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  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अर्चना पूरन सिंह का बड़ा दावा बोलीं बढ़ती टेक्नोलॉजी पानी की कमी की बड़ी वजह

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अर्चना पूरन सिंह का बड़ा दावा बोलीं बढ़ती टेक्नोलॉजी पानी की कमी की बड़ी वजह


    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई ने बीते कुछ वर्षों में लोगों की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। पढ़ाई से लेकर नौकरी कारोबार कंटेंट क्रिएशन और मनोरंजन तक लगभग हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। हालांकि जहां एक ओर एआई को भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है वहीं दूसरी ओर इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह ने इसी मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए ऐसा बयान दिया है जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

    अर्चना पूरन सिंह ने अपने परिवार के साथ बातचीत के दौरान कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल का असर पानी की उपलब्धता पर भी पड़ रहा है। उनका कहना है कि एआई टूल्स को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में संसाधनों की जरूरत होती है और हर बार जब कोई व्यक्ति एआई से सवाल पूछता है तब उसके जवाब को तैयार करने की प्रक्रिया में काफी पानी खर्च होता है। उनके अनुसार यही कारण है कि भविष्य में पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है।

    यह चर्चा उस समय शुरू हुई जब अर्चना अपने बेटों आर्यमन और आयुष्मान के साथ मुंबई में पानी की कमी पर बात कर रही थीं। परिवार ने बताया कि शहर के कई इलाकों में बारिश की कमी के कारण जल संकट बढ़ गया है। इसी दौरान एआई और डेटा सेंटरों में होने वाली पानी की खपत का विषय सामने आया।

    अर्चना के छोटे बेटे आयुष्मान ने बताया कि जब वह एआई आधारित वीडियो तैयार कर रहे थे तब किसी ने उन्हें बताया था कि इस तकनीक का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में पानी की खपत बढ़ाता है। यह बात जानने के बाद उन्होंने एआई का उपयोग कम कर दिया। वहीं आर्यमन ने भी कहा कि आज बड़ी संख्या में लोग एआई का उपयोग केवल मनोरंजन और समय बिताने के लिए कर रहे हैं जबकि इसके पीछे पर्यावरणीय लागत भी जुड़ी हुई है।

    हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि एआई सीधे पानी का उपयोग नहीं करता बल्कि इसे संचालित करने वाले विशाल डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए कई जगह पानी आधारित कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। सर्वर लगातार चलने के कारण अत्यधिक गर्म होते हैं और उन्हें नियंत्रित तापमान पर बनाए रखने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से एआई के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा सेंटरों की जल और ऊर्जा खपत भी बढ़ती है।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि जल संकट का कारण केवल एआई नहीं है। जलवायु परिवर्तन भूजल का अत्यधिक दोहन अनियोजित शहरीकरण और बढ़ती आबादी भी पानी की कमी के बड़े कारण हैं। इसलिए एआई को अकेले जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह उचित नहीं माना जा सकता। हालांकि यह जरूर सच है कि नई तकनीकों के विस्तार के साथ उनके पर्यावरणीय प्रभाव पर गंभीरता से विचार करना जरूरी हो गया है।

    अर्चना पूरन सिंह का बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में टिकाऊ तकनीक और ग्रीन डेटा सेंटर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। उनका यह बयान लोगों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि तकनीक का उपयोग जितना जरूरी है उतना ही जरूरी उसका जिम्मेदार और संतुलित इस्तेमाल भी है। आने वाले समय में एआई के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

  • वीजा प्रक्रिया होगी हाईटेक ट्रंप प्रशासन एआई और मोबाइल ऐप से बदलेगा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम

    वीजा प्रक्रिया होगी हाईटेक ट्रंप प्रशासन एआई और मोबाइल ऐप से बदलेगा अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम


    नई दिल्ली । अमेरिका की ट्रंप सरकार वीजा प्रोसेसिंग और कानूनी इमिग्रेशन सेवाओं में बड़ा डिजिटल बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नई तकनीक और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए पूरी इमिग्रेशन प्रक्रिया को पहले से अधिक तेज सुरक्षित और पारदर्शी बनाना चाहती है। इस पहल का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया में होने वाली देरी कम करना कागजी कार्रवाई घटाना और सुरक्षा जांच को अधिक प्रभावी बनाना है। इससे भविष्य में लाखों वीजा आवेदकों को बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव मार्कवेन मुलिन ने हाउस एप्रोप्रिएशन सब कमेटी के समक्ष बताया कि गृह सुरक्षा विभाग तेजी से इमिग्रेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग ऐसा ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म तैयार कर रहा है जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से आवेदन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाएगा और मानवीय त्रुटियों को काफी हद तक कम करेगा।

    मुलिन के अनुसार पहला एआई आधारित प्लेटफॉर्म अगले 30 दिनों के भीतर शुरू किया जाएगा। शुरुआती चरण में इसका इस्तेमाल डेफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स यानी डीएसीए कार्यक्रम के लंबित मामलों के निपटारे के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे वर्षों से लंबित आवेदनों का तेजी से समाधान संभव होगा और आगे आने वाले आवेदनों का भी शीघ्र निस्तारण किया जा सकेगा।

    सरकार आवेदन प्रक्रिया में होने वाली सामान्य गलतियों को भी समाप्त करना चाहती है। इसी उद्देश्य से ऐसा डिजिटल सिस्टम विकसित किया जा रहा है जिसमें अधूरा या गलत आवेदन जमा ही नहीं किया जा सकेगा। इससे बार बार दस्तावेज लौटने और सुधार के कारण होने वाली देरी कम होगी। अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा तकनीक इस बदलाव को संभव बना सकती है और अब जरूरत केवल उसे व्यापक स्तर पर लागू करने की है।

    गृह सुरक्षा विभाग वाणिज्य विभाग के साथ मिलकर एक आधुनिक मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित कर रहा है। इस ऐप के माध्यम से आवेदक अपने दस्तावेज जमा कर सकेंगे आवेदन की स्थिति देख सकेंगे और आवश्यक प्रक्रियाएं डिजिटल माध्यम से पूरी कर पाएंगे। मार्कवेन मुलिन ने बताया कि उन्होंने इस योजना की जानकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी दी है और राष्ट्रपति ने इस पहल का समर्थन किया है।

    सरकार का मानना है कि डिजिटल तकनीक अपनाने से न केवल आवेदकों को सुविधा मिलेगी बल्कि उद्योग जगत और नियोक्ताओं को भी लाभ होगा। वीजा प्रक्रिया में होने वाली देरी का असर सीधे अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार पर पड़ता है। इसलिए सरकार तकनीक के जरिए दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दे रही है।

    मुलिन ने बताया कि एच टू ए कृषि वीजा की प्रोसेसिंग अवधि पहले ही घटाकर लगभग 15 दिन कर दी गई है। अब सरकार डेयरी फार्मिंग जैसे क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी दूर करने के लिए भी नए विकल्पों पर विचार कर रही है क्योंकि वर्तमान वीजा नियम वहां की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछली सरकार के दौरान स्वीकृत कई इमिग्रेशन मामलों की दोबारा जांच की जा रही है ताकि सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाया जा सके। इसके लिए अतिरिक्त स्क्रीनिंग सिस्टम भी विकसित किए गए हैं जिससे केवल पात्र और नियमों के अनुरूप आवेदकों को ही मंजूरी मिले।

    भारत अमेरिका में पढ़ाई रोजगार और उच्च कौशल वाले पेशेवरों के लिए सबसे बड़े स्रोत देशों में शामिल है। ऐसे में यदि एआई आधारित वीजा प्रोसेसिंग सफल होती है तो हजारों भारतीय छात्रों पेशेवरों और कानूनी आवेदकों को तेज सेवा और बेहतर डिजिटल अनुभव का लाभ मिल सकता है। हालांकि अंतिम मंजूरी मौजूदा अमेरिकी इमिग्रेशन कानूनों और सुरक्षा मानकों के अनुसार ही दी जाएगी।

  • भविष्य की तकनीकों पर भारत-अमेरिका का बड़ा दांव, AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ेगी साझेदारी

    भविष्य की तकनीकों पर भारत-अमेरिका का बड़ा दांव, AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ेगी साझेदारी

