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  • चीन के 26 वर्षीय युवक ने बनाया उड़ने वाला स्केटबोर्ड, 10 इलेक्ट्रिक मोटरों की मदद से यांग्त्जी नदी के ऊपर भरी उड़ान

    चीन के 26 वर्षीय युवक ने बनाया उड़ने वाला स्केटबोर्ड, 10 इलेक्ट्रिक मोटरों की मदद से यांग्त्जी नदी के ऊपर भरी उड़ान


    नई दिल्ली ।चीन के 26 वर्षीय युवक सोंग शिंग्यू ने अपनी तकनीकी रचनात्मकता और लगातार प्रयोगों के दम पर उड़ने वाला स्केटबोर्ड तैयार किया है। इस बोर्ड की मदद से उन्होंने पहाड़ों के ऊपर उड़ान भरी और यांग्त्जी नदी को पार किया। उनके इस कारनामे का वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच इसकी काफी चर्चा होने लगी। सोंग ने यह उपकरण अपने हाथों से तैयार किया है। उनके इस आविष्कार की खास बात यह है कि इसमें 10 इलेक्ट्रिक मोटर लगाई गई हैं, जिनकी सहायता से बोर्ड हवा में उड़ान भरता है।

    हुबेई प्रांत के रहने वाले सोंग शिंग्यू सोशल मीडिया पर अमेजिंग आयू के नाम से पहचाने जाते हैं। उन्हें बचपन से ही नई चीजें बनाने और तकनीकी प्रयोग करने में दिलचस्पी रही है। वह अपने बनाए उपकरणों और उनसे जुड़े प्रयोगों के वीडियो साझा करते रहते हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर 30 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। उड़ने वाला बोर्ड बनाने का विचार उन्हें स्पाइडर-मैन फिल्म में दिखाई देने वाले ग्रीन गोब्लिन के उड़ने वाले उपकरण से मिला था। इसी कल्पना को वास्तविक रूप देने के लिए उन्होंने काम शुरू किया।

    सोंग ने इस परियोजना पर करीब दो महीने तक मेहनत की। हालांकि, उनका पहला प्रयास सफल नहीं रहा। शुरुआती डिजाइन में उन्होंने पांच जेट इंजन का इस्तेमाल किया था। जब उन्होंने सभी इंजनों को एक साथ चलाकर परीक्षण किया, तो उसमें आग लगने जैसी समस्या सामने आई। इंजनों से निकलने वाली गर्म हवा जमीन से टकराकर वापस इंजन की ओर लौट रही थी। इससे उपकरण के संचालन में परेशानी पैदा हो रही थी। इस समस्या के बाद उन्होंने पुराने डिजाइन को छोड़कर बिजली से चलने वाले बोर्ड पर काम करना शुरू किया।

    नए डिजाइन में उन्होंने 10 शक्तिशाली इलेक्ट्रिक मोटर लगाईं। लगातार परीक्षण और सुधार के बाद बोर्ड उड़ान भरने के लिए तैयार हुआ। अक्टूबर 2026 में सोंग ने इससे जुड़ा वीडियो साझा किया, जिसमें वह पहाड़ों के बीच और यांग्त्जी नदी के ऊपर उड़ते दिखाई दिए। हालांकि, इस उपकरण को तैयार करने के साथ हवा में इसका संतुलन बनाए रखना भी उनके लिए बड़ी चुनौती थी। उड़ान के दौरान शरीर का थोड़ा-सा झुकाव भी बोर्ड का संतुलन बिगाड़ सकता था।

    इस समस्या से निपटने के लिए सोंग ने दो स्मार्टफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद ली। फोन बोर्ड के झुकाव और उनकी स्थिति पर नजर रखने में सहायता करते हैं। इसके बाद एआई उन्हें ईयरफोन के माध्यम से निर्देश देता है कि संतुलन बनाए रखने के लिए शरीर किस दिशा में झुकाना है और घुटनों की स्थिति कैसी रखनी है। इस तकनीक की मदद से उन्होंने उड़ान के दौरान अपने शरीर और बोर्ड के बीच संतुलन साधने का तरीका विकसित किया।

    सोंग को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने पहले जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर उड़ने का अभ्यास किया और फिर धीरे-धीरे अपने प्रयोगों का दायरा बढ़ाया। अक्टूबर में हुबेई प्रांत में उन्होंने अपने बोर्ड से उड़ान भरी। वीडियो सामने आने के बाद कुछ लोगों ने इसकी वास्तविकता पर सवाल उठाते हुए इसे एआई से बनाया गया बताया। इसके बाद सोंग ने पत्रकारों के सामने भी उड़ान का प्रदर्शन किया, ताकि लोग उनके आविष्कार को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें।

