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  • एशियन पैरा गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 114 पदक जीतकर तोड़ा अपना पुराना रिकॉर्ड, खाते में आए 30 गोल्ड

    एशियन पैरा गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 114 पदक जीतकर तोड़ा अपना पुराना रिकॉर्ड, खाते में आए 30 गोल्ड


    नई दिल्ली ।
    एशियन पैरा गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नया इतिहास रच दिया है। भारतीय दल ने प्रतियोगिता में कुल 114 पदक जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। इन पदकों में 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य शामिल हैं। इसके साथ ही भारत ने 2023 में हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में जीते गए 108 पदकों के अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन शुक्रवार को भारतीय खिलाड़ियों ने नौ स्वर्ण पदक अपने नाम किए और देश के कुल पदकों की संख्या को नई ऊंचाई तक पहुंचा दिया।

    इस बार भारत ने 168 खिलाड़ियों का दल प्रतियोगिता में उतारा था, जो 2023 में भेजे गए दल के आकार का लगभग आधा था। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने पिछले प्रदर्शन से बेहतर परिणाम हासिल किए। प्रतियोगिता के दौरान एथलेटिक्स, बैडमिंटन, तीरंदाजी और निशानेबाजी में खिलाड़ियों ने पदक जीतकर भारत की स्थिति मजबूत की। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर था। शनिवार को कुछ अन्य स्पर्धाओं के फाइनल होने थे, जिनमें भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी नहीं थी। ऐसे में अंतिम पदक तालिका में स्थान बदलने की संभावना बनी हुई थी।

    एथलेटिक्स में भारत को मिले सबसे ज्यादा पदक

    भारतीय दल की कुल पदक संख्या बढ़ाने में एथलेटिक्स की सबसे बड़ी भूमिका रही। इस खेल में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 65 पदक जीते, जो 2023 के एशियन पैरा गेम्स की तुलना में 12 अधिक थे। एथलेटिक्स में मिले इन पदकों ने भारत के अभियान को मजबूती दी। इसके अलावा बैडमिंटन खिलाड़ियों और निशानेबाज मोना अग्रवाल ने भी अपने प्रदर्शन से पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    बैडमिंटन में नितेश और नवीन ने जीते स्वर्ण
    बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों ने तीन स्वर्ण पदक हासिल किए। पेरिस पैरालंपिक चैंपियन नितेश कुमार ने पुरुष एकल एसएल3 वर्ग के फाइनल में हमवतन प्रमोद भगत को हराकर स्वर्ण पदक जीता। नितेश ने यह मुकाबला 21-18, 21-16 से अपने नाम किया। प्रमोद भगत टोक्यो पैरालंपिक के स्वर्ण पदक विजेता हैं। नितेश ने मिश्रित युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में थुलासिमथी मुरुगेसन के साथ मिलकर रजत पदक भी जीता।

    पहली बार एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा ले रहे नवीन शिवकुमार ने पुरुष एकल एसएल4 वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। फाइनल में उन्होंने इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान को 21-9, 21-17 से हराया। नवीन का यह प्रदर्शन भारतीय बैडमिंटन दल के लिए एक बड़ी उपलब्धि रहा।

    थुलासिमथी मुरुगेसन ने जीते तीन पदक

    24 वर्षीय थुलासिमथी मुरुगेसन ने प्रतियोगिता में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए एक स्वर्ण और दो रजत पदक हासिल किए। महिला युगल एसएल3-एसयू5 वर्ग में उन्होंने मानसी जोशी के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीता। भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन की यांग क्यूशिया और शियाओ जूजियान को 21-16, 21-13 से पराजित किया।

    थुलासिमथी ने महिला एकल एसयू5 वर्ग में रजत पदक भी जीता। फाइनल में उन्हें चीन की यांग क्यूशिया के खिलाफ 18-21, 11-21 से हार का सामना करना पड़ा। मिश्रित युगल में नितेश कुमार के साथ जीते रजत पदक के साथ उनका अभियान तीन पदकों पर समाप्त हुआ।

    भारतीय खिलाड़ियों के इस सामूहिक प्रदर्शन ने एशियन पैरा गेम्स में देश के लिए नया मानक स्थापित किया। 114 पदकों की उपलब्धि ने 2023 के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारत के पैरा खेलों में बढ़ते प्रदर्शन को रेखांकित किया।

  • एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, कबड्डी में दो गोल्ड समेत एक दिन में जीते 7 पदक

    एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, कबड्डी में दो गोल्ड समेत एक दिन में जीते 7 पदक


    नई दिल्ली । एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। 26 सितंबर का दिन भारत के लिए खास रहा, जब खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल सात पदक अपने नाम किए। इनमें दो स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य पदक शामिल रहे। इस प्रदर्शन के साथ भारत की कुल पदक संख्या बढ़कर 30 हो गई। शनिवार का सबसे बड़ा आकर्षण कबड्डी रहा, जहां भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

    पुरुष कबड्डी टीम ने फाइनल में ईरान को 40-34 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मुकाबला शुरुआत से ही कड़ा रहा और ईरानी टीम ने भारतीय खिलाड़ियों को लगातार चुनौती दी। हालांकि, निर्णायक समय में भारतीय टीम ने बेहतर खेल दिखाया और मुकाबले को अपने पक्ष में कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने एशियाई खेलों में एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    महिला कबड्डी टीम ने भी फाइनल में ईरान को 37-34 से मात दी। भारतीय महिलाओं ने पूरे मुकाबले में संयम बनाए रखा और करीबी मुकाबले में जीत हासिल कर अपना खिताब बरकरार रखा। महिला टीम की इस सफलता से भारत को दिन का दूसरा स्वर्ण पदक मिला।

    एथलेटिक्स में तेजिंदरपाल सिंह तूर ने शॉटपुट में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। उनके प्रदर्शन से भारत को एथलेटिक्स में महत्वपूर्ण पदक मिला। पुरुषों की मैराथन में सावन बारवाल ने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए रजत पदक हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि लंबी दूरी की दौड़ में भारत के लिए महत्वपूर्ण रही।

    शूटिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम स्पर्धा में तिलोत्तमा सेन, विदर्सा के. विनोद और आशी चौकसी की तिकड़ी ने रजत पदक जीता। भारतीय टीम ने कुल 1,763 अंक हासिल किए और स्वर्ण जीतने वाली चीन की टीम से 10 अंक पीछे रही। चीन ने 1,773 अंक बनाए।

    400 मीटर दौड़ में प्राची चौधरी ने 53.21 सेकंड का समय निकालकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और कांस्य पदक जीता। उन्होंने फाइनल में बेहतर रणनीति के साथ दौड़ पूरी की और कई ऊंची रैंकिंग वाली प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए पोडियम पर जगह बनाई।

    स्क्वैश में जोशना चिनप्पा और वेलवन सेंथिलकुमार की भारतीय जोड़ी ने मिश्रित युगल सेमीफाइनल में हांगकांग की ली का यी और तांग मिंग होंग की जोड़ी को कड़ी चुनौती दी। भारतीय जोड़ी को 1-2 से हार मिली, लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण उन्होंने कांस्य पदक पक्का कर लिया।

    हॉकी में भी भारतीय पुरुष टीम ने जापान को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। अभिषेक ने शुरुआती दौर में गोल कर भारत को बढ़त दिलाई, जबकि कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर टीम की जीत सुनिश्चित की। इस तरह 26 सितंबर को कबड्डी के दो स्वर्ण समेत सात पदकों के साथ भारत की पदक तालिका और मजबूत हुई।

  • एशियन गेम्स में पदकों का महामुकाबला: एथलेटिक्स से शूटिंग तक इन 5 खेलों से भारत को बड़ी उम्मीदें

    एशियन गेम्स में पदकों का महामुकाबला: एथलेटिक्स से शूटिंग तक इन 5 खेलों से भारत को बड़ी उम्मीदें


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 की शुरुआत 19 सितंबर से जापान के आइची नागोया में होने जा रही है। भारत ने इस बार अपने 503 खिलाड़ियों का दल तैयार किया है जो 35 खेलों में देश का प्रतिनिधित्व करेगा। पिछले एशियन गेम्स में भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और इस बार भी कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों से पदक जीतने की उम्मीद जताई जा रही है। इनमें एथलेटिक्स निशानेबाजी कुश्ती मुक्केबाजी और क्रिकेट प्रमुख हैं।

    एथलेटिक्स एशियन गेम्स में भारत के लिए लंबे समय से पदक दिलाने वाले प्रमुख खेलों में शामिल रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत ने एशियन गेम्स के 19 संस्करणों में एथलेटिक्स से कुल 283 पदक जीते हैं। इनमें 85 स्वर्ण 102 रजत और 96 कांस्य पदक शामिल हैं। इस बार नीरज चोपड़ा की गैरमौजूदगी के बावजूद भारतीय दल में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन पर नजर रहेगी। मुरली श्रीशंकर गुलवीर सिंह अविनाश साबले तजिंदरपाल सिंह पारुल चौधरी राजेश रमेश और रोहित यादव से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।

    निशानेबाजी भी भारत के लिए अहम खेल रहेगा। एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय निशानेबाजों ने अब तक 80 पदक हासिल किए हैं जिनमें 16 स्वर्ण 30 रजत और 34 कांस्य पदक शामिल हैं। पिछले एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाजों ने 22 पदक जीते थे। इस बार मनु भाकर के साथ ईशा सिंह ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर आशी चौकसे और सुरुचि जैसे खिलाड़ियों पर भी नजर रहेगी।

    कुश्ती में भी भारतीय पहलवान पदक के लिए जोर लगाएंगे। एशियन गेम्स में भारत ने इस खेल में अब तक 65 पदक जीते हैं। इनमें 11 स्वर्ण 15 रजत और 39 कांस्य पदक शामिल हैं। अमन सहरावत अंतिम पंघाल दीपक पूनिया मनीषा और सुजीत कलकल भारतीय चुनौती को मजबूत करने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुश्ती को शामिल नहीं किए जाने के बाद भारतीय पहलवानों के लिए एशियन गेम्स एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच होगा।

    मुक्केबाजी में भी भारत की उम्मीदें मजबूत हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन के बाद एशियन गेम्स को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। महिला वर्ग में साक्षी चौधरी प्रीति पवार और लवलीना बोरगोहेन पर नजर होगी। पुरुष वर्ग में जादुमणि सिंह सचिन सिवाच अंकुश और नरेंद्र बेरवाल भारतीय चुनौती पेश करेंगे।

    इस बार क्रिकेट भी एशियन गेम्स का हिस्सा है और भारत की पुरुष तथा महिला टीमें इसमें हिस्सा लेंगी। पिछले एशियन गेम्स में दोनों भारतीय टीमों ने स्वर्ण पदक जीता था। महिला टीम 18 सितंबर को अपना पहला मैच खेलेगी जबकि पुरुष टीम 28 सितंबर से अभियान शुरू करेगी। ऐसे में एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन इन प्रमुख खेलों में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खास तौर पर निर्भर रहेगा।

  • आखिरी दिन बदली पदक तालिका, जानिए भारत ने कितने पदक जीतकर आखिर कौन-सा स्थान अपने नाम किया

    आखिरी दिन बदली पदक तालिका, जानिए भारत ने कितने पदक जीतकर आखिर कौन-सा स्थान अपने नाम किया

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय खेल पटल पर भारतीय एथलीटों ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और उत्कृष्ट खेल भावना का लोहा मनवाया है। ग्लास्गो में 11 दिनों तक चले वैश्विक खेल आयोजन के समापन के साथ ही पदक तालिका की अंतिम तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। मुख्य प्रतियोगिताओं और पारंपरिक विषयों की अनुपस्थिति के बावजूद भारतीय दल ने 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

    इस बार प्रतियोगिता का दायरा कुछ सीमित रखा गया था, जिसके तहत वे खेल शामिल नहीं थे जिनमें भारत आमतौर पर सर्वाधिक पदक जीतता रहा है। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाया। भारत के 38 खिलाड़ियों ने सामूहिक प्रयासों के बल पर 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक देश की झोली में डाले, जो विपरीत परिस्थितियों में भी खिलाड़ियों की मानसिक सुदृढ़ता को दर्शाता है।

