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  • पचमढ़ी के आर्मी एजुकेशन सेंटर में बायसन का हमला, फुटबॉल खेल रहे 26 वर्षीय जवान की मौत

    पचमढ़ी के आर्मी एजुकेशन सेंटर में बायसन का हमला, फुटबॉल खेल रहे 26 वर्षीय जवान की मौत

    मध्य प्रदेश: के प्रसिद्ध हिल स्टेशन पचमढ़ी में जंगली बायसन के हमले में सेना के एक जवान की मौत हो गई। घटना गुरुवार शाम आर्मी एजुकेशन सेंटर परिसर की है। यहां कुछ सैनिक फुटबॉल खेल रहे थे। इसी दौरान जंगल से अचानक निकला एक बायसन मैदान में पहुंच गया और सैनिकों की ओर दौड़ पड़ा। हमले में 26 वर्षीय जवान आकाश चौहान गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल मिलिट्री अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।

    मृतक जवान की पहचान उत्तराखंड निवासी आकाश चौहान के रूप में हुई है। वह आर्मी एजुकेशन सेंटर में चीनी भाषा का प्रशिक्षण ले रहे थे और 17वीं कमांड रेजिमेंट में पदस्थ थे। घटना के बाद सैन्य परिसर में शोक का माहौल है। अचानक हुए इस हमले से वहां मौजूद सैनिक भी सकते में आ गए।

    जानकारी के अनुसार, सैनिक जब मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे, तभी झाड़ियों से निकलकर बायसन वहां पहुंचा। उसने अचानक सैनिकों पर हमला कर दिया। इस दौरान आकाश चौहान उसकी चपेट में आ गए। बायसन ने पीछे से उन पर हमला किया और उसके सींग जवान के पेट के आसपास लगे। इससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। साथी सैनिकों ने उन्हें तत्काल उपचार के लिए मिलिट्री अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक पचमढ़ी संजीव शर्मा ने बताया कि सेना की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, सैनिक मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे, तभी बायसन झाड़ियों से निकलकर वहां पहुंचा और उन पर हमला कर दिया। उन्होंने बताया कि आर्मी परिसर जंगल से लगा हुआ है। इस वजह से बायसन का झुंड कई बार जंगल से निकलकर परिसर में आ जाता है। हालांकि, इस तरह की घटना पहले कभी सामने नहीं आई थी। मामले की जांच की जा रही है।

    पचमढ़ी में पिछले कुछ दिनों से बायसन के झुंड की आवाजाही लगातार देखी जा रही है। पचमढ़ी थाने में पदस्थ एसएन यादव के मुताबिक, आकाश चौहान प्रशिक्षण के लिए यहां आए थे। वह उत्तराखंड में देहरादून के पास के रहने वाले थे। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में बायसन का झुंड कई बार पचमढ़ी नगर के भीतर भी दिखाई दिया है।

    एक दिन पहले ही बायसन का झुंड शहीद द्वार के पास स्थित छोटी पुलिया पर आकर बैठ गया था। इसके कारण कई घंटे तक वहां से आवागमन बंद रहा। सड़क पर झुंड की मौजूदगी के चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बायसन के झुंड को वापस जंगल में भेजने की मांग भी की थी।

    स्थानीय स्तर पर इस दिशा में कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच आर्मी एजुकेशन सेंटर परिसर में हुए हमले ने वन्यजीवों की आवाजाही और मानव आबादी के बीच बढ़ते टकराव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल घटना की जांच की जा रही है।

  • हवाई हमले करके लौट जाते हो, सीरियस हो तो सेना भेजो’, ईरान ने अमेरिका को दी जमीनी लड़ाई की चुनौती

    हवाई हमले करके लौट जाते हो, सीरियस हो तो सेना भेजो’, ईरान ने अमेरिका को दी जमीनी लड़ाई की चुनौती


    तेहरान।
    ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को जमीनी लड़ाई में उतरने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका अपने सैन्य अभियान को लेकर गंभीर है तो उसे अपने सैनिक ईरान भेजने चाहिए। रेजाई ने सवाल उठाया कि अमेरिकी सेना जमीनी कार्रवाई से क्यों बच रही है और केवल हवाई हमले करके वापस लौट रही है।

