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  • टाटा संस का IPO होगा लॉन्च…. RBI ने खारिज किया एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने के आवेदन

    टाटा संस का IPO होगा लॉन्च…. RBI ने खारिज किया एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने के आवेदन


    नई दिल्ली।
    अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही टाटा ग्रुप (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons ) का आईपीओ (IPO) लॉन्च होगा। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) ने टाटा संस को प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया है। इससे टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना जरूरी हो गया है। कानूनी विशेषज्ञ एचपी रानीना और कॉरपोरेट गवर्नेंस विश्लेषक श्रीराम सुब्रमणियन ने कहा कि रिजर्व बैंक के फैसले के बाद टाटा संस के सामने लागू लिस्टिंग नियमों का पालन करने का विकल्प बचता है।


    रिटेल निवेशकों को क्या फायदा?

    टाटा संस के आईपीओ आने से इसमें रिटेल निवेशक हिस्सेदारी खरीद सकेंगे। अभी आम निवेशक टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा मोटर्स, TCS, टाटा स्टील, टाटा केमिकल्स जैसी अलग-अलग लिस्टेड टाटा कंपनियों के शेयर खरीद सकते हैं लेकिन टाटा संस में सीधे निवेश नहीं कर सकते क्योंकि यह अनलिस्टेड है। अब अगर लिस्टिंग होती है तो शेयरों की खरीद-बिक्री की जा सकेगी।


    टाटा संस की कैसे बढ़ीं मुश्किलें

    दरअसल, आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में वर्गीकृत किया था और ऐसी संस्थाओं के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना अनिवार्य किया गया था। टाटा संस के लिए मूल समयसीमा 30 सितंबर 2025 रखी गई थी। टाटा संस ने इस दायित्व से बचने के लिए 2024 में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया और एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन वापस लेने का आवेदन किया था। आरबीआई ने आवेदन पर फैसला लंबित रखा और बाद में भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी की सूचियों में शामिल करता रहा।


    जून 2026 में आरबीआई ने बदले नियम

    जून 2026 से आरबीआई ने कुछ नियमों में बदलाव किए। इसके तहत 1 लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की एसेट्स वाली कोई भी एनबीएफसी अपने-आप अपर-लेयर श्रेणी में आ जाती है। मार्च, 2026 तक टाटा संस की परिसंपत्तियां दो लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई गई हैं। अगस्त में जारी अपर-लेयर सूची में टाटा संस 17 संस्थाओं में एकमात्र गैर-सूचीबद्ध निजी इकाई थी। इस सूची में आरईसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और भारतीय रेलवे वित्त निगम जैसी सरकारी एनबीएफसी भी शामिल हैं, जिन्हें सूचीबद्धता की अनिवार्यता से छूट हासिल है।

    शेयरधारकों में मतभेद
    हालांकि, टाटा संस के आईपीओ की राह में कई दिक्कतें भी हैं। सूत्रों की मानें तो सूचीबद्धता को लेकर टाटा संस के शेयरधारकों के बीच भी मतभेद हैं। नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले टाटा ट्रस्ट्स के पास कंपनी की 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है और वह सूचीबद्धता का विरोध करता रहा है। दूसरी ओर, करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी समूह सूचीबद्धता के पक्ष में रहा है और इससे अपनी हिस्सेदारी का मूल्य हासिल करने की बात करता रहा है।


    चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति नहीं होने का भी कारण

    यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब टाटा संस में नेतृत्व और निदेशक मंडल को लेकर मतभेद की खबरें हैं। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अगले साल फरवरी में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। ऐसी खबरें हैं कि टाटा संस की सूचीबद्धता का मुद्दा उन कारणों में भी शामिल था जिनकी वजह से नोएल टाटा ने चेयरमैन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया था। रतन टाटा के सौतेले भाई और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा टाटा संस के निदेशक मंडल के सदस्य भी हैं।

    चर्चा है कि वह चंद्रशेखरन से यह आश्वासन चाहते थे कि टाटा संस को सूचीबद्ध होने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। वहीं, चंद्रशेखरन ने कथित तौर पर कहा था कि किसी नियामकीय या कानूनी मामले के नतीजे को पहले से तय नहीं माना जा सकता। नोएल टाटा ने समूह के कुछ अन्य कारोबार में हो रहे घाटे का मुद्दा भी उठाया था। इनमें टाटा डिजिटल और एयर इंडिया शामिल हैं, जिन्हें चंद्रशेखरन के करीब एक दशक के कार्यकाल में शुरू या अधिग्रहीत किया गया था।

