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  • अमित शाह ने सीमा सुरक्षा पर जवानों से की चर्चा, बंगाल में BSF के लिए जमीन उपलब्ध कराने का दावा किया

    अमित शाह ने सीमा सुरक्षा पर जवानों से की चर्चा, बंगाल में BSF के लिए जमीन उपलब्ध कराने का दावा किया


    नई दिल्ली । 
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी पहुंचे, जहां उन्होंने दो दिवसीय दौरे के दौरान सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सुरक्षा बलों के अधिकारियों और जवानों से चर्चा की। बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उनका स्वागत राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने किया। इसके बाद अमित शाह एसएसबी कैंप पहुंचे और जवानों से मुलाकात की।

    एसएसबी कैंप में गृह मंत्री ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था, ऑपरेशनल तैयारियों और बॉर्डर मैनेजमेंट से संबंधित विभिन्न विषयों की जानकारी ली। उन्होंने सीमा क्षेत्रों में तैनात जवानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में सुरक्षा बलों का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने जवानों के साथ संवाद करते हुए सीमा पर आने वाली चुनौतियों और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

    इसी दौरान अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह पहले गृह मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब ममता बनर्जी को सशस्त्र सीमा बल के कार्यक्रमों में आमंत्रित किया जाता था, लेकिन वह इन कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुईं। शाह ने सुरक्षा बलों के साथ राज्य सरकार के समन्वय को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी बात रखी।

    अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में सीमा सुरक्षा बल के लिए 1,129 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। उनके मुताबिक, सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए 29 एकड़ अतिरिक्त जमीन भी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी।

    गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और बाड़ लगाने की दिशा में लगातार काम करना चाहती थी, लेकिन राज्य स्तर पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ स्थानों पर काम प्रभावित हुआ। उन्होंने मौजूदा सरकार द्वारा जमीन उपलब्ध कराने को सीमा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अमित शाह के सिलीगुड़ी दौरे का राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्व माना जा रहा है। उत्तर बंगाल का यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और रणनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इलाकों के नजदीक है। ऐसे में गृह मंत्री के दौरे के दौरान सीमा प्रबंधन, घुसपैठ और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा होना महत्वपूर्ण रहा।

    दौरे के दौरान अमित शाह सिलीगुड़ी के कावाखाली मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। यहां वह आपराधिक प्रक्रिया से संबंधित प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद उनकी पार्टी की बैठक में शामिल होने की भी योजना है। शुक्रवार रात उनके सुकना स्थित एक होटल में ठहरने का कार्यक्रम है।

    शनिवार को गृह मंत्री पहाड़ी जिलों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर बैठक करेंगे। इसके बाद उनका दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है। उनके दौरे में सुरक्षा व्यवस्था के साथ उत्तर बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता मिलने की संभावना है।

    पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा और घुसपैठ लंबे समय से राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। अमित शाह के ताजा दौरे में इन विषयों के साथ राज्य सरकार और केंद्र के बीच समन्वय का मुद्दा भी सामने आया। सिलीगुड़ी में उनकी गतिविधियों के बाद आने वाले समय में सीमा सुरक्षा और उत्तर बंगाल से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

  • अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    नई दिल्ली ।केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित बताए जा रहे शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। उनके अनुसार 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान के दौरान 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद की गई।

    अमित शाह के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने 12 अगस्त को रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम के जरिए समन्वित अभियान चलाया। कार्रवाई का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित आतंकी गतिविधियों और हिंसा की साजिशों को समय रहते रोकना था। इस अभियान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल को शामिल किया गया।

    गिरफ्तारियों के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को पकड़ा गया। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में आठ और उत्तराखंड में पांच गिरफ्तारियां हुईं। गुजरात, कर्नाटक और बिहार में तीन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल में दो दो लोगों को पकड़ा गया।

    गृह मंत्री ने कहा कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। इनमें आईईडी, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और ग्रेनेड शामिल हैं। कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा जासूसी और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सीसीटीवी कैमरे भी बरामद किए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और आईएसआई समर्थित आतंकी सिंडिकेट के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि यह नेटवर्क भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों के अलावा लक्षित हत्याओं जैसी गतिविधियों में स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल करता था।

    एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क से जुड़े स्थानीय लोगों को कथित तौर पर धन उपलब्ध कराया जाता था और उनसे पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों तथा धार्मिक स्थलों की रेकी कराने जैसे काम लिए जाते थे। निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

