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  • दिन में ग्रहण और रात में जगमगाएगा आसमान, स्पेन के 10 आबादी वाले गांवों में दिखेगा अद्भुत खगोलीय नजारा

    दिन में ग्रहण और रात में जगमगाएगा आसमान, स्पेन के 10 आबादी वाले गांवों में दिखेगा अद्भुत खगोलीय नजारा


    नई दिल्ली।  12 अगस्त 2026 की शाम खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाली है। स्पेन के बुर्गोस प्रांत में स्थित छोटे से गांव अवेलानेसा दे मुन्यो में एक ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी जो लंबे समय तक लोगों की यादों में बनी रह सकती है। महज करीब 10 स्थायी निवासियों वाले इस गांव में सूर्य ग्रहण और पर्सीड्स उल्का वर्षा का अनोखा संयोग देखने के लिए दुनिया भर से लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। सामान्य दिनों में शांत और लगभग अनजान रहने वाला यह गांव इस खास दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खगोल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचने वाला है।

    इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात सूर्य ग्रहण का समय है। 12 अगस्त को स्पेन में पूर्ण सूर्य ग्रहण सूर्यास्त के ठीक पहले दिखाई देगा। जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा तो कुछ समय के लिए दिन का उजाला अचानक कम होकर रात जैसा अंधेरा दिखाई देने लगेगा। इसके बाद ग्रहण समाप्त होने पर सूर्य की रोशनी वापस आएगी और कुछ ही देर बाद सूर्य सामान्य रूप से क्षितिज के नीचे चला जाएगा। इस कारण वहां मौजूद लोगों को एक ही शाम में दो अलग-अलग मौकों पर अंधेरा छाने का अनुभव हो सकता है। इसी प्रभाव को लोकप्रिय तौर पर डबल डार्कनेस कहा जा रहा है।

    यह खगोलीय रोमांच सूर्य ग्रहण तक सीमित नहीं रहेगा। रात होते ही आसमान में पर्सीड्स उल्का वर्षा का नजारा भी दिखाई दे सकता है। पर्सीड्स हर साल होने वाली प्रमुख उल्का वर्षाओं में शामिल है और अगस्त के दौरान इसकी गतिविधि अपने चरम के आसपास रहती है। जब अंतरिक्ष से आने वाले छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो घर्षण के कारण वे चमकदार लकीरों के रूप में दिखाई देते हैं। इन्हें आम बोलचाल में टूटते तारे कहा जाता है। एक ही दिन सूर्य ग्रहण और रात में उल्का वर्षा का नजारा इस आयोजन को और खास बना रहा है।

    अवेलानेसा दे मुन्यो की भौगोलिक स्थिति भी इसे इस घटना के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। गांव के आसपास खुले गेहूं के खेत और पहाड़ी क्षेत्र हैं जहां पश्चिमी क्षितिज का विस्तृत दृश्य देखा जा सकता है। यहां शहरों जैसी तेज कृत्रिम रोशनी भी नहीं है। यही वजह है कि रात के समय आसमान में दिखाई देने वाले तारों और उल्काओं को देखने के लिए यह जगह अनुकूल मानी जा रही है।

    इस दुर्लभ नजारे ने स्थानीय लोगों में भी उत्साह पैदा कर दिया है। गांव छोड़कर वर्षों पहले शहरों में बस चुके कई पुराने निवासी भी इस खास अवसर पर वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पर्यटकों के लिए देखने की जगहों को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। गांव में बड़े होटल और रेस्टोरेंट सीमित हैं लेकिन आसपास के कई ठहरने वाले स्थान पहले से ही बुक बताए जा रहे हैं। ऐसे में 12 अगस्त को यह छोटा सा गांव खगोल विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों और पर्यटकों की बड़ी भीड़ का गवाह बन सकता है।

