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  • गणपति विसर्जन को लेकर MP में हाई अलर्ट, इंदौर में रात तक चलेंगी झांकियां, घाटों पर तैनात रहेगा भारी फोर्स

    गणपति विसर्जन को लेकर MP में हाई अलर्ट, इंदौर में रात तक चलेंगी झांकियां, घाटों पर तैनात रहेगा भारी फोर्स


    इंदौर । अनंत चतुर्दशी के मौके पर शुक्रवार को मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ भव्य झांकियों और चल समारोह की रौनक देखने को मिलेगी। इंदौर में 103 साल पुरानी झांकी परंपरा के तहत शाम 6 बजे से 9 किलोमीटर से ज्यादा लंबे मार्ग पर झांकियां निकलेंगी। इसके साथ ही अखाड़ों के उस्ताद और खलीफा पारंपरिक खेलों तथा युद्ध कलाओं के करतब दिखाएंगे। प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में भी विसर्जन को लेकर घाटों और कृत्रिम कुंडों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं।

    इंदौर में चल समारोह मिल क्षेत्र से शुरू होकर मजदूर मैदान एमजी रोड कृष्णपुरा नंदलालपुरा जवाहर मार्ग नृसिंह बाजार गोराकुंड खजूरी बाजार होते हुए राजवाड़ा तक पहुंचेगा। शाम 6 बजे खजराना गणेश की झांकी के साथ समारोह की शुरुआत होगी और देर रात तक झांकियां तथा अखाड़े निकलते रहेंगे। सुरक्षा को देखते हुए झांकियों में धारदार हथियार और नशे पर रोक रहेगी। डीजे के इस्तेमाल को भी नियंत्रित किया गया है। झांकी पर अधिकतम दो स्पीकर लगाने की अनुमति होगी। हाथी और ऊंट को भी समारोह में शामिल करने पर रोक रहेगी। दोपहर 3 बजे से झांकी मार्ग और आसपास के इलाकों में यातायात डायवर्ट किया जाएगा।

    इंदौर में इस बार कई धार्मिक और सामाजिक संदेश देने वाली झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। देशी मिल की झांकियों में दुर्गा माता और महिषासुर वध के साथ भगवान शंकर और माता सती से जुड़ा प्रसंग दिखाया जाएगा। एक झांकी में नशामुक्ति का संदेश भी दिया जाएगा। कल्याण मिल की झांकी में भगवान जगन्नाथ की पहली रथ यात्रा का प्रसंग और दूसरी झांकी में नारी शक्ति को प्रमुखता दी जाएगी। होप टेक्सटाइल मिल की झांकियों में गणेशजी की आराधना और भगवान शिव की बारात को धार्मिक प्रसंगों के आधार पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    भोपाल में भी गणेश विसर्जन को लेकर व्यापक तैयारी की गई है। प्रेमपुरा रानी कमलापति बैरागढ़ खटलापुरा हथाईखेड़ा और शाहपुरा प्रमुख विसर्जन स्थलों में शामिल हैं। छोटी प्रतिमाओं के लिए वार्ड और जोन स्तर पर कृत्रिम कुंड बनाए गए हैं जबकि बड़ी प्रतिमाओं के लिए क्रेन की व्यवस्था की गई है। घाटों पर पुलिस गोताखोर फायर ब्रिगेड और सीसीटीवी के जरिए निगरानी की जाएगी। प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू रहेगा।

    उज्जैन में चल समारोह रात 10 बजे से शुरू होगा। इसके बाद प्रतिमाओं को रामघाट और सुनहरी घाट समेत निर्धारित स्थानों तक ले जाया जाएगा। शाम से ही कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू रहेगा। ग्वालियर में सागरताल पर बनाए गए अस्थायी कुंड में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जाएगा। पुलिस प्रशासन के साथ नगर निगम की टीम मौजूद रहेगी और ड्रोन से निगरानी की जाएगी।

