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  • नरसिंहपुर में 12 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन; जेसीबी से ढहाया कच्चा मकान

    नरसिंहपुर में 12 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन; जेसीबी से ढहाया कच्चा मकान


    नरसिंहपुर नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के ग्राम टेकापार में सोमवार को प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 12 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। राजस्व विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा चलाए गए इस अभियान के दौरान लंबे समय से सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीन और ट्रैक्टरों की सहायता से अतिक्रमण को हटाते हुए एक कच्चे मकान को भी ध्वस्त किया गया।

    प्रशासन की इस कार्रवाई को क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। सुबह शुरू हुआ अभियान देर शाम तक जारी रहा। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे और प्रशासनिक कार्रवाई को देखते रहे।

    जानकारी के अनुसार, टेकापार गांव स्थित शासकीय भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया था। राजस्व विभाग को इसकी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जांच के बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई का निर्णय लिया और संयुक्त अभियान चलाकर कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू की। अभियान का नेतृत्व नायब तहसीलदार ने किया, जबकि राजस्व विभाग के पटवारी, पुलिस बल और अन्य अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे।

    अतिक्रमण हटाने के लिए 4 से 5 ट्रैक्टरों के साथ एक जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। अधिकारियों ने जमीन की पैमाइश कर सीमांकन के आधार पर कब्जे हटाए। इस दौरान सरकारी भूमि पर बना एक कच्चा मकान भी प्रशासन ने हटवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।

    कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कानून-व्यवस्था बनी रहे। पुलिस बल की मौजूदगी के कारण पूरा अभियान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। किसी भी तरह के विरोध या विवाद की स्थिति सामने नहीं आई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को शासकीय भूमि पर कब्जा न करने और नियमों का पालन करने की समझाइश भी दी।

    राजस्व विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिलेभर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की पहचान की जा रही है। जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्तियों और भूमि की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

    टेकापार में हुई इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य क्षेत्रों में भी अतिक्रमणकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। प्रशासन के सख्त रुख से यह संदेश गया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • महू में सैन्य भूमि पर चला बुलडोजर, अवैध पशु बाड़े और अतिक्रमण हटाने की संयुक्त कार्रवाई

    महू में सैन्य भूमि पर चला बुलडोजर, अवैध पशु बाड़े और अतिक्रमण हटाने की संयुक्त कार्रवाई


    मध्यप्रदेश । महू के बंडा बस्ती क्षेत्र में सोमवार को सैन्य भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमणों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। सेना, रक्षा संपदा विभाग, कैंटोनमेंट बोर्ड, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने सुबह करीब 11:30 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार संबंधित लोगों को दो दिन पहले नोटिस जारी किए गए थे और निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई।

    कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में बुलडोजर की मदद से पशु बाड़ों, टीन शेड और अन्य अस्थायी निर्माणों को हटाने का काम किया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी गई।

    यह मामला पिछले महीने सामने आए एक विवाद के बाद चर्चा में आया था। पुलिस के अनुसार बंडा बस्ती क्षेत्र स्थित एक पशु बाड़े से गोवंश के अवशेष और कथित रूप से गोमांस बरामद किया गया था। उस दौरान कार्रवाई के समय पथराव की घटना भी सामने आई थी, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी। पुलिस ने इस मामले में Imran Khatkhat समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार मामले की विवेचना की गई और संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकरण में दर्ज आरोपों की जांच जारी है और कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। कुछ आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की जानकारी अधिकारियों द्वारा दी गई थी। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाना है।

    घटना के बाद विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सैन्य भूमि पर बने कथित अवैध बाड़ों और निर्माणों को हटाने की मांग उठाई थी। इसके बाद संबंधित विभागों ने भूमि अभिलेखों और सीमांकन की जांच की। अधिकारियों के अनुसार जांच में यह पाया गया कि संबंधित क्षेत्र में सैन्य भूमि पर कई स्थानों पर अतिक्रमण किया गया था। इसी आधार पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक लगभग एक एकड़ सैन्य भूमि पर 10 से अधिक लोगों द्वारा कब्जा किया गया था। इस भूमि पर बने 10 से ज्यादा पशु बाड़ों, शेड और अन्य अस्थायी ढांचों को हटाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सैन्य क्षेत्र की अन्य भूमि पर भी संभावित अतिक्रमणों की पहचान की जा रही है और आवश्यकतानुसार आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।

