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  • बंगाल में SIR से जुड़ी 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित, तेजी से निपटारे के लिए 42 चुनाव ट्रिब्यूनल की मांग

    बंगाल में SIR से जुड़ी 37 लाख से अधिक अपीलें लंबित, तेजी से निपटारे के लिए 42 चुनाव ट्रिब्यूनल की मांग

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के बाद सामने आई अपीलों के निपटारे को लेकर लंबित मामलों की संख्या लगातार बड़ी बनी हुई है। राज्य में SIR से संबंधित कुल 38,20,683 अपीलें दाखिल की गई थीं। इनमें से अब तक करीब 1.02 लाख मामलों का ही निपटारा हो सका है, जबकि 37 लाख से अधिक अपीलें अभी लंबित हैं।

    लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए इनके निपटारे की गति बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मौजूदा रफ्तार बनी रहने पर सभी लंबित अपीलों के निपटारे में लंबा समय लगने का अनुमान सामने आया है। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए ट्रिब्यूनल की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।

    वर्तमान में पश्चिम बंगाल में इन अपीलों की सुनवाई के लिए 19 ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार इनकी संख्या बढ़ाकर 42 किए जाने की जरूरत बताई गई है। इसका उद्देश्य लंबित मामलों की सुनवाई को तेज करना और बड़ी संख्या में जमा अपीलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा करना है।

    लंबित अपीलों में बड़ी संख्या उन मामलों की है, जिनमें SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 22 लाख से अधिक अपीलें ऐसे मतदाताओं की ओर से दाखिल की गई हैं, जिनके नाम सूची से हटा दिए गए थे। इसके अलावा करीब 16 लाख अपीलें ऐसी हैं, जिनमें SIR के बाद मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को चुनौती दी गई है।

    आंकड़ों के मुताबिक ट्रिब्यूनल के सामने पहुंची करीब 38 लाख अपीलों में 57 प्रतिशत से अधिक मामले मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े हैं। इससे स्पष्ट है कि लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा मतदाता सूची में नाम हटने से संबंधित विवादों से जुड़ा हुआ है।

    ट्रिब्यूनल की संख्या 42 करने के प्रस्ताव के पीछे एक प्रमुख आधार राज्य के संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या भी है। पश्चिम बंगाल में कुल 42 लोकसभा क्षेत्र हैं। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक संसदीय क्षेत्र के अनुरूप एक ट्रिब्यूनल होने से मामलों की सुनवाई और निपटारे की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है।

    SIR के बाद मतदाता सूची में नामों को लेकर दाखिल हुई अपीलों का निपटारा चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में लंबित मामलों के कारण सुनवाई की प्रक्रिया पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में अतिरिक्त ट्रिब्यूनल गठित करने का प्रस्ताव लंबित अपीलों के बोझ को कम करने और सुनवाई की गति बढ़ाने से जुड़ा है।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रही SIR संबंधी कार्यवाही के संदर्भ में सामने आया है। लंबित अपीलों की संख्या, मौजूदा ट्रिब्यूनलों की क्षमता और मामलों के निपटारे की गति को देखते हुए संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। अब इस दिशा में आगे की प्रक्रिया और अदालत के समक्ष प्रस्ताव पर होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

  • ईरान के राष्ट्रपति ने PM मोदी से की अमेरिका-इजरायल को हमला करने से रोकेने की अपील

    ईरान के राष्ट्रपति ने PM मोदी से की अमेरिका-इजरायल को हमला करने से रोकेने की अपील


    तेहरान।
    मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष (Middle East Conflict) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन (Iranian President Masoud Pezeshkian) से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मार्ग को सुरक्षित रखने की भी अपील की। ईरान के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के समक्ष विदेशी हस्तक्षेप के बिना क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने के लिए पश्चिम एशियाई देशों को शामिल करते हुए एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।

    वार्ता के ईरानी ब्योरे के अनुसार, पेजेश्कियन ने भारत से आग्रह किया कि वह ब्रिक्स (BRICS) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल की शत्रुता को रोकने के लिए अपनी स्वतंत्र भूमिका का लाभ उठाए।

    आपको बता दें कि ब्रिक्स दुनिया की पांच सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है। ब्रिक्स के सदस्य देशों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। वर्ष 2024 में समूह में विस्तार के बाद अब इसके सदस्य देशों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। नए सदस्यों में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।


    परमाणु हथियारों के पक्ष में नहीं थे खामेनेई

    ब्योरे के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने उस अमेरिकी दावे को खारिज कर दिया कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उसके खिलाफ सैन्य हमला शुरू किया था। ब्योरे में कहा गया है कि पेजेश्कियन ने इस बात पर भी जोर दिया कि दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने परमाणु हथियारों का दृढ़ता से विरोध किया था और उनके विकास की दिशा में किसी भी कदम को प्रतिबंधित करने के लिए प्रशासनिक और धार्मिक दोनों तरह के निर्देश जारी किए थे।


    पीएम मोदी ने दी ईद की बधाई

    ईरान के राष्ट्रपति के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें ईद और नवरोज की शुभकामनाएं दीं और आशा जताई कि त्योहार का यह मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाए। प्रधानमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ”राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात की और ईद एवं नवरोज की शुभकामनाएं दीं। हमने आशा व्यक्त की कि त्योहार का मौसम पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लाए।”


