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  • प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था

    प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था


    नई दिल्ली । वृंदावन में प्रसिद्ध कथावाचक प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे बाराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से गिरने के बाद दीपक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

    दीपक के बहनोई सोनू पटेल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग आनन-फानन में आश्रम पहुंचे थे। परिवार को शुरुआत में यह बताया गया कि दीपक गिर गए हैं और अस्पताल में उनका ऑपरेशन होना है। परिजन जब आश्रम पहुंचे तो उन्हें बाहर बैठने के लिए कहा गया। सोनू के मुताबिक, परिवार के सदस्य कई घंटे तक बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें घटना से जुड़ी पूरी जानकारी तत्काल नहीं दी गई।

    परिजनों के अनुसार, दीपक लोधी वर्ष 2024 से आश्रम से जुड़े हुए थे। सोनू पटेल का दावा है कि गुरु दक्षिणा लेने के बाद से दीपक की परिवार से मुलाकात नहीं हो पाई थी। परिवार का कहना है कि जब भी कोई सदस्य उनसे मिलने के लिए पहुंचता था, तो उसे काफी देर तक इंतजार करना पड़ता था। इस वजह से परिजनों का दीपक से संपर्क बेहद सीमित हो गया था।

    सोनू पटेल ने यह भी बताया कि दीपक पिछले करीब दो वर्षों से अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखते थे। ऐसे में परिवार के लोग उनसे फोन पर भी बातचीत नहीं कर पाते थे। परिजनों के मुताबिक, लंबे समय से उनका दीपक से सीधा संपर्क नहीं था। मौत की खबर मिलने के बाद परिवार ने कई सवाल उठाए हैं और घटना की पूरी जानकारी सामने आने की मांग की है।

    उधर, घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच अभी जारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक जानकारी जुटाई। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं।

    दीपक के शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात भी सामने आई है। ये चोटें छत से गिरने के कारण आईं या इससे पहले लगी थीं, इसका स्पष्ट पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि दीपक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना के पीछे आत्महत्या के अलावा कोई अन्य कारण तो नहीं है।

    फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से मिलने वाले साक्ष्यों का इंतजार है। पुलिस घटनास्थल, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मौत की परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है। वहीं, दीपक के परिजन घटना को लेकर कई सवालों के जवाब चाहते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • 24 साल की श्रीलीला बनी तीन बच्चों की मां, गोद लिए बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को बनाए रखा सर्वोच्च प्राथमिकता

    24 साल की श्रीलीला बनी तीन बच्चों की मां, गोद लिए बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को बनाए रखा सर्वोच्च प्राथमिकता


    नई दिल्ली ।  दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की उभरती अभिनेत्री श्रीलीला ने मात्र 24 साल की उम्र में मातृत्व का अनुभव कर अपने फैंस और इंडस्ट्री को हैरान कर दिया है। हालांकि, उनके तीनों गोद लिए बच्चे उनके साथ नहीं रह रहे हैं। अभिनेत्री ने साफ किया है कि उनका मुख्य उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा और संरक्षित माहौल में पालन-पोषण सुनिश्चित करना है।

    श्रीलीला ने 21 साल की उम्र में दो दिव्यांग बच्चों, गुरु और शोभिता को गोद लिया था। इसके बाद वर्ष 2025 में उन्होंने एक और बच्ची को अपनाया। तीनों बच्चों को फिलहाल आश्रम में रखा गया है ताकि उनकी देखभाल स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्थित ढंग से हो सके। अभिनेत्री नियमित रूप से बच्चों से फोन पर बात करती हैं और समय-समय पर उनसे मिलने भी जाती हैं। उनका कहना है कि बच्चों के सुरक्षित विकास को प्राथमिकता देना उनकी जिम्मेदारी का सबसे अहम हिस्सा है।हाल ही में दिए गए इंटरव्यू में श्रीलीला ने बताया कि व्यस्त पेशेवर जीवन और पालन-पोषण की जिम्मेदारियों के चलते उन्हें बच्चों को अपने साथ रखना फिलहाल संभव नहीं है। उन्होंने कहा मेरी कोशिश हमेशा यही रहती है कि बच्चों को सुरक्षित और संरक्षित माहौल मिले। उनकी पढ़ाई स्वास्थ्य और खुशहाली मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह कदम बच्चों के भले के लिए है और वह हमेशा उनके जीवन में सक्रिय रूप से जुड़े रहेंगे।

    श्रीलीला की यह कहानी बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री में उन अभिनेत्रियों की कतार में शामिल है जिन्होंने शादी से पहले मातृत्व अपनाया। रवीना टंडन ने 21 साल की उम्र में और सुष्मिता सेन ने 24 साल की उम्र में बच्चे गोद लिए थे। इसी तरह श्रीलीला ने भी समाज और इंडस्ट्री में बिन ब्याही मां के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है।सोशल मीडिया और इंडस्ट्री में उनके इस निर्णय को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई लोग उनके कदम की सराहना कर रहे हैं और इसे जिम्मेदार मातृत्व का उदाहरण मान रहे हैं। वहीं  कुछ लोग युवा उम्र में मातृत्व के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीलीला ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनका बेहतर भविष्य उनके फैसले की मुख्य वजह है।

    भविष्य में श्रीलीला ने यह भी कहा कि वह बच्चों के साथ अधिक समय बिताने, उनकी शिक्षा और विकास पर विशेष ध्यान देने की कोशिश करेंगी। फिलहाल आश्रम में रहना उनके लिए सबसे उपयुक्त विकल्प है ताकि बच्चे सुरक्षित और संरक्षित वातावरण में बड़े हों। अभिनेत्री लगातार बच्चों के पालन-पोषण में सक्रिय हैं और उनके जीवन में जिम्मेदारी और प्रेम दोनों बनाए रख रही हैं।श्रीलीला की कहानी न केवल युवा माताओं के लिए प्रेरणा है बल्कि यह दिखाती है कि मातृत्व में जिम्मेदारी, सुरक्षा और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। छोटे से छोटे बच्चे हों या तीनों गोद लिए गए हों, उनका पालन-पोषण और खुशहाली ही किसी भी मातृत्व निर्णय की सच्ची कसौटी होती है।