    अमित शाह ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की समयबद्ध कार्रवाई से संभावित विध्वंसक योजनाओं को नाकाम किया गया। स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील अवसर से पहले इतने बड़े स्तर पर की गई कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बताया गया है कि इस नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। मामलों में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम, मादक पदार्थ संबंधी कानून और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया गया है।

    सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका, उनके आपसी संपर्क, वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार से संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं। बरामद हथियारों और अन्य सामग्री के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उसकी गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

  • वंदे मातरम् विवाद पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले देश से माफी मांगें, सोनिया गांधी पर भी उठाए सवाल

    वंदे मातरम् विवाद पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले देश से माफी मांगें, सोनिया गांधी पर भी उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी को इस मामले में देश से माफी मांगनी चाहिए।

    अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए वंदे मातरम् को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका यह गीत हकदार है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् देश की स्वतंत्रता की लड़ाई से जुड़ा रहा है और करोड़ों भारतीयों की भावनाएं इससे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में इससे संबंधित किसी भी घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम में पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेता मौजूद थे। ध्वजारोहण के बाद वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसी दौरान सोनिया गांधी के एक इशारे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल उठाए और इसे गीत के प्रति कथित आपत्ति से जोड़ दिया।

    अमित शाह ने दावा किया कि वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर कुछ संकेत किया था। उन्होंने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस पर सवाल खड़े किए। हालांकि इस मामले को लेकर कांग्रेस की ओर से अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है और भाजपा के आरोपों को लेकर सियासी बहस जारी है।

    अमित शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह लोगों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण माध्यम बना। स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् का नारा और गीत देशभक्ति की भावना से जुड़ा रहा है।

    गृह मंत्री ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि पार्टी ने राजनीतिक और चुनावी हितों के कारण वंदे मातरम् को पीछे किया। उन्होंने कहा कि देश की भावनाओं से जुड़े इस गीत का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वंदे मातरम् के महत्व को लेकर देश में जागरूकता बढ़ाने की बात कर चुके हैं। भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़कर कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

    कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के घटनाक्रम को लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संघर्ष की ऐतिहासिक स्मृति और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा प्रतीक है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की भूमिका और नेताओं के संकेत पर राजनीतिक चर्चा जारी है।

    वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से आगे बढ़कर व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। अमित शाह की टिप्पणी के बाद भाजपा ने कांग्रेस से माफी की मांग को और प्रमुखता दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

  • मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । मॉनसून सत्र के आखिरी दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सदन में बयान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। विपक्ष लगातार मांग करता रहा है कि गृहमंत्री सदन में आकर संबंधित मुद्दों पर अपना पक्ष रखें। इसी बीच अमित शाह की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात सामने आने के बाद भी विपक्ष का रुख नरम नहीं हुआ है।

    समाजवादी पार्टी के नेताओं ने गृहमंत्री के रुख और सदन में बयान देने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि विपक्ष लगातार अमित शाह के सदन में आने की मांग करता रहा है, लेकिन अब तक वह सदन में नहीं आए। उन्होंने कहा कि सत्र का अंतिम दिन है और सदन की कार्यवाही भी बार-बार स्थगित हो रही है।

    अवधेश प्रसाद ने सवाल उठाया कि यदि गृहमंत्री को बयान देना था तो उन्हें सदन में आने में क्या परेशानी थी। उनके मुताबिक विपक्ष की मांग लगातार बनी रही, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई।

    सपा सांसद राम गोपाल यादव ने भी गृहमंत्री के बयान को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री बयान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष से पहले सवाल लिखित रूप में देने को कहा गया है। उनके अनुसार संसद में सामान्य परंपरा यह रही है कि मंत्री सदन में बयान देते हैं और इसके बाद सांसद उनसे संबंधित विषयों पर स्पष्टीकरण मांगते हैं।

    कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी गृहमंत्री के पत्र लिखने के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब मॉनसून सत्र समाप्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है, तब 17वें दिन पत्र लिखे जाने का क्या उद्देश्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृहमंत्री सदन में आने के बजाय घर से ही जवाब देना चाहते हैं।

