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  • फरवरी के अंत में आसमान में सजेगी ‘ग्रहों की परेड’, 6 ग्रह एक साथ; इन राशियों के लिए खुलेगा भाग्य का द्वार

    फरवरी के अंत में आसमान में सजेगी ‘ग्रहों की परेड’, 6 ग्रह एक साथ; इन राशियों के लिए खुलेगा भाग्य का द्वार


    नई दिल्ली । फरवरी माह का अंतिम चरण एक बेहद खास और दुर्लभ खगोलीय घटना का साक्षी बनने जा रहा है। इस दौरान आकाश में छह प्रमुख ग्रह एक साथ विशेष स्थिति में नजर आएंगे। पृथ्वी से देखने पर ये ग्रह एक सीध में कतारबद्ध दिखाई देंगे जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘ग्रहों की परेड’ कहा जाता है। इस अद्भुत नजारे में बुध शुक्र बृहस्पति शनि यूरेनस और नेपच्यून शामिल होंगे। अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार सूर्यास्त के तुरंत बाद ये ग्रह क्षितिज के पास दिखाई देंगे। हालांकि साफ मौसम होने पर भी इनमें से केवल चार ग्रह बुध शुक्र बृहस्पति और शनि नंगी आंखों से स्पष्ट दिख सकेंगे जबकि यूरेनस और नेपच्यून को देखने के लिए दूरबीन की जरूरत पड़ सकती है।

    यह घटना वैज्ञानिक दृष्टि से जितनी महत्वपूर्ण है ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उतनी ही प्रभावशाली भी मानी जा रही है। जब कई बड़े ग्रह एक ही दिशा में सक्रिय होते हैं तो उसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है। वर्तमान ग्रह स्थिति के अनुसार गुरु मिथुन राशि में शनि मीन राशि में और बुध-शुक्र राहु के साथ कुंभ राशि में स्थित बताए जा रहे हैं। फरवरी के अंत तक मंगल और चंद्रमा के भी कुंभ राशि में पहुंचने से ऊर्जा उत्साह और भावनात्मक शक्ति में वृद्धि के संकेत हैं। ग्रहों की यह विशेष व्यवस्था सोच निर्णय धन जिम्मेदारी और भाग्य से जुड़े मामलों में तेजी से बदलाव ला सकती है। कई लोगों को अचानक अवसर नए संपर्क और आर्थिक लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। सही दिशा में किया गया प्रयास उल्लेखनीय सफलता दिला सकता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में तेजी से उछाल लेकर आ सकता है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है और परिवार का सहयोग मनोबल को मजबूत करेगा। मिथुन राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलने के संकेत हैं। गुरु का प्रभाव दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा नए संपर्क लाभदायक सिद्ध होंगे और नई नौकरी या पदोन्नति के अवसर मिल सकते हैं। सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने वाला है। व्यापार में विस्तार साझेदारी से लाभ और प्रभावशाली लोगों से सहयोग मिलने की संभावना है। वहीं कन्या राशि वालों को अपनी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। स्वास्थ्य में सुधार पुराने विवादों का समाधान और निवेश से अच्छे रिटर्न के योग बन रहे हैं।

    फरवरी के अंत में बनने वाला यह दुर्लभ ग्रह संयोग न केवल आकाश में एक मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करेगा बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के जीवन में नई ऊर्जा और संभावनाओं का संचार भी कर सकता है। सूर्यास्त के बाद साफ आसमान में इस अद्भुत नजारे को देखने का अवसर विशेष रहेगा।

  • ग्रहण के बाद अग्नि पंचक का प्रकोप, अगले चार दिन मेष, सिंह और वृश्चिक राशि वालों के लिए भारी

    ग्रहण के बाद अग्नि पंचक का प्रकोप, अगले चार दिन मेष, सिंह और वृश्चिक राशि वालों के लिए भारी


