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  • चीनी अरबपति झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति, मुकेश अंबानी को छोड़ा पीछे

    चीनी अरबपति झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति, मुकेश अंबानी को छोड़ा पीछे


    नई दिल्ली।
    बाइटडांस कंपनी (ByteDance Company) की कीमत बढ़ने और उसके एआई चैटबॉट (AI Chatbot) की सफलता से झांग यिमिंग (Zhang Yiming) मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) को पीछे छोड़कर एशिया के दूसरे सबसे अमीर बन गए हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, झांग के पास अब 92.8 अरब डॉलर हैं। वह चीन के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। 2019 में उनके पास सिर्फ 13 अरब डॉलर थे। यानी उनकी दौलत सात गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है। बता दें 117 अरब डॉलर के नेटवर्थ के साथ गौतम अडानी (Gautam Adani) दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में तो 17वें स्थान पर हैं, लेकिन उनके सिर पर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का ताज बरकरार है।

    पहले मुकेश अंबानी के सिर पर कई वर्षों तक एशिया के सबसे रईस का ताज था। कुछ महीने पहले ही इनसे यह ताज अडानी ने छीन लिया और अंबानी एशिया के दूसरे नंबर के रईस बन गए। अब यह पोजीशन भी उनकी चली गई।


    दुनिया के अमीरों में घटा अंबानी का रुतबा

    यही नहीं, दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में अंबानी अब 4 पायदान नीचे 25वें स्थान पर चले गए हैं। इसकी वजह एक ही दिन में झांग की दौलत में 24.1 अरब डॉलर की छलांग, जेफ यास की दौलत में 7.56 अरब डॉलर, डेविड सुन की दौलत में 2.75 अरब डॉलर और झान तू की दौलत में 2.75 अरब डॉलर की उछाल है। ये चारों अब अंबानी से ऊपर पहुंच गए हैं।


    झांग को 24 अरब डॉलर का फायदा

    ब्लूमबर्ग ने ब्लैकरॉक, फिडेलिटी, टी. रो प्राइस, एचएसजी और जनरल अटलांटिक जैसे निवेशकों के मूल्यांकन देखे। इसके बाद झांग की दौलत में 24 अरब डॉलर से अधिक का उछाल आया।


    टिकटॉक और दोउबाओ ने दिया मौका

    झांक के ऊपर अचानक हुई डॉलर की बारिश यूं ही नहीं हुई। इसमें टिकटॉक ऐप की लोकप्रियता और एआई चैटबॉट ‘दोउबाओ’ का बड़ा योगदान है। दोउबाओ हर महीने 30 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं। यह चीन का सबसे पसंदीदा चैटबॉट है। बाइटडांस ने इसी साल अपने अमेरिका के कुछ कामकाज वहां के निवेशकों को बेच भी दिए थे।


    चीन की सबसे बड़ी निजी कंपनी

    बाइटडांस चीन की सबसे चर्चित निजी कंपनी है। दोउबाओ इतना सफल हुआ कि कंपनी अब उसके लिए पैसे लेने की तैयारी कर रही है। चीन में लोग ऑनलाइन सेवाओं के लिए पैसे देने को तैयार नहीं होते, इसलिए यह बड़ी बात है। कंपनी को भविष्य में शेयर बाजार में उतरने की भी उम्मीद है।


    अमेरिका में टिकटॉक का मामला सुलझा

    टिकटॉक के अमेरिकी व्यापार को ओरेकल, सिल्वर लेक और अबू धाबी के एमजीएक्स को दे दिया गया। इससे कई सालों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हुई। आलोचक टिकटॉक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे थे।


    एआई पर बड़ा दांव

    अब बाइटडांस एआई पर जोर लगा रहा है। ब्लूमबर्ग की खबर के अनुसार, कंपनी इस साल 70 अरब डॉलर तक खर्च करने की बात कर रही है। इससे चीन के एआई बाजार में कंपनी सबसे आगे रहेगी और अमेरिकी कंपनियों को टक्कर देगी। यह पैसा 2025 में कंपनी द्वारा कमाए गए करीब 50 अरब डॉलर के मुनाफे से आएगा।

