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  • Shadashtak Yog 2026: फरवरी से खुलेगा किस्मत का रास्ता, ‘डबल षडाष्टक योग’ से 4 राशियों को करियर और धन में बड़ा लाभ

    Shadashtak Yog 2026: फरवरी से खुलेगा किस्मत का रास्ता, ‘डबल षडाष्टक योग’ से 4 राशियों को करियर और धन में बड़ा लाभ


    नई दिल्ली । ज्योतिषीय दृष्टि से जनवरी 2026 का अंतिम दिन बेहद खास माना जा रहा है। 31 जनवरी 2026 को बुध और शुक्र ग्रह एक साथ धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करेंगे। इसी दिन ये दोनों शुभ ग्रह देवगुरु बृहस्पति के साथ 150 डिग्री की कोणीय स्थिति बनाते हुए षडाष्टक योग का निर्माण करेंगे। खास बात यह है कि एक ही दिन बुध-गुरु और शुक्र-गुरु के बीच यह संयोग बनने से डबल षडाष्टक योग बन रहा है, जिसे ज्योतिष में दुर्लभ और प्रभावशाली माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 31 जनवरी को सुबह 2:26 बजे से बुध और गुरु के बीच पहला षडाष्टक योग सक्रिय होगा जबकि दोपहर 3:07 बजे से शुक्र और गुरु के बीच दूसरा षडाष्टक योग प्रभाव में आएगा। आम तौर पर षडाष्टक योग को संघर्ष और चुनौतियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन जब इसमें बुध और शुक्र जैसे शुभ ग्रह शामिल हों और वह भी धनिष्ठा जैसे सक्रिय नक्षत्र में तो इसके परिणाम कई राशियों के लिए सकारात्मक रूप ले लेते हैं। माना जा रहा है कि फरवरी 2026 की शुरुआत से ही इसके असर दिखाई देने लगेंगे।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह डबल षडाष्टक योग मेहनत का पूरा फल दिलाने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से अटके कार्यों में गति आएगी और करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति के संकेत मिल सकते हैं, वहीं व्यापारियों के लिए निवेश से जुड़े फैसले लाभदायक रहेंगे। सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा और पारिवारिक वातावरण सहयोगपूर्ण बना रहेगा।सिंह राशि के लिए यह योग आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में आपकी क्षमताओं को पहचान मिलेगी और उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। प्रमोशन या पद परिवर्तन के योग बन रहे हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं, विशेष रूप से संपत्ति या दीर्घकालीन निवेश से लाभ मिल सकता है। इस दौरान की गई यात्राएं भविष्य में फायदेमंद संपर्क भी दिला सकती हैं।

    धनु राशि वालों के लिए फरवरी 2026 का महीना प्रगति और विस्तार का संकेत दे रहा है। शिक्षा, करियर और व्यापार से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक संतुलन बेहतर होता दिखाई देगा। मानसिक रूप से राहत मिलेगी और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, जिससे बड़े फैसले लेने की क्षमता मजबूत होगी।मकर राशि के जातकों के लिए यह डबल षडाष्टक योग करियर और धन दोनों क्षेत्रों में नए अवसर लेकर आएगा। लंबे समय से चल रहे प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलने की संभावना है। नए व्यावसायिक संपर्क और यात्राएं भविष्य में लाभ का आधार बन सकती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों में सहयोग मिलेगा और निजी जीवन में स्थिरता बनी रहेगी।यह सभी फल ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी भी बड़े आर्थिक, करियर या व्यक्तिगत निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा उचित माना जाता है।

  • मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत

    मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत


    नई दिल्ली ।मकर संक्रांति के पावन अवसर पर 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव शनि की राशि मकर में प्रवेश करने जा रहे हैं। यह खगोलीय घटना करीब 12 महीने बाद घटित हो रही है जिसे धार्मिक सामाजिक और ज्योतिषीय-तीनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही जहां मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा वहीं खरमास की समाप्ति के बाद विवाह गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की भी पुनः शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य का यह गोचर कई राशियों के जीवन में करियर धन और मान-सम्मान के नए द्वार खोल सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि को स्वभाव से विपरीत ग्रह माना गया है लेकिन पिता-पुत्र के संबंध के कारण सूर्य का शनि की राशि मकर में प्रवेश विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए परिश्रम अनुशासन और निरंतर प्रयासों का फल अवश्य मिलता है। यह गोचर उन लोगों के लिए खास साबित हो सकता है जो लंबे समय से अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर दशम भाव में होगा जो कर्म और करियर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इस अवधि में नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और पदोन्नति के योग भी बन सकते हैं। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं उनके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी और वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है।वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव में गोचर करेंगे जिसे भाग्य और धर्म का भाव कहा जाता है। इस दौरान भाग्य का पूरा साथ मिलने के संकेत हैं। उच्च शिक्षा विदेश यात्रा और धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। अचल संपत्ति या दीर्घकालिक निवेश से लाभ के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का सहयोग और सम्मान प्राप्त हो सकता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर तीसरे भाव में होगा जो पराक्रम और साहस का प्रतीक है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ेगा और नए काम शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं हालांकि व्यापार या निवेश में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है। पारिवारिक जीवन में भाई-बहनों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा।मकर राशि के लिए यह गोचर सबसे अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है क्योंकि सूर्य लग्न भाव में प्रवेश करेंगे। इससे व्यक्तित्व में निखार आएगा सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और करियर में उन्नति के मजबूत योग बनेंगे। संपत्ति और सरकारी मामलों में सफलता मिल सकती है लेकिन स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है इसलिए संतुलन जरूरी है।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य द्वादश भाव में गोचर करेंगे। इस दौरान विदेश यात्रा विदेशी कंपनियों से जुड़े काम और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। हालांकि खर्चों में वृद्धि संभव है और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रह सकता है।ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य का मकर गोचर मेहनत अनुशासन और धैर्य का महत्व सिखाता है। यह समय उन्हीं लोगों को विशेष फल देगा जो लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर लगातार प्रयास करते हैं। कुल मिलाकर मकर संक्रांति 2026 कई राशियों के लिए बदलाव और उन्नति का संकेत लेकर आ रही है।

  • 31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल

    31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल


    नई दिल्ली/काशी: वर्ष 2025 का समापन एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक संयोग के साथ हो रहा है। आज, बुधवार 31 दिसंबर 2025 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए अमोघ माना जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुयायी आज पूरी निष्ठा के साथ भगवान विष्णु की आराधना कर रहे हैं।

    तिथि और नक्षत्रों की अनूठी गणना

    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की अंतिम एकादशी कई मायनों में खास है। आज एकादशी तिथि का क्षय हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अर्धरात्रि के बाद द्वादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, तिथि का यह परिवर्तन आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करने वाला होता है।तिथि विवरण: एकादशी तिथि आज दिन भर व्याप्त रहेगी। रात 1 बजकर 48 मिनट पर द्वादशी तिथि का आगमन होगा, जो अगले दिन तक प्रभावी रहेगी।नक्षत्र और योग: आज रात 1 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा। वहीं, योग की बात करें तो रात 9 बजकर 13 मिनट तक साध्य योग रहेगा, जो शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसके उपरांत शुभ योग प्रारंभ होगा।

    चंद्रमा का गोचर: वृषभ राशि में उच्च के होंगे चंद्र

    आज ज्योतिषीय दृष्टि से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद वे अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश कर जाएंगे। चंद्रमा का अपनी उच्च राशि में होना मन की एकाग्रता, मानसिक शांति और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि का कारक बनता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति संकल्प शक्ति को मजबूत करने वाली होगी।

    आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त Time Table

    किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या नए कार्य की शुरुआत के लिए सही समय का चयन करना अनिवार्य है।
    शुभ मुहूर्त Auspicious Timings:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:24 से 6:19 तक ईश्वर चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ
    विजय मुहूर्त: दोपहर 2:08 से 2:49 तक किसी भी कार्य में सफलता हेतु निशिथ काल: रात 11:57 से 12:52 तक तांत्रिक पूजा और विशेष जप हेतु  गोधूलि बेला: शाम 5:32 से 6:00 तक आरती और दीपदान हेतु  अशुभ मुहूर्त Inauspicious Timings: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल जैसे समय में महत्वपूर्ण निर्णय लेने या नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए:राहुकाल: दोपहर 12:00 से 1:30 तक  गुलिक काल: सुबह 10:30 से 12:00 तक  यमगंड: सुबह 7:30 से 9:00 तक

    पुत्रदा एकादशी का महत्व और उपाय

    पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी माना गया है जो संतान सुख की कामना रखते हैं। भगवान विष्णु के ‘नारायण’ स्वरूप की पूजा आज के दिन की जाती है।विशेष उपाय: आज बुधवार का दिन है इसलिए भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। आज ‘श्री गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी रहेगा। यह उपाय न केवल विघ्नों को दूर करता है बल्कि साल के अंतिम दिन भविष्य के लिए मानसिक स्पष्टता और कार्यों में सफलता सुनिश्चित करता है।सावधानी: पंचांग की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनटों के अंतर पर आधारित हो सकती है।अतः किसी भी बड़े अनुष्ठान से पूर्व अपने स्थानीय पंडित या पंचांग का परामर्श अवश्य लें।
  • साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन

    साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन


    नई दिल्ली: साल 2025 का अंतिम मंगलवार 30 दिसंबर को पड़ रहा है और इस दिन सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह योग देर रात लगभग 1 बजे तक प्रभावी रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में सिद्धि योग को शुभ कार्यों की शुरुआत, मंत्र जाप और साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। इसी कारण मंगलवार और सिद्धि योग के मेल को लेकर श्रद्धालुओं और ज्योतिष से जुड़े लोगों के बीच खास चर्चा देखने को मिल रही है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से होता है, जिसे साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास और कर्म का प्रतीक माना जाता है। जब इसी दिन सिद्धि योग का निर्माण होता है, तो इसे प्रयासों को सफलता की ओर ले जाने वाला संयोग कहा जाता है। यही वजह है कि इस दिन किए गए धार्मिक और आध्यात्मिक उपायों को जीवन के विभिन्न पहलुओं-जैसे करियर, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक संतुलन और संतान सुख-से जोड़कर देखा जाता है।धार्मिक परंपराओं में मंगलवार को भगवान हनुमान और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। कई ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि इस दिन विष्णु मंत्रों का जप, पूजा-अर्चना और दान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। विशेष रूप से संतान से जुड़े विषयों को लेकर किए जाने वाले उपायों की चर्चा अधिक रहती है, जिनमें पूजा-पाठ, दान और प्रतीकात्मक धार्मिक अनुष्ठान शामिल हैं।

    आस्था रखने वाले लोगों का यह भी मानना है कि साल के अंतिम मंगलवार को किए गए उपायों का प्रभाव आने वाले वर्ष तक बना रह सकता है। इसी विश्वास के चलते लोग 2026 को बेहतर और शुभ बनाने की कामना के साथ इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई परिवारों में यह परंपरा भी है कि मंगलवार को जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन या दान दिया जाए, ताकि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहे।हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ऐसे उपाय आस्था और परंपरा से जुड़े विषय हैं। इन्हें किसी वैज्ञानिक, चिकित्सकीय या व्यावहारिक समाधान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। समाज के एक वर्ग का मानना है कि पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं, जिससे वह अपने लक्ष्य के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता है।

    सिद्धि योग और मंगलवार के संयोग को लेकर धार्मिक स्थलों और मंदिरों में विशेष चहल-पहल देखने को मिल सकती है। कई स्थानों पर सुंदरकांड पाठ, विष्णु सहस्रनाम और सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन को लेकर सामान्य इंतजाम किए जाते हैं।कुल मिलाकर, साल के अंतिम मंगलवार और सिद्धि योग का यह संयोग आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। लोग इसे आत्मविश्वास बढ़ाने, मानसिक शांति पाने और नए वर्ष के लिए सकारात्मक शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।