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  • आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब का तांडव… 5 की मौत, हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद, CM ने किया राहत का ऐलान

    आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब का तांडव… 5 की मौत, हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद, CM ने किया राहत का ऐलान


    विशाखापत्तनम।
    आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में चक्रवात अर्नब (Cyclone Arnab) ने भारी तबाही मचाई है। बुधवार तड़के राज्य के तटीय इलाकों से गुजरे इस भीषण चक्रवाती तूफान (Cyclonic storm) के कारण पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि फसलों और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू (Chief Minister N. Chandrababu Naidu) ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया है। राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों के लिए भी आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

    मुख्यमंत्री नायडू ने बुधवार शाम राज्य सचिवालय स्थित रियल टाइम गवर्नेंस सिस्टम (आरटीजीएस) केंद्र में हालात की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों को बताया कि तूफान के कारण कई जिलों में जान-माल का नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, राज्य में करीब 15 हजार बिजली के खंभे उखड़ गए हैं। वहीं, हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं या उन्हें नुकसान पहुंचा है।

    अब ये तूफान ओडिशा में दस्तक दे चुका है। हालांकि पहले से इसकी तीव्रता कम हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चेतावनी दी कि आंध्र प्रदेश में तबाही मचाने के बाद, जैसे-जैसे चक्रवात ओडिशा की ओर बढ़ेगा, मलकानगिरि और अधिक प्रभावित हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा, ”सरकार गंजाम, गजपति, रायगडा, कोरापुट, मलकानगिरि और नबरंगपुर जिलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।”


    कहां कितने लोगों की मौत हुई?

    मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के मुताबिक, चक्रवात के कारण पांच लोगों की जान गई है। इनमें से तीन की मौत विशाखापत्तनम जिले में बिजली के खंभे और पेड़ गिरने से हुई। इसके अलावा अनाकापल्ली और भीमावरम में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है। नायडू ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए प्रत्येक परिवार को पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।


    3.45 लाख किसानों पर असर, 2.24 लाख हेक्टेयर में फसलें प्रभावित

    चक्रवात और इसके साथ हुई बारिश ने कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, शुरुआती अनुमान में करीब 3.45 लाख किसानों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। राज्य के 14 जिलों में 2,24,489 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसलें जलमग्न हुई हैं या उन्हें नुकसान पहुंचा है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर फसलों और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कृषि और बागवानी फसलों को लगभग 70,900 हेक्टेयर क्षेत्र में नुकसान पहुंचने का अनुमान है। इनमें धान की फसल भी शामिल है। करीब 10,450 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों के जलमग्न होने या क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है।


    प्रभावित किसानों को कितना मुआवजा मिलेगा?

    – राज्य सरकार ने चक्रवात से प्रभावित किसानों के लिए फसल के प्रकार और नुकसान की सीमा के आधार पर आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।
    – कपास और गन्ने की फसल के लिए 25,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी।
    – केले की खेती को नुकसान होने पर 15,000 रुपये प्रति हेक्टेयर दिए जाएंगे।
    – टमाटर की फसल के लिए 25,000 रुपये की सहायता घोषित की गई है।
    – अन्य फसलों के किसानों को सरकार की राहत व्यवस्था के तहत संबंधित श्रेणियों के अनुसार आर्थिक मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नुकसान के ये आंकड़े शुरुआती आकलन पर आधारित हैं। फील्ड सर्वे पूरा होने के बाद इनमें बदलाव हो सकता है। सत्यापन के बाद राज्य सरकार केंद्र को नुकसान का विस्तृत ब्योरा सौंपेगी।


    180 मकान क्षतिग्रस्त, सड़कों पर गिरे 220 से ज्यादा पेड़

    चक्रवात ने बिजली व्यवस्था के साथ-साथ मकानों और सड़कों को भी नुकसान पहुंचाया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, करीब 180 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इनमें ज्यादातर मकान कोनसीमा जिले में हैं। राज्य की सड़कों पर 220 से अधिक पेड़ गिर गए थे। इनमें से बुधवार दोपहर तक 170 से ज्यादा पेड़ों को हटाया जा चुका था। तटीय इलाकों में सड़क संबंधी बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचने की खबर है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि गोदावरी डेल्टा के तटीय इलाकों में तूफान का असर खास तौर पर देखने को मिला। इनमें कोनसीमा, काकीनाडा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी, कृष्णा और अनाकापल्ली जिले शामिल हैं। विशाखापत्तनम के चार वार्डों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। पेड़ गिरने जैसी घटनाओं से निपटने के लिए दमकल और आपातकालीन सेवा कर्मियों को 220 से अधिक कॉल मिलीं।