  • एशिया से लेकर यूरोप तक…. रिकॉर्डतोड़ गर्मी से लोग परेशान….ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में भी लू का कहर

    एशिया से लेकर यूरोप तक…. रिकॉर्डतोड़ गर्मी से लोग परेशान….ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में भी लू का कहर


    नई दिल्ली।
    दुनिया इस समय भीषण गर्मी (Extreme heat) और लगातार बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना कर रही है। भारत (India) में जहां कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है, वहीं यूरोप, एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो (El Niño) और जलवायु परिवर्तन (Climate change) के कारण हीटवेव (Heatwaves) अब पहले से ज्यादा खतरनाक, लंबी और जल्दी आने लगी हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जो गर्मी पहले जून-जुलाई में देखने को मिलती थी, अब वह मई महीने में ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। कई देशों में स्कूलों, खेल आयोजनों और सार्वजनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। कुछ जगहों पर मौतों और स्वास्थ्य संकट की घटनाएं भी सामने आई हैं।


    ब्रिटेन में गर्मी ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

    ब्रिटेन में मई महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। देश के मौसम विभाग के अनुसार लंदन के क्यू गार्डन्स में तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने 1922 और 1944 के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी गर्मी आमतौर पर जुलाई या अगस्त में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मई में ही लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी से बचने के लिए लोग पार्कों, फव्वारों और स्विमिंग पूल का सहारा लेते नजर आए।


    फ्रांस में 350 से ज्यादा शहरों में तापमान का रिकॉर्ड टूटा

    फ्रांस में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। देश के 350 से ज्यादा शहरों में मई महीने के तापमान के रिकॉर्ड टूट गए हैं। कई इलाकों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। सरकार ने कई क्षेत्रों में हाई टेम्परेचर अलर्ट जारी किया है और लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह दी गई है। पेरिस में एक रनिंग इवेंट के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अधिकारियों का मानना है कि तेज गर्मी इसका एक बड़ा कारण हो सकती है।


    स्पेन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंचने का अनुमान

    स्पेन भी इस समय भीषण हीटवेव का सामना कर रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालात ऐसे हैं कि रात में भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जा रहा, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल रही। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए।


    वियतनाम में हाल बेहाल

    एशिया में वियतनाम भी गर्मी की मार झेल रहा है। कई इलाकों में तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। लोगों को दोपहर 10 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।


    इन देशों में भी गर्मी का कहर

    थाईलैंड – बैंकॉक और अन्य इलाकों में अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य अलर्ट जारी किए गए हैं।
    फिलीपींस – स्कूलों को ऑनलाइन मोड में चलाने तक की नौबत आई क्योंकि तापमान बेहद ज्यादा बढ़ गया।
    मेक्सिको – लगातार हीटवेव के कारण कई राज्यों में लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।
    चीन – उत्तरी और मध्य चीन के कई हिस्सों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी दर्ज की गई है।
    पाकिस्तान – सिंध और पंजाब के कई इलाकों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है।


    क्या है भारत का हाल?

    देश में नौतपा के पहले दिन सोमवार को उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य भारत तक प्रचंड गर्मी के साथ उमस से लोग बेहाल रहे। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में चिलचिलाती धूप के साथ गर्म लू चलती रही। दिन के साथ रातें भी गर्म रहीं। अभी 4-5 दिन झुलसा देने वाली गर्मी के आसार हैं। वहीं तमिलनाडु में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (RMC) ने मंगलवार को राज्य के आठ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से दक्षिण-पूर्व अरब सागर तक बने वायुमंडलीय परिसंचरण तंत्र का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा।

  • बड़ी रणनीतिक तैयारी में जुटा चीन…. एशिया के विवादित समुद्री इलाकों में तैनात किए बड़े बेड़े

