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  • कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज

    कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज



    नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में बड़ा खुलासा किया है कि आज का भारत कभी अंटार्कटिका से जुड़ा हुआ था। लाखों नहीं बल्कि करोड़ों साल पहले दोनों भूभाग एक विशाल पर्वत श्रृंखला और साझा भूवैज्ञानिक संरचना का हिस्सा थे। अब आंध्र प्रदेश की प्राचीन चट्टानों और पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों के अध्ययन से इस रहस्य पर नई रोशनी पड़ी है।

    रिसर्च के मुताबिक आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और सालूर इलाके में मिली चट्टानों की संरचना, उम्र और रासायनिक गुण पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों से काफी मिलते-जुलते पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दोनों क्षेत्र कभी “रेनर-ईस्टर्न घाट ओरोजेन” नाम की एक ही भूवैज्ञानिक प्रणाली का हिस्सा थे।

    यह अध्ययन भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किया है। रिसर्च में खास तौर पर ग्रैनुलाइट नाम की मेटामॉर्फिक चट्टानों का अध्ययन किया गया, जो पृथ्वी के भीतर अत्यधिक गर्मी और दबाव में बनती हैं और अरबों साल पुराने भूवैज्ञानिक बदलावों की जानकारी अपने अंदर सुरक्षित रखती हैं।

    वैज्ञानिकों ने जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे खनिजों का आधुनिक तकनीक से परीक्षण किया। इनमें जिरकॉन को सबसे अहम माना गया क्योंकि यह अत्यधिक तापमान और दबाव में भी सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों ने जिरकॉन के भीतर मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के अध्ययन से करोड़ों साल पुराने भूवैज्ञानिक घटनाक्रमों का पता लगाया।

    रिसर्च में सामने आया कि भारत और अंटार्कटिका दोनों क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक विकास के तीन बड़े चरण एक जैसे रहे। पहला चरण करीब 1000 से 990 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब विशाल महाद्वीपीय टकराव से बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं बनीं। दूसरा चरण 950 से 890 मिलियन वर्ष पहले का था, जिसमें चट्टानों में गहरे संरचनात्मक बदलाव आए। तीसरा चरण 570 से 540 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब खनिजों से भरपूर तरल पदार्थ चट्टानों की दरारों से गुजरे और खास रासायनिक निशान छोड़ गए।

    वैज्ञानिकों के अनुसार, बाद में सुपरकॉन्टिनेंट Gondwana टूटने लगा और करीब 130 से 150 मिलियन वर्ष पहले भारत और अंटार्कटिका अलग हो गए। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा में एशिया की ओर बढ़ गई, जबकि अंटार्कटिका दक्षिण की ओर खिसक गया।

    आज दोनों भूभाग हजारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन करोड़ों साल पुरानी चट्टानें अब भी उनके साझा इतिहास की कहानी बयां कर रही हैं।

  • विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में चार ठिकानों पर छापेमारी, सोना-चांदी और फ्लैट जब्त..

    विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में चार ठिकानों पर छापेमारी, सोना-चांदी और फ्लैट जब्त..


    नई दिल्ली:विजयवाड़ा/आंध्र प्रदेश में सरकारी अफसर की करोड़ों की संपत्ति का खुलासा होते ही प्रशासनिक और कानून व्यवस्था के हलकों में हड़कंप मच गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने एंडोमेंट्स विभाग की सहायक आयुक्त कलिंगीरी शांति को आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में गिरफ्तार किया। जांच में उनके खिलाफ स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद 7 अप्रैल को विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम में एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में चल और अचल संपत्तियां जब्त की गईं।

    एसीबी की टीम ने अभियुक्त के आवास, उनकी मां की गारमेंट शॉप, बहन का घर और विशाखापत्तनम में स्थित अन्य संपत्ति पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान अधिकारियों को कई अहम दस्तावेज और संपत्ति का ब्यौरा मिला। जांच में विशाखापत्तनम में एक रिहायशी फ्लैट, विजयवाड़ा में जी+2 इमारत, लगभग 770 ग्राम सोने के आभूषण, 3 किलो चांदी, 1.15 लाख रुपये नकद और करीब 3 लाख रुपये बैंक जमा में पाए गए। इसके अलावा एक वोल्क्सवैगन पोलो कार, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अन्य कीमती सामान भी जब्त किए गए।

    कलिंगीरी शांति को जुलाई 2024 से मार्च 2026 तक निलंबित रखा गया था। उन्होंने वर्ष 2020 में आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती प्राप्त की थी और विशाखापत्तनम तथा विजयवाड़ा में अपनी सेवाएं दी थीं। छापेमारी के समय वह नई पोस्टिंग का इंतजार कर रही थीं।

    एसीबी ने कलिंगीरी शांति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(b) के तहत मामला दर्ज किया है, जो लोक सेवकों के पास आय से अधिक संपत्ति पाए जाने से संबंधित है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विजयवाड़ा स्थित विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से 21 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में उन्हें जिला जेल में स्थानांतरित किया गया।

    अधिकारियों ने बताया कि जब्त संपत्तियों का मूल्यांकन और तलाशी अभी जारी है और जांच बढ़ने के साथ संपत्तियों की कुल कीमत में वृद्धि की संभावना है। यह कार्रवाई राज्य में भ्रष्टाचार पर कड़ी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही के संकेत के रूप में देखी जा रही है।

  • आंध्र प्रदेश में भीषण हादसा: पटाखा फैक्ट्री में धमाके से दहल उठा काकीनाडा, 20 की मौत, दूर-दूर तक बिखरे शव

    आंध्र प्रदेश में भीषण हादसा: पटाखा फैक्ट्री में धमाके से दहल उठा काकीनाडा, 20 की मौत, दूर-दूर तक बिखरे शव


    नई दिल्ली । काकीनाडा, आंध्र प्रदेश: शनिवार की दोपहर आंध्र प्रदेश का काकीनाडा जिला एक ऐसे हृदयविदारक हादसे का गवाह बना, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जिले के वेटलापलेम गांव स्थित एक पटाखा निर्माण इकाई में हुए भीषण विस्फोट ने हंसते खेलते परिवारों की खुशियां पल भर में मातम में बदल दीं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 6 अन्य कर्मचारी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

    धमाका दोपहर करीब 2 बजे उस वक्त हुआ जब फैक्ट्री के भीतर 20 से अधिक कर्मचारी अपने काम में मशगूल थे। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी गूंज 5 किलोमीटर के दायरे में सुनाई दी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की धरती डोल गई और आसमान में धुएं का गुबार छा गया। जैसे ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे, वहां का मंजर किसी डरावने सपने जैसा था। फैक्ट्री का ढांचा पूरी तरह जमींदोज हो चुका था और चारों ओर चीख पुकार मची थी।

    पुलिस और चश्मदीदों ने बताया कि धमाके के दबाव के कारण कर्मचारियों के शव पास के धान के खेतों में जाकर गिरे। हरे भरे खेतों के बीच बिखरे हुए अंग और जली हुई लाशें सुरक्षा मानकों की अनदेखी की भयावह कहानी बयां कर रही थीं। स्थिति इतनी विकट थी कि स्थानीय लोगों को शवों को इकट्ठा करने के लिए ‘बाराकालू’ खाद की बोरियों से बनी चादरें का सहारा लेना पड़ा। पुलिस प्रशासन ने खेतों में दूर तक छिटके शरीर के हिस्सों को खोजने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद ली है, ताकि शिनाख्त की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    काकीनाडा सरकारी अस्पताल के सुपरिटेंडेंट के अनुसार, अस्पताल लाए गए घायल 90 से 100 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं, जिससे उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उन्हें बचाने का भरसक प्रयास कर रही है, लेकिन गृह मंत्री वंगालपुडी अनीता ने आशंका जताई है कि हताहतों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।

    मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने तत्काल संबंधित मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचने और राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैक्ट्री के पास आवश्यक लाइसेंस थे या नहीं और वहां सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। फिलहाल, पूरा गांव शोक में डूबा है और अपनों को खोने वाले परिवारों का रो रोकर बुरा हाल है।

  • 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..

    16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..


    नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बताया कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि किस तरह का कंटेंट उनके संपर्क में आ रहा है। ऐसे में मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।

    सरकार का यह कदम ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून से प्रेरित है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok X (ट्विटर) फेसबुक इंस्टाग्राम यूट्यूब और स्नैपचैट जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह लागू होता है तो यह भारत का पहला राज्य होगा जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा।

    तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और विशेषकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है।दीपक रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम को सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य केवल बच्चों को जहरीले कंटेंट ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।

    आंध्र प्रदेश सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम ऐतिहासिक साबित हो सकता है। अगर इसे लागू किया गया तो राज्य के छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह नियंत्रित होगा और उन्हें मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरे से बचाने और उनके स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल युग में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    ससुराल वालों ने जमाई राजा का भव्य स्वागत किया, 1374 व्यंजन और 12 तोहफों के साथ वीडियो वायरल