    रेजाई ने कहा कि युद्ध में अंततः जमीनी सेना निर्णायक भूमिका निभाती है। उनके इस बयान को अमेरिका की मौजूदा दूर से हमला करने वाली सैन्य रणनीति पर ईरान की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।

    अमेरिकी हमले की स्थिति में जवाब की चेतावनी

    रेजाई ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है और वह संभावित अमेरिकी हवाई हमले का जवाब देने के लिए पहले की तुलना में अधिक तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो ईरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य अमेरिकी हितों के खिलाफ हमले तेज कर सकता है।

    रेजाई के इन सैन्य दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, हालिया बयानों में उन्होंने कहा है कि ईरान भविष्य में किसी अमेरिकी हमले की स्थिति को गंभीरता से ले रहा है और उसके जवाब की तैयारी कर रहा है।

    ईरान में जमीनी अभियान आसान नहीं

    ईरान में बड़े पैमाने पर जमीनी सैन्य अभियान किसी भी बाहरी शक्ति के लिए जटिल चुनौती हो सकता है। देश का बड़ा भूभाग पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों वाला है तथा उसकी आबादी भी काफी बड़ी है। ऐसे में व्यापक जमीनी अभियान के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों, लंबी आपूर्ति व्यवस्था और लगातार सैन्य मौजूदगी की आवश्यकता होगी।

    अमेरिका ने अब तक ईरान के खिलाफ मुख्य रूप से हवाई हमलों और दूर से हमला करने वाली सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल किया है। दूसरी ओर, ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की रणनीति अपनाने की चेतावनी दी है।

    सैन्य बयानबाजी के बीच बातचीत का रास्ता खुला

    दिलचस्प बात यह है कि सैन्य बयानबाजी के बावजूद ईरान ने बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। रेजाई ने हालिया साक्षात्कार में बताया कि कतर के माध्यम से अमेरिका तक युद्ध समाप्त करने की ईरान की शर्तें पहुंचाई गई हैं और तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है।

    रेजाई के मुताबिक ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें बताई हैं—सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान की जब्त की गई या फ्रीज की गई धनराशि जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन शर्तों पर प्रगति नहीं होती तो ईरान किसी निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है।

    कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता

    ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने के प्रयासों में कतर और पाकिस्तान की भूमिका बनी हुई है। दोनों देशों ने पिछले समझौते के समाप्त होने के बाद बातचीत का रास्ता फिर खोलने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें जारी रखी हैं। रेजाई के अनुसार कतर ने ईरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचाई हैं और अब तेहरान वाशिंगटन के जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है।

    इस तरह ईरान की मौजूदा रणनीति में एक ओर संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने की तैयारी और कड़े बयान शामिल हैं, वहीं दूसरी ओर मध्यस्थों के जरिए बातचीत का चैनल भी खुला हुआ है। स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक संपर्क को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

  • मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया राष्ट्रपति के ADC पद से रिटायरमेंट का कारण, परिवार को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

    मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया राष्ट्रपति के ADC पद से रिटायरमेंट का कारण, परिवार को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एड-डी-कैंप मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने 30 साल की उम्र में सेना से समय से पहले रिटायरमेंट लेने के फैसले के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय किसी निजी असंतुष्टि की वजह से नहीं, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया था। सेना की वर्दी पहनना उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि लंबे समय से देखा गया सपना था।

    मेजर ऋषभ ने बताया कि उन्होंने कभी सेना छोड़ने के बारे में नहीं सोचा था। उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय इस सपने को पूरा करने और सैन्य जीवन को जीने में बिताया। इसके बावजूद एक समय ऐसा आया जब उन्हें अपने व्यक्तिगत करियर और माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियों के बीच किसी एक को चुनना पड़ा।

    उनके मुताबिक, उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षाओं के बजाय माता-पिता के साथ रहने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि एक बेटे के तौर पर उनकी कुछ जिम्मेदारियां और वादे हैं, जिन्हें उन्हें पूरा करना है। उनके सामने खुद को चुनने या माता-पिता को प्राथमिकता देने का विकल्प था और वह ऐसा फैसला नहीं लेना चाहते थे, जिसके बारे में बाद में उन्हें पछतावा हो।

    मेजर ऋषभ ने स्पष्ट किया कि सेना छोड़ने का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया। उन्होंने परिवार के साथ बातचीत करने के बाद यह फैसला किया। उनके लिए यह कदम भावनात्मक रूप से कठिन था, लेकिन उन्होंने इसे जरूरी त्याग माना। सैन्य करियर उम्मीद से पहले खत्म होने के बावजूद उन्हें देश की सेवा में बिताए हर पल पर गर्व है।

    राष्ट्रपति के ADC के तौर पर अपनी भूमिका को लेकर भी उन्होंने कई बातें बताईं। उनके अनुसार इस पद पर रहते हुए सख्त प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है और इसका असर निजी जीवन पर भी पड़ता है। ADC के कार्यकाल के दौरान शादी करने की अनुमति नहीं होने की बात भी उन्होंने बताई।

    मेजर ऋषभ ने अपनी शादी को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने शादी नहीं की है और फिलहाल शादी करने की उनकी कोई योजना भी नहीं है। इस तरह उन्होंने उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें उनकी रिटायरमेंट को शादी की योजना से जोड़कर देखा जा रहा था।

    उन्होंने यह भी बताया कि ADC के तौर पर जिम्मेदारियों के कारण निजी जीवन काफी सीमित हो जाता है। परिवार से लंबे समय तक दूर रहना पड़ता है और निजी जिंदगी के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। सार्वजनिक जिम्मेदारियों की लगातार मांग के कारण उन्हें कई ऐसे सामान्य अनुभवों का त्याग करना पड़ा, जिन्हें आम जीवन का हिस्सा माना जाता है।

    मेजर ऋषभ ने इस अनुभव को केवल कठिनाइयों के तौर पर नहीं देखा। उनके मुताबिक, सीमित निजी जीवन और लगातार जिम्मेदारियों के बीच यह समय आत्मचिंतन का अवसर भी रहा। उन्होंने अपने फैसले को परिवार के प्रति जिम्मेदारी और जरूरी त्याग के रूप में प्रस्तुत किया।

    सेना छोड़ने के बावजूद उनके बयान में सैन्य सेवा के प्रति सम्मान साफ नजर आया। उन्होंने देश की सेवा में बिताए समय को गर्व के साथ याद किया और बताया कि परिवार से बातचीत के बाद लिया गया यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्हें लगा कि इस समय माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • भारतीय सेना की आर्मरी से हथियार और गोला-बारूद गायब, रिकॉर्ड में खामियों ने चोरी की जांच को बनाया पेचीदा

    भारतीय सेना की आर्मरी से हथियार और गोला-बारूद गायब, रिकॉर्ड में खामियों ने चोरी की जांच को बनाया पेचीदा


    नई दिल्ली । 
    सिकंदराबाद कैंट में भारतीय सेना के हथियार चोरी होने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। सेना और तेलंगाना पुलिस की जांच में अब एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी से पूछताछ की गई है। जांच के दौरान आर्मरी में रखे हथियारों और गोला-बारूद से जुड़े रिकॉर्ड में भी कई खामियां सामने आने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित रजिस्टर कई महीनों से ठीक तरीके से मेंटेन नहीं किए गए थे।

    इस मामले में सिकंदराबाद कैंट की 20 मद्रास रेजिमेंट की एक यूनिट से जुड़े हथियार गायब पाए गए हैं। चोरी हुए सामान में चार AK-203 असॉल्ट राइफल, सात पिस्टल और एक INSAS राइफल शामिल हैं। इसके अलावा एक हजार से अधिक राउंड गोला-बारूद और पैसिव नाइट-विजन बाइनोकुलर्स की एक जोड़ी भी गायब मिली है। हथियारों की संख्या और उनकी संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए जांच एजेंसियां हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं।

    मामले की जांच के दौरान 20 मद्रास रेजिमेंट की संबंधित यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी से सेना के अधिकारियों ने पूछताछ की है। तेलंगाना पुलिस ने भी उनसे जानकारी ली है। पूछताछ का एक प्रमुख आधार आर्मरी के रिकॉर्ड से जुड़ी कथित लापरवाही बताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि हथियारों से संबंधित बही-खाते या रजिस्टर कई महीनों तक सही तरीके से अपडेट नहीं किए गए थे।

