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  • अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का कल्याण ही लक्ष्य', प्रशिक्षण महाअभियान में बोले CM योगी

    अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति का कल्याण ही लक्ष्य', प्रशिक्षण महाअभियान में बोले CM योगी


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखपुर में दो दिवसीय ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की विकास यात्रा को समर्पित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को भाजपा की वैचारिक नींव बताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रशिक्षण शिविर केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और आदर्शों को कार्यकर्ताओं के जीवन में उतारने का अभियान है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में मिले संस्कारों के आधार पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय जनसंघ के संगठन महामंत्री के रूप में संगठन को मजबूत आधार प्रदान किया।

    अंत्योदय को बताया विकास की मूल अवधारणा
    सीएम योगी ने कहा कि भारतीय राजनीति में ‘अंत्योदय’ का विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय की सबसे बड़ी देन है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की नीतियों का केंद्र समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति होना चाहिए। जब तक विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचता, तब तक सुशासन की अवधारणा अधूरी रहती है।

    उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय आर्थिक चिंतन को नई दिशा देते हुए अंत्योदय का सिद्धांत दिया, जिसे भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन और शासन दोनों में आत्मसात करने का प्रयास कर रही है।

    कार्यकर्ताओं को दिए संगठनात्मक मूल्यों के संदेश
    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश में चलाया जा रहा यह प्रशिक्षण महाअभियान कार्यकर्ताओं को राष्ट्रसेवा, संगठन, पारदर्शिता और जनकल्याण के मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता इन आदर्शों को अपने व्यवहार और कार्यशैली का हिस्सा बनाए, यही इस अभियान का उद्देश्य है।

    सोशल मीडिया पर भी दी शुभकामनाएं
    कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कार्यक्रम की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के महापुरुषों के आदर्श आज भी सार्वजनिक जीवन में शुचिता, पारदर्शिता और राष्ट्रसेवा के प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए प्रशिक्षण शिविर के सफल आयोजन की कामना की।

    उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम संगठन को मजबूत बनाने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं में वैचारिक स्पष्टता और जनसेवा की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

  • अंत्योदय योजना में नया फॉर्मूला प्रस्तावित, प्रति व्यक्ति 7 किलो राशन देने की तैयारी से बड़े परिवारों को मिलेगा फायदा

    अंत्योदय योजना में नया फॉर्मूला प्रस्तावित, प्रति व्यक्ति 7 किलो राशन देने की तैयारी से बड़े परिवारों को मिलेगा फायदा

    नई दिल्ली । देश के सबसे गरीब और वंचित परिवारों तक खाद्य सुरक्षा का लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार राशन वितरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार ने अंत्योदय अन्न योजना के तहत लागू मौजूदा परिवार-आधारित राशन प्रणाली को संशोधित करते हुए प्रति व्यक्ति आधार पर अनाज वितरण का प्रस्ताव रखा है। इस बदलाव को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में संशोधन के माध्यम से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार अब अंत्योदय अन्न योजना के पात्र परिवारों को परिवार की कुल सदस्य संख्या के आधार पर प्रति व्यक्ति सात किलोग्राम अनाज प्रतिमाह उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि किसी भी परिवार को मिलने वाले कुल राशन की अधिकतम सीमा 35 किलोग्राम ही रखी जाएगी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से बड़े परिवारों को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में अधिक न्यायसंगत लाभ मिल सकेगा।

    वर्तमान में अंत्योदय अन्न योजना के तहत लाभार्थी परिवारों को उनके सदस्यों की संख्या की परवाह किए बिना हर महीने 35 किलोग्राम अनाज प्रदान किया जाता है। दूसरी ओर प्राथमिकता श्रेणी के लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति पांच किलोग्राम अनाज मिलता है। इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से यह तर्क दिया जाता रहा है कि बड़े परिवारों में प्रति सदस्य उपलब्ध अनाज की मात्रा अपेक्षाकृत कम रह जाती है, जबकि वे सबसे कमजोर आर्थिक वर्ग में शामिल होते हैं।

    खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी संशोधन मसौदे में इस असमानता को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। विभाग का कहना है कि परिवार आधारित व्यवस्था प्रारंभिक चरण में कमजोर वर्गों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गई थी, लेकिन समय के साथ परिवारों के आकार में अंतर के कारण लाभ वितरण में असंतुलन दिखाई देने लगा है। ऐसे में सदस्य-आधारित प्रणाली अधिक व्यावहारिक और न्यायपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है।

    यदि प्रस्तावित नियम लागू होता है तो दो सदस्य वाले अंत्योदय परिवार को प्रतिमाह 14 किलोग्राम अनाज मिलेगा, जबकि तीन सदस्य होने पर 21 किलोग्राम और चार सदस्य होने पर 28 किलोग्राम अनाज आवंटित किया जा सकेगा। पांच या उससे अधिक सदस्यों वाले परिवारों को अधिकतम 35 किलोग्राम राशन मिलता रहेगा। इस प्रकार बड़े परिवारों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुरूप लाभ सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।

    सरकार ने इस प्रस्ताव को खाद्य और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव मानव जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति की खाद्य आवश्यकताओं को केंद्र में रखकर योजनाओं का संचालन किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल खाद्यान्न उपलब्ध कराना नहीं बल्कि जरूरतमंद आबादी के लिए पर्याप्त और सुलभ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत वर्तमान में करोड़ों लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से चावल और गेहूं उपलब्ध कराया जा रहा है। हाल के वर्षों में मुफ्त राशन वितरण की व्यवस्था ने गरीब परिवारों को राहत पहुंचाई है। अब सरकार इस प्रणाली को अधिक संतुलित और जरूरत आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक 2026 के मसौदे पर सरकार ने आम नागरिकों और संबंधित पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। 13 जुलाई तक प्राप्त होने वाले सुझावों के आधार पर प्रस्ताव का अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा। यदि संशोधन को मंजूरी मिलती है तो देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव माना जाएगा, जिसका सीधा प्रभाव लाखों अंत्योदय परिवारों पर पड़ सकता है।

  • दीनदयाल उपाध्याय: एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया नमन

    दीनदयाल उपाध्याय: एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया नमन


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके आदर्शों को देश-प्रदेश की प्रगति की प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि जब विश्व में साम्यवाद और समाजवाद की विचारधाराएँ व्यापक रूप से प्रभावी थीं तब दीनदयाल जी ने भारतीय सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत कर एकात्म मानववाद और अंत्योदय की कल्याणकारी दृष्टि दी। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को निरंतरता प्रदान करने का एक प्रभावी प्रयास था।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता तथा समर्थ भारत निर्माण के चिंतक थे। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चिंतक संगठनकर्ता और भारतीय जनसंघ के सह संस्थापक रहे। दीनदयाल जी का मानना था कि स्वतंत्रता तभी सार्थक होती है जब वह हमारी संस्कृति की अभिव्यक्ति का साधन बने। उनके विचारों ने समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति के जीवन में उजास लाने का मार्ग प्रशस्त किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव लालघाटी स्थित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी के विचार भारतीय मानस को सशक्त राष्ट्र और समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के निकट विकसित ‘नमो वन’ का अवलोकन किया और रुद्राक्ष का पौधा रोपा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दीनदयाल जी के विचारों के अनुरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीब किसान युवा और महिलाओं के कल्याण के साथ सभी को प्रगति के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार भी इसी दिशा में निरंतर सक्रिय है और विश्व में देश का प्रभाव बढ़ रहा है।

    डॉ. यादव ने यह भी बताया कि पुण्यतिथि पर केश शिल्पियों को उपलब्ध कराई जा रही किट दीनदयाल जी के अंत्योदय के विचारों को व्यावहारिक रूप देने का सार्थक प्रयास है। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग भोपाल महापौर मालती राय रविंद्र यति सहित अन्य जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।