    जबलपुर में भी विसर्जन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। बड़ी प्रतिमाओं के लिए नर्मदा जल से भरा कृत्रिम कुंड बनाया गया है जहां क्रेन की मदद से विसर्जन कराया जाएगा। गौरीघाट तिलवारा घाट अधारताल खमरिया रांझी और गोकलपुर समेत कई स्थानों पर व्यवस्थाएं की गई हैं। तीन पत्ती चौक से गौरीघाट जाने वाले मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहेगा और जरूरत के अनुसार यातायात डायवर्ट किया जाएगा।

    अनंत चतुर्दशी पर प्रदेशभर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रमुख घाटों और चल समारोह वाले मार्गों पर पुलिस बल के साथ फायर ब्रिगेड गोताखोर और अन्य आपात सेवाओं की तैनाती रहेगी। कई स्थानों पर ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। प्रशासन का फोकस भीड़ नियंत्रण सुरक्षित विसर्जन और यातायात व्यवस्था बनाए रखने पर रहेगा।

  • देशभर में आज अनंत चतुर्दशी की धूम…. जानिए बप्पा के विसर्जन का शुभ मुहूर्त

    देशभर में आज अनंत चतुर्दशी की धूम…. जानिए बप्पा के विसर्जन का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली।
    देशभर में 10 दिन का गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) आज समाप्त होने जा रहा है। यानी आज गणेश जी का विसर्जन (Ganesh Visarjan 2026 Shubh Muhurat) किया जा रहा है। वहीं, आज अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) का त्योहार भी मनाया जा रहा है. अनंत चतुर्दशी के दिन केवल गणेश विसर्जन ही नहीं होता, बल्कि इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के ‘अनंत’ (असीम) रूप की पूजा भी की जाती है.

    पौराणिक मान्यता के मुताबिक, गणपति विसर्जन के दिन बप्पा दोबारा अपने धाम कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान कर जाते है और पीछे छोड़ जाते हैं सुख, समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर वेदव्यास जी द्वारा बोले गए महाभारत के लेखन कार्य को पूर्ण करने के बाद गणेश जी ने शीतल जल में स्नान किया था. साथ ही, यह दिन सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के ‘अनंत’ रूप की आराधना का भी विशेष पर्व माना जाता है. आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी के इस महापर्व पर गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजन विधि.।

    गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

    – प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)- सुबह 06 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक
    – अपराह्न मुहूर्त (चर)- शाम 4 बजकर 44 मिनट से लेकर 6 बजकर 14 मिनट तक
    – अपराह्न मुहूर्त (शुभ)- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक
    – रात्रि मुहूर्त (लाभ)- रात 9 बजकर 14 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक.
    – रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- 12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26


    गणेश विसर्जन तिथि

    द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 25 सितंबर यानी आज रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगी.


    गणेश विसर्जन की सही एवं संपूर्ण विधि

    सबसे पहले विसर्जन से पूर्व गणेश जी की विधिवत अंतिम पूजा करें. गणेश जी को लाल चंदन, दूर्वा, मोदक, लड्डू, फूल और फल अर्पित करें. फिर, कपूर जलाकर गणेश जी की आरती गाएं. इसके बाद जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगें.


    पूजा समाप्त होने पर कहें ये मंत्र-

    “गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर।
    यत्र ब्रह्मादयो देवाः तत्र गच्छ हुताशन॥”

    इसके बाद लकड़ी के पटरे (चौकी) को थोड़ा सा हिलाएं. यह इस बात का संकेत है कि बप्पा की स्थापना का समय समाप्त हो गया है. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा को विराजमान करें. साथ ही, उनके साथ पूजा सामग्री, थोड़े से चावल, और मोदक की एक छोटी सी पोटली बांधकर रखें. बाप्पा को पूरे सम्मान के साथ सिर या हाथों में उठाकर विसर्जन स्थल तक ले जाएं. रास्ते भर “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या!” के जयकारे लगाएं. विसर्जन स्थल (नदी, तालाब या घर के कुंड) पर पहुंचकर एक बार फिर आरती करें. तत्पश्चात प्रतिमा को धीरे-धीरे और आदरपूर्वक जल में प्रवाहित करें।


    इको-फ्रेंडली विसर्जन

    – एक बड़े गमले, बाल्टी या टब में साफ जल भरें.
    – गणेश जी की प्रतिमा को मंत्रों और जयकारों के साथ जल में धीरे से डुबोएं.
    – जब मिट्टी पूरी तरह घुल जाए, तो उस जल और मिट्टी को घर के पौधों या बगीचे में डाल दें. इससे बप्पा का आशीर्वाद पेड़-पौधों के रूप में हमेशा आपके घर में रहेगा.

