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  • गुजरात कोर्ट का बड़ा आदेश: ब्राह्मण समुदाय पर टिप्पणी मामले में अनुराग कश्यप के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने के निर्देश

    गुजरात कोर्ट का बड़ा आदेश: ब्राह्मण समुदाय पर टिप्पणी मामले में अनुराग कश्यप के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने के निर्देश



    नई दिल्ली।
    फिल्म निर्माता और अभिनेता अनुराग कश्यप एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में फंस गए हैं। गुजरात के सूरत की एक अदालत ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समुदाय को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है, जिस पर शिकायतकर्ता ने गंभीर आपत्ति जताई थी।

    सूरत की JMFC (जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास) अदालत ने स्थानीय वकील और विश्व हिंदू परिषद के नेता कमलेश रावल द्वारा दायर निजी शिकायत पर आंशिक रूप से सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने माना कि शुरुआती स्तर पर यह पर्याप्त आधार दिखाई देता है कि कश्यप की पोस्ट से किसी विशेष समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं और समाज में तनाव फैलने की स्थिति बन सकती है।

    कोर्ट ने आदेश में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज करने को कहा है, जिनमें धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाना), धारा 352 (जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करना) और धारा 353(2) (भ्रामक या गलत जानकारी फैलाना) शामिल हैं।

    यह पूरा विवाद फिल्म ‘फुले’ के ट्रेलर रिलीज से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ था। आरोप है कि 16 अप्रैल को ‘ऑल इंडिया ब्राह्मण समाज’ ने ट्रेलर पर आपत्ति जताई थी, जिसके जवाब में अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक टिप्पणी की थी, जिसे समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक माना गया।

    शिकायतकर्ता कमलेश रावल का दावा है कि कश्यप ने एक बार नहीं, बल्कि दो बार ऐसी टिप्पणियां कीं, जिससे ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत हुईं और सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्मी हस्तियों की बातों का समाज पर बड़ा असर पड़ता है, इसलिए इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

    शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे पहले 2020 में भी कश्यप के खिलाफ इसी तरह की आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें उन्हें कई बार समन भेजे गए थे, लेकिन वे अदालत में पेश नहीं हुए थे। इसके चलते उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने की भी बात सामने आई है।

    इस आदेश के बाद अब मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और अनुराग कश्यप को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा।

  • अनुराग कश्यप का गुस्सा बना ‘गुलाल’, 8 साल की मेहनत के बाद बनी कल्ट फिल्म..

    अनुराग कश्यप का गुस्सा बना ‘गुलाल’, 8 साल की मेहनत के बाद बनी कल्ट फिल्म..


    नई दिल्ली: बॉलीवुड के ऑफ-बीट और बोल्ड निर्देशक अनुराग कश्यप हमेशा अपनी कहानियों के लिए चर्चित रहे हैं। लेकिन उनकी एक खास फिल्म ऐसी है जो उनके जीवन के गुस्से और समाज में व्याप्त असमानताओं का नतीजा बनी। यह फिल्म है गुलाल जिसे बनाने में पूरे 8 साल लगे और यह आज भी दर्शकों की पसंदीदा फिल्मों में शामिल है।

    गुलाल की कहानी की शुरुआत हुई साल 2001 में। उस वक्त अनुराग कश्यप जीवन के ऐसे पड़ाव पर थे जब उन्हें हर चीज़ पर गुस्सा आता था। उन्होंने कहा कि उस साल सेंसर बोर्ड ने उनकी फिल्म को पांच सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया था और उन्हें महसूस हुआ कि वे हर चीज़ से नाराज हैं-चाहे वह नए राज्य बनना हो या प्यार में पड़ने की घटनाएं। इसी गुस्से और असंतोष ने उन्हें गुलाल बनाने की प्रेरणा दी।फिल्म की कहानी उन्हें तब मिली जब अभिनेता पंकज सारस्वत ने उन्हें राजा चौधरी से मिलवाया। राजा ने कॉलेज पॉलिटिक्स पर लिखी एक कहानी साझा की जिसे अनुराग ने पृष्ठभूमि देने का निर्णय लिया। इसके लिए वे जयपुर गए और वहां कई राजपरिवारों के सदस्यों से मुलाकात की। इन मुलाकातों ने फिल्म की कहानी को वास्तविकता और इतिहास से जोड़ने में मदद की।

    गुलाल की रिसर्च में अनुराग कश्यप ने इतिहासकार शारदा द्विवेदी रोमिला थापर और कई अन्य लेखकों के लेख पढ़े। उन्होंने भारत गणराज्य में राजपूतों की भूमिका और पटियाला रिपोर्ट जैसी ऐतिहासिक जानकारियों को फिल्म की कहानी में समाहित किया। इस तरह फिल्म की पटकथा तैयार हुई।फिल्म का संगीत भी खास रहा। जब अनुराग कश्यप फिल्म लिख रहे थे तब पीयूष मिश्रा ने संगीत की दुनिया में अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने फिल्म के लिए ऐसे गाने लिखे जो आज भी याद किए जाते हैं। शुरुआत में प्रोड्यूसर नहीं मिलने की वजह से फिल्म का निर्माण अटक गया लेकिन बाद में जी मोशन पिक्चर्स ने फिल्म को उठाया और आखिरकार यह रिलीज हो सकी।

    गुलाल बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही लेकिन इसके बावजूद इसने दर्शकों के बीच कल्ट फिल्म का दर्जा पा लिया। इसकी कहानी राजनीति और संगीत आज भी फिल्म प्रेमियों को आकर्षित करते हैं। IMDb पर इस फिल्म को 8 रेटिंग मिली है जो इसे और भी खास बनाती है।गुलाल सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि अनुराग कश्यप के गुस्से शोध और जुनून का परिणाम है। 8 साल की मेहनत और सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर तीव्र नजर ने इसे भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया।