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  • US: ट्रंप को बड़ा झटका…. संसद में ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव मंजूर

    US: ट्रंप को बड़ा झटका…. संसद में ईरान युद्ध रोकने का प्रस्ताव मंजूर


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अपनी ही संसद (Parliament) में बड़े झटके का सामना करना पड़ा है. अमेरिकी संसद (American Parliament) के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ ने ईरान के खिलाफ युद्ध रोकने के एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है।

    डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व में लाए गए इस प्रस्ताव का मकसद बिना संसद (कांग्रेस) की अनुमति के ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के युद्ध पर रोक लगाना था. इस दौरान वोटिंग से साफ हो गया है कि ईरान के साथ युद्ध की आशंका को लेकर अमेरिकी सांसदों में चिंता काफी बढ़ गई है. खास बात ये है कि राष्ट्रपति ट्रंप की अपनी पार्टी यानी रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों ने भी ईरान जंग पर पाला बदल लिया।


    7 वोटों से पास हुआ प्रस्ताव

    सदन में ‘वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन’ पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला. प्रस्ताव के पक्ष में 215 वोट पड़े, जबकि इसके विरोध में 208 सांसदों ने मतदान किया. हालांकि दोनों सदनों में ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास मामूली बहुमत है, लेकिन इसके बावजूद ट्रंप इस प्रस्ताव को रोकने में नाकाम रहे. इस वोटिंग के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने अपनी ही पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर डेमोक्रेट्स के पक्ष में वोट डाला. कांग्रेस में ट्रंप के लिए ये किसी बड़े झटके से कम नहीं है।


    अब ट्रंप के पास क्या विकल्प?

    संसद के जानकारों का कहना है कि ये वोटिंग फिलहाल काफी हद तक प्रतीकात्मक है. इस प्रस्ताव को कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए अभी इसे अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन ‘सीनेट’ से भी पास कराना होगा. इसके बाद, अगर ट्रंप इस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो उस वीटो को बेअसर करने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी, जो कि बहुत मुश्किल है।

    हालांकि, ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि संसद में युद्ध के अधिकारों को सीमित करने वाले तीन प्रस्ताव पेश किए गए थे. लेकिन वो बेहद कम अंतर से नाकाम हो गए थे. इसके अलावा, पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने भी एक प्रक्रियात्मक वोटिंग के दौरान इसी तरह के एक प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था. सीनेट में भी ये सात बार की नाकाम कोशिशों के बाद कामयाब हुई थी।

  • बीमा सेक्टर में ऑटोमेटिक रूट से 100 फीसदी FDI को मंजूरी… अधिसूचना जारी

    बीमा सेक्टर में ऑटोमेटिक रूट से 100 फीसदी FDI को मंजूरी… अधिसूचना जारी


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने बीमा क्षेत्र (Insurance sector) में ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) (100% Foreign Direct Investment – FDI) को मंजूरी देने वाले नियम को शनिवार को अधिसूचित कर दिया। अधिसूचना के अनुसार विदेशी मुद्रा प्रबंधन (फेमा) नियम, 2026 के अनुसार, ऑटोमेटिक रूट (Automatic Route) से बीमा कंपनियों और उससे जुड़े मध्यस्थों, जिनमें ब्रोकर भी शामिल हैं, में अब 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति होगी। हालांकि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) (Life Insurance Corporation of India – LIC) के लिए यह सीमा 20 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

    संसद ने दिसंबर, 2025 में ‘सबका बीमा सबकी रक्षा’ विधेयक, 2025 पारित किया था, जिसके जरिये बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को स्वचालित मार्ग के तहत पहले के 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की मंजूरी दी गई। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन गया। इसके बाद फरवरी, 2026 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को अधिसूचित किया था। अब इस फैसले को अधिसूचित कर दिए जाने के बाद विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बीमा कंपनियों में पैसा लगाना आसान हो जाएगा।

    भारत का बीमा क्षेत्र विश्व के सबसे तेजी से बढ़ते बीमा क्षेत्रों में एक है। यह वैश्विक स्तर पर 10वें स्थान पर है और इसकी सालाना विकास दर लगभग 15-20 फीसदी है। जागरूकता में वृद्धि, डिजिटल तकनीक को अपनाने और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा पहले 74 फीसदी तक किए जाने के बाद इस क्षेत्र में तेज वृद्धि देखने को मिली थी। अब विदेशी निवेश सीमा को 100 फीसदी कर दिए जाने से इसकी वृद्धि की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है। बीमा नियामक आईआरडीएआई द्वारा शासित इस क्षेत्र में अभी 57 से अधिक कंपनियां शामिल हैं, जिनमें सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी का बड़ा हिस्सा है। हालांकि अब निजी क्षेत्र की बाजार हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है।

