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  • एंथ्रोपिक CEO की पत्नी के एपस्टीन से कारोबारी संपर्क का दावा, ईमेल में निवेश मदद मांगने की जानकारी सामने आई

    एंथ्रोपिक CEO की पत्नी के एपस्टीन से कारोबारी संपर्क का दावा, ईमेल में निवेश मदद मांगने की जानकारी सामने आई


    नई दिल्ली ।
    एंथ्रोपिक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डारियो अमोडेई की पत्नी और उनकी करीबी रणनीतिक सलाहकार केमी क्लार्क का नाम जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आने का दावा किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, क्लार्क ने अपनी कंपनी में निवेश हासिल करने के उद्देश्य से एपस्टीन से संपर्क किया था। इस संबंध में ईमेल संवाद का हवाला दिया जा रहा है, जिनके सामने आने के बाद दोनों के बीच कारोबारी संपर्क को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    बताया गया है कि यह संपर्क उस समय हुआ जब क्लार्क अपनी कंपनी के लिए निवेश और कारोबारी अवसर तलाश रही थीं। उन्होंने अपनी कंपनी को महिलाओं के लिए तैयार की गई एक नई तरह की एडल्ट एंटरटेनमेंट कंपनी के रूप में पेश किया था। कथित ईमेल संवाद में कंपनी के लिए आवश्यक धनराशि से संबंधित जानकारी भी एपस्टीन के साथ साझा किए जाने की बात सामने आई है।

    क्लार्क का एपस्टीन से परिचय लेखक और साहित्यिक एजेंट जॉन ब्रॉकमैन के माध्यम से होने की जानकारी दी गई है। मार्च 2011 में ब्रॉकमैन ने क्लार्क और एपस्टीन के बीच मुलाकात कराने की पहल की थी। उस समय तक एपस्टीन का नाम यौन अपराधों से जुड़े मामले में सामने आ चुका था और 2008 में उसे यौन अपराध तथा वेश्यावृत्ति के लिए लोगों को उकसाने से जुड़े मामले में दोषी ठहराया जा चुका था।

    दस्तावेजों से जुड़े विवरण के अनुसार, ब्रॉकमैन ने क्लार्क और उनकी कारोबारी साझेदार मिशेल कैपोसेफालो के साथ एपस्टीन की मुलाकात का सुझाव दिया था। इसके बाद क्लार्क की ओर से जवाब भेजे जाने और शाम को एपस्टीन के साथ डिनर करने की इच्छा जताए जाने का उल्लेख किया गया है।

    अगले दिन हुए कथित ईमेल संवाद में क्लार्क ने अपनी कंपनी के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता की जानकारी एपस्टीन को भेजी। उन्होंने पिछली शाम की मुलाकात का उल्लेख करते हुए उसके लिए धन्यवाद भी दिया था। इसके बाद दोनों के बीच विभिन्न विषयों पर ईमेल के जरिए बातचीत होने की जानकारी सामने आई है।

    केमी क्लार्क का नाम डारियो अमोडेई के पेशेवर जीवन से भी जुड़ा रहा है। जानकारी के अनुसार, जब अमोडेई 2016 में ओपनएआई से जुड़े थे, तब क्लार्क उनकी रणनीतिक सलाहकार के रूप में काम कर रही थीं। बाद में दोनों ने 2022 में विवाह किया। हालांकि, क्लार्क आधिकारिक तौर पर एंथ्रोपिक की कर्मचारी नहीं हैं।

    इसके बावजूद सार्वजनिक और कारोबारी आयोजनों में वह अमोडेई के साथ नजर आती रही हैं। बड़े निवेशकों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच होने वाले प्रमुख कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी का उल्लेख किया जाता रहा है। दावोस और अमेरिका के सन वैली में आयोजित होने वाले बड़े कारोबारी आयोजनों में भी उनकी भागीदारी की जानकारी सामने आई है।

    इस वर्ष नई दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट के दौरान भी क्लार्क अपने पति के साथ भारत आई थीं। एंथ्रोपिक के नेतृत्व और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में अमोडेई की भूमिका के कारण उनके परिवार और पेशेवर नेटवर्क से जुड़े किसी भी पुराने कारोबारी संपर्क पर स्वाभाविक रूप से ध्यान जाता है।

    हालांकि, एपस्टीन से जुड़े किसी व्यक्ति के साथ संपर्क या ईमेल संवाद अपने आप में किसी आपराधिक गतिविधि का प्रमाण नहीं है। सामने आई जानकारी मुख्य रूप से कथित कारोबारी संपर्क, निवेश की संभावनाओं और ईमेल संवाद से संबंधित है। किसी व्यक्ति पर आपराधिक आरोप तय करने के लिए अलग और पुष्ट प्रमाण आवश्यक होते हैं।

    एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में अलग-अलग लोगों के नाम और संपर्क सामने आने के बाद कई पुराने कारोबारी और सामाजिक संबंधों की दोबारा चर्चा हो रही है। केमी क्लार्क से जुड़ा मामला भी इसी व्यापक संदर्भ में सामने आया है। फिलहाल उपलब्ध विवरण में मुख्य सवाल यह है कि उस समय प्रस्तावित कारोबारी संपर्क किस स्तर तक आगे बढ़ा और क्या निवेश संबंधी कोई वास्तविक समझौता हुआ था।

  • एंथ्रोपिक और एडब्ल्यूएस की बड़ी साझेदारी, भारत के एआई डाटा की सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती

    एंथ्रोपिक और एडब्ल्यूएस की बड़ी साझेदारी, भारत के एआई डाटा की सुरक्षा और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती

    नई दिल्ली । कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात एआई क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एंथ्रोपिक ने भारत में अपने कारोबार का रणनीतिक विस्तार करते हुए एक बड़ी योजना की घोषणा की है। कंपनी के क्लाउड एआई मॉडल अब अमेजन बेडरॉक के भारतीय बुनियादी ढांचे के जरिए देश के भीतर ही संचालित होंगे। इस नई व्यवस्था से भारतीय उपयोगकर्ताओं और बड़े संगठनों का संवेदनशील एआई डाटा देश की सीमाओं के भीतर सुरक्षित रहेगा, जिससे डेटा रेजिडेंसी और कानूनी नियमों का पालन करना अत्यधिक सुगम हो जाएगा।

    स्थानीय स्तर पर डेटा प्रोसेसिंग होने का सबसे बड़ा लाभ बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, सरकारी एजेंसियों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और अन्य विनियमित क्षेत्रों को प्राप्त होगा। इन क्षेत्रों में डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा सर्वोपरि होती है। अमेजन वेब सर्विसेज इंडिया के अनुसार, भारतीय सर्वरों पर क्लाउड मॉडलों की उपलब्धता से घरेलू एआई आधारित एप्लीकेशन तैयार करने वाले डेवलपर्स और कंपनियों को कम लेटेंसी और बेहतर प्रदर्शन का लाभ मिलेगा।

    एंथ्रोपिक के अधिकारियों का मानना है कि भारत क्लाउड एआई के लिए वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। स्थानीय एआई विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंपनी अपने पार्टनर नेटवर्क के माध्यम से भारत में 5,000 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित करने जा रही है। इसके साथ ही कंपनी भारत में अपने कार्यबल का विस्तार करने और भारतीय भाषाओं के लिए अपने मॉडल के समर्थन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

    साइबर सुरक्षा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एंथ्रोपिक ने डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, एमओएसआईपी और ओपनजीटूपी जैसी संस्थाओं के साथ साझेदारी की है। एआई आधारित सुरक्षा परीक्षण के माध्यम से संगठन अपनी सॉफ्टवेयर कमजोरियों की पहचान कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त भारतीय भाषाओं में एआई के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए कंपनी ने कार्या के साथ भी सहयोग किया है, जिससे डिजिटल सेवाओं की पहुंच आम जनता तक आसान होगी।

  • भारत में AI क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, TCS और Anthropic की साझेदारी से हजारों कर्मचारियों को मिलेगा उन्नत AI प्लेटफॉर्म

    भारत में AI क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, TCS और Anthropic की साझेदारी से हजारों कर्मचारियों को मिलेगा उन्नत AI प्लेटफॉर्म

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने एआई क्षेत्र की अग्रणी संस्था एंथ्रोपिक के साथ साझेदारी कर अपने डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई दिशा देने का फैसला किया है। इस सहयोग का उद्देश्य विभिन्न उद्योगों में एआई आधारित समाधानों के विकास को गति देना और ग्राहकों को उन्नत तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    इस साझेदारी के तहत टीसीएस अपने लगभग 50 हजार कर्मचारियों को Claude AI प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराएगी। इस पहल का लाभ इंजीनियरिंग, वित्त, कानूनी सेवाओं, विपणन, बिक्री और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत पेशेवरों को मिलेगा। कंपनी का मानना है कि कर्मचारियों को अत्याधुनिक एआई उपकरणों से जोड़ने से उत्पादकता बढ़ेगी और जटिल कार्यों को अधिक दक्षता के साथ पूरा किया जा सकेगा।

    टीसीएस इस सहयोग के अंतर्गत एक विशेष विशेषज्ञ टीम का गठन भी करेगी, जो Claude एआई मॉडल पर आधारित नए तकनीकी समाधान विकसित करेगी। कंपनी को इन एआई क्षमताओं और टूल्स तक शुरुआती पहुंच मिलने से वह अपने ग्राहकों के लिए तेजी से नवाचार करने की स्थिति में होगी। इससे एंटरप्राइज ग्राहकों को अत्याधुनिक एआई तकनीकों का लाभ अपेक्षाकृत कम समय में मिल सकेगा।

    दोनों कंपनियां मिलकर बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी प्रशासन, जीवन विज्ञान, विमानन, दूरसंचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करेंगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां डेटा सुरक्षा, विश्वसनीयता और नियामकीय अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकता रखते हैं। ऐसे क्षेत्रों में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना इस साझेदारी का प्रमुख लक्ष्य माना जा रहा है।

    तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को एआई टूल्स से जोड़ना भविष्य की कार्यशैली को बदल सकता है। इससे न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि संगठन के भीतर नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता भी मजबूत होगी। आधुनिक व्यवसायों में एआई की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह कदम उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    यह साझेदारी ग्राहकों के लिए भी कई नए अवसर लेकर आएगी। कंपनियां ऐसे एआई समाधान विकसित करेंगी जो व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पुराने तकनीकी ढांचे को आधुनिक बनाने और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इससे डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं की गति बढ़ने और परिचालन लागत को कम करने की संभावना भी जताई जा रही है।

    एआई तकनीक के तेजी से विस्तार के बीच यह सहयोग भारत के तकनीकी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर एआई अपनाने की बढ़ती मांग के बीच भारतीय आईटी कंपनियां नई तकनीकों में निवेश कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। टीसीएस और एंथ्रोपिक की यह साझेदारी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

    उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित समाधान व्यवसायों की कार्यप्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगे। ऐसे में बड़े पैमाने पर एआई प्रशिक्षण, उन्नत प्लेटफॉर्म तक पहुंच और उद्योग-विशिष्ट समाधानों का विकास कंपनियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है।

  • अमेरिकी AI लैब्स पर चीन की नजर? Anthropic ने ट्रंप सरकार से की शिकायत, डेटा चोरी के आरोपों से मचा हड़कंप

    अमेरिकी AI लैब्स पर चीन की नजर? Anthropic ने ट्रंप सरकार से की शिकायत, डेटा चोरी के आरोपों से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी एआई स्टार्टअप Anthropic ने आरोप लगाया है कि कुछ चीनी कंपनियां उसकी AI तकनीक और डेटा का गलत तरीके से उपयोग कर रही हैं। इस मामले ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

    डीपसीक और अन्य कंपनियों पर गंभीर आरोप
    Anthropic का आरोप है कि चीनी कंपनियां जैसे:
    DeepSeek
    Moonshot AI
    MiniMax
    उसके AI चैटबॉट Claude से अवैध रूप से डेटा निकालने (data extraction) और उसे अपने मॉडल को ट्रेन करने में इस्तेमाल कर रही हैं।
    कंपनी का दावा है कि यह प्रक्रिया “डिस्टिलेशन” तकनीक के जरिए की जा रही है, जिससे AI मॉडल के अंदर की जानकारी चुपचाप कॉपी की जा सकती है।

    ट्रंप सरकार से की गई शिकायत
    Anthropic ने इस मामले को गंभीर बताते हुए अमेरिका की ट्रंप सरकार से आधिकारिक शिकायत की है और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
    कंपनी का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां नहीं रोकी गईं, तो यह अमेरिका की AI तकनीक और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।

    अमेरिकी विदेश विभाग का बड़ा कदम
    इस पूरे मामले के बाद अमेरिकी विदेश विभाग ने भी सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने वैश्विक स्तर पर एक मुहिम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
    शुक्रवार को दुनिया भर में अमेरिकी राजनयिक और कांसुलर मिशनों को एक केबल भेजा गया, जिसमें कहा गया कि:
    विदेशी सरकारों के साथ AI डेटा चोरी का मुद्दा उठाया जाए
    अमेरिकी AI मॉडल से जानकारी निकालने की कोशिशों पर चिंता जताई जाए
    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर सहयोग बढ़ाया जाए

    AI तकनीक को लेकर बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा
    यह मामला सिर्फ एक तकनीकी विवाद नहीं, बल्कि AI नेतृत्व की वैश्विक होड़ का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिका और चीन दोनों ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वर्चस्व स्थापित करने की दौड़ में हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, AI मॉडल से डेटा निकालना और उसे दूसरे मॉडल को ट्रेन करने में इस्तेमाल करना अब एक बड़ा साइबर और टेक्नोलॉजी सुरक्षा मुद्दा बन चुका है।

    क्या है ‘डिस्टिलेशन’ तकनीक?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस प्रक्रिया पर आरोप लगे हैं उसे “मॉडल डिस्टिलेशन” कहा जाता है।
    इसमें बड़े AI मॉडल से आउटपुट लिया जाता है
    फिर उसे छोटे या नए मॉडल को ट्रेन करने में इस्तेमाल किया जाता है
    इससे बिना मूल डेटा के भी AI को “कॉपी जैसा ज्ञान” मिल सकता है

    बढ़ता तनाव और आगे की राह
    इस विवाद ने अमेरिका-चीन टेक संबंधों में नई दरार पैदा कर दी है। अब यह देखना अहम होगा कि़, क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई नियम बनते हैंया AI को लेकर यह प्रतिस्पर्धा और तेज होती है आरोपों और अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया के बाद AI डेटा सुरक्षा और तकनीकी गोपनीयता का मुद्दा एक बार फिर वैश्विक चर्चा के केंद्र में आ गया है। यह मामला आने वाले समय में AI नीति और अंतरराष्ट्रीय टेक नियमों को भी प्रभावित कर सकता है।