    ईरान के समर्थन की सराहना

    मोदी ने क्षेत्र में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं। उन्होंने कहा, ”नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया कि जहाजरानी मार्ग खुले और सुरक्षित रहें।” प्रधानमंत्री ने ईरान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरान के निरंतर समर्थन की भी सराहना की।

    मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच टेलीफोन पर यह दूसरी बातचीत थी। पश्चिम एशियाई गैस केंद्रों पर नए हमलों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के मद्देनजर दोनों नेताओं के बीच यह वार्ता हुई।


    अमेरिका-इजरायल को रोकना होगा

    ईरान द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र से इतर विश्व नेताओं के साथ संवाद करने के लिए ईरान की निरंतर तत्परता को दोहराया जिसमें तेहरान की शांतिपूर्ण परमाणु गतिविधियों की पुष्टि और निगरानी के लिए वार्ताएं शामिल हैं। वार्ता के ब्योरे के अनुसार, ”राष्ट्रपति ने पश्चिमी एशिया के देशों से मिलकर एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिसका उद्देश्य विदेशी हस्तक्षेप के बिना क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करना है। ब्योरे के मुताबिक, ”उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्षेत्र में युद्ध और संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और इजरायल द्वारा आक्रामकता का तत्काल समापन आवश्यक है।”

    ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता का जिक्र करते हुए पेजेश्कियन ने समूह से ईरान के खिलाफ आक्रामकता रोकने और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता की रक्षा करने में स्वतंत्र भूमिका निभाने का आह्वान किया। ईरान की ओर से जारी वार्ता के ब्योरे में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और फारस की खाड़ी में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया।

    ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी को ईरान की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी थी और क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम पर अपना दृष्टिकोण साझा किया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में उभर रही सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने अपने पड़ोसी देशों और इजरायल को निशाना बनाया। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को भी नियंत्रित करता है, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्ग है। इसके माध्यम से विश्व के 20 प्रतिशत ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। संघर्ष के बाद से, ईरान ने बहुत कम जहाजों को इससे गुजरने की अनुमति दी है। संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के नेताओं से भी बात की है। इनमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, फ्रांस और मलेशिया के नेता शामिल हैं।

  • ईरान की मार से बैकफुट पर आया इजरायल, शिया मुल्क के लोगों से लगाने लगा गुहार

    ईरान की मार से बैकफुट पर आया इजरायल, शिया मुल्क के लोगों से लगाने लगा गुहार

    वाशिंगटन। अमेरिका और इजरायल ने एकजुट होकर ईरान पर अटैक कर दिया. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई मारे जा चुके हैं. सेना के कई ठिकाने तबाह हो चुके हैं, लेकिन तेहरान के पास मिसाइल्‍स और ड्रोन का भंडार अभी भी बाकी है.
    यही वजह है कि ईरान की तरफ से इजरायल और अरब देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन अटैक किया जा रहा है. ईरान के साथ ही इजरायल पर भी युद्ध का काफी असर पड़ा है. व्‍यापक पैमाने पर तबाही मची है. अमेरिका और इजरायल का अनुमान था कि खामेनेई के मारे जाने के बाद ईरान आसानी से सरेंडर कर देगा, पर इसके आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं. दूसरी तरफ, दुनिया भर में एनर्जी संकट जैसी स्थिति पैदा हो गई है. ऐसे में इजरायल के रुख में नरमी दिखने लगी है.
    बेंजामिन नेतन्‍याहू बैकफुट पर दिख रहे हैं. शायद यही वजह है कि इजरायल पीएम ने ईरान की जनता से खास गुहार लगाई है. उन्‍होंने ईरानी जनता के लिए भावुक संदेश जारी किया है.

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान की जनता को संबोधित करते हुए एक कड़ा और भावनात्मक संदेश जारी किया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ईरान के लोगों के लिए जीवन में एक बार मिलने वाला अवसर है, जिसके जरिए वे अयातुल्ला खामेनेई के शासन को हटाकर अपनी स्वतंत्रता हासिल कर सकते हैं. नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव और संघर्ष लगातार बढ़ रहा है.

    नेतन्याहू ने अपने संदेश में कहा कि इजरायल और अमेरिका मिलकर तेहरान के तानाशाहों के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि दोनों देशों की कार्रवाई से ईरान की सत्ता से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है और इस अभियान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े हजारों लड़ाके तथा कई मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए गए हैं.
    हमारा टार्गेट ईरानी शासन के ठिकाने – नेतन्‍याहू
    इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य केवल ईरानी शासन के ठिकाने हैं, न कि आम नागरिक. उन्होंने कहा कि इजरायल पूरी कोशिश कर रहा है कि ईरान की जनता को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे.
    उनके मुताबिक, इजरायल खुद को ईरान के लोगों का सहयोगी मानता है और उनकी संस्कृति, संप्रभुता तथा विरासत का सम्मान करता है. नेतन्याहू ने अपने संबोधन में दावा किया कि अयातुल्ला और उनके सहयोगी अब भाग रहे हैं और उनके पास छिपने की कोई सुरक्षित जगह नहीं बची है. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ऐसी परिस्थितियां बनाई जाएंगी, जिससे ईरान की जनता अपने भविष्य का फैसला खुद कर सके.