  • मप्र कैबिनेट ने 10500 करोड़ की पांच किसान हितैषी योजनाएं 5 साल तक निरंतर रखने को दी मंजूरी

    मप्र कैबिनेट ने 10500 करोड़ की पांच किसान हितैषी योजनाएं 5 साल तक निरंतर रखने को दी मंजूरी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को विधानसभा स्थित अपने कक्ष में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में 10500 करोड़ रुपये की लागत के पांच किसान हितैषी योजनाओं को अगले पांच साल तक निरंतर रखने की मंजूरी दी गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन में दी। उन्होंने सदन को अवगत कराया कि आज ही मध्य प्रदेश सरकार की मंत्रि-परिषद् की बैठक सम्पन्न हुई। किसान कल्याण वर्ष का किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए मंत्रि-परिषद् ने आज ही किसानों एवं कृषि से सम्बद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए करीब 10500 करोड़ रुपये की लागत के पांच किसान हितैषी योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रहेंगी और इसका सर्वाधिक लाभ मध्य प्रदेश के किसानों को मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन में कहा कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। आज की पूरी कैबिनेट हमने प्रदेश के किसानों को ही समर्पित की है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने दलहन फसल उड़द एवं तिलहन फसल सरसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उड़द को हम तय समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे और किसानों को तय समर्थन मूल्य के अतिरिक्त खरीदी गई उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि भी देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में सरसों का उत्पादन इस वर्ष 28 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इस वर्ष 3.38 मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन होने की संभावना है। हम सरसों की फसल को भावांतर योजना के दायरे में लेकर आ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन को मंत्रि-परिषद् की बैठक में आज लिए गए सभी निर्णयों की सिलसिलेवार जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने का निर्णय मंत्रि-परिषद् ने लिया है, उनमें निम्न योजनाएं शामिल हैं-


    प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2008.683 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की विकास के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति राज्य सरकार के माध्यम से की जा सकेगी।

    प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पर ड्रॉप मोर क्रॉप)

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2393.97 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से किसानों को अपने खेतों में स्प्रिंकलर/ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने के लिए शासकीय अनुदान 31 मार्च 2031 तक निरंतर मिलता रहेगा। इस योजना से किसान के खेतों में माइक्रो इरीगेशन सुविधाओं में अगले 5 सालों तक लगातार विस्तार होता रहेगा।

    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 3285.49 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से ऐसे किसान, जो धान, गेहूं, दलहन, मोटा अनाज, नगदी फसलों का पैदावार करते हैं, उन्हें क्षेत्र विस्तार, अपना उत्पादन बढ़ाने एवं मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग राज्य सरकार के जरिए निरंतर मिलता रहेगा।

    नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1011.59 करोड़ रुपये की इस योजना की स्वीकृति से प्रदेश में प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल में विस्तार 31 मार्च 2031 तक निरंतर होता रहेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का विकास जरूरी है। यह न केवल मध्य प्रदेश की नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होगी, वरन् मिट्टी की उर्वरता में सुधार, उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण सुरक्षा एवं रसायन मुक्त खाद्य उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।

    राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – ऑयल सीड योजना

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1793.87 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से प्रदेश के ऐसे सभी किसानों को, जो तिलहन फसलों का उत्पादन करते हैं, उन्हें निरंतर लाभ प्राप्त होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि करीब 10500 करोड़ रुपए की बड़ी लागत वाली इन पांच किसान मित्र योजनाओं को अगले 5 सालों तक निरंतर रखने से किसानों के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आमूल-चूल सुधार होगा। साथ ही रसायन युक्त उत्पादन से निजात पाने में भी ये 5 योजनाएं बेहद सहायक सिद्ध होंगी।

  • भारत से रिश्ते सुधारने के प्रयास…. यूनुस सरकार ने 50000 टन चावल खरीदने के प्रस्ताव को दी मंजूरी

    भारत से रिश्ते सुधारने के प्रयास…. यूनुस सरकार ने 50000 टन चावल खरीदने के प्रस्ताव को दी मंजूरी