    अधिकारियों का कहना है कि सरकारी और सैन्य भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए अभियान जारी रहेगा। वहीं स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न करें और नियमों का पालन करें। फिलहाल बंडा बस्ती क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से जारी है तथा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।

  • इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए 80 से ज्यादा मकान ध्वस्त, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग

    इंदौर में सड़क चौड़ीकरण के लिए 80 से ज्यादा मकान ध्वस्त, प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास और मुआवजे की उठाई मांग


    मध्यप्रदेश । इंदौर में गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार रोड तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत सोमवार को नगर निगम ने बड़े पैमाने पर रिमूवल अभियान चलाया। सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई कार्रवाई में भारी पुलिस बल, पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से सड़क निर्माण में बाधक बताए जा रहे मकानों और अन्य निर्माणों को हटाया गया। निगम अधिकारियों के अनुसार अब तक 80 से अधिक मकानों को तोड़ा जा चुका है, जबकि कुल करीब 85 मकानों को नोटिस जारी किए गए थे।

    नगर निगम के रिमूवल विभाग की ओर से की जा रही इस कार्रवाई में 9 पोकलेन मशीनें, 5 जेसीबी और 100 से अधिक कर्मचारी तैनात किए गए। निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक है तथा प्रभावित लोगों को पहले ही नोटिस जारी कर दिए गए थे।

    हालांकि कार्रवाई के दौरान कई प्रभावित परिवारों ने विरोध जताया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि वर्षों पुराने उनके मकानों को बिना उचित पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था के ध्वस्त किया जा रहा है। प्रभावित लोगों का दावा है कि उन्हें न तो रहने के लिए कोई प्लॉट या फ्लैट दिया गया और न ही पर्याप्त मुआवजे की जानकारी दी गई।

    65 वर्षीय कृष्णा पाठक ने दावा किया कि उनका परिवार चार पीढ़ियों से इसी क्षेत्र में रह रहा था। उनका कहना है कि उनका जन्म भी इसी मकान में हुआ और अब जीवन के इस पड़ाव पर उनका आशियाना टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार के कई सदस्य एक ही मकान में रहते थे और अब उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा ठिकाना नहीं बचा है।

    कुछ अन्य प्रभावित लोगों ने भी प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई। 47 वर्षीय राजकुमारी मिश्रा ने दावा किया कि वह और उनके पति निराश्रित हैं तथा उनके कोई संतान भी नहीं है। उनका कहना है कि नोटिस दिए जाने के बावजूद प्रशासन को पहले वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर का बड़ा हिस्सा तोड़ दिया गया और अब बची हुई जगह में रहना भी मुश्किल हो गया है।

    रहवासियों का यह भी आरोप है कि कुछ स्थानों पर सरकारी जमीन खाली होने के बावजूद केवल आवासीय मकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक प्रभावित लोगों को पहले नोटिस जारी किए गए थे और कई स्थानों पर मुनादी भी कराई गई थी। इसी कारण कुछ लोगों ने अपने निर्माणों के हिस्से स्वयं भी हटा लिए थे। निगम का दावा है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर लागू की जा रही है।

    कार्रवाई के दौरान कई परिवार अपने मकानों को टूटते हुए देखते रहे। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से को तोड़ा गया है, जबकि कुछ रहवासियों का कहना था कि उनके मकान के सामने पहले से पर्याप्त चौड़ाई वाली सड़क मौजूद थी, फिर भी उनका निर्माण हटाया गया।

