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  • राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब

    राजनाथ सिंह बोले, ऑपरेशन सिंदूर से आतंकियों और उनके सरपरस्तों को दिया करारा जवाब


    नई दिल्ली । 
    रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि पहलगाम में धर्म पूछकर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाए जाने के बाद भारतीय सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों तथा उनके सरपरस्तों के खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के जरिए भारत ने स्पष्ट किया कि अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

    राजनाथ सिंह दिल्ली कैंट स्थित सेना के बेस अस्पताल में आयोजित विशेष रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि देश की नारी शक्ति के सिंदूर की रक्षा के लिए भी भारत किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है।

    रक्षामंत्री ने इस अवसर पर आयोजित रक्तदान कार्यक्रम को ‘सिंदूर’ महारक्तदान यात्रा का नाम दिए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह नाम अपने भीतर एक प्रतीकात्मक संदेश रखता है और रक्तदान का आयोजन मानवता, सहृदयता तथा राष्ट्रप्रेम से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर है।

    उन्होंने कहा कि रक्त का निर्माण किसी कारखाने या प्रयोगशाला में नहीं किया जा सकता। यह स्वस्थ मानव शरीर में ही बनता है और एक व्यक्ति ही दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को रक्त देकर उसकी सहायता कर सकता है। इसी वजह से रक्तदान को जीवनदान और महादान के रूप में देखा जाता है।

    राजनाथ सिंह ने बताया कि इस अभियान में सांगली से आए सैकड़ों खिलाड़ी भी रक्तदान कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस पहल के माध्यम से एक ऐसा रक्त भंडार तैयार होगा, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर सेना के जवानों और उनके परिवारों के लिए उपयोगी साबित होगा।

    रक्षामंत्री ने रक्तदान करने वाले खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि एथलीटों की पहचान उनकी शारीरिक क्षमता से होती है, लेकिन इस अवसर पर उन्होंने करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की शक्ति का भी परिचय दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय नागरिकों और जवानों के परिवारों के साथ खड़ा होना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    इस आयोजन में एथलीटों और अन्य प्रतिभागियों की ओर से करीब एक हजार यूनिट रक्तदान किया गया। राजनाथ सिंह ने इसे भारतीय सेना के जवानों और उनके परिवारों के प्रति भरोसे का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय राष्ट्र उनके साथ खड़ा रहेगा और इससे बड़ी राष्ट्रसेवा की भावना का उदाहरण मुश्किल है।

    रक्षामंत्री ने देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं से रक्तदान को केवल किसी विशेष कार्यक्रम तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे समाज की नियमित संस्कृति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि 2047 में भारत की स्वतंत्रता के सौ वर्ष पूरे होने पर लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था बनना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा संवेदनशील समाज भी होना चाहिए जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें।

    राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री की ओर से फिटनेस को लेकर दिए गए संदेश और खेलो इंडिया तथा फिटनेस से जुड़े अभियानों का उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं से स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि नागरिक जितने अधिक फिट रहेंगे, उतना ही वे समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे और रक्तदान जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यों में भी योगदान दे सकेंगे।

  • रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ से प्रेरित आर्मी मेस का नया आकर्षण, राकेश बेदी ने किया उद्घाटन और कराया दौरा

    नई दिल्ली । श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में फिल्म ‘धुरंधर’ से प्रेरित विशेष थीम वाले ‘धुरंधर बार’ का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर फिल्म का हिस्सा रहे अभिनेता राकेश बेदी मौजूद रहे और उन्होंने इस विशेष कॉर्नर का उद्घाटन करने के साथ-साथ उसके अंदर की सजावट का परिचय भी कराया। सुरक्षा कारणों से मेस का सटीक स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इस पहल ने फिल्म और भारतीय सेना के बीच बने सांस्कृतिक जुड़ाव को नई पहचान दी है।