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) की अंतरिम सरकार (Interim Government) के वित्त सलाहकार सालेहुद्दीन अहमद (Finance Advisor Salehuddin Ahmed) ने मंगलवार को कहा कि मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्तों को आसान बनाने के लिए कदम उठा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन आर्थिक हितों को राजनीतिक बयानबाजी से अलग रखते हुए भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है।

    अहमद ने यह टिप्पणी अपने कार्यालय में सरकारी खरीद से जुड़े सलाहकार परिषद समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में की। उन्होंने कहा कि मुख्य सलाहकार भारत के साथ राजनयिक रिश्तों में सुधार के लिए विभिन्न हितधारकों से संवाद कर रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या यूनुस ने सीधे भारत से बात की है, तो अहमद ने कहा कि मुख्य सलाहकार ने सीधे तौर पर नहीं, लेकिन इस मसले से जुड़े लोगों से बातचीत जरूर की है।

    वित्त सलाहकार ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश की व्यापार नीति राजनीतिक कारणों से संचालित नहीं होती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भारत से चावल आयात करना वियतनाम या अन्य देशों की तुलना में सस्ता पड़ता है, तो आर्थिक दृष्टि से भारत से ही खरीदना उचित है। अहमद ने बताया कि भारत के बजाय वियतनाम से चावल मंगाने पर प्रति किलोग्राम लगभग 10 टका (0.082 अमेरिकी डॉलर) अधिक खर्च आता है।

    इस बीच, बांग्लादेश सरकार ने मंगलवार को भारत से 50,000 टन चावल खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। अहमद ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच अच्छे संबंधों की दिशा में भी मददगार साबित हो सकता है, साथ ही इससे बांग्लादेश को आर्थिक लाभ भी होगा।

    अहमद की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कूटनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ढाका और नई दिल्ली के बीच संबंध 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। हाल के महीनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया है और दोनों राजधानियों समेत विभिन्न स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी हुए हैं।

    हालांकि, वित्त सलाहकार ने इन आकलनों से आंशिक रूप से असहमति जताई। उन्होंने कहा- स्थिति इतनी खराब नहीं हुई है। उनके अनुसार, बाहरी तौर पर भले ही ऐसा लगे कि कई तरह की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन कुछ बयान ऐसे होते हैं जिन्हें पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।

    जब उनसे पूछा गया कि क्या लोग या बाहरी ताकतें भारत विरोधी बयान दे रही हैं, तो अहमद ने कहा कि बांग्लादेश किसी भी तरह की कड़वाहट नहीं चाहता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई बाहरी तत्व दोनों देशों के बीच तनाव भड़काने की कोशिश कर रहा है, तो यह किसी के भी हित में नहीं है।

    अहमद ने स्पष्ट किया कि ऐसे बयान या घटनाएं राष्ट्रीय अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं, बल्कि वे बांग्लादेश के लिए अनावश्यक रूप से जटिल हालात पैदा करती हैं। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य व्यावहारिक और आर्थिक तर्कों के आधार पर फैसले लेना और पड़ोसी देशों के साथ स्थिर तथा सहयोगपूर्ण रिश्ते बनाए रखना है।

    बहरहाल, बांग्लादेश सरकार के इस रुख से संकेत मिलता है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक लाभ को प्राथमिकता देते हुए भारत के साथ संबंधों में सुधार की राह तलाश रही है, भले ही राजनीतिक बयानबाजी और कूटनीतिक तनावों की चुनौतियां बनी हुई हों।

  • आर्थिक संकट से जूझ रहे Pak को बड़ी राहत.. वर्ल्ड बैंक ने भी दी 70 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी

    आर्थिक संकट से जूझ रहे Pak को बड़ी राहत.. वर्ल्ड बैंक ने भी दी 70 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी


    इस्लामाबाद।
    आर्थिक संकट (Economic crisis) से जूझ रहे पाकिस्तान (Pakistan) को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से लगातार राहत मिल रही है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) से बड़ी राशि की मंजूरी के बाद अब वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने भी पाकिस्तान के लिए करोड़ों डॉलर का ऐलान किया है। वर्ल्ड बैंक ने शुक्रवार को कहा कि उसने पाकिस्तान को 700 मिलियन डॉलर (70 करोड़ डॉलर) की वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है। यह राशि एक बहुवर्षीय पहल के तहत दी जा रही है, जिसका उद्देश्य देश की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता को मजबूत करना और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी में सुधार करना है।