    28 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

    चक्रवात के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान चलाया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, एहतियाती कदम के तौर पर 28 हजार से अधिक लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया। मछली पकड़ने वाली सभी नौकाओं को भी वापस बंदरगाह पर बुला लिया गया।

    प्रशासन ने प्रभावित जिलों में चिकित्सा दल, एंबुलेंस, राहत सामग्री, बिजली आपूर्ति बहाल करने वाली टीमें और सड़क से मलबा हटाने वाले कर्मियों को तैनात किया है। जिला कलेक्टरों को मौके पर राहत कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार ने 14 जिलों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की 16 और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की 11 टीमों को तैनात किया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से लगातार सहयोग देने की अपील की। उन्होंने नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम जल्द भेजने का भी आग्रह किया।

    नायडू ने कहा कि प्रशासन का ध्यान उन परिवारों की मदद पर रहेगा, जिन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा है या जिनके मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। बारिश और समुद्र में ऊंची लहरों से खतरा पूरी तरह टलने तक राहत एवं बचाव दल तैनात रहेंगे।

    125 से 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाएं
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, चक्रवात अर्नब बुधवार सुबह दो बजे से आठ बजे के बीच आंध्र प्रदेश-यानम तट से गुजरा। उस समय यह अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान था और इसकी अधिकतम निरंतर हवा की रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे थी। सुबह करीब 8:30 बजे यह कमजोर होकर भीषण चक्रवाती तूफान में बदल गया। इसके बाद हवा की रफ्तार घटकर 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे रह गई।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले दो दिनों में तूफान के उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने की संभावना थी। इसके धीरे-धीरे कमजोर होकर चक्रवाती तूफान और फिर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदलने का अनुमान जताया गया। इसके दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों से गुजरने के बाद उत्तर-पश्चिम दिशा में छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने की संभावना थी।


    ओडिशा में भी अलर्ट, 30 हजार से ज्यादा लोगों को निकाला गया

    चक्रवात से प्रभावित ओडिशा में भी प्रशासन ने बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए। बारिश के कारण राज्य में 30 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में अलर्ट जारी किया गया। राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि निचले इलाकों और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों से लोगों को निकालने का अभियान जारी था। उन्होंने कहा कि चक्रवात का असर बढ़ने के कारण अगले 24 घंटे बेहद अहम रहने की आशंका थी।

    संवेदनशील इलाकों में कुल 313 राहत एवं बचाव दल तैनात किए गए। इनमें ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) की 60, एनडीआरएफ की नौ और दमकल एवं आपातकालीन सेवाओं की 244 टीमें शामिल थीं। राज्य की सभी 19,143 मछली पकड़ने वाली नौकाएं तट पर लौट आई थीं। भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में एहतियात के तौर पर कुछ सड़कों पर आवाजाही भी रोकी गई।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ट्रेनों का परिचालन सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के लिए स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी। उन्होंने बताया कि 10 स्थानों पर पेड़ गिरने जैसी छोटी बाधाओं को समय रहते दूर कर लिया गया। भुवनेश्वर हवाई अड्डे के निदेशक प्रसन्ना प्रधान के मुताबिक, उड़ानों का परिचालन ज्यादातर सामान्य था, हालांकि एक उड़ान रद्द हुई। प्रभावित विशाखापत्तनम हवाई क्षेत्र से बचने के लिए चेन्नई और हैदराबाद से भुवनेश्वर आने वाली उड़ानों को रायपुर के ऊपर से वैकल्पिक मार्ग दिया गया।

    ओडिशा के नबरंगपुर, रायगढ़ा, कोरापुट, मलकानगिरि, गजपति और गंजाम जिलों में अत्यंत भारी बारिश को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया था। इन इलाकों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई। हालांकि, राज्य के विशेष राहत आयुक्त राजेश पी. पाटिल ने बताया कि दक्षिणी जिलों के कुछ हिस्सों में पेड़ गिरने की घटनाएं हुईं, लेकिन बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं थी।

  • आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों के चुनाव पर रोक, NDA ने YSRCP पर लगाया साजिश का आरोप

    अमरावती। आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य चुनाव आयोग ने 100 शहरी निकायों में जारी चुनाव प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया है। वहीं, आयोग अब गुरुवार को इस पर फैसला करेगा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय दिया जाए या नहीं।

    मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री और जनसेना प्रमुख पवन कल्याण तथा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पीवीएन माधव ने संयुक्त बयान जारी कर चुनाव आयोग के फैसले का सम्मान करने की बात कही। गठबंधन नेताओं ने कहा कि उनकी सरकार निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आयोग ने रोकी प्रक्रिया

