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  • आर्मेनिया की संसद में बहस के दौरान भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसद, लात-घूंसे चले और कुर्सियां तक फेंकी गईं

    आर्मेनिया की संसद में बहस के दौरान भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्षी सांसद, लात-घूंसे चले और कुर्सियां तक फेंकी गईं

    नई दिल्ली ।आर्मेनिया की संसद में 29 अक्टूबर को एक बहस के दौरान ऐसा हंगामा हुआ कि सदन की कार्यवाही हिंसक झड़प में बदल गई। सत्ताधारी सिविल कॉन्ट्रैक्ट पार्टी और विपक्षी स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया गुट के सांसदों के बीच पहले तीखी बहस हुई और फिर मामला हाथापाई तक पहुंच गया। सदन के भीतर सांसद एक-दूसरे पर लात-घूंसे चलाते और धक्का-मुक्की करते नजर आए। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि संसद का मुख्य हॉल ही नहीं, बल्कि गलियारा भी झगड़े का मैदान बन गया। इस पूरी घटना का सीधा प्रसारण हो रहा था, जिसके कारण देशभर के लोगों ने सांसदों के बीच हुई मारपीट के दृश्य देखे।

    बताया गया कि विवाद की शुरुआत ऑडिट चैंबर के एक सदस्य की नियुक्ति को लेकर हो रही चर्चा के दौरान हुई। उस समय सत्ताधारी दल के सांसद तारोन चाखोयान अपनी बात रख रहे थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विपक्षी नेता नारेक करापेत्यान के एक रिश्तेदार से जुड़ी पुरानी विवादित टिप्पणी का उल्लेख किया। चाखोयान के अनुसार, करापेत्यान के चचेरे भाई ने पहले विपक्ष के सत्ता में आने की स्थिति में महिलाओं को संतुष्ट करने के लिए अलग मंत्रालय बनाने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति ने इस बयान के लिए अब तक माफी नहीं मांगी है।

    चाखोयान की इस टिप्पणी पर नारेक करापेत्यान ने अपनी सीट से ही विरोध जताना शुरू कर दिया। उन्होंने बयान को आपत्तिजनक बताया। कुछ ही देर में दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज हो गई। इसके बाद करापेत्यान अपनी सीट से उठकर मंच की ओर बढ़ने लगे। इसी दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसद भी अपनी जगह से उठकर एक-दूसरे की तरफ बढ़े और देखते ही देखते हाथापाई शुरू हो गई।

    शुरुआत में सांसदों के बीच धक्का-मुक्की हुई, लेकिन जल्द ही स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। दोनों पक्षों के सदस्य एक-दूसरे को पकड़कर नीचे गिराने लगे। इस दौरान लात और घूंसे भी चले। संसद के उपाध्यक्ष वहागन अलेक्सान्यान को भी विपक्षी सांसदों की तरफ कुर्सी फेंकते हुए देखा गया। घटनास्थल के वीडियो में कई सांसदों को कुर्सियां उठाते और एक-दूसरे पर हमला करते देखा जा सकता है।

    सदन के भीतर शुरू हुआ विवाद कुछ समय बाद संसद भवन के गलियारे तक पहुंच गया। वहां भी दोनों पक्षों के सांसदों के बीच धक्का-मुक्की और कहासुनी जारी रही। सुरक्षाकर्मियों तथा अन्य सदस्यों ने कई बार हस्तक्षेप कर दोनों गुटों को अलग करने की कोशिश की, लेकिन तनाव कम नहीं हुआ। इस दौरान कुछ सांसदों के कपड़े फट गए और कई लोगों को चोटें आईं।

    घटना के बाद संसद भवन में एम्बुलेंस बुलाई गई। विपक्षी गुट स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया के सांसद एंड्रानिक गेवोरग्यान की नाक से खून बहता दिखाई दिया, जबकि उनके साथी सांसद रूबेन मखितारयान के कपड़े फटे हुए थे। अन्य कुछ सांसदों को भी मामूली चोटें आने की जानकारी सामने आई। दोबारा टकराव की आशंका को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने संसद के गलियारे में दोनों पक्षों के बीच अवरोध लगाया, ताकि सदस्य फिर आमने-सामने न आ सकें।

    संसद के स्पीकर रूबेन रुबिनयान ने घटना के बाद नारेक करापेत्यान को झड़प के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उन्होंने ब्रेक के दौरान हुई बातचीत का वीडियो देखा था और उनके अनुसार तारोन चाखोयान के भाषण में ऐसी कोई बात नहीं थी, जिसे आपत्तिजनक माना जाए। स्पीकर ने आरोप लगाया कि करापेत्यान ने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रखा और सीट से विरोध जताने के बाद उठकर चाखोयान पर हमला करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी सांसद गार्निक दावत्यान ने भी चाखोयान पर हमला किया था।

