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  • अनिल अंबानी पर ED का शिकंजा, RHFL–RCFL लोन घोटाले में दो पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

    अनिल अंबानी पर ED का शिकंजा, RHFL–RCFL लोन घोटाले में दो पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

    नई दिल्ली । प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी से जुड़े मामलों में कार्रवाई तेज करते हुए रिलायंस समूह के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को गिरफ्तार किया है। ये दोनों लंबे समय से अनिल अंबानी के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।

    लोन धोखाधड़ी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग जांच
    यह कार्रवाई रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े कथित लोन धोखाधड़ी और धनशोधन मामले में की गई है। एजेंसी का आरोप है कि फर्जी या मुखौटा कंपनियों के जरिए बैंक ऋण का दुरुपयोग किया गया।

    अमिताभ झुनझुनवाला हिरासत में
    अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के बाद अमिताभ झुनझुनवाला को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश कर आगे की विस्तृत पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की गई। बता दें कि झुनझुनवाला मार्च 2003 से सितंबर 2019 तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के निदेशक रहे हैं, जो RHFL और RCFL की होल्डिंग कंपनी है। जांच एजेंसियां इस अवधि में हुए वित्तीय लेनदेन और फैसलों की भी पड़ताल कर रही हैं।

    इससे पहले CBI ने भी अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप है कि फर्जी वित्तीय प्रस्तुतियों और फंड हेराफेरी के जरिए LIC को करीब 3,750 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। जांच में फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट को आधार बनाया गया है।

  • पीएनबी के 1085 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में अनिल अंबानी पर सीबीआई ने दर्ज किया नया मामला

    पीएनबी के 1085 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में अनिल अंबानी पर सीबीआई ने दर्ज किया नया मामला


    नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत के आधार पर उद्योगपति अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के कुछ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ 1085 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले को लेकर नया मामला दर्ज किया है। यह मामला धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़ा बताया गया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य प्रबंधक संतोषकृष्ण अन्नावरपु की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर की गई। दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2013 से 2017 के दौरान अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के तत्कालीन अधिकारियों ने बैंक से लिया गया लगभग 1085 करोड़ रुपये का ऋण नियमों के विपरीत तरीके से इस्तेमाल किया।

    बैंक का कहना है कि कंपनी ने यह ऋण वापस करने की स्पष्ट मंशा के बिना लिया था और प्राप्त धनराशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किया गया। बैंक के अनुसार यह कृत्य धोखाधड़ी और विश्वास के आपराधिक उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

    प्राथमिकी में अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो अब इस मामले में धन के उपयोग, संभावित वित्तीय हेरफेर और लेन-देन से जुड़ी कड़ियों की विस्तृत जांच करेगी।

  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त

    मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त


    मुम्बई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून (Anti-Money Laundering Laws – PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने अनिल अंबानी (Anil Ambani) के मुंबई स्थित घर ‘अबोड’ को जब्त कर लिया है। जब्त घर की कीमत 3,716 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ईडी के अनुसार, अनिल अंबानी और उनके ग्रप की कंपनियों के खिलाफ अब तक कुल अटैचमेंट की कार्रवाई 15000 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बता दें कि 23 फरवरी को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल न्यायाधीश पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी।

    यह आदेश मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए अंखड की खंडपीठ ने बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और ऑडिटर बीडीओ इंडिया एलएलपी की याचिका पर पारित किया। पीठ ने ‘उल्टे’ और ‘गैर-कानूनी’ अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया और अंबानी की इसके अभियान पर रोक लगाने के निवेदन को भी ठुकरा दिया।

    पीठ ने कहा, “जैसा कि हम पहले ही सुन चुके हैं कि 24 दिसंबर, 2025 का अंतरिम फैसला गैर-कानूनी है और इस प्रक्रिया में गड़बड़ी है इसलिए अगले कुछ सप्ताह के लिए इस आदेश के लागू होने पर रोक लगाने का निवेदन गैर-कानूनी आदेश को जारी रखने और गैर-कानूनी काम को जारी रखने के बराबर होगी। इसलिए अनिल अंबानी की तरफ से इस फैसले के लागू होने पर रोक लगाने के निवेदन को खारिज किया जाता है।”

    दिसंबर 2025 में जब अनिल अंबानी के खिलाफ मामला विचाराधीन था, न्यायमूर्ति मिलिंद एन जाधव की एकल न्यायाधीश पीठ ने उनको कुछ समय के लिए राहत दी। इस आदेश ने तीनों बैंकों की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी और उन्हें कारण बताओ नोटिस और धोखाधड़ी आदेश पर आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे उन्हें दो-जजों की पीठ के सामने अपील करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

