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  • भोजन से पहले करें इन शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण, शरीर को मिलेगा पूरा पोषण और मन रहेगा शांत

    भोजन से पहले करें इन शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण, शरीर को मिलेगा पूरा पोषण और मन रहेगा शांत

    नई दिल्ली : हिन्दू धर्म में दैनिक दिनचर्या से जुड़े कई नियम बताए गए हैं जो जीवन जीने के तरीके को और सरल व उद्येश्यपूर्ण बनाते हैं. इन्हीं में से एक है भोजन से जुड़े नियम जिसका पालन कर एक व्यक्ति सकारात्मक सोच और स्वस्थ्य शरीर पा सकता है. क्या आप जानते हैं कि हिंदू धर्म में भोजन करने व भोजन करने के बाद के लिए कुछ मंत्र बताए गए हैं जिनका जाप कर हम अन्न और मां अन्नपूर्ण के लिए आभार व्यक्त करते हैं. साथ ही भोजन से जुड़े कुछ नियम भी है जिनका पालन करने से मन शांति रहता है और शारीरिक ऊर्ज संतुलित रहती है. आइए भोजन मंत्र और भोजन करने के लिए नियम जानें.


    भोजन से पहले मंत्र जाप

    भोजन करने से पहले पालथी मारकर बैठें और मां अन्नपूर्णा व सामने रखे भोजन को प्रणाम करें. इसके बाद आभार मंत्र या अन्नपूर्णा मंत्र का पाठ करें. ये मंत्र है-
    पहला भोजन मंत्र
    ॐ सह नाववतु ।
    सह नौ भुनक्तु ।
    सह वीर्यं करवावहै ।
    तेजस्विनावधीतमस्तु ।
    मा विद्‌विषावहै ॥
    ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

    दूसरा भोजन मंत्र
    ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे
    शंकरप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्यर्थम् भिक्षां देहि च पार्वति।
    ॐ सहनाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
    तेजस्विनावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै ॥
    ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥


    तीसरा भोजन मंत्र

    ब्रहमार्पणं ब्रहमहविर्‌ब्रहमाग्नौ ब्रहमणा हुतम्।
    ब्रहमैव तेन गन्तव्यं ब्रहमकर्मसमाधिना ॥
    ॐ सहनाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
    तेजस्विनावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै ॥
    ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥

    खाना खाने के बाद का मंत्र
    इन चारों मंत्र के अलावा कुछ और मंत्र का जाप खाना खाने के बाद करने से भोजन शरीर में लगता है और पाचन क्रिया भी अच्छी रहती है. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को खाए गए भोजन से लाभ होता है. ये मंत्र है-
    पहला मंत्र
    ‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।’
    ‘यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद् भवः।।’

    दूसरा मंत्र

    ‘अगस्त्यम कुम्भकर्णम च शनिं च बडवानलनम।’
    ‘भोजनं परिपाकारथ स्मरेत भीमं च पंचमं ।।’

    भोजन करने के नियम

    भोजन करने से पहले अपने 5 अंगों को 2 हाथ, 2 पैर और मुख को अच्छे धोकर साफ कर लें. तभी भोजन करें.

    भोजन करने से पहले अन्नपूर्णा माता की स्तुति करें और उनका आभार व्यक्त कर धन्यवाद करें. प्रार्थना करें कि ‘सभी भूखों को भोजन मिले’.

    भोजन बनाने वाले व्यक्ति को ध्यान रखना चाहिए कि वो स्नान करके शुद्ध मन से भोजन पकाए.

    रसोई में बनी पहली रोटी गाय को दें और आखिरी दो रोटी, कुत्ते और कौवे के लिए निकालें. इसके बाद अग्निदेव को भी थोड़ा सा अन्न भोग के लिए दें.

    पूरा परिवार भोजन साथ बैठकर ही करें. परिवार के सदस्यों में प्यार और लगाव बना रहेगा. मन में प्रेम और एकता का भाव आएगा.

    सुबह और शाम में ही भोजन करने का नियम है क्योंकि सूर्योदय से 2 घंटे बाद और सूर्यास्त से 2.30 घंटे पहले पाचनक्रिया की जठराग्नि प्रबल रहती है.

    भोजन पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंख करके ही करें. दक्षिण दिशा की ओर किया भोजन प्रेत को जाता है. इस दिशा में किए भोजन से रोग होता है.