    हथियार चोरी का मामला 31 अगस्त की सुबह करीब 7:50 बजे सामने आया था। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी की ओर से मलकाजगिरी कमिश्नरेट के बोल्लाराम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के अनुसार, जब हथियार और गोला-बारूद रखने की जगह खोली गई तो वहां के ताले टूटे हुए मिले। इसके बाद सामान और उससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई।

    हथियारों और गोला-बारूद की आखिरी भौतिक गिनती 30 अगस्त को शाम करीब छह बजे की गई थी। इसके बाद संबंधित भंडारण स्थान को बंद कर दिया गया था। शुरुआती जांच में पुलिस ने अनुमान लगाया था कि चोरी 30 और 31 अगस्त की दरम्यानी रात हुई होगी।

    हालांकि, अब जांच की दिशा कुछ बदलती नजर आ रही है। पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि हथियार ताले टूटे मिलने की घटना से पहले ही गायब हो चुके हों। आर्मरी के रिकॉर्ड में पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण यह स्पष्ट करना मुश्किल हो रहा है कि 30 अगस्त की शाम को वास्तविक रूप से सभी हथियार वहां मौजूद थे या नहीं।

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, हथियारों के भंडारण वाले स्थान की सुरक्षा नियमित रूप से की जाती है। वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने भी किसी तरह की सेंधमारी देखने से इनकार किया है। उनके बयानों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, हथियारों का हिसाब नियमित रूप से किया जाना जरूरी है, लेकिन रिकॉर्ड में मिली कथित खामियां जांच के लिए महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रही हैं।

    फिलहाल सेना और तेलंगाना पुलिस चोरी हुए हथियारों, गोला-बारूद और अन्य सामान का पता लगाने के साथ यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि वे आखिर कब और किन परिस्थितियों में गायब हुए। रिकॉर्ड में कमी, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका समेत विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाएगी।

  • राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब

    राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली । 
    रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम में धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों तथा उनके सरपरस्तों के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए भारत ने स्पष्ट किया कि अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

    राजनाथ सिंह दिल्ली कैंट स्थित सेना के बेस अस्पताल में आयोजित विशेष रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश की नारी शक्ति के सिंदूर की रक्षा के लिए भी भारत किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।

    रक्षामंत्री ने इस अवसर पर आयोजित रक्तदान कार्यक्रम को ‘सिंदूर’ महारक्तदान यात्रा का नाम दिए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह नाम अपने भीतर एक प्रतीकात्मक संदेश रखता है और रक्तदान का आयोजन मानवता, सहृदयता तथा राष्ट्रप्रेम से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है।

    उन्होंने कहा कि रक्त का निर्माण किसी कारखाने या प्रयोगशाला में नहीं किया जा सकता। यह स्वस्थ मानव शरीर में ही बनता है और एक व्यक्ति ही दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त देकर उसकी सहायता कर सकता है। इसी वजह से रक्तदान को जीवनदान और महादान के रूप में देखा जाता है।

    राजनाथ सिंह ने बताया कि इस अभियान में सांगली से आए सैकड़ों खिलाड़ी भी रक्तदान कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस पहल के माध्यम से एक ऐसा रक्त भंडार तैयार होगा, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर सेना के जवानों और उनके परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगा।

    रक्षामंत्री ने रक्तदान करने वाले खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि एथलीटों की पहचान उनकी शारीरिक क्षमता से होती है, लेकिन इस अवसर पर उन्होंने करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की शक्ति का भी परिचय दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय नागरिकों और जवानों के परिवारों के साथ खड़ा होना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इस आयोजन में एथलीटों और अन्य प्रतिभागियों की ओर से करीब एक हजार यूनिट रक्तदान किया गया। राजनाथ सिंह ने इसे भारतीय सेना के जवानों और उनके परिवारों के प्रति भरोसे का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय राष्ट्र उनके साथ खड़ा रहेगा और इससे बड़ी राष्ट्रसेवा की भावना का उदाहरण मुश्किल है।