    सोंग का मानना है कि नई चीजें बनाने के लिए केवल महंगे उपकरण ही जरूरी नहीं होते। सीखने की इच्छा, तकनीकी समझ और लगातार प्रयास से भी नए प्रयोग किए जा सकते हैं। हालांकि, इस तरह के उड़ने वाले उपकरणों का इस्तेमाल जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए पर्याप्त तकनीकी जानकारी, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक अनुमति के बिना ऐसे उपकरणों को बनाना या उड़ाना खतरनाक साबित हो सकता है।

  • छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग

    छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग


    नई दिल्ली ।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ अब छोटे कारोबारियों के लिए भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। किराना दुकान, कपड़ों का कारोबार, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और छोटी विनिर्माण इकाइयों में AI की मदद से रोजमर्रा के कई काम आसान बनाए जा सकते हैं। इससे कारोबारियों को समय बचाने, ग्राहकों की जरूरतों को समझने और अपने व्यवसाय के विस्तार पर ध्यान देने का अवसर मिल सकता है।

    छोटे कारोबारों में अक्सर सीमित कर्मचारी ही बिक्री, स्टॉक, हिसाब-किताब, प्रचार और ग्राहक सेवा जैसी जिम्मेदारियां संभालते हैं। इसके मुकाबले बड़ी कंपनियों के पास अलग-अलग कामों के लिए विशेष टीमें होती हैं। ऐसे में डिजिटल उपकरण और AI आधारित सुविधाएं छोटे कारोबारियों के लिए सहायक बन सकती हैं। हालांकि, तकनीक का चुनाव कारोबार की जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।

    किराना दुकानदार बिक्री और स्टॉक से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे ज्यादा बिकने वाली वस्तुओं की पहचान करने और दोबारा सामान मंगाने की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। कपड़ों के कारोबार में पिछले बिक्री रिकॉर्ड और मौसमी मांग को समझकर खरीदारी की योजना बेहतर बनाई जा सकती है। इस तरह उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल कारोबार से जुड़े फैसलों को व्यवस्थित करने में सहायक हो सकता है।

    रेस्टोरेंट संचालक AI की मदद से मेन्यू के विवरण, प्रचार सामग्री और सोशल मीडिया पोस्ट तैयार कर सकते हैं। ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देने में भी ऐसे उपकरण उपयोगी हो सकते हैं। कोचिंग सेंटरों में प्रवेश, फीस, कक्षाओं के समय और पाठ्यक्रम से संबंधित नियमित पूछताछ को व्यवस्थित किया जा सकता है। वहीं, छोटी विनिर्माण इकाइयां ऑर्डर, स्टॉक और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी को संभालने के लिए डिजिटल समाधानों का उपयोग कर सकती हैं।

    छोटे कारोबारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि हर काम के लिए महंगे AI सॉफ्टवेयर की आवश्यकता नहीं होती। यदि किसी दुकानदार को बिलिंग और स्टॉक का हिसाब रखने में परेशानी है, तो सामान्य बिलिंग या इन्वेंटरी सॉफ्टवेयर ही उसकी जरूरत पूरी कर सकता है। दूसरी ओर, जहां बड़ी संख्या में ग्राहकों की पूछताछ आती है, वहां AI आधारित चैटबॉट सामान्य सवालों के जवाब देने और जानकारी को संबंधित कर्मचारी तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

    सभी ऑटोमेशन उपकरण AI आधारित नहीं होते। कुछ सॉफ्टवेयर पहले से तय नियमों के अनुसार काम करते हैं, जबकि AI आधारित प्रणालियां भाषा समझने, सामग्री तैयार करने और आंकड़ों का विश्लेषण करने जैसे कार्य कर सकती हैं। इसलिए किसी समाधान को अपनाने से पहले उसकी उपयोगिता, लागत और मौजूदा कार्यप्रणाली के साथ अनुकूलता की जांच करनी चाहिए।

    AI का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। इससे तैयार की गई जानकारी या बिक्री संबंधी अनुमान हमेशा सही हों, यह जरूरी नहीं है। महत्वपूर्ण व्यावसायिक फैसले लेने से पहले परिणामों की जांच करनी चाहिए। ग्राहकों की निजी जानकारी, भुगतान विवरण और कारोबार के गोपनीय आंकड़ों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। किसी सेवा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी गोपनीयता नीति और डेटा उपयोग की शर्तों को समझना चाहिए।