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने भविष्य की तकनीकों और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। वाशिंगटन में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने पर व्यापक चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया तकनीकी प्रतिस्पर्धा के नए दौर में प्रवेश कर रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरती तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    भारतीय दूतावास द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने अमेरिकी विदेश विभाग के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब एस. हेलबर्ग से मुलाकात कर द्विपक्षीय तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना था जहां दोनों देश मिलकर दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी विकसित कर सकते हैं।

    वार्ता के दौरान सेमीकंडक्टर निर्माण को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने के लिए सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता बढ़ाना आवश्यक है। हाल के वर्षों में चिप्स की वैश्विक कमी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी उद्योगों की स्थिरता के लिए मजबूत और विश्वसनीय उत्पादन नेटवर्क बेहद जरूरी हैं।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी दोनों देशों के बीच व्यापक चर्चा हुई। भारत और अमेरिका ने एआई तकनीक के विकास, उसके सुरक्षित उपयोग और विभिन्न क्षेत्रों में उसके प्रभावी अनुप्रयोग को बढ़ावा देने पर विचार साझा किए। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण, रक्षा और वित्तीय सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला सकता है।

    बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत हुई। ये खनिज उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी उत्पादन और रक्षा उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की।

    भारत और अमेरिका के बीच यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। तकनीकी सहयोग को लेकर दोनों देशों की बढ़ती नजदीकियां वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    इस बीच केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें कुशल पेशेवरों की भारी मांग पैदा हो रही है। उनके अनुसार वर्तमान में लगभग 800 अरब डॉलर मूल्य की यह इंडस्ट्री जल्द ही 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है।

    वैष्णव ने यह भी बताया कि वर्ष 2032 तक दुनिया भर में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 10 लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। वहीं उद्योग को लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में भारत के पास वैश्विक तकनीकी प्रतिभा केंद्र के रूप में उभरने और दुनिया को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने का सुनहरा अवसर है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता यह तकनीकी सहयोग न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में भी नई दिशा तय कर सकता है।

  • भारत की विकास यात्रा को मिलेगी नई रफ्तार: कृषि और टेक्नोलॉजी बनेंगे अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े इंजन

    भारत की विकास यात्रा को मिलेगी नई रफ्तार: कृषि और टेक्नोलॉजी बनेंगे अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े इंजन


    नई दिल्ली । दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत आने वाले वर्षों में भी अपनी विकास गति बनाए रखेगा। चीन के डालियान शहर में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग यानी समर दावोस में वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कृषि और टेक्नोलॉजी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत न केवल वैश्विक विकास दर में महत्वपूर्ण योगदान देगा बल्कि नवाचार और डिजिटल परिवर्तन के जरिए नई आर्थिक संभावनाओं का केंद्र भी बनेगा।

    वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मैनेजिंग डायरेक्टर मिरेक डुसेक ने भारत को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ती रहेगी। उनके अनुसार भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन चुका है और इसकी विकास यात्रा दुनिया भर के निवेशकों और नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित कर रही है।

    डुसेक ने कहा कि समर दावोस का उद्देश्य दुनिया भर के इनोवेटर्स, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं को एक मंच पर लाकर वैश्विक चुनौतियों के समाधान तलाशना है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी उभरती तकनीकें न केवल उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगी बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास को भी नई दिशा देंगी।

    वहीं पद्मश्री से सम्मानित और ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में मृदा विज्ञान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर रतन लाल ने भारत की कृषि क्षमता को देश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल करने में कृषि क्षेत्र की बड़ी भूमिका होगी।

    प्रोफेसर रतन लाल ने कहा कि खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारना और भूमि के टिकाऊ प्रबंधन को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक संसाधनों का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकें भारतीय कृषि में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। इन तकनीकों की मदद से मिट्टी की जांच पहले की तुलना में अधिक तेज, सस्ती और सटीक हो सकेगी। इससे किसानों को अपनी जमीन और फसल की जरूरतों के अनुरूप सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और लागत कम होगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल ढांचा, तकनीकी नवाचार और मजबूत कृषि आधार देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। समर दावोस में हुई चर्चाओं से यह स्पष्ट संकेत मिला कि भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार केवल उद्योग और सेवाएं नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक से सशक्त कृषि भी होगी। यही संयोजन भारत को आने वाले दशक में वैश्विक विकास का सबसे बड़ा केंद्र बना सकता है।