    भगत ने कहा कि 19 दिन के सत्र में 17वें दिन पत्र लिखना अपने आप में सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रक्रिया के जरिए जनता और विपक्ष को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से सदन में आगे क्या रुख अपनाया जाता है, यह कार्यवाही के दौरान स्पष्ट होगा।

    सपा नेता हरेंद्र सिंह मलिक ने इस दौरान राम मंदिर से जुड़े चंदा और चोरी के आरोपों का मुद्दा उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले को लेकर प्रदर्शन करेगी और इसे लोगों की आस्था तथा भावनाओं से जुड़ा विषय बताया।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन अब सभी की नजर सदन की कार्यवाही पर है। विपक्ष गृहमंत्री के बयान और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। दूसरी ओर गृहमंत्री की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आखिरी दिन सदन में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है या राजनीतिक गतिरोध आगे भी जारी रहता है।

  • संसद में नीट मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, रिजिजू ने तत्काल बहस की पेशकश की, हंगामे से सदन स्थगित

    संसद में नीट मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, रिजिजू ने तत्काल बहस की पेशकश की, हंगामे से सदन स्थगित

    नई दिल्ली ।संसद के मॉनसून सत्र में बुधवार को नीट के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म करने की कोशिश हुई, लेकिन सदन में जारी हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपनी सीटों पर लौटने और शांतिपूर्वक चर्चा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि सरकार नीट के मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है।

    रिजिजू ने सदन में कहा कि सरकार चर्चा से पीछे नहीं हट रही है और गृहमंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने विपक्षी सांसदों से सदन के वेल से हटने का आग्रह किया और कहा कि यदि सदस्य अपनी सीटों पर लौट आते हैं तो चर्चा तत्काल शुरू की जा सकती है।

    संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि मॉनसून सत्र के अब केवल दो दिन शेष हैं और इन दिनों का उपयोग संसदीय कामकाज के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के विरोध के तरीके पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अनुशासन के साथ सदन में मुद्दे उठाए जाने चाहिए। सरकार की ओर से चर्चा की तैयारी होने के बावजूद हंगामा जारी रहने से कार्यवाही प्रभावित हुई।

    इस दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन के वेल में पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। सांसदों की ओर से नीट सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की जा रही थी। विरोध के कारण सदन का सामान्य कामकाज आगे नहीं बढ़ सका। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी रहा।

    पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने विपक्षी सांसदों से सदन का वेल खाली करने और अपनी सीटों पर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है और गृहमंत्री अमित शाह जवाब देने को तैयार हैं। ऐसे में विपक्ष को सदन की कार्यवाही सामान्य बनाने में सहयोग करना चाहिए।

    जगदंबिका पाल ने यह भी कहा कि लगातार सदन बाधित करने से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति आने वाली पीढ़ी को गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह चर्चा में शामिल हो और संबंधित मुद्दों को सदन के भीतर उठाए, ताकि सरकार की ओर से उनका जवाब दिया जा सके।

    सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस के लिए संसदीय प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। रिजिजू ने विपक्ष को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सरकार नीट के विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और संबंधित सवालों पर जवाब देने की प्रक्रिया सदन में आगे बढ़ाई जा सकती है।

    इस बीच भाजपा सांसद नितिन नबीन ने विपक्ष के लगातार व्यवधान पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रहा है और संसद की कार्यवाही रोक रहा है। उनके मुताबिक सरकार की ओर से चर्चा के लिए बार-बार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी है।

    हालांकि, सदन में हंगामा कम नहीं हुआ और अंततः लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। अब सदन की अगली बैठक 13 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे होगी। मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में नीट के मुद्दे पर चर्चा और सरकार के जवाब को लेकर दोनों पक्षों के रुख पर नजर रहेगी। गतिरोध समाप्त करने के लिए सदन में संवाद और चर्चा की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

  • छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    नई दिल्ली । मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन को लेकर लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अपनी सहमति जताई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे।

    रिजिजू ने कहा कि सरकार की ओर से चर्चा से पीछे हटने का सवाल नहीं है। छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर सदन में विस्तार से बातचीत होगी और उठाए जाने वाले सवालों का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब गृह मंत्री सदन में सरकार का पक्ष रखेंगे तो विपक्षी सांसदों को उनका जवाब सुनना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही के दौरान व्यवधान पैदा नहीं करने की अपील की। उनका कहना था कि सरकार जवाब देने के लिए तैयार है, इसलिए चर्चा को हंगामे में बदलने के बजाय संसदीय तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार चाहती है कि मुद्दे पर पूरी चर्चा हो और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।