    विश्व बैंक के मुताबिक, यह धनराशि समावेशी विकास के लिए सार्वजनिक संसाधन – बहु-चरणीय प्रोग्रामेटिक दृष्टिकोण (PRID-MPA) के अंतर्गत जारी की जाएगी। इस कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान को कुल मिलाकर 1.35 अरब डॉलर तक की वित्तीय सहायता मिल सकती है। स्वीकृत 700 मिलियन डॉलर में से 600 मिलियन डॉलर केंद्र स्तर के कार्यक्रमों के लिए निर्धारित हैं, जबकि 100 मिलियन डॉलर दक्षिणी प्रांत सिंध में एक प्रांतीय कार्यक्रम को समर्थन देने के लिए दिए जाएंगे।

    यह मंजूरी ऐसे समय आई है, जब अगस्त महीने में विश्व बैंक ने पाकिस्तान के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत पंजाब में प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए 47.9 मिलियन डॉलर का अनुदान भी स्वीकृत किया था।

    हालांकि, पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की चिंता भी सामने आ चुकी है। नवंबर में प्रकाशित IMF-विश्व बैंक की एक संयुक्त रिपोर्ट, जिसे पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया था, में कहा गया कि देश में खंडित नियामक व्यवस्था, अपारदर्शी बजट प्रक्रिया और राजनीतिक दखल निवेश को प्रभावित कर रहे हैं और राजस्व संग्रह को कमजोर बना रहे हैं।

  • MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी

    MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने विभिन्न परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए राहतों का ऐलान करते हुए राज्य की कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा सुधार करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक (Cabinet meeting) में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थाई और अस्थाई पदों में भेदभाव को समाप्त करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने पर भी मुहर लगाई है।

    कैबिनेट ने अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के डूब प्रभावितों के लिए 1,782 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी। डूब प्रभावितों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में प्रावधान किए गए 1656 करोड़ रुपये के अतिरिक्त 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया। सिंचाई और जलविद्युत की परियोजनाएं अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में चल रही हैं।

    अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना 5,512 करोड़ रुपये की है। इससे 71 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 125 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इन तीनों परियोजनाओं से कुल 13,873 परिवार प्रभावित होंगे, जिन्हें विशेष पैकेज के तहत प्रति परिवार 12.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। एससी और एसटी के 50 हजार परिवारों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी।

    कैबिनेट ने 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में विभाग स्तर पर 10 लाख या उससे अधिक के कार्यों पर मुहर लगाई है। इसके तहत 693 करोड़ 76 लाख रुपये के लगभग 3810 काम होंगे। भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के मेंटिनेंस के लिए भी 2025-26 के दौरान 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है।

    कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को साल 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 905 करोड़ 25 लाख रुपये को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थायी और अस्थायी पदों के विभेदीकरण को खत्म करने की मंजूरी दी। इस दिशा में स्वीकृत अस्थायी पदों को स्थायी पदों में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

  • मप्र कैबिनेट का फैसलाः नगरीय विकास योजनाओं के लिए 500 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर

    मप्र कैबिनेट का फैसलाः नगरीय विकास योजनाओं के लिए 500 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को विधानसभा के समिति कक्ष में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। बैठक में नगरीय क्षेत्र के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं पर निर्णय लिए गए। सरकार ने मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को वर्ष 2026-27 तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके लिए अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी अहम फैसले लिए गए, जिससे सरकार के विकास एजेंडे का स्पष्ट संकेत मिलता है।

    बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना के अंतर्गत अब तक 1,070 करोड़ रुपये की 1,062 परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इनमें 325 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, 407 कार्य प्रगतिरत हैं और 330 परियोजनाएं डीपीआर स्वीकृति या निविदा प्रक्रिया में हैं। इस योजना के तहत पेयजल, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सड़क और नाली निर्माण, श्मशान घाट, सामुदायिक भवन, रैन बसेरा और खेल मैदान जैसे विकास कार्य किए जाते हैं।

    बैठक में मध्य प्रदेश ग्रामीण संपर्कता बाह्य वित पोषित योजना के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए भी मंजूरी दी गई। पहले से स्वीकृत 12 करोड़ 32 लाख रुपये के अलावा अब 9 करोड़ 45 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने की अनुमति प्रदान की गई है। इसके अलावा राज्य सेवा परीक्षा 2022 में परिवहन उप निरीक्षक पद के लिए चयनित 29 में से 25 उम्मीदवारों को नई शर्तों के साथ नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया है। इन उम्मीदवारों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि में एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा और ड्राइविंग लाइसेंस के दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। यदि कोई उम्मीदवार परिवीक्षा अवधि में यह दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहता है, तो उसकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएंगी।