67 करोड़ रुपये थी। इसमें अमित शाह की व्यक्तिगत संपत्ति करीब 36.55 करोड़ रुपये बताई गई थी।

    अमित शाह की आय में सांसद के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उनके चुनावी हलफनामे में किराये से होने वाली आय, कृषि से प्राप्त आमदनी और शेयरों से मिलने वाले लाभांश का भी उल्लेख है। उनकी कुल संपत्ति को समझने के लिए वेतन के साथ-साथ निवेश और अचल संपत्तियों के विवरण पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    उपलब्ध विवरण के अनुसार, अमित शाह का मूल मासिक वेतन 1 लाख 24 हजार रुपये बताया गया है। निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 87 हजार रुपये और अन्य भत्ता 2 हजार रुपये प्रति माह दर्ज किया गया है। दैनिक भत्ते के रूप में 75 हजार रुपये का आंकड़ा भी दिया गया है, लेकिन इसे नियमित मासिक वेतन के साथ जोड़कर निश्चित मासिक आय मानना सही नहीं होगा। दैनिक भत्ता निर्धारित नियमों और पात्रता के अनुसार मिलता है।

    गृह मंत्री के पद पर रहते हुए उन्हें सरकारी कामकाज के लिए आवास, आधिकारिक वाहन, सुरक्षा व्यवस्था और पात्रता के अनुसार चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। ये सुविधाएं पद से जुड़ी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिए होती हैं। इन्हें उनकी निजी संपत्ति या व्यक्तिगत वेतन का हिस्सा नहीं माना जाता।

    वर्ष 2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, अमित शाह की चल संपत्ति लगभग 20.23 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति करीब 16.32 करोड़ रुपये थी। इस तरह उनकी कुल व्यक्तिगत घोषित संपत्ति लगभग 36.55 करोड़ रुपये बैठती है। चल संपत्ति में बैंक जमा, शेयर, निवेश, नकदी और आभूषण जैसी चीजें शामिल हैं, जबकि अचल संपत्ति में जमीन, भूखंड और मकान जैसी संपत्तियां आती हैं।

    हलफनामे में अमित शाह के पास लगभग 17.46 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर होने का उल्लेख था। इसके अलावा, करीब 72.87 लाख रुपये के कीमती धातुओं और आभूषणों का विवरण दर्ज किया गया था। उनके पास नकद राशि लगभग 24,164 रुपये बताई गई थी। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि उनकी घोषित चल संपत्ति में शेयर निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा था।

    उनकी पत्नी सोनल शाह की संपत्ति को जोड़ने पर दंपति की संयुक्त संपत्ति लगभग 65.67 करोड़ रुपये थी। सोनल शाह की चल संपत्ति करीब 22.46 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति लगभग 6.55 करोड़ रुपये बताई गई थी। दोनों की कुल घोषित देनदारियां लगभग 42.10 लाख रुपये थीं। ये आंकड़े 2024 में दाखिल हलफनामे पर आधारित हैं, इन्हें वर्तमान बाजार मूल्य नहीं माना जाना चाहिए।

    अमित शाह की घोषित संपत्ति में पिछले वर्षों के दौरान बदलाव भी दर्ज हुआ है। वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव के हलफनामे में उनकी संपत्ति लगभग 11.78 करोड़ रुपये बताई गई थी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह और उनकी पत्नी की संयुक्त संपत्ति करीब 40.33 करोड़ रुपये दर्ज हुई। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 65.67 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग वर्षों में व्यक्तिगत और संयुक्त संपत्ति के विवरण का आधार अलग हो सकता है।

    संपत्ति में वृद्धि का अर्थ केवल वेतन से हुई कमाई नहीं है। शेयरों के मूल्य में बदलाव, कृषि और किराये से होने वाली आय, विरासत तथा अन्य निवेश भी कुल संपत्ति को प्रभावित कर सकते हैं।

    अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता अनिलचंद्र शाह प्लास्टिक पाइप के कारोबार से जुड़े थे। राजनीति में सक्रिय होने से पहले अमित शाह पारिवारिक व्यवसाय से जुड़े रहे और शेयर बाजार में भी काम किया। बाद में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े तथा भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय राजनीति के जरिए आगे बढ़े। गुजरात विधानसभा में उनका चुनावी सफर 1997 में शुरू हुआ। उस समय संपत्ति संबंधी हलफनामों का आज जैसा व्यवस्थित सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, इसलिए राजनीति में प्रवेश के समय उनकी कुल संपत्ति का सटीक आंकड़ा बताना संभव नहीं है।

  • पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों के परिवारों से मिले अमित शाह, न्याय का भरोसा और 2029 तक नशा खत्म करने का लक्ष्य

    नई दिल्ली । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पंजाब के एक दिवसीय दौरे के दौरान नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में मृतकों के परिवारों की बातें सुनीं और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावित परिवारों की मांगें प्रमुख मुद्दे रहे। शाह ने दिसंबर 2029 तक नशे के कारोबार को खत्म करने का लक्ष्य भी दोहराया।

    दशहरे के अवसर पर शाह सबसे पहले बटाला पहुंचे और वहां से गुरदासपुर जिले के मारी पनवां गांव गए। यहां उन्होंने 15 अक्टूबर को मारे गए बिक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की। ग्रामीणों का आरोप है कि बिक्रमजीत ने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी का विरोध किया था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। हालांकि, पुलिस के अनुसार, उनकी हत्या मोबाइल फोन को लेकर दो गुटों के बीच हुए विवाद का परिणाम थी। दोनों पक्षों के बीच बताए गए घटनाक्रम को लेकर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    बिक्रमजीत के परिजनों ने गृह मंत्री के सामने मामले में न्याय की मांग रखी। परिवार के एक सदस्य के मुताबिक, शाह ने उनका ज्ञापन पढ़ा और उनकी बातें ध्यानपूर्वक सुनीं। बिक्रमजीत के चाचा गुरनाम सिंह ने भी कहा कि गृह मंत्री ने परिवार को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। इस मुलाकात के दौरान पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों भी मौजूद रहे। शाह के दौरे को देखते हुए गुरदासपुर, संगरूर और मानसा में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

    इसके बाद गृह मंत्री संगरूर पहुंचे, जहां उन्होंने तुरबंजारा गांव के गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात की। दलित समुदाय से संबंध रखने वाले गुलजार की सात सितंबर को मृत्यु हो गई थी। परिवार का आरोप है कि उन्होंने अपने क्षेत्र में नशीले पदार्थों की आपूर्ति को लेकर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल किया था। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और जातिसूचक टिप्पणियां की गईं। परिजनों के अनुसार, इन परिस्थितियों से परेशान होकर गुलजार ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच और तथ्यों की पुष्टि इस मामले में महत्वपूर्ण है।

    संगरूर के बाद शाह मानसा पहुंचे, जहां उन्होंने नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिजनों से मुलाकात की। झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा के एक व्यस्त बाजार में स्थित मेडिकल स्टोर के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे। आरोप है कि मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने एक बुजुर्ग को नशीली दवाएं बेचने पर सवाल उठाए जाने के बाद झोटा को गोली मारी। पुलिस ने आरोपी को राजस्थान के सालासर से हिरासत में लिया था।

    झोटा के पिता भीम सिंह ने पहले ही बेटे की हत्या की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग उठाने की बात कही थी। शाह के पंजाब पहुंचने से कुछ घंटे पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। इससे मामले की जांच को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है।

    पंजाब में नशे की समस्या और उससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। अमित शाह का यह 20 दिनों के भीतर दूसरा पंजाब दौरा है। इससे पहले 30 सितंबर को उन्होंने जालंधर में भाजपा की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के समापन पर रैली को संबोधित किया था। अब मृतकों के परिवारों से मुलाकात और नशे के कारोबार को खत्म करने के लक्ष्य ने इस मुद्दे को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की रिपोर्टिंग में पत्रकारों की हिरासत पर CPI सांसद पी. संदोष कुमार ने अमित शाह को लिखा पत्र

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की रिपोर्टिंग में पत्रकारों की हिरासत पर CPI सांसद पी. संदोष कुमार ने अमित शाह को लिखा पत्र

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लेने, नजरबंद करने और उनके काम में बाधा डालने का मामला सामने आया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने मांग की है कि पत्रकारों को परेशान करने और मनमाने तरीके से हिरासत में लेने की घटनाओं पर रोक लगाई जाए। साथ ही, उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से जुड़े मामलों की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने का आग्रह किया है।

    सांसद ने अपने पत्र में कहा कि राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से मिल रही जानकारी के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों को कवर करने पहुंचे पत्रकारों को उनके पेशेवर दायित्व निभाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कई समाचार संस्थानों के पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रिपोर्टिंग के दौरान हिरासत और प्रतिबंधों का सामना करना प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय है।