    वैश्विक पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर शीर्ष स्थान हासिल करते हुए अपनी सर्वोच्चता सिद्ध की। ऑस्ट्रेलियाई दल ने 70 स्वर्ण, 45 रजत और 56 कांस्य सहित कुल 171 पदकों पर अपना कब्जा जमाया। वहीं 29 स्वर्ण के साथ कुल 110 पदक जीतकर इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रहा, जबकि कनाडा ने 19 स्वर्ण और कुल 62 पदकों के साथ तालिका में तीसरा स्थान हासिल किया।

    मेजबान देश और भारत के बीच अंतिम रैंकिंग को लेकर बेहद रोचक स्थिति देखने को मिली। भारत और स्कॉटलैंड दोनों ही देशों ने कुल 39-39 पदक अपने नाम किए और दोनों के पास 13-13 स्वर्ण पदक भी थे। हालांकि भारत द्वारा जीते गए 17 रजत पदकों की संख्या स्कॉटलैंड के 9 रजत पदकों से अधिक थी, जिसके आधार पर भारत को तालिका में चौथा और मेजबान स्कॉटलैंड को पांचवां स्थान प्रदान किया गया।

    भारतीय अभियान की सफलता में मुक्केबाजी प्रतियोगिता का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा। मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सात स्वर्ण और तीन रजत सहित कुल 10 पदक हासिल किए। इसके अतिरिक्त भारोत्तोलन, एथलेटिक्स, जूडो और पैरा खेल स्पर्धाओं में भी एथलीटों ने अपनी छाप छोड़ी। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए युवा खिलाड़ियों के योगदान ने राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं के विस्तार को रेखांकित किया है।

    निशानेबाजी, बैडमिंटन, कुश्ती, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेलों को इस बार आयोजन से बाहर रखा गया था। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये खेल प्रतियोगिता का हिस्सा होते, तो भारत की पदक तालिका और अधिक भव्य हो सकती थी। इसके बावजूद उपलब्ध स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारतीय खेल प्रणाली अब बहुआयामी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

    प्रतियोगिता के दौरान कुछ प्रशासनिक और नियम संबंधी चुनौतियां भी सामने आईं, जब जूडो वर्ग में एक एथलीट को प्रक्रियात्मक चूक के कारण अंतिम समय में प्रतिस्पर्धा से बाहर होना पड़ा। इस प्रकार के घटनाक्रमों के बावजूद भारतीय दल ने अपने ध्यान को केंद्रित रखा और अंतिम दिन तक पदकों की दौड़ में बने रहकर देश का गौरव बढ़ाया।

    ग्लास्गो में मिली इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब पूरे खेल जगत की निगाहें 2030 में आयोजित होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों पर टिक गई हैं। भारत के अहमदाबाद शहर में इन खेलों का आयोजन प्रस्तावित है, जिसे लेकर अभी से रणनीतिक तैयारियां और ढांचागत विकास की योजनाएं तैयार की जाने लगी हैं।

  • बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर

    बॉक्सिंग में गोल्डन पंच, एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन… भारत ने 16 मेडल जीतकर कॉमनवेल्थ में बदली तस्वीर


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार दिनों में शामिल हो गया। भारतीय खिलाड़ियों ने एक ही दिन में 16 पदक जीतकर न केवल देश का गौरव बढ़ाया बल्कि पदक तालिका में भी लंबी छलांग लगाते हुए चौथा स्थान हासिल कर लिया। मुक्केबाजी, एथलेटिक्स और पैरा स्पर्धाओं में मिले शानदार परिणामों ने यह साबित कर दिया कि भारत अब कॉमनवेल्थ खेलों में एक मजबूत खेल शक्ति बनकर उभर रहा है।

    भारत ने 10वें दिन के बाद कुल 39 पदक अपने नाम कर लिए हैं। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय दल ने पदक तालिका में छह स्थान की छलांग लगाई और चौथे पायदान पर पहुंच गया। मेजबान स्कॉटलैंड को पीछे छोड़ते हुए भारत ने शीर्ष चार देशों में अपनी जगह मजबूत कर ली है।

    पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया का दबदबा लगातार कायम है। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने अब तक 61 स्वर्ण, 38 रजत और 50 कांस्य सहित कुल 149 पदक जीतकर पहला स्थान बरकरार रखा है। इंग्लैंड 99 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है, जबकि कनाडा 57 पदकों के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत के चौथे स्थान पर पहुंचने के बाद स्कॉटलैंड पांचवें स्थान पर खिसक गया है। नाइजीरिया, वेल्स और न्यूजीलैंड क्रमशः छठे, सातवें और आठवें स्थान पर बने हुए हैं।

