Tag: Asian Games

  • रोइंग में देश के लिए पदक जीतने वाले मनजीत सिंह की प्रेरक कहानी, अब नई प्रतिभाओं को तराशकर तैयार कर रहे चैंपियन

    रोइंग में देश के लिए पदक जीतने वाले मनजीत सिंह की प्रेरक कहानी, अब नई प्रतिभाओं को तराशकर तैयार कर रहे चैंपियन


    नई दिल्ली। भारतीय नौकायन यानी रोइंग की दुनिया में मनजीत सिंह का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। अपने कठिन परिश्रम और खेल के प्रति समर्पण के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और देश के लिए पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने से लेकर ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम का हिस्सा बनने तक उनका सफर कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। खेल में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित ध्यानचंद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। अब मनजीत सिंह खुद नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर भारतीय नौकायन का भविष्य मजबूत बनाने में जुटे हैं।

    मनजीत सिंह का जन्म 10 अक्टूबर 1988 को हुआ था। उन्हें कम उम्र से ही नौकायन में दिलचस्पी थी। भारत में रोइंग ऐसा खेल रहा है जिसे क्रिकेट और हॉकी जैसे लोकप्रिय खेलों की तुलना में सीमित पहचान मिली है। इसके बावजूद मनजीत ने इस चुनौतीपूर्ण खेल को अपना करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने 17 साल की उम्र में रोइंग की शुरुआत की और लगातार अभ्यास के जरिए अपनी क्षमता को निखारा। इस दौरान उन्हें इस्माइल बेग और बजरंग लाल जैसे प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिला। मनजीत अपने करियर में कोच इस्माइल बेग को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक मानते हैं।

    उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। वह हैदराबाद में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में एशियन जूनियर चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय टीम से बुलावा मिला। यह उनके करियर का अहम पड़ाव था जिसने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का रास्ता खोला। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और भारतीय रोइंग टीम में अपनी जगह मजबूत की।

    मनजीत सिंह ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक और 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। पुरुषों की लाइटवेट डबल स्कल्स स्पर्धा में उन्होंने भारतीय टीम के लिए हिस्सा लिया। इस स्पर्धा में उनके साथी देवेंद्र खंडवाल और संदीप कुमार रहे। ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। मनजीत ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया और भारतीय नौकायन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में योगदान दिया।

    उनके करियर में 2010 के ग्वांग्झू एशियन गेम्स का भी खास महत्व रहा। इन खेलों में उन्होंने दो अलग-अलग स्पर्धाओं में भारत के लिए पदक जीते। रोइंग में सफलता हासिल करने के लिए ताकत के साथ संतुलन और तालमेल की भी जरूरत होती है। खिलाड़ियों को पानी की परिस्थितियों के अनुसार अपनी गति बनाए रखनी पड़ती है और पूरी टीम को एक लय में प्रदर्शन करना होता है। मनजीत ने अपने अनुभव और निरंतर अभ्यास के जरिए इन चुनौतियों का सामना किया।

    खेल के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए अगस्त 2020 में उन्हें ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार खेलों में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है। सम्मान मिलने पर मनजीत ने इसे अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था। उनके लिए यह पुरस्कार वर्षों की मेहनत और इंतजार का परिणाम था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के बाद अब उनका ध्यान युवा खिलाड़ियों को तैयार करने पर है। वह नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षण देकर उनमें देश के लिए पदक जीतने का जज्बा पैदा कर रहे हैं। उनका सफर बताता है कि किसी कम चर्चित खेल में भी लगन और अनुशासन के दम पर बड़ी पहचान बनाई जा सकती है।

  • एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले ये हैं 5 भारतीय, वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा 8 साल पुराना रिकॉर्ड

    एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले ये हैं 5 भारतीय, वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा 8 साल पुराना रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। पाकिस्तान के खिलाफ पुरुष टी20 फाइनल में भारतीय टीम की जीत के साथ वह एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय बन गए और उन्होंने निशानेबाज सौरभ चौधरी का करीब आठ साल पुराना रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया।

    वैभव ने यह उपलब्धि 15 साल, 6 महीने और 6 दिन की उम्र में हासिल की। इससे पहले यह रिकॉर्ड सौरभ चौधरी के नाम था, जिन्होंने 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में 16 साल, 3 महीने और 9 दिन की उम्र में गोल्ड जीता था। हालांकि, एक अहम फर्क है-सौरभ अब भी सबसे कम उम्र में व्यक्तिगत स्पर्धा का एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाले भारतीय हैं, जबकि वैभव का गोल्ड टीम स्पर्धा में आया है।

    एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले 5 भारतीय

    1. वैभव सूर्यवंशी – क्रिकेट
    वैभव इस सूची में पहले स्थान पर हैं। 2026 ऐची-नागोया एशियन गेम्स में पाकिस्तान के खिलाफ पुरुष क्रिकेट टीम की गोल्ड मेडल जीत के साथ उन्होंने 15 साल, 6 महीने और 6 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की। फाइनल में वैभव ने 9 गेंदों पर 15 रन बनाए, जिसमें दो छक्के शामिल थे।

    2. सौरभ चौधरी – शूटिंग
    2018 जकार्ता एशियन गेम्स में सौरभ चौधरी ने पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल में गोल्ड जीता था। उस समय उनकी उम्र 16 साल, 3 महीने और 9 दिन थी। वैभव के रिकॉर्ड से पहले करीब आठ साल तक यही सबसे कम उम्र में भारतीय गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड था।

    3. कुमकुम मोहोड – तीरंदाजी
    महाराष्ट्र की 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड ने 2026 ऐची-नागोया एशियन गेम्स में महिला व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी में गोल्ड जीता। वह एशियन गेम्स में व्यक्तिगत रिकर्व गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। दक्षिण कोरिया की ओह येजिन के खिलाफ शूट-ऑफ में कुमकुम ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया।

    4. जी. कमलिनी – क्रिकेट
    तमिलनाडु की विकेटकीपर-बल्लेबाज जी. कमलिनी 18 साल की उम्र में 2026 एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनीं। भारत ने फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराकर लगातार दूसरी बार महिला क्रिकेट का एशियन गेम्स गोल्ड जीता। कमलिनी का जन्म 20 जुलाई 2008 को मदुरै में हुआ था।

    5. पलक गुलिया – शूटिंग
    निशानेबाज पलक गुलिया ने 2023 हांगझोउ एशियन गेम्स में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में गोल्ड जीता था। वह उस समय 17 साल, 10 महीने और 20 दिन की थीं। उन्होंने फाइनल में 242.1 अंक के एशियन गेम्स रिकॉर्ड स्कोर के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया था।

    पाकिस्तान को 19 रन से हराकर भारत ने जीता गोल्ड

    वैभव का रिकॉर्ड भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए रोमांचक पुरुष टी20 फाइनल के बाद बना। जापान के निसिन स्थित कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 211 रन बनाए। इसके जवाब में पाकिस्तान की टीम 20 ओवर में 192/6 रन ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 19 रन से जीत लिया।

    भारत की पारी में अभिषेक शर्मा ने 28 गेंदों पर 61 रन की तेजतर्रार पारी खेली। इसके बाद तिलक वर्मा ने 22 गेंदों पर नाबाद 51 रन बनाकर टीम को 200 के पार पहुंचाया। वैभव ने भी पारी की शुरुआत करते हुए 9 गेंदों पर 15 रन बनाए।

    पाकिस्तान की ओर से हसन नवाज ने 51 गेंदों पर 96 रन बनाकर भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया, लेकिन भारत ने आखिरी ओवरों में संयम बनाए रखा और पाकिस्तान को 192 रन पर रोक दिया। इस जीत के साथ भारत ने पुरुष क्रिकेट में अपना एशियन गेम्स गोल्ड भी बरकरार रखा।

    वैभव की इस उपलब्धि के साथ एक और बात भी खास है। वह एशियन गेम्स में सबसे कम उम्र के भारतीय गोल्ड मेडलिस्ट तो बन गए हैं, लेकिन सबसे कम उम्र के भारतीय पदक विजेता का रिकॉर्ड अभी संजना बथुला के नाम है, जिन्होंने 2023 हांगझोउ गेम्स में 15 साल, 3 महीने और 11 दिन की उम्र में कांस्य पदक जीता था।