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  • 1200 KM तक वार करने वाली ईरानी मिसाइल की चर्चा अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान के पास बढ़ाई दूरी

    1200 KM तक वार करने वाली ईरानी मिसाइल की चर्चा अमेरिकी युद्धपोतों ने ईरान के पास बढ़ाई दूरी


    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच समुद्री मोर्चे पर कासिम बसीर मिसाइल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ईरान ने इस मिसाइल को अपनी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता के अहम हथियार के तौर पर पेश किया है। इसकी घोषित रेंज करीब 1200 किलोमीटर बताई जाती है। हाल की घटनाओं के बाद ओमान की खाड़ी और अरब सागर में अमेरिकी नौसैनिक तैनाती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ सैटेलाइट तस्वीरों और ओपन सोर्स विश्लेषणों में अमेरिकी बड़े युद्धपोतों की पहले की तुलना में अलग स्थिति दिखाई देने का दावा किया गया है।

    कासिम बसीर को ईरान ने मई 2025 में सार्वजनिक रूप से पेश किया था। उपलब्ध सैन्य विश्लेषणों के अनुसार यह ठोस ईंधन वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसमें मैन्युवरेबल री-एंट्री व्हीकल यानी MaRV होने की बात कही गई है जो उड़ान के अंतिम चरण में दिशा बदलने की क्षमता से जुड़ा है। रिपोर्टों में इसके इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीकर से लैस होने का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि इन क्षमताओं और वास्तविक युद्धक प्रदर्शन से जुड़े कई दावे ईरानी पक्ष के बयानों पर आधारित हैं।

    सितंबर की शुरुआत में अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने की कोशिश से जुड़ी घटनाओं ने इस मिसाइल को फिर चर्चा में ला दिया। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों के खिलाफ नई मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। कुछ ईरानी मीडिया रिपोर्टों ने इन हमलों को कासिम बसीर से जोड़ा। हालांकि अमेरिकी पक्ष के अनुसार उसके युद्धपोतों ने हमलों को सफलतापूर्वक टाल दिया और अमेरिकी जहाजों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं की गई। विश्लेषणों में भी यह स्पष्ट नहीं माना गया है कि हालिया हमले में वास्तव में कासिम बसीर का इस्तेमाल हुआ था।

    इसके बावजूद सैटेलाइट तस्वीरों को लेकर चर्चा जारी है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सितंबर के दौरान ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में पहले दिखाई देने वाले अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और विध्वंसक जहाज अब पहले की स्थिति में नजर नहीं आ रहे हैं। कुछ विश्लेषणों के मुताबिक अमेरिकी नौसेना ने ईरानी तट से दूरी बढ़ाकर मिसाइलों की संभावित मारक सीमा से बाहर रहने की रणनीति अपनाई है।

    इस घटनाक्रम का एक बड़ा पहलू आधुनिक समुद्री युद्ध की रणनीति से जुड़ा है। एयरक्राफ्ट कैरियर और बड़े युद्धपोत बेहद महंगे सैन्य प्लेटफॉर्म होते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए लंबी दूरी की मिसाइलों से पैदा होने वाले खतरे को ध्यान में रखना पड़ता है। यदि किसी मिसाइल की वास्तविक मारक क्षमता और लक्ष्य साधने की क्षमता प्रभावी साबित होती है तो युद्धपोतों को तट से अधिक दूरी पर रखना पड़ सकता है। इससे समुद्री क्षेत्र में मौजूदगी और निगरानी की रणनीति प्रभावित हो सकती है।

    हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिकी नौसेना केवल कासिम बसीर के डर से पीछे हटी है। सैन्य तैनाती मौसम परिचालन जरूरतों मिशन की स्थिति और व्यापक रणनीतिक परिस्थितियों के आधार पर भी बदली जाती है। उपलब्ध विश्लेषणों में अमेरिकी जहाजों की स्थिति में बदलाव की बात तो सामने आई है लेकिन इसका एकमात्र कारण कासिम बसीर है यह स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हुआ है।