    रुबिनयान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जानबूझकर संसद की लाइव स्ट्रीमिंग बंद नहीं कराई, ताकि आम लोग सदन के भीतर चल रही घटनाओं को देख सकें। इससे पहले अक्टूबर महीने में भी सिविल कॉन्ट्रैक्ट और विपक्षी सांसदों के बीच विवाद हो चुका था। उस समय स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया के सांसद एडगर गाजरियन ने स्पीकर पर सांसदों को बोनस देने के लिए सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। उस मामले में भी दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और तनाव देखने को मिला था।

  • अर्मेनिया में युद्ध के बीच फंसी उज्जैन की महिला पहलवान प्रियांशी प्रजापत सुरक्षित लौटीं, सीएम मोहन यादव ने किया त्वरित हस्तक्षेप

    अर्मेनिया में युद्ध के बीच फंसी उज्जैन की महिला पहलवान प्रियांशी प्रजापत सुरक्षित लौटीं, सीएम मोहन यादव ने किया त्वरित हस्तक्षेप

    नई दिल्ली। अर्मेनिया में आयोजित कुश्ती वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गई उज्जैन की प्रियांशी प्रजापत पिछले चार दिनों से युद्ध के कारण फंसी थीं। अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के चलते उनका दुबई के रास्ते भारत लौटना असंभव हो गया।

    इस मुश्किल समय में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहलवान से लाइव बातचीत कर उनकी सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत कदम उठाए। सीएम के निर्देश और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के सहयोग से प्रियांशी को अर्मेनिया से तुर्की और कजाकिस्तान के मार्ग से भारत लाया गया। गुरुवार सुबह प्रियांशी देश लौट आईं और उनके परिवार व खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई।

    प्रियांशी मध्यप्रदेश की एकमात्र खिलाड़ी थीं जो इस विश्व चैम्पियनशिप में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रही थीं। उनकी सुरक्षित वापसी ने राज्य सरकार के त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप की अहमियत को भी दर्शाया।

    इन हालात में उनके पिता ने मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष नारायण यादव से संपर्क किया और मदद के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सूचित किया। मुख्यमंत्री ने तुरंत हस्तक्षेप किया और प्रियांशी से ऑनलाइन बातचीत कर उन्हें युद्ध के खतरनाक हालात में सुरक्षित मार्ग से लौटने का भरोसा दिया।

    सीएम के निर्देशों और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ के सहयोग से प्रियांशी को अर्मेनिया से तुर्की और कजाकिस्तान के मार्ग से सुरक्षित भारत लाया गया। गुरुवार सुबह वे देश लौट आईं, और उनके परिवार, प्रशिक्षक और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रियांशी की वापसी ने राज्य सरकार की तत्परता और संकट प्रबंधन क्षमता को उजागर किया।

    प्रियांशी इस चैम्पियनशिप में मध्यप्रदेश की एकमात्र प्रतिनिधि खिलाड़ी थीं। उनके साथियों और प्रशिक्षकों ने बताया कि यह उनका सपना था कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करें, लेकिन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव ने उन्हें अचानक कठिनाई में डाल दिया। इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सक्रिय भूमिका और त्वरित निर्णय ने उनकी जान को सुरक्षित रखने में अहम योगदान दिया।

    प्रियांशी के सुरक्षित लौटने के बाद प्रदेश की खेल प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। युवा खिलाड़ी और उनके परिवार ने मुख्यमंत्री और मध्यप्रदेश कुश्ती संघ को धन्यवाद दिया। इसके अलावा, इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय संकट में राज्य सरकार और खेल संस्थाएं मिलकर खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं।

    प्रियांशी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह चार दिन उनके जीवन के सबसे तनावपूर्ण रहे। उन्होंने बताया कि दुबई और अर्मेनिया में युद्ध के कारण भय का माहौल था, लेकिन उन्हें विश्वास था कि मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारी उनकी मदद करेंगे। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री ने मुझे व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त किया और सही मार्ग से भारत लौटने में मदद की। यह अनुभव यादगार तो है, लेकिन काफी डराने वाला भी रहा।”

    इस घटना ने यह संदेश भी दिया कि खेल और खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए प्रशासनिक तत्परता बेहद जरूरी है। प्रियांशी अब सुरक्षित हैं और अपने परिवार के साथ हैं, जबकि मध्यप्रदेश सरकार की इस सक्रिय भूमिका को खेल जगत में सराहा जा रहा है।