  • भारत में एडटेक ग्रोथ को AI दे रहा नई रफ्तार, डिजिटल विज्ञापन बाजार में बड़ा उछाल

    भारत में एडटेक ग्रोथ को AI दे रहा नई रफ्तार, डिजिटल विज्ञापन बाजार में बड़ा उछाल

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने वैश्विक विज्ञापन उद्योग की संरचना को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, एआई अब केवल एक सहायक तकनीक नहीं रह गया है, बल्कि यह विज्ञापन उद्योग के हर स्तर को अधिक स्वचालित, डेटा-आधारित और परिणाम-केंद्रित मॉडल में बदल रहा है। इस बदलाव के बीच भारत को वैश्विक एडटेक हब के रूप में उभरने की मजबूत संभावना के तौर पर देखा जा रहा है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक विज्ञापन बाजार पहले ही 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जिसमें डिजिटल विज्ञापन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में कुल विज्ञापन खर्च का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर केंद्रित है, जबकि इसका बड़ा भाग प्रोग्रामेटिक तकनीक के जरिए संचालित हो रहा है। एआई इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक सटीक, तेज और प्रभावी बना रहा है, जिससे विज्ञापनदाताओं को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

    भारत इस बदलाव में एक अहम भूमिका निभा रहा है। देश में हर साल लाखों इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी छात्र तैयार हो रहे हैं, जिससे एक विशाल तकनीकी प्रतिभा आधार विकसित हो रहा है। इसके साथ ही करोड़ों डेवलपर्स और हजारों ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स भारत में मौजूद हैं, जो वैश्विक कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं। यह मजबूत इकोसिस्टम एआई आधारित विज्ञापन तकनीक के विकास को गति दे रहा है।

    रिपोर्ट के अनुसार, एआई अब विज्ञापन उद्योग की लगभग हर प्रमुख प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। मीडिया खरीद से लेकर क्रिएटिव कंटेंट निर्माण, ग्राहक टारगेटिंग और परफॉर्मेंस मापन तक, हर स्तर पर एआई आधारित सिस्टम सक्रिय हो चुके हैं। मशीन लर्निंग और ट्रांसफॉर्मर आधारित मॉडल विज्ञापनों को अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी बनाने में मदद कर रहे हैं, जिससे कंपनियों की पहुंच और प्रभाव दोनों बढ़ रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार आने वाले वर्षों में तेज गति से बढ़ सकता है। अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025 में यह बाजार लगभग 21 अरब डॉलर का होगा, जो 2030 तक बढ़कर 33 से 42 अरब डॉलर के बीच पहुंच सकता है। इस वृद्धि के पीछे ई-कॉमर्स, मोबाइल इंटरनेट की पहुंच और एआई आधारित विज्ञापन तकनीकों का बढ़ता उपयोग प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारतीय मूल की एडटेक कंपनियां अब केवल सेवा प्रदाता के रूप में सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वैश्विक उत्पाद कंपनियों के रूप में उभर रही हैं। ये कंपनियां अब सॉफ्टवेयर और प्लेटफॉर्म आधारित बिजनेस मॉडल पर काम कर रही हैं, जिससे उनकी आय और वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता दोनों में वृद्धि हो रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ेगा, मजबूत डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञापनदाताओं और प्रकाशकों के बीच बेहतर नेटवर्क और खुले डिजिटल इकोसिस्टम की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। भारत के पास इन सभी क्षेत्रों में मजबूत आधार मौजूद है, जिससे वह वैश्विक एडटेक बाजार में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युद्ध की तस्वीर बदलेगी, पर जीवन-मृत्यु के फैसले मशीनों को नहीं सौंपे जा सकते: जेडी वेंस

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युद्ध की तस्वीर बदलेगी, पर जीवन-मृत्यु के फैसले मशीनों को नहीं सौंपे जा सकते: जेडी वेंस