    नई दिल्ली । सूर्य ग्रहण भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसका प्रभाव अभी थमा नहीं है। वजह है अग्नि पंचक, जो ग्रहण के साथ ही शुरू हुआ और अब अगले चार दिनों तक असर दिखाएगा। पंचक के पांच दिन सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए वर्जित माने जाते हैं, लेकिन जब यह अग्नि पंचक हो तो इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। मान्यता है कि अग्नि पंचक के दौरान आगजनी, दुर्घटनाएं, तनाव, राजनीतिक उथल-पुथल और अचानक होने वाली घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में यह समय लापरवाही नहीं बल्कि अतिरिक्त सावधानी की मांग करता है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार 17 फरवरी को लगा सूर्य ग्रहण अग्नि पंचक में ही हुआ, जिससे इसकी नकारात्मकता और प्रबल मानी जा रही है। कहा जाता है कि ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जब यह अग्नि तत्व से जुड़े पंचक में हो तो दुर्घटनाओं और विवादों की आशंका अधिक हो जाती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ इस अवधि में धैर्य और संयम बरतने की सलाह दे रहे हैं।

    अग्नि पंचक के दौरान ज्वलनशील वस्तुओं की खरीदारी से बचने को कहा गया है। गैस सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल, लकड़ी या अन्य ईंधन जैसी चीजें खरीदना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी वस्तुएं इस समय जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा यात्रा भी टालने की सलाह दी गई है, विशेष रूप से दक्षिण दिशा की यात्रा से बचने को कहा गया है। इस दौरान किए गए शुभ कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं देते और कभी-कभी विपरीत फल भी मिल सकता है।

    इस बार सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगा। उस समय कुंभ राशि में सूर्य, बुध, मंगल और राहु का चतुर्ग्रही योग बना हुआ था, जिसका प्रभाव अभी भी जारी है। यह योग तनाव और अस्थिरता को बढ़ाने वाला माना जाता है। ऐसे में तीन राशियों के लिए यह समय विशेष सावधानी का है।

    मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं, जो अग्नि तत्व के ग्रह माने जाते हैं। इस कारण इन राशि के जातकों में गुस्सा और आवेग बढ़ सकता है। छोटी बात पर बड़ा विवाद हो सकता है, जिससे निजी और पेशेवर जीवन प्रभावित हो सकता है। इन्हें सलाह दी जाती है कि वाणी पर संयम रखें और किसी भी तरह के टकराव से दूर रहें। अनावश्यक यात्रा से भी बचें।

    वहीं सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं और वर्तमान में सूर्य राहु के प्रभाव में माने जा रहे हैं। ऐसे में सिंह राशि के लोगों को कार्यस्थल पर विशेष सावधानी रखनी चाहिए। वरिष्ठ अधिकारियों से विवाद की स्थिति बन सकती है। निवेश संबंधी निर्णय फिलहाल टालना बेहतर होगा। साथ ही स्वास्थ्य को लेकर भी सतर्क रहें, क्योंकि मानसिक तनाव शारीरिक परेशानी में बदल सकता है।

    कुल मिलाकर, ग्रहण के बाद के ये चार दिन धैर्य, सावधानी और आत्मनियंत्रण के हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए यह समय सतर्क रहकर संभावित जोखिमों को टालने का है, ताकि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य बनी रहे।

  • कुंभ राशि में सूर्य गोचर 2026 से बदलेगा भाग्यचक्र: 15 मार्च तक मेष, मिथुन, सिंह और तुला के लिए करियर, निवेश और रिश्तों में प्रगति के संकेत

    कुंभ राशि में सूर्य गोचर 2026 से बदलेगा भाग्यचक्र: 15 मार्च तक मेष, मिथुन, सिंह और तुला के लिए करियर, निवेश और रिश्तों में प्रगति के संकेत


    नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 13 फरवरी 2026 को सूर्य ने कुंभ राशि में प्रवेश किया है और इसका प्रभाव 15 मार्च 2026 तक रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार यह परिवर्तन प्रातः लगभग 4 बजकर 14 मिनट पर हुआ। इससे पहले सूर्य मकर राशि में स्थित था। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, प्रतिष्ठा, प्रशासनिक शक्ति और पारिवारिक संतुलन का कारक ग्रह माना जाता है। इसी कारण सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश विशेष महत्व रखता है।

    पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के आधार पर यह गोचर मेष, मिथुन, सिंह और तुला राशि के जातकों के लिए अनुकूल परिणाम देने वाला माना जा रहा है। मेष राशि के लिए सूर्य का यह परिवर्तन लाभ भाव में सक्रियता ला सकता है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि के संकेत मिल सकते हैं जबकि व्यवसाय से जुड़े जातकों को नए संपर्कों और नेटवर्किंग से आर्थिक अवसर प्राप्त होने की संभावना जताई जा रही है। सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि के संकेत बताए जा रहे हैं।