  • US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम

    US: सरकारी मदद पाने वाले प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन हो सकते हैं रद्द…. 18 सितंबर को लागू होंगे नए नियम


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में स्थायी नागरिकता यानी ग्रीन कार्ड (Green Card Applications) पाने की कोशिश कर रहे प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ट्रंप प्रशासन ने सार्वजनिक बोझ से जुड़े नियमों का दायरा बढ़ा दिया है। नए नियम के तहत सरकारी आर्थिक मदद लेने वाले कुछ प्रवासियों के ग्रीन कार्ड आवेदन (Green Card Applications) पर सवाल उठ सकते हैं और आवेदन खारिज भी किया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (U.S. Citizenship and Immigration Services) का यह नियम 18 सितंबर से लागू होगा। इसका असर अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और उनके परिवारों पर भी पड़ सकता है।


    क्या सरकारी मदद लेने से ग्रीन कार्ड पर असर पड़ेगा?

    पहले सार्वजनिक बोझ का आकलन मुख्य रूप से दो तरह की सरकारी मदद के आधार पर किया जाता था। नए नियम में अधिकारियों को ज्यादा पहलुओं को देखने का अधिकार दिया गया है। अब आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक हालत और शिक्षा को भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा आवेदक पर निर्भर लोगों की ओर से ली गई कुछ सरकारी मदद को भी आवेदन पर फैसला करते समय ध्यान में रखा जा सकता है।


    भारतीयों पर कितना पड़ सकता है असर?
    वर्ष 2023 में 78,100 भारतीयों को अमेरिका का ग्रीन कार्ड मिला था। इनमें करीब 60 प्रतिशत भारतीयों ने परिवार के किसी सदस्य या अमेरिकी नागरिक रिश्तेदार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल किया था। नए नियम के कारण ऐसे परिवारों में सरकारी सहायता लेने की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है। अगर परिवार का कोई सदस्य सरकारी सब्सिडी का इस्तेमाल करता है तो अधिकारी आवेदक की आयु, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए आवेदन पर फैसला कर सकते हैं।


    क्या अधिकारियों को आवेदन खारिज करने की ज्यादा ताकत मिलेगी?

    आव्रजन मामलों के जानकारों के अनुसार नए नियम से अधिकारियों के पास आवेदन को लेकर फैसला करने की गुंजाइश बढ़ जाएगी। यानी केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि आवेदक ने सरकारी मदद ली है या नहीं। अधिकारी उसकी पूरी परिस्थिति को देखकर यह आकलन कर सकते हैं कि वह भविष्य में सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर हो सकता है या नहीं। इससे ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त हो सकती है।


    किन लोगों को नियम से छूट मिलेगी?

    नए नियम का असर सभी प्रवासियों पर एक जैसा नहीं होगा। शरणार्थियों, उत्पीड़न के पीड़ितों और कुछ विशेष श्रेणियों के आवेदकों को इससे छूट दी गई है। यानी इन लोगों के आवेदन पर सार्वजनिक बोझ से जुड़े नए नियम उसी तरह लागू नहीं होंगे। हालांकि सामान्य ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए उम्र, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और परिवार की परिस्थितियां अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।


    18 सितंबर के बाद क्या बदलेगा?
    यह नया नियम 2022 में बाइडन प्रशासन के दौरान लागू किए गए नियम को रद्द करने के बाद आया है। 18 सितंबर से इसके लागू होने के बाद ग्रीन कार्ड आवेदन की जांच में सरकारी सहायता के साथ आवेदक की व्यक्तिगत और पारिवारिक स्थिति को भी ज्यादा महत्व दिया जाएगा। भारतीयों की बड़ी संख्या परिवार आधारित ग्रीन कार्ड के जरिए स्थायी नागरिकता हासिल करती है। ऐसे में नए नियम के बाद भारतीय आवेदकों को अपनी आर्थिक और पारिवारिक स्थिति को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है।

  • बैंकिंग में करियर का सुनहरा मौका, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने निकाली 1865 अप्रेंटिस वैकेंसी

    बैंकिंग में करियर का सुनहरा मौका, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने निकाली 1865 अप्रेंटिस वैकेंसी

