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  • दर्द-बुखार से लेकर 1000 से ज्यादा जरूरी दवाएं होंगी महंगी…. 1 अप्रैल से बढ़ जाएंगी कीमतें

    दर्द-बुखार से लेकर 1000 से ज्यादा जरूरी दवाएं होंगी महंगी…. 1 अप्रैल से बढ़ जाएंगी कीमतें


    नई दिल्ली।
    आम लोगों की जेब पर एक और असर पड़ने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से पेरासिटामोल (Paracetamol), एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) और अन्य जरूरी दवाओं के दाम बढ़ने जा रहे हैं। सरकार ने आवश्यक दवाओं (Necessary Medicines) की राष्ट्रीय सूची (NLEM) में शामिल दवाओं की कीमतों में करीब 0.6% तक बढ़ोतरी की अनुमति दे दी है। यह बढ़ोतरी 1000 से ज्यादा आवश्यक दवाओं पर लागू होगी।

    राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceutical Pricing Authority-NPPA) ने बताया, “वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार विभाग में आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आंकड़ों के आधार पर, वर्ष 2025 के दौरान वर्ष 2024 की समान अवधि की तुलना में WPI में वार्षिक बदलाव (+) 0.64956% है।” समायोजित कीमतें NLEM की 1,000 से अधिक दवाओं पर लागू होंगी।

    कौन-कौन सी प्रमुख दवाओं पर पड़ेगा असर
    सूचीबद्ध (नियंत्रित) दवाओं के दामों में बदलाव की अनुमति साल में एक बार दी जाती है। आवश्यक दवाओं की सूची में पेरासिटामोल, बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन, खून की कमी (एनीमिया) की दवाएं, विटामिन और खनिज (मिनरल) जैसी दवाएं शामिल हैं। कोविड-19 के मध्यम से गंभीर रोगियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं और स्टेरॉयड भी इस सूची में हैं।

    फार्मा उद्योग के एक अधिकारी के अनुसार, यह मामूली बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जब ईरान युद्ध के कारण बढ़ती इनपुट यानी कच्चे माल की लागत ने उद्योग के मुनाफे के मार्जिन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।


    पैरासिटामोल में 25% और सिप्रोफ्लोक्सासिन में 30% बढ़ोतरी

    उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि चल रहे युद्ध के कारण कुछ प्रमुख एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रिएंट्स (APIs) और सॉल्वैंट्स के दाम काफी बढ़ गए हैं और यह बढ़ोतरी मुश्किल से ही कोई राहत देगी।

    उदाहरण के लिए, पिछले कुछ हफ्तों में APIs की कीमतों में औसतन 30-35% की वृद्धि हुई है। उद्योग अधिकारियों ने बताया कि ग्लिसरीन की कीमत 64% बढ़ गई है, जबकि पैरासिटामोल की कीमत 25% और सिप्रोफ्लोक्सासिन की कीमत 30% बढ़ गई है। पॉलीविनाइल क्लोराइड और एल्युमीनियम फॉयल जैसी पैकेजिंग सामग्री की कीमत में भी 40% की वृद्धि हुई है।


    फार्मा लॉबी ने क्या कहा

    एक फार्मा लॉबी समूह के प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ग्लिसरीन, प्रोपलीन ग्लाइकॉल, और हर लिक्विड दवा जैसे सिरप, ड्रॉप्स में इस्तेमाल होने वाले सॉल्वैंट्स महंगे हो गए हैं। इंटरमीडिएट्स के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। इसे देखते हुए, हमें इससे बेहतर बढ़ोतरी की जरूरत है और हम NPPA के सामने अपना पक्ष रखेंगे।”

  • PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर

    PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर


    नई दिल्ली।
    नया वित्त वर्ष 2026-27 (New Financial Year 2026-27) शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर सैलरीड कर्मचारियों (Salaried Employees) और टैक्सपेयर्स (Taxpayers) पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और पेट्रोल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे।


    PAN कार्ड के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगा

    अब तक पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार पर्याप्त था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी। नए नियमों के तहत पैन बनवाने या उसमें सुधार करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे पैन प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित हो जाएगी।


    HRA क्लेम में बड़ा बदलाव, बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता

    सैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA से जुड़ा नियम और सख्त किया गया है। अब अगर आप सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको मकान मालिक का PAN देना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा कि वह आपके परिवार का सदस्य है या नहीं। यह जानकारी नए फॉर्म 124 में देनी होगी। इसका उद्देश्य फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना है।