    नई दिल्ली । अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भविष्य के युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि तकनीक सैन्य रणनीतियों को पूरी तरह बदल सकती है, लेकिन अंतिम नैतिक निर्णयों की जिम्मेदारी हमेशा इंसानों के पास ही रहनी चाहिए। कोलोराडो स्प्रिंग्स स्थित अमेरिकी वायुसेना अकादमी में स्नातक कैडेटों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से उस दौर में प्रवेश कर रही है, जहां साइबर ऑपरेशन, स्वायत्त सिस्टम और एआई आधारित तकनीकें युद्ध के स्वरूप को नए स्तर पर ले जा रही हैं। ऐसे समय में सैन्य नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक नियंत्रण से बाहर न जाए और मानवीय मूल्यों को पीछे न छोड़ दे।

    वेंस ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एआई के बढ़ते उपयोग को लेकर उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह जीवन और मृत्यु जैसे संवेदनशील निर्णयों को मशीनों के हवाले न कर दे। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल रणनीति या तकनीक का खेल नहीं है, बल्कि यह गहरे नैतिक निर्णयों से जुड़ा क्षेत्र है, जहां इंसानी संवेदना और विवेक की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने हाल ही में धार्मिक और नैतिक चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के युग में भी यह सवाल उतना ही प्रासंगिक है कि महत्वपूर्ण निर्णयों का अधिकार मशीनों को दिया जाना चाहिए या इंसानों को।

    उन्होंने भविष्य के सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में सेना में एआई और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग और बढ़ेगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और जटिल दोनों होगी। ऐसे में अधिकारियों को यह समझना होगा कि तकनीक का उद्देश्य मानव क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित करना। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य के युद्ध को मानव सभ्यता के नैतिक मूल्यों के अनुरूप बनाए रखना है, तो अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मशीनों को नहीं दिया जा सकता।

    जेडी वेंस ने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और विभिन्न देश एक-दूसरे की सैन्य क्षमताओं पर लगातार नजर रख रहे हैं। ऐसे माहौल में अमेरिका के सैन्य अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह डेटा, तकनीक और रणनीतिक समझ का भी बड़ा क्षेत्र बन चुका है, जहां एआई तेजी से प्रभाव बढ़ा रहा है।

    अपने संबोधन में उन्होंने अमेरिकी सेना के आधुनिकीकरण और नई तकनीकी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लगातार रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही सैनिकों के जीवन स्तर में सुधार और आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप ढांचे को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय उन अधिकारियों का होगा जो तकनीक और नैतिकता दोनों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेने में सक्षम होंगे।

    अंत में उन्होंने कैडेटों को सलाह दी कि वे तकनीक को अपने विकास और क्षमता विस्तार का साधन बनाएं, लेकिन कभी भी उसके पूरी तरह अधीन न हो जाएं। उनके अनुसार, युद्ध का संचालन हमेशा इंसानी बुद्धि, विवेक और नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि मशीनें केवल निर्देशों का पालन कर सकती हैं, निर्णय नहीं ले सकतीं।

  • एआई से नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं पर बदला नजरिया, सैम ऑल्टमैन बोले- इंसानों की जगह लेना मशीनों के लिए आसान नहीं

    एआई से नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं पर बदला नजरिया, सैम ऑल्टमैन बोले- इंसानों की जगह लेना मशीनों के लिए आसान नहीं

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर पिछले कुछ वर्षों से दुनिया भर में यह बहस तेज रही है कि क्या भविष्य में मशीनें इंसानों की नौकरियों की जगह ले लेंगी। विशेष रूप से दफ्तरों और पेशेवर क्षेत्रों से जुड़ी व्हाइट कॉलर नौकरियों को लेकर व्यापक स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। तकनीक के तेजी से विस्तार के साथ यह आशंका भी सामने आई थी कि एआई के कारण बड़ी संख्या में रोजगार समाप्त हो सकते हैं। हालांकि अब इस विषय पर एक महत्वपूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण सामने आया है, जिसमें माना गया है कि शुरुआती अनुमान वास्तविक परिस्थितियों से काफी अलग साबित हुए हैं।