    छोटे कारोबारी शुरुआत किसी एक काम से कर सकते हैं। मसलन, प्रचार सामग्री तैयार करना, ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देना या बिक्री के आंकड़ों को समझना। इसके बाद यह देखा जा सकता है कि संबंधित उपकरण से कितना समय बचा, खर्च कितना हुआ और काम में कितना सुधार आया। यदि परिणाम उपयोगी हों, तो धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छोटे कारोबारों की असली ताकत अनुभव, स्थानीय बाजार की समझ और ग्राहकों के साथ भरोसेमंद संबंध हैं। AI इन खूबियों का विकल्प नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत करने का साधन बन सकता है। कारोबारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे तकनीक को केवल नया चलन समझकर नहीं, बल्कि अपनी वास्तविक जरूरतों के हिसाब से अपनाएं।

  • चीन का एआई मिशन तेज, रोबोटिक्स और सरकारी निवेश के सहारे तकनीकी ताकत बढ़ाने की तैयारी

    चीन का एआई मिशन तेज, रोबोटिक्स और सरकारी निवेश के सहारे तकनीकी ताकत बढ़ाने की तैयारी

    नई दिल्ली । चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में अपनी क्षमता तेजी से बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार भारी निवेश, तकनीकी अनुसंधान और औद्योगिक विकास के जरिए एआई को अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इस रणनीति का उद्देश्य आने वाले वर्षों में चीन को वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाना है।

    चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही में एक प्रौद्योगिकी पार्क का दौरा किया, जहां रोबोटिक्स और एआई से जुड़ी कई परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया। इस दौरान उन्होंने रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल को देखा और कहा कि उन्नत रोबोटिक्स तथा उच्चस्तरीय विनिर्माण चीन की अगली आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। चीन की सरकार एआई को केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित रखने के बजाय विभिन्न औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्रों में इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रही है।

    जिस प्रौद्योगिकी पार्क का दौरा किया गया, वहां सैकड़ों कंपनियां अत्याधुनिक चिप्स और एआई मॉडल विकसित करने में लगी हैं। स्थानीय प्रशासन इन कंपनियों को बड़े स्तर पर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध करा रहा है। इसका उद्देश्य एआई अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास की गति को बढ़ाना है।

    चीन में एआई से जुड़े अनुसंधान का दायरा भी लगातार विस्तृत किया जा रहा है। तकनीकी प्रदर्शनों में ऐसे चिप्स और उपकरण शामिल हैं जिनका इस्तेमाल अत्याधुनिक प्रणालियों में किया जा सकता है। इसके अलावा लकवाग्रस्त मरीजों को संवाद करने में मदद करने वाली ब्रेन-इम्प्लांट तकनीक जैसे प्रयोग भी सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि चीन एआई और रोबोटिक्स को औद्योगिक उपयोग के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी आगे बढ़ाना चाहता है।

    इस अभियान में सरकारी पूंजी की भूमिका काफी बड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2000 से 2023 के बीच सरकार के नेतृत्व वाले फंडों ने एआई कंपनियों में 184 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया। इसके अलावा पिछले साल सरकार और सरकारी बैंकों की ओर से एआई क्षेत्र में सैकड़ों अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई थी। हालांकि निजी क्षेत्र से चीन में होने वाला एआई निवेश अभी अमेरिका की तुलना में कम बताया गया है।

    चीन की बढ़ती बुजुर्ग आबादी भी रोबोटिक्स के विकास की एक बड़ी वजह है। देश में ऐसे बुद्धिमान रोबोट तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है जो भविष्य में कामगारों की कमी को पूरा करने में मदद कर सकें। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी एआई आधारित डिजिटल तकनीक के जरिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर काम हो रहा है।

    सरकार का लक्ष्य 2030 तक एआई टूल्स और एआई एजेंट्स की पहुंच चीनी समाज के 90 प्रतिशत हिस्से तक बढ़ाने का है। हालांकि इस लक्ष्य को किस तरह मापा जाएगा, इसकी स्पष्ट रूपरेखा सामने नहीं आई है।

