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  • 44 साल के अभिनय सफर के बाद भी नई कहानियों की तलाश में अनु कपूर, 'उत्तर का पुत्तर' से फिर दिखेगा दिल्ली और संवेदनाओं का अनोखा संगम

    44 साल के अभिनय सफर के बाद भी नई कहानियों की तलाश में अनु कपूर, 'उत्तर का पुत्तर' से फिर दिखेगा दिल्ली और संवेदनाओं का अनोखा संगम

    नई दिल्ली । वरिष्ठ अभिनेता अनु कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘उत्तर का पुत्तर’ के माध्यम से एक बार फिर ऐसे किरदार में दिखाई देंगे, जो मनोरंजन के साथ जीवन का सार्थक संदेश भी प्रस्तुत करता है। इस फिल्म में वह एक अनुभवी भौतिकी शिक्षक की भूमिका निभा रहे हैं, जो विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराता है, लेकिन निजी जीवन में वास्तु सिद्धांतों पर गहरा विश्वास रखता है। कहानी इसी विश्वास और वास्तविक जीवन के बीच पैदा होने वाली परिस्थितियों को हल्के-फुल्के अंदाज में प्रस्तुत करती है।

    अनु कपूर का कहना है कि फिल्म की कहानी पढ़ते ही उन्हें महसूस हुआ कि यह आम लोगों की सोच और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हुई है। उनके अनुसार कई लोग जीवन की समस्याओं का समाधान बाहरी परिस्थितियों, दिशाओं या मान्यताओं में खोजते हैं, जबकि वास्तविक परिवर्तन व्यक्ति के विचार, निर्णय और कर्म से आता है। यही संदेश फिल्म को अलग पहचान देता है और इसी कारण उन्होंने इस परियोजना का हिस्सा बनने का निर्णय लिया।

    उन्होंने बताया कि उनका किरदार विज्ञान का शिक्षक होने के बावजूद वास्तु में विश्वास रखता है। यह विरोधाभास ही कहानी को रोचक बनाता है। फिल्म किसी की आस्था का उपहास नहीं उड़ाती, बल्कि यह दिखाने का प्रयास करती है कि विश्वास अपनी जगह महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन सफलता और संतुलित जीवन का आधार ईमानदार प्रयास, सकारात्मक सोच और सही निर्णय ही होते हैं।

    लगभग चार दशक से अधिक लंबे अभिनय करियर में अनु कपूर ने अनेक यादगार फिल्मों में विविध भूमिकाएं निभाई हैं। उनका मानना है कि दर्शकों तक वही कहानियां सबसे अधिक पहुंचती हैं जिनमें मनोरंजन के साथ विचार करने की प्रेरणा भी हो। उनके अनुसार ‘उत्तर का पुत्तर’ भी हास्य के माध्यम से एक गंभीर सामाजिक संदेश देने का प्रयास करती है, जिससे हर वर्ग का दर्शक स्वयं को जोड़ सकेगा।

    फिल्म का बड़ा हिस्सा दिल्ली के प्रमुख स्थलों पर फिल्माया गया है। शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को कहानी के साथ स्वाभाविक रूप से जोड़ा गया है। करोल बाग, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट, कुतुब मीनार और अन्य प्रसिद्ध स्थानों की झलक फिल्म को वास्तविक वातावरण प्रदान करती है। निर्माताओं का मानना है कि दिल्ली की जीवंत ऊर्जा और स्थानीय परिवेश कहानी को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं।

    अनु कपूर के लिए दिल्ली केवल एक शहर नहीं बल्कि उनके अभिनय जीवन की महत्वपूर्ण शुरुआत का केंद्र भी है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में बिताए गए वर्षों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वहीं से उन्हें अभिनय की बारीकियां, अनुशासन और जीवन को गहराई से समझने की सीख मिली। मंडी हाउस, बंगाली मार्केट और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी अनेक यादें आज भी उनके मन में ताजा हैं और हर बार दिल्ली लौटने पर वे फिर जीवंत हो उठती हैं।

    उन्होंने कहा कि रंगमंच के दिनों में लोगों के व्यवहार, भावनाओं और समाज को करीब से देखने का अवसर मिला, जिसने उनके अभिनय को नई दिशा दी। यही अनुभव आज भी हर नए किरदार को निभाने में उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बनते हैं। उनका मानना है कि एक कलाकार के लिए निरंतर सीखना और स्वयं को नए विषयों के अनुरूप ढालना सबसे महत्वपूर्ण होता है।

    फिल्म ‘उत्तर का पुत्तर’ 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। निर्माताओं को उम्मीद है कि पारिवारिक मनोरंजन, हल्के हास्य और सकारात्मक संदेश का यह मिश्रण दर्शकों को पसंद आएगा। साथ ही दिल्ली की खूबसूरत लोकेशन और अनु कपूर का अनुभवी अभिनय फिल्म को एक अलग पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • सालों बाद सामने आया सच, ‘7 खून माफ’ के किस सीन विवाद पर अन्नू कपूर की सफाई..