    पत्र में दावा किया गया है कि एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र के संवाददाता को पिछली शाम नजरबंद कर दिया गया, जबकि एक अन्य राष्ट्रीय दैनिक के संवाददाताओं को रिपोर्टिंग करने से रोका गया। इसके अलावा, एक समाचार एजेंसी के संवाददाता को हिरासत में लिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। सांसद के अनुसार, मलयालम भाषा के विभिन्न समाचार माध्यमों के पत्रकारों और कैमरा कर्मियों को भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इन पत्रकारों ने पुलिस के सामने अपनी शिकायतें रखीं, लेकिन इसके बावजूद उनकी रिपोर्टिंग में बाधाएं बनी रहीं।

    पत्र में हिंदी पत्रकार अजीत अंजुम और श्याम मीरा सिंह का भी जिक्र किया गया है। सांसद के मुताबिक, श्याम मीरा सिंह को पिछली शाम हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा, एक डिजिटल समाचार मंच की महिला संवाददाता को कथित तौर पर घसीटकर हिरासत में लेने की घटना पर भी आपत्ति जताई गई है। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए कुछ पत्रकारों के वीडियो में उन्हें पुलिस की बस के भीतर अपने पहचान पत्र दिखाते हुए देखा जा सकता है। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं पत्रकारों के कामकाज और जनता तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।

    पी. संदोष कुमार ने पत्र में पत्रकारों से प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की मान्यता दिखाने की मांग पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के लिए PIB मान्यता को अनिवार्य शर्त बनाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मान्यता संबंधी दिशानिर्देश बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप नहीं हैं। पत्र में डिजिटल समाचार मंचों और स्वतंत्र पत्रकारों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कई विश्वसनीय डिजिटल संस्थान पत्रकारिता कर रहे हैं, जबकि उनके पत्रकारों के पास जरूरी नहीं कि PIB मान्यता हो।

    सांसद ने यह भी कहा कि स्वतंत्र पत्रकार, डिजिटल मीडिया मंच और यूट्यूब, फेसबुक तथा इंस्टाग्राम के माध्यम से समाचार प्रस्तुत करने वाले लोग भी पत्रकारिता के काम में लगे हैं। इसके अलावा, नागरिक मोबाइल फोन से घटनाओं को रिकॉर्ड करके साझा करते हैं। उनके अनुसार, केवल PIB मान्यता के आधार पर किसी पत्रकार को सार्वजनिक स्थान पर रिपोर्टिंग से रोकना प्रेस की स्वतंत्रता और सूचना पाने के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।

    पत्र में सांसद ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया हस्तक्षेप और संयुक्त राष्ट्र में व्यक्त चिंताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने गृह मंत्री से दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की कि पत्रकारों को उनके कानूनी दायरे में काम करने से न रोका जाए और केवल मान्यता नहीं होने के आधार पर उनके साथ भेदभाव न किया जाए। उन्होंने कथित अवैध हिरासत, डराने-धमकाने और मारपीट की घटनाओं की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया। सांसद ने कहा कि सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि पत्रकार स्वतंत्र रूप से अपना काम कर सकें और जनता तक जानकारी पहुंचाने में बाधा न आए।

  • UPITS 2026 का ग्रेटर नोएडा में आगाज, अमित शाह ने किया उद्घाटन; 85 देशों के खरीदार और 2400 से ज्यादा प्रदर्शक शामिल

    UPITS 2026 का ग्रेटर नोएडा में आगाज, अमित शाह ने किया उद्घाटन; 85 देशों के खरीदार और 2400 से ज्यादा प्रदर्शक शामिल


    नई दिल्ली ।
    ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS 2026) के चौथे संस्करण का शुभारंभ हो गया है। 25 से 29 सितंबर तक चलने वाले इस पांच दिवसीय आयोजन का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। ट्रेड शो का उद्देश्य प्रदेश के स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, उद्योगों और उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है।

