Tag: Ankita Bhandari case

  • अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी एंगल को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई अभिनेत्री उर्मिला सनावर का पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती है। इसके लिए अदालत में आवेदन दिया गया है और अब उनकी सहमति की पुष्टि के लिए उन्हें 23 अक्टूबर को देहरादून की अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस मामले में कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों की जांच में कोई नई जानकारी सामने आएगी। हालांकि अभी किसी नए खुलासे की पुष्टि नहीं हुई है और जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई संदीप सिंह भंडारी ने 21 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी किया था। मंगलवार देर शाम सीबीआई की टीम सहारनपुर स्थित उर्मिला सनावर के घर पहुंची और उन्हें अदालत में पेश होने का नोटिस सौंपा। उन्हें 23 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर अदालत में उपस्थित होना है। इस दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि वह पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी इच्छा से सहमति दे रही हैं या नहीं।

    सीबीआई की ओर से इन परीक्षणों की मांग ऐसे समय की गई है जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। उर्मिला सनावर से जुड़े कथित ऑडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। इन ऑडियो के माध्यम से कुछ दावे किए गए थे जिनकी सत्यता और मामले से संबंधित पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि किसी व्यक्ति का नाम कथित आरोपों में सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन जरूरी है।

    सीबीआई इस मामले में पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अदालत से अनुमति चाहती है। पॉलीग्राफ परीक्षण के दौरान व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रियाओं को दर्ज किया जाता है जबकि नार्को परीक्षण में विशेष दवाओं के प्रभाव में पूछताछ की जाती है। इन दोनों प्रक्रियाओं की अपनी सीमाएं हैं और इनके नतीजों को अपने आप में निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। इसलिए जांच एजेंसी को अन्य साक्ष्यों और तथ्यों के साथ इनका मूल्यांकन करना होगा।

    इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि किसी भी परीक्षण के लिए सहमति स्वतंत्र और स्वैच्छिक होनी चाहिए। अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि उर्मिला सनावर की सहमति किसी दबाव धमकी लालच या अनुचित प्रभाव के कारण न हो। रिपोर्ट के अनुसार वह पहले ही परीक्षण कराने के लिए सहमति देने की बात कह चुकी हैं। अब अदालत में उनकी इच्छा की औपचारिक पुष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    अंकिता भंडारी हत्याकांड लंबे समय से उत्तराखंड में संवेदनशील और चर्चित मामला रहा है। कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठते सवालों के कारण इस प्रकरण पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस होती रही है। सीबीआई की जांच और उर्मिला सनावर के प्रस्तावित परीक्षण को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन परीक्षणों से किसी कथित वीआईपी का नाम सामने आएगा या मामले में कोई नया मोड़ आएगा। अब सभी की नजर अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

  • अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में इंडिया गेट पर प्रदर्शन, पवन खेड़ा समेत कई कांग्रेसी हिरासत में

    अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में इंडिया गेट पर प्रदर्शन, पवन खेड़ा समेत कई कांग्रेसी हिरासत में


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर दिल्ली के इंडिया गेट पर चल रहा प्रदर्शन बुधवार देर रात पुलिस कार्रवाई के बाद चर्चा में आ गया। दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और कई अन्य विपक्षी नेताओं व प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। हालांकि, बाद में अंकिता के माता-पिता को रिहा कर दिया गया। प्रदर्शनकारी कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच और परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर रातभर से जुटे हुए थे।

    कांग्रेस नेता और मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन ने आरोप लगाया कि अंकिता के माता-पिता राष्ट्रपति भवन के सामने शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी परिवार से मुलाकात कर उन्हें समर्थन दिया था। इसके बावजूद देर रात पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर जाने लगी।

    काजी निजामुद्दीन ने कहा कि जिस पुलिस को कथित वीआईपी एंगल की जांच करनी चाहिए, वही न्याय की मांग कर रहे अंकिता के माता-पिता को हिरासत में ले रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में अपनी लड़ाई जारी रखेगी। साथ ही दुष्यंत कुमार गौतम के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

    नियुक्ति रद्द होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

    अंकिता के माता-पिता की मांग है कि उनकी बेटी की हत्या के मामले में कथित वीआईपी कनेक्शन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। परिवार का कहना है कि जब तक इस पहलू की सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।

    पुलिस कार्रवाई के दौरान अंकिता की मां ने कहा कि जब तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं होती, वे अपनी मांग पर अडिग रहेंगी। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें धरना देने की अनुमति नहीं मिलती है, तो वे अपने घरों में ही भूख हड़ताल करेंगी।

    वहीं, अंकिता के पिता ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति रद्द करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर देशभर के लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी।

    कांग्रेस नेताओं ने भी आरोप लगाया कि बेटी को न्याय दिलाने की मांग कर रहे परिवार को हिरासत में लिया जा रहा है, जबकि कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच से जुड़े सवाल अब तक बने हुए हैं।