    फिलहाल सड़क चौड़ीकरण को लेकर प्रशासन और प्रभावित परिवारों के बीच मतभेद बने हुए हैं। प्रभावित लोगों ने पुनर्वास, वैकल्पिक आवास और मुआवजे की मांग उठाते हुए प्रशासन से राहत देने की अपील की है।

  • देवास में अतिक्रमण हटाने पहुंची फॉरेस्ट टीम पर हमला, पथराव में 6 कर्मचारी घायल; ड्रोन और वाहनों में भी तोड़फोड़

    देवास में अतिक्रमण हटाने पहुंची फॉरेस्ट टीम पर हमला, पथराव में 6 कर्मचारी घायल; ड्रोन और वाहनों में भी तोड़फोड़


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Dewas जिले में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पहुंची वन विभाग की टीम पर कथित रूप से ग्रामीणों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना जिनवाणी वन परिक्षेत्र के कमलापुर बीट क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां वन विभाग की कार्रवाई के दौरान जमकर पथराव हुआ। इस घटना में छह वनकर्मी घायल हो गए, जबकि विभागीय वाहनों और ड्रोन को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी मिली है। घटना का एक ड्रोन वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वनकर्मी और पुलिसकर्मी खेतों की ओर भागते दिखाई दे रहे हैं।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शनिवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए विभिन्न वन परिक्षेत्रों का स्टाफ और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचा था। कार्रवाई का उद्देश्य कथित रूप से सरकारी वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाना था। इसी दौरान क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो बाद में पथराव में बदल गया।

    घटना में घायल होने वालों में वनरक्षक मोहन पंचोनिया, ज्योति जाट, कमल राणा, देवकरण मालवीय, सूरज तथा परिक्षेत्र सहायक K K Parmar शामिल हैं। घायलों को पहले कमलापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में चापड़ा के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों के अनुसार दो कर्मचारियों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें आगे उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया है।

    घायल वनकर्मी ज्योति जाट ने बताया कि कार्रवाई के दौरान अचानक चारों ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। उनके अनुसार कर्मचारियों को संभलने का अवसर तक नहीं मिला और लगातार पत्थर बरसाए जाते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई कर्मचारियों के सिर में गंभीर चोटें आईं और उन्हें किसी तरह मौके से सुरक्षित बाहर निकलना पड़ा।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पथराव करीब आधे घंटे तक चलता रहा। विभागीय टीम के अनुसार ग्रामीणों की संख्या काफी अधिक थी और उन्होंने कार्रवाई का विरोध करते हुए वाहनों तथा उपकरणों को भी निशाना बनाया। विभाग का दावा है कि ड्रोन को भी क्षति पहुंचाई गई है।

    Vikas Mahore ने बताया कि भीलआमला क्षेत्र में वन भूमि पर खेती किए जाने की शिकायतें थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार संबंधित भूमि वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है और उस पर अवैध कब्जे की जांच लंबे समय से चल रही थी।

    वन विभाग के मुताबिक कार्रवाई का नेतृत्व Ankit Jamod कर रहे थे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति बिगड़ने के बाद टीम को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी पड़ी। वहीं स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    अधिकारियों ने कहा है कि घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उपलब्ध वीडियो फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर ग्रामीणों की ओर से भी मामले में अपना पक्ष रखे जाने की संभावना है। फिलहाल पुलिस और वन विभाग संयुक्त रूप से पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहे हैं।

  • लॉ कॉलेज के नाम पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, नगर निगम ने 10 करोड़ की भूमि कराई मुक्त

    लॉ कॉलेज के नाम पर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, नगर निगम ने 10 करोड़ की भूमि कराई मुक्त


    मध्‍य प्रदेश । जबलपुर में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नगर निगम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपए मूल्य की सरकारी भूमि को अपने कब्जे में ले लिया है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर के पॉश इलाके राइट टाउन में स्थित इस भूमि पर लॉ कॉलेज संचालित होने का दावा किया जा रहा था, लेकिन जांच में कई तथ्य संदिग्ध पाए जाने के बाद निगम ने कार्रवाई की।