    इस वर्ष के आयोजन में उत्तर प्रदेश की पारंपरिक पहचान के साथ आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास को भी प्रमुखता दी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश अपनी सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीक के मेल से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने प्रदेश को विनिर्माण और औद्योगिक गतिविधियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला राज्य बताया।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल से ग्लोबल के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। प्रदेश के कारीगरों, बुनकरों और पारंपरिक शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    UPITS 2026 में इस बार 2,400 से अधिक प्रदर्शक अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके अलावा 85 से अधिक देशों के 550 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदार और कारोबारी प्रतिनिधि आयोजन में भाग ले रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के माध्यम से प्रदेश के उत्पादकों और विदेशी कारोबारियों के बीच व्यापारिक संपर्क बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

    इस बार ऑस्ट्रिया, जापान, रूस, सिंगापुर, बेलारूस और वियतनाम को आधिकारिक साझेदार देशों के रूप में शामिल किया गया है। इन देशों की भागीदारी से व्यापारिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी संबंधों को बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    ट्रेड शो की प्रमुख विशेषताओं में एक जिला, एक उत्पाद यानी ODOP के साथ एक जिला, एक व्यंजन यानी ODOC पहल को शामिल करना है। पहली बार ODOC के तहत उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय खान-पान को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जा रहा है।

    इसके लिए आयोजन स्थल पर विशेष फूड हॉल तैयार किया गया है, जहां देश-विदेश से आने वाले मेहमान प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक स्वाद और खान-पान से परिचित हो सकेंगे। इसके जरिए स्थानीय खाद्य उत्पादों और क्षेत्रीय व्यंजनों को भी व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।

    आयोजन में कृषि, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, पर्यटन, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और कपड़ा उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। स्थानीय कारोबारियों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए व्यापारिक गतिविधियों और कारोबारी बैठकों की व्यवस्था भी की गई है।

    ट्रेड शो में विदेशी मेहमानों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, केंद्रीय मंत्रियों और आम नागरिकों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। आयोजन स्थल को विभिन्न सुरक्षा जोन में बांटा गया है। यहां 550 से अधिक सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही यातायात और पार्किंग को व्यवस्थित रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं।

    पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों, स्थानीय व्यंजनों और आधुनिक औद्योगिक क्षमताओं को एक साथ प्रदर्शित किया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रदेश के उद्यमियों और उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

  • मेघालय में अचानक बदला सियासी गणित, UDP के 8 विधायक बीजेपी में शामिल, विधानसभा में अब इतनी हुई ताकत

    मेघालय में अचानक बदला सियासी गणित, UDP के 8 विधायक बीजेपी में शामिल, विधानसभा में अब इतनी हुई ताकत

    नई दिल्ली ।मेघालय की राजनीति में बुधवार को बड़ा बदलाव हुआ है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी यानी UDP के 12 में से आठ विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इन विधायकों ने औपचारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इस घटनाक्रम के बाद 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में बीजेपी की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है।

    बीजेपी में शामिल होने वाले आठ विधायकों का नेतृत्व खलीह्रियात से विधायक किर्मेन श्याला कर रहे थे। इन विधायकों के पार्टी बदलने की चर्चा पिछले कुछ दिनों से चल रही थी। इससे पहले UDP के पूर्व विधायक डॉ. जेमिनो मावथोह भी 12 सितंबर को बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

    आठ विधायकों के बीजेपी में जाने के बाद विधानसभा के मौजूदा राजनीतिक समीकरण में बदलाव आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, UDP के पास अब चार विधायक रह गए हैं, जबकि बीजेपी के सदस्यों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।

    बीजेपी में शामिल होने से पहले इन विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। बातचीत के दौरान मेघालय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। इनमें कोयला खनन से संबंधित विषय और खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग प्रमुख रही।

    विधायकों की ओर से मेघालय के कुछ अन्य स्थानीय मुद्दे भी केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखे गए थे। खासी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग राज्य में लंबे समय से उठती रही है। विधायकों ने इन मुद्दों पर आगे कार्रवाई को लेकर आश्वासन मिलने की बात कही थी।

    नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की मौजूदगी में आठों विधायकों के पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा हुई। इस मौके पर रिजिजू ने सभी नए सदस्यों का स्वागत किया और इसे पूर्वोत्तर तथा देश की राजनीति से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया।

    रिजिजू ने कहा कि इन विधायकों ने पिछले 12 वर्षों के दौरान पूर्वोत्तर में हुए बदलाव और विकास कार्यों को देखा है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की नीतियों और पूर्वोत्तर के विकास को लेकर किए गए कामों से प्रभावित होकर इन विधायकों ने बीजेपी के साथ जुड़ने का फैसला किया है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर में हुए विकास कार्यों और क्षेत्र के लोगों के साथ संपर्क को भी इस बदलाव से जोड़कर बताया। बीजेपी का कहना है कि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, विकास योजनाओं और केंद्र की नीतियों का असर राजनीतिक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है।