    एआई क्षेत्र के प्रमुख चेहरों में शामिल सैम ऑल्टमैन ने रोजगार पर तकनीक के प्रभाव को लेकर अपनी पहले की सोच में बदलाव की बात कही है। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें यह उम्मीद थी कि आधुनिक एआई तकनीक के आने के बाद प्रवेश स्तर की व्हाइट कॉलर नौकरियां तेजी से प्रभावित होंगी और कई भूमिकाएं समाप्त हो सकती हैं। उस समय ऐसा माना जा रहा था कि मशीनें कई नियमित और कार्यालयी कार्यों को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लेंगी। लेकिन समय के साथ जो तस्वीर सामने आई, वह अपेक्षाओं से काफी अलग दिखाई दी।

    उन्होंने कहा कि एआई के प्रभाव को लेकर उनका शुरुआती अनुमान वास्तविकता से अधिक गंभीर था। उनके अनुसार, तकनीकी विकास की गति और एआई क्षमताओं को लेकर जो आकलन किया गया था, वह काफी हद तक सही साबित हुआ, लेकिन सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर समझ पूरी तरह सटीक नहीं रही। रोजगार के क्षेत्र में बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन वे उतने व्यापक और तीव्र नहीं रहे जितनी पहले संभावना जताई जा रही थी।

    उन्होंने यह भी माना कि शुरुआती दौर में नौकरी खत्म होने की आशंकाएं वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए स्वाभाविक थीं। तकनीकी बदलावों के दौरान अक्सर यह डर पैदा होता है कि मशीनें मनुष्यों की भूमिका को कम कर देंगी, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर कई ऐसे पहलू सामने आते हैं जिन्हें तकनीक पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर पाती। यही कारण है कि अब रोजगार बाजार की तस्वीर पहले से अधिक संतुलित दिखाई दे रही है।

    दुनिया की कई बड़ी कंपनियां पहले ही यह संकेत दे चुकी हैं कि एआई आधारित उपकरणों और स्वचालन ने कुछ कार्यप्रणालियों को बदलना शुरू कर दिया है। कुछ पदों की प्रकृति बदली है और कई जिम्मेदारियों का स्वरूप भी नया हुआ है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि हर तकनीकी बदलाव के साथ नए अवसर भी पैदा होते हैं और कार्यक्षेत्र नई आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित होता है।

    सैम ऑल्टमैन ने मानवीय संपर्क को रोजगार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बताया। उनका कहना है कि कई पेशे केवल तकनीकी दक्षता पर आधारित नहीं होते, बल्कि उनमें संवेदनशीलता, समझ, संवाद क्षमता और मानवीय व्यवहार की भी बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कुछ कार्यों में एआई आधारित प्रतिक्रियाओं का उपयोग करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि इंसान द्वारा दी गई प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी और स्वाभाविक होती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तकनीक सहायक भूमिका निभा सकती है, लेकिन हर परिस्थिति में इंसानी स्थान लेना उसके लिए आसान नहीं होगा।

  • जांच में सामने आई दहलाने वाली सच्चाई: नई तकनीक और गुप्त तैयारी के सहारे रची गई थी राजधानी को दहलाने की साजिश

    जांच में सामने आई दहलाने वाली सच्चाई: नई तकनीक और गुप्त तैयारी के सहारे रची गई थी राजधानी को दहलाने की साजिश

    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पिछले वर्ष हुए भयावह कार बम धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के साथ-साथ आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बदलते दौर में आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल कितना गंभीर खतरा बन सकता है। जांच में सामने आए तथ्यों ने संकेत दिया है कि इस हमले की तैयारी पारंपरिक तरीकों से नहीं बल्कि नई तकनीकों और डिजिटल संसाधनों के सहारे बेहद योजनाबद्ध तरीके से की गई थी।

    राजधानी के ऐतिहासिक क्षेत्र के पास हुए इस भीषण धमाके में कई निर्दोष लोगों की जान चली गई थी जबकि अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कई स्तरों पर जांच शुरू की और धीरे-धीरे इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं। जांच में पता चला कि इस हमले को अंजाम देने के पीछे एक संगठित मॉड्यूल सक्रिय था, जो लंबे समय से देश के भीतर एक बड़े नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश में लगा हुआ था।