    राहुल और प्रियंका गांधी ने परिवार से की थी मुलाकात

    इससे पहले बुधवार को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पर धरना दे रहे अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने परिवार को ढांढस बंधाया और इस लड़ाई में कांग्रेस के पूर्ण समर्थन का भरोसा दिलाया था।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि चार साल बीत जाने के बाद भी अंकिता के परिवार को न्याय नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक कथित आरोपी को संरक्षण दिया गया और संवैधानिक पद से नवाजा गया। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि अंकिता के माता-पिता न्याय की गुहार लेकर अपने घर से मीलों दूर इंडिया गेट पर बैठे हैं।

    परिवार की मांग है कि मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। इस मुद्दे पर कांग्रेस लगातार सरकार से जवाब मांग रही है।

    क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?

    उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी। बाद में उसका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक और पूर्व भाजपा नेता के बेटे पुलकित आर्य समेत तीन दोषियों को अदालत आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है।

    अदालती कार्रवाई के बावजूद अंकिता का परिवार और विपक्षी दल मामले में कथित वीआईपी संलिप्तता की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे हैं। परिवार का कहना है कि इस पहलू की जांच से ही पूरे मामले से जुड़े बाकी सवालों का जवाब मिल सकेगा।

    दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और अंकिता के माता-पिता की रिहाई के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। अब निगाहें परिवार की आगे की रणनीति और कथित वीआईपी एंगल की जांच को लेकर उठ रही मांगों पर हैं।

  • अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया मोड…. CBI ने 'वीआईपी' पर दर्ज किया केस

    अंकिता भंडारी हत्याकांड में नया मोड…. CBI ने 'वीआईपी' पर दर्ज किया केस


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के बहुचर्चित अंकिता भंडारी (Ankita Bhandari) हत्याकांड में एक नया मोड़ आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) (Central Bureau of Investigation – CBI) ने कथित ‘वीआईपी’ की भूमिका की जांच के लिए दिल्ली स्थित अपनी एससी-2 यूनिट में मामला दर्ज किया है। यह मुकदमा अज्ञात ‘वीआईपी’ पर दर्ज किया गया है, और अब सीबीआई इस हत्याकांड से जुड़ी सभी पुरानी जानकारियों की छानबीन करेगी।

    अंकिता भंडारी के माता-पिता ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की थी। अंकिता के पिता ने साफ तौर पर कहा था कि उनकी बेटी की हत्या एक ‘वीआईपी’ की वजह से हुई, जिसकी पहचान अब तक नहीं हो पाई है। उनके आग्रह पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कथित ‘वीआईपी’ की भूमिका की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद सीबीआई ने पुलिस से इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली और अब एक विशेष टीम देहरादून पहुंच चुकी है।


    सीबीआई का टेकओवर: अब पुलिस से जांच ली अपने हाथ में

    सीबीआई की विशेष टीम ने राज्य पुलिस से केस से जुड़े सभी दस्तावेज और साक्ष्य अपने कब्जे में ले लिए हैं। सीबीआई का मुख्य ध्यान इस समय पुलिस द्वारा की गई जांच और उससे जुड़े तथ्यों, विशेष रूप से कथित ‘वीआईपी’ की पहचान और भूमिका की जांच पर केंद्रित होगा।


    हत्याकांड की टाइमलाइन

    यह मामला 18 सितंबर 2022 को शुरू हुआ, जब ऋषिकेश स्थित वंतारा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम कर रही अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई। लगभग एक सप्ताह बाद, 24 सितंबर 2022 को अंकिता का शव चीला नहर से बरामद हुआ था। इस मामले में रिज़ॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।


    वायरल वीडियो और ऑडियो के बाद मामला फिर सुर्खियों में

    इस मामले ने उस समय और अधिक तूल पकड़ा, जब सोशल मीडिया पर कुछ कथित ऑडियो और वीडियो क्लिप वायरल हो गए। इनमें ज्वालापुर से एक पूर्व भाजपा विधायक की कथित पत्नी उर्मिला सनावर ने एक ‘वीआईपी’ की संलिप्तता का उल्लेख किया था। इसके बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए, और सीबीआई जांच की मांग जोर पकड़ने लगी। वायरल वीडियो और सोशल मीडिया पर बढ़ते दबाव के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी 2026 को इस मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। अब सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने कथित ‘वीआईपी’ के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, और जांच तेज कर दी है।

    अंकिता के माता-पिता इस वक्त सीबीआई से यह उम्मीद लगाए हुए हैं कि जांच में सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी। परिवार का मानना है कि अब जब सीबीआई ने मामले को अपने हाथ में लिया है, तो इस केस में नई दिशा में जांच हो सकती है और तथ्यों की गहराई से छानबीन की जा सकती है। यह जांच इस हत्याकांड के बाकी रहस्यों को उजागर करने और न्याय की उम्मीदों को पंख देने का एक बड़ा कदम हो सकता है।