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  • ईरान-सऊदी गुप्त समझौते में पाकिस्तान की भूमिका का दावा, असीम मुनीर पर तेल कारोबार से लाभ लेने के आरोप

    ईरान-सऊदी गुप्त समझौते में पाकिस्तान की भूमिका का दावा, असीम मुनीर पर तेल कारोबार से लाभ लेने के आरोप


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट ने नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने ईरान और सऊदी अरब के बीच एक कथित गुप्त समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि इस प्रक्रिया के समानांतर ईरान से पाकिस्तान तक तेल पहुंचाने वाली एक संयुक्त व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों को आर्थिक लाभ हुआ। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान, सऊदी अरब तथा ईरान में से किसी भी देश ने इस संबंध में आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित समझौता उस समय हुआ जब ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच सैन्य तनाव अपने शुरुआती चरण में था। दावा किया गया है कि पाकिस्तान की पहल पर सऊदी अरब और ईरान के बीच ऐसा समझौता तैयार हुआ, जिसके बाद सऊदी अरब पर ईरान की ओर से होने वाले हमलों में कमी आई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस प्रक्रिया के दौरान ईरान से पाकिस्तान तक तेल पहुंचाने वाले एक संयुक्त तेल परिवहन नेटवर्क को जारी रखने पर सहमति बनी, जिससे जुड़े पक्षों को आर्थिक लाभ मिला।

    रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया कि इस कथित तेल परिवहन व्यवस्था का संचालन ऐसे समय में जारी रहा, जब ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और दबाव बढ़ा हुआ था। दावा किया गया कि यह नेटवर्क ईरान के तेल निर्यात को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने में सहायक बना। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में किसी आधिकारिक जांच या सार्वजनिक दस्तावेज का उल्लेख सामने नहीं आया है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ क्षेत्रीय अधिकारियों और कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि समझौते के बाद सऊदी अरब पर हमलों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। बाद में एक मिसाइल हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर ईरानी पक्ष को चेतावनी दिए जाने का भी दावा किया गया है। हालांकि इन घटनाओं की भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और संबंधित देशों ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से रक्षा और सुरक्षा सहयोग मौजूद है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में ईरान के साथ भी संबंधों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश की है। ऐसे में यदि किसी प्रकार की मध्यस्थता हुई भी हो, तो उसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव कम करना बताया जा सकता है। हालांकि रिपोर्ट में लगाए गए आर्थिक लाभ और तेल कारोबार से जुड़े आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    कुछ कूटनीतिक विशेषज्ञों ने यह भी आशंका जताई है कि यदि इस तरह के अनौपचारिक समझौते वास्तव में हुए हों, तो वे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और ऊर्जा सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। वहीं आलोचकों का कहना है कि ऐसे समझौते भविष्य में अन्य देशों के लिए भी जटिल कूटनीतिक परिस्थितियां पैदा कर सकते हैं।

    फिलहाल यह मामला मीडिया रिपोर्टों और कूटनीतिक चर्चाओं तक सीमित है। पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही इन दावों की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना आवश्यक माना जा रहा है।

  • असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं

    असीम मुनीर का भारत पर बिना नाम हमला, बोले- आतंकवाद, दुष्प्रचार और बाहरी ताकतें पाकिस्तान की तरक्की नहीं रोक सकतीं


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने बलूचिस्तान की धरती से एक बार फिर भारत का नाम लिए बिना कड़ा बयान दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने बाहरी ताकतों पर पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने और दुष्प्रचार चलाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी कोशिशें देश की तरक्की और स्थिरता को रोक नहीं सकतीं।

    मुनीर ने कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, क्वेटा में अधिकारियों और सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान का “निश्चित उदय” किसी भी प्रकार के प्रॉक्सी वॉर, गलत सूचना अभियान या आतंकवाद से प्रभावित नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना और जनता मिलकर देश से आतंकवाद का पूरी तरह सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    अपने भाषण में उन्होंने बलूचिस्तान में तैनात सैन्य अधिकारियों की ट्रेनिंग और पेशेवर क्षमता की भी सराहना की। मुनीर ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से बदल रहा है और ऐसे में सेना को मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, नई तकनीक और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार काम करना होगा।

    उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा हालात में निरंतर प्रशिक्षण और उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

    मुनीर ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ “शत्रु ताकतें” पाकिस्तान के खिलाफ फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के जरिए देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन सेना और जनता की एकता के आगे ये प्रयास सफल नहीं होंगे।

    बलूचिस्तान में स्थायी शांति और विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र की प्रगति सुरक्षा, समावेशी विकास और बेहतर शासन पर निर्भर करती है।

  • जयशंकर ने PAK सेना पर साधा निशाना, मुनीर को लेकर कहा – कई समस्याओं की जड़ वहीं है, भड़का पाक

    जयशंकर ने PAK सेना पर साधा निशाना, मुनीर को लेकर कहा – कई समस्याओं की जड़ वहीं है, भड़का पाक


    नई दिल्‍ली । विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मीडिया समिट में एक बार फिर पाकिस्तान की पोल खोल दी। उन्होंने कहा कि भारत की अधिकांश समस्याओं की जड़ पाकिस्तान की सेना है और उसका आतंकी समूहों को समर्थन देना भी इसका हिस्सा है। पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए जयशंकर ने कहा, ‘जैसे अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी होते हैं, वैसे ही कुछ अच्छे सैन्य नेता भी होते हैं और कुछ शायद उतने अच्छे नहीं।’ यह टिप्पणी पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ओर इशारा मानी जा रही है।

    एस जयशंकर की ओर से सच्चाई उजागर करने पर पाकिस्तान को मिर्ची लगी है। पाकिस्तान ने कहा कि उसके सभी संस्थान राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत स्तंभ हैं। जयशंकर की टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, ‘पाकिस्तान भारतीय विदेश मंत्री की भड़काऊ, बेबुनियाद और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज और निंदा करता है।’ अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार देश है और उसके सभी संस्थान, जिनमें सशस्त्र बल भी शामिल हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत आधार हैं। प्रवक्ता ने कहा कि मई महीने में हुई झड़पों ने पाकिस्तानी सेना के उस संकल्प को दिखाया कि वह किसी भी आक्रमण का जवाब दे सकती है।

    पाकिस्तान को जान-माल का भारी नुकसान
    गौरतलब है कि 7 मई को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए थे, जिसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इसके जरिए पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन हमलों के बाद चार दिन तक तीव्र सैन्य टकराव चला, जो 10 मई को मिलिट्री ऐक्शन रोकने की समझौते के साथ खत्म हुआ। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अनुसार, भारतीय हमलों में पाकिस्तान के 12 से अधिक लड़ाकू विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए थे। इनमें अमेरिकी मूल के एफ-16 जेट भी शामिल थे। इस तरह पाकिस्तान को जान-माल का भारी नुकसान हुआ था।