    नई दिल्ली । बैंकिंग क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर सामने आया है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने देशभर में अप्रेंटिस पदों पर बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इस भर्ती के तहत कुल 1865 पदों को भरा जाएगा, जिससे हजारों उम्मीदवारों को बैंकिंग सेक्टर में करियर शुरू करने का मौका मिलेगा।

    इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 19 मई तय की गई है, जिसके बाद कोई भी फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए इच्छुक उम्मीदवारों को समय रहते आवेदन पूरा करने की सलाह दी जा रही है।

    शैक्षणिक योग्यता के अनुसार, आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होना आवश्यक है। यह डिग्री किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से प्राप्त होनी चाहिए। इसके साथ ही कुछ अन्य पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं, जिन्हें पूरा करना अनिवार्य है।

    उम्र सीमा की बात करें तो उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है। आयु की गणना एक निर्धारित तिथि के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार आयु में छूट भी दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। इसमें सबसे पहले ऑनलाइन परीक्षा होगी, इसके बाद स्थानीय भाषा की परीक्षा ली जाएगी और अंतिम चरण में दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को चयनित किया जाएगा।

    चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण अवधि के दौरान मासिक स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा, जिसकी राशि कार्यस्थल और पद के अनुसार तय होगी। यह अवसर विशेष रूप से उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है जो बैंकिंग क्षेत्र में अनुभव हासिल करना चाहते हैं।

    आवेदन शुल्क भी श्रेणी के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है। सामान्य और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क अधिक रखा गया है, जबकि महिला उम्मीदवारों और आरक्षित वर्ग के लिए यह राशि कम है। भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। उम्मीदवारों को पहले संबंधित पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, इसके बाद बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन फॉर्म भरना होगा। सभी जरूरी जानकारी भरने के बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे और शुल्क का भुगतान करके फॉर्म जमा करना होगा। अंत में भविष्य के उपयोग के लिए आवेदन की एक कॉपी सुरक्षित रखना जरूरी है।

  • एमपी बोर्ड सेकेंड एग्जाम का मौका 10वीं 12वीं के छात्रों के लिए आवेदन शुरू 7 मई से परीक्षा

    एमपी बोर्ड सेकेंड एग्जाम का मौका 10वीं 12वीं के छात्रों के लिए आवेदन शुरू 7 मई से परीक्षा


    भोपाल । मध्यप्रदेश में बोर्ड परीक्षा से जुड़े छात्रों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है जहां मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं की द्वितीय परीक्षा को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है इस फैसले के तहत उन छात्रों को बड़ा अवसर मिला है जो मुख्य परीक्षा में असफल रहे हैं या अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं

    बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय परीक्षा 7 मई 2026 से शुरू होगी इस परीक्षा में न केवल फेल हुए विद्यार्थी बल्कि वे छात्र भी शामिल हो सकेंगे जो अपने प्राप्त अंकों को बेहतर करना चाहते हैं यानी श्रेणी सुधार के इच्छुक छात्र भी इस मौके का लाभ उठा सकते हैं

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है छात्र एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 22 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना अनिवार्य होगा इसके बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा

    परीक्षा कार्यक्रम की बात करें तो 10वीं कक्षा की द्वितीय परीक्षा 7 मई से शुरू होकर 19 मई 2026 तक चलेगी वहीं 12वीं कक्षा की परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित की जाएगी इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 5 लाख विद्यार्थी इस द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकते हैं जो इसे एक बड़ा आयोजन बनाता है

    बोर्ड का यह कदम उन छात्रों के लिए राहत भरा है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए थे अब उन्हें बिना एक साल गंवाए अपनी स्थिति सुधारने का अवसर मिल रहा है इससे छात्रों का शैक्षणिक वर्ष भी सुरक्षित रहेगा और उनके करियर पर नकारात्मक प्रभाव भी कम होगा

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की द्वितीय परीक्षा प्रणाली छात्रों के लिए सकारात्मक पहल है क्योंकि इससे उन्हें एक और मौका मिलता है अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने का साथ ही यह व्यवस्था शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र हितैषी बनाती है कुल मिलाकर मध्यप्रदेश बोर्ड की यह पहल हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है जो अपने परिणाम को सुधारना चाहते हैं या आगे की पढ़ाई में बिना रुकावट के बढ़ना चाहते हैं