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  • दमोह के हटा आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की सब्जी में निकली इल्ली, परिजनों ने शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की

    दमोह के हटा आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों की सब्जी में निकली इल्ली, परिजनों ने शिकायत कर जांच और कार्रवाई की मांग की

    मध्य प्रदेश: के दमोह जिले के हटा विकासखंड में बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चंडी जी वार्ड स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र में सोमवार को बच्चों के लिए तैयार की गई आलू की सब्जी में कीड़े मिलने का मामला सामने आया। घटना के बाद बच्चों को दिया जाने वाला खाना वापस भेज दिया गया।

    बताया गया कि सोमवार दोपहर जब बच्चों के परिजन उन्हें लेकर आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचे, उसी दौरान भोजन की जांच करने पर सब्जी में कीड़े दिखाई दिए। बच्चों की माताओं ने तत्काल आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई और मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की मांग की।

    बच्चे को केंद्र लेकर पहुंचीं दीपा प्रजापति ने बताया कि उनका बच्चा नियमित रूप से आंगनवाड़ी केंद्र आता है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता को लेकर असंतोष जताते हुए कहा कि बच्चों को साफ और अच्छा खाना मिलना जरूरी है। सोमवार को आलू की सब्जी में इल्ली मिलने के बाद उन्होंने चिंता जताई कि यदि बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन नहीं मिलेगा तो उनके स्वास्थ्य और विकास पर इसका क्या असर पड़ेगा।

    दीपा ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों को पोषण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही बच्चों के अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन जाती है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    एक अन्य महिला अनीता प्रजापति ने भी भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत की। उनका कहना है कि इस तरह की समस्या पहली बार सामने नहीं आई है। उन्होंने दावा किया कि पहले भी आंगनवाड़ी केंद्र में दिए जाने वाले भोजन में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आ चुकी है। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की।

    मामला सामने आने के बाद केंद्र में बच्चों को दिया जाने वाला भोजन वापस भेज दिया गया। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने से पहले उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता की जांच किस स्तर पर की जाती है। छोटे बच्चों के लिए तैयार भोजन में किसी तरह की गड़बड़ी स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर हो सकती है।

    जानकारी के मुताबिक, संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र में भोजन मां लक्ष्मी स्वसहायता समूह की ओर से उपलब्ध कराया जाता है। भोजन तैयार करने और केंद्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया में गुणवत्ता तथा स्वच्छता के मानकों का पालन होना जरूरी है। हालांकि, इस मामले में कीड़े भोजन में किस स्तर पर पहुंचे और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    हटा के एसडीएम राकेश कुसरे ने मामले की जानकारी लेकर जांच कराने की बात कही है। उन्होंने बताया कि उस समय वह बैठक में थे और पूरी जानकारी प्राप्त करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की जांच के बाद ही यह सामने आएगा कि भोजन की गुणवत्ता में लापरवाही किस स्तर पर हुई।

    घटना के बाद बच्चों के अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों के लिए भोजन की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। अब परिजनों को प्रशासन की जांच और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार है।

  • आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    मध्यप्रदेश: में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने टेक होम राशन व्यवस्था में बदलाव किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग ने अगस्त के पहले सप्ताह से नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किया गया टेक होम राशन पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार का जोर पोषण व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने के साथ महिलाओं और बच्चों को नियमित पोषण सहायता उपलब्ध कराने पर है।

    पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत पात्र हितग्राहियों को वर्ष में कम से कम 300 दिन पूरक पोषण सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन नाश्ता और गर्म पका भोजन दिया जा रहा है। वहीं छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती तथा धात्री माताओं के लिए मंगलवार को गर्म पका भोजन और शेष दिनों में टेक होम राशन उपलब्ध कराया जाता है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्थानीय स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार टेक होम राशन का वितरण शुरू किया गया है।

    इस बदलाव से पोषण आहार की उपलब्धता को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय समूहों के माध्यम से तैयार होने वाले राशन से आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े हितग्राहियों को निर्धारित पोषण सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है। छह से 60 माह के अति गंभीर कुपोषित बच्चों और छह से 72 माह के अति कम वजन वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में भी स्थानीय स्तर पर तैयार टेक होम राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर उनका वजन और लंबाई या ऊंचाई मापी जाती है। इन आंकड़ों को पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जाता है, जिससे बच्चों की पोषण स्थिति पर नजर रखी जा सके। चिन्हित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श और आवश्यक देखभाल के साथ जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग तथा पोषण पुनर्वास केंद्रों से समन्वय कर रेफरल की कार्रवाई की जाती है।

    हर महीने आयोजित दस दिवसीय शारीरिक माप दिवसों में जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की जाती है। कुपोषण की स्थिति वाले चिन्हित बच्चों का आवश्यक कार्यक्रमों के तहत पंजीयन कर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाता है। मैदानी अमले द्वारा गृहभेंट के माध्यम से बच्चों की स्थिति का फॉलोअप करने के साथ परिवारों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया जाता है।

    विशेष जनजातीय क्षेत्रों में भी बच्चों और माताओं तक पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 681 नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू किया गया है। सहरिया, बैगा और भारिया जैसे विशेष जनजातीय समूहों के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी सेवाओं, पूरक पोषण आहार और बच्चों की वृद्धि तथा पोषण स्थिति की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय से नियमित स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य जांच, रेफरल और फॉलोअप की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। नई टेक होम राशन व्यवस्था के जरिए पोषण सेवाओं को अधिक स्थानीय और सतत बनाने की कोशिश की गई है। अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू हुई यह व्यवस्था बच्चों और माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भूमिका बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।