    जानकारी के अनुसार, Jabalpur Municipal Corporation के आयुक्त Ramprakash Ahirwar को शिकायत प्राप्त हुई थी कि सरकारी स्वामित्व वाली बहुमूल्य जमीन पर कब्जा किया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि परिसर में लॉ कॉलेज संचालित होने की बात कही जाती है, लेकिन वहां नियमित रूप से न तो छात्र दिखाई देते हैं और न ही शिक्षकों की उपस्थिति नजर आती है।

    शिकायत मिलने के बाद निगम प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कराई। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि संबंधित परिसर अधिकांश समय बंद रहता है और वहां शैक्षणिक गतिविधियां भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं। जांच रिपोर्ट के आधार पर निगम आयुक्त ने कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

    शुक्रवार को नगर निगम की संपदा शाखा, अतिक्रमण विरोधी दस्ता और क्षेत्रीय अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान परिसर को निगम के कब्जे में लिया गया और मुख्य प्रवेश द्वारों पर ताले लगा दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि मुक्त कराई गई भूमि की अनुमानित बाजार कीमत 10 करोड़ रुपए से अधिक है।

    संभाग क्रमांक-13 के संभागीय अधिकारी Sagar Borkar ने बताया कि नगर निगम की ओर से शासकीय और निगम स्वामित्व वाली जमीनों की लगातार जांच की जा रही है। इसी क्रम में राइट टाउन स्थित चंचलाबाई स्कूल क्षेत्र की भूमि की पड़ताल की गई थी।

    जांच में सामने आया कि चंचलाबाई स्कूल के पास स्थित डायवर्सन प्लॉट नंबर-440 और डायवर्सन शीट नंबर-152-सी का एक बड़ा हिस्सा नगर निगम के स्वामित्व में दर्ज है। अधिकारियों के अनुसार इस क्षेत्र में पहले कस्तूरबा स्कूल संचालित होता था। बाद में इस भूमि के एक हिस्से पर कथित रूप से लॉ कॉलेज के नाम पर कब्जा कर लिया गया।

    नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि जिस परिसर में कॉलेज संचालित होने की बात कही जा रही थी, वहां पर्याप्त शैक्षणिक गतिविधियां नहीं मिलीं। निरीक्षण के दौरान कमरे तो बने मिले, लेकिन नियमित रूप से छात्र और शिक्षक मौजूद नहीं पाए गए। इसी आधार पर प्रशासन ने भूमि की स्थिति और उपयोग को लेकर गंभीरता से कार्रवाई की।

    नगर निगम का कहना है कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर तत्काल कदम उठाए गए। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि कब्जा मुक्त कराई गई इस बहुमूल्य भूमि का उपयोग भविष्य में सार्वजनिक हित और नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है।

    हालांकि संबंधित पक्ष की ओर से यदि कोई दावा या दस्तावेज प्रस्तुत किए जाते हैं, तो उनका परीक्षण नियमानुसार किया जाएगा। फिलहाल नगर निगम ने परिसर को अपने नियंत्रण में लेकर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

  • टीकमगढ़ में उमा भारती ने बंगले के सामने हाथठेले पर बेचा पोहा-जलेबी, हटाए गए दुकानदारों का किया समर्थन

    टीकमगढ़ में उमा भारती ने बंगले के सामने हाथठेले पर बेचा पोहा-जलेबी, हटाए गए दुकानदारों का किया समर्थन


    टीकमगढ़। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता उमा भारती मंगलवार को टीकमगढ़ के सिविल लाइन रोड पर अपने बंगले के सामने हाथठेले पर पोहा-जलेबी बेचती नजर आईं। उन्होंने एक दिन पहले हटाए गए छोटे दुकानदारों को वापस बुलाकर उनकी मदद की और खुद दुकान संभाली।