    आठ विधायकों के बीजेपी में शामिल होने का घटनाक्रम 2028 में होने वाले मेघालय विधानसभा चुनाव से पहले सामने आया है। इस बदलाव से राज्य विधानसभा में दलों की संख्या और राजनीतिक ताकत का समीकरण बदला है।

    किर्मेन श्याला सहित इन विधायकों की बीजेपी में एंट्री के बाद पार्टी अब मेघालय विधानसभा में 10 सदस्यों के साथ पहले की तुलना में मजबूत स्थिति में है। वहीं UDP के 12 में से आठ विधायकों के अलग होने से क्षेत्रीय दल के सामने अपनी विधानसभा स्थिति को लेकर नई चुनौती खड़ी हुई है।

    यह घटनाक्रम मेघालय की आगामी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी से जुड़े राजनीतिक समीकरण धीरे-धीरे आकार ले रहे हैं।

  • धमकियों के बीच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, सुरक्षा बढ़ाने और जांच की मांग उठाई

    धमकियों के बीच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, सुरक्षा बढ़ाने और जांच की मांग उठाई

    नई दिल्ली ।कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने बढ़ती धमकियों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे करीब 15 वर्षों से घाटी में अपना जीवन दोबारा बसाने की कोशिश कर रहे हैं और मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें फिर से विस्थापन की ओर धकेले जाने का डर सताने लगा है।

    ऑल PM पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने पत्र के जरिए कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंताओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि भले ही बाहर से हालात सामान्य दिखाई दें, लेकिन घाटी में रहने वाले परिवारों के बीच डर और तनाव बना हुआ है। कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा के साथ बच्चों के भविष्य की भी चिंता है।

    कर्मचारियों ने कहा है कि हाल में सामने आ रही हर धमकी उन्हें 1990 के दशक की घटनाओं की याद दिलाती है। उनके मुताबिक उस दौर में भी धमकी भरे पत्र और नोटिस डर का माहौल बनाने के शुरुआती संकेत बने थे। इसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। अब नए धमकी भरे पत्रों के सामने आने से पुराना भय दोबारा गहराने लगा है।

    पिछले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत तैनात कर्मचारियों को लगातार धमकियां मिलने की बात सामने आई है। कई पत्रों में सरकारी नौकरी छोड़ने का अल्टीमेटम दिए जाने और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी का उल्लेख है। इन धमकियों के पीछे यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी ULC नाम के संगठन का नाम सामने आ रहा है।

    कर्मचारियों की चिंता केवल धमकी भरे पत्रों तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि निजी जानकारी ऑनलाइन लीक होने से भी असुरक्षा बढ़ी है। सोशल मीडिया पर कुछ कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक प्रसारित किए जाने की बात कही गई है। इससे घाटी में रहने वाले परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।

    कर्मचारियों ने अपनी आवासीय स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी किराए के कमरों में रह रहे हैं। वहीं, जिन स्थानों पर ट्रांजिट कॉलोनियां बनाई गई हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा के अभाव में वे खुद को खतरे के बीच महसूस कर रहे हैं।

    गृह मंत्री को भेजे गए पत्र में धमकियों की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। कर्मचारियों ने PM पैकेज के तहत काम कर रहे लोगों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है। साथ ही सभी आवासों की सुरक्षा समीक्षा कराने की मांग रखी गई है।

    कर्मचारियों ने यह भी कहा है कि धमकी मिलने की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने और समय पर सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि वे कश्मीर घाटी छोड़ना नहीं चाहते। पिछले 15 वर्षों में उन्होंने उस जीवन को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है, जो कई दशक पहले उजड़ गया था।

    2022 में राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे। अब नई धमकियों के बाद उनकी चिंता फिर सामने आई है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नौकरी और सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न किया जाए। वे घाटी में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षित माहौल की मांग कर रहे हैं।

  • अमित शाह ने सीमा सुरक्षा पर जवानों से की चर्चा, बंगाल में BSF के लिए जमीन उपलब्ध कराने का दावा किया

