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  • महंगी चीनी के सवाल पर शिवराज बोले- सब इंतजाम हो रहे हैं जी, चिंता मत करो…

    महंगी चीनी के सवाल पर शिवराज बोले- सब इंतजाम हो रहे हैं जी, चिंता मत करो…


    रायसेन।
    केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) अपने एक दिवसीय दौरे पर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रायसेन (Raisen) पहुंचे. इस दौरान वह छात्राओं के कार्यक्रम में शामिल हुए, मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया और केंद्र सरकार (Central government) की योजनाओं की समीक्षा की. हालांकि, जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति यानी दिशा की मीटिंग के दौरान चीनी की बढ़ती कीमत को लेकर पूछे गए सवाल ने भी ध्यान खींचा.

    मीटिंग से कुर्सी छोड़ते समय जब महंगी चीनी को लेकर सवाल किया गया तो शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ”सब इंतजाम हो रहे हैं जी, चिंता मत करो…”

    शासकीय कन्या महाविद्यालय में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्थिक कारणों से किसी भी होनहार बेटी की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। छात्राओं की सहूलियत के लिए स्थापित हेल्प डेस्क के जरिए अजीम प्रेमजी छात्रवृत्ति योजना की पात्रता नियम, आवेदन प्रक्रिया और दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा एक ही जगह उपलब्ध कराई गई है।

    केंद्रीय मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के सभी शासकीय महाविद्यालयों की छात्राओं से संवाद किया और समय पर आवेदन करने के लिए प्रेरित किया.

    छात्रों को लैपटॉप वितरण और कंप्यूटर लैब का लोकार्पण
    कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को लैपटॉप और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया. इसके बाद उन्होंने परिसर में नवनिर्मित कंप्यूटर लैब का फीता काटकर लोकार्पण किया और लैब का जायजा लेते हुए छात्राओं से बातचीत की. पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत कॉलेज परिसर में पौधारोपण किया।


    दिशा बैठक में केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा

    दौरे के अंतिम चरण में शिवराज सिंह चौहान कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने दिशा समिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. बैठक में कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता, जिला पंचायत सीईओ कमल सोलंकी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की और अधिकारियों को निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ तय समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

    कार्यक्रम में सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, भोजपुर विधायक सुरेंद्र पटवा, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंत मीणा, पूर्व कैबिनेट मंत्री रामपाल सिंह और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।


    चीनी की देश में कोई कमी नहीं: ISMA

    उधर, चीनी की कीमतों में अचानक आए उछाल के बीच इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने कहा कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने तथा कारोबारियों एवं थोक उपभोक्ताओं पर भंडारण सीमा लगाने से आने वाले दिनों में खुदरा कीमतें घटने की उम्मीद है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 63.05 रुपये प्रति किलो रही, जो एक महीने पहले के 48.73 रुपये से 29 प्रतिशत अधिक है. अधिकतम खुदरा कीमत 75 रुपये और मॉडल कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो रही.

  • राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त

    राम मंदिर की व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव…. पालक के तौर पर नियुक्त भैयाजी जोशी भी दायित्व से मुक्त


    अयोध्या।
    अयोध्या (Ayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) में दान चोरी की घटना के बाद से मची उथल-पुथल थम नहीं रही है। चंपतराय (Champat Rai), डॉ. अनिल मिश्र (Dr. Anil Mishra) और गोपाल राव (Gopal Rao) के हटने के बाद अब संगठन संरक्षक के तौर पर राम मंदिर के पालक नियुक्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी भैयाजी जोशी (Bhaiyaji Joshi) भी दायित्व से मुक्त कर दिए गए हैं। सूत्रों की मानें तो पालक की जिम्मेदारी के लिए दूसरे बड़े और कद्दावर चेहरे की तलाश शुरू हो चुकी है। इसमें दिल्ली के वरिष्ठ प्रचारक का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।

    संघ का शीर्ष नेतृत्व इस मुद्दे पर अंतर्द्वंद्व में फंसा है। इस विषय पर संघ का थिंक टैंक दो खेमों में बंट गया है। एक खेमा राम मंदिर मामलों से संघ को दूर रखने का हिमायती है तो दूसरा वकालत कर रहा है कि मंदिर पर संगठन का अंकुश जरूरी है। इसके पीछे दोनों खेमों के अपने-अपने तर्क हैं। इस कारण पालक का नाम घोषित करने में देरी हो रही है।