  • शर्म की असली वजह क्या? एपस्टीन फाइल्स और अडानी केस को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा वार

    शर्म की असली वजह क्या? एपस्टीन फाइल्स और अडानी केस को लेकर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा वार


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए सियासी बहस को नई धार दे दी है। एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अर्धनग्न प्रदर्शन को प्रधानमंत्री द्वारा शर्मनाक बताए जाने पर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया और कहा कि असली शर्म प्रदर्शन नहीं बल्कि उन मामलों पर सरकार की चुप्पी है जिनमें गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री उनके एक मंत्री और एक करीबी सहयोगी का नाम सामने आना चिंता का विषय है और यही वास्तव में शर्म की बात है।

    राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा मोदी जी आप शर्म की बात करते हो? शर्म की बात यह है कि एपस्टीन फाइल्स में आपका आपके मंत्री और आपके मित्र का नाम साथ में आ रहा है। ऐसे घिनौने अपराधी के साथ नाम जुड़ना ही शर्मनाक है। उन्होंने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इस समझौते से देश के किसानों टेक्सटाइल उद्योग और डेटा सुरक्षा को नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक सरकार ने देशहित से समझौता किया है और इन मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    राहुल जिस संदर्भ का जिक्र कर रहे हैं उसमें केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी चर्चा में आया था। हालांकि पुरी ने स्पष्ट किया है कि उनके संबंध केवल आधिकारिक और कार्यगत थे। इसी प्रकरण में प्रधानमंत्री मोदी के एक विदेशी दौरे का उल्लेख भी सामने आने की बात कही गई थी जिस पर संसद में पहले भी हंगामा हो चुका है। अब राहुल गांधी ने उसी मुद्दे को फिर से उठाकर सरकार पर नैतिक जवाबदेही का दबाव बनाने की कोशिश की है।

    इसके साथ ही राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी पर अमेरिका में चल रहे मामलों को लेकर भी प्रधानमंत्री को घेरा। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक कारोबारी तक सीमित नहीं है बल्कि सत्ता और पूंजी के रिश्तों से जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने आरोप लगाया कि 14 महीनों से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई जो अपने आप में कई संदेह पैदा करती है। राहुल ने अनिल अंबानी का नाम लेते हुए भी सरकार और बड़े उद्योगपतियों की नजदीकियों पर सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी तथा देशहित के मुद्दों पर आवाज उठाती रहेगी।

    यह पूरा विवाद नई दिल्ली में आयोजित एआई समिट से जुड़ा है जहां कांग्रेस यूथ कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन पर प्रधानमंत्री मोदी ने मेरठ की सभा में कड़ी टिप्पणी की थी। उन्होंने इसे कांग्रेस की गंदी और शर्म वाली राजनीति बताते हुए कहा था कि देश की सबसे पुरानी पार्टी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि खराब कर रही है। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया।

    कांग्रेस के प्रदर्शन की आलोचना केवल सत्तापक्ष तक सीमित नहीं रही। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस तरह की हरकत से देश की छवि धूमिल होती है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाए। इसके बावजूद कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं का समर्थन किया और इसे लोकतांत्रिक विरोध बताया।

    सियासत के इस तीखे दौर में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो चुका है। एक ओर प्रधानमंत्री कांग्रेस की राजनीति को शर्मनाक बता रहे हैं तो दूसरी ओर राहुल गांधी सरकार की नीतियों अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कारोबारी गठजोड़ पर सवाल उठाकर जवाब मांग रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और चुनावी मंचों पर और अधिक गूंजने की संभावना है।

  • अनिल अंबानी ने SC को दिया वचन, बोले- 'ED-CBI जांच के बीच देश नहीं छोड़ूंगा

    अनिल अंबानी ने SC को दिया वचन, बोले- 'ED-CBI जांच के बीच देश नहीं छोड़ूंगा


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications- RCom) और अनिल धीरभाई अंबानी ग्रुप (Anil Dhirubhai Ambani Group-ADAG) से जुड़े ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में एक कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया और साथ ही उद्योगपति अनिल अंबानी ( (Anil Ambani) को एक अहम वचन देने को कहा कि वे बिना अनुमति के भारत नहीं छोड़ेंगे।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ई.ए.एस. सरमा के वकील, प्रशांत भूषण ने चिंता व्यक्त की कि धोखाधड़ी के बड़े पैमाने को देखते हुए मुख्य आरोपी, अनिल अंबानी, देश छोड़कर भाग सकते हैं। इस पर अंबानी के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को आश्वस्त किया कि “मेरे मुवक्किल का देश छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। वे प्रतिदिन अपने कार्यालय जाते हैं और मैं वचन देता हूं कि वे बिना अदालत की अनुमति के विदेश नहीं जाएंगे।”

