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  • स्क्रिप्ट की डिमांड नहीं थी काला चश्मा! सलमान खान की एक परेशानी ने बदल दिया ‘रेडी’ का पूरा सीन, जानें अनसुना किस्सा

    स्क्रिप्ट की डिमांड नहीं थी काला चश्मा! सलमान खान की एक परेशानी ने बदल दिया ‘रेडी’ का पूरा सीन, जानें अनसुना किस्सा


    नई दिल्ली । साल 2011 में रिलीज हुई सलमान खान और असिन की सुपरहिट फिल्म रेडी ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया था। फिल्म की कहानी से लेकर इसके कॉमेडी सीन्स और दमदार स्टारकास्ट तक ने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। सलमान खान के साथ परेश रावल, महेश मांजरेकर, मनोज जोशी, शरत सक्सेना और कई कलाकारों ने फिल्म में शानदार काम किया था। रेडी के कई सीन आज भी लोगों को हंसाते हैं, लेकिन फिल्म का एक ऐसा सीन है जिसमें सलमान खान समेत पूरी कास्ट काला चश्मा लगाए नजर आती है। देखने में यह किसी खास कहानी या स्क्रिप्ट की जरूरत जैसा लगता है, लेकिन इसके पीछे की असली वजह बेहद दिलचस्प है।

    दरअसल रेडी की शूटिंग साल 2010 में श्रीलंका में चल रही थी। वहां फिल्म के लिए बड़ा सेट तैयार किया गया था और एक अहम सीन की शूटिंग होने वाली थी। सेट पर सलमान खान समेत फिल्म की बड़ी स्टारकास्ट मौजूद थी और लगभग सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। तभी शूटिंग शुरू होने से पहले सलमान खान ने निर्देशक अनीस बज्मी को बताया कि उनकी आंख में इन्फेक्शन हो गया है। इस वजह से उनकी आंख की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह सामान्य तरीके से कैमरे के सामने सीन शूट कर सकें।

    यह सुनकर अनीस बज्मी के सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई। सीन में सिर्फ सलमान खान नहीं बल्कि कई बड़े कलाकार शामिल थे। सेट तैयार था और शूटिंग को रोकने या कैंसिल करने का मतलब पूरी योजना में बदलाव करना था। इतने बड़े सेट और पूरी स्टारकास्ट के साथ शूटिंग टालना आसान नहीं था। ऐसे में निर्देशक ने इस समस्या का ऐसा समाधान निकाला जिसने मजबूरी को फिल्म के एक यादगार और मजेदार सीन में बदल दिया।

    अनीस बज्मी ने फैसला किया कि सलमान खान को काला चश्मा पहना दिया जाए ताकि उनकी आंख का इन्फेक्शन कैमरे में नजर न आए। लेकिन यहां एक नई समस्या सामने आ गई। फिल्म में सलमान के किरदार प्रेम का लुक पहले से अलग तरह का था और अचानक सिर्फ उन्हें काला चश्मा पहनाना कहानी में अजीब लग सकता था। तब निर्देशक ने इस मजबूरी को पूरी तरह कहानी का हिस्सा बनाने का फैसला किया।

    इसके बाद सिर्फ सलमान ही नहीं बल्कि सीन में मौजूद पूरी कास्ट को काला चश्मा पहना दिया गया। लेकिन दर्शकों के मन में यह सवाल न उठे कि आखिर सभी लोग अचानक काला चश्मा क्यों लगाए हुए हैं, इसके लिए एक खास डायलॉग भी तैयार किया गया। फिल्म के सीन में सलमान का किरदार प्रेम सभी को काला चश्मा पहनाता है। जब उनसे इसका कारण पूछा जाता है तो प्रेम अपनी मजेदार कहानी और KK मोदी की शर्तों का हवाला देते हुए कहता है कि ऐसी बातें सामने आई हैं जिनके बाद कोई किसी से नजरें नहीं मिला पाएगा। इसी वजह से सभी को काला चश्मा पहनाया गया है।

    यही वह शानदार रचनात्मकता थी जिसने शूटिंग की एक बड़ी परेशानी को पर्दे पर पूरी तरह स्वाभाविक बना दिया। शायद यही कारण है कि फिल्म देखने वाले ज्यादातर दर्शकों को कभी एहसास ही नहीं हुआ कि काला चश्मा पहनने वाला यह पूरा सीन किसी पहले से तय स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था। सलमान खान की आंख के इन्फेक्शन से पैदा हुई मजबूरी को अनीस बज्मी ने अपने अनुभव और तुरंत सोचने की क्षमता से ऐसा रूप दिया कि वह फिल्म का यादगार हिस्सा बन गया।