    टीकमगढ़ नगर पालिका ने सोमवार को अतिक्रमण हटाने के अभियान में कई छोटी दुकानें और हाथठेले जेसीबी से हटा दिए थे। उमा भारती ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी और इसे गरीब दुकानदारों के लिए अन्यायपूर्ण बताया था। मंगलवार सुबह वे अपने बंगले से निकलकर हाथठेले पर पहुंचीं और दुकानदारों का समर्थन किया। उन्होंने ठेले वालों से कहा कि वे दोबारा सड़क किनारे दुकान लगाएं।

    उमा भारती ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नगर पालिका एवं विधानसभा भाजपा के नियंत्रण में नहीं हैं अन्यथा यह अन्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों की दुकानों को तोड़ने से पहले नगर प्रशासन को नियमों का पालन करना चाहिए था। उन्‍होंने कहा कि कल जहां से गरीबों के ठेले या तो तोड़ दिए गए या हटा दिए गए उनके आसपास चारों तरफ साधन सुविधा संपन्न लोगों के घर एवं रेस्टोरेंट अतिक्रमण के नियमों का उल्लंघन कर नगरीय प्रशासन को उसकी हैसियत बताते हुए अभी भी चुनौतीपूर्ण मुद्रा में मौजूद हैं।

    उन्होंने बताया कि नगर प्रशासन ने शाम को अचानक जेसीबी से गरीब दुकानों को तोड़ दिया। उनकी जानकारी मिलते ही वे मौके पर पहुंचीं लेकिन तब तक कई दुकानें तहस-नहस हो चुकी थीं। उन्होंने पार्षद दल की बैठक में तय योजना का उल्लंघन बताया जिसमें पहले चिन्हित स्थानों पर सुविधाओं का निर्माण और चेतावनी के बाद दुकानों को शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया था। उन्‍होंने कहा कि मैंने इसकी जानकारी हमारे प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को भेज दी है।

    उमा भारती ने कहा कि उन्होंने दुकानदारों से वचन लिया है कि वे गंदगी नहीं फैलाएंगे और प्रशासन प्रयास करेगा कि उन्हें बेहतर स्थान पर शिफ्ट किया जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्षद दल और स्थानीय प्रशासन जल्द ही इस मुद्दे का समाधान निकालेंगे।

  • लखनऊ के KGMU में अवैध मजार हटाने की तैयारी, प्रशासन ने 15 दिन में कार्रवाई का दिया अल्टीमेटम

    लखनऊ के KGMU में अवैध मजार हटाने की तैयारी, प्रशासन ने 15 दिन में कार्रवाई का दिया अल्टीमेटम


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी परिसर में अवैध मजारों को हटाने की कार्रवाई को तेज कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारियों को 15 दिन के भीतर सभी अवैध मजार हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

    सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी

    केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि इस संबंध में जिला प्रशासन और पुलिस को पूरी जानकारी भेज दी गई है। अवैध मजार हटाने की योजना में सुरक्षा, लॉजिस्टिक और प्रशासनिक सभी पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। प्रशासन ने कहा कि अभियान सख्ती से लागू किया जाएगा और विश्वविद्यालय के सभी संबंधित विभागों को इसके लिए निर्देश दे दिए गए हैं। विभागों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय कर ली गई है।

    अवैध मजारों पर नोटिस और प्रतिक्रिया

    मजारों को हटाने के लिए पहले ही नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अतिरिक्त समय भी दिया गया, ताकि मजार प्रबंधक वैध दस्तावेज पेश कर सकें। हालांकि, अब तक केवल एक प्रबंधक ने जवाब दिया है, लेकिन उसने कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया।

    सख्त कार्रवाई का अल्टीमेटम
    प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि तय समय सीमा के भीतर सभी अवैध मजार हटाए जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति कार्रवाई में बाधा डालता है या विरोध करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। प्रो. केके सिंह ने कहा कि यह कदम विश्वविद्यालय परिसर को व्यवस्थित और नियमों के अनुसार बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अभियान पूरी निगरानी में चलाया जाएगा। परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को भी सख्त कर दिया गया है।