    राकेश बेदी ने अपने सोशल मीडिया माध्यम से साझा किए गए वीडियो में बताया कि उन्हें श्रीनगर स्थित एक आर्मी मेस में आमंत्रित किया गया था, जहां सैनिक लंबे समय से ‘धुरंधर बार’ के उद्घाटन का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस विशेष अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है। उद्घाटन के दौरान उन्होंने रिबन काटकर इस थीम आधारित बार को औपचारिक रूप से शुरू किया।

    बार के अंदर की सजावट पूरी तरह फिल्म ‘धुरंधर’ की थीम पर तैयार की गई है। प्रवेश द्वार पर ‘धुरंधर बार, स्थापना 2026’ का साइन बोर्ड लगाया गया है, जो इस स्थान की अलग पहचान बनाता है। दीवारों पर फिल्म के प्रमुख किरदारों के पोस्टर और कलात्मक चित्र लगाए गए हैं, जिनमें कई लोकप्रिय संवाद भी शामिल किए गए हैं। इन कलाकृतियों को इस तरह तैयार किया गया है कि वे फिल्म के माहौल और उसके किरदारों की झलक प्रस्तुत करें।

    राकेश बेदी ने अपने वीडियो में बार का विस्तृत दौरा कराते हुए वहां मौजूद विभिन्न सजावटी तत्वों को भी दिखाया। उन्होंने बताया कि एक ओर फिल्म के कलाकार गौरव गेरा के किरदार का पोस्टर लगाया गया है, जिसमें उनका चर्चित दृश्य और संवाद दर्शाया गया है। वहीं दूसरी ओर स्वयं राकेश बेदी के किरदार से जुड़ा पोस्टर भी लगाया गया है। इसके अलावा मुख्य आकर्षण के रूप में अभिनेता रणवीर सिंह की बड़ी कलात्मक तस्वीर स्थापित की गई है, जिसे विशेष डिजाइन के साथ तैयार किया गया है। सामने की दीवार पर फिल्म में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका निभाने वाले आर. माधवन के किरदार की आर्टवर्क भी लगाई गई है।

    राकेश बेदी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से वह आर्मी मेस की सटीक लोकेशन साझा नहीं कर सकते। उन्होंने सैनिकों द्वारा फिल्म के प्रति दिखाई गई सराहना और इस विशेष थीम कॉर्नर के निर्माण को सम्मानजनक पहल बताया। उनके अनुसार सेना के जवानों ने फिल्म के कई किरदारों और दृश्यों को यादगार तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, जिससे यह स्थान उनके लिए भी एक अलग आकर्षण बन गया है।

    ‘धुरंधर’ फिल्म श्रृंखला अपनी कहानी और प्रस्तुतिकरण के कारण दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही। फिल्म की कथा एक भारतीय जासूस के मिशन पर आधारित है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियान को प्रमुखता से दिखाया गया है। फिल्म में रणवीर सिंह के साथ अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन, गौरव गेरा और राकेश बेदी सहित कई कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। श्रृंखला की दोनों फिल्मों को दर्शकों का व्यापक समर्थन मिला और उन्होंने वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय व्यावसायिक सफलता भी हासिल की। अब श्रीनगर के इस आर्मी मेस में फिल्म की थीम पर तैयार किया गया ‘धुरंधर बार’ उस लोकप्रियता का एक नया उदाहरण माना जा रहा है, जिसने सैनिकों और फिल्म प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा का विषय बना दिया है।

  • कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    कारगिल विजय दिवस पर देश ने याद किया वीरों का शौर्य, जयशंकर और राजनाथ सिंह ने बलिदान को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली । देश ने रविवार को 27वां कारगिल विजय दिवस पूरे सम्मान और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के अदम्य साहस और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनका शौर्य आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि यह दिन उन बहादुर सैनिकों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों की सेवा और त्याग को देश हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद रखेगा। उनके अनुसार कारगिल के वीरों की गाथा केवल सैन्य इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प और आत्मविश्वास की पहचान भी है।