    भारतीय सफलता की सबसे बड़ी कहानी मुक्केबाजी से निकली, जहां खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें सात स्वर्ण पदक शामिल रहे। पुरुष वर्ग में अंकुश पंघाल और सचिन सिवाच ने स्वर्ण जीतकर देश का मान बढ़ाया। महिला वर्ग में जैस्मिन लैम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति चौधरी और प्रीति ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाजी का दबदबा साबित किया। वहीं जदुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बेरवाल ने रजत पदक जीतकर भारत के पदकों की संख्या बढ़ाई।

    एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। ट्रिपल जंप में प्रवीण चित्रावेल ने रजत पदक हासिल किया, जबकि सेल्वा प्रभु थिरुमारन ने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। पैरा एथलेटिक्स की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में सोमन राणा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। भारतीय सेना के इस पैरा खिलाड़ी ने अपने संघर्ष और मेहनत से देश को गौरवान्वित किया। इसी स्पर्धा में शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर भारत की सफलता में अहम योगदान दिया।

    भारत के खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन केवल पदकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने आने वाले बड़े टूर्नामेंटों के लिए भी सकारात्मक संदेश दिया है। मुक्केबाजी में लगातार स्वर्ण पदकों की बरसात, एथलेटिक्स में नए रिकॉर्ड और पैरा खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन यह संकेत देता है कि भारतीय खेलों का भविष्य पहले से कहीं अधिक मजबूत नजर आ रहा है।

    अब भारतीय दल की नजर बाकी प्रतियोगिताओं पर है, जहां पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है। यदि खिलाड़ियों ने यही लय बरकरार रखी तो भारत पदक तालिका में और ऊपर पहुंच सकता है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का यह ऐतिहासिक दिन भारतीय खेलों के स्वर्णिम अध्याय के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

  • गुलवीर की ऐतिहासिक दौड़ पर प्रधानमंत्री का सलाम, बॉक्सिंग और जूडो के पदक विजेताओं को भी दी बधाई

    गुलवीर की ऐतिहासिक दौड़ पर प्रधानमंत्री का सलाम, बॉक्सिंग और जूडो के पदक विजेताओं को भी दी बधाई


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का 10वां दिन भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। भारत ने एक ही दिन में सात स्वर्ण सहित कुल 16 पदक जीतकर अपनी खेल प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन किया। इस शानदार सफलता के बीच सबसे अधिक चर्चा लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह की रही, जिन्होंने पुरुषों की 10000 मीटर स्पर्धा में रजत और 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से बधाई देते हुए इसे भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने कहा कि गुलवीर एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स की दो स्पर्धाओं में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। साथ ही वह पुरुषों की 5000 मीटर दौड़ में भारत के लिए कॉमनवेल्थ पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट भी बने हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं बल्कि पूरे भारतीय एथलेटिक्स के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

    गुलवीर सिंह के शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलीट अब विश्व स्तर की लंबी दूरी की प्रतियोगिताओं में भी मजबूती से अपनी पहचान बना रहे हैं। लगातार दो अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतना उनकी फिटनेस, धैर्य, रणनीति और मानसिक मजबूती का प्रमाण है। खेल विशेषज्ञ भी इसे भारतीय ट्रैक एंड फील्ड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने केवल एथलेटिक्स ही नहीं बल्कि भारतीय मुक्केबाजों के शानदार प्रदर्शन की भी सराहना की। पुरुषों की 90 प्लस किलोग्राम बॉक्सिंग स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले नरेंद्र बेरवाल को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट में उनके साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प ने सभी को प्रभावित किया। उन्होंने विश्वास जताया कि नरेंद्र भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