    जांच अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में कुछ ऐसे लोग भी शामिल थे जिन्हें तकनीकी मामलों का अच्छा अनुभव था और उन्होंने हमले को अधिक घातक बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग किया। जांच के दौरान जब आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच की गई, तब कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि हमले को अधिक प्रभावी और विनाशकारी बनाने के लिए लगातार तकनीकी जानकारी जुटाई जा रही थी।

    जांच एजेंसियों को मिले साक्ष्यों से यह भी संकेत मिला कि आरोपियों ने आवश्यक उपकरणों और तकनीकी संसाधनों की व्यवस्था बेहद सुनियोजित ढंग से की थी। इसके अलावा ऐसी जानकारियां भी सामने आईं कि विस्फोटक तंत्र और विशेष तकनीकी उपकरणों को तैयार करने के लिए लंबे समय तक प्रयोग और परीक्षण किए गए थे। सुरक्षा एजेंसियों ने विभिन्न स्थानों पर जांच के दौरान ऐसे कई संकेत और सामग्री बरामद की, जो इस साजिश की गंभीरता को दर्शाते हैं।

    पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह माना जा रहा है कि इस नेटवर्क में उच्च शिक्षित लोग भी कथित रूप से जुड़े पाए गए। जांच में यह सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं क्योंकि पढ़े-लिखे और तकनीकी रूप से सक्षम लोगों का ऐसे मामलों में शामिल होना भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को और जटिल बना सकता है। जांचकर्ताओं का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क केवल एक हमले तक सीमित नहीं रहते बल्कि उनका उद्देश्य लंबे समय तक बड़े स्तर पर गतिविधियां संचालित करना हो सकता है।

    फिलहाल एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी पड़ताल जारी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक आतंकी हमला नहीं बल्कि बदलती तकनीकी चुनौतियों को समझने की चेतावनी भी है। आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा आधुनिक तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

  • AI क्रांति से भारत में नौकरी बाजार में बड़ा बदलाव, कंपनियों को चाहिए अब विशेषज्ञ और फ्लेक्सिबल वर्कफोर्स

    AI क्रांति से भारत में नौकरी बाजार में बड़ा बदलाव, कंपनियों को चाहिए अब विशेषज्ञ और फ्लेक्सिबल वर्कफोर्स


    नई दिल्ली ।
      भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का प्रभाव अब केवल तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के रोजगार बाजार और ऑफिस संस्कृति को भी तेजी से बदल रहा है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने यह संकेत दिया है कि भारत AI आधारित नौकरियों और तकनीकी प्रतिभा के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 की तुलना में AI से जुड़ी जॉब पोस्टिंग लगभग छह गुना तक बढ़ चुकी हैं, जो देश में तकनीकी बदलाव की नई तस्वीर पेश करती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मशीन लर्निंग, जेनरेटिव AI और एमएल ऑप्स जैसे क्षेत्रों में कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी ने रोजगार बाजार में बड़ा बदलाव पैदा किया है। अब कंपनियां पारंपरिक कर्मचारियों के बजाय ऐसे पेशेवरों की तलाश कर रही हैं जो तेजी से बदलती तकनीक के साथ काम कर सकें और नई चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढाल सकें। यही वजह है कि AI स्किल्स रखने वाले युवाओं की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत धीरे-धीरे वैश्विक AI टैलेंट और AI कार्यान्वयन केंद्र के रूप में उभर रहा है। दुनिया भर में AI में निवेश तेजी से बढ़ रहा है और इसका सीधा लाभ भारतीय तकनीकी क्षेत्र को मिल रहा है। कंपनियां अब भारत को केवल आउटसोर्सिंग हब के रूप में नहीं बल्कि इनोवेशन और एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के केंद्र के रूप में देखने लगी हैं।

    AI के विस्तार का असर केवल नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ऑफिस स्पेस और कार्यस्थल की संरचना में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत के नॉलेज-इकोनॉमी ऑफिस स्पेस में करोड़ों वर्ग फुट की अतिरिक्त मांग पैदा हो सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि AI आधारित टीमें अधिक सहयोगात्मक और विशेषज्ञता आधारित होती हैं, जिन्हें आधुनिक और लचीले कार्यस्थलों की आवश्यकता होती है।

