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  • अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    अमित शाह का दावा, आईएसआई समर्थित आतंकी नेटवर्क ध्वस्त, कई राज्यों में संयुक्त अभियान के दौरान हथियार और विस्फोटक बरामद

    नई दिल्ली ।केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दावा किया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित बताए जा रहे शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। उनके अनुसार 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान के दौरान 200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद की गई।

    अमित शाह के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न राज्यों की पुलिस ने 12 अगस्त को रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम के जरिए समन्वित अभियान चलाया। कार्रवाई का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित आतंकी गतिविधियों और हिंसा की साजिशों को समय रहते रोकना था। इस अभियान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल को शामिल किया गया।

    गिरफ्तारियों के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को पकड़ा गया। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में आठ और उत्तराखंड में पांच गिरफ्तारियां हुईं। गुजरात, कर्नाटक और बिहार में तीन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और केरल में दो दो लोगों को पकड़ा गया।

    गृह मंत्री ने कहा कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई। इनमें आईईडी, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और ग्रेनेड शामिल हैं। कुछ ग्रेनेड पर पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा जासूसी और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सीसीटीवी कैमरे भी बरामद किए गए।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार शहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और आईएसआई समर्थित आतंकी सिंडिकेट के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि यह नेटवर्क भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों के अलावा लक्षित हत्याओं जैसी गतिविधियों में स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल करता था।

    एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क से जुड़े स्थानीय लोगों को कथित तौर पर धन उपलब्ध कराया जाता था और उनसे पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों तथा धार्मिक स्थलों की रेकी कराने जैसे काम लिए जाते थे। निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

    अमित शाह ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की समयबद्ध कार्रवाई से संभावित विध्वंसक योजनाओं को नाकाम किया गया। स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील अवसर से पहले इतने बड़े स्तर पर की गई कार्रवाई को सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बताया गया है कि इस नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। मामलों में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, शस्त्र अधिनियम, मादक पदार्थ संबंधी कानून और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम जैसी धाराओं का इस्तेमाल किया गया है।

    सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार किए गए लोगों की भूमिका, उनके आपसी संपर्क, वित्तीय नेटवर्क और सीमा पार से संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं। बरामद हथियारों और अन्य सामग्री के स्रोत की भी पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उसकी गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

  • ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार

    ED ने अनिल अंबानी ग्रुप के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार


    मुंबई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने शुक्रवार अनिल अंबानी (Anil Ambani) के करीबी और रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) के पूर्व ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन सतीश सेठ (Satish Seth) को मुंबई में गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उन्हें एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया है, जहां से ईडी को ट्रांजिट रिमांड मिल गई है. अब उन्हें दिल्ली लाया जा रहा है.

    एक रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को मुंबई में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) के दो पूर्व अधिकारियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया।

    उन्होंने बताया कि गिरफ्तार के बाद सतीश को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 48 घंटे की ट्रांजिट रिमांड पर भेज दिया गया है. चूंकि ये मामले दिल्ली में दर्ज है तो जांच एजेंसी की टीम रिमांड अवधि में सतीश को दिल्ली लाकर अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ-जांच के लिए हिरासत की मांग करेगी।

    केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस साल मार्च महीने में ही सतीश सेठ और गौतम दोशी के खिलाफ मामला दर्ज किया था. सीबीआई की टीम ने इस जांच के हिस्से के रूप में दोनों अधिकारियों के परिसरों और ठिकानों पर छापेमारी भी की थी. सीबीआई की इसी शिकायत को आधार बनाकर ईडी ने दोनों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की है।

    सीबीआई के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) कुल 11 बैंकों के उस कंसोर्टियम (समूह) का एक प्रमुख सदस्य था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी. इसी स्वीकृत लोन में से 114.98 करोड़ रुपये की राशि में भारी धोखाधड़ी और वित्तीय हेरफेर करने का गंभीर आरोप इन दोनों अधिकारियों पर लगा है।

    बता दें कि सतीश सेठ को लंबे समय तक अनिल अंबानी का बेहद करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता रहा है जो रिलायंस ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के वाइस-चेयरमैन के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. अब प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे बैंक लोन फ्रॉड मामले में सतीश सेठ और गौतम दोशी दोनों की वास्तविक भूमिकाओं की गहराई से जांच कर रहा है।

  • दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का बड़ा ऑपरेशन, आतंकी हमले की साजिश विफल, जांच एजेंसियां अलर्ट

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का बड़ा ऑपरेशन, आतंकी हमले की साजिश विफल, जांच एजेंसियां अलर्ट

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को समय रहते नाकाम करते हुए महत्वपूर्ण कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसमें कथित रूप से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़े नेटवर्क और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन वाले एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई के तहत दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 9 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से हथियार, हैंड ग्रेनेड और विस्फोटक सामग्री बरामद होने की पुष्टि की गई है। यह गिरफ्तारी कई दिनों की निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर की गई है, जिसके बाद राजधानी के विभिन्न इलाकों में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया गया।

    जांच एजेंसियों के अनुसार प्रारंभिक जानकारी में यह सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए संदिग्ध लंबे समय से एक संगठित नेटवर्क के तहत सक्रिय थे और दिल्ली में बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। इस कथित साजिश में मंत्रालयों, सुरक्षा बलों के प्रतिष्ठानों, संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई है। अगर यह योजना सफल होती तो राजधानी में गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो सकता था, हालांकि समय रहते कार्रवाई होने से संभावित खतरे को टाल दिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों और डिजिटल संपर्कों की जानकारी मिल रही थी, जिसके बाद तकनीकी निगरानी और खुफिया नेटवर्क को सक्रिय किया गया। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध लेन-देन और ऑनलाइन संचार के संकेत मिले, जिनके आधार पर इस पूरे मॉड्यूल तक पहुंच बनाई गई। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    बरामद हथियारों और विस्फोटक सामग्री की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इनका उपयोग किस प्रकार की संभावित गतिविधियों के लिए किया जाना था। इसके साथ ही जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि आरोपियों को किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया गया और उनके संपर्क किन अंतरराष्ट्रीय या घरेलू नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। डिजिटल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक डाटा की जांच भी की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की संरचना को समझा जा सके।

    इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी जांच में शामिल हो गई हैं और विभिन्न पहलुओं पर संयुक्त रूप से काम किया जा रहा है। विशेष रूप से वित्तीय लेन-देन, विदेशी संपर्कों और डिजिटल फंडिंग के स्रोतों की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक संकेतों के अनुसार कुछ संदिग्ध लिंक पाकिस्तान आधारित नेटवर्क और मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

    दिल्ली जैसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में इस तरह की साजिश का सामने आना एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। राजधानी में मौजूद संवेदनशील संस्थानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की पहचान होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • एटीएस ने पकड़ा फर्जी पासपोर्ट गिरोह, अफगान सहित 11 आरोपी गिरफ्तार

    एटीएस ने पकड़ा फर्जी पासपोर्ट गिरोह, अफगान सहित 11 आरोपी गिरफ्तार


    भोपाल। मध्य प्रदेश एटीएस ने 44 फर्जी पासपोर्ट से जुड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि विदेशी नागरिकों के लिए अस्तित्वहीन पतों पर पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया और रिश्वत देकर पासपोर्ट डिलीवरी बीच रास्ते में ही हासिल कर ली गई।

    एटीएस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में जिया उल रहमान, सुल्तान मोहम्मद, रजा खान, सैयद मोहम्मद और जफर खान शामिल हैं। इसके अलावा पांच अफगान नागरिकों को कोलकाता से गिरफ्तार कर जबलपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 25 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया।

    जांच में 300 मोतीनाला तालाब सदर, 410 उपरैनगंज और 870 छोटी ओमती जैसे पते फर्जी पाए गए। इसके बावजूद पुलिस वेरिफिकेशन दिखाकर पासपोर्ट जारी कर दिए गए। आरोपियों ने कथित तौर पर एक पोस्टमैन को लगभग तीन हजार रुपये देकर पासपोर्ट डाक वितरण से पहले ही हासिल कर लिए।