    बड़ी रणनीतिक तैयारी में जुटा चीन…. एशिया के विवादित समुद्री इलाकों में तैनात किए बड़े बेड़े


    बीजिंग।
    नई चाल के तह चीन (China) एशिया (Asia) के विवादित समुद्री इलाकों (Maritime areas) में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। इसके लिए वह मछली पकड़ने वाली नावों, कोस्ट गार्ड जहाजों (Coast Guard vessels.) और समुद्री मिलिशिया यूनिट्स (Maritime Militia Units) के बड़े बेड़े तैनात कर रहा है। यह एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद बिना किसी सीधी सैन्य टकराव के अपना नियंत्रण मजबूत करना है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट और ताइवान न्यूज के हवाले से यह जानकारी दी गई है। हाल ही में चीन की लगभग 200 मछली पकड़ने वाली नावें येलो सी में और अंदर तक चली गईं।

    ये नावें उन समुद्री इलाकों के और करीब पहुंच गईं, जिन पर चीन और दक्षिण कोरिया दोनों अपना दावा करते हैं। जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस कंपनी Ingenispace द्वारा जुटाए गए डेटा से पता चला है कि अहम शिपिंग मार्गों और विवादित समुद्री क्षेत्रों में जहाजों की आवाजाही असामान्य रूप से बहुत ज्यादा बढ़ गई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीजिंग अपनी ‘ग्रे-जोन’ रणनीति के तहत अब ज्यादा से ज्यादा नागरिक मछली पकड़ने वाले बेड़ों पर निर्भर हो रहा है। ये बेड़े दोहरे इस्तेमाल वाले ऑपरेशन्स के लिए तैयार किए गए हैं। इस रणनीति का मकसद धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ाना है, लेकिन साथ ही खुले युद्ध की स्थिति से भी बचना है।

    Ingenispace के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जेसन वांग ने कहा कि इन जहाजों की तैनाती से यह जाहिर होता है कि चीन अनियमित समुद्री ऑपरेशन्स के जरिए क्षेत्रीय समुद्री इलाकों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जहाजों की यह बढ़ती संख्या चीन की उस संभावित क्षमता को भी दर्शाती है, जिसके तहत वह तनाव बढ़ने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक शिपिंग मार्गों को बाधित कर सकता है। पूर्वी चीन सागर में भी चीन की समुद्री गतिविधियां तेज हो गई हैं। 3 अप्रैल को 600 से ज्यादा चीनी मछली पकड़ने वाली नावें लगभग 18 घंटों तक एक लंबी कतार बनाकर खड़ी देखी गईं।


    कोस्ट गार्ड की गश्त भी बढ़ी

    इसके साथ ही, बीजिंग ने विवादित डियाओयुताई द्वीपों के आसपास कोस्ट गार्ड की गश्त भी बढ़ा दी। साउथ चाइना सी में, चीन ने पिछले एक साल में स्कारबोरो शोल के पास अपने कोस्ट गार्ड ऑपरेशन्स को कथित तौर पर दोगुना कर दिया है और इस इलाके को ‘नेशनल नेचर रिजर्व’ घोषित करने के बाद ज्यादा सख्त प्रशासनिक उपाय लागू किए हैं। वियतनाम के पास पैरासेल आइलैंड्स में नई कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी देखी गई है।


    क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?

    सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ‘सीलाइट प्रोजेक्ट’ के रिसर्चर्स ने बताया कि चीन ने पिछले साल समुद्री मिलिशिया और कोस्ट गार्ड जहाजों की सुरक्षा में ‘एंटेलोप रीफ’ का विस्तार करना शुरू कर दिया था। एक्सपर्ट्स ने कहा कि चीन का लंबे समय का मकसद विवादित पानी में अपने दबदबे को धीरे-धीरे सामान्य बनाना है, और साथ ही सीधे टकराव से बचना है। CSIS में जियोपॉलिटिक्स और विदेश नीति विभाग के प्रेसिडेंट विक्टर चा ने कहा कि चीन की कार्रवाइयां बहुत सोच-समझकर की गई हैं, ताकि बिना युद्ध छेड़े क्षेत्रीय नियंत्रण को मजबूत किया जा सके।

  • एशिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा तेल संकट का असर…. हो सकता है 1970 जैसा बदलाव!

    एशिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा तेल संकट का असर…. हो सकता है 1970 जैसा बदलाव!


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis.) और तेल की कीमतों (Oil prices) में उछाल का असर अब धीरे-धीरे एशिया की अर्थव्यवस्थाओं (Economies of Asia.) और आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह बदलाव वैसा ही हो सकता है जैसा 1970 के दशक के तेल संकट के बाद यूरोप में देखने को मिला था, जब पूरी ऊर्जा व्यवस्था ही बदल गई थी।

    1970 का सबक: कैसे यूरोप ने तेल पर निर्भरता घटाई
    1973 और 1979 के तेल संकट के बाद शुरुआत में अनुमान था कि यूरोप पहले की तरह ही तेल पर निर्भर रहेगा। लेकिन हुआ इसका उल्टा। महंगे कच्चे तेल ने यूरोप को गैस और परमाणु ऊर्जा की ओर धकेल दिया। नतीजा यह हुआ कि 1980 के दशक तक तेल की खपत गिर गई और गैस का इस्तेमाल दोगुना हो गया।


    अब एशिया में दिख रहे वही संकेत

    आज एशिया भी उसी मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। दुनिया का 80% से ज्यादा तेल-गैस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर एशिया जाता है, लेकिन इस रूट पर तनाव और सप्लाई बाधित होने से कीमतें बढ़ रही हैं और देशों की निर्भरता संकट बनती जा रही है।

    जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देश पहले से ही आयात पर निर्भर हैं, जबकि वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देश भी अब नेट इंपोर्टर बन चुके हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और थाईलैंड में घरेलू गैस उत्पादन घट रहा है, जिससे महंगे आयात पर निर्भरता बढ़ रही है।


    आम लोगों पर सीधा असर

    ऊर्जा महंगी होने का असर सीधे आम आदमी पर दिख रहा है। जापान और दक्षिण कोरिया में खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं। कई देशों में हवाई यात्रा महंगी हो गई है, एयरलाइंस ने उड़ानें कम कर दी हैं।

    इस्लामाबाद में एक गैसोलीन स्टेशन पर ग्राहकों की कतार। पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतें बढ़ा दीं। पाकिस्तान, श्रीलंका और फिलीपींस में फ्यूल बचाने के लिए चार दिन का वर्क वीक लागू किया गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भी किसानों पर असर दिख रहा है, जहां फर्टिलाइजर महंगे हो रहे हैं और लागत बढ़ रही है।


    क्लीन एनर्जी की ओर तेज रुख

    इस संकट का सबसे बड़ा असर यह है कि अब क्लीन एनर्जी की ओर तेजी से रुख बढ़ रहा है। भारत में LPG की कमी के चलते लोग इंडक्शन चूल्हों की ओर जा रहे हैं। एशिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की मांग तेजी से बढ़ी है। थाईलैंड और सिंगापुर जैसे बाजारों में EV की हिस्सेदारी 50% तक पहुंच गई है। सोलर एनर्जी में भी बूम देखने को मिल रहा है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और पाकिस्तान में सोलर इंस्टॉलेशन तेजी से बढ़ रहे हैं।

    OPEC से UAE का बाहर होना बना नया ट्रिगर: ओपेक से यूएई के बाहर होने का फैसला तेल बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ेगा और आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ेगा। क्या तेल की मांग घटने की शुरुआत हो चुकी है: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर यह संकट लंबा चलता है, तो एशिया में तेल की मांग पर बड़ा असर पड़ सकता है। जैसे यूरोप में 1970 के बाद तेल की मांग कभी पहले जैसी नहीं रही, वैसे ही एशिया में भी बड़ा बदलाव संभव है।

  • मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ गौतम अडानी बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति… .

    मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ गौतम अडानी बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति… .


    नई दिल्ली।
    रिलायंस के चेयरमैन (Reliance Chairman) मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) से अडानी ग्रुप (Adani Group) के मालिक गौतम अडानी (Gautam Adani) ने उनके सिर से एशिया और भारत के सबसे बड़े रईस शख्स (Asia and India Richest People) का ताज छीन लिया है। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के मुताबिक गुरुवार को गौतम अडानी पर डॉलर की बारिश हुई। उनकी संपत्ति 3.56 अरब डॉलर बढ़कर 92.6 अरब डॉलर पर पहुंच गई। जबकि, मुकेश अंबानी का नेटवर्थ अडानी से कम 90.8 अरब डॉलर रह गया। अडानी अब दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 19वें स्थान पर पहुंच गए हैं और अंबानी 20वें पोजीशन पर खिसक गए हैं।


    अडानी ने अंबानी को कैसे पछाड़ा

    अडानी और अंबानी के नेटवर्थ का बड़ा हिस्सा उनकी कंपनियों के शेयरों से आता है। गुरुवार को अडानी ग्रुप के शेयर उछाल के साथ बंद हुए। इसका असर अडानी के नेटवर्थ पर पड़ा। अडानी ग्रुप के शेयरों में अडानी पोर्ट्स 2.20 पर्सेंट उछला, अडानी ग्रीन में 2.44 प्रतिशत की तेजी रही।

    अडानी एंटरप्राइजेज 3.06%, अडानी एनर्जी 4.86%, अडानी पावर 5.84% उछला। इसी तरह अडानी ग्रुप के अन्य शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए। जबकि, अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 0.13 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई।

    गुरुवार को अंबानी संपत्ति में केवल 76.7 मिलियन डॉलर का ही इजाफा हुआ। दूसरी ओर अडानी की संपत्ति में 3.56 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और अडानी को कुल नेटवर्थ अंबानी के नेटवर्थ से ज्यादा हो गया।


    अरबपतियों के टॉप-10 लिस्ट में भी उथल-पुथल

    ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के टॉप-10 अरबपतियों की लिस्ट में अब कुल 6 लोग 200 अरब डॉलर क्लब में शामिल हो गए हैं। लैरी एलिसन की संपत्ति में गुरुवार को भारी इजाफा हुआ। उनका नेटवर्थ 8.46 अरब डॉलर उछला है। अब इस क्लब में सबसे ऊपर और दुनिया सबसे अमीर एलन मस्क है। इनके बाद लैरी पेज, जेफ बजोस, सर्गी ब्रिन, मार्क जुकरबर्ग और लैरी एलिसन हैं।


    दुनिया के अमीरों की टॉप-10 लिस्ट में कौन-कौन हैं

    ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स में सबसे ऊपर 656 अरब डॉलर के साथ एलन मस्क हैं। लैरी पेज के पास 286 अरब डॉल कर संपत्ति है। जेफ बेजोस 269 अरब डॉलर के साथ तीसरे स्थान पर हैं। चौथे स्थान पर सर्गी ब्रिन हैं। इनका नेटवर्थ 266 अरब डॉलर है। मार्क जुकरबर्ग 5वें नंबर पर हैं और इनके पास कुल 239 अरब डॉलर की संपत्ति है। लैरी एलिसन 230 अरब डॉलर के साथ छठे स्थान पर हैं।

    टॉप-10 अरबपतियों में माइकल डेल ने 5.19 अरब डॉलर की छलांग लगाकर 7वां स्थान हासिल किया है। इनका नेटवर्थ अब 170 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। जेनसेंग हुआंग 164 अरब डॉलर के साथ 8वें स्थान पर हैं। बर्नार्ड अरनाल्ट 164 अरब डॉलर के साथ 9वें और जिम वॉल्टन 150 अरब डॉलर के साथ 10वें पोजीशन पर हैं।