    शहरी निकाय चुनावों को लेकर विवाद वाईएसआरसीपी की याचिका के बाद बढ़ा। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को उम्मीदवारों की अंतिम सूची 25 अक्टूबर तक जारी करने की प्रक्रिया टालने का निर्देश दिया था। इसके बाद आयोग ने राज्य के सभी 100 शहरी निकायों में चल रही चुनाव प्रक्रिया रोक दी।

    अब आयोग को यह तय करना है कि जिन क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर सके, वहां नामांकन की अंतिम तारीख बढ़ाई जाए या नहीं। इस निर्णय पर राज्य की राजनीतिक गतिविधियों की नजर बनी हुई है।

    एनडीए का आरोप, चुनाव रोकने की कोशिश कर रही YSRCP

    चंद्रबाबू नायडू, पवन कल्याण और पीवीएन माधव ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि गठबंधन सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने और स्थानीय निकायों में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    बयान में कहा गया, “हमने 2024 का चुनाव आंध्र प्रदेश के पुनर्निर्माण के वादे के साथ लड़ा था। लोगों ने हम पर भरोसा किया और गठबंधन को सरकार चलाने की जिम्मेदारी दी। पिछले दो वर्षों में हमने कल्याण, विकास और सुशासन पर ध्यान दिया है। हमने लोगों का विश्वास बहाल किया है।”

    एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी शुरुआत से ही स्थानीय निकाय चुनावों को बाधित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने का तत्काल कारण सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है। विपक्ष पर लगाए गए साजिश के आरोप एनडीए नेताओं के राजनीतिक दावे हैं।

    स्थानीय निकायों के चुनाव को विकास के लिए बताया जरूरी

    एनडीए नेताओं ने कहा कि मजबूत स्थानीय निकाय राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, समय पर चुनाव होने से स्थानीय प्रशासन को मजबूती मिलती है और 16वें वित्त आयोग तथा केंद्र सरकार से मिलने वाली धनराशि से जुड़े प्रावधानों के लिहाज से भी चुनाव महत्वपूर्ण हैं।

    गठबंधन का कहना है कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की मौजूदगी विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करती है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।

    पिछली सरकार के चुनावों को लेकर भी उठाए सवाल

    एनडीए नेताओं ने वाईएसआरसीपी की पिछली सरकार के दौरान हुए चुनावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय राज्य में हिंसा और धमकियों के कारण भय का माहौल बना था तथा विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने में परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

    बयान में गठबंधन नेताओं ने कहा कि वाईएसआरसीपी ने उस समय चुनावी जीत का जश्न मनाया, जबकि अब कानून के अनुसार चुनाव कराने की प्रक्रिया में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं।

    एनडीए में शामिल टीडीपी, जनसेना और भाजपा ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपना भरोसा जताते हुए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने में सहयोग देने की बात कही है।

    आयोग के अगले फैसले पर टिकी निगाहें

    आंध्र प्रदेश में 100 शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पर लगी रोक के बाद अब राज्य चुनाव आयोग के अगले फैसले का इंतजार है। खास तौर पर उन क्षेत्रों में नामांकन की समयसीमा बढ़ाने का मुद्दा महत्वपूर्ण है, जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल नहीं कर पाए।

    आयोग का निर्णय आगे की चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय करेगा। फिलहाल इस मुद्दे ने सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी वाईएसआरसीपी के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

  • आंध्र प्रदेश में 46.62 लाख हटाए गए वोटरों का फिर होगा सत्यापन, घर-घर पहुंचेंगे BLO

    आंध्र प्रदेश में 46.62 लाख हटाए गए वोटरों का फिर होगा सत्यापन, घर-घर पहुंचेंगे BLO


    अमरावती।
    आंध्र प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग 8 अक्टूबर से 46,62,583 हटाए गए मतदाताओं के नाम और उनकी स्थिति का दोबारा सत्यापन कराएगा। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर इन मतदाताओं की स्थिति की जांच करेंगे। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता गलती से मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

    46.62 लाख नामों की होगी दोबारा जांच

    आंध्र प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विवेक यादव के मुताबिक, BLO अपने-अपने मतदान केंद्रों से संबंधित 46,62,583 हटाए गए नामों की सूची लेकर घर-घर जाएंगे। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 15 जून से 24 जुलाई तक हुई गणना में 44,89,512 मतदाता अपने दर्ज पते पर नहीं मिले थे। इनमें मृत, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके, एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत और अन्य कारणों से सत्यापन में नहीं मिले मतदाता शामिल थे।