    रक्षामंत्री ने देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं से रक्तदान को केवल किसी विशेष कार्यक्रम तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे समाज की नियमित संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि 2047 में भारत की स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने पर लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा संवेदनशील समाज भी होना चाहिए जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

    राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री की ओर से फिटनेस को लेकर दिए गए संदेश और खेलो इंडिया तथा फिटनेस से जुड़े अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं से स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि नागरिक जितने अधिक फिट रहेंगे, उतना ही वे समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे और रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों में भी योगदान दे सकेंगे।

  • रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    नई दिल्ली । श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में फिल्म ‘धुरंधर’ से प्रेरित विशेष थीम वाले ‘धुरंधर बार’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर फिल्म का हिस्सा रहे अभिनेता राकेश बेदी मौजूद रहे और उन्होंने इस विशेष कॉर्नर का उद्घाटन करने के साथ-साथ उसके अंदर की सजावट का परिचय भी कराया। सुरक्षा कारणों से मेस का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इस पहल ने फिल्म और भारतीय सेना के बीच बने सांस्कृतिक जुड़ाव को नई पहचान दी है।

    राकेश बेदी ने अपने सोशल मीडिया माध्यम से साझा किए गए वीडियो में बताया कि उन्हें श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में आमंत्रित किया गया था, जहां सैनिक लंबे समय से ‘धुरंधर बार’ के उद्घाटन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस विशेष अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है। उद्घाटन के दौरान उन्होंने रिबन काटकर इस थीम आधारित बार को औपचारिक रूप से शुरू किया।

    बार के अंदर की सजावट पूरी तरह फिल्म ‘धुरंधर’ की थीम पर तैयार की गई है। प्रवेश द्वार पर ‘धुरंधर बार, स्थापना 2026’ का साइन बोर्ड लगाया गया है, जो इस स्थान की अलग पहचान बनाता है। दीवारों पर फिल्म के प्रमुख किरदारों के पोस्टर और कलात्मक चित्र लगाए गए हैं, जिनमें कई लोकप्रिय संवाद भी शामिल किए गए हैं। इन कलाकृतियों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे फिल्म के माहौल और उसके किरदारों की झलक प्रस्तुत करें।

    राकेश बेदी ने अपने वीडियो में बार का विस्तृत दौरा कराते हुए वहां मौजूद विभिन्न सजावटी तत्वों को भी दिखाया। उन्होंने बताया कि एक ओर फिल्म के कलाकार गौरव गेरा के किरदार का पोस्टर लगाया गया है, जिसमें उनका चर्चित दृश्य और संवाद दर्शाया गया है। वहीं दूसरी ओर स्वयं राकेश बेदी के किरदार से जुड़ा पोस्टर भी लगाया गया है। इसके अलावा मुख्य आकर्षण के रूप में अभिनेता रणवीर सिंह की बड़ी कलात्मक तस्वीर स्थापित की गई है, जिसे विशेष डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। सामने की दीवार पर फिल्म में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका निभाने वाले आर. माधवन के किरदार की आर्टवर्क भी लगाई गई है।

    राकेश बेदी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से वह आर्मी मेस की सटीक लोकेशन साझा नहीं कर सकते। उन्होंने सैनिकों द्वारा फिल्म के प्रति दिखाई गई सराहना और इस विशेष थीम कॉर्नर के निर्माण को सम्मानजनक पहल बताया। उनके अनुसार सेना के जवानों ने फिल्म के कई किरदारों और दृश्यों को यादगार तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे यह स्थान उनके लिए भी एक अलग आकर्षण बन गया है।

    ‘धुरंधर’ फिल्म श्रृंखला अपनी कहानी और प्रस्तुतिकरण के कारण दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही। फिल्म की कथा एक भारतीय जासूस के मिशन पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियान को प्रमुखता से दिखाया गया है। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन, गौरव गेरा और राकेश बेदी सहित कई कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। श्रृंखला की दोनों फिल्मों को दर्शकों का व्यापक समर्थन मिला और उन्होंने वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय व्यावसायिक सफलता भी हासिल की। अब श्रीनगर के इस आर्मी मेस में फिल्म की थीम पर तैयार किया गया ‘धुरंधर बार’ उस लोकप्रियता का एक नया उदाहरण माना जा रहा है, जिसने सैनिकों और फिल्म प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना दिया है।

  • कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली । देश ने रविवार को 27वां कारगिल विजय दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के अदम्य साहस और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनका शौर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह दिन उन बहादुर सैनिकों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों की सेवा और त्याग को देश हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद रखेगा। उनके अनुसार कारगिल के वीरों की गाथा केवल सैन्य इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प और आत्मविश्वास की पहचान भी है।

    कारगिल विजय दिवस भारत की उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जब वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए दुश्मन के कब्जे से रणनीतिक चोटियों को दोबारा अपने नियंत्रण में लिया था। बर्फ से ढकी ऊंची पहाड़ियों, प्रतिकूल मौसम और लगातार हो रही गोलाबारी के बीच भारतीय जवानों ने अद्वितीय साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। 26 जुलाई को मिली इस विजय ने भारतीय सेना की क्षमता और राष्ट्र की एकजुटता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

    कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया और शौर्य विजय यात्रा के समापन कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध स्मारक पर लहराता तिरंगा उन वीर सैनिकों के अद्वितीय बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 1999 में भारतीय सीमा पर हुई घुसपैठ का भारतीय सेना ने अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दुश्मन ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए सभी चुनौतियों को परास्त कर दिया। उन्होंने कहा कि कारगिल के योद्धाओं ने केवल ऊंची चोटियां ही नहीं जीतीं, बल्कि पूरे देश का विश्वास और सम्मान भी मजबूत किया।

    राजनाथ सिंह ने कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे सहित अनेक वीर सैनिकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी वीरगाथाएं आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा, कर्तव्य और त्याग का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का स्मरण नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को देश के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराने वाला अवसर भी है। उनके अनुसार सेवा, समर्पण और बलिदान जैसे मूल्य ही किसी भी मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सशस्त्र बल लगातार देश की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मोर्चे पर सजग हैं। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरे देश ने वीर शहीदों के अद्वितीय योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह दिवस एक बार फिर देशवासियों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और वीर सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश देता है।

  • चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    नई दिल्ली । देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी पद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) से जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल शनिवार को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्होंने त्रि-सेवाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर को स्वीकार किया और शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर अपने सैन्य जीवन को भावनात्मक विदाई दी। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना में सेवा देने वाले जनरल चौहान ने 1981 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ पदों पर कार्य किया। उनके रिटायरमेंट समारोह में सैन्य परंपराओं और सम्मान की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहां उन्होंने वर्दीधारी जीवन को अलविदा कहते हुए इसे अपने जीवन का एक अत्यंत गौरवपूर्ण अध्याय बताया।

    जनरल चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंतिम बार पुष्पांजलि अर्पित करना उनके लिए अत्यंत भावुक और सम्मानजनक क्षण था, क्योंकि यह उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने का अवसर था जिन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई लेना उनके लिए गर्व का विषय है और यह उनके सैन्य जीवन की सबसे यादगार क्षणों में से एक रहेगा। इस अवसर पर उन्होंने अपने सहकर्मियों, वरिष्ठ अधिकारियों और सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना में बिताया गया प्रत्येक क्षण उनके लिए सीख और प्रेरणा से भरा रहा है।

    अपने कार्यकाल को याद करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि सीडीएस के रूप में उनका समय अत्यंत संतोषजनक रहा और इस दौरान तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने संयुक्त रक्षा प्रणाली और आधुनिक रणनीतिक ढांचे को आगे बढ़ाने में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव और संयुक्त अभ्यासों को बढ़ावा मिला, जिससे देश की रक्षा क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कदम उठाए गए।

    जनरल चौहान की सेवानिवृत्ति को भारतीय सैन्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान त्रि-सेवाओं के बीच तालमेल और एकीकृत रणनीति को बढ़ावा देने में केंद्रीय भूमिका निभाई। चार दशकों से अधिक की सेवा में उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और अनेक प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान भी प्राप्त किए। उनके योगदान को भारतीय रक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा, जहां उन्होंने न केवल नेतृत्व किया बल्कि आधुनिक सैन्य संरचना को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई।

  • Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल

    Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल


    इस्लामाबाद ।
    पाकिस्तान (Pakistan) के बलूचिस्तान प्रांत (Balochistan Province) में सेना व बलोच विद्रोहियों (Army and Baloch rebels) में भीषण गोलीबारी चल रही है। स्थिति यह है कि सैन्य अभियानों के बीच खारान, खुजदार और मस्तुंग सहित कई जिलों में हिंसा से विद्रोह और व्यापक हो गया है। सेना-विद्रोहियों में सशस्त्र झड़पों के बीच बड़ी संख्या में सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं। हालांकि, सीमित पहुंच के कारण इन खबरों पर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल खामोशी बनाए हैं। जबकि खारान में नया सैन्य अभियान शुरू होने का दावा निवासियों ने किया। सेना ने अलमार्क और किसान जैसे इलाकों में तड़के एक अभियान शुरू कर दिया।

    इस अभियान के दौरान, कुछ अज्ञात हथियारबंद लोगों ने सेना के दस वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया और दोनों पक्षों में गोलीबारी शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने अपने ऊपर ड्रोन उड़ने की भी जानकारी दी, लेकिन हताहतों या अभियान के नतीजों के बारे में कोई भी पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारी इन घटनाक्रमों पर चुप्पी साधे हैं। इसके बाद सोहिंदा में काफी देर तक गोलीबारी होती रही। यह झड़प कई घंटों तक चली। इस दौरान क्षेत्र में ड्रोन उड़ते भी देखे गए।

    बलूचिस्तान के बरखान जिल में अंधाधुंध सैन्य गोलीबारी में आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। यहां बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने हाल ही में हुई बमबारी और गोलाबारी की निंदा कर इसे सामूहिक सजा का कृत्य बताया है। इस अभियान में कई गैर-लड़ाकों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग शामिल हैं। बीवाईसी ने घटना को बेहद दुखद और निंदनीय त्रासदी बताया।

  • आसिम मुनीर ने तालिबान को फिर दी चेतावनी, कहा-पाकिस्तान या TTP में से किसी एक को चुनो

    आसिम मुनीर ने तालिबान को फिर दी चेतावनी, कहा-पाकिस्तान या TTP में से किसी एक को चुनो

    इस्लामाबाद । पाकिस्तानी सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर से तालिबान को चेतावनी दी है। मुनीर ने तालिबान सरकार से टीटीपी या फिर पाकिस्तान में से एक को चुनने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सीमा पार से पाकिस्तान में घुसपैठ करने वाले ज्यादातर आतंकियों में अफगान नागरिक शामिल हैं। हाल ही में इस्लामाबाद में नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, मुनीर ने पाकिस्तान और 1,400 साल पहले पैगंबर द्वारा अरब क्षेत्र (आज के सऊदी अरब) में स्थापित राज्य के बीच समानताएं भी बताईं।

    हालांकि 10 दिसंबर को दिए गए भाषण का आधिकारिक विवरण सीमित था, लेकिन उनके भाषण के चुनिंदा क्लिप रविवार को स्थानीय टेलीविजन पर प्रसारित किए गए। मुनीर ने अफगान तालिबान सरकार से पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) में से किसी एक को चुनने के लिए कहा, और कहा कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद का बड़ा हिस्सा अफगान नागरिकों का है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में आने वाले टीटीपी के गुटों में 70 प्रतिशत अफगान हैं। क्या अफगानिस्तान हमारे पाकिस्तानी बच्चों का खून नहीं बहा रहा है?” उन्होंने अपनी बात दोहराई कि अफगान तालिबान को पाकिस्तान और TTP में से किसी एक को चुनना चाहिए।

    मुनीर ने आगे कहा कि एक इस्लामी देश में सरकार के अलावा कोई भी जिहाद का आदेश नहीं दे सकता। उन्होंने कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “अधिकार प्राप्त लोगों के आदेश, अनुमति और इच्छा के बिना कोई भी जिहाद का फतवा जारी नहीं कर सकता।” उनकी स्पीच में इस्लामिक बातों का जिक्र था, और उन्होंने अपने भाषण के दौरान कुरान की कई आयतें भी पढ़ीं।