    एआई के विस्तार के साथ चीन के सामने कुछ जोखिम भी हैं। उन्नत चैटबॉट और सूचना आधारित तकनीक सरकारी सूचना नियंत्रण की व्यवस्था के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। वहीं अत्याधुनिक विदेशी एआई मॉडल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। इसके बावजूद चीन सरकार एआई, रोबोटिक्स और उन्नत तकनीक में निवेश तथा अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

  • माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में भारत का चौथा क्लाउड रीजन शुरू किया, एआई और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को मिलेगा नया बल

    माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में भारत का चौथा क्लाउड रीजन शुरू किया, एआई और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को मिलेगा नया बल

    नई दिल्ली । माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में अपना चौथा क्लाउड रीजन लॉन्च किया है। ‘इंडिया साउथ सेंट्रल’ नाम से शुरू किया गया यह क्लाउड रीजन भारत में कंपनी की क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई अवसंरचना क्षमता के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही देश में माइक्रोसॉफ्ट की हाइपरस्केल क्लाउड मौजूदगी और मजबूत हुई है।

    हैदराबाद का नया क्लाउड रीजन माइक्रोसॉफ्ट के पुणे, चेन्नई और मुंबई स्थित मौजूदा क्लाउड रीजन से जुड़ गया है। कंपनी के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने और एंटरप्राइज स्तर पर एआई के इस्तेमाल में तेजी आने की संभावनाओं के बीच यह विस्तार किया गया है।

    यह लॉन्च भारत में माइक्रोसॉफ्ट के पहले घोषित 20.5 अरब डॉलर के निवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। इस कार्यक्रम के तहत देश में क्लाउड क्षमताओं, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास और परिचालन विस्तार को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

    क्लाउड रीजन के लॉन्च के दौरान माइक्रोसॉफ्ट इंडिया एवं दक्षिण एशिया के अध्यक्ष पुनीत चंदोक ने भारत की डिजिटल परिवर्तन यात्रा को तेजी से आगे बढ़ने वाला चरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े डेटा उत्पादक देशों में तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में डिजिटल सेवाओं की जरूरत और बढ़ सकती है।

    चंदोक के अनुसार, भारत वर्तमान में दुनिया के कुल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत उत्पन्न करता है, जबकि वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में देश की हिस्सेदारी केवल करीब 3 प्रतिशत है। उनके मुताबिक, डेटा उत्पादन और डेटा सेंटर क्षमता के बीच का यह अंतर भारत में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की बड़ी संभावना को दर्शाता है।

    उन्होंने बताया कि भारत में मौजूदा डेटा सेंटर क्षमता लगभग 2 गीगावाट है। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक यह क्षमता बढ़कर 12 से 14 गीगावाट के बीच पहुंच सकती है। इस विस्तार के पीछे डिजिटल सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई आधारित तकनीकों की बढ़ती जरूरत को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    एआई के क्षेत्र में बदलाव अब केवल प्रयोग या शुरुआती इस्तेमाल तक सीमित नहीं रह गया है। कंपनियां, सरकारी विभाग और विभिन्न संस्थान बड़े स्तर पर एआई आधारित अनुप्रयोगों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इसके कारण कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवाओं की मांग में भी वृद्धि हो रही है।

    बढ़ती मांग के बीच पर्याप्त भौतिक और डिजिटल अवसंरचना तैयार करना बड़ी आवश्यकता बन गई है। एआई मॉडल और उनसे जुड़ी सेवाओं के संचालन के लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग संसाधन और क्लाउड क्षमता की जरूरत होती है।

    माइक्रोसॉफ्ट का हैदराबाद क्लाउड रीजन ऐसे समय शुरू हुआ है जब भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ डेटा की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। नए क्लाउड रीजन से देश में स्थानीय स्तर पर क्लाउड सेवाओं की क्षमता बढ़ाने और एआई आधारित तकनीकों के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    चंदोक ने कहा कि जिस डिजिटल पैमाने पर भारत आगे बढ़ रहा है, उसके अनुरूप भौतिक अवसंरचना का विस्तार भी जरूरी है। उनके अनुसार, डिजिटल विकास की गति को बनाए रखने के लिए डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाना आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण प्राथमिकता होगी।

  • नौकरी छोड़ने की बढ़ती तैयारी के बीच कार्यस्थलों में जेन जी का प्रभाव बढ़ा, एआई को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता

    नौकरी छोड़ने की बढ़ती तैयारी के बीच कार्यस्थलों में जेन जी का प्रभाव बढ़ा, एआई को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता

    नई दिल्ली ।भारत के प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में कर्मचारियों के बीच नौकरी बदलने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार करीब हर दो में से एक कर्मचारी सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहा है। वहीं, चार में से तीन कर्मचारी अगले 12 महीनों के भीतर अपनी मौजूदा कंपनी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। यह स्थिति कंपनियों के सामने प्रतिभाओं को बनाए रखने की चुनौती को और गंभीर बनाती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक कार्यबल की संरचना में भी बड़ा बदलाव आया है। जेन जी यानी नई पीढ़ी के कर्मचारियों की हिस्सेदारी 2023 में 17 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 34 प्रतिशत हो गई है। यानी केवल तीन वर्षों में इस पीढ़ी की कार्यबल में हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है। इसके साथ ही कंपनियों को नई पीढ़ी की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यस्थल नीतियों में बदलाव की जरूरत महसूस हो रही है।

    जेन जी कर्मचारियों में वेतन, पहचान और पदोन्नति के मानदंडों को लेकर अस्पष्टता स्वीकार करने की क्षमता अपेक्षाकृत कम बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार जब उन्हें अपनी अपेक्षाओं और वास्तविक कार्यस्थल अनुभव के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है तो वे नौकरी बदलने का फैसला तेजी से ले सकते हैं।

    कर्मचारियों को बनाए रखने की समस्या केवल युवा कार्यबल तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के अनुसार 86 प्रतिशत फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश कर रहे हैं। व्यक्तिगत योगदान देने वाले कर्मचारियों में यह आंकड़ा 53 प्रतिशत है। इससे प्रबंधन स्तर पर बढ़ते दबाव और असंतोष की स्थिति का संकेत मिलता है।

    फ्रंटलाइन मैनेजर और सुपरवाइजर कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे एक ओर प्रोजेक्ट पूरा करने और ग्राहकों की अपेक्षाओं का दबाव संभालते हैं, वहीं दूसरी ओर अपनी टीम की जरूरतों और समस्याओं पर भी ध्यान देते हैं। संगठन में होने वाले बदलावों को कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी अक्सर इन्हीं स्तरों पर आती है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कर्मचारियों की अपनी औपचारिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर अतिरिक्त प्रयास करने की इच्छा में कमी आई है। हालांकि कार्यस्थल की बुनियादी परिस्थितियों में सुधार हुआ है, लेकिन केवल सुविधाओं में बदलाव कर्मचारियों के लंबे समय तक जुड़े रहने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। कर्मचारी संगठन की संस्कृति, विकास के अवसर और काम की स्पष्टता जैसे व्यापक पहलुओं को भी महत्व दे रहे हैं।

    प्रोफेशनल सर्विसेज क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। करीब 10 में से छह संगठन अपने रोजमर्रा के कामकाज में एआई का उपयोग कर रहे हैं। इसके बावजूद केवल 10 में से दो कर्मचारियों ने पूरी तरह सहमति जताई कि उन्हें एआई उपकरणों से जुड़े संभावित फायदे और जोखिमों की पर्याप्त जानकारी दी गई है।

    इस स्थिति में कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती है। उन्हें एक तरफ नई पीढ़ी के कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं को समझना होगा और दूसरी तरफ अनुभवी कर्मचारियों तथा प्रबंधकीय स्तर पर बढ़ते नौकरी बदलाव के रुझान को रोकना होगा। स्पष्ट वेतन और पदोन्नति व्यवस्था, बेहतर संवाद, विकास के अवसर और एआई के सुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले तीन हजार से अधिक छात्रों को संबोधित किया और उन्हें जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने वास्तविक दुनिया की ऐसी चुनौतियां आएंगी, जिनका सामना करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सोच, मेहनत, रचनात्मकता और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कॉलेज और बाहर की दुनिया में काफी अंतर होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को यह मालूम होता है कि उन्हें कौन सा विषय पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल सामने आ सकते हैं। लेकिन नौकरी, व्यवसाय या रोजमर्रा की जिंदगी में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। कई बार अचानक कोई नई समस्या सामने आती है और उस समय यह भी स्पष्ट नहीं होता कि असल समस्या क्या है। ऐसे अवसरों पर व्यक्ति को खुद स्थिति को समझना पड़ता है और समाधान तलाशना होता है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि उन्हें भविष्य की ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज समारोह में मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी अलग तस्वीर होगी। कोई पहली नौकरी और पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी अपना पहला स्टार्टअप शुरू करने का सपना भी देख रहे होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी का रास्ता और सपना अलग हो सकता है, लेकिन दीक्षांत समारोह का यह अवसर सभी के लिए समान रूप से विशेष है।