    यदि दोबारा सत्यापन में यह सामने आता है कि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटा दिया गया है, तो BLO उसे फॉर्म-6 भरने में मदद करेंगे। आवश्यक जांच पूरी होने के बाद उसका नाम निरंतर अपडेट प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में शामिल किया जा सकेगा।

    ड्राफ्ट सूची के बाद 1.73 लाख और नाम अपात्र

    31 जुलाई को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद भी नामों की जांच जारी रही। नोटिस प्रक्रिया के दौरान 6 अक्टूबर तक 1,73,071 और मतदाताओं को अंतिम सूची में शामिल किए जाने के लिए अपात्र पाया गया। इस तरह दोबारा सत्यापन के दायरे में कुल 46,62,583 नाम आए हैं।

    SIR से पहले आंध्र प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 4.16 करोड़ से अधिक थी। 31 जुलाई को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 3,71,38,182 मतदाता दर्ज थे।

    16 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

    आंध्र प्रदेश में SIR-2026 की अंतिम मतदाता सूची 16 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी। चुनाव आयोग ने दावा और आपत्ति की प्रक्रिया की अवधि भी 10 अक्टूबर तक बढ़ाई है।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी विवेक यादव ने कहा है कि आयोग का लक्ष्य पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र नामों को बाहर रखना है। अंतिम सूची जारी होने के बाद भी जिन पात्र लोगों का नाम छूट जाता है, वे निर्धारित अर्हता तिथियों के आधार पर फॉर्म-6 के जरिए निरंतर अपडेट प्रक्रिया में नाम दर्ज करा सकते हैं।

    चुनाव आयोग ने इस पुनः सत्यापन प्रक्रिया को दस्तावेज करने के भी निर्देश दिए हैं। BLO की गतिविधियों और मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया की फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।

  • तिरुपति की दवा फैक्ट्री में बॉयलर फटा, पांच कर्मचारियों की मौत, 10 से अधिक घायल; राहत-बचाव के साथ जांच शुरू

    तिरुपति की दवा फैक्ट्री में बॉयलर फटा, पांच कर्मचारियों की मौत, 10 से अधिक घायल; राहत-बचाव के साथ जांच शुरू


    नई दिल्ली:
    आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में शनिवार तड़के एक दवा बनाने वाली फैक्ट्री में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया। सत्यवेडु मंडल स्थित श्री सिटी स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) में संचालित टिल हेल्थकेयर की फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में नाइट शिफ्ट के दौरान अचानक बॉयलर जोरदार धमाके के साथ फट गया। विस्फोट के बाद फैक्ट्री परिसर में आग फैल गई। इस हादसे में पांच कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया और उनका इलाज कराया जा रहा है। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    टिल हेल्थकेयर की यह यूनिट टैबलेट बनाने का काम करती है। शनिवार तड़के जब कर्मचारी नाइट शिफ्ट में काम कर रहे थे, उसी दौरान यूनिट के अंदर लगे बॉयलर में विस्फोट हुआ। धमाका इतना तेज था कि इसके बाद पूरी इकाई में भीषण आग फैल गई। हादसे में पांच कर्मचारियों की मौके पर ही मौत होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, 10 से अधिक कर्मचारी गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद घायलों को फैक्ट्री से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया।

    घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस, आपातकालीन सेवाएं और राहत दल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने फैक्ट्री परिसर में पहुंचकर स्थिति को संभाला और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की। राहत दलों ने आग पर काबू पाने के साथ ही परिसर में मौजूद कर्मचारियों की मदद की। एसईजेड के अधिकारियों के अनुसार, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बॉयलर में विस्फोट किस वजह से हुआ। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। जांच में तकनीकी खराबी, सुरक्षा प्रणाली की विफलता और संचालन में किसी तरह की चूक समेत संभावित पहलुओं को देखा जा रहा है।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और संबंधित अधिकारी राहत एवं बचाव कार्य के साथ घायलों के इलाज पर भी नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने प्रभावित कर्मचारियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं। घटना के बाद फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों के बीच भी चिंता का माहौल है। हादसे के कारणों की जांच पूरी होने के बाद ही बॉयलर विस्फोट की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल राहत और बचाव कार्य के साथ मामले की जांच जारी है और घायलों के उपचार को प्राथमिकता दी जा रही है।

    आंध्र प्रदेश के शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश ने हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने घटना को बेहद दुखद बताते हुए अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मंत्री ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी घायलों का बेहतर से बेहतर इलाज तत्काल सुनिश्चित किया जाए। साथ ही राज्य सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है। प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर स्थिति की निगरानी कर रही हैं और हादसे के कारणों से जुड़े सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है।