    अमित शाह ने सीमा सुरक्षा पर जवानों से की चर्चा, बंगाल में BSF के लिए जमीन उपलब्ध कराने का दावा किया


    नई दिल्ली । 
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी पहुंचे, जहां उन्होंने दो दिवसीय दौरे के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सुरक्षा बलों के अधिकारियों और जवानों से चर्चा की। बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उनका स्वागत राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने किया। इसके बाद अमित शाह एसएसबी कैंप पहुंचे और जवानों से मुलाकात की।

    एसएसबी कैंप में गृह मंत्री ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था, ऑपरेशनल तैयारियों और बॉर्डर मैनेजमेंट से संबंधित विभिन्न विषयों की जानकारी ली। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में तैनात जवानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में सुरक्षा बलों का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने जवानों के साथ संवाद करते हुए सीमा पर आने वाली चुनौतियों और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

    इसी दौरान अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह पहले गृह मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब ममता बनर्जी को सशस्त्र सीमा बल के कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता था, लेकिन वह इन कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुईं। शाह ने सुरक्षा बलों के साथ राज्य सरकार के समन्वय को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी बात रखी।

    अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में सीमा सुरक्षा बल के लिए 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। उनके मुताबिक, सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 29 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी।

    गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बाड़ लगाने की दिशा में लगातार काम करना चाहती थी, लेकिन राज्य स्तर पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ स्थानों पर काम प्रभावित हुआ। उन्होंने मौजूदा सरकार द्वारा जमीन उपलब्ध कराने को सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे का राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्व माना जा रहा है। उत्तर बंगाल का यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इलाकों के नजदीक है। ऐसे में गृह मंत्री के दौरे के दौरान सीमा प्रबंधन, घुसपैठ और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा होना महत्वपूर्ण रहा।

    दौरे के दौरान अमित शाह सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। यहां वह आपराधिक प्रक्रिया से संबंधित प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद उनकी पार्टी की बैठक में शामिल होने की भी योजना है। शुक्रवार रात उनके सुकना स्थित एक होटल में ठहरने का कार्यक्रम है।

    शनिवार को गृह मंत्री पहाड़ी जिलों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर बैठक करेंगे। इसके बाद उनका दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है। उनके दौरे में सुरक्षा व्यवस्था के साथ उत्तर बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता मिलने की संभावना है।

    पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा और घुसपैठ लंबे समय से राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। अमित शाह के ताजा दौरे में इन विषयों के साथ राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय का मुद्दा भी सामने आया। सिलीगुड़ी में उनकी गतिविधियों के बाद आने वाले समय में सीमा सुरक्षा और उत्तर बंगाल से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

  • अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    नई दिल्ली ।केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित बताए जा रहे शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। उनके अनुसार 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान के दौरान 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद की गई।

    अमित शाह के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने 12 अगस्त को रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम के जरिए समन्वित अभियान चलाया। कार्रवाई का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित आतंकी गतिविधियों और हिंसा की साजिशों को समय रहते रोकना था। इस अभियान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल को शामिल किया गया।

    गिरफ्तारियों के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को पकड़ा गया। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में आठ और उत्तराखंड में पांच गिरफ्तारियां हुईं। गुजरात, कर्नाटक और बिहार में तीन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल में दो दो लोगों को पकड़ा गया।

    गृह मंत्री ने कहा कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। इनमें आईईडी, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और ग्रेनेड शामिल हैं। कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा जासूसी और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सीसीटीवी कैमरे भी बरामद किए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और आईएसआई समर्थित आतंकी सिंडिकेट के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि यह नेटवर्क भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों के अलावा लक्षित हत्याओं जैसी गतिविधियों में स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल करता था।

    एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क से जुड़े स्थानीय लोगों को कथित तौर पर धन उपलब्ध कराया जाता था और उनसे पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों तथा धार्मिक स्थलों की रेकी कराने जैसे काम लिए जाते थे। निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

    अमित शाह ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की समयबद्ध कार्रवाई से संभावित विध्वंसक योजनाओं को नाकाम किया गया। स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील अवसर से पहले इतने बड़े स्तर पर की गई कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बताया गया है कि इस नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। मामलों में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम, मादक पदार्थ संबंधी कानून और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया गया है।

    सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका, उनके आपसी संपर्क, वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार से संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं। बरामद हथियारों और अन्य सामग्री के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उसकी गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।