    मामले का खुलासा मुख्य आरोपी सोहबत खान की गिरफ्तारी के बाद हुआ। अगस्त 2025 में सोशल मीडिया पर एटी-47 के साथ तस्वीर साझा करने के आधार पर उसे पकड़ा गया। पूछताछ में उसने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। इसके अलावा दिनेश गर्ग, महेंद्र कुमार सुखदान और चंदन सिंह की भूमिका भी सामने आई, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में मदद की।

    एटीएस सूत्रों के मुताबिक गिरोह 2018-19 के दौरान अफगानिस्तान के काबुल से दिल्ली होते हुए कोलकाता पहुंचा था। एक आरोपी मेडिकल वीजा पर भारत आया, जबकि अन्य के अवैध प्रवेश की आशंका जताई गई। बाद में इनकी मुलाकात जबलपुर निवासी सोहबत खान से हुई, जिसने प्रति व्यक्ति ढाई लाख रुपये में भारतीय पासपोर्ट बनवाने का सौदा किया।

    इस प्रकरण ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जबलपुर पुलिस ने वेरिफिकेशन प्रक्रिया की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। एटीएस ने बताया कि 10 अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन और संपर्कों की भी पड़ताल की जाएगी।

  • जबलपुर सिहोरा विवाद: 10 और आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने दोनों पक्षों पर दर्ज की एफआईआर

    जबलपुर सिहोरा विवाद: 10 और आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने दोनों पक्षों पर दर्ज की एफआईआर


    जबलपुर के सिहोरा के आजाद चौक में गुरुवार रात हुए विवाद के बाद से माहौल धीरे-धीरे शांत हुआ लेकिन पुलिस की सतत गश्ती जारी रही लोग दहशत में थे लेकिन आवागमन सामान्य रूप से चलता रहा शुक्रवार और शनिवार की सुबह पुलिस की कई टीमों ने 10 और हंगामा करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार किया ये आरोपी हिंदू पक्ष से हैं और इन पर दूसरे वर्ग के धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने का आरोप है

    इससे पहले ही पुलिस ने 49 लोगों को गिरफ्तार किया था अब तक कुल 59 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है वहीं कुछ और आरोपियों की तलाश जारी है पुलिस ने मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है

    शुक्रवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने समझाने का प्रयास किया लेकिन जब वे नहीं माने तो लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया गया पुलिस ने बताया कि मामला शांतिपूर्ण बनाने के लिए यह आवश्यक था

    पुलिस ने घटना स्थल और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और स्थानीय लोगों से पूछताछ की कई असामाजिक तत्व घटना को अंजाम देकर फरार हो गए ऐसे लोगों की पहचान भी की जा रही है इस काम में स्थानीय पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच और अन्य अधिकारियों को लगाया गया है

    मामला गुरुवार रात का है जब सिहोरा के आजाद चौक में दो पक्षों में विवाद हुआ देखते ही देखते दोनों पक्षों के सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए और एक दूसरे पर पथराव और तोड़फोड़ शुरू कर दी भगदड़ के हालात बन गए मौके पर सिहोरा समेत आसपास के थानों की पुलिस पहुंची भीड़ को खदेड़कर स्थिति को नियंत्रित किया गया

    पुलिस ने रात में ही उपद्रवियों की पहचान कर ली थी इनमें किशोर और अधिक उम्र के लोग शामिल थे कुछ को सिहोरा में ही छोड़ दिया गया जबकि लगभग 25 से 30 आरोपियों को बस से शहर के थानों में ले जाकर गिरफ्तारी और अन्य कार्रवाई की गई

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस का कहना है कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है और किसी भी परिस्थिति में कानून व्यवस्था को बनाए रखना प्राथमिकता है दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है विशेषज्ञ मानते हैं कि चुनावी या धार्मिक तनाव के समय ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए सतत निगरानी और समय पर कार्रवाई जरूरी है