    यह आयोजन एक बार फिर दिखाता है कि ब्रह्मांड से जुड़ी घटनाएं किस तरह किसी छोटे और शांत स्थान को भी अचानक दुनिया के आकर्षण का केंद्र बना सकती हैं। सूर्य ग्रहण का अंधेरा और उसके बाद तारों से भरा आसमान इस गांव के लिए प्रकृति की ऐसी अनोखी प्रस्तुति बनने जा रहा है जिसे देखने के लिए लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • 31 मई की रात बनेगी यादगार, चांद दिखेगा छोटा और कम चमकीला; जानिए क्या है ब्लू माइक्रोमून

    31 मई की रात बनेगी यादगार, चांद दिखेगा छोटा और कम चमकीला; जानिए क्या है ब्लू माइक्रोमून


    नई दिल्ली। खगोल विज्ञान और अंतरिक्षीय घटनाओं में रुचि रखने वाले लोगों के लिए 31 मई 2026 की रात एक यादगार अनुभव लेकर आ रही है। आज रात आसमान में एक ऐसा दुर्लभ खगोलीय संयोग देखने को मिलेगा, जिसे वैज्ञानिक और खगोल प्रेमी समान रूप से विशेष मानते हैं। इस अवसर पर ‘ब्लू मून’ और ‘माइक्रोमून’ एक साथ दिखाई देंगे। यही वजह है कि इसे ‘ब्लू माइक्रोमून’ कहा जा रहा है। खास बात यह है कि यह वर्ष 2026 का सबसे छोटा पूर्णिमा का चंद्रमा भी होगा।

    नेशनल अवॉर्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के अनुसार ‘ब्लू मून’ शब्द को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम रहता है। नाम में ब्लू यानी नीला शब्द होने के बावजूद चंद्रमा का रंग नीला नहीं होगा। खगोलीय परिभाषा के अनुसार जब किसी एक अंग्रेजी महीने में दो बार पूर्णिमा पड़ती है, तब दूसरी पूर्णिमा को ‘ब्लू मून’ कहा जाता है। मई 2026 में पहली पूर्णिमा 1 मई को हुई थी, जबकि दूसरी पूर्णिमा 31 मई को पड़ रही है। इसी कारण आज का पूर्ण चंद्रमा ब्लू मून कहलाएगा।

    इस दुर्लभ घटना को और भी खास बनाता है माइक्रोमून का संयोग। दरअसल आज चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी यानी एपोजी के आसपास रहेगा। इस दौरान पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी लगभग 4 लाख 6 हजार किलोमीटर तक पहुंच जाएगी। अधिक दूरी होने के कारण चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में लगभग 5 से 7 प्रतिशत छोटा और करीब 10 प्रतिशत कम चमकीला दिखाई देगा। इसी स्थिति को खगोल विज्ञान में माइक्रोमून कहा जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मंथली ब्लू मून और माइक्रोमून का एक साथ दिखाई देना बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना है। यही कारण है कि दुनियाभर के खगोल प्रेमियों की नजरें आज रात के आसमान पर टिकी हुई हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार आज अधिकमास की ज्येष्ठ पूर्णिमा है और चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा। इसी वजह से इसे ‘स्कार्पियो ब्लू मून’ भी कहा जा रहा है।

    आज रात का एक और आकर्षण वृश्चिक तारामंडल का सबसे चमकीला लाल तारा ‘एंटारेस’ होगा। चंद्रमा इस तारे के बेहद करीब दिखाई देगा, जिससे आसमान का दृश्य और अधिक मनमोहक बन जाएगा। अच्छी बात यह है कि इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए किसी टेलिस्कोप या बाइनाकुलर की आवश्यकता नहीं होगी। साफ मौसम में यह दृश्य पूरी रात सामान्य आंखों से देखा जा सकेगा।

    खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार ब्लू मून की अगली प्रमुख घटनाएं 20 मई 2027 को सीजनल ब्लू मून, 31 दिसंबर 2028 को पूर्ण चंद्रग्रहण के साथ मंथली ब्लू मून और 24 अगस्त 2029 को सीजनल ब्लू मून के रूप में देखने को मिलेंगी। ऐसे में 31 मई 2026 की यह रात खगोल प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। आसमान में सजा यह दुर्लभ महासंयोग विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत मेल का शानदार उदाहरण बनेगा।