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  • असम विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज, NDA में सीट बंटवारे पर 10 मार्च तक अंतिम मुहर

    असम विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज, NDA में सीट बंटवारे पर 10 मार्च तक अंतिम मुहर

    गुवाहाटी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गठबंधन के फार्मूले को अंतिम रूप देने के लिए नई तारीख 10 मार्च तय की है।
    मुख्यमंत्री ने बताया कि सहयोगी दलों के साथ चर्चा जारी है और कुछ बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है। उन्होंने कहा कि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ बातचीत एक-दो दिन में पूरी होने की उम्मीद है, जबकि असम गण परिषद के साथ 9–10 मार्च तक सभी मुद्दों पर सहमति बन जाएगी। इसके बाद गठबंधन औपचारिक रूप से सीट बंटवारे की घोषणा करेगा।

    कुछ दलों से सहमति, कुछ से बातचीत जारी
    सरमा के अनुसार, राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ सीटों को लेकर समझौता पहले ही हो चुका है। देरी की एक वजह हाल में हुए राज्यसभा चुनाव भी बताए गए, जिनके कारण सहयोगी दल रणनीतिक रूप से सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

    असम में एनडीए के प्रमुख घटक दलों में
    भारतीय जनता पार्टी
    असम गण परिषद
    यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल
    बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट शामिल हैं।
    इसके अलावा जनशक्ति पार्टी भी गठबंधन का हिस्सा है, हालांकि वर्तमान विधानसभा में उसका प्रतिनिधित्व नहीं है।

    पहले कई बार बदली समयसीमा
    मुख्यमंत्री इससे पहले भी सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग समयसीमाएं घोषित कर चुके थे। फरवरी और जनवरी में भी समझौते की बात कही गई थी, लेकिन अंतिम सहमति टलती रही। अब 10 मार्च को निर्णायक तारीख माना जा रहा है।

    परिसीमन के बाद बदला चुनावी गणित
    2023 के परिसीमन के बाद राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदली हैं। कुछ सीटें सामान्य से आरक्षित श्रेणी में गई हैं, जबकि कुछ आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी में परिवर्तित किया गया है। इससे दलों के बीच सीट समायोजन और अधिक जटिल हो गया है।

    वर्तमान विधानसभा की स्थिति
    126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि उसके सहयोगी दल भी सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। विपक्षी खेमे में

    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
    ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट
    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
    शामिल हैं, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक हैं।

    चुनाव से पहले ताकत का संतुलन साधने की कवायद
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन के बाद बदले सामाजिक और भौगोलिक समीकरणों को देखते हुए एनडीए सहयोगियों के बीच सीटों का संतुलन साधना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। 10 मार्च की प्रस्तावित घोषणा को राज्य की चुनावी राजनीति का निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।

  • असम चुनाव से पहले कांग्रेस निकालेगी मेगा यात्रा, राहुल नहीं गौरव गोगोई संभालेंगे कमान

    असम चुनाव से पहले कांग्रेस निकालेगी मेगा यात्रा, राहुल नहीं गौरव गोगोई संभालेंगे कमान


    गुवाहाटी । असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस राज्य में अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर रही है। पार्टी ने फरवरी में एक बड़ी मेगा यात्रा आयोजित करने का योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक इस यात्रा का नेतृत्व कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई करेंगे, जबकि राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अलग-अलग चरणों में इसमें शामिल होंगे।

    यात्रा हाइब्रिड मोड में होगी, जिसमें बस यात्रा, पदयात्रा, नुक्कड़ सभाएं और बड़े जनसमूह के कार्यक्रम शामिल होंगे। पार्टी का उद्देश्य सीधे जनता से संवाद करना और राज्य में सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करना है। यात्रा की सटीक तारीख और नाम को अंतिम रूप दिया जा रहा है, और संभावना है कि संसद सत्र समाप्त होने के बाद इसकी शुरुआत की जाएगी।

    कांग्रेस पूरी ताकत झोंक रही

    असम में कांग्रेस चुनाव से पहले पूरी ताकत झोंक रही है। संगठन को मजबूत करने और चुनावी बढ़त हासिल करने के लिए कई वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। गौरव गोगोई, जो प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ लोकसभा में उपनेता भी हैं, को चुनावी चेहरा बनाया जा रहा है। पार्टी इस कदम से भाजपा के लगातार हमलों का सामना करना चाहती है, खासकर राहुल गांधी पर गमछा विवाद के बाद।

    अमित शाह का हमला
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान असम की जनसांख्यिकी बदल गई। शाह ने करेनग चापोरी में आयोजित ‘मिसिंग युवा महोत्सव’ में जनता से अपील की कि भाजपा को वोट दें ताकि राज्य को अवैध घुसपैठ से मुक्त किया जा सके।

    घुसपैठ और भूमि सुधार

    अमित शाह ने बताया कि कांग्रेस शासन के दौरान घुसपैठियों की संख्या बढ़कर 64 लाख हो गई और सात जिलों में वे बहुसंख्यक बन गए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार और असम की भाजपा सरकारें अब इस प्रवृत्ति को पलटने के लिए काम कर रही हैं। इसके तहत 1.26 लाख एकड़ अतिक्रमित भूमि को घुसपैठियों से मुक्त कराया गया है। शाह ने यह भी कहा कि अवैध प्रवासियों के खिलाफ लड़ाई में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के हाथ मजबूत करने के लिए भाजपा को तीसरी बार सत्ता में लाना जरूरी है।