    क्रेडिट कार्ड पर सख्ती, बड़े ट्रांजैक्शन सीधे आयकर विभाग की नजर में

    1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बड़े ट्रांजैक्शन और भुगतान की जानकारी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल डिजिटल माध्यम से चुकाता है या 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कैश में करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इससे हर बड़ा खर्च सीधे आपके PAN रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा।


    अब क्रेडिट कार्ड से भी भर सकेंगे टैक्स

    सरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए अब टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को भी मान्य कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड तक सीमित थी। हालांकि, भुगतान करते समय अतिरिक्त चार्ज या प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखना जरूरी होगा।


    कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर खर्च पर टैक्स नियम स्पष्ट

    अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका पेमेंट कंपनी करती है, तो यह एक प्रकार का लाभ माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम के लिए है और उसका सही रिकॉर्ड मौजूद है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा।


    नया आयकर अधिनियम 2025 लागू

    1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा। यह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


    सख्त नियम
    पेट्रोल में 20% एथेनॉल अनिवार्य, गुणवत्ता भी बदलेगी

    अब पूरे देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी नए मानक लागू होंगे, जिससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।


    क्या है इसका सीधा असर?

    इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। खासतौर पर सैलरीड लोगों और ज्यादा खर्च करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि हर बड़ा ट्रांजैक्शन अब टैक्स सिस्टम की नजर में होगा।

  • करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    करदाता को अब बताना होगा मकान मालिक से उसका क्या रिश्ता है…1 अप्रैल से बदलेंगे नियम

    Tax

    नई दिल्ली। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार (Government) ने नए आयकर अधिनियम, 2025 (New Income Tax Act, 2025) के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है। नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। सरकार ने हितधारकों के लिए नियमों का मसौदा एवं फॉर्म जारी किए हैं। इसके आधार पर अंतिम नियम एवं फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे।

    नियमों के मसौदे के मुताबिक, नए फॉर्म 124 में करदाता को यह बताना होगा कि वह जिस मकान मालिक को किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या कोई अन्य संबंध तो नहीं है। फिलहाल एचआरए का दावा करते समय कर्मचारी अपने नियोक्ता को किराये का अनुमानित विवरण देता है, लेकिन मकान मालिक के साथ संबंध का खुलासा करना अनिवार्य नहीं है।


    फर्जी किराया दावों पर लगाम लगेगी

    कर विशेषज्ञों का मानना है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच के संबंधों का खुलासा अनिवार्य किए जाने से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर अंकुश लगेगा। नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स फर्म में साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा, ‘यह प्रावधान वास्तविक व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बगैर कृत्रिम दावों की पहचान में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित दावों को खारिज करना आसान होगा।’


    किन्हें देनी होगी जानकारी?

    अगर आप सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा किराया किसी मकान मालिक को देते हैं, तो आपको फॉर्म 124 में मकान मालिक के साथ अपना रिश्ता बताना होगा। यह नियम उन मामलों पर लागू होगा, जहां किराया पति या पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या दूसरे रिश्तेदारों को दिया जा रहा है।


    कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?

    एचआरए क्लेम करते समय वेतन पर काम करने वाले करदाताओं को मकान मालिक की ये जानकारी देनी होगी -नाम, पता, पैन, मकान मालिक से संबंध। इसका मकसद यह पक्का करना है कि रिश्तेदारों को दिए गए किराए के लिए एचआरए दावा असली और सत्यापित हो।


    परिवार को किराया देना अब भी मान्य

    नए नियम में परिवार के सदस्य को किराया देने पर रोक नहीं है। आप एचआरए छूट का दावा कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है – वैध किराया अनुबंध, किराया नगद की बजाय बैंक ट्रांसफर के जरिए देना होगा। मकान मालिक की तरफ से उस किराये की आय को अपने आयकर रिटर्न में दिखाना होगा।


    जानकारी न देने पर क्या होगा?