    पुरुषों की 80 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाले अंकुश पंघाल की तारीफ करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उनकी ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास शानदार रहा। उन्होंने कहा कि अंकुश की सफलता आने वाले समय में देश के हजारों युवा मुक्केबाजों को प्रेरित करेगी और भारतीय बॉक्सिंग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    प्रधानमंत्री ने महिलाओं की 63 किलोग्राम जूडो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली उन्नति शर्मा को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उन्नति का समर्पण, अनुशासन और संघर्ष साफ दिखाई दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि वह भविष्य में भी इसी तरह लगातार बेहतर प्रदर्शन कर भारत को गौरवान्वित करती रहेंगी।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि देश अब केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है बल्कि एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, जूडो और अन्य स्पर्धाओं में भी लगातार अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। खिलाड़ियों की मेहनत, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था और सरकार व खेल संस्थाओं के सहयोग का असर अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर साफ दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से खिलाड़ियों को मिली बधाई उनके मनोबल को और मजबूत करेगी। अब भारतीय खिलाड़ियों की नजरें आगामी एशियाई खेलों और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं पर हैं, जहां वे इसी शानदार प्रदर्शन को दोहराकर देश के लिए और अधिक पदक जीतने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर का ऐतिहासिक कारनामा, डेकाथलॉन में भारत को मिला पहला पदक


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के स्टार एथलीट तेजस्विन शंकर ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसने भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दिला दी है। पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7976 अंक हासिल कर उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया और राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में इस कठिन स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि डेकाथलॉन को ट्रैक एंड फील्ड की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिताओं में गिना जाता है, जिसमें खिलाड़ी की ताकत, गति, तकनीक, सहनशक्ति और मानसिक मजबूती सभी की एक साथ परीक्षा होती है।

    इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक ग्रेनाडा के लिंडन विक्टर ने 8096 अंकों के साथ जीता, जबकि कनाडा के अनुभवी एथलीट डेमियन वार्नर 8036 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तेजस्विन शंकर ने दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और भारत के लिए ऐतिहासिक कांस्य पदक सुनिश्चित किया।

    तेजस्विन की शुरुआत 100 मीटर दौड़ में सातवें स्थान से हुई थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की। लंबी कूद में दूसरे स्थान पर रहते हुए उन्होंने अंकतालिका में सुधार किया। हाई जंप में 2.15 मीटर की शानदार छलांग लगाकर पहला स्थान हासिल किया और कुल रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। पहले दिन के अंत तक उन्होंने खुद को पदक की दौड़ में मजबूती से बनाए रखा।

    दूसरे दिन भी तेजस्विन ने दमदार प्रदर्शन जारी रखा। 110 मीटर बाधा दौड़ और डिस्कस थ्रो में उन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया। हालांकि पोल वॉल्ट और भाला फेंक में उन्हें उम्मीद के मुताबिक अंक नहीं मिले, जिससे वह तीसरे स्थान पर खिसक गए। इसके बावजूद अंतिम इवेंट 1500 मीटर दौड़ में उन्होंने संयम बनाए रखा और कुल 7976 अंक के साथ कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।

    डेकाथलॉन को एथलेटिक्स की सबसे कठिन स्पर्धाओं में से एक माना जाता है। यह प्रतियोगिता दो दिनों तक चलती है और इसमें कुल 10 अलग-अलग इवेंट शामिल होते हैं। पहले दिन खिलाड़ियों को 100 मीटर दौड़, लंबी कूद, शॉटपुट, हाई जंप और 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लेना होता है। दूसरे दिन 110 मीटर बाधा दौड़, डिस्कस थ्रो, पोल वॉल्ट, भाला फेंक और 1500 मीटर दौड़ आयोजित की जाती है। हर स्पर्धा में प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाते हैं और अंत में सभी 10 इवेंट्स के अंकों को जोड़कर अंतिम परिणाम तय किया जाता है।

    समय आधारित प्रतियोगिताओं जैसे 100 मीटर, 400 मीटर और 1500 मीटर में कम समय लेने वाले खिलाड़ी को अधिक अंक मिलते हैं। वहीं लंबी कूद, हाई जंप, पोल वॉल्ट, शॉटपुट, डिस्कस और भाला फेंक जैसी फील्ड स्पर्धाओं में जितनी अधिक दूरी या ऊंचाई हासिल होती है, उतने अधिक अंक दिए जाते हैं। इसके लिए विश्व एथलेटिक्स द्वारा निर्धारित आधिकारिक स्कोरिंग प्रणाली लागू होती है।