    नई दिल्ली। भारत में दामाद का पहली बार ससुराल आना हमेशा एक उत्सव जैसा माना जाता है। पूरे परिवार को जमाई के स्वागत की तैयारी में जुटा देखा जा सकता है। लेकिन आंध्र प्रदेश के कोनसीमा जिले के एक गांव में हाल ही में हुई तैयारियां अपनी हदें पार कर गईं। यहां एक परिवार ने अपनी बेटी कीर्तिश्री और दामाद बोड्डू साई शरथ के पहले ससुराल आगमन पर 1374 व्यंजन तैयार किए। यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार था बल्कि सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया।परिवार ने मकर संक्रांति के अवसर पर इस आयोजन की योजना बनाई। पूरे कार्यक्रम को पारंपरिक और भव्य तरीके से सजाया गया। स्वागत स्थल पर सजे बोर्ड और संदेशों ने इसे और व्यक्तिगत और भावनात्मक रूप दिया। यह आयोजन गोदावरी डेल्टा की समृद्ध भोजन संस्कृति को भी दर्शाता है जो अपने उदार भोजन और त्योहारों की रसोई के लिए मशहूर है।

    सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में नवविवाहित जोड़े को भोजन के बीच बैठे हुए देखा जा सकता है। कैमरा धीरे-धीरे टेबलों पर सजी व्यंजन कतारों पर घूमता है। इस विशाल भोज में बिरयानी बर्गर तले हुए स्नैक्स छाछ ताजे जूस मिठाइयां फल और घर के बने नाश्ते शामिल थे। कुछ खास डिशेज आसपास के अलग-अलग इलाकों से मंगाई गई थीं।भोजन के अलावा परिवार ने 12 तोहफे भी दिए जो साल के 12 महीनों का प्रतीक थे। इन तोहफों के जरिए नवदंपति के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई। इस भव्य आयोजन ने दामाद और बेटी को खास महसूस कराना सुनिश्चित किया।

    जैसे ही वीडियो वायरल हुआ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। एक यूजर ने लिखा इसका क्या फायदा… कम से कम कुछ मिठाइयां गरीब बच्चों में बांट देते। दूसरे ने टिप्पणी की मैं देखना चाहता हूं कि वो इतना सब कैसे खत्म करेगा। कुछ ने इसे दहेज और दिखावे से जोड़कर भी देखा। एक यूजर ने लिखा गोदावरी जिलों में हर साल ऐसा दिखावा आम है। समझ नहीं आता समाज को क्या संदेश देते हैं। वहीं एक अन्य ने कहा काश बहुओं को भी कभी ऐसा सम्मान मिले।यह आयोजन न केवल परिवार के लिए यादगार रहा बल्कि सोशल मीडिया पर इसे देखकर लोग इसकी भव्यता और अलग अंदाज की तारीफ कर रहे हैं। 1374 व्यंजन और 12 प्रतीकात्मक तोहफों के साथ इस स्वागत का वीडियो आने वाले समय में और भी चर्चा में रहेगा।

  • आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अयोध्या में किए श्रीरामलला के दर्शन

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अयोध्या में किए श्रीरामलला के दर्शन

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को रामजन्मभूमि में दर्शन पूजन कर श्रीरामलला का आशीर्वाद लिया। उन्होंने मन्दिर की यज्ञशाला के अनुष्ठान में भाग लिया और श्रीराम लला का दर्शन पूजन करने के साथ ही उन्होंने सम्पूर्ण निर्माण को उत्सुकता से निहारा।

    मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने जगतगुरु माधवाचार्य का भी आशीर्वाद लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज मुझे अयोध्या के दिव्य और भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन और प्रार्थना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यहां एक बार फिर आना मेरे लिए शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी अनुभव रहा।

    भगवान श्रीराम के मूल्य और आदर्श हम सभी के लिए शाश्वत शिक्षा हैं। ईश्वर करे कि वे हमें सदा मार्गदर्शन और प्रेरणा देते रहें। राम जन्मभूमि में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महामंत्री चम्पत राय ने मुख्यमंत्री का स्वागत कर निर्माण की बारीकियों को बताया। इस अवसर पर ट्रस्ट सदस्य डाॅ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही उपस्थित रहे। इसके बाद मुख्यमंत्री आंध्र प्रदेश वापस लौट गए।