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  • सीएम बनने के बाद पहला फैसला क्या? रिनिकी भुइयां का सधा हुआ जवाब छा गया

    सीएम बनने के बाद पहला फैसला क्या? रिनिकी भुइयां का सधा हुआ जवाब छा गया


    नई दिल्ली ।
    असम की राजनीति में एक अहम दिन तब और दिलचस्प बन गया जब हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पूरा समारोह औपचारिकता, उत्साह और राजनीतिक हलचल से भरा हुआ था, लेकिन इसी बीच एक छोटा सा पल ऐसा भी आया जिसने पूरे माहौल को हल्का और चर्चित बना दिया।
    शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा भी मौजूद थीं। जैसे ही कार्यक्रम समाप्ति की ओर बढ़ा, मीडिया कर्मियों ने उनसे बातचीत की कोशिश की। इसी दौरान उनसे एक सहज लेकिन ध्यान खींचने वाला सवाल पूछा गया—मुख्यमंत्री बनने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा का पहला फैसला क्या होगा।

    इस सवाल पर रिनिकी भुइयां सरमा ने बिना किसी झिझक के मुस्कुराते हुए बेहद सरल अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री का है, वही इसे तय करेंगे। इतना कहकर वह आगे बढ़ गईं, लेकिन उनका यह छोटा सा जवाब वहीं रुक नहीं सका।

    कुछ ही समय में उनका यह वीडियो और जवाब लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर लोग इसे अलग-अलग तरीके से देख रहे हैं। कई लोगों ने उनके जवाब को बेहद समझदारी भरा और संतुलित बताया, जबकि कुछ ने इसे एक सहज और मजेदार प्रतिक्रिया के रूप में लिया।

    इस पूरे घटनाक्रम ने शपथ ग्रहण जैसे गंभीर राजनीतिक अवसर में एक हल्का और मानवीय पहलू जोड़ दिया। जहां एक ओर राज्य में नई सरकार के गठन की जिम्मेदारी और उम्मीदें थीं, वहीं दूसरी ओर यह छोटा सा पल लोगों के लिए एक सहज मुस्कान का कारण बन गया।

    उधर, समारोह में मुख्यमंत्री के साथ नई कैबिनेट के मंत्रियों ने भी शपथ ली और राज्य में नए प्रशासनिक कार्यकाल की शुरुआत हुई। पूरे कार्यक्रम में समर्थकों की भारी मौजूदगी और राजनीतिक जोश देखने को मिला।

    रिनिकी भुइयां सरमा का यह सरल जवाब यह दिखाता है कि कभी-कभी बिना किसी बड़े बयान के भी एक साधारण प्रतिक्रिया लोगों का ध्यान खींच सकती है। उनका यह अंदाज किसी राजनीतिक टिप्पणी की बजाय एक शांत और संतुलित सोच को दर्शाता है, जिसे लोगों ने खूब सराहा।

    इस घटना ने यह भी साबित किया कि बड़े राजनीतिक आयोजनों में भी छोटे-छोटे मानवीय पल अक्सर सबसे ज्यादा याद रह जाते हैं। रिनिकी का जवाब भले ही कुछ शब्दों का था, लेकिन उसने पूरे दिन की चर्चा में अपनी खास जगह बना ली और लोगों के बीच लंबे समय तक चर्चा का विषय बन गया।

  • असम के CM हिमंता के गोली चलाते वीडियो को कांग्रेस ने बताया नरसंहार का खुला आह्वान, कार्रवाई की मांग

    असम के CM हिमंता के गोली चलाते वीडियो को कांग्रेस ने बताया नरसंहार का खुला आह्वान, कार्रवाई की मांग


    नई दिल्ली।
    भाजपा (BJP) की असम इकाई (Assam Unit) द्वारा एक्स पर पोस्ट वीडियो को कांग्रेस (Congress) ने नरसंहार का खुला आह्वान बताया है। कांग्रेस ने दावा किया कि इसमें ‘अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्या’ दिखाई गई है, जो बेहद गंभीर है। साथ ही कहा कि न्यायपालिका को इसमें किसी भी तरह की नरमी बरते बिना कार्रवाई करनी चाहिए। अब हटाए जा चुके इस वीडियो में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) कथित तौर पर राइफल से दो लोगों पर निशाना साधकर गोली चलाते दिखाए गए थे। इनमें से एक व्यक्ति ने टोपी पहन रखी है, जबकि दूसरे की दाढ़ी है। वीडियो के कैप्शन में ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ लिखा गया था।

    कांग्रेस महासचिव ने क्या लिखा
    कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर भाजपा की कड़ी आलोचना करते हुए एक्स पर एक पोस्ट लिखी है। इसमें उन्होंने कहाकि भाजपा के एक आधिकारिक खाते से अल्पसंख्यकों की लक्षित और बहुत करीब से (पॉइंट ब्लैंक) हत्या दिखाने वाला वीडियो पोस्ट किया गया। यह नरसंहार का खुला आह्वान है-एक ऐसा सपना जिसे यह फासीवादी शासन दशकों से देखता रहा है। वेणुगोपाल ने कहा कि इसे सामान्य ‘ट्रोल’ सामग्री मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, बल्कि यह शीर्ष स्तर से फैलाया गया जहर है। इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से इसकी निंदा किये जाने या कोई कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, लेकिन न्यायपालिका को जरूर कदम उठाना चाहिए और किसी तरह की नरमी नहीं बरतनी चाहिए।


    क्या अदालतें सो रही हैं

    कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री शर्मा को मुस्लिम पुरुषों पर गोली चलाते हुए दिखाने वाले वीडियो को केवल हटाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहाकि यही असली भाजपा है। यह नफरत, जहर और हिंसा आपकी दी हुई है, मोदी। क्या अदालतें और अन्य संस्थाएं सो रही हैं? कांग्रेस की प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने भी एक्स पर कहाकि नरेन्द्र मोदी जी, आप ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात करते हैं। लेकिन आपके नेता हिमंता बिस्वा सरमा का मुसलमानों को गोली मारते दिखाने वाला वीडियो भाजपा की असम इकाई के आधिकारिक खाते से पोस्ट किया गया। उन्होंने कहाकि यह भारतीय संविधान पर हमला है। मुझे यह देखकर आश्चर्य होता है कि उच्चतम न्यायालय मूकदर्शक बना हुआ है। न्यायालय की चुप्पी और स्वतः संज्ञान न लेने से उसकी भूमिका पर सवाल उठते हैं।


    क्या बोलीं प्रियंका चतुर्वेदी

    शिवसेना (उबाठा) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी भाजपा की आलोचना की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहाकि भाजपा की असम इकाई के एक्स अकाउंट पर ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ शीर्षक से नफरत और लक्षित हिंसा से भरा वीडियो पोस्ट किया। विरोध के बाद इसे हटा दिया गया, लेकिन तब तक कई लोग इसे डाउनलोड कर आगे फैला चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ‘बेशर्मी’ से नफरत फैलाने वाले और राजनीतिक रूप से लक्षित करने के इस सबसे घृणित रूप को नजरअंदाज करेगा जो भाजपा के सामने असल में असहाय और बेकार है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से जारी पोस्ट में कहाकि भाजपा की असम इकाई के आधिकारिक हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया गया है जो अल्पसंख्यकों की लक्षित, प्रत्यक्ष हत्या का महिमामंडन करता प्रतीत होता है।


    घृणित और परेशान करने वाला

    विपक्षी दल ने कहाकि यह बेहद घृणित और परेशान करने वाला है और इसे सामान्य ट्रोल सामग्री कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। यह सामूहिक हिंसा और नरसंहार का आह्वान है। इसमें कहा गया कि यह इस फासीवादी शासन के असली चेहरे का प्रतिबिंब है, जिसने दशकों से इस नफरत को पाला है और पिछले 11 वर्षों में इसे सामान्य बनाने की कोशिश की है। कांग्रेस ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए, समाज में अशांति और जहर फैलाने के इस कृत्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने एक अन्य पोस्ट में कहाकि नरेन्द्र मोदी ने अपने नेताओं को नफरत फैलाने की खुली छूट दे रखी है। भाजपा की असम इकाई के आधिकारिक हैंडल से किया गया पोस्ट इसका सबूत है- जिसमें मुख्यमंत्री हिमंता विश्व सरमा ‘पॉइंट-ब्लैंक’ पर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं। ये बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है।

    इसमें आगे कहा गया है कि भाजपा सत्ता के लिए समाज में जहर घोल रही है, लोगों को हिंसा के लिए भड़का रही है। उसकी इस शर्मनाक करतूत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी मोदी के लाडले हिमंता ने मुसलमानों के खिलाफ खुलेआम बयान देकर, उन्हें परेशान करने की बात कही थी। कांग्रेस ने कहाकि नफरत भाजपा के डीएनए में हैं। ऐसी विचारधारा देश के लिए जहर है, जिसे परोसने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

  • असम के CM बोले- मुस्लिम आबादी से मुकाबले के लिए 3 बच्चे पैदा करें हिन्दू… वरना घर की देखभाल के लिए नहीं बचेंगे लोग

    असम के CM बोले- मुस्लिम आबादी से मुकाबले के लिए 3 बच्चे पैदा करें हिन्दू… वरना घर की देखभाल के लिए नहीं बचेंगे लोग


    इंफाल।
    असम (Assam) के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने हिंदुओं को सलाह दी कि वे राज्य में मुसलमानों (Muslims) की तुलना में गिरती जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए, अगर संभव हो तो 3 बच्चे पैदा करें। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि हिंदू अधिक बच्चे पैदा नहीं करेंगे, तो घर की देखभाल करने के लिए लोग नहीं बचेंगे। उनका यह बयान राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले आया है, जिसके अगले साल मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है। बारपेटा जिले में एक आधिकारिक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से बात करते हुए सरमा ने कहा, ‘अल्पसंख्यक क्षेत्रों में उनकी जन्म दर अधिक है। हिंदुओं में जन्म दर दिन-ब-दिन कम होती जा रही है। इसलिए वहां अंतर बना हुआ है।’

    वह असम के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी में कथित वृद्धि पर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा, ‘इसीलिए हम हर हिंदू व्यक्ति से कहते हैं कि आपको एक बच्चे पर नहीं रुकना चाहिए और कम से कम 2 बच्चे पैदा करने चाहिए। यदि संभव हो तो 3 बच्चे पैदा करें।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरी ओर मुस्लिम लोगों को यह सलाह दी जाती है कि वे 7–8 बच्चे पैदा न करें और अपनी संतान की संख्या कम रखें। उन्होंने दावा किया कि हम हिंदुओं से थोड़े अधिक बच्चे पैदा करने के लिए कहते हैं, अन्यथा घर की देखभाल करने वाला कोई नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन हुआ है, इसलिए जनसंख्या पैटर्न की सटीक प्रकृति उन्हें तुरंत ज्ञात नहीं है।

    2 बच्चों के नियम में ढील
    असम सरकार ने 5 दिसंबर को एसटी, एससी, चाय बागान, मोरन और मटक समुदायों के लिए 2 बच्चों के नियम में ढील दी, जिससे पूरे राज्य के लिए परिवार नियोजन नियम को धीरे-धीरे लागू करने का सरकार का रुख बदला। सीएम सरमा ने पहले कहा था कि असम सरकार विशिष्ट राज्य योजनाओं के तहत लाभ प्राप्त करने के वास्ते लोगों के लिए दो-बच्चे के मानदंड को लागू करेगी। मुख्यमंत्री ने 9 नवंबर को दावा किया था कि हिंदू आबादी की वृद्धि कम हो रही है, जबकि मुसलमानों की वृद्धि बढ़ रही है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य की कुल आबादी 3.12 करोड़ थी जिसमें से मुस्लिम जनसंख्या 1.07 करोड़ थी (34.22 प्रतिशत) थी। राज्य में 1.92 करोड़ हिंदू थे, जो कुल जनसंख्या का लगभग 61.47 प्रतिशत थे।