  • आंध्र प्रदेश के नागप्पा परिवार में हैं 83 सदस्य और 6 पीढ़ियां, लेकिन रसोई एक, बना संयुक्त परिवार की मिसाल

    आंध्र प्रदेश के नागप्पा परिवार में हैं 83 सदस्य और 6 पीढ़ियां, लेकिन रसोई एक, बना संयुक्त परिवार की मिसाल


    नई दिल्‍ली । आजकल संयुक्त परिवार धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं. लोग अब न्यूक्लियर फैमिली की तरफ बढ़ रहे हैं. नौकरी, पढ़ाई और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग अलग-अलग शहरों में बस जाते हैं. ऐसे समय में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के कुरलपल्ली गांव का नागप्पा परिवार लोगों के लिए एक मिसाल बनकर सामने आया है.

    इस परिवार में कुल 83 सदस्य रहते हैं. खास बात यह है कि परिवार छह पीढ़ियों तक फैला हुआ है और आज भी सभी लोग मिल-जुलकर एक परिवार की तरह रहते हैं. भले ही वे चार अलग-अलग मकानों में रहते हों, लेकिन उनकी जिंदगी पूरी तरह एक ही परिवार की तरह चलती है.

    परिवार में कौन-कौन हैं?
    इस बड़े परिवार की अगुवाई हनुमंतरायुडु और मुथ्यालप्पा करते हैं. परिवार में छह सास, 14 बहुएं, 20 बच्चे, दादा-दादी, नाना-नानी और कई बुजुर्ग सदस्य शामिल हैं. इतने बड़े परिवार को संभालना आसान नहीं होता, लेकिन यहां हर सदस्य की अपनी जिम्मेदारी तय है. घर के छोटे-बड़े सभी लोग एक-दूसरे का सहयोग करते हैं. यही वजह है कि इतने सारे लोगों के साथ रहने के बावजूद परिवार में अनुशासन और तालमेल बना रहता है.

    हर सुबह होती है परिवार की मीटिंग
    इस परिवार की सबसे खास बात इसकी हर रोज की दिनचर्या है. हर सुबह घर के बड़े सदस्य एक साथ बैठकर चाय या कॉफी पीते हैं और पूरे दिन की योजना बनाते हैं. इसी बैठक में तय होता है कि कौन खेत में जाएगा, कौन घर के काम संभालेगा और उस दिन खाने में क्या बनेगा. सभी जिम्मेदारियां पहले ही बांट दी जाती हैं, जिससे किसी पर जरूरत से ज्यादा बोझ नहीं पड़ता. परिवार के लोग मानते हैं कि दिन की शुरुआत अगर मिलकर की जाए तो बाकी काम भी आसानी से पूरे हो जाते हैं.

    चार घर, लेकिन रसोई सिर्फ एक
    आज के समय में हर घर की अपनी अलग रसोई होती है, लेकिन नागप्पा परिवार में ऐसा नहीं है. यहां चार मकानों में रहने के बावजूद पूरे परिवार का खाना एक ही रसोई में तैयार होता है. राशन खरीदने से लेकर सब्जियां लाने तक की जिम्मेदारी बड़े सदस्य निभाते हैं. वहीं परिवार की बहुएं मिलकर पूरे परिवार के लिए खाना बनाती हैं. एक साथ बैठकर खाना खाना इस परिवार की पुरानी परंपरा है. उनका मानना है कि साथ बैठकर खाना खाने से रिश्तों में अपनापन बना रहता है.

    खेती के साथ बसों का भी कारोबार
    इस परिवार की कमाई का जरिया सिर्फ खेती नहीं है. खेती के अलावा परिवार मिलकर ट्रांसपोर्ट का कारोबार भी करता है. परिवार के पास चार बसें हैं, जो कल्याणदुर्गम से कर्नाटक के कई इलाकों के बीच चलती हैं. खेती और बसों से होने वाली पूरी कमाई एक ही जगह जमा होती है. इसके बाद जरूरत के हिसाब से खर्च किया जाता है. इसका मतलब यहां कोई अपनी अलग कमाई नहीं रखता. परिवार की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह सामूहिक है.

    इतने बड़े परिवार में कैसे नहीं होते झगड़े?
    83 लोगों के साथ रहने पर मतभेद होना स्वाभाविक है. परिवार के सदस्य भी मानते हैं कि कभी-कभी अलग-अलग राय सामने आती हैं. हालांकि, उनका नियम साफ है कि कोई भी विवाद अगले दिन तक नहीं जाना चाहिए. अगर किसी बात पर बहस होती है तो उसी दिन बैठकर उसका समाधान निकाल लिया जाता है. बुजुर्गों का कहना है कि आपसी सम्मान, धैर्य और बातचीत ही इतने बड़े परिवार को एक साथ जोड़े रखने का सबसे बड़ा कारण है.