    ट्रस्ट की बैठकों में हमेशा शामिल होते रहे

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन और जमीन खरीद फरोख्त को लेकर हुए विवाद के बाद संघ नेतृत्व ने सर कार्यवाह पद से स्वास्थ्य कारणों से सेवामुक्त हुए भैयाजी जोशी को राम मंदिर का पालक नियुक्त कर उनका केंद्र लखनऊ तय किया था। इसके कारण वह प्रायः ट्रस्ट की बैठकों में शामिल होते थे।


    चंपत राय के लेटर बम से चिंतित था नेतृत्व

    चढ़ावा चोरी की घटना के दौरान भी मंदिर पालक का नाम चर्चा में आया, लेकिन उनका कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया। फिर भी 12 जून को लखनऊ में ट्रस्ट पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में वह शामिल रहे। इसके पहले छह जून को चढ़ावा चोरी की प्राथमिकी दर्ज कराने गए चंपतराय को रोकने में उनका हाथ होने की आशंका जताई गई मगर यह पुष्ट नहीं हो सका। अब पालक के पद से मुक्ति को उसी घटना से जोड़ा जा रहा है। खास बात यह भी है कि एफआईआर न कराने की वजह ही चंपत राय के त्यागपत्र का सबसे प्रमुख कारण थी।

    छह जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार करने के ऐलान के बाद सात जुलाई को चंपतराय ने लेटर बम फोड़ा था। इस लेटर के जरिए चंपतराय ने चढ़ावा गिनती के अनुबंध से सम्बन्धित जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था। उन्होंने उस पत्र में कहा था कि फिलहाल मैं मौन हूं लेकिन एसआईटी की जांच के बाद हर सवाल का उत्तर दूंगा। उन्होंने कहा कि कलंक लेकर नहीं जाऊंगा। उनके इस ऐलान से शीर्ष नेतृत्व चिंतित था कि कहीं कोई नया बखेड़ा न खड़ा हो जाए, इसीलिए उन्हें मनाने की कोशिशें हुईं। संतों को भी उनके समर्थन में कर उन्हें दिलासा दी गई।

  • उज्जैनः पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से, अधिकारियों ने मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    उज्जैनः पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से, अधिकारियों ने मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से प्रारंभ होगी। इसी के मद्देनजर शनिवार को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पंचक्रोशी यात्रा मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    सर्वप्रथम संभागायुक्त आशीष सिंह, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने पटनी बाजार स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर पूजन अर्चन किया और मंदिर परिसर में पानी की टंकी की सफाई, परिसर की साफ-सफाई , सीसीटीवी कैमरे, लाइट तथा एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

    इसके बाद अधिकारियों द्वारा बस से यात्रा कर उंडासा, पिंगलेश्वर, शनि मंदिर त्रिवेणी, करोहन, नलवा, अंबोदिया, पड़ाव व उप पड़ाव स्थलों का निरीक्षण किया गया। संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि पड़ाव स्थलों के बीच भी कुछ-कुछ स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था की जाए तथा जो भी बड़े खुले कुएं रास्ते में आ रहे हैं अथवा जहां नवीन पुल-पुलियाओं का निर्माण चल रहा है वहां सुरक्षा की दृष्टि से बैरिकेडिंग की जाए। साथ ही रात में अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था की जाए।

    पिंगलेश्वर में रेलवे ओवरब्रिज के नीचे सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। अस्थाई शौचालयों, लाइट , पेयजल के लिए टैंकर की व्यवस्था पर्याप्त संख्या में की जाए। त्रिवेणी में श्रद्धालुओं के स्नान के लिए शावर्स लगाए जाएं।

    अंबोदिया में व्यवस्थाओं के संबंध में ली गई बैठक में कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि वर्तमान में सिंहस्थ महापर्व के अंतर्गत निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं। पंचक्रोशी यात्रा के दौरान नये कार्य प्रारंभ न किये जाएं, वर्तमान में चल रहे कार्यों के तेज गति से पूर्ण करें। पंचक्रोशी यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। यात्रा मार्ग में कुछ स्थानों पर मुरम डाल कर समतलीकरण किया जाए। इसके अलावा जिन विभागों को यात्रा के संबंध में जो दायित्व सौंपे गए हैं, वे आगामी 05 अप्रैल तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर लें।

    पुलिस अधीक्षक शर्मा ने निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। ड्यूटीरत अधिकारी व कर्मचारी अपनी शिफ्ट समाप्त होने पर रिलिवर के आने के पश्चात ही कर्तव्य स्थल छोड़ें, निर्धारित समय पर अपने कर्तव्य स्थल पर पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए यात्रा के सुखद अनुभव के लिए सभी मिलकर प्रयास करें।

  • सलकनपुर मंदिर परिसर में सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं सभी व्यवस्थाएं

    सलकनपुर मंदिर परिसर में सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं सभी व्यवस्थाएं

    सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित विजयासन देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का सलकनपुर आगमन हो रहा है। श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना एवं दर्शन में किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसके लिए कलेक्टर बालागुरू के. के निर्देशानुसार प्रशासन द्वारा सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

    मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पार्किंग, पेयजल, साफ-सफाई तथा पर्याप्त बिजली की व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के सुगम आगमन एवं निर्गमन के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही मेला स्थल पर दुकानों को व्यवस्थित ढंग से लगाया गया है, जिससे किसी प्रकार की असुविधा न हो। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए भी पर्याप्त संख्या में पुलिस एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।

    जनसम्पर्क अधिकारी देवेन्द्र ओगारे ने शुक्रवार को बताया कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए हेल्थ कैंप लगाया गया हैं। जिससे श्रद्धालुओं को चिकित्सा की आवश्यकता पड़ने पर तत्काल रूप से मेडिकल सहायता प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही इमरजेंसी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में कोई परेशानी न हो, इसके लिए मुख्य स्थानों पर हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में कन्ट्रोल रूम भी बनाए गए हैं, जिससे ड्यूटी के दौरान सभी अधिकारी-कर्मचारी सतत संपर्क में हैं और पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं।

  • राष्ट्रपति के दौरे से पहले वृंदावन में बंदरों पर सख्ती लंगूर कटआउट से लेकर गुलेल तक बना सुरक्षा कवच

    राष्ट्रपति के दौरे से पहले वृंदावन में बंदरों पर सख्ती लंगूर कटआउट से लेकर गुलेल तक बना सुरक्षा कवच

    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में इन दिनों प्रशासन एक अनोखी चुनौती से जूझ रहा है। आमतौर पर धार्मिक और शांत वातावरण के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में बंदरों का बढ़ता आतंक अब बड़े स्तर की चिंता बन चुका है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब द्रौपदी मुर्मू के आगामी दौरे की घोषणा हुई।

    राष्ट्रपति का यह दौरा 19 मार्च से शुरू होकर तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें वे विभिन्न धार्मिक और सामाजिक स्थलों का भ्रमण करेंगी। इस दौरान उड़िया बाबा आश्रम, रामकृष्ण मिशन सेवा चैरिटेबल अस्पताल और गोवर्धन परिक्रमा जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। ऐसे में प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उनकी यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और व्यवधान रहित रहे।

    वृंदावन के बंदर खासतौर पर अपने अनोखे व्यवहार के लिए कुख्यात हैं। यहां के बंदर राह चलते लोगों के चश्मे छीन लेने के लिए जाने जाते हैं। वे अचानक झपट्टा मारकर चश्मा लेकर भाग जाते हैं और फिर उसे लौटाने के बदले खाने-पीने की चीजों की मांग करते हैं। फ्रूटी जैसे पेय पदार्थ उनके लिए मानो सौदेबाजी का जरिया बन चुके हैं। यही वजह है कि स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही अक्सर इस समस्या से जूझते नजर आते हैं।

    राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ कुछ अनोखे उपाय भी अपनाए हैं। पहले ऐसे मौकों पर बंदरों को भगाने के लिए प्रशिक्षित लंगूरों की मदद ली जाती थी, लेकिन वन्यजीव संरक्षण कानूनों के चलते अब यह तरीका अपनाना संभव नहीं है। इसके विकल्प के रूप में अब लंगूरों के कटआउट लगाए जा रहे हैं ताकि बंदरों में डर का माहौल बनाया जा सके।

    इसके अलावा वन विभाग ने लगभग 30 सदस्यों की एक विशेष टीम भी तैनात की है। यह टीम गुलेल, लाठी-डंडों और लेजर लाइट जैसे उपकरणों से लैस है। जिन इलाकों में बंदरों की संख्या अधिक है, वहां अतिरिक्त कर्मियों को लगाया जा रहा है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन की कोशिश है कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कोई भी बंदर पास न भटके।

    यह पूरा घटनाक्रम न केवल सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है बल्कि यह भी दिखाता है कि शहरी और धार्मिक क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। बंदरों का यह व्यवहार एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है, लेकिन अब जब मामला देश के सर्वोच्च पद से जुड़ा है, तो प्रशासन हर संभव कदम उठाने में जुटा है।

    वृंदावन में किए गए ये इंतजाम भले ही अस्थायी हों, लेकिन उन्होंने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भविष्य में इस समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाला जा सकेगा। फिलहाल सभी की नजरें राष्ट्रपति के दौरे पर हैं और यह देखने पर कि ये अनोखे उपाय कितने कारगर साबित होते हैं।