Tag: Angarak Yog

  • होली से पहले 8 दिन उग्र ग्रहों का प्रभाव, जानें किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी

    होली से पहले 8 दिन उग्र ग्रहों का प्रभाव, जानें किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी


    नई दिल्ली:होलाष्टक 2026 की शुरुआत सोमवार से हो गई है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार होली से पूर्व आने वाले ये आठ दिन विशेष ज्योतिषीय महत्व रखते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में नवग्रहों की स्थिति उग्र रहती है, जिसके कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों को स्थगित करने की परंपरा रही है।

    इस वर्ष राहु और मंगल की युति से बन रहा अंगारक योग होलाष्टक के प्रभाव को और संवेदनशील बना रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अष्टमी से पूर्णिमा तक अलग-अलग तिथियों में चंद्रमा, सूर्य, शनि, गुरु, बुध, शुक्र, मंगल और राहु क्रमशः प्रतिकूल प्रभाव में माने जाते हैं। यही कारण है कि इस समय को संयम, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक साधना का काल कहा गया है।

    इन 5 राशियों पर विशेष प्रभाव
    ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष मिथुन, कर्क, सिंह, कुंभ और मीन राशि के जातकों पर होलाष्टक का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखा जा सकता है।

    मिथुन राशि के लिए आर्थिक अस्थिरता और मानसिक भ्रम की स्थिति बन सकती है। निवेश और बड़े वित्तीय निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    कर्क राशि के जातकों को वाहन चलाते समय सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है। स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में भी धैर्य रखने की सलाह है।

    सिंह राशि वालों के लिए पारिवारिक संबंधों में तनाव की संभावना जताई गई है, विशेषकर पिता या वरिष्ठ सदस्यों से मतभेद हो सकते हैं।

    कुंभ राशि में राहु और मंगल की युति से बना अंगारक योग करियर और निजी जीवन में दबाव की स्थिति ला सकता है। कार्यस्थल पर विवाद से बचने और संयमित व्यवहार रखने की सलाह दी गई है।

    मीन राशि के जातकों को निर्णय लेने में असमंजस और मानसिक अस्थिरता का अनुभव हो सकता है। इस दौरान जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम न उठाने की सलाह दी गई है।

    शुभ कार्यों पर पारंपरिक विराम
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों को टालना चाहिए। हालांकि दैनिक पूजा, जप, दान और साधना को सकारात्मक माना गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह अवधि आत्ममंथन और आध्यात्मिक उन्नति का समय है। शिव स्तुति, सूर्य उपासना, हनुमान चालीसा का पाठ और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना इस समय शुभ फलदायी माना जाता है।

    आध्यात्मिक संदेश
    होलाष्टक को केवल अशुभ समय के रूप में देखने के बजाय इसे आत्मचिंतन और आत्मसंयम के अवसर के रूप में भी देखा जाता है। संयमित जीवन, सकारात्मक सोच और धैर्य के साथ यह अवधि भी शुभ परिणाम दे सकती है।

  • फरवरी में राहु–मंगल की युति से बनेगा अंगारक योग, मेष तुला और कुंभ के लिए बढ़ेगी चुनौती..

    फरवरी में राहु–मंगल की युति से बनेगा अंगारक योग, मेष तुला और कुंभ के लिए बढ़ेगी चुनौती..


    नई दिल्ली। फरवरी महीने में ग्रहों की चाल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा जिसका असर ज्योतिषीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है इस दौरान राहु और मंगल एक ही राशि में आकर युति बनाएंगे जिससे एक उग्र और अशुभ अंगारक योग का निर्माण होगा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह योग जल्दबाजी गुस्सा मानसिक तनाव और अप्रत्याशित घटनाओं की संभावना को बढ़ाता है

    ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक 23 फरवरी को मंगल का गोचर कुंभ राशि में होगा जहां पहले से ही राहु विराजमान हैं इन दोनों ग्रहों की युति सामान्य तौर पर अशांति टकराव और गलत निर्णयों को जन्म देती है ऐसे में यह समय कई राशियों के लिए धैर्य और संयम की परीक्षा लेने वाला साबित हो सकता है

    मेष राशि के जातकों के लिए यह योग विशेष सावधानी का संकेत दे रहा है कार्यक्षेत्र में रुकावटें आ सकती हैं अधूरे कामों में देरी होगी और अचानक खर्च बढ़ सकता है सहकर्मियों या अधिकारियों से विवाद की स्थिति बन सकती है इस दौरान वाहन चलाते समय खास सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है क्योंकि जल्दबाजी दुर्घटना का कारण बन सकती है

    तुला राशि वालों के लिए यह समय मानसिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है अनावश्यक चिंता नींद की कमी और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है पारिवारिक रिश्तों में गलतफहमी उत्पन्न हो सकती है व्यापार या निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है इसलिए सोच समझकर कदम उठाना जरूरी होगा

    कुंभ राशि के जातकों पर इस योग का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक बताया जा रहा है क्योंकि यह योग इसी राशि में बन रहा है आर्थिक मामलों में लापरवाही भारी पड़ सकती है लेनदेन दस्तावेजों और नए समझौतों में विशेष सावधानी की जरूरत होगी घर और कार्यस्थल पर छोटी छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ सकता है इसलिए संयमित व्यवहार अपनाना लाभकारी रहेगाज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसे अशुभ योग के दौरान घबराने की बजाय संतुलित दिनचर्या अपनाना सबसे बेहतर उपाय माना जाता है नियमित पूजा पाठ ध्यान और सकारात्मक सोच से मानसिक स्थिरता बनी रहती है साथ ही इस दौरान जोखिम भरे फैसलों अनावश्यक बहस और क्रोध से दूरी बनाकर रखना चाहिए

    विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रह योग भविष्य के प्रति चेतावनी देते हैं न कि निश्चित संकट समय रहते सतर्कता आत्मनियंत्रण और समझदारी अपनाकर नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है फरवरी में बनने वाला यह अंगारक योग भी यही संदेश देता है कि धैर्य और विवेक से परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ा जा सकता है