    रेडी का यह किस्सा यह भी साबित करता है कि फिल्मों की दुनिया में कई बार सबसे यादगार दृश्य पूरी योजना से नहीं बल्कि अचानक सामने आई मुश्किलों से पैदा होते हैं। सलमान की आंख का इन्फेक्शन उस दिन शूटिंग के लिए बड़ी समस्या बन सकता था, लेकिन निर्देशक के एक शानदार आइडिया ने इसे फिल्म की कहानी में इस तरह पिरो दिया कि दर्शकों को आज तक इसके पीछे छिपी असली वजह का अंदाजा नहीं हुआ।

  • दिव्या भारती की अधूरी फिल्म बनी श्रीदेवी के करियर की बड़ी हिट, जानिए 'लाड़ला' की अनसुनी कहानी

    दिव्या भारती की अधूरी फिल्म बनी श्रीदेवी के करियर की बड़ी हिट, जानिए 'लाड़ला' की अनसुनी कहानी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसी फिल्में हैं जिनकी कहानी जितनी दिलचस्प रही उतनी ही भावुक उनकी मेकिंग भी रही। साल 1994 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म लाड़ला भी ऐसी ही फिल्मों में शामिल है जिसकी शूटिंग के दौरान एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने पूरी टीम को झकझोर कर रख दिया। फिल्म के क्लाइमेक्स से पहले ही इसकी मूल नायिका दिव्या भारती का निधन हो गया और निर्माताओं को लगभग पूरी फिल्म दोबारा शूट करनी पड़ी। इसके बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफल रही और उस दौर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल हो गई।

    फिल्म लाड़ला में आखिरकार श्रीदेवी अनिल कपूर और रवीना टंडन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए लेकिन शुरुआत में श्रीदेवी इस फिल्म का हिस्सा नहीं थीं। निर्माता और निर्देशक ने इस किरदार के लिए दिव्या भारती को चुना था। दिव्या उस समय बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार थीं और लगातार सुपरहिट फिल्में दे रही थीं। उनके साथ फिल्म की लगभग 90 से 95 प्रतिशत शूटिंग पूरी भी हो चुकी थी।

    फिल्म के लेखक अनीस बज्मी ने हाल ही में एक बातचीत में उस दौर की यादें साझा करते हुए बताया कि पूरी यूनिट दिव्या भारती के निधन से गहरे सदमे में थी। उन्होंने कहा कि फिल्म लगभग पूरी हो चुकी थी और सिर्फ क्लाइमेक्स सहित कुछ हिस्सों की शूटिंग बाकी थी। लेकिन अचानक दिव्या की मौत ने सब कुछ बदल दिया। पूरी टीम को समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या किया जाए। हादसे के बाद करीब दो महीने तक फिल्म पर कोई काम नहीं हुआ क्योंकि सभी लोग मानसिक रूप से टूट चुके थे।

    अनीस बज्मी ने बताया कि आखिरकार निर्माताओं ने फैसला किया कि फिल्म को नए सिरे से शूट किया जाएगा। इसके बाद श्रीदेवी को इस भूमिका के लिए चुना गया। श्रीदेवी ने फिल्म में शानदार अभिनय किया और पूरी फिल्म दोबारा शूट की गई। यह निर्णय आसान नहीं था क्योंकि पहले से शूट हो चुका अधिकांश हिस्सा दोबारा फिल्माना पड़ा जिससे समय और लागत दोनों में भारी बढ़ोतरी हुई।

    अनीस बज्मी ने दिव्या भारती के आखिरी शूट का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि चेन्नई में फिल्म की शूटिंग चल रही थी और दिव्या ने अपनी मौत से एक दिन पहले एक भावनात्मक दृश्य फिल्माया था। उस दृश्य में उनका किरदार कैमरे से दूर जाता है और एक नकाबपोश व्यक्ति उन्हें खींचकर ले जाता है। उस दौरान उनका आखिरी संवाद था मुझे बचाओ। अगले ही दिन दिव्या भारती के निधन की खबर ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को स्तब्ध कर दिया।

    दिलचस्प बात यह है कि केवल लाड़ला ही नहीं बल्कि फिल्म अंगरक्षक भी दिव्या भारती की मौत के बाद दोबारा शूट करनी पड़ी थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनके असमय निधन ने बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों और निर्माताओं को कितना प्रभावित किया था।

    सभी मुश्किलों के बावजूद लाड़ला 1994 में रिलीज हुई और दर्शकों ने इसे भरपूर प्यार दिया। श्रीदेवी और अनिल कपूर की जोड़ी को खूब सराहा गया जबकि फिल्म के संवाद गीत और दमदार कहानी ने इसे बड़ी सफलता दिलाई। आज भी लाड़ला सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं बल्कि बॉलीवुड के सबसे भावुक और यादगार फिल्मी सफरों में से एक मानी जाती है जहां एक दर्दनाक हादसे के बाद भी पूरी टीम ने हिम्मत नहीं हारी और एक यादगार फिल्म दर्शकों तक पहुंचाई।