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  • शहडोल में सरकारी क्वार्टर में ASI कैलाश मिश्रा का शव मिला, ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने खोला दरवाजा

    शहडोल में सरकारी क्वार्टर में ASI कैलाश मिश्रा का शव मिला, ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने खोला दरवाजा

    मध्य प्रदेश : के शहडोल में पुलिस विभाग से जुड़ी एक घटना सामने आई है, जहां कोतवाली में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक कैलाश मिश्रा का शव उनके सरकारी आवास से बरामद किया गया। ASI के निर्धारित समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचने के बाद साथी पुलिसकर्मियों ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया। जब काफी कोशिशों के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला तो पुलिसकर्मी उनके सरकारी क्वार्टर पहुंचे।

    साथी पुलिसकर्मियों ने आवास पर पहुंचकर दरवाजा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद जब दरवाजा खोला गया तो ASI कैलाश मिश्रा का शव बिस्तर पर पड़ा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की सूचना दी गई।

    सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया, ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कैलाश मिश्रा शहडोल कोतवाली में सहायक उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे और सरकारी आवास में रह रहे थे। रोजाना की तरह उनके ड्यूटी पर पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी जब वे थाने नहीं पहुंचे तो सहकर्मियों को चिंता हुई।

    पुलिसकर्मियों ने पहले फोन के माध्यम से उनसे संपर्क करने की कोशिश की। लगातार फोन किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने सरकारी आवास जाकर स्थिति देखने का निर्णय लिया। वहां पहुंचने के बाद कमरे के भीतर उनका शव मिलने से साथी पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।

    फिलहाल पुलिस ने मौत की वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ASI की तबीयत घटना से पहले कैसी थी और उनकी किसी व्यक्ति से बातचीत या मुलाकात हुई थी या नहीं।

    पुलिस जांच में आसपास की परिस्थितियों और घटनास्थल से प्राप्त जानकारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों की निगरानी में आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।

    सरकारी आवास में पुलिस अधिकारी का शव मिलने की घटना के बाद विभाग में शोक का माहौल है। साथी पुलिसकर्मी और अधिकारी घटना को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने पर पुलिस का मुख्य फोकस है।

  • बोरोबुदुर के बाद प्रम्बानन तक बढ़ा भारत का संरक्षण अभियान, इंडोनेशिया के साथ विरासत संरक्षण सहयोग हुआ और मजबूत

    बोरोबुदुर के बाद प्रम्बानन तक बढ़ा भारत का संरक्षण अभियान, इंडोनेशिया के साथ विरासत संरक्षण सहयोग हुआ और मजबूत

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती देते हुए योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने संयुक्त रूप से इस परियोजना का शुभारंभ किया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संचालित यह परियोजना दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इंडोनेशिया यात्रा के दौरान योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रम्बानन मंदिर परिसर का दौरा किया। इस विशेष अवसर पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो स्वयं उनके साथ मंदिर परिसर पहुंचे। दोनों नेताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की संरक्षण एवं पुनर्स्थापन परियोजना की प्रतीकात्मक पट्टिका का अनावरण कर इस सहयोग की औपचारिक शुरुआत की। इस मौके को भारत और इंडोनेशिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया।

    प्रम्बानन मंदिर परिसर का निर्माण नौवीं शताब्दी में हुआ था और इसे इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। यह मंदिर भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव को समर्पित है तथा हिंदू त्रिमूर्ति की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। स्थापत्य कला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक विरासत के कारण यह परिसर विश्वभर के शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    यह संरक्षण परियोजना वर्ष 2025 में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच बनी सहमति का परिणाम है। उस समय भारत द्वारा प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में तकनीकी सहयोग देने पर सहमति बनी थी। अब इस परियोजना की शुरुआत के साथ दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को व्यावहारिक रूप दिया गया है।