  • अनंत चतुर्दशी पर 18 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: 4 राशियों के लिए धन और तरक्की के योग

    अनंत चतुर्दशी पर 18 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: 4 राशियों के लिए धन और तरक्की के योग


    नई दिल्ली। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी यानी अनंत चतुर्दशी को सनातन धर्म में बेहद पवित्र माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा कर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण किया जाता है और गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है। इस बार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ पंचक भी रहेगा और ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा।

    ज्योतिष गणना के मुताबिक इस दिन कुंभ राशि में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग बनने की बात कही जा रही है। चंद्रमा के कुंभ राशि में रहने के कारण पंचक का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस संयोग का असर सभी राशियों पर अलग-अलग हो सकता है, लेकिन चार राशियों के लिए आर्थिक लाभ, करियर और सफलता के विशेष योग बताए जा रहे हैं।

    18 साल बाद कुंभ राशि में चंद्र-राहु का संयोग

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार राहु किसी एक राशि में करीब 18 महीने यानी डेढ़ साल तक रहते हैं, जबकि चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में राशि बदलते हैं। ऐसे में राहु के कुंभ राशि में गोचर के दौरान चंद्रमा का भी इसी राशि में आना अपेक्षाकृत दुर्लभ संयोग माना जाता है।

    इसी आधार पर अनंत चतुर्दशी के दिन कुंभ राशि में चंद्रमा और राहु की युति को करीब 18 साल बाद बनने वाला संयोग बताया जा रहा है। वहीं, पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा और शतभिषा नक्षत्र के बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इस दिन पंचक भी दर्ज है।

    मेष राशि: आय के नए रास्ते खुलने के योग

    मेष राशि वालों के लिए यह युति 11वें भाव यानी आय और लाभ के भाव में बनने की बात कही गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका सकारात्मक प्रभाव आर्थिक मामलों में देखने को मिल सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए किसी बड़ी डील के फाइनल होने के योग बन सकते हैं।

    मिथुन राशि: भाग्य का साथ, विदेश से जुड़े काम में अवसर

    मिथुन राशि के जातकों के लिए चंद्रमा और राहु का संयोग 9वें भाव यानी भाग्य और धर्म के भाव में बनने की बात कही गई है।

    इसके प्रभाव से अटके हुए काम गति पकड़ सकते हैं। उच्च शिक्षा, विदेश व्यापार और ऑनलाइन बिजनेस से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। धार्मिक यात्रा के योग भी बन सकते हैं। भाग्य का साथ मिलने से कई महत्वपूर्ण काम पूरे होने की संभावना जताई जा रही है।

    तुला राशि: निवेश से लाभ और रचनात्मक क्षेत्र में पहचान

    तुला राशि के लिए यह युति 5वें भाव यानी बुद्धि, संतान और लाभ से जुड़े भाव में बनने की बात कही गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक शेयर मार्केट या पुराने निवेश से अचानक आर्थिक लाभ मिल सकता है। रचनात्मक और मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों के काम को पहचान मिल सकती है। इस दौरान अन्य शुभ ग्रहों के प्रभाव को भी तुला राशि के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

    धनु राशि: आत्मविश्वास बढ़ेगा, करियर में बदलाव के संकेत

    धनु राशि के जातकों के लिए चंद्रमा और राहु का संयोग तीसरे भाव यानी पराक्रम और छोटे भाई-बहनों से संबंधित भाव में बनने की बात कही गई है।

    इससे आत्मविश्वास और काम करने की क्षमता बढ़ने के योग बताए जा रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है या पदोन्नति के अवसर बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी कार्यशैली की सराहना हो सकती है। विरोधियों पर प्रभाव बढ़ने के भी संकेत बताए गए हैं।