    समारोह में पीएम मोदी ने IIT दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन पहलों के लिए संस्थान और छात्रों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संकेत दिया कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपनी मौलिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद करते हुए उनके मन में चल रहे विचारों का जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन कुछ तो पता चलता होगा कि विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने IIT दिल्ली में छात्रों के पहले दिन से लेकर दीक्षांत समारोह तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि ओरिएंटेशन से कनवोकेशन तक की यात्रा पूरी करना उनके लिए संतोष का विषय होगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि IIT दिल्ली से निकलने वाले छात्र केवल डिग्री लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना भी लेकर जा रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनकी नई यात्रा के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल समाज तथा देश की प्रगति में करेंगे। उन्होंने छात्रों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने और हर चुनौती को सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया।

  • जयशंकर और जांजीबार के राष्ट्रपति म्विनी की अहम मुलाकात, शिक्षा, एआई और डिजिटल सहयोग को नई गति देने पर बनी सहमति

    जयशंकर और जांजीबार के राष्ट्रपति म्विनी की अहम मुलाकात, शिक्षा, एआई और डिजिटल सहयोग को नई गति देने पर बनी सहमति

    नई दिल्ली । भारत और तंजानिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने रविवार को जांजीबार, यूनाइटेड रिपब्लिक ऑफ तंजानिया के राष्ट्रपति और रिवोल्यूशनरी काउंसिल के चेयरमैन डॉ. हुसैन अली म्विनी से नई दिल्ली में मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने शिक्षा, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, जल आपूर्ति और अन्य विकासोन्मुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत और तंजानिया अपने दीर्घकालिक संबंधों को नई तकनीकी और शैक्षणिक साझेदारियों के माध्यम से आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

    बैठक के बाद विदेश मंत्री डॉ. जयशंकर ने बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताते हुए कहा कि भारत जांजीबार और तंजानिया के साथ अपनी विकास साझेदारी को लगातार मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने उच्च शिक्षा, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा की है। उनका कहना था कि ये ऐसे क्षेत्र हैं जो भविष्य की विकास आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    विदेश मंत्री ने विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बढ़ते सहयोग को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आईआईटी जांजीबार भारत और तंजानिया के बीच मजबूत होते शैक्षणिक संबंधों का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उनके अनुसार यह परियोजना न केवल दोनों देशों की साझेदारी को नई ऊंचाई देती है, बल्कि अफ्रीका में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। उन्होंने इसे ज्ञान आधारित सहयोग का प्रभावी उदाहरण बताया।

    राष्ट्रपति डॉ. हुसैन अली म्विनी भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं और इससे पहले उन्होंने चेन्नई में आयोजित आईआईटी मद्रास के 63वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था। अपने चेन्नई प्रवास के दौरान उन्होंने भारत और जांजीबार के बीच शैक्षणिक सहयोग की सराहना करते हुए आईआईटी मद्रास के जांजीबार परिसर को दोनों देशों के संबंधों की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। यह भारत का पहला विदेशी आईआईटी परिसर है, जिसे दोनों देशों के बीच ज्ञान और नवाचार आधारित सहयोग का मजबूत आधार माना जा रहा है।

    नई दिल्ली पहुंचने पर राष्ट्रपति म्विनी का औपचारिक स्वागत किया गया। इस अवसर पर भारत और तंजानिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोगों के बीच संपर्क और साझा विकास प्राथमिकताओं को भी रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि शिक्षा, डिजिटल नवाचार, स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से दोनों देशों के विकास संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

    भारत पिछले कुछ वर्षों से अफ्रीकी देशों के साथ विकास साझेदारी को व्यापक रूप देने पर लगातार कार्य कर रहा है। इसी नीति के तहत शिक्षा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल परिवर्तन और कौशल विकास को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जांजीबार के राष्ट्रपति की यह यात्रा भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस दौरे से भारत और तंजानिया के बीच रणनीतिक, शैक्षणिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी तथा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक विकास साझेदारी और अधिक सुदृढ़ होगी।

  • स्मार्टफोन खरीदने की सोच बदल रही एआई फीचर्स बने सबसे बड़ा फैसला 68 फीसदी उपभोक्ता दे रहे प्राथमिकता

