Tag: Annapurna

  • अन्न के अनादर से नाराज हो सकती हैं मां अन्नपूर्णा, जानिए भोजन परोसते समय किन वास्तु नियमों का पालन है अनिवार्य।

    अन्न के अनादर से नाराज हो सकती हैं मां अन्नपूर्णा, जानिए भोजन परोसते समय किन वास्तु नियमों का पालन है अनिवार्य।

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में भोजन को केवल शरीर के पोषण का साधन नहीं माना गया है, बल्कि इसे साक्षात अन्नपूर्णा का स्वरूप और अत्यंत पवित्र माना गया है। घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए रसोईघर से लेकर भोजन परोसने तक कई महत्वपूर्ण वास्तु नियम बताए गए हैं। इन्हीं नियमों में से एक बेहद महत्वपूर्ण नियम थाली में रोटी परोसने के सही तरीके से जुड़ा हुआ है। अक्सर लोग जल्दबाजी या अनजाने में किसी व्यक्ति के हाथ में सीधे रोटी थमा देते हैं, जिसे वास्तु के दृष्टिकोण से अत्यंत अशुभ और दोषपूर्ण माना गया है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति चाहे वह परिवार का सदस्य हो, अतिथि हो या कोई याचक, उसके हाथ में सीधे रोटी देना अन्न का अनादर करने के समान है। मान्यता है कि इस प्रकार से भोजन देने से देवी अन्नपूर्णा और माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। हाथ में रोटी देने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धीरे-धीरे परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, ऐसा करने से देने वाले और लेने वाले दोनों के संबंधों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा घर की बरकत समाप्त होने लगती है।

    शास्त्रों में भोजन परोसने की एक निश्चित और मर्यादित प्रक्रिया निर्धारित की गई है। भोजन हमेशा सम्मानपूर्वक साफ-सुथरी थाली या प्लेट में रखकर ही दिया जाना चाहिए। जब भी किसी को रोटी परोसनी हो, तो उसे सीधे हाथ में देने के बजाय प्लेट में ही रखना चाहिए। इसके अलावा, थाली में एक साथ तीन रोटियां परोसना भी वास्तु शास्त्र और हिंदू परंपराओं में वर्जित माना गया है। मान्यता है कि तीन संख्या को शुभ कार्यों में अनुकूल नहीं माना जाता, इसलिए थाली में हमेशा एक, दो या विषम-सम के सही संयोजन में ही रोटियां रखनी चाहिए।

    वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि अन्न का सम्मान सीधे तौर पर व्यक्ति के मानसिक तनाव और घर की सुख-शांति से जुड़ा होता है। जब हम किसी को आदरपूर्वक भोजन कराते हैं, तो उससे सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। इसके विपरीत, अनुचित तरीके से भोजन परोसने पर घर में क्लेश और बीमारियां पनपने लगती हैं। रसोईघर में पहली रोटी गाय के लिए और अंतिम रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा भी इसी सम्मान और वास्तु संतुलन का हिस्सा है, जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं।

    भोजन बनाते समय और परोसते समय मन की पवित्रता भी उतनी ही आवश्यक मानी गई है। वास्तु के अनुसार यदि भोजन बनाते या परोसते समय मन में क्रोध, ईर्ष्या या चिड़चिड़ापन हो, तो उस अन्न का प्रभाव खाने वाले के विचारों पर भी पड़ता है। इसलिए, हाथ में रोटी न देने का नियम केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा वास्तु और व्यावहारिक तर्क छिपा हुआ है। इस छोटे से नियम का पालन करके घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखा जा सकता है।

  • भोजन से पहले करें इन शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण, शरीर को मिलेगा पूरा पोषण और मन रहेगा शांत

    भोजन से पहले करें इन शक्तिशाली मंत्रों का उच्चारण, शरीर को मिलेगा पूरा पोषण और मन रहेगा शांत