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अदालत को याद दिलाया कि पहले भी एक वचन दिया गया था, लेकिन वह व्यक्ति अंततः देश से भाग गया था। सरकार ने बताया कि अंबानी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर पहले से जारी है, ताकि उनके विदेश जाने के प्रयास को रोका जा सके।

    मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों द्वारा की गई देरी पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट 2020 में आई थी, लेकिन CBI ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में 2025 तक का समय लिया।

    अदालत ने जांच एजेंसी से निर्देश दिया कि बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत के हर मामले के लिए अलग-अलग FIR दर्ज की जाए। इसके अलावा, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि बैंक अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए कानूनी अनुमति की आवश्यकता नहीं है और यदि कोई अधिकारी धोखाधड़ी या साजिश में शामिल है, तो उसे तुरंत कार्रवाई का सामना करना चाहिए।


    IBC का दुरुपयोग:

    सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) का इस्तेमाल परिसंपत्तियों को कम मूल्य पर खरीदने के लिए किया जा रहा है। प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि RCom पर ₹47,000 करोड़ का बकाया था, लेकिन उसकी संपत्तियां केवल ₹430 करोड़ में (मुकेश अंबानी की कंपनी द्वारा) खरीदी गईं। अदालत ने इसे IBC का दुरुपयोग करार दिया और कहा कि नीलामी प्रक्रिया पूर्व-नियोजित लगती है।


    ईडी का बयान:

    ईडी ने अदालत को सूचित किया कि अब तक 204 संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है, जिनकी कीमत लगभग ₹12,012 करोड़ है। हाल ही में, रिलायंस ग्रुप के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग को गिरफ्तार किया गया है, जो 7 फरवरी तक हिरासत में रहेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की खुद निगरानी करेगा और जांच एजेंसियों को चार सप्ताह के भीतर ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मामले में कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया और जांच एजेंसियों को शीघ्रता से कार्रवाई करने की हिदायत दी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर बैंकिंग घोटाले की जांच में CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी पर बैंकिंग घोटाले की जांच में CBI-ED को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी और उनके ग्रुप पर लगे ₹1.5 लाख करोड़ के कथित बैंकिंग और कॉरपोरेट फ्रॉड के आरोपों को गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन पर सुनवाई के दौरान अदालत ने CBI और प्रवर्तन निदेशालय से कहा कि वे 10 दिन के भीतर सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। यह मामला देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट धोखाधड़ी के आरोपों में से एक माना जा रहा है।याचिका पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. सरमा की ओर से दायर की गई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि 2007-08 से अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप ने सार्वजनिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया और रकम को समूह की अन्य इकाइयों में डायवर्ट किया।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मामले में पहले भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अब बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि नोटिस अनिल अंबानी तक विधिवत पहुंचें। अदालत ने जांच एजेंसियों से अब तक की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा कॉरपोरेट फ्रॉड है। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI और ED की मौजूदा जांच केवल फ्रॉड के सीमित हिस्से तक सीमित है, जबकि बैंकों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं की जा रही। भूषण ने बताया कि लोन अप्रूवल प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स में भी हेरफेर किया गया।

    ED अब तक इस मामले में ₹10,117 करोड़ की संपत्तियां जब्त कर चुकी है। इसमें मुंबई के पाली हिल स्थित अनिल अंबानी का आवास, रिलायंस समूह की कंपनियों के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट और अनलिस्टेड निवेश शामिल हैं। एजेंसी का दावा है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में फंड का गलत इस्तेमाल हुआ जिससे यस बैंक को करीब ₹2,700 करोड़ का नुकसान हुआ।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जांच एजेंसियों की ओर से समय मांगा है। अब सभी की निगाहें 10 दिन बाद दाखिल होने वाली रिपोर्ट पर हैं जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला न केवल कॉर्पोरेट गवर्नेंस बल्कि बैंकिंग निगरानी व्यवस्था पर भी अहम सवाल खड़ा कर रहा है।