    तेजस्विन शंकर का यह कांस्य पदक केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए मील का पत्थर है। लगातार दो दिनों तक दस अलग-अलग स्पर्धाओं में उच्च स्तर का प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में इस कठिन प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक जीतकर तेजस्विन ने साबित कर दिया कि भारतीय खिलाड़ी अब बहु-इवेंट एथलेटिक्स में भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उनकी यह ऐतिहासिक सफलता आने वाली पीढ़ी के एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स के भविष्य को नई दिशा देगी।

  • ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, आठवें दिन दो पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान।

    ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, आठवें दिन दो पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान।

    नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेल 2026 के आठवें दिन भारतीय एथलीटों ने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में दो महत्वपूर्ण पदक डाले। ग्लास्गो में चल रहे इन खेलों में भारत को पुरुषों की भारोत्तोलन स्पर्धा में एक रजत और महिलाओं की डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में एक कांस्य पदक हासिल हुआ। इसके साथ ही एथलेटिक्स के कई अन्य आयोजनों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी और फाइनल दौर में प्रवेश कर आगामी दिनों में और अधिक पदकों की उम्मीदों को जीवंत कर दिया है।

    भारोत्तोलन के मैदान से भारत के लिए सबसे बड़ी सफलता पुरुषों के 110+ किलोग्राम भार वर्ग में आई, जहां लवप्रीत सिंह ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया। लवप्रीत ने स्नैच श्रेणी में 176 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क श्रेणी में 212 किलोग्राम का वजन उठाते हुए कुल 388 किलोग्राम भार उठाया और रजत पदक अपने नाम किया। वह बेहद कड़े मुकाबले में महज एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए। वहीं, महिला वर्ग के 86+ किलोग्राम भार वर्ग में मार्टिना देवी मेबाम कुल 245 किलोग्राम भार उठाकर पांचवें स्थान पर रहीं।

    दिन की दूसरी बड़ी उपलब्धि महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में मिली, जहां अनुभवी एथलीट सीमा ने भारत को कांस्य पदक दिलाया। सीमा ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 58.65 मीटर दूर थ्रो फेंककर पोडियम पर तीसरा स्थान पक्का किया। इसी स्पर्धा में भारत की एक अन्य खिलाड़ी निधि रानी ने भी शानदार प्रदर्शन किया और 57.10 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहीं। एथलेटिक्स में भारत का यह मिला-जुला प्रदर्शन वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती धाक को प्रदर्शित करता है।

    एथलेटिक्स के अन्य ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में नीरज चोपड़ा, रोहित यादव और यशवीर सिंह तीनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शीर्ष-12 में जगह बनाई और फाइनल में प्रवेश किया। इसके अतिरिक्त, पुरुषों की त्रिकूद स्पर्धा में प्रवीण चित्रावले और सेल्वा प्रभु ने क्वालिफाइंग दौर में क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान हासिल कर फाइनल का टिकट पक्का किया, जबकि डेकाथलॉन में तेजस्विन शंकर ने हाई जंप और लॉन्ग जंप में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए बेहतरीन अंक बटोरे।

    हालांकि, कुछ स्पर्धाओं में भारत को निराशा का सामना भी करना पड़ा। पुरुषों की 200 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल में अनिमेष कुजुर और 400 मीटर दौड़ में विशाल टीके फाइनल में जगह बनाने से चूक गए। गोला फेंक में तजिंदर पाल सिंह तूर पांचवें स्थान पर रहे। दूसरी ओर, लॉन बॉल्स में पुरुषों की पेयर्स टीम ने जीत दर्ज की, जबकि ट्रैक साइकिलिंग में भारतीय टीम पदक दौर तक नहीं पहुंच सकी। कुल मिलाकर आठवां दिन भारत के लिए पदकों और नए अवसरों से भरा रहा।

  • CWG 2026: 10,000 मीटर में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की शुभकामनाएं

    CWG 2026: 10,000 मीटर में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रतियोगिता के छठे दिन भारत के स्टार लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह इस स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए देश का गौरव बढ़ाने वाला खिलाड़ी बताया।

    राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में कहा गया कि ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की 10,000 मीटर स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर गुलवीर सिंह ने भारत के लिए इतिहास रच दिया है। राष्ट्रपति ने कहा कि पूरे देश को उनकी इस उपलब्धि पर गर्व है और भविष्य में भी वे इसी तरह देश के लिए नई सफलताएं हासिल करें, यही शुभकामना है।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गुलवीर सिंह को बधाई देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के सपूत और भारतीय सेना के नायब सूबेदार ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह उपलब्धि कड़ी मेहनत, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

    ग्लासगो के स्कॉट्सटाउन स्टेडियम में आयोजित फाइनल मुकाबले में गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर की दौड़ 27 मिनट 49.78 सेकंड में पूरी कर रजत पदक अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने 27 मिनट 48.93 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि आइल ऑफ मैन के डेविड मुलार्की 27 मिनट 50.28 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक हासिल करने में सफल रहे।

    उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिरसा गांव में 1 जून 1998 को जन्मे गुलवीर सिंह भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। उनका एथलेटिक्स सफर गांव की पगडंडियों और खेतों में दौड़ लगाने से शुरू हुआ था, जब वे सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे थे। वर्ष 2018 में भारतीय सेना की ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में शामिल होने के बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ में लगातार शानदार प्रदर्शन किया और देश के शीर्ष धावकों में अपनी पहचान बनाई।

    गुलवीर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान 2023 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5,000 मीटर दौड़ का कांस्य पदक जीतकर बनाई। इसके बाद 2022 एशियाई खेलों में 10,000 मीटर स्पर्धा में भी कांस्य पदक अपने नाम किया। वर्ष 2025 में दक्षिण कोरिया में आयोजित एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 5,000 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर एशिया के शीर्ष लंबी दूरी के धावकों में अपनी मजबूत जगह बनाई।

    अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिला यह ऐतिहासिक रजत पदक गुलवीर सिंह के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। उनकी इस सफलता ने न केवल भारतीय एथलेटिक्स को नई पहचान दी है, बल्कि देश के युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक नई प्रेरणा प्रस्तुत की है।

  • ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं

    ग्लासगो में भारत का दमदार प्रदर्शन, गुलवीर ने रचा इतिहास, हरजिंदर ने जीता सिल्वर; अमित शाह ने दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में इतिहास रचने वाले गुलवीर सिंह और महिला वेटलिफ्टिंग के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर कौर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन की सराहना की है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भारत के खेल इतिहास में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गुलवीर सिंह को शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर दौड़ में भारत के लिए पहला पदक जीतना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि गुलवीर की यह सफलता देश के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगी और आने वाले वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

    गुलवीर सिंह ने ग्लासगो में बारिश के बीच बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शानदार दौड़ लगाई। राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी भारतीय धावक पूरे मुकाबले में शीर्ष धावकों के साथ बने रहे और अंतिम लैप में जबरदस्त गति दिखाते हुए 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स की 10,000 मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए। इससे पहले उनके नाम एशियन गेम्स का कांस्य पदक और एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के दो स्वर्ण पदक भी दर्ज हैं।

    वहीं महिला वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर कौर ने भी भारत का गौरव बढ़ाया। उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग में कुल 227 किलोग्राम भार उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। स्नैच राउंड में हरजिंदर ने 101 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 126 किलोग्राम वजन उठाते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक कनाडा की शार्लेट सिमोन्यू ने 240 किलोग्राम कुल वजन उठाकर जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नया फीबे हेमन ने 218 किलोग्राम के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

    हरजिंदर की उपलब्धि पर अमित शाह ने कहा कि वेटलिफ्टिंग में भारत का पदक जीतने का सिलसिला लगातार जारी है। उन्होंने लिखा कि यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का परिणाम है तथा भविष्य में भी उनसे ऐसे ही उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग हमेशा से भारत के सबसे मजबूत खेलों में शामिल रही है और इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों ने इस परंपरा को कायम रखा है। दूसरी ओर एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह का ऐतिहासिक पदक यह संकेत देता है कि अब भारत लंबी दूरी की दौड़ जैसी चुनौतीपूर्ण स्पर्धाओं में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

    गुलवीर सिंह और हरजिंदर कौर की इन उपलब्धियों ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के अभियान को नई मजबूती दी है। दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से देशवासियों में उत्साह है और भारतीय दल से आगामी मुकाबलों में भी पदकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।