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  • मनीला में जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता, श्रीलंका-बांग्लादेश समेत कई देशों के नेताओं से अहम मुलाकातें

    मनीला में जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता, श्रीलंका-बांग्लादेश समेत कई देशों के नेताओं से अहम मुलाकातें

    नई दिल्ली । विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान से जुड़ी उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान कई देशों के विदेश मंत्रियों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ व्यापक कूटनीतिक संवाद किया। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेराथ, बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान तथा यूरोपीय संघ की वरिष्ठ प्रतिनिधि काजा कैलास से अलग-अलग मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इन बैठकों को भारत की सक्रिय विदेश नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक भागीदारी के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    दो दिवसीय मनीला दौरे के दौरान विदेश मंत्री ने आसियान-इंडिया, ईस्ट एशिया समिट और आसियान रीजनल फोरम की विदेश मंत्री स्तरीय बैठकों में हिस्सा लिया। इन बैठकों का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना, सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना तथा आर्थिक और समुद्री साझेदारी को नई दिशा देना रहा। भारत ने इन मंचों पर अपने सहयोगी देशों के साथ बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    श्रीलंका और बांग्लादेश के विदेश मंत्रियों के साथ मुलाकात के दौरान आपसी संबंधों, क्षेत्रीय विकास और सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई। भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ पारस्परिक विश्वास और सहयोग को आगे बढ़ाने की नीति पर जोर दिया। इसके साथ ही यूरोपीय संघ की वरिष्ठ प्रतिनिधि काजा कैलास के साथ हुई बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक चुनौतियों तथा साझा हितों से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

    मनीला प्रवास के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कई अन्य प्रमुख देशों के विदेश मंत्रियों से भी द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इनमें फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, चीन, अमेरिका, रूस, सिंगापुर, कनाडा, थाईलैंड और न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री शामिल रहे। इसके अलावा उन्होंने आसियान के महासचिव से भी मुलाकात कर क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य विभिन्न देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को नई गति देना था।

    विदेश मंत्री ने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया। इस दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में नई दिल्ली में पहले हुई क्वाड वार्ता के निर्णयों की समीक्षा की गई और स्वतंत्र, समावेशी तथा नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही आसियान की केंद्रीय भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

    भारत सरकार का मानना है कि यह दौरा एक्ट ईस्ट नीति के तहत आसियान देशों के साथ बढ़ते सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण है। भारत और आसियान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से दोनों पक्ष व्यापार, संपर्क, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को लगातार विस्तार दे रहे हैं। वर्ष 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिससे समुद्री संपर्क, ब्लू इकोनॉमी और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। मनीला में हुई ये बैठकें भारत की सक्रिय कूटनीति और बहुपक्षीय मंचों पर उसकी बढ़ती भूमिका को भी स्पष्ट रूप से रेखांकित करती हैं।

  • भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    भारत-इंडोनेशिया संबंधों को मिली नई रणनीतिक रफ्तार, पीएम मोदी बोले- दोनों देशों की साझेदारी का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को नई मजबूती देते हुए दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष, औद्योगिक सहयोग और तकनीक समेत अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनाई है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की वैश्विक व्यवस्था और पूरी मानवता पर भी दिखाई देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच सहयोग का नया दौर साझा विकास और स्थिरता को नई दिशा देगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा दिए गए आत्मीय स्वागत और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के सम्मान के रूप में स्वीकार करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के दशकों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों का प्रतीक है तथा भविष्य में सहयोग को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा देगा।

    उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों में विश्वास, सहयोग और रणनीतिक समझ लगातार बढ़ी है। वर्ष 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब नए चरण में प्रवेश कर रही है। विकास, सुरक्षा, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने उल्लेखनीय प्रगति की है और आगे भी इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लिया गया है।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए दोनों देशों के तटरक्षक बल मिलकर काम करेंगे। ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति बनी है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और समुद्री संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। भारत की किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में बढ़ाने, वहां के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में सहयोग देने तथा उन्नत गेहूं के बीज उपलब्ध कराने जैसे कदमों पर सहमति बनी है। इसके साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कल्याणकारी योजनाओं के संचालन से जुड़े भारतीय अनुभव भी साझा किए जाएंगे, ताकि दोनों देशों के नागरिकों तक सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

    तकनीक और डिजिटल क्षेत्र में दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, दूरसंचार, डिजिटल अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने का निर्णय लिया है। भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस प्रणाली को इंडोनेशिया की भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में भी सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और पर्यटन को सुविधा मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान का परिसर इंडोनेशिया में स्थापित करने की योजना भी सामने आई है, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष अनुसंधान, तकनीकी क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों, स्टील और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए भी संयुक्त प्रयासों की घोषणा की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता में एकता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने में दोनों देशों की महत्वपूर्ण भूमिका है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, आसियान की केंद्रीय भूमिका, संवाद आधारित कूटनीति और वैश्विक शांति के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि साझा इतिहास, साझा विश्वास और साझा समृद्धि के आधार पर भारत और इंडोनेशिया आने वाले वर्षों में नई सफलताओं की मिसाल कायम करेंगे।

  • मलेशिया में पीएम मोदी का संबोधन: भारत मलेशिया संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता

    मलेशिया में पीएम मोदी का संबोधन: भारत मलेशिया संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता


    नई दिल्ली । मलेशिया की राजधानी में प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के बीच गहरे और गतिशील संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने अनवर इब्राहिम के स्वागत के लिए हृदय से आभार जताया और कहा कि मलेशिया ने अपनी परंपराओं और जीवन शैली को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया जो उन्हें हमेशा याद रहेगा। उन्होंने मित्रता की ऊँचाई और गहराई का अनुभव करने की बात कही और इस विशेष स्वागत के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

    पीएम मोदी ने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें तीसरी बार मलेशिया आने का अवसर मिला है और अनवर इब्राहिम के कार्यकाल में उन्हें चौथी बार मिलने का मौका मिल रहा है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ती सक्रियता और सहयोग की गति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों ने जो गति और गहराई हासिल की है वह प्रेरणादायक है और इसके लिए उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री के योगदान को सराहा।

    संबोधन में उन्होंने कहा कि आज भारत और मलेशिया का सहयोग कृषि विनिर्माण क्लीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहरा हुआ है। इसके साथ ही स्किल डेवलपमेंट और क्षमता निर्माण कैपेसिटी बिल्डिंग में भी दोनों देश अहम साझेदार बन चुके हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है जो क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

    पीएम मोदी ने मलेशिया को आसियान की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई दी और कहा कि मलेशिया के सहयोग से भारत आसियान संबंध और अधिक गहरे होंगे और विस्तार पाएंगे। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों की असली ताकत पीपल टू पीपल टाई को बताया। भारतीय मूल के लगभग 30 लाख मलेशियाई नागरिक दोनों देशों के बीच एक जीवंत पुल लिविंग ब्रिज हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें मलेशिया में डाइस्पोरा से मिलने का अवसर मिला जहां उन्होंने देखा कि लोगों का प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और प्रेम कितना गहरा है जो उनके लिए गर्व का विषय था।

    सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मित्र देशों का साथ महत्वपूर्ण है यह भी उन्होंने कहा। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत और मलेशिया दोनों मेरिटाइम नेबर्स हैं और उन्हें अपने संबंधों की पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का मूल संदेश यही है कि भारत मलेशिया के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है और हर क्षेत्र में सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाना चाहता है। अंत में उन्होंने एक बार फिर स्वागत के लिए मलेशियाई प्रधानमंत्री और उनकी टीम का आभार व्यक्त किया।