    फिलहाल कासिम बसीर ने ईरान की मिसाइल क्षमता को लेकर बहस जरूर तेज कर दी है। 1200 किलोमीटर की घोषित रेंज और संभावित टर्मिनल गाइडेंस जैसी क्षमताओं के कारण यह मिसाइल अमेरिकी नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक मानी जा रही है। आने वाले समय में इस हथियार का वास्तविक युद्धक प्रदर्शन और अमेरिका की समुद्री तैनाती में होने वाले बदलाव ही बताएंगे कि इसका रणनीतिक असर कितना बड़ा है।

  • ताइवान के पास अमेरिका-फिलीपींस की बड़ी चाल: NMESIS एंटी-शिप मिसाइल की तैनाती से चीन की बढ़ी बेचैनी

    ताइवान के पास अमेरिका-फिलीपींस की बड़ी चाल: NMESIS एंटी-शिप मिसाइल की तैनाती से चीन की बढ़ी बेचैनी


    नई दिल्ली ।अमेरिका और फिलीपींस ने ताइवान के बेहद करीब बटानेस प्रांत में अपने वार्षिक Balikatan सैन्य अभ्यास के दौरान NMESIS एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम तैनात किया है। यह प्रांत फिलीपींस का सबसे उत्तरी इलाका है और ताइवान से लगभग 100 मील दक्षिण में स्थित है, इसलिए इस तैनाती को चीन के लिए एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश माना जा रहा है।

    NMESIS यानी Navy Marine Expeditionary Ship Interdiction System एक भूमि-आधारित, रिमोट-ऑपरेटेड मिसाइल सिस्टम है, जिसे दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। Reuters के मुताबिक इसे C-130 विमान से बटानेस पहुंचाया गया और बेस्को इलाके में रखा गया, लेकिन यह सिर्फ प्रदर्शन और व्यवहार्यता जांच के लिए था, लाइव-फायर हमले के लिए नहीं। इसकी मारक क्षमता लगभग 185 किलोमीटर बताई गई है।

    अमेरिकी स्टाफ सार्जेंट डैरेन गिब्स के अनुसार, बटानेस जैसा इलाका सिस्टम को वास्तविक परिस्थितियों में परखने का मौका देता है, क्योंकि यहां प्रशिक्षण रोजमर्रा के माहौल से अलग है। उन्होंने यह भी कहा कि NMESIS को इस तरह बनाया गया है कि इसे दूर से संचालित किया जा सके, यानी इसके लिए वाहन के अंदर ड्राइवर या यात्री की जरूरत नहीं पड़ती।

    इस साल के Balikatan अभ्यास अब तक के सबसे बड़े अभ्यासों में से एक हैं। Reuters के मुताबिक इनमें 17,000 से ज्यादा सैनिक शामिल हैं, जिनमें करीब 10,000 अमेरिकी सैनिक हैं। अभ्यास 20 अप्रैल से 8 मई तक चल रहे हैं और इनमें समुद्री हमले, वायु-रक्षा और बहुराष्ट्रीय समन्वय की वास्तविक परिस्थितियों जैसी ट्रेनिंग पर जोर दिया जा रहा है।

    फिलीपींस के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभ्यास दूरदराज के इलाकों में हथियारों की तैनाती और संचालन की व्यवहार्यता जांचने के लिए भी जरूरी हैं। बटानेस में NMESIS की तैनाती को इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा बताया गया है।

    चीन ने इन अभ्यासों और अमेरिकी हथियारों की उपस्थिति पर बार-बार आपत्ति जताई है। Reuters के मुताबिक बीजिंग इसे क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला कदम मानता है, जबकि अमेरिका और फिलीपींस का कहना है कि ये अभ्यास किसी एक देश को निशाना बनाकर नहीं किए जा रहे।

    कुल मिलाकर, बटानेस में NMESIS की तैनाती सिर्फ एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य के बीच बदलते शक्ति-संतुलन का संकेत है। समुद्री युद्ध की रणनीति में अब छोटे द्वीप, रिमोट मिसाइल सिस्टम और तेज तैनाती वाले हथियार बेहद अहम हो चुके हैं।