    बच्चों को भी मिलती है परिवार की सीख
    इस संयुक्त परिवार में बड़े-बुजुर्ग सिर्फ फैसले नहीं लेते, बल्कि बच्चों को परिवार की परंपराएं और संस्कार भी सिखाते हैं. बच्चे अपने दादा-दादी और अन्य बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं. उन्हें बचपन से ही मिलकर रहने, जिम्मेदारियां निभाने और बड़ों का सम्मान करने की सीख दी जाती है. परिवार के लोगों का मानना है कि यही वजह है कि नई पीढ़ी भी संयुक्त परिवार की अहमियत समझ रही है.

    सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ
    इस परिवार की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स ने लिखा कि आज के समय में जहां छोटी-छोटी बातों पर परिवार टूट जाते हैं, वहां 83 लोगों का एक साथ रहना किसी मिसाल से कम नहीं है. कुछ लोगों ने कहा कि यह परिवार बताता है कि अगर आपसी भरोसा और सहयोग हो तो बड़ा परिवार भी खुशी-खुशी रह सकता है.

    बदलते दौर में भी कायम है परंपरा
    संयुक्त परिवारों की संख्या लगातार घट रही है. ऐसे समय में नागप्पा परिवार यह साबित करता है कि अगर रिश्तों को महत्व दिया जाए तो पीढ़ियां भी एक साथ रह सकती हैं. यह परिवार सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि सहयोग, अनुशासन और भरोसे की ऐसी मिसाल है, जो आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलती है. 83 लोगों का यह परिवार दिखाता है कि खुशहाल जिंदगी सिर्फ बड़े घर से नहीं, बल्कि बड़े दिल और मजबूत रिश्तों से बनती है.

  • कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज

    कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज



    नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में बड़ा खुलासा किया है कि आज का भारत कभी अंटार्कटिका से जुड़ा हुआ था। लाखों नहीं बल्कि करोड़ों साल पहले दोनों भूभाग एक विशाल पर्वत श्रृंखला और साझा भूवैज्ञानिक संरचना का हिस्सा थे। अब आंध्र प्रदेश की प्राचीन चट्टानों और पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों के अध्ययन से इस रहस्य पर नई रोशनी पड़ी है।

    रिसर्च के मुताबिक आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और सालूर इलाके में मिली चट्टानों की संरचना, उम्र और रासायनिक गुण पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों से काफी मिलते-जुलते पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दोनों क्षेत्र कभी “रेनर-ईस्टर्न घाट ओरोजेन” नाम की एक ही भूवैज्ञानिक प्रणाली का हिस्सा थे।

    यह अध्ययन भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किया है। रिसर्च में खास तौर पर ग्रैनुलाइट नाम की मेटामॉर्फिक चट्टानों का अध्ययन किया गया, जो पृथ्वी के भीतर अत्यधिक गर्मी और दबाव में बनती हैं और अरबों साल पुराने भूवैज्ञानिक बदलावों की जानकारी अपने अंदर सुरक्षित रखती हैं।

    वैज्ञानिकों ने जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे खनिजों का आधुनिक तकनीक से परीक्षण किया। इनमें जिरकॉन को सबसे अहम माना गया क्योंकि यह अत्यधिक तापमान और दबाव में भी सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों ने जिरकॉन के भीतर मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के अध्ययन से करोड़ों साल पुराने भूवैज्ञानिक घटनाक्रमों का पता लगाया।

    रिसर्च में सामने आया कि भारत और अंटार्कटिका दोनों क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक विकास के तीन बड़े चरण एक जैसे रहे। पहला चरण करीब 1000 से 990 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब विशाल महाद्वीपीय टकराव से बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं बनीं। दूसरा चरण 950 से 890 मिलियन वर्ष पहले का था, जिसमें चट्टानों में गहरे संरचनात्मक बदलाव आए। तीसरा चरण 570 से 540 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब खनिजों से भरपूर तरल पदार्थ चट्टानों की दरारों से गुजरे और खास रासायनिक निशान छोड़ गए।

    वैज्ञानिकों के अनुसार, बाद में सुपरकॉन्टिनेंट Gondwana टूटने लगा और करीब 130 से 150 मिलियन वर्ष पहले भारत और अंटार्कटिका अलग हो गए। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा में एशिया की ओर बढ़ गई, जबकि अंटार्कटिका दक्षिण की ओर खिसक गया।

    आज दोनों भूभाग हजारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन करोड़ों साल पुरानी चट्टानें अब भी उनके साझा इतिहास की कहानी बयां कर रही हैं।

  • विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में चार ठिकानों पर छापेमारी, सोना-चांदी और फ्लैट जब्त..

    विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में चार ठिकानों पर छापेमारी, सोना-चांदी और फ्लैट जब्त..


    नई दिल्ली:विजयवाड़ा/आंध्र प्रदेश में सरकारी अफसर की करोड़ों की संपत्ति का खुलासा होते ही प्रशासनिक और कानून व्यवस्था के हलकों में हड़कंप मच गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने एंडोमेंट्स विभाग की सहायक आयुक्त कलिंगीरी शांति को आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया। जांच में उनके खिलाफ स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद 7 अप्रैल को विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में चल और अचल संपत्तियां जब्त की गईं।

    एसीबी की टीम ने अभियुक्त के आवास, उनकी मां की गारमेंट शॉप, बहन का घर और विशाखापत्तनम में स्थित अन्य संपत्ति पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान अधिकारियों को कई अहम दस्तावेज और संपत्ति का ब्यौरा मिला। जांच में विशाखापत्तनम में एक रिहायशी फ्लैट, विजयवाड़ा में जी+2 इमारत, लगभग 770 ग्राम सोने के आभूषण, 3 किलो चांदी, 1.15 लाख रुपये नकद और करीब 3 लाख रुपये बैंक जमा में पाए गए। इसके अलावा एक वोल्क्सवैगन पोलो कार, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अन्य कीमती सामान भी जब्त किए गए।

    कलिंगीरी शांति को जुलाई 2024 से मार्च 2026 तक निलंबित रखा गया था। उन्होंने वर्ष 2020 में आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती प्राप्त की थी और विशाखापत्तनम तथा विजयवाड़ा में अपनी सेवाएं दी थीं। छापेमारी के समय वह नई पोस्टिंग का इंतजार कर रही थीं।

    एसीबी ने कलिंगीरी शांति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(b) के तहत मामला दर्ज किया है, जो लोक सेवकों के पास आय से अधिक संपत्ति पाए जाने से संबंधित है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विजयवाड़ा स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से 21 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में उन्हें जिला जेल में स्थानांतरित किया गया।

    अधिकारियों ने बताया कि जब्त संपत्तियों का मूल्यांकन और तलाशी अभी जारी है और जांच बढ़ने के साथ संपत्तियों की कुल कीमत में वृद्धि की संभावना है। यह कार्रवाई राज्य में भ्रष्टाचार पर कड़ी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही के संकेत के रूप में देखी जा रही है।

  • आंध्र प्रदेश में भीषण हादसा: पटाखा फैक्ट्री में धमाके से दहल उठा काकीनाडा, 20 की मौत, दूर-दूर तक बिखरे शव

    आंध्र प्रदेश में भीषण हादसा: पटाखा फैक्ट्री में धमाके से दहल उठा काकीनाडा, 20 की मौत, दूर-दूर तक बिखरे शव


    नई दिल्ली । काकीनाडा, आंध्र प्रदेश: शनिवार की दोपहर आंध्र प्रदेश का काकीनाडा जिला एक ऐसे हृदयविदारक हादसे का गवाह बना, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जिले के वेटलापलेम गांव स्थित एक पटाखा निर्माण इकाई में हुए भीषण विस्फोट ने हंसते खेलते परिवारों की खुशियां पल भर में मातम में बदल दीं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 6 अन्य कर्मचारी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

    धमाका दोपहर करीब 2 बजे उस वक्त हुआ जब फैक्ट्री के भीतर 20 से अधिक कर्मचारी अपने काम में मशगूल थे। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी गूंज 5 किलोमीटर के दायरे में सुनाई दी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की धरती डोल गई और आसमान में धुएं का गुबार छा गया। जैसे ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे, वहां का मंजर किसी डरावने सपने जैसा था। फैक्ट्री का ढांचा पूरी तरह जमींदोज हो चुका था और चारों ओर चीख पुकार मची थी।