    अगर कोई टैक्सपेयर रिश्तेदारी की जानकारी नहीं देता या फर्जी दावा करता है, तो इसे आय की गलत रिपोर्टिंग माना जा सकता है। इसके लिए आयकर अधिनियम 2025 की धारा 439 के तहत टैक्स चोरी की राशि के 200% तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा भुगतान या मकान मालिक की आय में गड़बड़ी मिलने पर नोटिस भी मिल सकता है।


    ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई

    नियमों के मसौदे में विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के खुलासे के लिए ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई है। अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, विनिमय दर रूपांतरण और कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है जहां विदेशी देशों में एकीकृत कर विवरण जारी होते हैं या कर को अलग वित्त वर्ष में अदा किया जाता है।


    कंपनियों के लिए सख्त पैन आवेदन प्रक्रिया

    मसौदा प्रस्ताव में कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया भी सख्त की गई है। अब आवेदन करते समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से से कोई पैन नहीं है। शाखाओं, परियोजना कार्यालयों या पूर्ववर्ती इकाइयों के नाम पर पहले से पैन होने की स्थिति में दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी। झुनझुनवाला ने कहा कि यह प्रावधान डेटाबेस की शुचिता मजबूत करेगा, लेकिन आवेदकों की जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा।

    ऑडिटर की आपत्ति का असर बताना होगा
    नए कर ऑडिट फॉर्म 26 में यह अनिवार्य किया गया है कि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में यदि कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट किया जाए।

    उदाहरण के लिए, यदि राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधान में कमी पर आपत्ति दर्ज होती है, तो कर ऑडिटर को देखना होगा कि इससे कर-योग्य आय को कम करके तो नहीं दिखाया गया। इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी बताना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से अनुपालन की लागत बढ़ सकती है लेकिन इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में मजबूती आने की संभावना है।

  • Income Tax व्यवस्था में होने जा रहा सबसे बड़ा बदलाव… एक अप्रैल से लागू होंगे नए नियम

    Income Tax व्यवस्था में होने जा रहा सबसे बड़ा बदलाव… एक अप्रैल से लागू होंगे नए नियम



    नई दिल्ली।
    एक अप्रैल से आयकर व्यवस्था (Income Tax Regime) में सबसे अहम बदलाव होने जा रहा है। इनकम टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया (Income Tax Return Process) को सरल बनाने के लिए फॉर्म-16 को भी पहले की तुलना में आधे पेजों को किया जा रहा है। इस बदलाव के तहत आयकर के नियम 511 से घटकर 333 रह जाएंगे। जबकि कर फॉर्म की संख्या 399 से घटकर 190 हो जाएगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की तरफ कहा गया है कि आयकर नियम-2026 और फॉर्मों को मार्च के पहले सप्ताह तक अधिसूचित कर दिया जाएगा, लेकिन उससे पहले आम लोगों और विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए हैं।


    एक अप्रैल से लागू होंगे: नए नियम

    आयकर अधिनियम 2025 के अनुसार बनाए गए हैं, जो 1 अप्रैल से लागू होंगे। नई व्यवस्था के तहत आईटीआर फॉर्म पहले से भरा होगा। बस फॉर्म भरते वक्त करदाता को देखना होगा कि कहीं कोई संशोधन तो नहीं करना है। अगर करदाता को लगता है कि फॉर्म में दी जा रही जानकारी अधूरी है या फिर कोई बदलाव की जरूरत है तो उसमें संशोधन करके ऑनलाइन सब्मिट कर सकेगा।

    सूत्रों के अनुसार, नए ढांचे में नौकरी से मिलने वाले अतिरिक्त लाभ से जुड़े बदलाव पुराने और नए यानी दोनों कर व्यवस्थाओं में लागू होंगे। इससे सभी तरह के करदाताओं को राहत मिलेगी। ड्राफ्ट नियम और फॉर्म 15 दिनों तक (22 फरवरी) सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेंगे। इस दौरान आम लोग और विशेषज्ञ अपनी राय और सुझाव दे सकते हैं।


    प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की कोशिश :

    विभाग का कहना है कि इससे नियम बनाने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। नए नियमों की भाषा को आसान बनाया गया है। समझ बढ़ाने के लिए कई जगह फॉर्मूले और टेबल जोड़े गए हैं और पुराने नियमों में मौजूद बेवजह की दोहराव वाली बातों को हटाया गया है। कर फॉर्म को भी सरल बनाया गया है, जिससे करदाताओं पर बोझ कम हो। सभी फॉर्म में एक जैसी जानकारी को मानक बनाया गया है, जिससे बार-बार जानकारी भरने की जरूरत न पड़े। नए स्मार्ट फॉर्म में ऑटोमैटिक मिलान और भरी हुई जानकारी की सुविधा होगी।