    कारगिल विजय दिवस भारत की उस ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है, जब वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए दुश्मन के कब्जे से रणनीतिक चोटियों को दोबारा अपने नियंत्रण में लिया था। बर्फ से ढकी ऊंची पहाड़ियों, प्रतिकूल मौसम और लगातार हो रही गोलाबारी के बीच भारतीय जवानों ने अद्वितीय साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। 26 जुलाई को मिली इस विजय ने भारतीय सेना की क्षमता और राष्ट्र की एकजुटता का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

    कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल युद्ध स्मारक पहुंचकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया और शौर्य विजय यात्रा के समापन कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि कारगिल युद्ध स्मारक पर लहराता तिरंगा उन वीर सैनिकों के अद्वितीय बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 1999 में भारतीय सीमा पर हुई घुसपैठ का भारतीय सेना ने अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दुश्मन ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ उठाने की कोशिश की थी, लेकिन भारतीय सैनिकों ने असाधारण वीरता का परिचय देते हुए सभी चुनौतियों को परास्त कर दिया। उन्होंने कहा कि कारगिल के योद्धाओं ने केवल ऊंची चोटियां ही नहीं जीतीं, बल्कि पूरे देश का विश्वास और सम्मान भी मजबूत किया।

    राजनाथ सिंह ने कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे सहित अनेक वीर सैनिकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी वीरगाथाएं आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा, कर्तव्य और त्याग का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का स्मरण नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को देश के प्रति अपने दायित्वों का एहसास कराने वाला अवसर भी है। उनके अनुसार सेवा, समर्पण और बलिदान जैसे मूल्य ही किसी भी मजबूत राष्ट्र की आधारशिला होते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सशस्त्र बल लगातार देश की सुरक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हर मोर्चे पर सजग हैं। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पूरे देश ने वीर शहीदों के अद्वितीय योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। यह दिवस एक बार फिर देशवासियों को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और वीर सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेने का संदेश देता है।

  • चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    नई दिल्ली । देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी पद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) से जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल शनिवार को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्होंने त्रि-सेवाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर को स्वीकार किया और शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर अपने सैन्य जीवन को भावनात्मक विदाई दी। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना में सेवा देने वाले जनरल चौहान ने 1981 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ पदों पर कार्य किया। उनके रिटायरमेंट समारोह में सैन्य परंपराओं और सम्मान की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहां उन्होंने वर्दीधारी जीवन को अलविदा कहते हुए इसे अपने जीवन का एक अत्यंत गौरवपूर्ण अध्याय बताया।

    जनरल चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंतिम बार पुष्पांजलि अर्पित करना उनके लिए अत्यंत भावुक और सम्मानजनक क्षण था, क्योंकि यह उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने का अवसर था जिन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई लेना उनके लिए गर्व का विषय है और यह उनके सैन्य जीवन की सबसे यादगार क्षणों में से एक रहेगा। इस अवसर पर उन्होंने अपने सहकर्मियों, वरिष्ठ अधिकारियों और सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना में बिताया गया प्रत्येक क्षण उनके लिए सीख और प्रेरणा से भरा रहा है।

    अपने कार्यकाल को याद करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि सीडीएस के रूप में उनका समय अत्यंत संतोषजनक रहा और इस दौरान तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने संयुक्त रक्षा प्रणाली और आधुनिक रणनीतिक ढांचे को आगे बढ़ाने में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव और संयुक्त अभ्यासों को बढ़ावा मिला, जिससे देश की रक्षा क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कदम उठाए गए।

    जनरल चौहान की सेवानिवृत्ति को भारतीय सैन्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान त्रि-सेवाओं के बीच तालमेल और एकीकृत रणनीति को बढ़ावा देने में केंद्रीय भूमिका निभाई। चार दशकों से अधिक की सेवा में उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और अनेक प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान भी प्राप्त किए। उनके योगदान को भारतीय रक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा, जहां उन्होंने न केवल नेतृत्व किया बल्कि आधुनिक सैन्य संरचना को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई।

  • Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल

    Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल


    इस्लामाबाद ।
    पाकिस्तान (Pakistan) के बलूचिस्तान प्रांत (Balochistan Province) में सेना व बलोच विद्रोहियों (Army and Baloch rebels) में भीषण गोलीबारी चल रही है। स्थिति यह है कि सैन्य अभियानों के बीच खारान, खुजदार और मस्तुंग सहित कई जिलों में हिंसा से विद्रोह और व्यापक हो गया है। सेना-विद्रोहियों में सशस्त्र झड़पों के बीच बड़ी संख्या में सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं। हालांकि, सीमित पहुंच के कारण इन खबरों पर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल खामोशी बनाए हैं। जबकि खारान में नया सैन्य अभियान शुरू होने का दावा निवासियों ने किया। सेना ने अलमार्क और किसान जैसे इलाकों में तड़के एक अभियान शुरू कर दिया।

    इस अभियान के दौरान, कुछ अज्ञात हथियारबंद लोगों ने सेना के दस वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया और दोनों पक्षों में गोलीबारी शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने अपने ऊपर ड्रोन उड़ने की भी जानकारी दी, लेकिन हताहतों या अभियान के नतीजों के बारे में कोई भी पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारी इन घटनाक्रमों पर चुप्पी साधे हैं। इसके बाद सोहिंदा में काफी देर तक गोलीबारी होती रही। यह झड़प कई घंटों तक चली। इस दौरान क्षेत्र में ड्रोन उड़ते भी देखे गए।

    बलूचिस्तान के बरखान जिल में अंधाधुंध सैन्य गोलीबारी में आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। यहां बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने हाल ही में हुई बमबारी और गोलाबारी की निंदा कर इसे सामूहिक सजा का कृत्य बताया है। इस अभियान में कई गैर-लड़ाकों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग शामिल हैं। बीवाईसी ने घटना को बेहद दुखद और निंदनीय त्रासदी बताया।

  • आसिम मुनीर ने तालिबान को फिर दी चेतावनी, कहा-पाकिस्तान या TTP में से किसी एक को चुनो

    आसिम मुनीर ने तालिबान को फिर दी चेतावनी, कहा-पाकिस्तान या TTP में से किसी एक को चुनो

    इस्लामाबाद । पाकिस्तानी सेना प्रमुख और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर से तालिबान को चेतावनी दी है। मुनीर ने तालिबान सरकार से टीटीपी या फिर पाकिस्तान में से एक को चुनने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि सीमा पार से पाकिस्तान में घुसपैठ करने वाले ज्यादातर आतंकियों में अफगान नागरिक शामिल हैं। हाल ही में इस्लामाबाद में नेशनल उलेमा कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, मुनीर ने पाकिस्तान और 1,400 साल पहले पैगंबर द्वारा अरब क्षेत्र (आज के सऊदी अरब) में स्थापित राज्य के बीच समानताएं भी बताईं।

    हालांकि 10 दिसंबर को दिए गए भाषण का आधिकारिक विवरण सीमित था, लेकिन उनके भाषण के चुनिंदा क्लिप रविवार को स्थानीय टेलीविजन पर प्रसारित किए गए। मुनीर ने अफगान तालिबान सरकार से पाकिस्तान और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) में से किसी एक को चुनने के लिए कहा, और कहा कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद का बड़ा हिस्सा अफगान नागरिकों का है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में आने वाले टीटीपी के गुटों में 70 प्रतिशत अफगान हैं। क्या अफगानिस्तान हमारे पाकिस्तानी बच्चों का खून नहीं बहा रहा है?” उन्होंने अपनी बात दोहराई कि अफगान तालिबान को पाकिस्तान और TTP में से किसी एक को चुनना चाहिए।

    मुनीर ने आगे कहा कि एक इस्लामी देश में सरकार के अलावा कोई भी जिहाद का आदेश नहीं दे सकता। उन्होंने कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “अधिकार प्राप्त लोगों के आदेश, अनुमति और इच्छा के बिना कोई भी जिहाद का फतवा जारी नहीं कर सकता।” उनकी स्पीच में इस्लामिक बातों का जिक्र था, और उन्होंने अपने भाषण के दौरान कुरान की कई आयतें भी पढ़ीं।