    कंपनियां अब ‘कोर प्लस फ्लेक्स’ मॉडल को तेजी से अपना रही हैं। इस मॉडल में स्थायी ऑफिस के साथ-साथ फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस का उपयोग किया जाता है ताकि कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं और अधिक लचीलापन मिल सके। यही कारण है कि फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर में भी तेज विस्तार देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में कंपनियां अगले कुछ वर्षों में अपने कार्यस्थलों को अधिक आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की योजना पर काम कर रही हैं।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि AI आधारित भर्ती आने वाले समय में फ्लेक्स सीट लीजिंग की मांग को काफी बढ़ा सकती है। इससे रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    भारत ने पहले भी तकनीकी बदलावों को रोजगार और आर्थिक विकास के अवसरों में बदलने की क्षमता दिखाई है। अब AI के दौर में भी देश उसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। तेजी से बढ़ती AI नौकरियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में भारत वैश्विक तकनीकी अर्थव्यवस्था में और अधिक मजबूत भूमिका निभा सकता है।

  • टेक इंडस्ट्री में हलचल, Cloudflare ने एआई बदलाव के बीच बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा

    टेक इंडस्ट्री में हलचल, Cloudflare ने एआई बदलाव के बीच बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा

    नई दिल्ली । तकनीक की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलाव अब कंपनियों की कार्यशैली को पूरी तरह बदल रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने जहां कामकाज को तेज और अधिक प्रभावी बनाया है, वहीं इसका असर रोजगार संरचना पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में Cloudflare ने बड़ा कदम उठाते हुए 1,100 से अधिक कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया है, जिसे कंपनी ने अपने व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा बताया है।

    कंपनी के अनुसार पिछले कुछ समय में एआई आधारित सिस्टम और टूल्स के उपयोग में तेज वृद्धि हुई है। अब इंजीनियरिंग से लेकर वित्त, मानव संसाधन और मार्केटिंग तक कई विभागों में रोजमर्रा के कार्यों के लिए एआई एजेंट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इस बदलाव ने पारंपरिक कार्य प्रक्रियाओं को काफी हद तक बदल दिया है और कंपनी के संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत पैदा की है।

    Cloudflare ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय केवल लागत घटाने या प्रदर्शन आधारित छंटनी नहीं है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य कंपनी को एक नए तकनीकी युग के अनुसार ढालना है, जहां एआई आधारित कार्य प्रणाली प्रमुख भूमिका निभाएगी। कंपनी का कहना है कि वह अपने सभी विभागों और भूमिकाओं की समीक्षा कर रही है ताकि उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

    छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को लेकर कंपनी ने कहा है कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानकारी दी जाएगी और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा। इसके लिए आधिकारिक संचार के साथ-साथ व्यक्तिगत सूचनाएं भी भेजी जाएंगी।

    कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए राहत पैकेज की भी घोषणा की है। इसके तहत उन्हें तय अवधि तक वेतन का भुगतान किया जाएगा और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ भी कुछ समय तक जारी रहेगा। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों को उनके सेवा काल के अनुसार अतिरिक्त लाभ भी दिए जाएंगे।

    Cloudflare ने यह भी निर्णय लिया है कि यह पूरा पुनर्गठन एक ही चरण में पूरा किया जाएगा, ताकि भविष्य में बार-बार बदलाव और अनिश्चितता की स्थिति न बने। कंपनी का मानना है कि तेज बदलते तकनीकी माहौल में स्पष्ट और स्थिर रणनीति बेहद जरूरी है।

    कंपनी ने यह भी स्वीकार किया है कि एआई अब केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं रहा, बल्कि यह पूरे उद्योग के संचालन मॉडल को बदल रहा है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा में बने रहने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव आवश्यक हो गया था।

    इसके साथ ही कंपनी ने संकेत दिया है कि वह एआई आधारित सेवाओं और उत्पादों में अपने निवेश को और बढ़ाएगी। इसका उद्देश्य कंपनी को अधिक आधुनिक, तेज और नवाचार आधारित बनाना है, ताकि बदलते तकनीकी दौर में वह अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सके।

    इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एआई जहां एक ओर कार्यक्षमता और गति बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह पारंपरिक नौकरियों के ढांचे को भी तेजी से बदल रहा है।