    करदाता संख्या बढ़ाना उद्देश्य :

    सीबीडीटी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि नए कानून और नियमों का मुख्य उद्देश्य कर भरने वाले लोगों की बढ़ाना और कर भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। फिलहाल देश में करीब 9 करोड़ लोग आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं, जबकि करीब 12 करोड़ लोग अलग-अलग तरीकों से कर देते हैं। इससे पता चलता है कि कई लोग अभी भी नियमित रूप से रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे हैं। इसलिए हमारा लक्ष्य यह है कि धीरे-धीरे ज्यादा लोगों को रिटर्न फाइलिंग से जोड़ा जाए। नए व्यवस्था में फॉर्म को इसी लिए आसान बनाया गया है।


    शून्य टीडीएस और सैलरी वाला टीडीएस फार्म अलग :

    टीडीएस से जुड़े कई फॉर्म्स की नंबरिंग भी बदली गई है। अब कम या शून्य टीडीएस के लिए आवेदन फॉर्म 128 में किया जाएगा, जबकि सैलरी से जुड़ा टीडीएस सर्टिफिकेट अब फॉर्म 130 कहलाएगा। इसके साथ ही, टीडीएस रिटर्न के पुराने फॉर्म 24क्यू, 26क्यू और 27क्यू को भी नया नंबर दिया गया है।

    सालाना कर विवरण यानी 26एएस का नाम अब फार्म 168 : सालाना टैक्स स्टेटमेंट, जिसे आमतौर पर फॉर्म 26एएस कहा जाता है, अब फॉर्म 168 के नाम से जाना जाएगा। इसी तरह, वित्तीय लेनदेन की जानकारी देने वाला फॉर्म 61ए अब फॉर्म 165 हो जाएगा। इसके साथ ही विदेश भेजे जाने वाले पैसों से जुड़े फॉर्म्स में भी बदलाव किया गया है।


    ऑडिट और अंतरराष्ट्रीय टैक्स फॉर्म को जोड़ा गया

    कई ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ऑडिट और अंतरराष्ट्रीय टैक्स फॉर्म्स को एक साथ जोड़ा गया है या उनका नंबर बदल दिया गया है। अब टैक्स ऑडिट रिपोर्ट, जो पहले 3सीए, 3सीबी और 3सीडी फॉर्म में भरी जाती थी, वह अब एक ही फॉर्म 26 में दी जाएगी। ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़ी ऑडिट रिपोर्ट अब फॉर्म 3सीईबी की जगह फॉर्म 48 में दी जाएगी। वहीं, मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (एमएटी) से जुड़ा सर्टिफिकेट अब फॉर्म 29बी की जगह फॉर्म 66 में जमा किया जाएगा। टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट के लिए फॉर्म 10एफए की जगह फॉर्म 42 का इस्तेमाल करना होगा।


    ड्राफ्ट के साथ नए फॉर्म टेम्पलेट भी जारी

    इस ड्राफ्ट के साथ नए फॉर्म टेम्पलेट भी जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक इस्तेमाल हो रहे पुराने फॉर्म नंबर कई दशकों में बदलते-बदलते काफी जटिल हो गए थे। नई नंबरिंग से टैक्स फाइल करते समय होने वाली उलझन कम होगी। नई व्यवस्था से टैक्स से जुड़ी जानकारी को डिजिटल सिस्टम के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा। इससे रीयल-टाइम डेटा मिलान और जांच में मदद मिलेगी। हालांकि, इसके कारण नियोक्ताओं, टैक्स सलाहकारों, रजिस्ट्रार और कंपनियों को अपने सिस्टम में जल्दी बदलाव करना होगा।


    एचआरए की श्रेणी-1 में बेंगलुरु समेत तीन और शहर

    मसौदा नियम में आवास किराया भत्ते का दावा करने के मकसद से बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद को शामिल करने के लिए श्रेणी-1 महानगरों की सूची का विस्तार किया गया है। इस सूची में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई शामिल हैं। मसौदे में क्रिप्टो एक्सचेंज के लिए कर विभाग के साथ जानकारी साझा करना अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है। इसमें केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के स्वीकृत तरीके के तौर पर भी शामिल किया गया है। मसौदा नियमों में क्रिप्टो-संपत्ति सेवा प्रदाताओं के लिए विस्तृत रिपोर्टिंग और जांच-पड़ताल की जिम्मेदारियों का भी प्रस्ताव है।