    मिथुन राशि के लिए यह अवधि लंबित कार्यों को गति देने वाली मानी जा रही है। पारिवारिक और सामाजिक संबंधों में सुधार के संकेत हैं। जो योजनाएं लंबे समय से रुकी हुई थीं उन्हें आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। उच्च शिक्षा या विदेश से जुड़े कार्यों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर साझेदारी और वैवाहिक जीवन के क्षेत्र में संतुलन ला सकता है। व्यवसायिक सहयोग मजबूत हो सकता है और सामूहिक निर्णयों में स्पष्टता बढ़ने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता उभर सकती है जिससे सम्मान और प्रभाव में वृद्धि हो सकती है।

    तुला राशि के लिए यह समय निवेश और व्यक्तिगत संतुलन से जुड़ा माना गया है। वित्तीय निर्णय सोच समझकर लेने पर लाभ के संकेत मिल सकते हैं। भावनात्मक मामलों में स्पष्टता आने और संबंधों में सामंजस्य बढ़ने की संभावना है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी यह उपयुक्त समय माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रहों का प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत कुंडली, दशा और अंतर्दशा पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक या पेशेवर निर्णय से पहले व्यक्तिगत ज्योतिषीय परामर्श को उपयोगी माना जाता है। सूर्य का यह गोचर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल को जागृत करने वाला समय माना जा रहा है जो प्रयास और संतुलन के साथ बेहतर परिणाम दे सकता है।

  • फरवरी में राहु–मंगल की युति से बनेगा अंगारक योग, मेष तुला और कुंभ के लिए बढ़ेगी चुनौती..

    फरवरी में राहु–मंगल की युति से बनेगा अंगारक योग, मेष तुला और कुंभ के लिए बढ़ेगी चुनौती..


    नई दिल्ली। फरवरी महीने में ग्रहों की चाल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा जिसका असर ज्योतिषीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है इस दौरान राहु और मंगल एक ही राशि में आकर युति बनाएंगे जिससे एक उग्र और अशुभ अंगारक योग का निर्माण होगा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह योग जल्दबाजी गुस्सा मानसिक तनाव और अप्रत्याशित घटनाओं की संभावना को बढ़ाता है

    ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक 23 फरवरी को मंगल का गोचर कुंभ राशि में होगा जहां पहले से ही राहु विराजमान हैं इन दोनों ग्रहों की युति सामान्य तौर पर अशांति टकराव और गलत निर्णयों को जन्म देती है ऐसे में यह समय कई राशियों के लिए धैर्य और संयम की परीक्षा लेने वाला साबित हो सकता है

    मेष राशि के जातकों के लिए यह योग विशेष सावधानी का संकेत दे रहा है कार्यक्षेत्र में रुकावटें आ सकती हैं अधूरे कामों में देरी होगी और अचानक खर्च बढ़ सकता है सहकर्मियों या अधिकारियों से विवाद की स्थिति बन सकती है इस दौरान वाहन चलाते समय खास सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है क्योंकि जल्दबाजी दुर्घटना का कारण बन सकती है

    तुला राशि वालों के लिए यह समय मानसिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है अनावश्यक चिंता नींद की कमी और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है पारिवारिक रिश्तों में गलतफहमी उत्पन्न हो सकती है व्यापार या निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है इसलिए सोच समझकर कदम उठाना जरूरी होगा

    कुंभ राशि के जातकों पर इस योग का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक बताया जा रहा है क्योंकि यह योग इसी राशि में बन रहा है आर्थिक मामलों में लापरवाही भारी पड़ सकती है लेनदेन दस्तावेजों और नए समझौतों में विशेष सावधानी की जरूरत होगी घर और कार्यस्थल पर छोटी छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ सकता है इसलिए संयमित व्यवहार अपनाना लाभकारी रहेगाज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसे अशुभ योग के दौरान घबराने की बजाय संतुलित दिनचर्या अपनाना सबसे बेहतर उपाय माना जाता है नियमित पूजा पाठ ध्यान और सकारात्मक सोच से मानसिक स्थिरता बनी रहती है साथ ही इस दौरान जोखिम भरे फैसलों अनावश्यक बहस और क्रोध से दूरी बनाकर रखना चाहिए

    विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रह योग भविष्य के प्रति चेतावनी देते हैं न कि निश्चित संकट समय रहते सतर्कता आत्मनियंत्रण और समझदारी अपनाकर नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है फरवरी में बनने वाला यह अंगारक योग भी यही संदेश देता है कि धैर्य और विवेक से परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ा जा सकता है

  • Shadashtak Yog 2026: फरवरी से खुलेगा किस्मत का रास्ता, ‘डबल षडाष्टक योग’ से 4 राशियों को करियर और धन में बड़ा लाभ

    Shadashtak Yog 2026: फरवरी से खुलेगा किस्मत का रास्ता, ‘डबल षडाष्टक योग’ से 4 राशियों को करियर और धन में बड़ा लाभ


    नई दिल्ली । ज्योतिषीय दृष्टि से जनवरी 2026 का अंतिम दिन बेहद खास माना जा रहा है। 31 जनवरी 2026 को बुध और शुक्र ग्रह एक साथ धनिष्ठा नक्षत्र में गोचर करेंगे। इसी दिन ये दोनों शुभ ग्रह देवगुरु बृहस्पति के साथ 150 डिग्री की कोणीय स्थिति बनाते हुए षडाष्टक योग का निर्माण करेंगे। खास बात यह है कि एक ही दिन बुध-गुरु और शुक्र-गुरु के बीच यह संयोग बनने से डबल षडाष्टक योग बन रहा है, जिसे ज्योतिष में दुर्लभ और प्रभावशाली माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, 31 जनवरी को सुबह 2:26 बजे से बुध और गुरु के बीच पहला षडाष्टक योग सक्रिय होगा जबकि दोपहर 3:07 बजे से शुक्र और गुरु के बीच दूसरा षडाष्टक योग प्रभाव में आएगा। आम तौर पर षडाष्टक योग को संघर्ष और चुनौतियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन जब इसमें बुध और शुक्र जैसे शुभ ग्रह शामिल हों और वह भी धनिष्ठा जैसे सक्रिय नक्षत्र में तो इसके परिणाम कई राशियों के लिए सकारात्मक रूप ले लेते हैं। माना जा रहा है कि फरवरी 2026 की शुरुआत से ही इसके असर दिखाई देने लगेंगे।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह डबल षडाष्टक योग मेहनत का पूरा फल दिलाने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से अटके कार्यों में गति आएगी और करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति के संकेत मिल सकते हैं, वहीं व्यापारियों के लिए निवेश से जुड़े फैसले लाभदायक रहेंगे। सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा और पारिवारिक वातावरण सहयोगपूर्ण बना रहेगा।सिंह राशि के लिए यह योग आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में आपकी क्षमताओं को पहचान मिलेगी और उच्च अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। प्रमोशन या पद परिवर्तन के योग बन रहे हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं, विशेष रूप से संपत्ति या दीर्घकालीन निवेश से लाभ मिल सकता है। इस दौरान की गई यात्राएं भविष्य में फायदेमंद संपर्क भी दिला सकती हैं।

    धनु राशि वालों के लिए फरवरी 2026 का महीना प्रगति और विस्तार का संकेत दे रहा है। शिक्षा, करियर और व्यापार से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक संतुलन बेहतर होता दिखाई देगा। मानसिक रूप से राहत मिलेगी और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, जिससे बड़े फैसले लेने की क्षमता मजबूत होगी।मकर राशि के जातकों के लिए यह डबल षडाष्टक योग करियर और धन दोनों क्षेत्रों में नए अवसर लेकर आएगा। लंबे समय से चल रहे प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलने की संभावना है। नए व्यावसायिक संपर्क और यात्राएं भविष्य में लाभ का आधार बन सकती हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों में सहयोग मिलेगा और निजी जीवन में स्थिरता बनी रहेगी।यह सभी फल ज्योतिषीय गणनाओं और मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी भी बड़े आर्थिक, करियर या व्यक्तिगत निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा उचित माना जाता है।

  • मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत

    मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत


    नई दिल्ली ।मकर संक्रांति के पावन अवसर पर 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव शनि की राशि मकर में प्रवेश करने जा रहे हैं। यह खगोलीय घटना करीब 12 महीने बाद घटित हो रही है जिसे धार्मिक सामाजिक और ज्योतिषीय-तीनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही जहां मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा वहीं खरमास की समाप्ति के बाद विवाह गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की भी पुनः शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य का यह गोचर कई राशियों के जीवन में करियर धन और मान-सम्मान के नए द्वार खोल सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि को स्वभाव से विपरीत ग्रह माना गया है लेकिन पिता-पुत्र के संबंध के कारण सूर्य का शनि की राशि मकर में प्रवेश विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए परिश्रम अनुशासन और निरंतर प्रयासों का फल अवश्य मिलता है। यह गोचर उन लोगों के लिए खास साबित हो सकता है जो लंबे समय से अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर दशम भाव में होगा जो कर्म और करियर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इस अवधि में नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और पदोन्नति के योग भी बन सकते हैं। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं उनके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी और वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है।वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव में गोचर करेंगे जिसे भाग्य और धर्म का भाव कहा जाता है। इस दौरान भाग्य का पूरा साथ मिलने के संकेत हैं। उच्च शिक्षा विदेश यात्रा और धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। अचल संपत्ति या दीर्घकालिक निवेश से लाभ के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का सहयोग और सम्मान प्राप्त हो सकता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर तीसरे भाव में होगा जो पराक्रम और साहस का प्रतीक है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ेगा और नए काम शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं हालांकि व्यापार या निवेश में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है। पारिवारिक जीवन में भाई-बहनों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा।मकर राशि के लिए यह गोचर सबसे अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है क्योंकि सूर्य लग्न भाव में प्रवेश करेंगे। इससे व्यक्तित्व में निखार आएगा सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और करियर में उन्नति के मजबूत योग बनेंगे। संपत्ति और सरकारी मामलों में सफलता मिल सकती है लेकिन स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है इसलिए संतुलन जरूरी है।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य द्वादश भाव में गोचर करेंगे। इस दौरान विदेश यात्रा विदेशी कंपनियों से जुड़े काम और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। हालांकि खर्चों में वृद्धि संभव है और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रह सकता है।ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य का मकर गोचर मेहनत अनुशासन और धैर्य का महत्व सिखाता है। यह समय उन्हीं लोगों को विशेष फल देगा जो लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर लगातार प्रयास करते हैं। कुल मिलाकर मकर संक्रांति 2026 कई राशियों के लिए बदलाव और उन्नति का संकेत लेकर आ रही है।

  • 31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल

    31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल


    नई दिल्ली/काशी: वर्ष 2025 का समापन एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक संयोग के साथ हो रहा है। आज, बुधवार 31 दिसंबर 2025 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए अमोघ माना जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुयायी आज पूरी निष्ठा के साथ भगवान विष्णु की आराधना कर रहे हैं।

    तिथि और नक्षत्रों की अनूठी गणना

    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की अंतिम एकादशी कई मायनों में खास है। आज एकादशी तिथि का क्षय हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अर्धरात्रि के बाद द्वादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, तिथि का यह परिवर्तन आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करने वाला होता है।तिथि विवरण: एकादशी तिथि आज दिन भर व्याप्त रहेगी। रात 1 बजकर 48 मिनट पर द्वादशी तिथि का आगमन होगा, जो अगले दिन तक प्रभावी रहेगी।नक्षत्र और योग: आज रात 1 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा। वहीं, योग की बात करें तो रात 9 बजकर 13 मिनट तक साध्य योग रहेगा, जो शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसके उपरांत शुभ योग प्रारंभ होगा।

    चंद्रमा का गोचर: वृषभ राशि में उच्च के होंगे चंद्र

    आज ज्योतिषीय दृष्टि से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद वे अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश कर जाएंगे। चंद्रमा का अपनी उच्च राशि में होना मन की एकाग्रता, मानसिक शांति और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि का कारक बनता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति संकल्प शक्ति को मजबूत करने वाली होगी।

    आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त Time Table

    किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या नए कार्य की शुरुआत के लिए सही समय का चयन करना अनिवार्य है।
    शुभ मुहूर्त Auspicious Timings:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:24 से 6:19 तक ईश्वर चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ
    विजय मुहूर्त: दोपहर 2:08 से 2:49 तक किसी भी कार्य में सफलता हेतु निशिथ काल: रात 11:57 से 12:52 तक तांत्रिक पूजा और विशेष जप हेतु  गोधूलि बेला: शाम 5:32 से 6:00 तक आरती और दीपदान हेतु  अशुभ मुहूर्त Inauspicious Timings: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल जैसे समय में महत्वपूर्ण निर्णय लेने या नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए:राहुकाल: दोपहर 12:00 से 1:30 तक  गुलिक काल: सुबह 10:30 से 12:00 तक  यमगंड: सुबह 7:30 से 9:00 तक

    पुत्रदा एकादशी का महत्व और उपाय

    पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी माना गया है जो संतान सुख की कामना रखते हैं। भगवान विष्णु के ‘नारायण’ स्वरूप की पूजा आज के दिन की जाती है।विशेष उपाय: आज बुधवार का दिन है इसलिए भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। आज ‘श्री गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी रहेगा। यह उपाय न केवल विघ्नों को दूर करता है बल्कि साल के अंतिम दिन भविष्य के लिए मानसिक स्पष्टता और कार्यों में सफलता सुनिश्चित करता है।सावधानी: पंचांग की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनटों के अंतर पर आधारित हो सकती है।अतः किसी भी बड़े अनुष्ठान से पूर्व अपने स्थानीय पंडित या पंचांग का परामर्श अवश्य लें।
  • साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन

    साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन


    नई दिल्ली: साल 2025 का अंतिम मंगलवार 30 दिसंबर को पड़ रहा है और इस दिन सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह योग देर रात लगभग 1 बजे तक प्रभावी रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में सिद्धि योग को शुभ कार्यों की शुरुआत, मंत्र जाप और साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। इसी कारण मंगलवार और सिद्धि योग के मेल को लेकर श्रद्धालुओं और ज्योतिष से जुड़े लोगों के बीच खास चर्चा देखने को मिल रही है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से होता है, जिसे साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास और कर्म का प्रतीक माना जाता है। जब इसी दिन सिद्धि योग का निर्माण होता है, तो इसे प्रयासों को सफलता की ओर ले जाने वाला संयोग कहा जाता है। यही वजह है कि इस दिन किए गए धार्मिक और आध्यात्मिक उपायों को जीवन के विभिन्न पहलुओं-जैसे करियर, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक संतुलन और संतान सुख-से जोड़कर देखा जाता है।धार्मिक परंपराओं में मंगलवार को भगवान हनुमान और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। कई ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि इस दिन विष्णु मंत्रों का जप, पूजा-अर्चना और दान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। विशेष रूप से संतान से जुड़े विषयों को लेकर किए जाने वाले उपायों की चर्चा अधिक रहती है, जिनमें पूजा-पाठ, दान और प्रतीकात्मक धार्मिक अनुष्ठान शामिल हैं।

    आस्था रखने वाले लोगों का यह भी मानना है कि साल के अंतिम मंगलवार को किए गए उपायों का प्रभाव आने वाले वर्ष तक बना रह सकता है। इसी विश्वास के चलते लोग 2026 को बेहतर और शुभ बनाने की कामना के साथ इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई परिवारों में यह परंपरा भी है कि मंगलवार को जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन या दान दिया जाए, ताकि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहे।हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ऐसे उपाय आस्था और परंपरा से जुड़े विषय हैं। इन्हें किसी वैज्ञानिक, चिकित्सकीय या व्यावहारिक समाधान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। समाज के एक वर्ग का मानना है कि पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं, जिससे वह अपने लक्ष्य के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता है।

    सिद्धि योग और मंगलवार के संयोग को लेकर धार्मिक स्थलों और मंदिरों में विशेष चहल-पहल देखने को मिल सकती है। कई स्थानों पर सुंदरकांड पाठ, विष्णु सहस्रनाम और सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन को लेकर सामान्य इंतजाम किए जाते हैं।कुल मिलाकर, साल के अंतिम मंगलवार और सिद्धि योग का यह संयोग आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। लोग इसे आत्मविश्वास बढ़ाने, मानसिक शांति पाने और नए वर्ष के लिए सकारात्मक शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।