    नई दिल्ली : हिन्दू धर्म में दैनिक दिनचर्या से जुड़े कई नियम बताए गए हैं जो जीवन जीने के तरीके को और सरल व उद्येश्यपूर्ण बनाते हैं. इन्हीं में से एक है भोजन से जुड़े नियम जिसका पालन कर एक व्यक्ति सकारात्मक सोच और स्वस्थ्य शरीर पा सकता है. क्या आप जानते हैं कि हिंदू धर्म में भोजन करने व भोजन करने के बाद के लिए कुछ मंत्र बताए गए हैं जिनका जाप कर हम अन्न और मां अन्नपूर्ण के लिए आभार व्यक्त करते हैं. साथ ही भोजन से जुड़े कुछ नियम भी है जिनका पालन करने से मन शांति रहता है और शारीरिक ऊर्ज संतुलित रहती है. आइए भोजन मंत्र और भोजन करने के लिए नियम जानें.


    भोजन से पहले मंत्र जाप

    भोजन करने से पहले पालथी मारकर बैठें और मां अन्नपूर्णा व सामने रखे भोजन को प्रणाम करें. इसके बाद आभार मंत्र या अन्नपूर्णा मंत्र का पाठ करें. ये मंत्र है-
    पहला भोजन मंत्र
    ॐ सह नाववतु ।
    सह नौ भुनक्तु ।
    सह वीर्यं करवावहै ।
    तेजस्विनावधीतमस्तु ।
    मा विद्‌विषावहै ॥
    ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

    दूसरा भोजन मंत्र
    ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे
    शंकरप्राणवल्लभे। ज्ञानवैराग्यसिद्यर्थम् भिक्षां देहि च पार्वति।
    ॐ सहनाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
    तेजस्विनावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै ॥
    ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥


    तीसरा भोजन मंत्र

    ब्रहमार्पणं ब्रहमहविर्‌ब्रहमाग्नौ ब्रहमणा हुतम्।
    ब्रहमैव तेन गन्तव्यं ब्रहमकर्मसमाधिना ॥
    ॐ सहनाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
    तेजस्विनावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै ॥
    ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:: ॥

    खाना खाने के बाद का मंत्र
    इन चारों मंत्र के अलावा कुछ और मंत्र का जाप खाना खाने के बाद करने से भोजन शरीर में लगता है और पाचन क्रिया भी अच्छी रहती है. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को खाए गए भोजन से लाभ होता है. ये मंत्र है-
    पहला मंत्र
    ‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्नसंभवः।’
    ‘यज्ञाद भवति पर्जन्यो यज्ञः कर्म समुद् भवः।।’

    दूसरा मंत्र

    ‘अगस्त्यम कुम्भकर्णम च शनिं च बडवानलनम।’
    ‘भोजनं परिपाकारथ स्मरेत भीमं च पंचमं ।।’

    भोजन करने के नियम

    भोजन करने से पहले अपने 5 अंगों को 2 हाथ, 2 पैर और मुख को अच्छे धोकर साफ कर लें. तभी भोजन करें.

    भोजन करने से पहले अन्नपूर्णा माता की स्तुति करें और उनका आभार व्यक्त कर धन्यवाद करें. प्रार्थना करें कि ‘सभी भूखों को भोजन मिले’.

    भोजन बनाने वाले व्यक्ति को ध्यान रखना चाहिए कि वो स्नान करके शुद्ध मन से भोजन पकाए.

    रसोई में बनी पहली रोटी गाय को दें और आखिरी दो रोटी, कुत्ते और कौवे के लिए निकालें. इसके बाद अग्निदेव को भी थोड़ा सा अन्न भोग के लिए दें.

    पूरा परिवार भोजन साथ बैठकर ही करें. परिवार के सदस्यों में प्यार और लगाव बना रहेगा. मन में प्रेम और एकता का भाव आएगा.

    सुबह और शाम में ही भोजन करने का नियम है क्योंकि सूर्योदय से 2 घंटे बाद और सूर्यास्त से 2.30 घंटे पहले पाचनक्रिया की जठराग्नि प्रबल रहती है.

    भोजन पूर्व और उत्तर दिशा की ओर मुंख करके ही करें. दक्षिण दिशा की ओर किया भोजन प्रेत को जाता है. इस दिशा में किए भोजन से रोग होता है.