    पुलिस और चश्मदीदों ने बताया कि धमाके के दबाव के कारण कर्मचारियों के शव पास के धान के खेतों में जाकर गिरे। हरे भरे खेतों के बीच बिखरे हुए अंग और जली हुई लाशें सुरक्षा मानकों की अनदेखी की भयावह कहानी बयां कर रही थीं। स्थिति इतनी विकट थी कि स्थानीय लोगों को शवों को इकट्ठा करने के लिए ‘बाराकालू’ खाद की बोरियों से बनी चादरें का सहारा लेना पड़ा। पुलिस प्रशासन ने खेतों में दूर तक छिटके शरीर के हिस्सों को खोजने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद ली है, ताकि शिनाख्त की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    काकीनाडा सरकारी अस्पताल के सुपरिटेंडेंट के अनुसार, अस्पताल लाए गए घायल 90 से 100 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं, जिससे उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उन्हें बचाने का भरसक प्रयास कर रही है, लेकिन गृह मंत्री वंगालपुडी अनीता ने आशंका जताई है कि हताहतों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।

    मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने तत्काल संबंधित मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचने और राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैक्ट्री के पास आवश्यक लाइसेंस थे या नहीं और वहां सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। फिलहाल, पूरा गांव शोक में डूबा है और अपनों को खोने वाले परिवारों का रो रोकर बुरा हाल है।

  • 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..

    16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..


    नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बताया कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि किस तरह का कंटेंट उनके संपर्क में आ रहा है। ऐसे में मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।

    सरकार का यह कदम ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून से प्रेरित है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok X (ट्विटर) फेसबुक इंस्टाग्राम यूट्यूब और स्नैपचैट जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह लागू होता है तो यह भारत का पहला राज्य होगा जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा।

    तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और विशेषकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है।दीपक रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम को सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य केवल बच्चों को जहरीले कंटेंट ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।

    आंध्र प्रदेश सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम ऐतिहासिक साबित हो सकता है। अगर इसे लागू किया गया तो राज्य के छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह नियंत्रित होगा और उन्हें मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरे से बचाने और उनके स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल युग में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    नई दिल्ली। भारत में दामाद का पहली बार ससुराल आना हमेशा एक उत्सव जैसा माना जाता है। पूरे परिवार को जमाई के स्वागत की तैयारी में जुटा देखा जा सकता है। लेकिन आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के एक गांव में हाल ही में हुई तैयारियां अपनी हदें पार कर गईं। यहां एक परिवार ने अपनी बेटी कीर्तिश्री और दामाद बोड्डू साई शरथ के पहले ससुराल आगमन पर 1374 व्यंजन तैयार किए। यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार था बल्कि सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।परिवार ने मकर संक्रांति के अवसर पर इस आयोजन की योजना बनाई। पूरे कार्यक्रम को पारंपरिक और भव्य तरीके से सजाया गया। स्वागत स्थल पर सजे बोर्ड और संदेशों ने इसे और व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप दिया। यह आयोजन गोदावरी डेल्टा की समृद्ध भोजन संस्कृति को भी दर्शाता है जो अपने उदार भोजन और त्योहारों की रसोई के लिए मशहूर है।

    सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में नवविवाहित जोड़े को भोजन के बीच बैठे हुए देखा जा सकता है। कैमरा धीरे-धीरे टेबलों पर सजी व्यंजन कतारों पर घूमता है। इस विशाल भोज में बिरयानी बर्गर तले हुए स्नैक्स छाछ ताजे जूस मिठाइयां फल और घर के बने नाश्ते शामिल थे। कुछ खास डिशेज आसपास के अलग-अलग इलाकों से मंगाई गई थीं।भोजन के अलावा परिवार ने 12 तोहफे भी दिए जो साल के 12 महीनों का प्रतीक थे। इन तोहफों के जरिए नवदंपति के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। इस भव्य आयोजन ने दामाद और बेटी को खास महसूस कराना सुनिश्चित किया।

    जैसे ही वीडियो वायरल हुआ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। एक यूजर ने लिखा इसका क्या फायदा… कम से कम कुछ मिठाइयां गरीब बच्चों में बांट देते। दूसरे ने टिप्पणी की मैं देखना चाहता हूं कि वो इतना सब कैसे खत्म करेगा। कुछ ने इसे दहेज और दिखावे से जोड़कर भी देखा। एक यूजर ने लिखा गोदावरी जिलों में हर साल ऐसा दिखावा आम है। समझ नहीं आता समाज को क्या संदेश देते हैं। वहीं एक अन्य ने कहा काश बहुओं को भी कभी ऐसा सम्मान मिले।यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार रहा बल्कि सोशल मीडिया पर इसे देखकर लोग इसकी भव्यता और अलग अंदाज की तारीफ कर रहे हैं। 1374 व्यंजन और 12 प्रतीकात्मक तोहफों के साथ इस स्वागत का वीडियो आने वाले समय में और भी चर्चा में रहेगा।