    स्मार्टफोन खरीदने की सोच बदल रही एआई फीचर्स बने सबसे बड़ा फैसला 68 फीसदी उपभोक्ता दे रहे प्राथमिकता


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के मामले में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में खड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने समय रहते आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। इसी कारण संभावित आपूर्ति संकट का असर फिलहाल सीमित रहने की उम्मीद है।

    हाल के घटनाक्रम में अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने 11 जुलाई को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान किया। इसके बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। यह समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रमुख माध्यम है इसलिए इसके प्रभावित होने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत दिखाई देने लगा।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो सितंबर और अक्टूबर के दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति लागत बढ़ सकती है। हालांकि भारत ने पहले से ही अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी के आयात की व्यवस्था सुरक्षित कर ली है। यही वजह है कि निकट भविष्य में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां जरूर सामने आ सकती हैं लेकिन उन्हें भी प्रभावी तरीके से संभाला जा सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती हैं।

    हालांकि इस बार वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि गैर ओपेक देशों ने अपना उत्पादन पहले ही बढ़ा दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है और संभावित कमी की भरपाई करने की क्षमता भी बनी हुई है। यही कारण है कि कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति पहले जैसी गंभीर नहीं मानी जा रही।

    भारत सरकार भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क बनी हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के पास लगभग 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है जबकि एलपीजी का करीब 45 दिनों का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा वैकल्पिक आयात स्रोतों और रणनीतिक भंडारण की व्यवस्था भी लगातार मजबूत की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम लोगों और उद्योगों पर असर कम से कम पड़े।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जो काम किया है उसका फायदा अब दिखाई दे रहा है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा भी खिंचता है तो भारत के पास स्थिति से निपटने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत तैयारी मौजूद है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है।

  • CBSE का बड़ा कदम, कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए AI, Python और Cyber Security समेत 19 मुफ्त ऑनलाइन कोर्स शुरू

    CBSE का बड़ा कदम, कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए AI, Python और Cyber Security समेत 19 मुफ्त ऑनलाइन कोर्स शुरू

    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों के लिए 19 निःशुल्क ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य स्कूली स्तर पर ही विद्यार्थियों को डिजिटल तकनीकों, प्रोग्रामिंग और उभरते तकनीकी क्षेत्रों की शुरुआती जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे भविष्य की शिक्षा और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को बेहतर ढंग से तैयार कर सकें।

    इन सभी ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी (NDU) के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया गया है। छात्र अपनी रुचि और सुविधा के अनुसार इनमें पंजीकरण कर सकते हैं तथा अपनी गति से पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। बोर्ड का मानना है कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने वाली यह पहल विद्यार्थियों में तकनीकी समझ, नवाचार की सोच और व्यावहारिक कौशल विकसित करने में मदद करेगी।

    इन पाठ्यक्रमों की अवधि विषय के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। कुछ कोर्स लगभग डेढ़ घंटे में पूरे किए जा सकते हैं, जबकि कई पाठ्यक्रमों की अवधि 20 घंटे या उससे अधिक है। इस लचीली व्यवस्था के कारण विद्यार्थी अपनी नियमित स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ अतिरिक्त तकनीकी ज्ञान भी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

    पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जेनरेटिव एआई, पाइथन प्रोग्रामिंग, डेटा साइंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग एवं पब्लिशिंग, कंप्यूटर कॉन्सेप्ट्स, सेमीकंडक्टर डिजाइन, वीएलएसआई डिजाइन फ्लो, चिप डिजाइन, थ्री-डी प्रिंटिंग, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग तथा AWS DevSecOps जैसे आधुनिक और रोजगारोन्मुख विषय शामिल किए गए हैं। इन विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों को नई तकनीकों की बुनियादी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सीबीएसई का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल और तकनीकी कौशल का महत्व लगातार बढ़ेगा। इसी उद्देश्य से विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही नई तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है। इससे उनमें प्रोग्रामिंग क्षमता, तार्किक सोच, समस्या समाधान की योग्यता और तकनीकी नवाचार के प्रति रुचि विकसित होगी। यह पहल केवल परीक्षा आधारित शिक्षा तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान भी प्रदान करेगी।

    इन पाठ्यक्रमों का लाभ उठाने के इच्छुक विद्यार्थी एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण के बाद वे अपनी पसंद का कोर्स चुनकर तुरंत ऑनलाइन अध्ययन शुरू कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाया गया है ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

    शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल स्तर पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने से विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य की प्रतिस्पर्धी दुनिया के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के दौर में ऐसी पहलें विद्यार्थियों को नई संभावनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आधुनिक तकनीकों की प्रारंभिक समझ उन्हें उच्च शिक्षा, नवाचार और करियर के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगी।

  • 'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' में जॉनी सिन्स की एंट्री का दावा निकला पूरी तरह फर्जी, समय रैना के साथ वायरल वीडियो के पीछे का सच आया सामने

    'इंडियाज गॉट लेटेंट 2' में जॉनी सिन्स की एंट्री का दावा निकला पूरी तरह फर्जी, समय रैना के साथ वायरल वीडियो के पीछे का सच आया सामने

    नई दिल्ली। मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना के बहुचर्चित शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के दूसरे सीजन की धमाकेदार शुरुआत के साथ ही सोशल मीडिया पर एक नया विवाद और उत्सुकता खड़ी हो गई है। इंटरनेट पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एडल्ट फिल्म स्टार जॉनी सिन्स और कोमाटोजी को कॉमेडियन समय रैना के साथ पोज देते हुए देखा जा सकता है। इस क्लिप के सामने आने के बाद से ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यह कयास लगाए जाने लगे कि ये दोनों वैश्विक एडल्ट स्टार्स शो के आगामी एपिसोड में बतौर जज या मेहमान नजर आ सकते हैं। हालांकि, इस सनसनीखेज दावे की पड़ताल में एक बिल्कुल अलग ही हकीकत सामने आई है।

    पहली नजर में पूरी तरह वास्तविक और प्रामाणिक दिखने वाला यह वीडियो असल में आधुनिक तकनीक का एक भ्रामक उदाहरण है। तकनीकी जांच और विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरी क्लिप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई टूल्स की मदद से तैयार की गई है। डिजिटल रूप से निर्मित इस फर्जी वीडियो का समय रैना के वास्तविक शो या उनकी किसी शूटिंग से कोई संबंध नहीं है। समय रैना, जॉनी सिन्स और कोमाटोजी के बीच असल जिंदगी में ऐसी कोई मुलाकात दर्ज नहीं की गई है, और न ही शो के निर्माताओं ने इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा या टीजर जारी किया है।

    वर्तमान में ‘इंडियाज गॉट लेटेंट सीजन 2’ के मंच से इन एडल्ट स्टार्स का दूर-दूर तक कोई जुड़ाव नहीं है। खुद समय रैना या उनकी प्रोडक्शन टीम की ओर से इस वायरल सामग्री पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। यह पूरी घटना इंटरनेट पर एआई के जरिए फैलाई जाने वाली अफवाहों का एक ताजा उदाहरण मात्र है। यह शो अपने अजीबोगरीब प्रतियोगियों और अप्रत्याशित मेहमानों के लिए जाना जाता है, यही वजह है कि प्रशंसकों ने इस एआई-जनरेटेड वीडियो को भी सच मान लिया और इसे लेकर गॉसिप का बाजार गर्म हो गया।

    उल्लेखनीय है कि इस शो के दूसरे सीजन का भव्य प्रीमियर हाल ही में नेटफ्लिक्स और यूट्यूब पर एक साथ किया गया है। इसके पहले ही एपिसोड में बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट और शरवरी वाघ बतौर गेस्ट नजर आई थीं, जहां समय रैना के तीखे और मजेदार रोस्टिंग अंदाज को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस एपिसोड की सफलता के बाद फैंस अगले एपिसोड का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच मुंबई के द हैबिटैट स्टूडियो से कुछ वास्तविक तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जहां इस रियलिटी शो की मूल शूटिंग की जाती है।

    शो के वास्तविक आगामी एपिसोड्स की बात करें तो हाल ही में सामने आई प्रामाणिक कड़ियों में मशहूर पंजाबी गायक करण औजला को समय रैना के साथ देखा गया है। स्टूडियो से लीक हुए वास्तविक दृश्यों में करण औजला और कॉमेडियन तन्मय भट्ट जजिंग पैनल का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं, जिसने प्रशंसकों के उत्साह को वास्तविक रूप से बढ़ा दिया है। बहरहाल, जॉनी सिन्स वाले फर्जी वीडियो की पोल खुलने के बाद तकनीकी जानकारों ने सोशल मीडिया यूजर्स को ऐसी एआई-जनरेटेड सामग्रियों के प्रति सचेत रहने और बिना आधिकारिक पुष्टि के उन पर विश्वास न करने की सलाह दी है।