    वहीं विपक्ष ने छात्र आंदोलन के साथ अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी उठाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि गृह मंत्री छात्रों के मामले में सदन में बयान देने के लिए तैयार हैं, तो राम मंदिर से जुड़े मामले पर भी उन्हें अपना पक्ष रखना चाहिए। विपक्ष ने दोनों मुद्दों पर जवाब की मांग को संसद में जारी गतिरोध से जोड़ दिया है।

    संसद के मानसून सत्र में पिछले कई दिनों से विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। सोमवार को भी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई तथा राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े आरोपों को लेकर गृह मंत्री से जवाब देने की मांग की।

    हंगामे के कारण प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ। विपक्षी सांसदों ने सदन के भीतर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और कार्यवाही सामान्य तरीके से चलाने में बाधा आई। इससे पहले विपक्षी दल संसद परिसर में भी अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन करते रहे हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद सोमवार को पानी और दूध लेकर परिसर में पहुंचे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने भी कहा है कि जब तक गृह मंत्री दोनों प्रमुख मुद्दों पर सदन में जवाब नहीं देते, तब तक गतिरोध समाप्त होने की संभावना कम है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सरकार संसद के भीतर इन मामलों पर स्पष्ट स्थिति रखे।

    अब सरकार की ओर से छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए सहमति जताए जाने के बाद सदन की अगली कार्यवाही पर सभी की नजरें हैं। हालांकि विपक्ष की दूसरी मांग को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या इन मुद्दों पर संसद में टकराव आगे भी जारी रहता है।

  • उत्तर प्रदेश में एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान की भूमिका पर चर्चा तेज, अमित शाह से मुलाकात के निकले सियासी मायने

    उत्तर प्रदेश में एनडीए की रणनीति में चिराग पासवान की भूमिका पर चर्चा तेज, अमित शाह से मुलाकात के निकले सियासी मायने


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दल जहां अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटे हैं, वहीं लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास ने भी उत्तर प्रदेश में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। इसी क्रम में पार्टी के जमुई से सांसद और उत्तर प्रदेश प्रभारी अरुण भारती ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक के बाद यूपी की राजनीति में संभावित गठबंधन और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    अरुण भारती और अमित शाह की मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एलजेपी रामविलास की ओर से उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे पंडित-पासी-पासवान नारे का भी उल्लेख हुआ। बताया जा रहा है कि अमित शाह ने पार्टी की इस राजनीतिक पहल की सराहना की। इससे संकेत मिलता है कि एलजेपी रामविलास उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक आधार को विस्तार देने की रणनीति पर काम कर रही है।

    केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की अगुवाई वाली लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने संगठन विस्तार के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की रणनीति अपनाई है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी की गतिविधियों में आई तेजी ने राज्य की राजनीति में उसकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

    एलजेपी रामविलास पहले ही उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। पार्टी की इस घोषणा के बाद संगठन को मजबूत करने और चुनावी आधार तैयार करने की कोशिशें जारी हैं। ऐसे में अमित शाह और अरुण भारती की मुलाकात को लेकर कई तरह के राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं। हालांकि, इस बैठक के बाद बीजेपी और एलजेपी रामविलास के बीच किसी औपचारिक चुनावी समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

    मुलाकात के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी और एलजेपी रामविलास के बीच सीटों को लेकर तालमेल हो सकता है। राजनीतिक हलकों में संभावना जताई जा रही है कि दोनों दल चुनावी रणनीति और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संभावित सहयोग पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल सीट बंटवारे या गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

    उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जातीय और सामाजिक समीकरण चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। एलजेपी रामविलास की ओर से पंडित-पासी-पासवान नारे के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों को जोड़ने की कोशिश को इसी रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। पार्टी यदि अपना संगठनात्मक आधार मजबूत करने में सफल रहती है तो वह आगामी चुनाव में एनडीए के सामाजिक समीकरण को प्रभावित करने वाली भूमिका निभा सकती है।

    चिराग पासवान की राष्ट्रीय राजनीति में एनडीए के साथ सक्रिय भूमिका रही है और ऐसे में उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी की बढ़ती गतिविधियों को बीजेपी के लिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उत्तर प्रदेश में पार्टी की वास्तविक चुनावी ताकत और संभावित सीटों को लेकर तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए संगठन विस्तार और जमीनी सक्रियता का असर देखना महत्वपूर्ण होगा।