    भारत को ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक अनुभव प्राप्त है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इससे पहले भी दक्षिण-पूर्व एशिया के कई महत्वपूर्ण विरासत स्थलों के संरक्षण कार्य में योगदान दे चुका है। इंडोनेशिया के प्रसिद्ध बोरोबुदुर मंदिर परिसर का विस्तृत दस्तावेजीकरण भी भारतीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया था। इसी अनुभव के आधार पर अब प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापन में भी भारत अपनी विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा।

    यह पहल केवल एक संरक्षण परियोजना नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक संबंधों और पारंपरिक मूल्यों के संरक्षण की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्राचीन धरोहरों के संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन और शोध के नए अवसर भी विकसित होंगे।

    भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंध समुद्री व्यापार, धर्म, कला और स्थापत्य परंपराओं के माध्यम से विकसित हुए हैं। प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना इन ऐतिहासिक रिश्तों को आधुनिक सहयोग के साथ जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। इस पहल से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कूटनीति को नई गति मिलने और साझा विरासत के संरक्षण में दीर्घकालिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • योग कार्यक्रम में चूक से विवाद , खजुराहो में VIP एंट्री पर NO ENTRY लिखने से मचा बवाल

    योग कार्यक्रम में चूक से विवाद , खजुराहो में VIP एंट्री पर NO ENTRY लिखने से मचा बवाल


    खजुराहो । खजुराहो में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के काउंटडाउन के तहत आयोजित योग महोत्सव के दौरान उस समय बड़ी लापरवाही सामने आ गई जब कार्यक्रम स्थल पर VIP एंट्री गेट पर ही नो एंट्री का बैनर लगा दिया गया। यह घटना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI विभाग की ओर से की गई व्यवस्था में गंभीर चूक मानी जा रही है, जिसे लेकर मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई।

    यह पूरा मामला खजुराहो के विश्व प्रसिद्ध पश्चिमी समूह मंदिर परिसर का है, जहां योग महोत्सव के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। इसी परिसर में VIP प्रवेश के लिए बनाए गए गेट पर अचानक NO ENTRY का बैनर नजर आया, जो कैमरों में कैद हो गया। जैसे ही यह वीडियो सामने आया, विभागीय अधिकारियों की नींद उड़ गई और तुरंत आनन फानन में बैनर को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। स्थिति को संभालने के लिए उस बैनर को लाल कपड़े से ढक दिया गया और उसे वहां से हटा दिया गया।

    दिलचस्प बात यह रही कि इसी VIP गेट से बाद में केंद्रीय आयुष मंत्री प्रताप जाधव योग महोत्सव में शामिल होने पहुंचे। कार्यक्रम Yoga for Healthy Aging थीम पर आधारित था और इसका उद्देश्य योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना था। लेकिन आयोजन से पहले हुई इस गलती ने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

    कार्यक्रम में केंद्रीय आयुष मंत्री के अलावा प्रदेश के आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, सांसद वी.डी. शर्मा और राजनगर विधायक अरविंद पटेरिया भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्चुअल माध्यम से इस आयोजन से जुड़े।

    इसी कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश सरकार ने आयुष क्षेत्र के विस्तार और विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी साझा कीं। बताया गया कि राज्य में पिछले ढाई वर्षों में 9 नए आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी महाविद्यालय शुरू किए गए हैं, जो स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम माना जा रहा है।

    इसके साथ ही खजुराहो में 15 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड का हाईटेक आयुष वेलनेस सेंटर स्थापित करने की योजना भी सामने आई है। यह सेंटर न केवल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए उपयोगी होगा बल्कि स्थानीय लोगों को भी आधुनिक आयुष सुविधाएं प्रदान करेगा।

    पर्यटन मंत्री ने कहा कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर ऐसे वेलनेस सेंटर एमपीटी के सहयोग से विकसित किए जा रहे हैं। पूरे मामले में जहां एक ओर आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे, वहीं दूसरी ओर आयुष और योग के विस्तार को लेकर सरकार ने अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