    सालों बाद सामने आया सच, ‘7 खून माफ’ के किस सीन विवाद पर अन्नू कपूर की सफाई..


    नई दिल्ली। फिल्म इंडस्ट्री में कई बार ऐसे किस्से सामने आते हैं जो समय बीतने के बाद भी चर्चा में बने रहते हैं। ऐसा ही एक मामला फिल्म ‘7 खून माफ’ से जुड़ा है, जो एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस फिल्म में साथ काम कर चुके अभिनेता अन्नू कपूर ने हाल ही में उस पुराने विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उनके और प्रियंका चोपड़ा के बीच एक किस सीन को लेकर चर्चा हुई थी।

    अन्नू कपूर ने इस पूरे मामले को याद करते हुए बताया कि फिल्म के रिलीज के दौरान मीडिया में इस विषय को काफी उछाला गया था। उनसे बार-बार यही सवाल पूछा जाता था कि क्या प्रियंका चोपड़ा उनके साथ ऑनस्क्रीन किस करने से हिचकिचा रही थीं। इस पर उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार के लिए यह पूरी तरह व्यक्तिगत निर्णय होता है और इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। उन्होंने यह भी माना कि उस समय उनकी कही गई बातों को बाद में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, जिससे विवाद और गहरा हो गया।

    उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म के निर्देशक ने उन्हें इस बात की जानकारी दी थी कि प्रियंका इस सीन को लेकर पूरी तरह सहज नहीं थीं। इस पर उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई, बल्कि इसे एक सामान्य स्थिति के रूप में देखा। उनके अनुसार, दोनों के बीच उम्र का अंतर काफी ज्यादा था और सेट पर उनका रिश्ता भी बेहद सहज और सम्मानजनक था। वे अक्सर प्रियंका को स्नेह से ‘बेटा’ कहकर बुलाते थे, जिससे उनके बीच एक अलग तरह की समझ विकसित हो गई थी।

    अन्नू कपूर ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस पूरे मुद्दे से कभी कोई परेशानी नहीं हुई। उन्होंने यहां तक सुझाव दिया था कि यदि जरूरत हो तो उस सीन को हटाया भी जा सकता है, लेकिन फिल्म की कहानी के अनुसार उसे रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि एक पेशेवर अभिनेता के रूप में उनका कर्तव्य था कि वे अपने काम को पूरी ईमानदारी से निभाएं, और उन्होंने वही किया।

    दूसरी ओर, इस मुद्दे पर प्रियंका चोपड़ा की प्रतिक्रिया भी उस समय सामने आई थी, जिसमें उन्होंने इस तरह की चर्चाओं पर नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि इस विषय को जिस तरह से प्रस्तुत किया गया, वह सही नहीं था और इससे उन्हें असहज महसूस हुआ। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि फिल्म में इस तरह के सीन पहले से तय नहीं थे और बाद में इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा कर दिया गया।

    फिल्म ‘7 खून माफ’ में अन्नू कपूर ने प्रियंका चोपड़ा के एक पति की भूमिका निभाई थी। यह कहानी एक महिला के जीवन और उसके रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें कई कलाकारों ने अलग-अलग किरदार निभाए थे। फिल्म अपने विषय और प्रस्तुति के कारण उस समय चर्चा में रही थी।

    अब, कई वर्षों बाद जब यह मुद्दा फिर सामने आया है, तो अन्नू कपूर ने अपने पक्ष को स्पष्ट करते हुए यह बताया है कि उस समय की परिस्थितियों को समझना जरूरी है। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में काम करते समय कलाकारों की सहजता और सीमाओं का सम्मान करना सबसे महत्वपूर्ण होता है, और यही किसी भी पेशेवर माहौल की पहचान है।