    अरुण भारती की अमित शाह से हुई मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उत्तर प्रदेश चुनाव में अभी समय है, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। आने वाले महीनों में एलजेपी रामविलास की प्रदेश में सक्रियता, बीजेपी के साथ उसके संबंध और सीटों को लेकर होने वाली बातचीत से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल इस मुलाकात ने इतना जरूर संकेत दिया है कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर संभावित राजनीतिक तालमेल को लेकर गतिविधियां बढ़ रही हैं।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में राजनीतिक टकराव लगातार गहराता जा रहा है। विपक्ष इस पूरे मामले पर सरकार से विस्तृत जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सदन की कार्यवाही भी बार-बार बाधित हो रही है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह को स्वयं सदन में उपस्थित होकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देनी चाहिए ताकि सभी सवालों का स्पष्ट उत्तर मिल सके।

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे संवेदनशील मामलों पर संसद के भीतर खुली चर्चा होना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा के सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री को विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत कराने का निर्देश दिया है, जिससे इस विषय पर चर्चा का रास्ता निकल सके।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध करना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस या अन्य बल प्रयोग किया है तो यह जानना जरूरी है कि ऐसे कदम उठाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था। उनके अनुसार संसद इस प्रकार के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और सरकार को यहां विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए।

    खड़गे ने अपनी पार्टी की ओर से दो प्रमुख मांगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दें और दूसरी ओर गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के सवालों का जवाब दें। उनका कहना था कि यदि सरकार इस विषय पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती है तो राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना बनी रहेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना चाहता है, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने की स्थिति में गतिरोध समाप्त होना कठिन है। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही दोनों समान रूप से आवश्यक हैं तथा जनता से जुड़े मामलों पर सरकार को पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए।

    अपने बयान के दौरान खड़गे ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों के हितों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रहेगी। उनका कहना था कि किसी भी राज्य में यदि युवाओं और छात्रों से जुड़े प्रश्न सामने आते हैं तो उन पर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    जंतर-मंतर की घटना को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा होती है तो राजनीतिक दलों के बीच जारी टकराव कम होने की संभावना बन सकती है। फिलहाल विपक्ष अपने रुख पर कायम है और सरकार से आधिकारिक जवाब की मांग लगातार दोहरा रहा है।

  • सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में

    सियासी घटनाओं से गरमाया MP, संसद में तीखे तेवर, नर्स का अनोखा विरोध और शाह-वीडी बैठक सुर्खियों में


    भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीति और प्रशासन से जुड़ी कई घटनाएं शनिवार को चर्चा का केंद्र बनी रहीं। एक ओर संसद में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उसके विरोध प्रदर्शन को सड़क छाप राजनीति करार दिया तो दूसरी ओर भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। इसी बीच अनूपपुर जिले से सामने आया एक वीडियो सरकारी व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत बयां करता नजर आया जिसमें एक नर्स मोबाइल नेटवर्क की तलाश में पेड़ पर चढ़कर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की कोशिश करती दिखाई दी।

    राज्यसभा में उस समय माहौल गरमा गया जब विपक्ष ने जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। सभापति की ओर से अनुमति नहीं मिलने पर विपक्षी सदस्य नारेबाजी करने लगे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में लोकतंत्र की मर्यादा को तार तार किया जा रहा है और विपक्ष केवल अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और ऐसे व्यवहार को कभी स्वीकार नहीं करेगी। हालांकि विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा और सदन में नारेबाजी होती रही।

    इधर दिल्ली में भाजपा सांसद विष्णु दत्त शर्मा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या पार्टी उन्हें कोई नई जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटने के बाद फिलहाल वे सांसद के रूप में सक्रिय हैं लेकिन अमित शाह से मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषक अलग अलग अर्थ निकाल रहे हैं। हालांकि भाजपा की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