  • उज्जैन में महाकाल मंदिर में फूलों की बड़ी माला पर 1 जनवरी से रोकभक्तों से की गई अपील

    उज्जैन में महाकाल मंदिर में फूलों की बड़ी माला पर 1 जनवरी से रोकभक्तों से की गई अपील


    उज्जैन ।उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी और भारी माला पहनाने पर 1 जनवरी से रोक लगा दी गई है। इस फैसले के बाद भक्तों को मंदिर प्रशासन की ओर से यह निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अब महाकाल के लिए अजगर माला जैसी भारी माला न खरीदें। यह कदम मंदिर के संरक्षण और उसके दीर्घकालिक रखरखाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

    महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने भक्तों को सूचित करने के लिए मंदिर के उद्घोषणा कक्ष से लगातार उद्घोषण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंदिर समिति ने भक्तों से अपील की है कि वे अब केवल फूलों की छोटी माला और सीमित मात्रा में फूल अर्पित करें। यह निर्णय मंदिर के संरक्षात्मक प्रयासों का हिस्सा हैजो मंदिर परिसर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सुरक्षित रखने के लिए लिए गए हैं।

    नए नियमों का उद्देश्य और कारण

    यह कदम मंदिर के संरक्षकों और विशेषज्ञों की सलाह पर उठाया गया है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के क्षरण को रोकने के लिए कुछ वर्षों पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थीजिसमें मंदिर की संरक्षा और उसे सुरक्षित रखने के उपायों की मांग की गई थी। इस याचिका के बादसुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की एक टीम गठित की थीजिन्होंने मंदिर के संरक्षण पर गहन अध्ययन किया और कई सुझाव दिए।

    विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के संरक्षात्मक पहलुओं की जांच शुरू कीजिसमें यह पाया गया कि भारी फूलों की माला पहनाने से मंदिर की संरचना और विशेष रूप से ज्योतिर्लिंग का क्षरण हो सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि केवल छोटी माला और सीमित मात्रा में फूल अर्पित किए जाएंताकि मंदिर का संरचनात्मक नुकसान रोका जा सके और उसका ऐतिहासिक महत्व बरकरार रहे।

    महाकालेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भारत के धार्मिक मानचित्र पर अत्यधिक महत्व है। यह मंदिर हिंदू धर्म के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे विशेष रूप से शिव पूजा के लिए अत्यधिक पवित्र स्थान माना जाता है। यहाँ हर दिन लाखों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैंऔर भगवान महाकाल की उपासना में लीन रहते हैं। इस मंदिर का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टि से हैबल्कि यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है।

    मंदिर प्रशासन का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए इस तरह के उपायों की आवश्यकता समय-समय पर महसूस की जाती रही है। खासकर जब बड़े पैमाने पर श्रद्धालु आते हैंतो छोटे-छोटे उपाय भी मंदिर की संरचना और मूर्तियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    भविष्य में और क्या बदलाव हो सकते हैं

    महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन द्वारा यह कदम केवल फूलों की माला पर रोक लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके अलावामंदिर प्रशासन द्वारा अन्य संरक्षात्मक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। मंदिर में होने वाली पूजा-पाठ की विधियोंश्रद्धालुओं के आने-जाने के तरीकोंऔर अन्य वस्तुओं के अर्पण की प्रक्रिया पर भी सुधार किए जा सकते हैंताकि मंदिर का संरचनात्मक क्षरण और धार्मिक महत्व दोनों की सुरक्षा की जा सके।

    मंदिर समिति का कहना है कि भविष्य में अन्य उपायों पर भी काम किया जाएगाताकि महाकालेश्वर मंदिर की भव्यता और शुद्धता बनी रहे। इस निर्णय के माध्यम से न केवल धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ेगीबल्कि यह समाज में पर्यावरण और संरक्षा के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी देगा। अंतत यह कदम महाकालेश्वर मंदिर के संरक्षण और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास हैजो धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए आवश्यक है।