    राजनीति के साथ साथ प्रशासनिक व्यवस्था की एक तस्वीर अनूपपुर जिले से सामने आई जिसने सभी का ध्यान खींचा। पुष्पराजगढ़ के गन्नागोडा स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत एक नर्स ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने के लिए पेड़ पर चढ़ गई। स्वास्थ्य केंद्र में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के कारण उसे मजबूरी में यह तरीका अपनाना पड़ा। वायरल वीडियो में नर्स यह कहते हुए दिखाई दे रही है कि जब तक ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं लग जाएगी तब तक वह नीचे नहीं उतरेगी। यह घटना ग्रामीण इलाकों में डिजिटल व्यवस्था और नेटवर्क की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े करती है।

    उधर दतिया उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज बनी हुई है। मतदान संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक दल अपने अपने दावे कर रहे हैं। इसी बीच यह चर्चा भी सामने आई कि मतदान से पहले एक होटल में हुई रणनीतिक बैठक में विरोधी दल के साथ कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन्हें राजनीतिक तौर पर दूसरे खेमे के करीबी माना जाता है। बताया जा रहा है कि बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए होटल के सीसीटीवी कैमरे तक बंद करा दिए गए थे। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन चुनावी नतीजों से पहले इस तरह की चर्चाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।

    संसद की तल्ख बहस हो या संगठन की गतिविधियां अथवा सरकारी व्यवस्था की चुनौतियां मध्य प्रदेश से जुड़ी ये घटनाएं फिलहाल राजनीति और प्रशासन दोनों की दिशा पर सवाल भी खड़े कर रही हैं और चर्चा भी बटोर रही हैं। अब सबकी नजर आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों पर टिकी हुई है।

  • 32 हजार किताबें, 5 लाख से अधिक ई-बुक्स और आधुनिक सुविधाएं, राजधानी में खुली जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति पर अमित शाह का बड़ा संदेश

    32 हजार किताबें, 5 लाख से अधिक ई-बुक्स और आधुनिक सुविधाएं, राजधानी में खुली जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति पर अमित शाह का बड़ा संदेश

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली को आधुनिक शिक्षा और ज्ञान संसाधनों के क्षेत्र में एक नई सौगात मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद द्वारा विकसित अत्याधुनिक जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। आधुनिक तकनीक और डिजिटल सुविधाओं से सुसज्जित यह बहुमंजिला पुस्तकालय पारंपरिक पुस्तकों और डिजिटल ज्ञान संसाधनों का समन्वित केंद्र होगा। इसका उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और आम पाठकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे आधुनिक सुविधाओं के साथ अध्ययन और शोध कर सकें।

    उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के बौद्धिक विकास से मापी जाती है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में पुस्तकालयों में अधिक संख्या में लोग अध्ययन करने आते हैं, वह समाज ज्ञान, नवाचार और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता है। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर इस पुस्तकालय को समर्पित किए जाने को गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

    नई लाइब्रेरी में 32 हजार से अधिक भौतिक पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही पाठकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 5 लाख से अधिक ई-बुक्स तक पहुंच की सुविधा भी दी गई है। आधुनिक डिजिटल कैटलॉग, अध्ययन कक्ष, शोध सुविधाएं और तकनीक आधारित सेवाएं इसे राजधानी के प्रमुख ज्ञान केंद्रों में शामिल करती हैं। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को एक ही स्थान पर विविध विषयों की अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।

    अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने पुस्तकालयों की सामाजिक भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं होते, बल्कि वे विचारों, ज्ञान और रचनात्मकता के विकास के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। पढ़ने की संस्कृति मजबूत होने से समाज में जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित होती है, जो किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान होती है।

    अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर में लागू किए गए पुस्तकालय मॉडल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गांवों में छोटी-छोटी लाइब्रेरियों को एक केंद्रीय पुस्तकालय से जोड़ने की व्यवस्था की गई, जिससे जरूरत के अनुसार किताबें नियमित रूप से गांवों तक पहुंचाई जाती हैं। इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से शिक्षा के अवसरों का विस्तार होता है और ज्ञान संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है।

    उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ पुस्तकों के अध्ययन की परंपरा को भी बनाए रखें। उनका कहना था कि किताबें केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, तार्किक सोच और जीवन मूल्यों को भी मजबूत करती हैं। नई दिल्ली के मध्य स्थित यह पुस्तकालय आने वाले समय में शिक्षा, शोध और बौद्धिक विमर्श का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की क्षमता रखता है। आधुनिक सुविधाओं और व्यापक डिजिटल संसाधनों के साथ यह पहल राजधानी में ज्ञान आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।